भारतीय उपग्रह और नाविक: श्रेणियाँ, प्रथम तथ्य और एमसीक्यू
परीक्षा के लिए भारतीय उपग्रहों और नाविक के नोट्स: आर्यभट, एप्पल, इनसैट, जीसैट, आईआरएस, कल्पना-1, एस्ट्रोसैट, आदित्य-एल1 तथा सात उपग्रहों वाली नाविक प्रणाली।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

उपग्रह अंतरिक्ष कार्यक्रम का वह भाग हैं जो अपनी लागत स्वयं चुकाते हैं: वे टेलीफोन और टेलीविज़न ढोते हैं, फसल और बाढ़ की तस्वीर लेते हैं, चक्रवात की चेतावनी देते हैं और अब मछुआरे को बताते हैं कि वह कहाँ है। इस अध्याय से दो तरह के प्रश्न आते हैं: वर्षों के साथ प्रथम तथ्य, और संख्याओं के साथ नाविक प्रणाली। दोनों नीचे संकलित हैं।
भारत के पहले उपग्रह
भारत का पहला उपग्रह आर्यभट 19 अप्रैल 1975 को सोवियत प्रक्षेपण यान से छोड़ा गया और उसे एक्स-किरण खगोलिकी तथा आयनमंडल के अध्ययन के लिए बनाया गया था। 1979 में भास्कर-1 पहला प्रायोगिक भू-अवलोकन उपग्रह बना। 1980 में रोहिणी आरएस-1 भारतीय यान एसएलवी-3 से कक्षा में स्थापित पहला उपग्रह बना। एप्पल, यानी एरियन पैसेंजर पेलोड एक्सपेरिमेंट, 1981 में यूरोपीय एरियन रॉकेट से छोड़ा गया और वह भारत का पहला प्रायोगिक संचार उपग्रह था; परीक्षण स्थल पर उसे बैलगाड़ी पर ले जाने की तस्वीर के लिए वह विशेष रूप से याद किया जाता है।
उपग्रहों की श्रेणियाँ
| श्रेणी | उद्देश्य | याद रखने योग्य बात |
|---|---|---|
| इनसैट और जीसैट | संचार और प्रसारण | भूस्थिर कक्षा, नियंत्रण हासन से |
| आईआरएस, रिसोर्ससैट, ओशनसैट | भू-अवलोकन | 1988 का आईआरएस-1ए पहला परिचालनगत दूर संवेदन उपग्रह |
| कार्टोसैट | मानचित्रण | नगर और भू-उपयोग मानचित्रों के लिए उच्च विभेदन चित्र |
| रीसैट | रडार प्रतिबिंबन | बादल के पार और रात में भी देखता है |
| इनसैट-3डी और कल्पना-1 | मौसम विज्ञान | 2002 का कल्पना-1 पहला विशुद्ध मौसम उपग्रह |
| आईआरएनएसएस और एनवीएस | नौवहन | नाविक तारामंडल |
तीन एकल उपग्रह नाम लेकर पूछे जाते हैं। 2004 में छोड़ा गया एडुसैट केवल शिक्षा और कक्षा प्रसारण के लिए बना भारत का पहला उपग्रह था। 2002 का कल्पना-1 अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला की स्मृति में पुनर्नामित हुआ और वह केवल मौसम विज्ञान को समर्पित पहला उपग्रह था। 28 सितंबर 2015 को छोड़ा गया एस्ट्रोसैट भारत की पहली समर्पित बहु-तरंगदैर्ध्य अंतरिक्ष वेधशाला थी, जो एक ही स्रोत को पराबैंगनी, दृश्य और एक्स-किरण बैंड में साथ देख सकती है।
विज्ञान अभियान
चंद्रयान-1 2008 में चंद्रमा पहुँचा और उसके प्रभावक यान ने वहाँ जल अणुओं की पुष्टि में सहायता की। नवंबर 2013 में छोड़ा गया मंगल कक्षित्र अभियान सितंबर 2014 में मंगल की कक्षा में पहुँचा और भारत पहले ही प्रयास में मंगल तक सफल होने वाला पहला देश बना। 2019 में चंद्रयान-2 गया और अगस्त 2023 में चंद्रयान-3 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट उतरा। भारत की पहली सौर वेधशाला आदित्य-एल1 2 सितंबर 2023 को छोड़ी गई और उसे पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर प्रथम लैग्रांज बिंदु के चारों ओर हेलो कक्षा में रखा गया, जहाँ से वह सूर्य को बिना ग्रहण देख सकती है। 1 जनवरी 2024 को छोड़ा गया एक्सपोसैट ब्रह्मांडीय स्रोतों से आने वाली एक्स-किरणों के ध्रुवण का अध्ययन करता है।
