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GK24
GK नोट्सविज्ञान और प्रौद्योगिकीउपग्रह कक्षाओं के प्रकार और अंतरिक्ष मलबा

उपग्रह कक्षाओं के प्रकार और अंतरिक्ष मलबा: LEO, GEO और केसलर

उपग्रह कक्षाओं और अंतरिक्ष मलबे पर परीक्षा केंद्रित नोट्स: LEO, MEO, GEO, सूर्य-तुल्यकालिक और स्थानांतरण कक्षा, केसलर सिंड्रोम, मिशन शक्ति और प्रोजेक्ट नेत्र।

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उपग्रह कक्षाओं के प्रकार और अंतरिक्ष मलबा: LEO, GEO और केसलर — GK24 title card
उपग्रह कक्षाओं के प्रकार और अंतरिक्ष मलबा: LEO, GEO और केसलर — GK24 title card

उपग्रह वह पिंड है जो किसी बड़े पिंड की परिक्रमा करता है। चंद्रमा पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह है; हमने जो हज़ारों यान छोड़े हैं वे कृत्रिम उपग्रह हैं। उपग्रह किस कक्षा में रखा गया है, यही तय करता है कि वह क्या कर सकेगा। जिस मौसम उपग्रह को पृथ्वी के उसी आधे भाग पर नज़र रखनी है, उसकी कक्षा उस मानचित्रण उपग्रह से बिलकुल अलग होगी जिसे ग्रह के हर हिस्से के ऊपर से गुज़रना है। जिन कक्षाओं से ये अभियान संभव होते हैं, वे अब पुराने प्रक्षेपणों के बचे-खुचे टुकड़ों से भरी हैं, और यह मलबा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन समेत हर अंतरिक्ष एजेंसी के लिए रोज़ की समस्या बन गया है। यूपीएससी, एसएससी, रेलवे और रक्षा परीक्षाओं के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी खंड में इस विषय से प्रश्न आते हैं।

उपग्रह कक्षा में कैसे टिका रहता है

उपग्रह कक्षा में इसलिए टिका रहता है कि पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण ठीक उतना अभिकेंद्र बल देता है जितना उसकी सीधी रेखा वाली गति को वक्र में मोड़ने के लिए चाहिए। कक्षा जितनी ऊँची, खिंचाव उतना कमज़ोर और उपग्रह की चाल उतनी धीमी; इसलिए एक परिक्रमा का समय, जिसे कक्षीय आवर्तकाल कहते हैं, ऊँचाई के साथ बढ़ता है। यही एक संबंध आगे की सारी बात समझा देता है: पृथ्वी के पास वाला उपग्रह लगभग नब्बे मिनट में चक्कर पूरा कर लेता है, जबकि दूर वाला पूरा दिन लेता है। वायुमंडल के ठीक ऊपर वृत्तीय कक्षा में जाने के लिए आवश्यक न्यूनतम चाल लगभग 7.9 किलोमीटर प्रति सेकंड है, जिसे प्रथम ब्रह्मांडीय वेग कहते हैं; पृथ्वी से पलायन वेग लगभग 11.2 किलोमीटर प्रति सेकंड है।

ऊँचाई के अनुसार कक्षाएँ

कक्षापृथ्वी से ऊँचाईसामान्य उपयोग
निम्न भू कक्षा (LEO)लगभग 160 से 2,000 किमीपृथ्वी प्रेक्षण, अंतरिक्ष स्टेशन, अधिकांश सुदूर संवेदन उपग्रह
मध्यम भू कक्षा (MEO)लगभग 2,000 से 35,786 किमीजीपीएस जैसे नौवहन समूह, लगभग 20,200 किमी पर
भूस्थिर कक्षा (GEO)35,786 किमी, भूमध्य रेखा के ऊपरसंचार, प्रसारण और मौसम निगरानी
उच्च भू कक्षा35,786 किमी से ऊपरअंतरिक्ष दूरबीन और गहन अंतरिक्ष संपर्क

इस खंड में भूस्थिर कक्षा सबसे अधिक पूछी जाती है। यह भूमध्य रेखा से 35,786 किलोमीटर ऊपर है, इसका झुकाव शून्य है और इसका आवर्तकाल एक नक्षत्र दिवस यानी 23 घंटे 56 मिनट 4 सेकंड है। चूँकि उपग्रह उतने ही समय में और उसी दिशा में चक्कर लगाता है जिसमें पृथ्वी घूमती है, वह भूमध्य रेखा के एक बिंदु के ऊपर टँगा दिखता है, इसलिए ज़मीन का डिश एक ही दिशा में स्थायी रूप से लगाया जा सकता है। यह विचार लेखक आर्थर सी. क्लार्क ने 1945 में लोकप्रिय किया, इसीलिए इसे क्लार्क कक्षा भी कहते हैं। भारत के इनसैट और जीसैट संचार उपग्रह यहीं रहते हैं।

