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GK नोट्सविज्ञान और प्रौद्योगिकीचिकित्सा निदान तकनीक: एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई और अल्ट्रासाउंड

चिकित्सा निदान तकनीक: एक्स-रे, सीटी, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड

चिकित्सा प्रतिबिंबन के परीक्षोपयोगी नोट्स: एक्स-रे, सीटी, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड और पीईटी की कार्यविधि, मात्रक, नोबेल पुरस्कार तथा पीसीपीएनडीटी अधिनियम।

लेखक · प्रकाशित · 5 मिनट

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चिकित्सा निदान तकनीक: एक्स-रे, सीटी, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड — GK24 title card
चिकित्सा निदान तकनीक: एक्स-रे, सीटी, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड — GK24 title card

आधुनिक चिकित्सा जीवित शरीर को खोले बिना उसके भीतर देख लेती है, और ऐसा करने की लगभग हर विधि विद्यालय स्तर के भौतिकी पर टिकी है। एक्स-रे और संगणित टोमोग्राफी उच्च ऊर्जा वाले विद्युत चुंबकीय विकिरण का उपयोग करती हैं, चुंबकीय अनुनाद प्रतिबिंबन हाइड्रोजन नाभिक के चुंबकीय व्यवहार का, और अल्ट्रासाउंड मानव श्रवण सीमा से ऊपर की ध्वनि का। परीक्षक इस अध्याय को पसंद करते हैं क्योंकि एक ही प्रश्न में खोज, नोबेल पुरस्कार, मात्रक और सुरक्षा नियम एक साथ पूछे जा सकते हैं। चारों मूल तकनीकें एक समूह के रूप में याद करनी चाहिए, प्रत्येक के पीछे का भौतिक सिद्धांत, वह क्या सर्वोत्तम दिखाती है और क्या नहीं दिखा सकती।

एक्स-रे और रेडियोग्राफी

विल्हेम कॉनराड रोएंटजेन ने 1895 में वुर्ट्सबर्ग विश्वविद्यालय में एक्स-रे की खोज की और 1901 में दिया गया सर्वप्रथम भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्राप्त किया। एक्स-रे अत्यंत छोटी तरंगदैर्ध्य वाली विद्युत चुंबकीय तरंगें हैं, दृश्य प्रकाश से बहुत छोटी, और ये तब उत्पन्न होती हैं जब तेज़ गति से चलते इलेक्ट्रॉन किसी धातु लक्ष्य से अचानक रोक दिए जाते हैं। आधुनिक एक्स-रे नलिका में कैथोड तंतु इलेक्ट्रॉन छोड़ता है, उच्च वोल्टता उन्हें त्वरित करती है, और टंगस्टन लक्ष्य उनकी ऊर्जा के एक छोटे अंश को एक्स-रे में बदल देता है; शेष ऊष्मा बन जाती है। दो प्रक्रियाएँ साथ चलती हैं: इलेक्ट्रॉनों का अचानक मंदन सतत स्पेक्ट्रम देता है, जिसे अवरोधन विकिरण कहते हैं, और लक्ष्य परमाणुओं के भीतरी कोश के इलेक्ट्रॉन निकलने से तीक्ष्ण अभिलक्षणिक रेखाएँ मिलती हैं। सतत स्पेक्ट्रम की न्यूनतम तरंगदैर्ध्य केवल त्वरक वोल्टता पर निर्भर करती है, अतः वोल्टता दोगुनी करने पर वह कटऑफ तरंगदैर्ध्य आधी हो जाती है।

रेडियोग्राफ एक छाया-चित्र है। भारी परमाणुओं वाला घना ऊतक, जैसे अस्थि का कैल्शियम, अधिक एक्स-रे सोख लेता है और फिल्म कम उद्भासित होती है, इसलिए हड्डियाँ सफेद और कोमल ऊतक तथा वायु काले दिखते हैं। कोमल अंगों को कंट्रास्ट माध्यम से दृश्य बनाया जाता है: बेरियम सल्फेट का घोल आमाशय और आँतों की रूपरेखा दिखाता है, और एंजियोग्राफी में आयोडीन युक्त कंट्रास्ट रक्त वाहिकाओं को भर देता है। मैमोग्राफी में स्तन ऊतक की जाँच के लिए कम ऊर्जा की एक्स-रे काम आती हैं। चूँकि एक्स-रे आयनकारी हैं, मात्रा महत्वपूर्ण है: अवशोषित मात्रा ग्रे में, जैविक रूप से भारित तुल्य मात्रा सीवर्ट में और रेडियोसक्रियता बेकरल में मापी जाती है। भारत में विकिरण संस्थापनाओं का नियमन परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड करता है।

