नैनो प्रौद्योगिकी और नई सामग्री: पैमाना, कार्बन, उपयोग
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए नैनो प्रौद्योगिकी और नई सामग्री के पूरे नोट्स: नैनो पैमाना, फुलरीन, नैनोट्यूब, ग्रैफीन, क्वांटम डॉट और नैनो मिशन।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 6 मिनट

नैनो प्रौद्योगिकी एक से सौ नैनोमीटर के पैमाने पर पदार्थ के अध्ययन और उपयोग का विज्ञान है, जहाँ किसी पदार्थ का व्यवहार केवल इस पर निर्भर नहीं रहता कि वह किस चीज़ से बना है, बल्कि इस पर भी निर्भर हो जाता है कि वह कितना छोटा है। एक नैनोमीटर एक मीटर का अरबवाँ भाग होता है, इसलिए कागज़ की एक शीट लगभग एक लाख नैनोमीटर मोटी होती है। परीक्षाओं में यह विषय परिभाषाओं, खोजकर्ताओं और नोबेल पुरस्कारों के रूप में पूछा जाता है, साथ ही भारत के नैनो मिशन और कार्बन की उन संरचनाओं के रूप में जिन्होंने इस क्षेत्र को प्रसिद्धि दी। इन नोट्स में नैनो पैमाना और उसका भौतिक आधार, कार्बन परिवार, क्वांटम डॉट, स्मार्ट सामग्री, भारत का कार्यक्रम तथा उपयोग और जोखिम शामिल हैं।
नैनो पैमाना और वहाँ पदार्थ का भिन्न व्यवहार
नैनो शब्द ग्रीक शब्द नैनोस से आया है, जिसका अर्थ बौना है। एक नैनोमीटर दस एंगस्ट्रॉम के बराबर, अर्थात एक मीटर का अरबवाँ भाग होता है। पैमाने का अनुमान इस तरह लगाइए कि डीएनए की द्विकुंडली लगभग दो नैनोमीटर चौड़ी होती है, एक लाल रक्त कणिका लगभग सात हज़ार नैनोमीटर की होती है, और मनुष्य का एक बाल अस्सी हज़ार से एक लाख नैनोमीटर मोटा होता है। दो कारण बताते हैं कि नैनो कण उसी पदार्थ का छोटा टुकड़ा मात्र क्यों नहीं होता। पहला कारण पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन का अनुपात है, जो कण के विभाजित होते जाने पर तेज़ी से बढ़ता है; परमाणुओं का बहुत बड़ा भाग सतह पर आ जाता है, इसलिए पदार्थ अधिक क्रियाशील और बेहतर उत्प्रेरक बन जाता है। स्वर्ण, जो थोक रूप में रासायनिक दृष्टि से निष्क्रिय है, नैनो कणों के रूप में सक्रिय उत्प्रेरक होता है, और स्वर्ण नैनो कणों का कोलॉइड पीले के बजाय माणिक जैसा लाल दिखता है। दूसरा कारण क्वांटम परिरोध है: कण पर्याप्त छोटा होने पर उसके इलेक्ट्रॉन विविक्त ऊर्जा स्तरों में सिमट जाते हैं, वर्जित ऊर्जा अंतराल चौड़ा हो जाता है, और रंग, गलनांक तथा चालकता केवल आकार बदलने से बदलने लगते हैं।
रिचर्ड फाइनमैन का सन 1959 का व्याख्यान, देयर्स प्लेंटी ऑफ रूम ऐट द बॉटम, इस विचार का आरंभ माना जाता है, और नैनो प्रौद्योगिकी शब्द जापान के नोरियो तानिगुची ने 1974 में गढ़ा; के. एरिक ड्रेक्सलर की पुस्तक एंजिन्स ऑफ क्रिएशन ने 1986 में इसे बड़े पाठक वर्ग तक पहुँचाया। यह क्षेत्र व्यावहारिक तभी बना जब परमाणु देखे जा सके। स्कैनिंग टनलिंग सूक्ष्मदर्शी 1981 में आईबीएम ज़्यूरिख में गर्ड बिनिग और हाइनरिख रोहरर ने बनाया, और दोनों को 1986 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला; परमाणु बल सूक्ष्मदर्शी 1986 में आया और वह कुचालकों पर भी काम करता है। नैनो संरचनाएँ दो तरीकों से बनाई जाती हैं: ऊपर से नीचे, जिसमें थोक पदार्थ को तराशा जाता है, जैसे सिलिकॉन वेफर पर फोटोलिथोग्राफी करती है, और नीचे से ऊपर, जिसमें स्वतः संयोजन द्वारा परमाणु और अणु स्वयं क्रम में बैठ जाते हैं।
कार्बन परिवार
सर्वाधिक प्रसिद्ध नैनो सामग्री कार्बन देता है, क्योंकि उसके परमाणु त्रिविमीय जालक की तरह ही सपाट परतों में भी बंध बनाते हैं।