जानने योग्य विशेष कक्षाएँ

  • भू-तुल्यकालिक कक्षा: आवर्तकाल एक दिन का होता है पर कक्षा झुकी होती है, इसलिए उपग्रह आकाश में स्थिर दिखने के बजाय आठ के अंक जैसा पथ बनाता है। भारत का नाविक समूह तीन उपग्रह भूस्थिर कक्षा में और चार झुकी भू-तुल्यकालिक कक्षाओं में रखने के ढंग से बना है।
  • सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा: लगभग ध्रुवीय कक्षा, सामान्यतः 600 से 900 किलोमीटर ऊँची और लगभग 98 अंश झुकाव वाली, जिससे यह प्रतिगामी हो जाती है। इसका तल पृथ्वी की सूर्य-परिक्रमा के साथ घूमता है, इसलिए उपग्रह हर दिन एक ही स्थानीय सौर समय पर भूमध्य रेखा पार करता है और चित्रों की छायाएँ तुलनीय रहती हैं। कार्टोसैट, रिसोर्ससैट और ओशनसैट श्रेणी के उपग्रह इसी का उपयोग करते हैं।
  • भूस्थिर स्थानांतरण कक्षा: अत्यधिक दीर्घवृत्तीय प्रतीक्षा कक्षा, जिसका उपभू कम और अपभू लगभग 36,000 किलोमीटर होता है। प्रक्षेपण यान उपग्रह को यहाँ छोड़ता है और फिर उपग्रह का अपना अपभू मोटर कक्षा को वृत्तीय बनाता है।
  • मोल्निया कक्षा: लगभग 63.4 अंश झुकाव वाली अत्यधिक दीर्घवृत्तीय कक्षा, जिसका आवर्तकाल करीब बारह घंटे है और जो ऊँचे अक्षांशों पर लंबा कवरेज देती है।
  • कब्रगाह कक्षा: भूस्थिर पट्टी से कुछ सौ किलोमीटर ऊपर की निपटान कक्षा, जहाँ सेवानिवृत्त होता संचार उपग्रह धकेल दिया जाता है ताकि वह किसी चालू स्थान को न रोके।
  • लैग्रेंज बिंदु: वे स्थितियाँ जहाँ दो बड़े पिंडों का खिंचाव और कक्षीय गति संतुलित हो जाते हैं। भारत का आदित्य-एल1 सौर वेधशाला सूर्य-पृथ्वी बिंदु L1 के चारों ओर हेलो कक्षा में रखा गया, जो पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर है।

अंतरिक्ष मलबा

अंतरिक्ष मलबा या कक्षीय मलबा वह हर मानव निर्मित वस्तु है जो कक्षा में है पर किसी काम की नहीं: मृत उपग्रह, खर्च हो चुके रॉकेट चरण, विस्फोट और टक्कर से निकले टुकड़े, बोल्ट, लेंस के ढक्कन और रंग की परतें तक। निम्न भू कक्षा में ये वस्तुएँ सात से आठ किलोमीटर प्रति सेकंड की चाल से चलती हैं और दो वस्तुएँ दस किलोमीटर प्रति सेकंड या उससे अधिक की सापेक्ष चाल से मिल सकती हैं। इस चाल पर कंचे के आकार का टुकड़ा भी छोटे बम जितनी ऊर्जा रखता है, इसलिए जिसे ट्रैक भी नहीं किया जा सकता वह मलबा चालू उपग्रह को नष्ट कर सकता है। मलबे के कारण संचालकों को टक्कर बचाव युक्तियों पर ईंधन खर्च करना पड़ता है और मानव अभियानों पर खतरा बढ़ता है।

केसलर सिंड्रोम और बड़ी घटनाएँ

वर्ष 1978 में अमेरिकी वैज्ञानिक डोनाल्ड जे. केसलर ने ऐसी स्थिति का वर्णन किया जिसमें निम्न भू कक्षा में वस्तुओं का घनत्व इतना बढ़ जाए कि एक टक्कर से निकले टुकड़े आगे और टक्करें कराएँ और यह श्रृंखला कुछ कक्षाओं को पीढ़ियों तक अनुपयोगी बना दे। इस भागती प्रक्रिया को केसलर सिंड्रोम कहते हैं। दो घटनाओं ने यह खतरा ठोस कर दिया। जनवरी 2007 में चीन ने उपग्रह भेदी परीक्षण में अपना ही मौसम उपग्रह फेंगयुन-1सी नष्ट किया, जिससे इतिहास का सबसे बड़ा ट्रैक करने योग्य मलबा बादल बना। फरवरी 2009 में चालू अमेरिकी संचार उपग्रह इरीडियम 33 और निष्क्रिय रूसी उपग्रह कॉसमॉस 2251 साइबेरिया के ऊपर टकरा गए, जो दो साबुत उपग्रहों के बीच पहली बड़ी आकस्मिक टक्कर थी। भारत ने अपना उपग्रह भेदी परीक्षण मिशन शक्ति 27 मार्च 2019 को किया, जब रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के अवरोधक ने ओडिशा के डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम द्वीप से उड़कर लगभग 283 किलोमीटर की ऊँचाई पर माइक्रोसैट-आर उपग्रह नष्ट किया; कम ऊँचाई इसलिए चुनी गई कि मलबा जल्दी नीचे गिर जाए। इससे भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद यह क्षमता दिखाने वाला चौथा देश बना।