संगणित टोमोग्राफी

साधारण एक्स-रे त्रिआयामी शरीर को एक ही छाया में चपटा कर देती है, इसलिए ऊपर-नीचे की संरचनाएँ एक-दूसरे को ढक लेती हैं। संगणित टोमोग्राफी इसका समाधान इस प्रकार करती है कि रोगी के चारों ओर अनेक कोणों से एक्स-रे माप लिए जाते हैं और संगणक अनुप्रस्थ काट की परतें पुनर्निर्मित करता है; टोमोग्राफी शब्द ही यूनानी में काट या परत से बना है। ब्रिटेन की ईएमआई में कार्यरत गॉडफ्रे हाउंसफील्ड और गणित हल करने वाले एलन कॉर्मैक को संगणक सहायित टोमोग्राफी के विकास के लिए 1979 का चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार संयुक्त रूप से मिला। प्रत्येक सूक्ष्म आयतन का क्षीणन हाउंसफील्ड मात्रक में व्यक्त होता है, जिस पैमाने पर परिभाषा से जल शून्य और वायु ऋण एक हज़ार है, तथा घनी अस्थि एक हज़ार और उससे ऊपर जाती है। सीटी अस्थि-भंग, सिर की चोट, मस्तिष्क में रक्तस्राव, पथरी और वक्ष की जाँच में अद्वितीय है और तेज़ भी है, जो आपात स्थिति में महत्वपूर्ण है। इसकी कमी यह है कि यह आयनकारी विकिरण का उपयोग करती है, और एक साधारण फिल्म से अधिक मात्रा में।

चुंबकीय अनुनाद प्रतिबिंबन

एमआरआई में आयनकारी विकिरण का बिल्कुल प्रयोग नहीं होता। यह नाभिकीय चुंबकीय अनुनाद पर आधारित है, जिसे ठोस पदार्थ में फेलिक्स ब्लोख और एडवर्ड पर्सेल ने खोजा और जिन्हें 1952 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार संयुक्त रूप से मिला। शरीर के जल और वसा में उपस्थित हाइड्रोजन नाभिक छोटे चुंबकों की तरह व्यवहार करते हैं। प्रबल स्थिर चुंबकीय क्षेत्र में रखे जाने पर वे पंक्तिबद्ध हो जाते हैं, एक रेडियो आवृत्ति स्पंद उन्हें उस पंक्ति से हटा देता है, और वापस लौटते समय वे संकेत छोड़ते हैं जिसे प्रवणता कुंडलियाँ स्थान के अनुसार पहचानने में सहायता करती हैं। पॉल लॉटरबर और पीटर मैन्सफील्ड को इस भौतिकी को प्रतिबिंबन में बदलने के लिए 2003 का चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार मिला। क्षेत्र की प्रबलता टेस्ला में मापी जाती है और नैदानिक स्कैनर सामान्यतः डेढ़ या तीन टेस्ला पर चलते हैं, जिसके लिए अतिचालक चुंबक द्रव हीलियम से ठंडा रखा जाता है। एमआरआई सभी विधियों में कोमल ऊतक का सर्वोत्तम विभेद देती है और मस्तिष्क, मेरुरज्जु, संधियों, स्नायुबंधों तथा गाँठों के लिए प्रथम विकल्प है; इसमें कंट्रास्ट के रूप में गैडोलिनियम यौगिक प्रयुक्त होते हैं। क्रियात्मक एमआरआई रक्त की ऑक्सीजन मात्रा में परिवर्तन से मस्तिष्क की सक्रियता का नक्शा बनाती है। प्रबल चुंबक इसकी सीमा भी है: पेसमेकर, कर्णावर्त प्रत्यारोपण या ढीली लोहचुंबकीय धातु वाले रोगियों की जाँच नहीं हो सकती, और जाँच धीमी, शोरभरी तथा महँगी है।

अल्ट्रासाउंड और सोनोग्राफी

अल्ट्रासाउंड बीस किलोहर्ट्ज़ से अधिक आवृत्ति की ध्वनि है, जो मानव श्रवण की ऊपरी सीमा है; चिकित्सा जाँच में सामान्यतः दो से अठारह मेगाहर्ट्ज़ प्रयुक्त होते हैं। जाँच यंत्र की छड़ में दाब-विद्युत क्रिस्टल होता है, जो विद्युत स्पंद को यांत्रिक कंपन में और उलटे क्रम में लौटती प्रतिध्वनियों को विद्युत संकेत में बदल देता है। प्रतिध्वनियाँ वहीं बनती हैं जहाँ ऊतक के ध्वनि गुण बदलते हैं, और मशीन उनके समय तथा प्रबलता को चित्र में बदल देती है। डॉप्लर अल्ट्रासाउंड चलते रक्त से परावर्तित तरंगों की आवृत्ति में परिवर्तन से प्रवाह की गति और दिशा मापता है, और इकोकार्डियोग्राफी इसी सिद्धांत को धड़कते हृदय पर लगाती है। अल्ट्रासाउंड में आयनकारी विकिरण नहीं होता, यह सुवाह्य और सस्ता है, इसलिए गर्भावस्था तथा उदर की मानक जाँच है, पर ध्वनि अस्थि और वायु से ठीक से नहीं गुज़रती, अतः वयस्क मस्तिष्क और फेफड़ों का चित्र यह भली प्रकार नहीं दे पाती। भारत में गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम, 1994 इन मशीनों से भ्रूण का लिंग जानने पर प्रतिबंध लगाता है।