| रूप | वर्ष और खोजकर्ता | पूछे जाने वाले बिंदु |
|---|---|---|
| हीरा | - | प्रत्येक कार्बन चार अन्य से बंधित, सर्वाधिक कठोर प्राकृतिक पदार्थ, विद्युत का कुचालक |
| ग्रेफाइट | - | दुर्बल बल से जुड़ी सपाट परतें, विद्युत का चालक, स्नेहक तथा मंदक के रूप में उपयोग |
| फुलरीन सी-60 | 1985, क्रोटो, स्मॉली और कर्ल | बीस षट्कोण और बारह पंचकोण में साठ कार्बन परमाणु, फुटबॉल जैसी आकृति, बकमिंस्टर फुलर के नाम पर, रसायन का नोबेल 1996 |
| कार्बन नैनोट्यूब | 1991, सुमियो इजिमा | ग्रैफीन की लिपटी बेलनाकार नली, एक या बहु भित्तीय, भार के अनुपात में इस्पात से कहीं अधिक मजबूत, ताप और विद्युत की चालक |
| ग्रैफीन | 2004, गाइम और नोवोसेलोव | ग्रेफाइट से चिपकने वाली टेप से उठाई गई एक परमाणु मोटी मधुकोश शीट, भौतिकी का नोबेल 2010 |
क्वांटम डॉट और अन्य नैनो सामग्री
क्वांटम डॉट कुछ नैनोमीटर के अर्धचालक नैनो क्रिस्टल हैं, जिनसे निकलने वाले प्रकाश का रंग उनके आकार से तय होता है: डॉट जितना छोटा, वर्जित अंतराल उतना चौड़ा और प्रकाश उतना नीला। इनकी खोज और संश्लेषण के लिए 2023 का रसायन का नोबेल पुरस्कार मूंगी बावेंडी, लुई ब्रूस और अलेक्सेई एकिमोव को मिला, और अब इनका उपयोग टेलीविजन के पर्दों, सौर सेलों तथा उन संकेतकों में होता है जो सूक्ष्मदर्शी के नीचे ट्यूमर को दिखा देते हैं। चाँदी के नैनो कण जीवाणुरोधी होते हैं और जल शोधकों तथा घाव की पट्टियों में लगाए जाते हैं। टाइटेनियम डाइऑक्साइड और जिंक ऑक्साइड के नैनो कण पारदर्शी रहते हुए पराबैंगनी प्रकाश सोख लेते हैं, इसीलिए आज की सनस्क्रीन सफेद नहीं दिखती। डेंड्रिमर और लाइपोसोम लक्षित औषधि वितरण में वाहक का काम करते हैं। कमल प्रभाव, अर्थात नैनो स्तर पर इतनी खुरदरी सतह कि पानी लुढ़क जाए, कमल के पत्ते से लेकर स्वतः स्वच्छ रंग और कपड़े बनाने में उतारा गया है।
नई और स्मार्ट सामग्री
- आकृति स्मृति मिश्रातु: नाइटिनॉल, निकल और टाइटेनियम का मिश्रातु, गरम करने पर अपनी याद रखी आकृति में लौट आता है, और धमनी के स्टेंट तथा चश्मे के फ्रेम में लगता है।
- दाब विद्युत पदार्थ: क्वार्ट्ज़ और लेड ज़र्कोनेट टाइटेनेट दबाने पर वोल्टता देते हैं और वोल्टता लगाने पर आकृति बदलते हैं, जो गैस लाइटर, सोनार और क्वार्ट्ज़ घड़ी का आधार है।
- मेटा सामग्री: इनकी संरचना, संरचक पदार्थ नहीं, इन्हें ऋणात्मक अपवर्तनांक देती है, और यही सुपरलेंस तथा अदृश्यता के शोध का आधार है।
- एयरजेल: सिलिका का झाग जो लगभग निन्यानबे प्रतिशत वायु है, जिसे जमा हुआ धुआँ कहा जाता है, पहली बार सैमुअल किस्टलर ने 1931 में बनाया, और जो ज्ञात सर्वोत्तम ताप रोधकों में है।
- अतिचालक: ये क्रांतिक ताप से नीचे शून्य प्रतिरोध के साथ धारा ले जाते हैं। हाइके कामरलिंग ओनेस ने 1911 में पारे में यह प्रभाव पाया; अतिचालक माइस्नर प्रभाव से चुंबकीय क्षेत्र बाहर कर देता है और इसलिए चुंबक को तैरा देता है, और यित्रियम बेरियम कॉपर ऑक्साइड जैसे क्यूप्रेट द्रव नाइट्रोजन के क्वथनांक से ऊपर भी काम करते हैं।
- संमिश्र: केवलर, एक ऐरामिड रेशा जिसे 1965 में डुपोंट में स्टेफनी क्वोलेक ने बनाया, बुलेटप्रूफ जैकेट में लगता है, और कार्बन रेशा प्रबलित बहुलक वायुयानों तथा प्रक्षेपण यानों में काम आता है।
- जैव अपघटनीय बहुलक: मक्का या गन्ने के मंड से बना पॉलीलैक्टिक अम्ल पैकेजिंग में साधारण प्लास्टिक की जगह लेता है।