नाविक, भारत की अपनी नौवहन प्रणाली
भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली का नाम 2016 में नाविक रखा गया, जो नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन का संक्षेप है। इसे इसलिए बनाया गया कि कोई देश सैन्य और असैन्य नौवहन के लिए दूसरे राष्ट्र की प्रणाली पर निर्भर नहीं रह सकता।
- तारामंडल: सात उपग्रहों की संरचना, तीन भूस्थिर कक्षा में और चार भूमध्य रेखा से झुकी भूतुल्यकालिक कक्षाओं में।
- कवरेज: भारत तथा उसकी सीमा से लगभग 1,500 किलोमीटर आगे तक का क्षेत्र, और इसीलिए यह क्षेत्रीय प्रणाली कहलाती है, वैश्विक नहीं।
- सेवाएँ: सभी उपयोगकर्ताओं के लिए मानक स्थिति निर्धारण सेवा, और अधिकृत उपयोगकर्ताओं के लिए कूटबद्ध प्रतिबंधित सेवा।
- परिशुद्धता: भारतीय भूभाग पर 20 मीटर से बेहतर, और समय की परिशुद्धता 50 नैनोसेकंड से बेहतर।
- संकेत: एल5 और एस बैंड में प्रसारित, जबकि अधिकतर वैश्विक प्रणालियाँ केवल एल बैंड का उपयोग करती हैं।
इस श्रेणी का पहला उपग्रह आईआरएनएसएस-1ए 1 जुलाई 2013 को गया और अप्रैल 2016 में आईआरएनएसएस-1जी ने सातों का समूह पूरा किया, और उसी अवसर पर प्रणाली को नाविक नाम मिला। प्रत्येक आईआरएनएसएस उपग्रह पीएसएलवी-एक्सएल से छोड़ा गया। 2017 में आईआरएनएसएस-1एच तब नष्ट हो गया जब रॉकेट का ऊष्मा कवच अलग नहीं हुआ, और उस कमी को भरने के लिए 2018 में आईआरएनएसएस-1आई छोड़ा गया। दूसरी पीढ़ी की शुरुआत एनवीएस-01 से हुई, जो मई 2023 में जीएसएलवी-एफ12 से गया और जिसमें स्वदेशी रूबिडियम परमाणु घड़ी थी तथा एल1 बैंड में असैन्य संकेत जोड़ा गया, जिससे साधारण फ़ोन और चिप नाविक का उपयोग सरलता से कर सकें। नाविक का उपयोग सड़क और समुद्री नौवहन, वाहन तथा बेड़े की निगरानी, मछुआरों के लिए सुरक्षा चेतावनी, आपदा चेतावनी और परिशुद्ध समय के लिए होता है।
गगन और दुनिया की अन्य प्रणालियाँ
गगन, यानी जीपीएस एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन, इसरो और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की संयुक्त परियोजना है। यह उपग्रह नौवहन का स्थान नहीं लेती, बल्कि उसे सुधारती है और विमानों को उतरने के लिए आवश्यक परिशुद्धता देती है। दुनिया की अन्य प्रणालियाँ जोड़ियों में याद करने योग्य हैं: संयुक्त राज्य अमेरिका की जीपीएस, रूस की ग्लोनास, यूरोपीय संघ की गैलीलियो, चीन की बेइदोउ और जापान की क्यूजेडएसएस, जिनमें क्यूजेडएसएस और नाविक क्षेत्रीय हैं और शेष वैश्विक।
परीक्षा की दृष्टि से
