गगनयान और मानव अंतरिक्ष उड़ान: मिशन, यान और यात्री
परीक्षाओं के लिए गगनयान के सम्पूर्ण नोट्स — कक्षीय मॉड्यूल, मानव अनुकूलित एलवीएम3, क्रू एस्केप सिस्टम, अबॉर्ट परीक्षण, व्योममित्र और अंतरिक्ष गए भारतीय।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

गगनयान भारत का वह कार्यक्रम है जिसके अंतर्गत भारतीय राकेट से भारतीय अंतरिक्ष यान में अपने अंतरिक्ष यात्री भेजे जाएँगे और सुरक्षित वापस लाए जाएँगे। प्रधानमंत्री ने 2018 के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में लाल किले से इसकी घोषणा की, और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने अगले वर्ष इसके लिए बेंगलुरु में मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र स्थापित किया। अब तक केवल सोवियत संघ तथा रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन ने अपने बल पर मनुष्यों को कक्षा में भेजा है, इसलिए यह कार्यक्रम प्रत्येक सामान्य जागरूकता प्रश्नपत्र में केवल राकेट विज्ञान के रूप में नहीं, राष्ट्रीय क्षमता के प्रश्न के रूप में पूछा जाता है।
मिशन क्या है
घोषित योजना के अनुसार तीन तक अंतरिक्ष यात्रियों को लगभग चार सौ किलोमीटर की निम्न भू-कक्षा में तीन दिन तक रखा जाएगा, और क्रू मॉड्यूल को पैराशूट के सहारे समुद्र में उतारा जाएगा, जहाँ भारतीय नौसेना उसे बरामद करेगी। यान को कक्षीय मॉड्यूल कहा जाता है और इसके दो भाग हैं — क्रू मॉड्यूल, अर्थात दोहरी दीवार वाला रहने योग्य कक्ष जो पृथ्वी पर लौटता है, तथा सर्विस मॉड्यूल, जिसमें प्रणोदन, विद्युत और ताप प्रणालियाँ होती हैं और जो पुनःप्रवेश से पहले अलग कर दिया जाता है। कक्ष में पृथ्वी जैसा दबाव, तापमान और ऑक्सीजन स्तर पर्यावरण नियंत्रण तथा जीवन रक्षक प्रणाली बनाए रखती है।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| घोषणा | स्वतंत्रता दिवस संबोधन, 2018 |
| संस्था | इसरो, बेंगलुरु के मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र के माध्यम से |
| प्रक्षेपण यान | मानव अनुकूलित एलवीएम3, अर्थात एचएलवीएम3 |
| अंतरिक्ष यान | कक्षीय मॉड्यूल: क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल |
| यात्री | तीन तक अंतरिक्ष यात्री |
| कक्षा | लगभग 400 किलोमीटर की निम्न भू-कक्षा |
| प्रक्षेपण स्थल | सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा |
| वापसी | पैराशूट से उतरकर समुद्र में अवतरण |
यान और आपातकालीन निकास प्रणाली
गगनयान एलवीएम3 से उड़ान भरेगा, जो भारत का सबसे भारी प्रक्षेपण यान है और इस उद्देश्य के लिए मानव अनुकूलित बनाए जाने पर एचएलवीएम3 कहा जाता है। यह तीन चरणों वाला यान है जिसमें दो बड़े ठोस बूस्टर, एक द्रव मुख्य चरण और एक क्रायोजेनिक ऊपरी चरण होता है, और यही यान परिवार चंद्रयान मिशनों को भी ले गया था। मानव अनुकूलन का अर्थ है प्रत्येक प्रणाली को अधिक सुरक्षा सीमा, अतिरिक्त प्रतिरूपता और अतिरिक्त जाँचों के साथ बनाना। क्रू मॉड्यूल के ऊपर क्रू एस्केप सिस्टम लगा है, अर्थात तेज गति से जलने वाले ठोस मोटरों का समूह, जो प्रक्षेपण मंच पर या उड़ान के दौरान कुछ गड़बड़ होने पर कुछ सेकंड में क्रू मॉड्यूल को राकेट से दूर खींच सकता है। अब तक कार्यक्रम का मुख्य कार्य राकेट के बजाय इसी प्रणाली का परीक्षण रहा है।
अब तक के परीक्षण
- सन 2018 में श्रीहरिकोटा में हुए पैड अबॉर्ट परीक्षण ने दिखाया कि प्रक्षेपण मंच पर खड़े राकेट से क्रू मॉड्यूल को दूर खींचा जा सकता है।