नियम और भारत का काम

वर्ष 1967 की बाह्य अंतरिक्ष संधि अंतरिक्ष गतिविधि का मूल कानून है, और 1972 की दायित्व अभिसमय प्रक्षेपक राज्य को उसके अंतरिक्ष पिंड से हुए नुकसान का दायी बनाती है। बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग की समिति ने 2007 में अंतरिक्ष मलबा शमन दिशानिर्देश अपनाए। वर्ष 1993 में बनी अंतर-एजेंसी अंतरिक्ष मलबा समन्वय समिति, जिसमें इसरो भी है, सिफ़ारिश करती है कि खर्च हो चुके चरणों का बचा ईंधन निकालकर उन्हें निष्क्रिय किया जाए, सेवानिवृत्त भूस्थिर उपग्रह कब्रगाह कक्षा में भेजे जाएँ, और निम्न भू कक्षा का उपग्रह अभियान समाप्ति के पच्चीस वर्ष के भीतर संरक्षित क्षेत्र से हटा दिया जाए। इसरो प्रोजेक्ट नेत्र यानी नेटवर्क फ़ॉर स्पेस ऑब्जेक्ट्स ट्रैकिंग एंड एनालिसिस से आकाश पर नज़र रखता है और बेंगलुरु में स्थापित IS4OM चलाता है, जो अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता, निकट आगमन चेतावनी और पुनर्प्रवेश पूर्वानुमान सँभालता है। इसरो ने मलबा मुक्त अंतरिक्ष अभियानों का लक्ष्य भी अपनाया है, पीएसएलवी के खर्च हो चुके ऊपरी चरणों का नियंत्रित अवतरण दिखाया है, और चौथे चरण को कचरा छोड़ने के बजाय POEM नामक कक्षीय प्रयोग मंच के रूप में उपयोग किया है।

परीक्षा की दृष्टि से

इस विषय से तीन तरह के प्रश्न आते हैं। पहला, सीधे आँकड़े: भूस्थिर कक्षा की ऊँचाई, आवर्तकाल, झुकाव तथा LEO और MEO की ऊँचाई सीमा। दूसरा, कक्षा और उपयोग का मिलान: संचार और मौसम के लिए भूस्थिर, सुदूर संवेदन के लिए सूर्य-तुल्यकालिक, नौवहन के लिए मध्यम भू कक्षा, सौर प्रेक्षण के लिए लैग्रेंज बिंदु L1। तीसरा, मलबे से जुड़े तथ्य: केसलर सिंड्रोम किसने और किस वर्ष बताया, फेंगयुन-1सी तथा इरीडियम-कॉसमॉस घटनाएँ, मिशन शक्ति की तिथि और लक्ष्य, और नेत्र, IS4OM तथा IADC के पूरे नाम। आम जाल हैं: 35,786 किमी की जगह 36,000 किमी लिख देना, भूस्थिर आवर्तकाल को 23 घंटे 56 मिनट के बजाय 24 घंटे मान लेना, भू-तुल्यकालिक और भूस्थिर को एक समझ लेना, और भारत को उपग्रह भेदी परीक्षण में चौथे के बजाय तीसरा देश बता देना।

महत्वपूर्ण तथ्य

भूस्थिर कक्षा की ऊँचाईभूमध्य रेखा से 35,786 किमी ऊपर
भूस्थिर कक्षा का आवर्तकालएक नक्षत्र दिवस, 23 घंटे 56 मिनट 4 सेकंड
भूस्थिर कक्षा का झुकावशून्य अंश, ठीक भूमध्य रेखा के ऊपर
GEO का दूसरा नामक्लार्क कक्षा, आर्थर सी. क्लार्क के नाम पर, 1945
निम्न भू कक्षा की सीमालगभग 160 से 2,000 किमी
जीपीएस उपग्रह की ऊँचाईलगभग 20,200 किमी, मध्यम भू कक्षा में
सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा600 से 900 किमी, झुकाव लगभग 98 अंश, प्रतिगामी और लगभग ध्रुवीय
मोल्निया कक्षाअत्यधिक दीर्घवृत्तीय, झुकाव लगभग 63.4 अंश, आवर्तकाल करीब 12 घंटे
आदित्य-एल1 की स्थितिसूर्य-पृथ्वी लैग्रेंज बिंदु L1 के चारों ओर हेलो कक्षा, लगभग 15 लाख किमी दूर
केसलर सिंड्रोमडोनाल्ड जे. केसलर ने 1978 में वर्णित किया
सबसे अधिक मलबा बनाने वाला परीक्षणचीन का फेंगयुन-1सी उपग्रह भेदी परीक्षण, जनवरी 2007
पहली बड़ी आकस्मिक उपग्रह टक्करइरीडियम 33 और कॉसमॉस 2251, फरवरी 2009
मिशन शक्ति27 मार्च 2019, डीआरडीओ अवरोधक ने माइक्रोसैट-आर को लगभग 283 किमी पर नष्ट किया
भारत से पहले एएसएटी देशअमेरिका, रूस और चीन; भारत चौथा बना
प्रोजेक्ट नेत्रनेटवर्क फ़ॉर स्पेस ऑब्जेक्ट्स ट्रैकिंग एंड एनालिसिस, इसरो
IS4OMइसरो सिस्टम फ़ॉर सेफ़ एंड सस्टेनेबल ऑपरेशंस मैनेजमेंट, बेंगलुरु
IADCअंतर-एजेंसी अंतरिक्ष मलबा समन्वय समिति, 1993 में गठित; इसरो सदस्य है
मुख्य अंतरिक्ष कानूनबाह्य अंतरिक्ष संधि 1967; दायित्व अभिसमय 1972 प्रक्षेपक राज्य को दायी बनाती है

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

भूस्थिर उपग्रह पृथ्वी की भूमध्य रेखा से कितनी ऊँचाई पर परिक्रमा करता है?