जानने योग्य अन्य निदान विधियाँ

  • पॉज़िट्रॉन उत्सर्जन टोमोग्राफी में रेडियो औषधि, सामान्यतः फ्लोरीन-18 से चिह्नित फ्लोरोडीऑक्सीग्लूकोज़, दी जाती है और शरीर में जहाँ ग्लूकोज़ सबसे तेज़ी से खपता है वह स्थान दिखता है, जो कैंसर में उपयोगी है।
  • एकल फोटॉन उत्सर्जन संगणित टोमोग्राफी में टेक्नीशियम-99एम जैसे गामा उत्सर्जक अनुचिह्न और गामा कैमरा काम आते हैं।
  • अंतर्दर्शन पूर्ण आंतरिक परावर्तन से प्रकाश और चित्र प्रकाशिक तंतुओं में ले जाता है।
  • विद्युत हृद्लेखन हृदय की विद्युत सक्रियता और विद्युत मस्तिष्कलेखन मस्तिष्क की सक्रियता अंकित करता है।
  • अस्थि घनत्वमिति दो एक्स-रे ऊर्जाओं से अस्थि खनिज घनत्व मापती है, और नाड़ी ऑक्सीमापी ऑक्सीजनित तथा विऑक्सीजनित हीमोग्लोबिन द्वारा लाल और अवरक्त प्रकाश के अवशोषण की तुलना करता है।

परीक्षा की दृष्टि से

विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रश्नपत्र एक्स-रे के खोजकर्ता और वर्ष, कौन-सी तकनीक आयनकारी विकिरण से बचती है, हाउंसफील्ड पैमाना, एमआरआई के मात्रक टेस्ला, अल्ट्रासाउंड में दाब-विद्युत तथा डॉप्लर प्रभाव, और सीटी एवं एमआरआई की नोबेल जोड़ियाँ पूछते हैं। प्रिय संख्यात्मक प्रश्न त्वरक वोल्टता तथा कटऑफ तरंगदैर्ध्य का व्युत्क्रम संबंध है। स्थैतिक प्रश्न तकनीक से जुड़े कंट्रास्ट माध्यम, विकिरण मात्रक ग्रे, सीवर्ट तथा बेकरल, पीईटी के अनुचिह्न, और पीसीपीएनडीटी अधिनियम के वर्ष व उद्देश्य से आते हैं। जाल हैं 1979 के सीटी पुरस्कार को 2003 के एमआरआई पुरस्कार से बदल देना, सीटी को संगणकीय होने के कारण विकिरण रहित मान लेना, और यह मान लेना कि अल्ट्रासाउंड फेफड़े या वयस्क मस्तिष्क का चित्र दे सकती है।

महत्वपूर्ण तथ्य

एक्स-रे की खोज1895 में विल्हेम कॉनराड रोएंटजेन; 1901 में भौतिकी का प्रथम नोबेल पुरस्कार
एक्स-रे नलिका का लक्ष्यटंगस्टन; अवरोधन विकिरण से सतत स्पेक्ट्रम और भीतरी कोश संक्रमण से अभिलक्षणिक रेखाएँ
कटऑफ तरंगदैर्ध्यत्वरक वोल्टता के व्युत्क्रमानुपाती (ड्यूएन-हंट नियम)
सीटी का नोबेल पुरस्कार1979, चिकित्सा, गॉडफ्रे हाउंसफील्ड और एलन कॉर्मैक
हाउंसफील्ड पैमानाजल 0 एचयू, वायु ऋण 1000 एचयू, घनी अस्थि लगभग धन 1000 और उससे ऊपर
एमआरआई का नाभिक और मात्रकहाइड्रोजन प्रोटॉन; चुंबकीय क्षेत्र टेस्ला में, नैदानिक रूप से 1.5 टी या 3 टी
एमआरआई के नोबेल पुरस्कार2003 चिकित्सा लॉटरबर और मैन्सफील्ड को; 1952 भौतिकी ब्लोख और पर्सेल को एनएमआर के लिए
अल्ट्रासाउंड की आवृत्ति20 किलोहर्ट्ज़ से ऊपर; चिकित्सा जाँच में लगभग 2 से 18 मेगाहर्ट्ज़
अल्ट्रासाउंड का सिद्धांतदाब-विद्युत ट्रांसड्यूसर; डॉप्लर परिवर्तन से रक्त प्रवाह का वेग
कंट्रास्ट माध्यमएक्स-रे और सीटी के लिए बेरियम सल्फेट तथा आयोडीन, एमआरआई के लिए गैडोलिनियम कीलेट
पीईटी का अनुचिह्नफ्लोरीन-18 फ्लोरोडीऑक्सीग्लूकोज़; स्पेक्ट में टेक्नीशियम-99एम
विकिरण के मात्रकअवशोषित मात्रा के लिए ग्रे, तुल्य मात्रा के लिए सीवर्ट, सक्रियता के लिए बेकरल
भारतीय नियामक और कानूनविकिरण के लिए परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड; लिंग निर्धारण पर पीसीपीएनडीटी अधिनियम, 1994

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

एक्स-रे की खोज 1895 में किस वैज्ञानिक ने की थी?