भारत का नैनो मिशन और उपयोग
भारत ने 2001 में नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पहल से आरंभ किया, और नैनो मिशन 2007 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत शुरू हुआ, जिसके संचालन निकाय के अध्यक्ष प्रोफेसर सी. एन. आर. राव थे; इसका काम क्षमता निर्माण, आधारभूत ढाँचा और प्रयोगशाला के परिणामों को उत्पाद तक पहुँचाना है। मोहाली का नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, हैदराबाद का अंतरराष्ट्रीय चूर्ण धातुकर्म एवं नव सामग्री उन्नत शोध केंद्र तथा बेंगलुरु का नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज केंद्र वे संस्थान हैं जिनके नाम प्रश्नपत्रों में आते हैं। विद्यार्थी को जो उपयोग गिनाने आने चाहिए वे हैं लक्षित औषधि वितरण, पेयजल के लिए नैनो निस्यंदन झिल्ली और चाँदी आधारित फिल्टर, लिथियम आयन बैटरी के इलेक्ट्रोड, वे अर्धचालक चिप जिनका आकार नैनोमीटर में बताया जाता है, पेरोव्स्काइट तथा रंजक संवेदित सौर सेल, गैस और जैव संवेदक, दाग रोधी वस्त्र और अधिक टिकाऊ खाद्य पैकेजिंग। जोखिम भी पूछे जाते हैं: साँस के साथ भीतर जाने योग्य कण रक्त प्रवाह तक पहुँच सकता है, इसलिए नैनो विषालुता, कचरे का निपटान और मानकों का अभाव वे बिंदु हैं जिनका उल्लेख विवरणात्मक उत्तर में होना चाहिए।
परीक्षा की दृष्टि से
वस्तुनिष्ठ प्रश्नपत्र पहले एक पंक्ति के तथ्य पूछते हैं: नैनोमीटर का मान, शब्द किसने गढ़ा और 1959 का व्याख्यान किसने दिया, फुलरीन, नैनोट्यूब तथा ग्रैफीन के खोज वर्ष और उनके नोबेल पुरस्कार, नैनो मिशन का वर्ष और विभाग, तथा नाइटिनॉल का संघटन। सामान्य भ्रम हैं फाइनमैन और तानिगुची को आपस में बदल देना, सी-60 के बीस षट्कोण और बारह पंचकोण उलट देना, ग्रैफीन को भौतिकी के बजाय रसायन का पुरस्कार दे देना, और 2004 को, जो पृथक्करण का वर्ष है, नोबेल का वर्ष समझ लेना। संघ और राज्य लोक सेवा के विवरणात्मक प्रश्न पूछते हैं कि नैनो पैमाने पर पदार्थ का व्यवहार क्यों बदलता है, इसलिए पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन का अनुपात तथा क्वांटम परिरोध दो कारणों के रूप में लिखने चाहिए, उसके बाद चिकित्सा, जल, ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिकी के उपयोग, और अंत में नैनो विषालुता तथा मानकों के अभाव पर एक पंक्ति।
महत्वपूर्ण तथ्य
| एक नैनोमीटर | एक मीटर का अरबवाँ भाग या दस एंगस्ट्रॉम; कार्य परास एक से सौ नैनोमीटर |
|---|---|
| शब्द गढ़ा | जापान के नोरियो तानिगुची ने, सन 1974 में |
| संस्थापक व्याख्यान | देयर्स प्लेंटी ऑफ रूम ऐट द बॉटम, रिचर्ड फाइनमैन, 1959 |
| फुलरीन सी-60 | 1985, हैरोल्ड क्रोटो, रिचर्ड स्मॉली और रॉबर्ट कर्ल; रसायन का नोबेल 1996 |
| कार्बन नैनोट्यूब | सुमियो इजिमा द्वारा 1991 में सूचित |
| ग्रैफीन | 2004 में आंद्रे गाइम और कोंस्तांतिन नोवोसेलोव ने अलग किया; भौतिकी का नोबेल 2010 |
| स्कैनिंग टनलिंग सूक्ष्मदर्शी | 1981, गर्ड बिनिग और हाइनरिख रोहरर, आईबीएम ज़्यूरिख; भौतिकी का नोबेल 1986 |
| क्वांटम डॉट | रसायन का नोबेल 2023, मूंगी बावेंडी, लुई ब्रूस और अलेक्सेई एकिमोव को |
| भारत का नैनो मिशन | 2001 की पहल के बाद, 2007 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत आरंभ |