  1. A.3,578 किमी
  2. B.20,200 किमी
  3. C.35,786 किमी
  4. D.1,50,000 किमी
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 35,786 किमी

व्याख्या

सही उत्तर C, 35,786 किमी है। केवल इसी ऊँचाई पर भूमध्यरेखीय वृत्तीय कक्षा में उपग्रह को एक परिक्रमा में ठीक एक नक्षत्र दिवस लगता है, और यही शर्त उसे पृथ्वी के एक बिंदु के ऊपर स्थिर दिखाने के लिए आवश्यक है। इस आँकड़े को आमतौर पर लगभग 36,000 किलोमीटर कहकर पूर्णांकित किया जाता है और उत्तर में दोनों रूप मान्य हैं।

विकल्प A, 3,578 किमी, उन्हीं अंकों में दशमलव हटाकर बनाया गया है और जल्दबाज़ी में पढ़ने वालों को फँसाने के लिए रखा गया है। विकल्प B, 20,200 किमी, ग्लोबल पोज़िशनिंग सिस्टम उपग्रहों की ऊँचाई है, जो मध्यम भू कक्षा में हैं और जिनका आवर्तकाल करीब बारह घंटे है, एक दिन नहीं। विकल्प D बहुत ऊँचा है और लैग्रेंज बिंदु अभियानों के पैमाने के पास है; उदाहरण के लिए भारत का आदित्य-एल1 सूर्य-पृथ्वी बिंदु L1 पर लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर है। तीनों याद रखें: निम्न भू कक्षा 2,000 किमी तक, मध्यम भू कक्षा उसके आगे और भूस्थिर 35,786 किमी पर।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

भूस्थिर उपग्रह का कक्षीय आवर्तकाल किसके बराबर होता है?

  1. A.ठीक 24 घंटे
  2. B.एक नक्षत्र दिवस, 23 घंटे 56 मिनट 4 सेकंड
  3. C.12 घंटे
  4. D.लगभग 90 मिनट
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. एक नक्षत्र दिवस, 23 घंटे 56 मिनट 4 सेकंड

व्याख्या

सही उत्तर B, एक नक्षत्र दिवस, 23 घंटे 56 मिनट 4 सेकंड है। भूस्थिर उपग्रह को दूर के तारों के सापेक्ष पृथ्वी के घूर्णन से मेल खाना होता है, और वह घूर्णन एक नक्षत्र दिवस लेता है। चौबीस घंटे के सौर दिवस से मेल कराने पर उपग्रह धीरे-धीरे खिसकता रहेगा, क्योंकि सौर दिवस में वह अतिरिक्त घुमाव भी शामिल है जो पृथ्वी के कक्षा में आगे बढ़ने पर दोबारा सूर्य के सामने आने के लिए चाहिए।

विकल्प A, ठीक 24 घंटे, वही उत्तर है जो अधिकांश अभ्यर्थी देते हैं और सामान्य बातचीत में चल जाता है, पर सावधानी से बने प्रश्न में नक्षत्र दिवस वाला आँकड़ा ही सही है। विकल्प C, 12 घंटे, मध्यम भू कक्षा के नौवहन उपग्रह और मोल्निया कक्षा का लगभग आवर्तकाल है। विकल्प D, लगभग 90 मिनट, निम्न भू कक्षा के उपग्रह का आवर्तकाल है, जैसे 400 किलोमीटर के आसपास किसी अंतरिक्ष स्टेशन का। इस सब के पीछे नियम यही है कि कक्षीय आवर्तकाल ऊँचाई के साथ बढ़ता है।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

पृथ्वी प्रेक्षण और सुदूर संवेदन उपग्रह सामान्यतः किस प्रकार की कक्षा में रखे जाते हैं, ताकि हर दिन समान प्रकाश में चित्र मिलें?

  1. A.भूस्थिर कक्षा
  2. B.सूर्य-तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा
  3. C.मोल्निया कक्षा
  4. D.कब्रगाह कक्षा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सूर्य-तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा

व्याख्या

सही उत्तर B, सूर्य-तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा है। यह कक्षा लगभग ध्रुवीय होती है, सामान्यतः 600 से 900 किलोमीटर ऊँची और लगभग 98 अंश झुकाव वाली, जिससे यह प्रतिगामी हो जाती है। इसका तल उतनी ही दर से अग्रगमन करता है जिस दर से पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है, इसलिए उपग्रह हर चक्कर में किसी दिए अक्षांश को एक ही स्थानीय सौर समय पर पार करता है। इससे छाया और प्रकाश तुलनीय रहते हैं और बदलाव पकड़ना संभव होता है। भारत के कार्टोसैट, रिसोर्ससैट और ओशनसैट उपग्रह इसी का उपयोग करते हैं।

विकल्प A, भूस्थिर कक्षा, एक गोलार्ध का लगातार दृश्य देती है और इनसैट जैसे संचार तथा मौसम उपग्रहों के लिए उपयुक्त है, पर विस्तृत मानचित्रण के लिए बहुत ऊँची है। विकल्प C, मोल्निया कक्षा, लगभग 63.4 अंश झुकाव वाली अत्यधिक दीर्घवृत्तीय कक्षा है जो ऊँचे अक्षांशों पर लंबा ठहराव देती है। विकल्प D, कब्रगाह कक्षा, कोई कार्यशील कक्षा ही नहीं है; यह भूस्थिर पट्टी से ऊपर की निपटान कक्षा है जहाँ सेवानिवृत्त उपग्रह रखे जाते हैं।

Q4.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

भूस्थिर संचार उपग्रह कक्षा का विचार 1945 में किस लेखक ने लोकप्रिय किया, जिनके नाम पर इस कक्षा का नाम पड़ा?