- टीवी-डी1, अर्थात पहला परीक्षण यान अबॉर्ट मिशन, 21 अक्टूबर 2023 को श्रीहरिकोटा से उड़ा। इसने ध्वनि के निकट गति पर क्रू एस्केप सिस्टम का प्रदर्शन किया, और क्रू मॉड्यूल अलग होकर पैराशूट से उतरा तथा समुद्र से बरामद किया गया।
- पैराशूट क्रम सिद्ध करने के लिए समेकित वायु पतन परीक्षण किए गए हैं, और किसी यात्री की उड़ान से पहले बिना यात्री वाली कक्षीय उड़ानें प्रस्तावित हैं।
- व्योममित्र नामक अर्धमानवाकार रोबोट बिना यात्री वाले मिशन में भेजा जाएगा, जो उन कक्ष प्रणालियों की परीक्षा करेगा जिन पर मानव दल निर्भर रहेगा।
अंतरिक्ष यात्री और गगनयान से पहले के भारतीय
भारतीय वायुसेना के चार परीक्षण पायलट अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुने गए और भारत में प्रशिक्षण जारी रखने से पहले उन्होंने रूस के यूरी गागरिन कॉस्मोनॉट प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण लिया। फरवरी 2024 में उनके नाम सार्वजनिक किए गए — प्रशांत बालकृष्णन नायर, अजित कृष्णन, अंगद प्रताप और शुभांशु शुक्ला। भारत के अंतरिक्ष इतिहास में तीन नाम पहले से हैं जो प्रश्नपत्रों में आते हैं। भारतीय वायुसेना के पायलट राकेश शर्मा 3 अप्रैल 1984 को अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बने; वे इंटरकॉसमॉस कार्यक्रम के अंतर्गत सोवियत सोयुज टी-11 से सैल्यूट 7 अंतरिक्ष केंद्र गए और उन्होंने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से कहा कि कक्षा से भारत सारे जहाँ से अच्छा दिखता है। कल्पना चावला अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला थीं, जिन्होंने 1997 में नासा के लिए उड़ान भरी और 2003 में कोलंबिया यान के पुनःप्रवेश के समय टूटने पर अपने साथियों के साथ उनका निधन हुआ। भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स ने नासा के लिए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र की लंबी अवधि की उड़ानें कीं। जून 2025 में गगनयान के चार चयनित यात्रियों में से एक शुभांशु शुक्ला एक्सिओम-4 मिशन में पायलट के रूप में गए और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र पर कार्य करने वाले पहले भारतीय बने।
गगनयान के बाद की योजना
सन 2023 में सरकार ने भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए दो दीर्घकालिक लक्ष्य रखे — भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन, जिसका नाम भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन रखा गया है, तथा चंद्रमा पर भारतीय मानव अवतरण। गगनयान दोनों की पहली सीढ़ी है, क्योंकि स्टेशन जोड़ने या दल को भू-कक्षा से बाहर भेजने से पहले डॉकिंग, जीवन रक्षा, पुनःप्रवेश और बरामदगी सिद्ध करनी होती है। कक्षा में दो भारतीय उपग्रहों की डॉकिंग दिखाने वाला स्पेडेक्स मिशन तथा मृदु अवतरण सिद्ध करने वाली चंद्रयान श्रृंखला इसी तैयारी का भाग हैं।
प्रश्न तय करने वाले बिंदु
- गगनयान इसरो का कार्यक्रम है; इसका प्रक्षेपण यान मानव अनुकूलित एलवीएम3 है, पीएसएलवी या जीएसएलवी एमके-2 नहीं।
- कक्षीय मॉड्यूल क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल से मिलकर बनता है; लौटता केवल क्रू मॉड्यूल है।
- अक्टूबर 2023 के टीवी-डी1 ने क्रू एस्केप सिस्टम का परीक्षण किया, कक्षा या जीवन रक्षक प्रणाली का नहीं।
- राकेश शर्मा सोवियत यान से गए थे; दल ले जाने वाला पहला भारतीय यान गगनयान का ही होगा।
- कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स नासा के लिए उड़ीं और भारतीय मूल की थीं, भारत द्वारा भेजी गई यात्री नहीं।
परीक्षा की दृष्टि से
इस अध्याय से तीन प्रकार के प्रश्न आते हैं। पहला, मिशन के तथ्य — प्रक्षेपण यान, कक्षीय मॉड्यूल के दो भाग, यात्रियों की संख्या, कक्षा, प्रक्षेपण स्थल और मानव अनुकूलन का अर्थ। दूसरा, परीक्षण — अक्टूबर 2023 के टीवी-डी1 ने क्या परखा, 2018 के पैड अबॉर्ट परीक्षण ने क्या दिखाया, और व्योममित्र क्या है। तीसरा, व्यक्ति — राकेश शर्मा के साथ 1984 और सोयुज टी-11, आरक्षित यात्री रवीश मल्होत्रा, भारतीय मूल की पहली महिला कल्पना चावला, लंबी उड़ानों के लिए सुनीता विलियम्स, तथा गगनयान के चार चयनित यात्री। जाल हैं — प्रक्षेपण यान के रूप में पीएसएलवी या जीएसएलवी एमके-2 बताना, कल्पना चावला को भारत द्वारा भेजी गई अंतरिक्ष यात्री मानना, और राकेश शर्मा की उड़ान को भारतीय मानव मिशन समझना। पहली मानव उड़ान की कोई तिथि न दोहराएँ, क्योंकि कार्यक्रम की तिथियाँ बदलती रहती हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| घोषणा | स्वतंत्रता दिवस संबोधन, 2018 |
|---|---|
| कार्यक्रम केंद्र | मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र, बेंगलुरु |
| प्रक्षेपण यान | मानव अनुकूलित एलवीएम3 (एचएलवीएम3), पहले जीएसएलवी एमके-3 |
| अंतरिक्ष यान | कक्षीय मॉड्यूल: क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल |
| यात्री और कक्षा | तीन तक यात्री, लगभग 400 किलोमीटर की निम्न भू-कक्षा |
| प्रक्षेपण स्थल | सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा |
| पहला अबॉर्ट परीक्षण | पैड अबॉर्ट परीक्षण, 2018, श्रीहरिकोटा |
| टीवी-डी1 | 21 अक्टूबर 2023, ध्वनि के निकट गति पर क्रू एस्केप सिस्टम |
| रोबोट | व्योममित्र, बिना यात्री उड़ानों के लिए अर्धमानवाकार रोबोट |
| अंतरिक्ष में पहला भारतीय | राकेश शर्मा, 3 अप्रैल 1984, सोयुज टी-11 |
| भारतीय मूल की पहली महिला | कल्पना चावला, 1997 |
| प्रस्तावित भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन | भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
गगनयान मिशन किस प्रक्षेपण यान से भेजा जाएगा?
- A.पीएसएलवी-एक्सएल
- B.जीएसएलवी एमके-2
- C.मानव अनुकूलित एलवीएम3
- D.एसएसएलवी
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. मानव अनुकूलित एलवीएम3
व्याख्या
सही उत्तर C, मानव अनुकूलित एलवीएम3 है। गगनयान एलवीएम3 से उड़ेगा, जो भारत का सबसे भारी प्रक्षेपण यान है और मनुष्यों को ले जाने के लिए संशोधित तथा प्रमाणित किए जाने पर एचएलवीएम3 लिखा जाता है। यह तीन चरणों वाला यान है जिसमें दो ठोस बूस्टर, एक द्रव मुख्य चरण और एक क्रायोजेनिक ऊपरी चरण है, और मानव अनुकूलन में अधिक संरचनात्मक सुरक्षा सीमा, प्रतिरूपी प्रणालियाँ तथा अतिरिक्त जाँचें जोड़ी जाती हैं।
विकल्प A, पीएसएलवी-एक्सएल, दूरसंवेदी उपग्रहों तथा चंद्रयान-1 और मंगलयान के लिए प्रयुक्त यान है, पर यह मानव यान नहीं उठा सकता। विकल्प B, जीएसएलवी एमके-2, लगभग दो टन के संचार उपग्रह भूसमकालिक अंतरण कक्षा में भेजता है और इस भार के लिए छोटा है। विकल्प D, एसएसएलवी, कुछ सौ किलोग्राम के छोटे उपग्रहों के लिए है। एलवीएम3 को पहले जीएसएलवी एमके-3 कहा जाता था, इसीलिए प्रश्नपत्रों में दोनों नाम आते हैं।
अंतरिक्ष में जाने वाला पहला भारतीय कौन था?