  1. A.मैरी क्यूरी
  2. B.विल्हेम कॉनराड रोएंटजेन
  3. C.हेनरी बेकरल
  4. D.जोसेफ जॉन थॉमसन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. विल्हेम कॉनराड रोएंटजेन

व्याख्या

सही उत्तर है ख, विल्हेम कॉनराड रोएंटजेन। नवंबर 1895 में वुर्ट्सबर्ग विश्वविद्यालय में विसर्जन नलिका पर काम करते हुए रोएंटजेन ने देखा कि प्रतिदीप्त लवण से लेपित एक पर्दा नलिका ढकी होने पर भी चमक उठता है, और उन्होंने इसका कारण एक अज्ञात भेदक विकिरण को बताया जिसे उन्होंने एक्स-विकिरण नाम दिया। इसके लिए उन्हें 1901 में दिया गया भौतिकी का सर्वप्रथम नोबेल पुरस्कार मिला।

विकल्प क, मैरी क्यूरी, ने पियरे क्यूरी के साथ पोलोनियम और रेडियम की खोज की और 1903 में भौतिकी तथा 1911 में रसायन का नोबेल पुरस्कार पाया, पर उनका कार्य रेडियोसक्रियता पर था, एक्स-रे पर नहीं। विकल्प ग, हेनरी बेकरल, ने 1896 में यूरेनियम लवणों में प्राकृतिक रेडियोसक्रियता खोजी, जो रोएंटजेन के एक वर्ष बाद थी और जिसकी प्रेरणा एक्स-रे की ही खबर से मिली थी। विकल्प घ, जे. जे. थॉमसन, ने 1897 में इलेक्ट्रॉन की खोज की। क्रम याद रखें: 1895 एक्स-रे, 1896 रेडियोसक्रियता, 1897 इलेक्ट्रॉन।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

निम्नलिखित में से कौन-सी प्रतिबिंबन तकनीक आयनकारी विकिरण का उपयोग नहीं करती?

  1. A.साधारण एक्स-रे रेडियोग्राफी
  2. B.संगणित टोमोग्राफी
  3. C.चुंबकीय अनुनाद प्रतिबिंबन
  4. D.पॉज़िट्रॉन उत्सर्जन टोमोग्राफी
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. चुंबकीय अनुनाद प्रतिबिंबन

व्याख्या

सही उत्तर है ग, चुंबकीय अनुनाद प्रतिबिंबन। एमआरआई शरीर के हाइड्रोजन नाभिकों को प्रबल स्थिर चुंबकीय क्षेत्र में रखकर रेडियो आवृत्ति स्पंदों से विचलित करती है, और ये स्पंद विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम के कम ऊर्जा वाले हानिरहित भाग में आते हैं। इसमें कोई आयनकारी विकिरण नहीं होता, इसीलिए चिकित्सक जितनी बार चाहे एमआरआई दोहरा सकता है।

विकल्प क, साधारण रेडियोग्राफी, एक्स-रे का उपयोग करती है, जो परिभाषा से आयनकारी हैं क्योंकि उनमें परमाणुओं से इलेक्ट्रॉन निकालने भर की ऊर्जा होती है। विकल्प ख, संगणित टोमोग्राफी, उन्हीं एक्स-रे को अनेक कोणों से भेजती है और एक फिल्म से अधिक मात्रा देती है। विकल्प घ, पॉज़िट्रॉन उत्सर्जन टोमोग्राफी, में रेडियोसक्रिय अनुचिह्न दिया जाता है जिसके पॉज़िट्रॉन इलेक्ट्रॉन से मिलकर गामा फोटॉन छोड़ते हैं, अतः वह भी आयनकारी है। अल्ट्रासाउंड दूसरी ऐसी सामान्य तकनीक है जिसमें आयनकारी विकिरण नहीं होता, इसी कारण गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड और एमआरआई को वरीयता मिलती है।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

हाउंसफील्ड मात्रक, जिस पैमाने पर जल शून्य और वायु ऋण एक हज़ार है, किस प्रतिबिंबन तकनीक में प्रयुक्त होता है?

  1. A.चुंबकीय अनुनाद प्रतिबिंबन
  2. B.संगणित टोमोग्राफी
  3. C.अल्ट्रासोनोग्राफी
  4. D.विद्युत हृद्लेखन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. संगणित टोमोग्राफी

व्याख्या

सही उत्तर है ख, संगणित टोमोग्राफी। गॉडफ्रे हाउंसफील्ड के नाम पर बना यह मात्रक बताता है कि ऊतक का कोई सूक्ष्म आयतन एक्स-रे को कितनी प्रबलता से क्षीण करता है, और इस पैमाने पर परिभाषा से जल शून्य तथा वायु ऋण एक हज़ार है। वसा शून्य से नीचे, कोमल ऊतक कुछ ऊपर, और घनी अस्थि एक हज़ार तथा उससे आगे जाती है, जिससे रेडियोलॉजिस्ट केवल संख्याओं से ऊतक का प्रकार आँक लेता है।

विकल्प क गलत है क्योंकि एमआरआई चित्र संकेत तीव्रता और अनुक्रम भारण से बताए जाते हैं, किसी निश्चित परम पैमाने से नहीं। विकल्प ग गलत है क्योंकि अल्ट्रासाउंड चित्र प्रतिध्वनिता से वर्णित होते हैं, जिसमें अतिप्रतिध्वनिक और अप्रतिध्वनिक जैसे पद आते हैं, और उपयोगी माप डॉप्लर प्रवाह वेग है। विकल्प घ गलत है क्योंकि विद्युत हृद्लेखन समय के सापेक्ष मिलीवोल्ट में वोल्टता अंकित करता है और वह लेखाचित्र है, चित्र नहीं। जोड़ियाँ याद रखें: हाउंसफील्ड सीटी से, टेस्ला एमआरआई से, मेगाहर्ट्ज़ अल्ट्रासाउंड से।

Q4.विज्ञान और प्रौद्योगिकीपूछा गया: NDA · 23 Apr 2017कठिन

यदि एक्स-रे नलिका पर लगाई गई विभवांतर दोगुनी कर दी जाए और तंतु तथा लक्ष्य के बीच की दूरी वही रखी जाए, तो कटऑफ तरंगदैर्ध्य का क्या होगा?