  1. A.आइज़ैक असिमोव
  2. B.आर्थर सी. क्लार्क
  3. C.कोंस्तान्तिन त्सिओल्कोव्स्की
  4. D.जूल्स वर्न
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. आर्थर सी. क्लार्क

व्याख्या

सही उत्तर B, आर्थर सी. क्लार्क है। इस ब्रिटिश विज्ञान कथा लेखक और अभियंता ने 1945 में बताया कि लगभग 36,000 किलोमीटर की भूमध्यरेखीय वृत्तीय कक्षा में रखे तीन उपग्रह लगभग पूरी आबाद दुनिया तक रेडियो संकेत पहुँचा सकते हैं। इसीलिए भूस्थिर कक्षा को क्लार्क कक्षा और उसमें रखे उपग्रहों की माला को कभी-कभी क्लार्क पट्टी कहा जाता है।

विकल्प A, आइज़ैक असिमोव, प्रसिद्ध विज्ञान कथा लेखक थे पर इस प्रस्ताव से जुड़े नहीं हैं। विकल्प C, कोंस्तान्तिन त्सिओल्कोव्स्की, वे रूसी अग्रदूत थे जिन्होंने दशकों पहले रॉकेट समीकरण और अंतरिक्ष उड़ान का सिद्धांत निकाला, पर भूस्थिर संचार का विचार नहीं दिया। विकल्प D, जूल्स वर्न, ने उन्नीसवीं सदी में चंद्रमा की यात्रा की कल्पना की थी, इस तरह की कक्षीय गणित के प्रयोग से बहुत पहले। 1945 और 35,786 किलोमीटर के साथ क्लार्क का नाम याद रखें।

Q5.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

ग्लोबल पोज़िशनिंग सिस्टम के उपग्रह किस कक्षा में रखे जाते हैं?

  1. A.निम्न भू कक्षा
  2. B.मध्यम भू कक्षा
  3. C.भूस्थिर कक्षा
  4. D.सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मध्यम भू कक्षा

व्याख्या

सही उत्तर B, मध्यम भू कक्षा है। ग्लोबल पोज़िशनिंग सिस्टम के उपग्रह लगभग 20,200 किलोमीटर पर परिक्रमा करते हैं, जो 2,000 किलोमीटर से लेकर भूस्थिर ऊँचाई 35,786 किलोमीटर तक फैली मध्यम भू कक्षा पट्टी में आता है। इस ऊँचाई पर हर उपग्रह को चक्कर पूरा करने में करीब बारह घंटे लगते हैं, और उपग्रहों का समूह पृथ्वी के किसी भी बिंदु से कई उपग्रह दृश्य बनाए रखता है, जो रिसीवर को स्थिति निकालने के लिए चाहिए।

विकल्प A, निम्न भू कक्षा, अंतरिक्ष स्टेशन और सुदूर संवेदन उपग्रहों के लिए है; वहाँ नौवहन उपग्रह इतनी तेज़ी से गुज़र जाएगा कि काम का न रहे। विकल्प C, भूस्थिर कक्षा, संचार और मौसम उपग्रहों के लिए है, और भारत का नाविक क्षेत्रीय प्रणाली होने के कारण भूस्थिर तथा झुकी भू-तुल्यकालिक कक्षाएँ उपयोग करता है, पर अमेरिकी जीपीएस मध्यम भू कक्षा का समूह है। विकल्प D, सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा, चित्रण के लिए विशिष्ट निम्न भू कक्षा है।

Q6.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

निम्न भू कक्षा में टक्करों की श्रृंखला वाली स्थिति, जिसे अब केसलर सिंड्रोम कहा जाता है, किसने और किस वर्ष बताई?

  1. A.डोनाल्ड जे. केसलर ने 1978 में
  2. B.डोनाल्ड जे. केसलर ने 1998 में
  3. C.हरमन ओबर्थ ने 1957 में
  4. D.वर्नर वॉन ब्राउन ने 1969 में
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. डोनाल्ड जे. केसलर ने 1978 में

व्याख्या

सही उत्तर A, डोनाल्ड जे. केसलर ने 1978 में है। तब अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के साथ काम करते हुए केसलर ने यह तर्क प्रकाशित किया कि निम्न भू कक्षा में वस्तुओं की संख्या एक घनत्व पार कर ले, तो उनके बीच टक्करें वायुमंडल द्वारा पुराने मलबे को नीचे खींचने की दर से तेज़ी से नए टुकड़े बनाएँगी। फिर हर टक्कर अगली को भोजन देती है, और नया प्रक्षेपण न हो तब भी श्रृंखला चलती रह सकती है।

विकल्प B में व्यक्ति सही है पर वर्ष गलत, और इस प्रश्न में यही सबसे आम भूल है, इसलिए केसलर के साथ 1978 को जोड़कर ही याद करना चाहिए। विकल्प C, हरमन ओबर्थ, रॉकेट विज्ञान के संस्थापक सिद्धांतकारों में थे और मलबा मॉडलिंग से उनका कोई संबंध नहीं, तथा 1957 स्पुतनिक 1 का वर्ष है। विकल्प D, वर्नर वॉन ब्राउन, ने सैटर्न V रॉकेट का विकास नेतृत्व किया और 1969 पहली चंद्र लैंडिंग का वर्ष है। दोनों गलत विकल्प प्रसिद्ध पर असंबद्ध अंतरिक्ष तिथियों से बने हैं।

Q7.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

भारत के 27 मार्च 2019 के मिशन शक्ति में उपग्रह भेदी परीक्षण के तहत कौन उपग्रह नष्ट किया गया?