- A.राकेश शर्मा
- B.कल्पना चावला
- C.रवीश मल्होत्रा
- D.सुनीता विलियम्स
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. राकेश शर्मा
व्याख्या
सही उत्तर A, राकेश शर्मा है। भारतीय वायुसेना के तत्कालीन स्क्वाड्रन लीडर राकेश शर्मा 3 अप्रैल 1984 को अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बने। वे इंटरकॉसमॉस कार्यक्रम के अंतर्गत सोवियत यान सोयुज टी-11 से सैल्यूट 7 अंतरिक्ष केंद्र गए और लगभग आठ दिन कक्षा में रहे; उन्हें अशोक चक्र प्रदान किया गया।
विकल्प B, कल्पना चावला, अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला थीं, पर वे 1997 में नासा के लिए गईं, तेरह वर्ष बाद। विकल्प C, रवीश मल्होत्रा, उसी 1984 मिशन के आरक्षित यात्री थे और राकेश शर्मा के साथ प्रशिक्षित हुए पर उड़ान नहीं भरी, इसीलिए यह सबसे प्रबल भ्रमकारी विकल्प है। विकल्प D, सुनीता विलियम्स, भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री हैं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र की लंबी उड़ानें कीं। भारत के नागरिक के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए केवल राकेश शर्मा गए।
राकेश शर्मा ने 1984 में किस अंतरिक्ष यान से यात्रा की थी?
- A.वोस्तोक-1
- B.सोयुज टी-11
- C.अपोलो-11
- D.शेनझोउ-5
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सोयुज टी-11
व्याख्या
सही उत्तर B, सोयुज टी-11 है। राकेश शर्मा सोयुज टी-11 से गए, जो 2 अप्रैल 1984 को बैकोनूर से छोड़ा गया और सोवियत अंतरिक्ष केंद्र सैल्यूट 7 से जुड़ा। यह उड़ान इंटरकॉसमॉस कार्यक्रम का भाग थी, जिसके अंतर्गत सोवियत संघ मित्र देशों के अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाता था, और शर्मा ने जीव चिकित्सा तथा दूरसंवेदन के प्रयोग किए।
विकल्प A, वोस्तोक-1, अप्रैल 1961 में अंतरिक्ष में जाने वाले पहले मनुष्य यूरी गागरिन को ले गया था। विकल्प C, अपोलो-11, वह अमेरिकी मिशन था जिसने जुलाई 1969 में नील आर्मस्ट्रांग और बज़ ऑल्ड्रिन को चंद्रमा पर उतारा। विकल्प D, शेनझोउ-5, अक्टूबर 2003 में यांग लिवेई को ले गया और इससे चीन अपने बल पर मनुष्य को कक्षा में भेजने वाला तीसरा देश बना। इन चार यानों और उनकी उपलब्धियों को अलग-अलग याद रखना ही इस प्रश्न का उद्देश्य है।
अक्टूबर 2023 का टीवी-डी1 मिशन मुख्यतः गगनयान की किस प्रणाली के परीक्षण के लिए किया गया था?