  1. A.वह वही रहेगी
  2. B.वह दोगुनी हो जाएगी
  3. C.वह आधी हो जाएगी
  4. D.वह मूल तरंगदैर्ध्य की चार गुनी हो जाएगी
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. वह आधी हो जाएगी

व्याख्या

सही उत्तर है ग, वह आधी हो जाएगी। सतत एक्स-रे स्पेक्ट्रम की कटऑफ या न्यूनतम तरंगदैर्ध्य तब बनती है जब कोई इलेक्ट्रॉन लक्ष्य से एक ही टक्कर में अपनी पूरी गतिज ऊर्जा दे देता है। त्वरक वोल्टता द्वारा किए गए कार्य को फोटॉन ऊर्जा के बराबर रखने पर यह संबंध मिलता है कि न्यूनतम तरंगदैर्ध्य प्लांक नियतांक और प्रकाश वेग के गुणनफल को इलेक्ट्रॉनिक आवेश तथा वोल्टता से भाग देने पर प्राप्त होती है। अतः तरंगदैर्ध्य वोल्टता के व्युत्क्रमानुपाती है और वोल्टता दोगुनी करने पर आधी हो जाती है। इसे ड्यूएन-हंट नियम कहते हैं।

विकल्प क गलत है क्योंकि कटऑफ केवल वोल्टता पर निर्भर है, जो बदल दी गई है। विकल्प ख संबंध को उलट देता है और सबसे सामान्य भूल है। विकल्प घ व्युत्क्रम वर्ग निर्भरता से निकलता, जो यहाँ लागू नहीं होती। यह भी ध्यान दें कि तंतु और लक्ष्य की दूरी तथा लक्ष्य की धातु तीव्रता और अभिलक्षणिक रेखाओं को प्रभावित करती है, कटऑफ तरंगदैर्ध्य को नहीं।

Q5.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

नैदानिक चुंबकीय अनुनाद प्रतिबिंबन का संकेत मुख्यतः शरीर के जल और वसा में उपस्थित किस तत्व के नाभिकों से मिलता है?

  1. A.कार्बन
  2. B.हाइड्रोजन
  3. C.सोडियम
  4. D.फॉस्फोरस
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. हाइड्रोजन

व्याख्या

सही उत्तर है ख, हाइड्रोजन। साधारण हाइड्रोजन का नाभिक एक अकेला प्रोटॉन है, जिसमें चक्रण और इसलिए चुंबकीय आघूर्ण होता है, और शरीर मुख्यतः जल तथा वसा से बना होने के कारण हाइड्रोजन ऐसा सबसे बहुल नाभिक है। यही बहुलता और प्रबल चुंबकीय अनुक्रिया मिलकर साधारण एमआरआई को वस्तुतः प्रोटॉन प्रतिबिंबन बना देती है।

विकल्प क, कार्बन, शरीर में बहुल है पर उसका सामान्य समस्थानिक कार्बन-12 शुद्ध नाभिकीय चक्रण नहीं रखता और कोई संकेत नहीं देता; केवल दुर्लभ कार्बन-13 चुंबकीय रूप से सक्रिय है और शोध स्पेक्ट्रमिकी में काम आता है। विकल्प ग, सोडियम, और विकल्प घ, फॉस्फोरस, के नाभिक चुंबकीय रूप से सक्रिय हैं, और सोडियम-23 तथा फॉस्फोरस-31 का प्रतिबिंबन विशिष्ट शोध कार्य में होता भी है, पर ऊतक में उनकी सांद्रता सामान्य नैदानिक जाँच के लिए बहुत कम है। श्रृंखला याद रखें: हाइड्रोजन प्रोटॉन, प्रबल स्थिर क्षेत्र, रेडियो आवृत्ति स्पंद, शिथिलन संकेत, चित्र।

Q6.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

एमआरआई स्कैनर के स्थिर चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता किस मात्रक में मापी जाती है?

  1. A.सीवर्ट
  2. B.टेस्ला
  3. C.बेकरल
  4. D.ग्रे
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. टेस्ला

व्याख्या

सही उत्तर है ख, टेस्ला। टेस्ला चुंबकीय फ्लक्स घनत्व का एसआई मात्रक है, और नैदानिक एमआरआई स्कैनर सामान्यतः डेढ़ या तीन टेस्ला पर चलते हैं, जिसके लिए द्रव हीलियम से ठंडी रखी गई अतिचालक कुंडली काम करती है। तुलना के लिए, पृथ्वी का अपना चुंबकीय क्षेत्र कुछ दसियों माइक्रोटेस्ला के क्रम का है, इसीलिए स्कैनर कक्ष में ढीली लोहचुंबकीय वस्तुएँ वर्जित हैं।

विकल्प क, सीवर्ट, आयनकारी विकिरण की जैविक रूप से भारित तुल्य मात्रा मापता है, जो एमआरआई में अप्रासंगिक है क्योंकि उसमें विकिरण नहीं होता। विकल्प ग, बेकरल, रेडियोसक्रिय स्रोत की सक्रियता को प्रति सेकंड एक विघटन के रूप में मापता है। विकल्प घ, ग्रे, आयनकारी विकिरण की अवशोषित मात्रा को प्रति किलोग्राम एक जूल के रूप में मापता है। ये तीनों विकिरण मात्रक एक्स-रे, सीटी और नाभिकीय चिकित्सा के हैं; एमआरआई का मात्रक केवल टेस्ला है। फ्लक्स घनत्व का पुराना मात्रक गाउस एक टेस्ला का दस-हज़ारवाँ भाग है।

Q7.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

चिकित्सा अल्ट्रासाउंड मशीन का ट्रांसड्यूसर किस प्रभाव पर कार्य करता है?