यहाँ अधिकतर अंक प्रथम तथ्यों और पूर्ण रूपों से मिलते हैं। श्रृंखला याद करें: 1975 आर्यभट, 1979 भास्कर-1, 1980 रोहिणी, 1981 एप्पल, 1988 आईआरएस-1ए, और एकल उद्देश्य वाले उपग्रह कल्पना-1, एडुसैट तथा एस्ट्रोसैट अपने वर्षों के साथ। नाविक पर चार पसंदीदा तथ्य हैं: पूर्ण रूप, तीन और चार में बँटे सात उपग्रह, सीमा से लगभग 1,500 किलोमीटर आगे तक कवरेज, और दो सेवाएँ। नाविक को गगन से अलग रखें, जो केवल विमानन के लिए संकेत संवर्धित करती है, और याद रखें कि नाविक क्षेत्रीय है जबकि जीपीएस, ग्लोनास, गैलीलियो और बेइदोउ वैश्विक हैं। आम जाल हैं आर्यभट को भारतीय प्रक्षेपण यान से जोड़ देना, नाविक को वैश्विक प्रणाली कहना, और गगन को भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के स्थान पर भारतीय वायु सेना से जोड़ देना।
महत्वपूर्ण तथ्य
| भारत का पहला उपग्रह | आर्यभट, 19 अप्रैल 1975, सोवियत प्रक्षेपण यान से |
|---|---|
| भारतीय यान से छोड़ा गया पहला उपग्रह | रोहिणी आरएस-1, 18 जुलाई 1980, एसएलवी-3 से |
| पहला प्रायोगिक संचार उपग्रह | एप्पल, 1981, एरियन से |
| पहला परिचालनगत दूर संवेदन उपग्रह | आईआरएस-1ए, 1988 |
| केवल मौसम विज्ञान का पहला उपग्रह | कल्पना-1, 2002, कल्पना चावला के नाम पर |
| शिक्षा के लिए पहला उपग्रह | एडुसैट, 2004 |
| पहली बहु-तरंगदैर्ध्य अंतरिक्ष वेधशाला | एस्ट्रोसैट, 28 सितंबर 2015 |
| पहली सौर वेधशाला | आदित्य-एल1, 2 सितंबर 2023, प्रथम लैग्रांज बिंदु पर |
| नाविक का पूर्ण रूप | नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन; पहले आईआरएनएसएस |
| नाविक का तारामंडल | सात उपग्रह: तीन भूस्थिर, चार झुकी भूतुल्यकालिक कक्षाओं में |
| नाविक का कवरेज | भारत और उसकी सीमा से लगभग 1,500 किमी आगे तक |
| नाविक की सेवाएँ | मानक स्थिति निर्धारण सेवा और कूटबद्ध प्रतिबंधित सेवा |
| नाविक की परिशुद्धता | भारतीय भूभाग पर 20 मीटर से बेहतर |
| नाविक का पहला उपग्रह | आईआरएनएसएस-1ए, 1 जुलाई 2013, पीएसएलवी-एक्सएल से |
| गगन | जीपीएस एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन, इसरो और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की परियोजना |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
भारत का पहला उपग्रह कौन था और वह किस वर्ष छोड़ा गया?
- A.रोहिणी, 1980
- B.आर्यभट, 1975
- C.भास्कर-1, 1979
- D.एप्पल, 1981
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. आर्यभट, 1975
व्याख्या
सही उत्तर B, आर्यभट, 1975 है। इसे 19 अप्रैल 1975 को सोवियत प्रक्षेपण यान से छोड़ा गया, क्योंकि उस समय भारत के पास अपना यान नहीं था, और इसमें एक्स-किरण खगोलिकी, सौर भौतिकी तथा आयनमंडल के प्रयोग थे। इसका नाम प्राचीन भारतीय गणितज्ञ और खगोलशास्त्री के नाम पर रखा गया।
विकल्प A, 1980 का रोहिणी, दूसरा कीर्तिमान रखता है: वह 18 जुलाई 1980 को भारतीय प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 से कक्षा में स्थापित पहला उपग्रह था, और दोनों कीर्तिमान मिला देने वाले अभ्यर्थी इसे चुन लेते हैं। विकल्प C, 1979 का भास्कर-1, पहला प्रायोगिक भू-अवलोकन उपग्रह था। विकल्प D, 1981 का एप्पल, पहला प्रायोगिक संचार उपग्रह था और यूरोपीय एरियन रॉकेट से गया। साफ़ श्रृंखला याद रखें: 1975 पहला उपग्रह, 1979 पहला भू-अवलोकन, 1980 पहला भारतीय प्रक्षेपण, 1981 पहला संचार उपग्रह।
नाविक (NavIC) का पूर्ण रूप क्या है?