- A.क्रायोजेनिक ऊपरी चरण
- B.क्रू एस्केप सिस्टम
- C.डॉकिंग तंत्र
- D.चंद्र लैंडर के पाद
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. क्रू एस्केप सिस्टम
व्याख्या
सही उत्तर B, क्रू एस्केप सिस्टम है। पहला परीक्षण यान अबॉर्ट मिशन टीवी-डी1 21 अक्टूबर 2023 को श्रीहरिकोटा से छोड़ा गया। एक चरण वाला परीक्षण यान क्रू मॉड्यूल और क्रू एस्केप सिस्टम को ध्वनि के निकट गति तक ले गया, अबॉर्ट का आदेश दिया गया, एस्केप मोटरों ने क्रू मॉड्यूल को दूर खींचा, और मॉड्यूल पैराशूट से उतरकर समुद्र से बरामद कर लिया गया।
विकल्प A गलत है क्योंकि परीक्षण यान में क्रायोजेनिक चरण ही नहीं था। विकल्प C गलत है क्योंकि डॉकिंग अलग से सिद्ध की जा रही है, विशेषतः स्पेडेक्स प्रयोग से, और यह गगनयान की पहली उड़ान की योजना में नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि चंद्र लैंडर चंद्रयान कार्यक्रम का अंग है और इस परीक्षण से उसका कोई संबंध नहीं। सन 2018 के पैड अबॉर्ट परीक्षण ने इसी एस्केप प्रणाली को मंच पर खड़े राकेट से पहले ही सिद्ध कर दिया था।
गगनयान का कक्षीय मॉड्यूल किससे मिलकर बनता है?
- A.क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल
- B.लैंडर और रोवर
- C.ऑर्बिटर और प्रणोदन मॉड्यूल
- D.क्रू मॉड्यूल और क्रायोजेनिक चरण
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल
व्याख्या
सही उत्तर A, क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल है। क्रू मॉड्यूल वह दाबयुक्त दोहरी दीवार वाला कक्ष है जिसमें अंतरिक्ष यात्री रहते हैं, और यही एकमात्र भाग पृथ्वी पर लौटता है, जिसे ताप कवच बचाता है और पैराशूट उतारते हैं। सर्विस मॉड्यूल बिना दाब वाला भाग है जिसमें प्रणोदन, विद्युत उत्पादन, ताप नियंत्रण तथा अन्य सहायक प्रणालियाँ होती हैं, और यह पुनःप्रवेश से पहले अलग कर दिया जाता है।
विकल्प B, लैंडर और रोवर, चंद्रयान-3 का वर्णन है, जिसमें विक्रम और प्रज्ञान चंद्रमा पर कार्य कर रहे थे। विकल्प C, ऑर्बिटर और प्रणोदन मॉड्यूल, पूर्ववर्ती चंद्र मिशनों का वर्णन है, जिन्हें यान को चंद्र कक्षा में पहुँचाना था। विकल्प D गलत है क्योंकि क्रायोजेनिक चरण प्रक्षेपण यान का अंग है और कक्षा तक पहुँचने से पहले ही जल जाता है, अतः वह यान का भाग कभी नहीं होता। कौन-सा भाग लौटता है, यही सर्वाधिक पूछा जाता है।
इसरो का मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के लिए समर्पित केंद्र कहाँ स्थित है?
- A.तिरुवनंतपुरम
- B.बेंगलुरु
- C.अहमदाबाद
- D.श्रीहरिकोटा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. बेंगलुरु
व्याख्या
सही उत्तर B, बेंगलुरु है। गगनयान कार्यक्रम के लिए उत्तरदायी इसरो केंद्र, मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र, 2019 में स्थापित हुआ और बेंगलुरु से कार्य करता है, जहाँ इसरो का मुख्यालय, यू आर राव उपग्रह केंद्र तथा इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क भी हैं।
विकल्प A, तिरुवनंतपुरम, में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र है जहाँ प्रक्षेपण यान विकसित होते हैं, तथा वलियामला में द्रव नोदन प्रणाली केंद्र है। विकल्प C, अहमदाबाद, में अंतरिक्ष उपयोग केंद्र और विक्रम साराभाई द्वारा स्थापित भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला है। विकल्प D, आंध्र प्रदेश का श्रीहरिकोटा, सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र अर्थात प्रक्षेपण स्थल है, और गगनयान वहीं से उड़ेगा, यद्यपि कार्यक्रम का संचालन बेंगलुरु से होता है। इसरो का मुख्यालय भी बेंगलुरु में है, और इसी शहर से गगनयान की प्रणालियों का समन्वय तथा यात्रियों का प्रशिक्षण संचालित होता है, इसलिए प्रश्नपत्र इसे बार-बार पूछते हैं।
गगनयान कार्यक्रम से जुड़ी व्योममित्र क्या है?