| नैनो संस्थान | नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान मोहाली; एआरसीआई हैदराबाद; सीईएनएस बेंगलुरु |
| नाइटिनॉल | निकल और टाइटेनियम का आकृति स्मृति मिश्रातु, स्टेंट तथा चश्मे के फ्रेम में प्रयुक्त |
| एयरजेल | लगभग निन्यानबे प्रतिशत वायु वाला सिलिका झाग, पहली बार सैमुअल किस्टलर ने 1931 में बनाया |
| अतिचालकता | हाइके कामरलिंग ओनेस ने 1911 में पारे में पाई; माइस्नर प्रभाव चुंबकीय क्षेत्र बाहर करता है |
| केवलर | स्टेफनी क्वोलेक ने 1965 में डुपोंट में बनाया ऐरामिड रेशा, बुलेटप्रूफ जैकेट में प्रयुक्त |
| मेटा सामग्री | ऋणात्मक अपवर्तनांक वाली अभियंत्रित संरचना, सुपरलेंस तथा अदृश्यता के शोध में |
| निर्माण के दो मार्ग | ऊपर से नीचे, थोक पदार्थ तराशकर, और नीचे से ऊपर, परमाणुओं के स्वतः संयोजन से |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
एक नैनोमीटर निम्नलिखित में से किसके बराबर होता है?
- A.एक मीटर का दस लाखवाँ भाग
- B.एक मीटर का अरबवाँ भाग
- C.एक मीटर का हज़ारवाँ भाग
- D.एक मीटर का खरबवाँ भाग
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. एक मीटर का अरबवाँ भाग
व्याख्या
सही उत्तर B, एक मीटर का अरबवाँ भाग है। नैनो उपसर्ग का अर्थ दस की घात ऋण नौ है, इसलिए एक नैनोमीटर एक मीटर का अरबवाँ भाग होता है, जो दस एंगस्ट्रॉम के भी बराबर है, और नैनो प्रौद्योगिकी की परिभाषा एक से सौ नैनोमीटर की पट्टी में किए गए कार्य के रूप में दी जाती है। विकल्प A गलत है क्योंकि एक मीटर का दस लाखवाँ भाग माइक्रोमीटर या माइक्रॉन होता है, जो जीवाणुओं तथा बाल की मोटाई के लिए प्रयुक्त इकाई है और नैनोमीटर से एक हज़ार गुना बड़ा है। विकल्प C गलत है क्योंकि एक मीटर का हज़ारवाँ भाग मिलीमीटर है, जो किसी भी पैमाने पर आँख से दिखता है। विकल्प D गलत है क्योंकि एक मीटर का खरबवाँ भाग पिकोमीटर है, जो अणु के भीतर बंध लंबाई के लिए प्रयुक्त होता है और नैनोमीटर से एक हज़ार गुना छोटा है; परमाणु का व्यास लगभग सौ पिकोमीटर की कोटि का होता है।
"नैनो प्रौद्योगिकी" शब्द किसने गढ़ा था?
- A.रिचर्ड फाइनमैन
- B.नोरियो तानिगुची
- C.के. एरिक ड्रेक्सलर
- D.सुमियो इजिमा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. नोरियो तानिगुची
व्याख्या
सही उत्तर B, नोरियो तानिगुची है। जापानी अभियंता नोरियो तानिगुची ने 1974 में नैनो प्रौद्योगिकी शब्द का प्रयोग एक नैनोमीटर की परिशुद्धता वाली मशीनिंग के लिए किया, और परीक्षा में यही शब्द गढ़ने का श्रेय अपेक्षित है। विकल्प A गलत है और यही आम भ्रम है: रिचर्ड फाइनमैन ने 1959 में प्रसिद्ध व्याख्यान देयर्स प्लेंटी ऑफ रूम ऐट द बॉटम दिया, जिसमें एक एक परमाणु से रचना करने का विचार रखा गया, परंतु उन्होंने यह शब्द कभी प्रयोग नहीं किया, इसलिए उन्हें विचार का श्रेय मिलता है, शब्द का नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि के. एरिक ड्रेक्सलर ने 1986 की अपनी पुस्तक एंजिन्स ऑफ क्रिएशन और आण्विक नैनो प्रौद्योगिकी पद से इस शब्द को लोकप्रिय बनाया, जो लोकप्रियकरण है, शब्द गढ़ना नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि सुमियो इजिमा ने 1991 में कार्बन नैनोट्यूब की सूचना दी, जो महत्वपूर्ण सामग्री है पर क्षेत्र के नामकरण से बहुत बाद की है।
नैनो प्रौद्योगिकी का आरंभ माना जाने वाला सन 1959 का व्याख्यान "देयर्स प्लेंटी ऑफ रूम ऐट द बॉटम" किसने दिया था?