  1. A.प्रकाश विद्युत प्रभाव
  2. B.दाब-विद्युत प्रभाव
  3. C.ज़ीमान प्रभाव
  4. D.रमन प्रभाव
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. दाब-विद्युत प्रभाव

व्याख्या

सही उत्तर है ख, दाब-विद्युत प्रभाव। कुछ क्रिस्टलों को यांत्रिक रूप से दबाने पर उनके फलकों के बीच वोल्टता उत्पन्न होती है, और उलटे क्रम में वोल्टता लगाने पर उनका आकार बदल जाता है। अल्ट्रासाउंड की छड़ इसका उपयोग दोनों दिशाओं में करती है: विद्युत स्पंद क्रिस्टल को कंपित करके अल्ट्रासाउंड की झड़ी भेजता है, और लौटती प्रतिध्वनियाँ क्रिस्टल को दबाकर वह विद्युत संकेत बनाती हैं जिससे चित्र बनता है।

विकल्प क, प्रकाश विद्युत प्रभाव, प्रकाश पड़ने पर किसी सतह से इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन है, जिसकी व्याख्या आइंस्टाइन ने की, और वह प्रकाश-कोशिकाओं तथा एक्स-रे के अवशोषण में महत्वपूर्ण है, ध्वनि में नहीं। विकल्प ग, ज़ीमान प्रभाव, चुंबकीय क्षेत्र में स्पेक्ट्रमी रेखाओं का विभाजन है। विकल्प घ, रमन प्रभाव, प्रकाश का वह अप्रत्यास्थ प्रकीर्णन है जो उसकी आवृत्ति बदल देता है और जिसकी खोज सी. वी. रमन ने की। साथ पूछा जाने वाला तथ्य भी याद रखें: अल्ट्रासाउंड बीस किलोहर्ट्ज़ से ऊपर की ध्वनि है।

Q8.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

अल्ट्रासाउंड मशीन द्वारा रक्त प्रवाह की गति और दिशा की माप किस भौतिक प्रभाव पर निर्भर करती है?

  1. A.डॉप्लर प्रभाव
  2. B.कॉम्पटन प्रभाव
  3. C.टिंडल प्रभाव
  4. D.फैराडे प्रभाव
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. डॉप्लर प्रभाव

व्याख्या

सही उत्तर है क, डॉप्लर प्रभाव। चलते लक्ष्य से ध्वनि परावर्तित होने पर प्रतिध्वनि की आवृत्ति बदल जाती है: रक्त छड़ की ओर आ रहा हो तो अधिक और दूर जा रहा हो तो कम। मशीन इस परिवर्तन को मापकर वेग में बदल देती है, और इसी से डॉप्लर जाँच सँकरी धमनी, थक्का या रिसता हृदय कपाट पकड़ती है तथा भ्रूण की हृदय ध्वनि भी सुनी जाती है।

विकल्प ख, कॉम्पटन प्रभाव, किसी एक्स-रे या गामा फोटॉन का इलेक्ट्रॉन से ऊर्जा हानि के साथ प्रकीर्णन है, जो विकिरण परिरक्षण में महत्वपूर्ण है। विकल्प ग, टिंडल प्रभाव, कोलॉइडी कणों द्वारा प्रकाश का प्रकीर्णन है, जिससे धूल भरे कमरे में प्रकाश किरण दिखती है। विकल्प घ, फैराडे प्रभाव, चुंबकीय क्षेत्र में प्रकाश के ध्रुवण तल का घूर्णन है। केवल डॉप्लर प्रभाव सापेक्ष गति से आवृत्ति में परिवर्तन से संबंधित है, और इसी कारण वह रडार गति मापक तथा खगोल विज्ञान में भी प्रयुक्त होता है।

Q9.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

संगणक सहायित टोमोग्राफी के विकास के लिए 1979 का चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार किन्हें संयुक्त रूप से मिला?

  1. A.पॉल लॉटरबर और पीटर मैन्सफील्ड
  2. B.गॉडफ्रे हाउंसफील्ड और एलन कॉर्मैक
  3. C.फेलिक्स ब्लोख और एडवर्ड पर्सेल
  4. D.विल्हेम रोएंटजेन और हेनरी बेकरल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. गॉडफ्रे हाउंसफील्ड और एलन कॉर्मैक

व्याख्या

सही उत्तर है ख, गॉडफ्रे हाउंसफील्ड और एलन कॉर्मैक। ब्रिटेन की ईएमआई में अभियंता हाउंसफील्ड ने पहला नैदानिक सीटी स्कैनर बनाया, और भौतिक विज्ञानी कॉर्मैक ने स्वतंत्र रूप से वह गणित हल किया था जिससे अनेक दिशाओं में लिए गए मापों से अनुप्रस्थ काट पुनर्निर्मित होती है। पुरस्कार 1979 में मिला, और सीटी का क्षीणन मात्रक हाउंसफील्ड के नाम पर है।