  1. A.कार्टोसैट-2
  2. B.माइक्रोसैट-आर
  3. C.रिसैट-2बी
  4. D.फेंगयुन-1सी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. माइक्रोसैट-आर

व्याख्या

सही उत्तर B, माइक्रोसैट-आर है। मिशन शक्ति में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित अवरोधक ओडिशा तट के पास डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम द्वीप से छोड़ा गया और उसने निम्न भू कक्षा में लगभग 283 किलोमीटर की ऊँचाई पर भारत के अपने माइक्रोसैट-आर उपग्रह को नष्ट किया। कम ऊँचाई जानबूझकर चुनी गई थी ताकि टुकड़े ऊर्जा खोकर जल्दी वायुमंडल में लौट आएँ और कक्षा में देर तक न रहें।

विकल्प A, कार्टोसैट-2, भारत का कार्यशील सुदूर संवेदन उपग्रह है और कभी लक्ष्य नहीं बना। विकल्प C, रिसैट-2बी, रडार चित्रण उपग्रह है जो परीक्षण के कुछ महीने बाद छोड़ा गया। विकल्प D, फेंगयुन-1सी, चीनी मौसम उपग्रह है जिसे चीन ने जनवरी 2007 के अपने उपग्रह भेदी परीक्षण में नष्ट किया था और जिससे इतिहास का सबसे बड़ा ट्रैक करने योग्य मलबा बादल बना; यही यहाँ का आम भ्रम है। मिशन शक्ति से भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद यह क्षमता दिखाने वाला चौथा देश बना।

Q8.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन का प्रोजेक्ट नेत्र किस गतिविधि से जुड़ा है?

  1. A.मानव अंतरिक्ष उड़ान प्रशिक्षण
  2. B.अंतरिक्ष की वस्तुओं, मलबे सहित, की ट्रैकिंग और विश्लेषण
  3. C.उपग्रह आधारित फ़सल बीमा
  4. D.नौवहन उपग्रहों का प्रक्षेपण
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अंतरिक्ष की वस्तुओं, मलबे सहित, की ट्रैकिंग और विश्लेषण

व्याख्या

सही उत्तर B, अंतरिक्ष की वस्तुओं, मलबे सहित, की ट्रैकिंग और विश्लेषण है। नेत्र का पूरा रूप नेटवर्क फ़ॉर स्पेस ऑब्जेक्ट्स ट्रैकिंग एंड एनालिसिस है। यह इसरो का वह कार्यक्रम है जिसमें रडार, प्रकाशिक दूरबीन और नियंत्रण केंद्र की क्षमता बनाई जा रही है, ताकि भारत कक्षा की वस्तुओं को पकड़े, उनका पीछा करे और सूची बनाए, और विदेशी आँकड़ों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय अपने उपग्रहों को निकट आगमन की चेतावनी दे सके। यह बेंगलुरु में स्थापित IS4OM के साथ काम करता है।

विकल्प A गलत है क्योंकि मानव अंतरिक्ष उड़ान की तैयारी गगनयान कार्यक्रम और उसकी अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण सुविधा के अंतर्गत आती है। विकल्प C गलत है क्योंकि फ़सल बीमा में सुदूर संवेदन आँकड़े कृषि मंत्रालय की अलग योजनाओं के तहत उपयोग होते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि नौवहन उपग्रह छोड़ना अभियान गतिविधि है; नेत्र निगरानी और सुरक्षा का नेटवर्क है, प्रक्षेपण कार्यक्रम नहीं।

Q9.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

वर्ष 2009 में दो साबुत उपग्रहों के बीच पहली बड़ी आकस्मिक टक्कर किस जोड़ी के बीच हुई?

  1. A.इरीडियम 33 और कॉसमॉस 2251
  2. B.एनविसैट और सेंटिनल-1ए
  3. C.फेंगयुन-1सी और माइक्रोसैट-आर
  4. D.स्पुतनिक 1 और एक्सप्लोरर 1
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. इरीडियम 33 और कॉसमॉस 2251

व्याख्या

सही उत्तर A, इरीडियम 33 और कॉसमॉस 2251 है। फरवरी 2009 में चालू अमेरिकी संचार उपग्रह इरीडियम 33 और निष्क्रिय रूसी सैन्य संचार उपग्रह कॉसमॉस 2251 साइबेरिया के ऊपर कई किलोमीटर प्रति सेकंड की सापेक्ष चाल से टकरा गए। दोनों नष्ट हो गए और घटना से हज़ारों ट्रैक करने योग्य टुकड़े बने, जिससे सिद्ध हुआ कि पूरे उपग्रहों के बीच आकस्मिक टक्कर अब सैद्धांतिक चिंता नहीं है।

विकल्प B में दो यूरोपीय पृथ्वी प्रेक्षण उपग्रहों के नाम हैं जो कभी नहीं टकराए। विकल्प C चीनी और भारतीय उपग्रह भेदी परीक्षणों के लक्ष्यों की जोड़ी बनाता है, जो अपने ही उपग्रह का जानबूझकर विनाश था, दुर्घटना नहीं, और वे अलग वर्षों में हुए। विकल्प D में 1957 और 1958 के पहले सोवियत तथा पहले अमेरिकी उपग्रह हैं, जो बहुत अलग समय में कक्षा में थे और आकार में बहुत छोटे थे। याद रखें: फेंगयुन-1सी के लिए 2007, इरीडियम-कॉसमॉस के लिए 2009 और मिशन शक्ति के लिए 2019।

Q10.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

कब्रगाह कक्षा, जिसे निपटान कक्षा भी कहते हैं, कहाँ स्थित होती है?