- A.रिचर्ड फाइनमैन
- B.अल्बर्ट आइंस्टाइन
- C.गर्ड बिनिग
- D.हैरोल्ड क्रोटो
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. रिचर्ड फाइनमैन
व्याख्या
सही उत्तर A, रिचर्ड फाइनमैन है। अमेरिकी भौतिकविद् रिचर्ड फाइनमैन ने दिसंबर 1959 में कैलटेक में अमेरिकन फिजिकल सोसाइटी के समक्ष देयर्स प्लेंटी ऑफ रूम ऐट द बॉटम व्याख्यान दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि भौतिकी का कोई नियम एक एक परमाणु को संचालित करने से नहीं रोकता, और यही व्याख्यान नैनो प्रौद्योगिकी का वैचारिक जन्म माना जाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि अल्बर्ट आइंस्टाइन, जिनका निधन 1955 में हुआ, सापेक्षता, प्रकाश विद्युत प्रभाव और ब्राउनी गति पर काम करते थे और इस व्याख्यान से उनका कोई संबंध नहीं था। विकल्प C गलत है क्योंकि गर्ड बिनिग ने 1981 में हाइनरिख रोहरर के साथ आईबीएम ज़्यूरिख में स्कैनिंग टनलिंग सूक्ष्मदर्शी बनाया, अर्थात क्षेत्र को आँखें दीं, संस्थापक विचार नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि हैरोल्ड क्रोटो को 1985 में फुलरीन की खोज के लिए 1996 का रसायन का नोबेल पुरस्कार साझा रूप में मिला।
बकमिंस्टर फुलरीन (सी-60) बीस षट्कोणीय फलकों और कितने पंचकोणीय फलकों से बना होता है?
- A.12
- B.20
- C.32
- D.60
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. 12
व्याख्या
सही उत्तर A, 12 है। सन 1985 में खोजे गए बकमिंस्टर फुलरीन में साठ कार्बन परमाणु बीस षट्कोणों और बारह पंचकोणों के बंद पिंजरे में सजे होते हैं, ठीक सिले हुए फुटबॉल के प्रतिरूप में, और ये बारह पंचकोण ही सपाट षट्कोणीय शीट को मुड़कर बंद गेंद बनने देते हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि बीस षट्कोणीय फलकों की संख्या है, जो प्रश्न स्वयं दे रहा है, और इन दोनों संख्याओं की अदला बदली इस प्रश्न का सामान्य भ्रम है। विकल्प C गलत है क्योंकि बत्तीस अणु के कुल फलकों की संख्या है, अर्थात बीस और बारह का योग, केवल पंचकोणों की संख्या नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि साठ कार्बन परमाणुओं अर्थात पिंजरे के शीर्षों की संख्या है, और अणु का नाम वास्तुकार बकमिंस्टर फुलर के नाम पर रखा गया, जिनके जियोडेसिक गुंबदों से यह मिलता जुलता है।
कार्बन नैनोट्यूब की पहली सूचना सन 1991 में किस वैज्ञानिक ने दी थी?
- A.हैरोल्ड क्रोटो
- B.सुमियो इजिमा
- C.आंद्रे गाइम
- D.रिचर्ड स्मॉली
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सुमियो इजिमा
व्याख्या
सही उत्तर B, सुमियो इजिमा है। जापानी भौतिकविद् सुमियो इजिमा ने, जो तब एनईसी प्रयोगशाला में थे, 1991 में पारगमन इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की सहायता से बहु भित्तीय कार्बन नैनोट्यूब की सूचना दी, और यही वर्ष तथा नाम पूछा जाता है। नैनोट्यूब ग्रैफीन की शीट को बेलन में लपेटने से बनी संरचना है, समान भार पर इस्पात से लगभग सौ गुना मजबूत है, और ताप तथा विद्युत की बहुत अच्छी चालक है। विकल्प A गलत है क्योंकि हैरोल्ड क्रोटो 1985 की फुलरीन खोज का हिस्सा थे और उन्हें 1996 का रसायन का नोबेल साझा रूप में मिला। विकल्प C गलत है क्योंकि आंद्रे गाइम ने 2004 में मैनचेस्टर में कोंस्तांतिन नोवोसेलोव के साथ ग्रैफीन अलग किया और 2010 का भौतिकी का नोबेल साझा किया। विकल्प D गलत है क्योंकि रिचर्ड स्मॉली भी 1985 की फुलरीन टीम के थे, जो संबंधित पर पहले की खोज है।
आंद्रे गाइम और कोंस्तांतिन नोवोसेलोव को ग्रैफीन पर प्रयोगों के लिए भौतिकी का नोबेल पुरस्कार किस वर्ष मिला?