विकल्प क, लॉटरबर और मैन्सफील्ड, को यही पुरस्कार 2003 में मिला, पर चुंबकीय अनुनाद प्रतिबिंबन के लिए, और अभ्यर्थी प्रायः इन दोनों जोड़ियों को आपस में बदल देते हैं। विकल्प ग, ब्लोख और पर्सेल, को ठोस पदार्थ में नाभिकीय चुंबकीय अनुनाद की खोज के लिए 1952 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला, वही भौतिकी जिसे एमआरआई ने बाद में अपनाया। विकल्प घ दोनों दृष्टि से गलत है: रोएंटजेन को 1901 में एक्स-रे के लिए प्रथम भौतिकी पुरस्कार और बेकरल को 1903 में रेडियोसक्रियता के लिए साझा पुरस्कार मिला। चारों को पुरस्कार, वर्ष और तकनीक की सारणी में याद करें।

Q10.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

चुंबकीय अनुनाद प्रतिबिंबन में कंट्रास्ट माध्यम के रूप में किस पदार्थ का उपयोग होता है?

  1. A.बेरियम सल्फेट
  2. B.आयोडीन यौगिक
  3. C.गैडोलिनियम कीलेट
  4. D.टेक्नीशियम-99एम
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. गैडोलिनियम कीलेट

व्याख्या

सही उत्तर है ग, गैडोलिनियम कीलेट। गैडोलिनियम एक दुर्लभ मृदा तत्व है जिसका आयन प्रबल अनुचुंबकीय होता है, इसलिए वह आसपास के हाइड्रोजन नाभिकों का शिथिलन काल घटा देता है और जिस ऊतक तक पहुँचता है उसे चमका देता है। मुक्त आयन विषैला होने के कारण इसे कीलेट में बाँधकर दिया जाता है, और इसका उपयोग गाँठ, शोथ तथा रक्त-मस्तिष्क अवरोध में दरार दिखाने में होता है।

विकल्प क, बेरियम सल्फेट, वह एक्स-रे कंट्रास्ट है जो जठरांत्र पथ की रूपरेखा दिखाने के लिए पिलाया या एनिमा के रूप में दिया जाता है; यह अविलेय होने से अवशोषित नहीं होता। विकल्प ख, आयोडीन यौगिक, एंजियोग्राफी तथा कंट्रास्ट युक्त सीटी के लिए अंतःक्षेपित एक्स-रे कंट्रास्ट है, और आयोडीन उच्च परमाणु संख्या के कारण चुना जाता है। विकल्प घ, टेक्नीशियम-99एम, गामा उत्सर्जक रेडियो औषधि है जो गामा कैमरे के साथ नाभिकीय जाँच में काम आती है, एमआरआई में नहीं। प्रत्येक माध्यम को उसकी तकनीक से जोड़ें।

Q11.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

भारत में भ्रूण का लिंग जानने के लिए अल्ट्रासोनोग्राफी जैसी निदान तकनीकों के उपयोग पर कौन-सा कानून प्रतिबंध लगाता है?

  1. A.गर्भ का चिकित्सकीय समापन अधिनियम, 1971
  2. B.गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम, 1994
  3. C.नैदानिक संस्थान अधिनियम, 2010
  4. D.औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम, 1994

व्याख्या

सही उत्तर है ख, गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम, 1994, जिसे सामान्यतः पीसीपीएनडीटी अधिनियम कहा जाता है। यह प्रसव पूर्व निदान तकनीकों के उपयोग का नियमन करता है, प्रत्येक अल्ट्रासाउंड केंद्र के पंजीकरण तथा अभिलेख रखने की अपेक्षा करता है, और गर्भधारण से पहले या बाद में लिंग चयन तथा किसी को भी भ्रूण का लिंग बताने पर प्रतिबंध लगाता है। प्रवर्तन कड़ा करने के लिए 2003 में इसमें बड़ा संशोधन हुआ।

विकल्प क, गर्भ का चिकित्सकीय समापन अधिनियम, 1971, यह तय करता है कि गर्भ किन परिस्थितियों में और किसके द्वारा वैध रूप से समाप्त किया जा सकता है; यह भिन्न कानून है जिसे इससे भ्रमित किया जाता है। विकल्प ग, नैदानिक संस्थान अधिनियम, 2010, सामान्यतः नैदानिक संस्थानों के पंजीकरण और न्यूनतम मानकों का प्रावधान करता है। विकल्प घ, औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940, औषधियों के निर्माण और विक्रय का नियमन करता है। परीक्षा का बिंदु यह है कि मशीन और जाँच वैध हैं; भ्रूण का लिंग बताना अपराध है।

Q12.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

पॉज़िट्रॉन उत्सर्जन टोमोग्राफी में सबसे अधिक किस रेडियो औषधि का उपयोग होता है?