- A.नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन
- B.नेशनल वॉयेज एंड इंडियन कम्युनिकेशन
- C.नेविगेशन इंडियन कोऑर्डिनेट्स
- D.नेविगेशनल इंफॉर्मेशन सेंटर
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन
व्याख्या
सही उत्तर A, नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन है। यह नाम 2016 में भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली, आईआरएनएसएस, को तब दिया गया जब तारामंडल का सातवाँ उपग्रह कक्षा में पहुँचा, और नाविक शब्द में मल्लाह या पथप्रदर्शक का अर्थ भी है, इसीलिए वह चुना गया।
विकल्प B, C और D गढ़े हुए विस्तार हैं, जैसे परीक्षक यह देखने के लिए जोड़ते हैं कि अभ्यर्थी ने शब्द पढ़ा है या केवल सुना है। पूर्ण रूप के साथ दो तथ्य चलते हैं: नाविक वह भारतीय प्रणाली है जो इसलिए बनी कि देश दूसरे राष्ट्र के संकेतों पर निर्भर न रहे, और यह क्षेत्रीय प्रणाली है जो पूरी पृथ्वी के बजाय भारत तथा सीमा से लगभग 1,500 किलोमीटर की पट्टी को कवर करती है। आईआरएनएसएस और नाविक को एक ही प्रणाली के पुराने और नए नाम मानें।
नाविक तारामंडल कितने उपग्रहों के साथ बनाया गया था?
- A.चार
- B.सात
- C.नौ
- D.चौबीस
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सात
व्याख्या
सही उत्तर B, सात है। प्रणाली सात उपग्रहों के तारामंडल के रूप में बनाई गई, जिनमें तीन भूस्थिर कक्षा में और चार भूमध्यरेखीय तल से झुकी भूतुल्यकालिक कक्षाओं में हैं; इतनी छोटी संख्या पर्याप्त है क्योंकि सेवा क्षेत्र क्षेत्रीय है, वैश्विक नहीं। अप्रैल 2016 में छोड़े गए आईआरएनएसएस-1जी ने सातों का समूह पूरा किया।
विकल्प A, चार, केवल झुके उपग्रहों की संख्या है और उस अभ्यर्थी के लिए जाल है जिसे बँटवारा याद है पर कुल संख्या नहीं। विकल्प D, चौबीस, जीपीएस जैसी वैश्विक प्रणाली के आकार के लगभग बराबर है, जिसे पूरी पृथ्वी पर फैले उपग्रह चाहिए। विकल्प C, नौ, किसी प्रणाली से मेल नहीं खाता। बँटवारा तीन और चार के रूप में याद रखें, और यह भी कि दूसरी पीढ़ी के एनवीएस उपग्रह पहली पीढ़ी के पुराने होते उपग्रहों की जगह ले रहे हैं।
केवल मौसम विज्ञान को समर्पित भारत का पहला उपग्रह कौन था?
- A.इनसैट-1बी
- B.कल्पना-1
- C.भास्कर-2
- D.ओशनसैट-1
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. कल्पना-1
व्याख्या
सही उत्तर B, कल्पना-1 है। 2002 में मेटसैट के नाम से छोड़ा गया यह केवल मौसम के काम के लिए बना पहला भारतीय उपग्रह था, और 2003 की कोलंबिया दुर्घटना में जान गँवाने वाली भारत में जन्मी अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला की स्मृति में इसका नाम कल्पना-1 रखा गया। इसके उपकरण चक्रवात चेतावनी के लिए बादल, जलवाष्प और समुद्र सतह के तापमान पर नज़र रखते थे।
विकल्प A, 1983 का इनसैट-1बी, मौसम उपकरण ले गया था पर मुख्यतः संचार उपग्रह था, और केवल शब्द इसी भेद को जाँचता है। विकल्प C, भास्कर-2, 1979 और 1981 की आरंभिक प्रायोगिक भू-अवलोकन श्रेणी का था। विकल्प D, 1999 का ओशनसैट-1, समुद्र, उसके रंग और उस पर चलने वाली हवाओं का अध्ययन करता था, इसलिए वह समुद्री उपग्रह है, मौसम का नहीं। इस क्रम के बाद के समर्पित मौसम उपग्रह इनसैट-3डी श्रेणी के हैं।
सितंबर 2015 में छोड़ा गया एस्ट्रोसैट भारत का किस प्रकार का पहला उपग्रह था?