- A.एक अर्धमानवाकार रोबोट
- B.एक नया क्रायोजेनिक इंजन
- C.भू-नियंत्रण केंद्र
- D.यात्रियों के लिए बना अंतरिक्ष परिधान
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. एक अर्धमानवाकार रोबोट
व्याख्या
सही उत्तर A, एक अर्धमानवाकार रोबोट है। व्योम अर्थात आकाश और मित्र से बना नाम व्योममित्र इसरो द्वारा विकसित अर्धमानवाकार रोबोट है, जिसे बिना यात्री वाले गगनयान मिशन में भेजा जाएगा। इसमें सिर, भुजाएँ और धड़ है पर पैर नहीं, और इसका कार्य यात्री की सीट पर बैठकर कक्ष के मापदंडों की निगरानी करना, स्विच चलाना तथा सूचना भेजना है, जिससे मानव दल की निर्भर प्रणालियाँ पहले परखी जा सकें।
विकल्प B गलत है क्योंकि एलवीएम3 के क्रायोजेनिक इंजनों के अपने पदनाम हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि मिशन नियंत्रण इसरो के टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क तथा मिशन नियंत्रण केंद्र से होता है, व्योममित्र नामक किसी इकाई से नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि भारतीय दल का अंतरिक्ष परिधान अलग विकास कार्य है और उसका यह नाम नहीं है। इस विषय के प्रश्न प्रायः व्योममित्र को बिना यात्री वाली परीक्षण उड़ानों के साथ जोड़ते हैं।
अंतरिक्ष में जाने वाला पहला मनुष्य कौन था?
- A.नील आर्मस्ट्रांग
- B.यूरी गागरिन
- C.वेलेंटीना तेरेश्कोवा
- D.एलन शेपर्ड
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. यूरी गागरिन
व्याख्या
सही उत्तर B, यूरी गागरिन है। सोवियत अंतरिक्ष यात्री यूरी गागरिन ने 12 अप्रैल 1961 को वोस्तोक-1 से पृथ्वी का एक चक्कर लगाया और अंतरिक्ष में जाने वाले पहले मनुष्य बने। यह दिन अब अंतरराष्ट्रीय मानव अंतरिक्ष उड़ान दिवस के रूप में मनाया जाता है, और रूस का वह प्रशिक्षण केंद्र, जहाँ गगनयान के चयनित यात्रियों ने प्रशिक्षण लिया, गागरिन के नाम पर ही है।
विकल्प A, नील आर्मस्ट्रांग, जुलाई 1969 के अपोलो-11 में चंद्रमा पर पैर रखने वाले पहले मनुष्य थे, जो भिन्न उपलब्धि है। विकल्प C, वेलेंटीना तेरेश्कोवा, जून 1963 में वोस्तोक-6 से अंतरिक्ष जाने वाली पहली महिला बनीं। विकल्प D, एलन शेपर्ड, गागरिन के कुछ सप्ताह बाद मई 1961 में उपकक्षीय उड़ान से जाने वाले पहले अमेरिकी थे और आगे अपोलो-14 से चंद्रमा पर चले। प्रश्नपत्र अंतरिक्ष के पहले मनुष्य और चंद्रमा के पहले मनुष्य को आपस में मिला देते हैं।
अपने ही अंतरिक्ष यान से मनुष्य को कक्षा में भेजने वाला तीसरा देश कौन बना?