  1. A.वायुमंडल के ठीक ऊपर, 200 किमी से नीचे
  2. B.भूस्थिर पट्टी से कुछ सौ किलोमीटर ऊपर
  3. C.800 किमी पर सूर्य-तुल्यकालिक पट्टी के भीतर
  4. D.लैग्रेंज बिंदु L2 पर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. भूस्थिर पट्टी से कुछ सौ किलोमीटर ऊपर

व्याख्या

सही उत्तर B, भूस्थिर पट्टी से कुछ सौ किलोमीटर ऊपर है। जीवन के अंत के पास पहुँचा संचार उपग्रह थोड़ा ईंधन बचाकर रखता है ताकि वह खुद को भीड़ भरी भूस्थिर माला से उठाकर ऐसी ऊँची कक्षा में ले जाए जहाँ वह किसी कार्यशील स्थान पर लौट न सके और किसी सक्रिय उपग्रह से न टकराए। ऐसे उपग्रह को पुनर्प्रवेश के लिए नीचे लाने में उठाने से बहुत अधिक ईंधन लगेगा, इसलिए उस ऊँचाई पर ऊपर की ओर निपटान ही स्वीकृत तरीका है।

विकल्प A उलटा तरीका बताता है, जो निम्न भू कक्षा के उपग्रहों के लिए अपनाया जाता है, जहाँ उन्हें नीचे लाया जाता है ताकि वायुमंडलीय घर्षण उन्हें पुनर्प्रवेश के लिए खींच ले। विकल्प C गलत है क्योंकि सूर्य-तुल्यकालिक पट्टी चित्रण उपग्रहों का व्यस्त कार्यशील क्षेत्र है और वहाँ जानबूझकर कुछ नहीं रखा जाता। विकल्प D गलत है क्योंकि लैग्रेंज बिंदु अंतरिक्ष वेधशालाओं जैसे वैज्ञानिक अभियानों के लिए हैं, सेवानिवृत्त उपकरण फेंकने के लिए नहीं।

Q11.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

कौन अंतरराष्ट्रीय समझौता प्रक्षेपक राज्य को उसके अंतरिक्ष पिंड से हुए नुकसान के लिए दायी बनाता है?

  1. A.बाह्य अंतरिक्ष संधि, 1967
  2. B.बचाव समझौता, 1968
  3. C.दायित्व अभिसमय, 1972
  4. D.चंद्र समझौता, 1979
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. दायित्व अभिसमय, 1972

व्याख्या

सही उत्तर C, दायित्व अभिसमय, 1972 है। इसका पूरा नाम अंतरिक्ष पिंडों से हुए नुकसान के लिए अंतरराष्ट्रीय दायित्व संबंधी अभिसमय है, और यह जिम्मेदारी उस राज्य पर डालता है जो अंतरिक्ष पिंड छोड़ता है या उसका प्रक्षेपण कराता है। पृथ्वी की सतह पर या उड़ते विमान को हुए नुकसान के लिए दायित्व निरपेक्ष है, और कहीं और हुए नुकसान, जैसे कक्षा में दो उपग्रहों की टक्कर, के लिए दायित्व दोष आधारित है।

विकल्प A, 1967 की बाह्य अंतरिक्ष संधि, वह मूल दस्तावेज़ है जो अंतरिक्ष को सबके अन्वेषण के लिए मुक्त घोषित करता है, कक्षा में जनसंहारक हथियार रखने पर रोक लगाता है और खगोलीय पिंडों पर राष्ट्रीय अधिकार से मना करता है; वह राज्य की जिम्मेदारी का सिद्धांत बताता है पर विस्तृत दायित्व नियम बाद में आए। विकल्प B, 1968 का बचाव समझौता, अंतरिक्ष यात्रियों और अंतरिक्ष पिंडों की वापसी से जुड़ा है। विकल्प D, 1979 का चंद्र समझौता, चंद्रमा और अन्य पिंडों की गतिविधियों पर है और उसके पक्षकार बहुत कम हैं।

Q12.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

अंतर-एजेंसी अंतरिक्ष मलबा समन्वय समिति की सिफ़ारिश के अनुसार निम्न भू कक्षा के उपग्रह को अभियान समाप्ति के कितने वर्ष के भीतर संरक्षित क्षेत्र से हटा देना चाहिए?