  1. A.कोबाल्ट-60
  2. B.फ्लोरीन-18 से चिह्नित फ्लोरोडीऑक्सीग्लूकोज़
  3. C.आयोडीन-131
  4. D.बेरियम सल्फेट
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. फ्लोरीन-18 से चिह्नित फ्लोरोडीऑक्सीग्लूकोज़

व्याख्या

सही उत्तर है ख, फ्लोरीन-18 से चिह्नित फ्लोरोडीऑक्सीग्लूकोज़। यह ग्लूकोज़ का वह सदृश यौगिक है जिसमें एक हाइड्रॉक्सिल समूह के स्थान पर फ्लोरीन-18 आ जाता है। कोशिकाएँ इसे ग्लूकोज़ की खपत के अनुपात में ग्रहण करती हैं पर पूरी तरह उपापचयित नहीं कर पातीं, इसलिए यह जमा हो जाता है; फ्लोरीन-18 पॉज़िट्रॉन छोड़ता है और प्रत्येक पॉज़िट्रॉन इलेक्ट्रॉन से मिलकर विपरीत दिशाओं में जाते दो गामा फोटॉन देता है, जिनकी जोड़ी से संसूचकों का वलय स्रोत का स्थान तय करता है। ग्लूकोज़ की भूखी गाँठें चमक उठती हैं।

विकल्प क, कोबाल्ट-60, विकिरण चिकित्सा और औद्योगिक विकिरणन में प्रयुक्त गामा स्रोत है, अंतःक्षेपित अनुचिह्न नहीं। विकल्प ग, आयोडीन-131, नाभिकीय चिकित्सा में काम आता है, पर थायरॉइड की जाँच और उपचार के लिए, और वह बीटा कण तथा गामा किरणें छोड़ता है, पॉज़िट्रॉन नहीं। विकल्प घ, बेरियम सल्फेट, रेडियोसक्रिय ही नहीं है; वह आँत का एक्स-रे कंट्रास्ट है। जोड़ी याद रखें: पीईटी से फ्लोरीन-18, स्पेक्ट तथा गामा कैमरे से टेक्नीशियम-99एम।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीटी स्कैन और एमआरआई में क्या अंतर है?

सीटी स्कैन अनेक कोणों से एक्स-रे माप लेकर संगणक से परतें पुनर्निर्मित करता है, अतः उसमें आयनकारी विकिरण होता है, वह तेज़ है और अस्थि, रक्तस्राव तथा चोट के लिए उत्तम है। एमआरआई हाइड्रोजन नाभिकों पर प्रबल चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों का उपयोग करती है, उसमें आयनकारी विकिरण नहीं होता, कोमल ऊतक का विवरण बहुत बेहतर मिलता है, और वह धीमी, शोरभरी तथा महँगी है।

एक्स-रे फिल्म पर हड्डियाँ सफेद क्यों दिखती हैं?

अस्थि में कैल्शियम होता है, जिसकी परमाणु संख्या अपेक्षाकृत अधिक है, इसलिए वह कोमल ऊतक या वायु से कहीं अधिक एक्स-रे सोख लेती है। अस्थि के पीछे फिल्म तक कम किरणें पहुँचती हैं, वह भाग कम उद्भासित रहता है, और सामान्य रेडियोग्राफ में वह सफेद दिखाया जाता है, जबकि वायु भरे फेफड़े काले दिखते हैं।

गर्भावस्था में कौन-सी प्रतिबिंबन विधियाँ सुरक्षित मानी जाती हैं?

अल्ट्रासाउंड मानक जाँच है क्योंकि उसमें ध्वनि तरंगें काम आती हैं और आयनकारी विकिरण नहीं होता, तथा एमआरआई भी आयनकारी विकिरण से मुक्त है। एक्स-रे और सीटी से बचा जाता है जब तक कोई प्रबल नैदानिक कारण न हो, क्योंकि आयनकारी विकिरण भ्रूण के लिए जोखिम रखता है, और पीईटी में रेडियोसक्रिय अनुचिह्न दिया जाता है।

अल्ट्रासाउंड मशीन में दाब-विद्युत प्रभाव क्या करता है?

यह दोनों दिशाओं में काम करता है। छड़ के क्रिस्टल पर विद्युत स्पंद लगने से वह कंपित होकर अल्ट्रासाउंड की झड़ी छोड़ता है, और जब ऊतक सीमाओं से प्रतिध्वनियाँ लौटती हैं तो वे उसी क्रिस्टल को दबाकर विद्युत संकेत उत्पन्न करती हैं। मशीन उन संकेतों का समय और प्रबलता मापकर चित्र बनाती है।

पीसीपीएनडीटी अधिनियम, 1994 किस बात पर प्रतिबंध लगाता है?

यह गर्भधारण से पहले या बाद में लिंग चयन पर प्रतिबंध लगाता है और किसी को भी भ्रूण का लिंग जानने के लिए प्रसव पूर्व निदान तकनीक करने या वह लिंग गर्भवती महिला अथवा उसके संबंधियों को बताने से रोकता है। यह अल्ट्रासाउंड केंद्रों के पंजीकरण और अभिलेख रखने की अपेक्षा भी करता है, और 2003 के संशोधन से इसे कड़ा किया गया।

ग्रे, सीवर्ट और बेकरल में क्या मापा जाता है?

ग्रे अवशोषित मात्रा मापता है, अर्थात ऊतक के प्रति किलोग्राम जमा हुई आयनकारी विकिरण की ऊर्जा। सीवर्ट तुल्य मात्रा मापता है, अर्थात विकिरण के प्रकार से होने वाली जैविक हानि के अनुसार भारित अवशोषित मात्रा। बेकरल रेडियोसक्रिय स्रोत की सक्रियता मापता है, जो प्रति सेकंड एक विघटन है।

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