- A.जापान
- B.फ्रांस
- C.चीन
- D.भारत
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. चीन
व्याख्या
सही उत्तर C, चीन है। चीन ने अक्टूबर 2003 में शेनझोउ-5 से यांग लिवेई को भेजा और सोवियत संघ तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद अपने राकेट और यान से मनुष्य को कक्षा में भेजने वाला तीसरा देश बना। चीन ने इसके बाद अपना अंतरिक्ष स्टेशन भी बनाया, और उसके अंतरिक्ष यात्रियों को ताइकोनॉट कहा जाता है।
विकल्प A, जापान, और विकल्प B, फ्रांस, ने अंतरिक्ष यात्री भेजे हैं, पर सदैव सोवियत, रूसी, अमेरिकी या यूरोपीय मिशनों से, अपने राष्ट्रीय मानव यान से नहीं। विकल्प D, भारत, ने अभी अपना मानव मिशन नहीं भेजा है; गगनयान ही वह पहली उड़ान होगी, और राकेश शर्मा की 1984 की उड़ान सोवियत यान से थी। यह प्रश्न स्वतंत्र क्षमता परखता है, यह नहीं कि उस देश का कोई नागरिक कभी अंतरिक्ष गया या नहीं।
गगनयान किस केंद्र से प्रक्षेपित किया जाएगा?
- A.विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, तिरुवनंतपुरम
- B.सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा
- C.अंतरिक्ष उपयोग केंद्र, अहमदाबाद
- D.यू आर राव उपग्रह केंद्र, बेंगलुरु
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा
व्याख्या
सही उत्तर B, सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा है। पीएसएलवी, जीएसएलवी और एलवीएम3 सहित भारत के सभी कक्षीय प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के तट पर स्थित श्रीहरिकोटा से होते हैं, जहाँ दो कार्यशील प्रक्षेपण मंच हैं। इस केंद्र का नाम इसरो के पूर्व अध्यक्ष सतीश धवन के नाम पर रखा गया, और 2023 का टीवी-डी1 अबॉर्ट परीक्षण भी वहीं से हुआ।
विकल्प A, विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, प्रक्षेपण यान विकसित करता है और कक्षीय मिशनों का प्रक्षेपण स्थल नहीं है। विकल्प C, अंतरिक्ष उपयोग केंद्र, पेलोड तथा उपग्रह उपयोगों पर कार्य करता है। विकल्प D, यू आर राव उपग्रह केंद्र, उपग्रह बनाता और परखता है। तीनों इसरो के केंद्र हैं, अतः प्रश्न यह जानने पर अंक देता है कि कौन केंद्र क्या करता है, और श्रीहरिकोटा की तटीय स्थिति भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जले हुए चरण सुरक्षित रूप से समुद्र में गिरते हैं।
कल्पना चावला को किस उपलब्धि के लिए स्मरण किया जाता है?
- A.अंतरिक्ष केंद्र की कमान संभालने वाली पहली भारतीय महिला
- B.अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला
- C.अंतरिक्ष में चहलकदमी करने वाली पहली भारतीय
- D.गगनयान मिशन के लिए चुनी गई पहली महिला
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला
व्याख्या
सही उत्तर B, अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला है। हरियाणा के करनाल में जन्मी कल्पना चावला ने वैमानिकी अभियंत्रण पढ़ा, अमेरिका गईं और नासा में शामिल हुईं, तथा 1997 में कोलंबिया यान से मिशन विशेषज्ञ के रूप में पहली उड़ान भरी। 1 फरवरी 2003 को पुनःप्रवेश के समय कोलंबिया के टूटने पर अपने छह साथियों के साथ उनका निधन हुआ।
विकल्प A गलत है क्योंकि उन्होंने किसी अंतरिक्ष केंद्र की कमान नहीं संभाली, और किसी भारतीय ने ऐसा नहीं किया है। विकल्प C गलत है क्योंकि उन्होंने अंतरिक्ष चहलकदमी नहीं की; भारतीय मूल के लोगों में सुनीता विलियम्स लंबी अंतरिक्ष चहलकदमी के कीर्तिमानों के लिए जानी जाती हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि फरवरी 2024 में गगनयान के लिए घोषित चारों चयनित यात्री भारतीय वायुसेना के परीक्षण पायलट थे और कल्पना चावला का निधन कार्यक्रम की घोषणा से बहुत पहले हो चुका था।
भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के दीर्घकालिक लक्ष्य के रूप में प्रस्तावित भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का नाम क्या है?