- A.रडार प्रतिबिंबन उपग्रह
- B.समर्पित बहु-तरंगदैर्ध्य अंतरिक्ष वेधशाला
- C.नौवहन उपग्रह
- D.शैक्षिक उपग्रह
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. समर्पित बहु-तरंगदैर्ध्य अंतरिक्ष वेधशाला
व्याख्या
सही उत्तर B, समर्पित बहु-तरंगदैर्ध्य अंतरिक्ष वेधशाला है। एस्ट्रोसैट 28 सितंबर 2015 को पीएसएलवी से छोड़ा गया और उसके उपकरण एक ही ब्रह्मांडीय स्रोत को पराबैंगनी, दृश्य तथा एक्स-किरण बैंड में साथ देखते हैं, बहु-तरंगदैर्ध्य का अर्थ यही है और इसी से यह अभियान अपने आकार की अंतरिक्ष दूरबीनों में विशिष्ट बनता है।
विकल्प A रीसैट श्रेणी का वर्णन करता है, जो रडार से बादल के पार और रात में भी भूमि का चित्र लेती है। विकल्प C नाविक तारामंडल के आईआरएनएसएस और एनवीएस उपग्रहों का वर्णन है। विकल्प D 2004 के एडुसैट का वर्णन है, जो केवल शिक्षा और कक्षा प्रसारण के लिए बना पहला भारतीय उपग्रह था। इसी प्रथम सूची में दो और विज्ञान अभियान आते हैं: 2023 की आदित्य-एल1, पहली सौर वेधशाला, और 2024 का एक्सपोसैट, जो ब्रह्मांडीय एक्स-किरणों के ध्रुवण का अध्ययन करता है।
भारत के सौर अभियान आदित्य-एल1 को किस बिंदु के चारों ओर हेलो कक्षा में स्थापित किया गया है?
- A.द्वितीय लैग्रांज बिंदु, एल2
- B.प्रथम लैग्रांज बिंदु, एल1
- C.सूर्य के चारों ओर ध्रुवीय कक्षा
- D.पृथ्वी के चारों ओर भूस्थिर कक्षा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. प्रथम लैग्रांज बिंदु, एल1
व्याख्या
सही उत्तर B, प्रथम लैग्रांज बिंदु एल1 है, जो सूर्य-पृथ्वी निकाय का वह बिंदु है और सूर्य की दिशा में पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर है। लैग्रांज बिंदु वह स्थान है जहाँ दोनों पिंडों का गुरुत्वाकर्षण और कक्षीय गति संतुलित हो जाते हैं, इसलिए यान वहाँ बहुत कम ईंधन से बना रह सकता है, और एल1 से सूर्य को बिना ग्रहण या अवरोध लगातार देखा जा सकता है। आदित्य-एल1 2 सितंबर 2023 को पीएसएलवी से छोड़ा गया।
विकल्प A, एल2, सूर्य से पृथ्वी के दूसरी ओर है और उसका उपयोग वे दूरबीनें करती हैं जो सूर्य से विपरीत दिशा में देखती हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि यान सूर्य-पृथ्वी निकाय के एक बिंदु की परिक्रमा करता है, सूर्य की नहीं। विकल्प D उसे पृथ्वी की कक्षा में रख देता, जहाँ प्रतिदिन कुछ समय पृथ्वी दृश्य रोक देती, और अभियान को ठीक यही टालना था। जोड़ी याद रखें: सूर्य देखने के लिए एल1, दूरी 15 लाख किलोमीटर।
भारत का पहला परिचालनगत दूर संवेदन उपग्रह कौन था?