- A.2004
- B.2008
- C.2010
- D.2014
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 2010
व्याख्या
सही उत्तर C, 2010 है। मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के आंद्रे गाइम और कोंस्तांतिन नोवोसेलोव को ग्रैफीन पर अग्रगामी प्रयोगों के लिए 2010 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार साझा रूप में मिला; ग्रैफीन कार्बन की एक परमाणु मोटी शीट है, जिसे उन्होंने साधारण चिपकने वाली टेप से ग्रेफाइट से उठाया था। विकल्प A गलत है क्योंकि 2004 स्वयं पृथक्करण का वर्ष है, और खोज तथा पुरस्कार के बीच का यह अंतर ही इस प्रश्न का भ्रम है। विकल्प B गलत है क्योंकि 2008 का भौतिकी का नोबेल टूटी सममिति और क्वार्क से जुड़े कार्य को मिला था, जिसका ग्रैफीन से कोई संबंध नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि 2014 का भौतिकी का नोबेल नीली प्रकाश उत्सर्जक डायोड के लिए दिया गया, जो सामग्री क्षेत्र की भिन्न उपलब्धि है। ग्रैफीन अब तक परखा गया सर्वाधिक मजबूत पदार्थ, उत्तम चालक और लगभग पूर्णतः पारदर्शी है।
सन 2007 में आरंभ भारत का नैनो मिशन भारत सरकार के किस विभाग के अंतर्गत चलाया जाता है?
- A.रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन
- B.विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग
- C.परमाणु ऊर्जा विभाग
- D.इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग
व्याख्या
सही उत्तर B, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग है। नैनो मिशन, जिसका पूरा नाम नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मिशन है, सन 2007 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत आरंभ हुआ, जो 2001 से नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पहल पहले से चला रहा था, और मिशन मूल शोध, मानव संसाधन, आधारभूत ढाँचे तथा परिणामों को उद्योग तक पहुँचाने पर काम करता है। विकल्प A गलत है क्योंकि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन रक्षा केंद्रित सामग्री शोध को धन देता है, पर नैनो मिशन नहीं चलाता। विकल्प C गलत है क्योंकि परमाणु ऊर्जा विभाग नाभिकीय बिजली, रिएक्टर तथा भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र जैसे संस्थानों को देखता है। विकल्प D गलत है क्योंकि इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय इलेक्ट्रॉनिकी निर्माण और डिजिटल कार्यक्रम सँभालता है, जिसका नैनो प्रौद्योगिकी से मेल केवल चिप पर होता है।
सर्वाधिक प्रसिद्ध आकृति स्मृति मिश्रातु नाइटिनॉल किन दो धातुओं का मिश्रातु है?
- A.निकल और टाइटेनियम
- B.निकल और टिन
- C.नायोबियम और टैंटेलम
- D.निकल और टंगस्टन
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. निकल और टाइटेनियम
व्याख्या
सही उत्तर A, निकल और टाइटेनियम है। नाइटिनॉल लगभग समान मात्रा में निकल और टाइटेनियम का मिश्रातु है, और इसका नाम भी यही दर्ज करता है, क्योंकि वह निकल, टाइटेनियम तथा नेवल ऑर्डनेंस लैबोरेटरी से बना है, जहाँ इसे विकसित किया गया। संक्रमण ताप से ऊपर गरम करने पर यह उस आकृति में लौट आता है जो इसे याद कराई गई थी, और यह अति प्रत्यास्थ भी है, इसीलिए इसका उपयोग धमनी के स्टेंट, दंत चिकित्सा के तारों, चश्मे के फ्रेम तथा प्रवर्तकों में होता है। विकल्प B गलत है क्योंकि निकल और टिन से साधारण लेपन तथा बियरिंग मिश्रातु बनते हैं, जिनमें आकृति स्मृति प्रभाव नहीं होता। विकल्प C गलत है क्योंकि नायोबियम और टैंटेलम उच्चतापसह धातुएँ हैं, जो क्रमशः अतिचालक चुंबकों और संधारित्रों में प्रयुक्त होती हैं, और उनके मिश्रातु आकृति स्मृति सामग्री नहीं हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि निकल और टंगस्टन के मिश्रातु कठोरता तथा उच्च ताप पर मजबूती के लिए चुने जाते हैं।
सन 1911 में हाइके कामरलिंग ओनेस ने अतिचालकता की खोज किस धातु में की थी?