  1. A.5 वर्ष
  2. B.10 वर्ष
  3. C.25 वर्ष
  4. D.50 वर्ष
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 25 वर्ष

व्याख्या

सही उत्तर C, 25 वर्ष है। वर्ष 1993 में बनी और इसरो समेत कई एजेंसियों वाली अंतर-एजेंसी अंतरिक्ष मलबा समन्वय समिति का पुराना दिशानिर्देश यही है कि निम्न भू कक्षा के संरक्षित क्षेत्र को छोड़ते यान या ऊपरी चरण को अभियान समाप्ति के पच्चीस वर्ष के भीतर अवतरित किया जाए या ऐसी कक्षा में डाला जाए जहाँ से वह पुनर्प्रवेश कर जाए। इसके साथ निष्क्रियकरण भी जुड़ा है, यानी बचा प्रणोदक निकालना और बैटरियाँ उतार देना, ताकि उपकरण फटकर नए टुकड़े न बनाए।

विकल्प A, 5 वर्ष, और विकल्प B, 10 वर्ष, स्वीकृत आँकड़े से कम हैं, हालाँकि कुछ देशों के नए राष्ट्रीय नियम अब और कड़ी समय सीमा की ओर बढ़ रहे हैं। विकल्प D, 50 वर्ष, इतना लंबा है कि उपयोगी न रहे, क्योंकि भीड़ भरी पट्टी में इतने समय टिका मलबा टक्कर का खतरा ऊँचा बनाए रखता है। भूस्थिर उपग्रहों के लिए यही व्यवहार अवतरण नहीं बल्कि उपग्रह को पट्टी से ऊपर कब्रगाह कक्षा में उठाना है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भूस्थिर उपग्रह की ऊँचाई कितनी होती है?

भूस्थिर उपग्रह भूमध्य रेखा से 35,786 किलोमीटर ऊपर परिक्रमा करता है, जिसे आमतौर पर लगभग 36,000 किलोमीटर कहकर पूर्णांकित कर दिया जाता है। इस ऊँचाई पर कक्षीय आवर्तकाल एक नक्षत्र दिवस के बराबर होता है, इसलिए उपग्रह घूमती पृथ्वी के साथ कदम मिलाकर चलता है और भूमध्य रेखा के एक बिंदु के ऊपर स्थिर दिखता है।

भूस्थिर और भू-तुल्यकालिक कक्षा में क्या अंतर है?

दोनों का कक्षीय आवर्तकाल एक नक्षत्र दिवस होता है। भूस्थिर कक्षा इसके अलावा वृत्तीय होती है और ठीक भूमध्य रेखा के ऊपर शून्य झुकाव पर होती है, इसलिए उपग्रह स्थिर दिखता है। भू-तुल्यकालिक कक्षा झुकी या दीर्घवृत्तीय हो सकती है, इसलिए उपग्रह हर दिन उसी समय उसी स्थान पर लौटता है पर बीच में आठ के अंक जैसा पथ बनाता रहता है।

सुदूर संवेदन उपग्रह सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा में क्यों रखे जाते हैं?

सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा इस तरह सधी होती है कि उसका तल उतनी ही दर से घूमे जिस दर से पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है। इसलिए उपग्रह हर चक्कर में किसी भी अक्षांश के ऊपर एक ही स्थानीय सौर समय पर गुज़रता है। एक चित्र से दूसरे चित्र तक प्रकाश और छाया तुलनीय रहते हैं, जो भूमि, फ़सल और तटरेखा में बदलाव पकड़ने के लिए आवश्यक है।

केसलर सिंड्रोम क्या है?

यह वह स्थिति है जिसे डोनाल्ड जे. केसलर ने 1978 में बताया था, जिसमें निम्न भू कक्षा में वस्तुएँ इतनी घनी हो जाती हैं कि एक ही टक्कर से निकले टुकड़े आगे और टक्करें करा देते हैं। हर टक्कर मलबा कई गुना कर देती है, और यह श्रृंखला प्रक्षेपण रुक जाने पर भी चलती रह सकती है, जिससे निम्न भू कक्षा के कुछ हिस्से लंबे समय तक अनुपयोगी हो सकते हैं।

मिशन शक्ति क्या था?

मिशन शक्ति भारत का 27 मार्च 2019 का उपग्रह भेदी परीक्षण था। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के अवरोधक ने ओडिशा के डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम द्वीप से उड़कर भारत के अपने माइक्रोसैट-आर उपग्रह को लगभग 283 किलोमीटर की ऊँचाई पर नष्ट किया। कम ऊँचाई जानबूझकर चुनी गई थी ताकि टुकड़े जल्दी वायुमंडल में लौट आएँ। इससे भारत इस तरह की क्षमता दिखाने वाला चौथा देश बना।

अंतरिक्ष मलबे पर इसरो क्या करता है?

इसरो कक्षा की वस्तुओं के प्रेक्षण के लिए प्रोजेक्ट नेत्र यानी नेटवर्क फ़ॉर स्पेस ऑब्जेक्ट्स ट्रैकिंग एंड एनालिसिस चलाता है, और अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता, टक्कर चेतावनी तथा पुनर्प्रवेश पूर्वानुमान के लिए बेंगलुरु में IS4OM चलाता है। वह अंतर-एजेंसी अंतरिक्ष मलबा समन्वय समिति का सदस्य है, खर्च हो चुके चरणों को निष्क्रिय और अवतरित करता है, और पीएसएलवी के चौथे चरण को छोड़ने के बजाय POEM मंच के रूप में उपयोग करता है।

स्रोत

  • कक्षा 11 भौतिकी, गुरुत्वाकर्षण अध्याय: पृथ्वी के उपग्रह — एनसीईआरटी
  • अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता और प्रबंधन: प्रोजेक्ट नेत्र तथा IS4OM — भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
  • IADC अंतरिक्ष मलबा शमन दिशानिर्देश — अंतर-एजेंसी अंतरिक्ष मलबा समन्वय समिति
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