- A.भास्कर-1
- B.आईआरएस-1ए
- C.कार्टोसैट-1
- D.रीसैट-1
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. आईआरएस-1ए
व्याख्या
सही उत्तर B, आईआरएस-1ए है, जो 1988 में छोड़ा गया, भारतीय दूर संवेदन श्रेणी का आरंभ किया और वह पहला ऐसा उपग्रह था जिसके आँकड़े फसल आकलन, वन मानचित्रण, जल संसाधन और भू-उपयोग के लिए नियमित रूप से काम में आए, केवल प्रयोग के लिए नहीं।
विकल्प A, 1979 का भास्कर-1, पहला प्रायोगिक भू-अवलोकन उपग्रह था, और प्रायोगिक शब्द ही उसे आईआरएस-1ए से अलग करता है, इसलिए कथन ध्यान से पढ़ें। विकल्प C, 2005 का कार्टोसैट-1, मानचित्रण के लिए उच्च विभेदन चित्र देता था और उसी कार्यक्रम में बहुत बाद आया। विकल्प D, 2012 का रीसैट-1, पहला स्वदेशी रडार प्रतिबिंबन उपग्रह था, जो बादल के पार देख सकता और रात में भी काम कर सकता है। क्रम याद रखें: भास्कर प्रायोगिक, आईआरएस परिचालनगत, कार्टोसैट मानचित्रण, रीसैट रडार।
उपग्रह नौवहन प्रणाली बेइदोउ किस देश की है?
- A.जापान
- B.रूस
- C.चीन
- D.यूरोपीय संघ
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. चीन
व्याख्या
सही उत्तर C, चीन है। बेइदोउ चीन की वैश्विक नौवहन उपग्रह प्रणाली है, जो चरणों में बनी और अब विश्वव्यापी कवरेज देती है, और यह नाम सप्तर्षि मंडल के लिए प्रयुक्त चीनी शब्द है।
विकल्प A, जापान, क्यूजेडएसएस यानी क्वासी-ज़ेनिथ सैटेलाइट सिस्टम चलाता है, जो नाविक की तरह क्षेत्रीय है, वैश्विक नहीं। विकल्प B, रूस, ग्लोनास चलाता है, जो उसी डिज़ाइन की सोवियत प्रणाली का उत्तराधिकारी है। विकल्प D, यूरोपीय संघ, गैलीलियो चलाता है, जो जानबूझकर सैन्य नियंत्रण से बाहर रखी गई असैन्य वैश्विक प्रणाली है। इनमें संयुक्त राज्य अमेरिका की जीपीएस और भारत की नाविक जोड़ दें तो सूची पूरी हो जाती है, जिसमें केवल नाविक और क्यूजेडएसएस क्षेत्रीय हैं। परीक्षक इसे सरल जोड़ी मिलान के रूप में पूछते हैं, इसलिए पाँचों नाम उनके स्वामियों के साथ याद करें।
उपग्रह आधारित संवर्धन प्रणाली गगन इसरो और किस संगठन की संयुक्त परियोजना है?
- A.भारतीय वायु सेना
- B.भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण
- C.भारत मौसम विज्ञान विभाग
- D.पोत परिवहन महानिदेशालय
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण
व्याख्या
सही उत्तर B, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण है। गगन का अर्थ है जीपीएस एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन, और इसे इसरो ने विमानपत्तन प्राधिकरण के साथ मिलकर विकसित किया जिससे भारतीय वायुक्षेत्र में असैन्य विमानों को उतरने और अंतिम अभिगमन के लिए पर्याप्त परिशुद्ध तथा विश्वसनीय स्थिति सूचना मिले। इसके अपने नौवहन उपग्रह नहीं हैं; यह पहले से उपलब्ध संकेतों को सुधारने वाले संशोधन प्रसारित करती है।
विकल्प A, भारतीय वायु सेना, उपग्रह नौवहन का उपयोग करती है पर इस असैन्य विमानन परियोजना की भागीदार नहीं है। विकल्प C, भारत मौसम विज्ञान विभाग, मौसम पर काम करता है और भिन्न प्रकार के उपग्रह आँकड़े उपयोग करता है। विकल्प D, पोत परिवहन महानिदेशालय, व्यापारिक जहाज़रानी देखता है, और समुद्री उपयोगकर्ताओं की सेवा गगन के बजाय नाविक करती है। परीक्षा भवन तक ले जाने योग्य भेद यह है कि नाविक संकेत देती है और गगन केवल उन्हें सुधारती है।
भारत का पहला प्रायोगिक संचार उपग्रह एप्पल 1981 में किस प्रक्षेपण यान से छोड़ा गया था?