- A.सीसा
- B.पारा
- C.नायोबियम
- D.टिन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पारा
व्याख्या
सही उत्तर B, पारा है। सन 1911 में डच भौतिकविद् हाइके कामरलिंग ओनेस ने, जिन्होंने पहले ही हीलियम को द्रवित कर लिया था, पारे को लगभग चार केल्विन तक ठंडा किया और पाया कि उसका विद्युत प्रतिरोध पूर्णतः लुप्त हो गया; यही अतिचालकता की खोज है, जिसके लिए उन्हें 1913 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला। विकल्प A गलत है क्योंकि सीसे में अतिचालकता कुछ ही समय बाद, 1913 में दिखाई गई, इसलिए वह बाद की पुष्टि है और यहाँ का परंपरागत भ्रम है। विकल्प C गलत है क्योंकि नायोबियम, हालाँकि सर्वाधिक क्रांतिक ताप वाला तात्विक अतिचालक और अधिकांश अतिचालक चुंबकों की सामग्री है, बहुत बाद में पहचाना गया। विकल्प D गलत है क्योंकि टिन भी पारे के बाद आया। अतिचालक अपने भीतर से चुंबकीय क्षेत्र भी बाहर कर देता है, जिसे माइस्नर प्रभाव कहते हैं, और इसी से चुंबक उसके ऊपर तैरता है।
सन 2023 का रसायन का नोबेल पुरस्कार किस नैनो सामग्री की खोज और संश्लेषण के लिए दिया गया?
- A.ग्रैफीन
- B.क्वांटम डॉट
- C.कार्बन नैनोट्यूब
- D.एयरजेल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. क्वांटम डॉट
व्याख्या
सही उत्तर B, क्वांटम डॉट है। सन 2023 का रसायन का नोबेल पुरस्कार मूंगी बावेंडी, लुई ब्रूस और अलेक्सेई एकिमोव को क्वांटम डॉट की खोज तथा संश्लेषण के लिए मिला; ये अर्धचालक नैनो क्रिस्टल हैं, जिनसे निकलने वाले प्रकाश का रंग क्वांटम परिरोध के कारण उनके आकार पर निर्भर करता है, और जिनका उपयोग टेलीविजन के पर्दों, प्रकाश उत्सर्जक डायोड तथा जैविक संकेतकों में होता है। विकल्प A गलत है क्योंकि ग्रैफीन को 2010 में रसायन का नहीं, भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला था। विकल्प C गलत है क्योंकि 1991 में सुमियो इजिमा द्वारा सूचित कार्बन नैनोट्यूब पर कभी नोबेल पुरस्कार नहीं दिया गया, जबकि उससे जुड़े फुलरीन को 1996 में रसायन का पुरस्कार मिला था। विकल्प D गलत है क्योंकि 1931 में सैमुअल किस्टलर द्वारा पहली बार बनाए गए एयरजेल को भी अपना कोई नोबेल पुरस्कार नहीं मिला है।
सन 1981 में आईबीएम ज़्यूरिख में बना कौन सा उपकरण पहली बार किसी सतह पर अलग अलग परमाणुओं का प्रतिबिंब ले सका?