- A.भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन
- B.गगनयान स्टेशन
- C.आर्यभट्ट स्टेशन
- D.विक्रम स्टेशन
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन
व्याख्या
सही उत्तर A, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन है। सन 2023 में सरकार ने अंतरिक्ष कार्यक्रम के दीर्घकालिक लक्ष्य तय करते समय एक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन, जिसका नाम भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन रखा गया, तथा चंद्रमा पर भारतीय मानव अवतरण का लक्ष्य रखा। गगनयान दोनों की पहली सीढ़ी है, क्योंकि जीवन रक्षा, डॉकिंग, पुनःप्रवेश और बरामदगी की वही तकनीकें आवश्यक हैं।
विकल्प B गलत है क्योंकि गगनयान मानव उड़ान कार्यक्रम और उसके यान का नाम है, किसी स्टेशन का नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि आर्यभट्ट भारत का पहला उपग्रह था, जो 1975 में सोवियत सहयोग से छोड़ा गया। विकल्प D गलत है क्योंकि विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया विक्रम नाम चंद्रयान-3 के लैंडर तथा विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र को दिया गया है। प्रत्येक नाम को सही वस्तु से जोड़ना ही ऐसे प्रश्न की कसौटी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रक्षेपण यान को मानव अनुकूलित बनाने का अर्थ क्या है?
इसका अर्थ है राकेट को इस प्रकार पुनः डिज़ाइन और पुनः प्रमाणित करना कि वह मनुष्यों को ले जाने योग्य सुरक्षित हो। संरचनाएँ अधिक सुरक्षा सीमा के साथ बनती हैं, महत्वपूर्ण प्रणालियाँ प्रतिरूपी बनाई जाती हैं, यान को क्रू एस्केप सिस्टम के साथ कार्य करने योग्य बनाया जाता है, और दल की उड़ान से पहले प्रत्येक उपप्रणाली की अतिरिक्त जाँच तथा समीक्षा होती है।
टीवी-डी1 मिशन ने क्या सिद्ध किया?
21 अक्टूबर 2023 को श्रीहरिकोटा से उड़े टीवी-डी1 ने एक चरण वाले परीक्षण यान पर क्रू मॉड्यूल और क्रू एस्केप सिस्टम ले जाकर ध्वनि के निकट गति पर अबॉर्ट का आदेश दिया, क्रू मॉड्यूल अलग किया, उसे पैराशूट से उतारा और समुद्र से बरामद किया। यह एस्केप प्रणाली का पहला उड़ान प्रदर्शन था।
क्या राकेश शर्मा की उड़ान भारतीय मिशन थी?
नहीं। राकेश शर्मा भारतीय नागरिक के रूप में गए, किंतु इंटरकॉसमॉस कार्यक्रम के अंतर्गत सोवियत राकेट से छोड़े गए सोवियत यान सोयुज टी-11 से सोवियत केंद्र सैल्यूट 7 तक। भारतीय यान और भारतीय प्रक्षेपण यान वाला पहला मानव मिशन गगनयान होगा।
किन देशों ने अपने बल पर मनुष्यों को कक्षा में भेजा है?
सोवियत संघ तथा रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका, और चीन, जिसने अक्टूबर 2003 में शेनझोउ-5 से यांग लिवेई को भेजा। भारत गगनयान के माध्यम से अगला बनना चाहता है, इसीलिए इस कार्यक्रम को अत्यंत छोटे समूह में प्रवेश के रूप में देखा जाता है।
स्रोत
- गगनयान कार्यक्रम, मिशन विवरण तथा उड़ान परीक्षण अद्यतन — भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
- मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र तथा भारतीय मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम — अंतरिक्ष विभाग, भारत सरकार
- वार्षिक रिपोर्ट: अंतरिक्ष परिवहन तथा मानव अंतरिक्ष उड़ान — अंतरिक्ष विभाग, भारत सरकार