- A.भारत के एसएलवी-3 से
- B.सोवियत प्रक्षेपण यान से
- C.यूरोपीय एरियन रॉकेट से
- D.अमेरिकी अंतरिक्ष शटल से
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. यूरोपीय एरियन रॉकेट से
व्याख्या
सही उत्तर C, यूरोपीय एरियन रॉकेट है। उपग्रह का पूरा नाम, एरियन पैसेंजर पेलोड एक्सपेरिमेंट, उत्तर अपने भीतर रखता है, क्योंकि वह 1981 में एरियन के एक प्रक्षेपण में यात्री के रूप में गया जिससे भारत में भूस्थिर संचार उपग्रह बनाने की क्षमता परखी जा सके। तब भारत के पास भूतुल्यकालिक अंतरण कक्षा तक पहुँचने वाला कोई यान नहीं था।
विकल्प A, एसएलवी-3, निचली पृथ्वी कक्षा में केवल लगभग 40 किलोग्राम रख सकता था और एप्पल को उस ऊँचाई तक कभी नहीं ले जा सकता था जो संचार उपग्रह के लिए चाहिए। विकल्प B, सोवियत यान, 1975 में आर्यभट और 1979 में भास्कर ले गया था, इसलिए अनुमान ठीक लगता है पर यहाँ गलत है। विकल्प D, अंतरिक्ष शटल, 1983 में बाद के इनसैट-1बी को ले गया, जो साथ में पूछा जाने वाला अलग तथ्य है। परीक्षण स्थल पर एप्पल की बैलगाड़ी वाली प्रसिद्ध तस्वीर इसी कार्यक्रम की है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नाविक का पूर्ण रूप क्या है?
नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन। यह नाम 2016 में भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली यानी आईआरएनएसएस को तब दिया गया जब तारामंडल का सातवाँ उपग्रह कक्षा में स्थापित हुआ।
नाविक तारामंडल में कितने उपग्रह हैं और किन कक्षाओं में?
इसे सात उपग्रहों के तारामंडल के रूप में बनाया गया है, जिनमें तीन भूस्थिर कक्षा में और चार भूमध्यरेखीय तल से झुकी भूतुल्यकालिक कक्षाओं में हैं। झुके उपग्रह भारतीय क्षेत्र के ऊपर एक आकृति बनाते हैं और ऊँचे अक्षांशों पर कवरेज सुधारते हैं।
नाविक को क्षेत्रीय प्रणाली क्यों कहा जाता है?
क्योंकि इसे पूरी पृथ्वी के बजाय भारत और उसकी सीमा से लगभग 1,500 किलोमीटर आगे तक के क्षेत्र की सेवा के लिए बनाया गया है। जीपीएस, ग्लोनास, गैलीलियो और बेइदोउ वैश्विक प्रणालियाँ हैं; नाविक और जापान की क्यूजेडएसएस क्षेत्रीय हैं।
भारत का पहला उपग्रह कौन था और उसे किसने छोड़ा?
आर्यभट, जो 19 अप्रैल 1975 को कापुस्तिन यार से सोवियत प्रक्षेपण यान द्वारा छोड़ा गया, क्योंकि तब भारत के पास अपना प्रक्षेपण यान नहीं था। इसका नाम प्राचीन भारतीय गणितज्ञ और खगोलशास्त्री के नाम पर रखा गया और इसमें एक्स-किरण खगोलिकी के प्रयोग थे।
नाविक और गगन में क्या अंतर है?
नाविक अपने उपग्रहों वाली नौवहन प्रणाली है, जो स्थिति और समय देती है। गगन संवर्धन प्रणाली है: वह मूल संकेत नहीं देती, बल्कि विद्यमान उपग्रहों के संकेतों को सुधारती है जिससे विमानों को उतरने के लिए आवश्यक परिशुद्धता और विश्वसनीयता मिले। गगन इसरो और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण मिलकर चलाते हैं।
आदित्य-एल1 कहाँ स्थापित है और क्यों?
सूर्य और पृथ्वी के प्रथम लैग्रांज बिंदु के चारों ओर हेलो कक्षा में, जो सूर्य की दिशा में पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर है। वहाँ से यान सूर्य को लगातार देख सकता है, न ग्रहण उसे रोकता है और न पृथ्वी।
स्रोत
- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन: उपग्रह और नौवहन कार्यक्रम — इसरो
- अंतरिक्ष विभाग की वार्षिक रिपोर्ट — अंतरिक्ष विभाग, भारत सरकार