- A.स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी
- B.परमाणु बल सूक्ष्मदर्शी
- C.स्कैनिंग टनलिंग सूक्ष्मदर्शी
- D.पारगमन इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. स्कैनिंग टनलिंग सूक्ष्मदर्शी
व्याख्या
सही उत्तर C, स्कैनिंग टनलिंग सूक्ष्मदर्शी है। गर्ड बिनिग और हाइनरिख रोहरर ने इसे 1981 में ज़्यूरिख की आईबीएम प्रयोगशाला में बनाया; एक नुकीली धातु की नोक चालक सतह से नैनोमीटर के अंश भर ऊपर चलाई जाती है और नोक तथा नमूने के बीच की क्वांटम टनलिंग धारा एक एक परमाणु का नक्शा बना देती है, और इसी कार्य पर उन्हें 1986 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला। विकल्प A गलत है क्योंकि स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी बहुत कम विभेदन पर सतह की आकृति दिखाता है और एक एक परमाणु को नहीं सुलझा सकता। विकल्प B गलत है क्योंकि परमाणु बल सूक्ष्मदर्शी 1986 में, टनलिंग सूक्ष्मदर्शी के बाद आया, हालाँकि उसका लाभ यह है कि वह कुचालकों पर भी काम करता है। विकल्प D गलत है क्योंकि अर्न्स्ट रुस्का द्वारा उन्नीस सौ तीस के दशक में बनाया गया पारगमन इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी सतह को स्कैन करने के बजाय पतले नमूने के आर पार देखता है।
एक ही पदार्थ के थोक रूप की तुलना में नैनो कणों के कहीं अधिक रासायनिक क्रियाशील होने का मुख्य कारण है उनका:
- A.कम गलनांक
- B.पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन का बहुत उच्च अनुपात
- C.अधिक घनत्व
- D.अलग अलग परमाणुओं का बड़ा आकार
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन का बहुत उच्च अनुपात
व्याख्या
सही उत्तर B, पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन का बहुत उच्च अनुपात है। जब कोई ठोस नैनो कणों में बाँटा जाता है तो द्रव्यमान वही रहते हुए उसका कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल बहुत बढ़ जाता है, इसलिए परमाणुओं का बहुत बड़ा भाग अपूर्ण बंधों के साथ सतह पर खुला पड़ा होता है; रासायनिक अभिक्रियाएँ सतहों पर होती हैं, अतः क्रियाशीलता और उत्प्रेरक क्षमता तेज़ी से बढ़ जाती है, और इसी कारण स्वर्ण छड़ के रूप में निष्क्रिय पर नैनो कणों के रूप में उत्प्रेरक होता है। विकल्प A गलत है क्योंकि गलनांक का घटना स्वयं उसी पृष्ठीय प्रभाव का परिणाम है, क्रियाशीलता का कारण नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि नैनो कण का घनत्व मूलतः थोक पदार्थ के ही बराबर होता है और वह क्रियाशीलता नहीं बढ़ाता। विकल्प D गलत है क्योंकि परमाणुओं का आकार अपरिवर्तित रहता है; केवल कण छोटा होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नैनो प्रौद्योगिकी का आकार परास क्या है?
एक से सौ नैनोमीटर। एक नैनोमीटर से नीचे काम एकल परमाणुओं और अणुओं पर होता है, और सौ से ऊपर आकार पर निर्भर विशेष गुण मिट जाते हैं तथा पदार्थ थोक रूप की तरह व्यवहार करता है।
ग्रैफीन को द्विविमीय पदार्थ क्यों कहा जाता है?
क्योंकि ग्रैफीन की शीट एक परमाणु मोटी होती है, अतः उसमें लंबाई और चौड़ाई है पर व्यवहारतः मोटाई नहीं। उसके कार्बन परमाणु मधुकोश जालक में बैठे होते हैं, जो उसे परखा गया सबसे मजबूत पदार्थ और उत्तम चालक बनाता है।
फुलरीन, नैनोट्यूब और ग्रैफीन में अंतर क्या है?
तीनों कार्बन के रूप हैं। फुलरीन बंद पिंजरा है, जैसे साठ परमाणु वाला फुटबॉल; नैनोट्यूब ग्रैफीन शीट को बेलन में लपेटकर बनती है; और ग्रैफीन स्वयं वह सपाट एक परमाणु मोटी शीट है।
भारत का नैनो मिशन कब और किसके अंतर्गत आरंभ हुआ?
सन 2007 में, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत, 2001 की नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पहल के बाद। इसके संचालन निकाय के अध्यक्ष प्रोफेसर सी. एन. आर. राव थे।
नैनो प्रौद्योगिकी के जोखिम क्या हैं?
साँस के साथ भीतर जाने योग्य कण रक्त प्रवाह में पहुँचकर कोशिका झिल्ली पार कर सकते हैं, इसलिए नैनो विषालुता, कारखानों में व्यावसायिक संपर्क, नैनो कचरे का निपटान और परीक्षण मानकों का अभाव सामान्य चिंताएँ हैं।
एक ही पदार्थ के क्वांटम डॉट भिन्न रंगों में क्यों चमकते हैं?
क्वांटम परिरोध के कारण। छोटा डॉट अपने इलेक्ट्रॉनों को चौड़े ऊर्जा अंतराल में दबा देता है, इसलिए वह छोटी तरंगदैर्ध्य का नीला प्रकाश देता है, जबकि उसी पदार्थ का बड़ा डॉट अधिक लाल प्रकाश देता है।
स्रोत
- नैनो मिशन: नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मिशन — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार
- भौतिकी का नोबेल पुरस्कार 2010: ग्रैफीन — नोबेल फाउंडेशन
- रसायन का नोबेल पुरस्कार 2023: क्वांटम डॉट — नोबेल फाउंडेशन
- रसायन विज्ञान, कक्षा ग्यारह, इकाई: पी-ब्लॉक तत्व, कार्बन के अपररूप — एनसीईआरटी





