राजस्थान के प्रागैतिहासिक और प्राचीन स्थल: कालीबंगा से बैराठ तक
राजस्थान पुरातत्व नोट्स: डीडवाना, बागोर, कालीबंगा, आहड़, गणेश्वर, बालाथल, गिलूंड, रैढ़, सुनारी, नोह और अशोक के शिलालेख वाला मौर्यकालीन बैराठ।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

राजस्थान का पुरातात्विक अभिलेख भारत में सबसे लंबे अभिलेखों में से एक है। लूणी और बनास घाटियों के पाषाण उपकरण कहानी को लाखों वर्ष पीछे ले जाते हैं, राज्य में घग्घर की सूखी तलहटी पर पूरी तरह उत्खनित एक हड़प्पाई नगर है, मेवाड़ की पहाड़ियों में अपनी ताम्र ग्रामीण संस्कृति है, और एक मौर्यकालीन बौद्ध केंद्र है जहां अशोक का शिलालेख मिला। राजस्थान पुलिस, आरपीएससी, पटवारी और रीट के प्रश्नपत्र इस अध्याय से कुछ निश्चित जोड़ियां पूछते हैं, अर्थात स्थल के साथ उसका जिला, उसकी नदी और वह वस्तु जिसके लिए वह प्रसिद्ध है, इसलिए इसे कहानी के बजाय तालिका की तरह याद करना सबसे अच्छा है।
पाषाण काल का राजस्थान
पुरापाषाणिक उपकरण जोधपुर और बाड़मेर की लूणी नदी घाटी से, अजमेर के पास बूढ़ा पुष्कर के आसपास से और सबसे बढ़कर नागौर जिले के डीडवाना से मिले हैं, जहां सिंगी तालाब नामक स्थल से हैंड ऐक्स और क्लीवर जैसी कुल्हाड़ियां लंबे निक्षेप क्रम में मिली हैं। मध्यपाषाण काल का सर्वोत्तम प्रतिनिधित्व भीलवाड़ा जिले में कोठारी नदी पर स्थित बागोर करता है, जिसका उत्खनन वी. एन. मिश्र ने किया। बागोर भारत के सबसे बड़े मध्यपाषाणिक स्थलों में गिना जाता है, जहां हजारों लघु पाषाण उपकरण, मानव समाधियां और ऐसी हड्डियां मिली हैं जो भेड़ बकरी पालन की आरंभिक शुरुआत का संकेत देती हैं। लूणी पर बाड़मेर जिले का तिलवाड़ा राज्य का दूसरा महत्वपूर्ण मध्यपाषाणिक स्थल है।
कालीबंगा, हड़प्पाई नगर
कालीबंगा हनुमानगढ़ जिले में सूखी घग्घर नदी के बाएं किनारे पर स्थित है, जिस नदी को अनेक विद्वान ग्रंथों की सरस्वती मानते हैं। इस नाम का अर्थ है काली चूड़ियां, जो टीलों पर बिखरी मिट्टी की चूड़ियों के टुकड़ों से पड़ा। इस स्थल को 1952 में अमलानंद घोष ने पहचाना और उत्खनन बी. बी. लाल तथा बी. के. थापर के निर्देशन में हुआ। इसकी प्रसिद्ध खोजें हैं पूर्व हड़प्पाई जुता हुआ खेत, जिसमें हल रेखाएं समकोण पर एक दूसरे को काटती हैं और जिसे विश्व का प्राचीनतम ज्ञात जुता खेत माना जाता है, तथा दुर्ग के भीतर चबूतरे पर बनी हवन कुंडों की पंक्ति, जो किसी अनुष्ठान का संकेत देती है। यहां दुर्ग और निचला नगर दोनों परकोटे से घिरे थे, नालियां अधिकतर पकी ईंट के बजाय लकड़ी की थीं, और स्थल से बेलनाकार मुहर, ऊंट की हड्डियां तथा तीन प्रकार की समाधियां मिली हैं।
आहड़ और गणेश्वर की ताम्र संस्कृतियां
आहड़, जो अब उदयपुर नगर में आयड़ नदी पर स्थित है, दक्षिणी राजस्थान की आहड़ या बनास ताम्रपाषाणिक संस्कृति को अपना नाम देता है। यह तांबे में इतना समृद्ध था कि इसे ताम्रवती अर्थात तांबे का स्थान कहा जाता था। इसका मृद्भांड उल्टा पकाया गया कृष्ण लोहित पात्र है और घर पत्थर तथा कच्ची ईंट के बने थे। बनास पर राजसमंद जिले का गिलूंड और उदयपुर जिले का बालाथल इसी संस्कृति के हैं, और बालाथल अपने विशाल परकोटेदार परिसर के लिए जाना जाता है। शेखावाटी क्षेत्र में सीकर जिले में कांतली नदी पर स्थित गणेश्वर से हजारों तांबे की वस्तुएं, बाणाग्र, मछली पकड़ने के कांटे, चूड़ियां और छेनियां मिली हैं, और माना जाता है कि यहीं से हड़प्पाई नगरों को तांबा जाता था, इसीलिए इसे ताम्र युगीन सभ्यता का पालना कहा जाता है।
| स्थल | जिला और नदी | किसके लिए प्रसिद्ध |
|---|---|---|
| डीडवाना, सिंगी तालाब | नागौर | पुरापाषाणिक हैंड ऐक्स और क्लीवर |
| बागोर | भीलवाड़ा, कोठारी | सबसे बड़ा मध्यपाषाणिक स्थल, लघु उपकरण, आरंभिक पशुपालन |
| कालीबंगा | हनुमानगढ़, घग्घर | जुता हुआ खेत, हवन कुंड, परकोटेदार निचला नगर |
| आहड़ | उदयपुर, आयड़ | ताम्रपाषाणिक तांबा, कृष्ण लोहित मृद्भांड, ताम्रवती |
| गणेश्वर | सीकर, कांतली | तांबे की वस्तुएं, ताम्र संस्कृति का पालना |
| बालाथल और गिलूंड | उदयपुर और राजसमंद, बनास | आहड़ संस्कृति की बस्तियां, बालाथल में परकोटा |
| बैराठ | जयपुर | अशोक का शिलालेख, गोल बौद्ध मंदिर |
| रैढ़ | टोंक | आहत चांदी के सिक्के और लोहा गलाना |
लौह युग और आरंभिक ऐतिहासिक स्थल
भरतपुर जिले के नोह का सांस्कृतिक क्रम लंबा है और उसमें चित्रित धूसर मृद्भांड भी शामिल है, तथा झुंझुनूं जिले के सुनारी से लोहा गलाने की भट्ठियां मिली हैं। टोंक जिले का रैढ़ आहत चांदी के सिक्कों के विशाल भंडार और लोहे के धातुमल के ढेरों के लिए प्रसिद्ध है, जिसके कारण उसे प्राचीन राजस्थान का औद्योगिक नगर कहा जाता है। चित्तौड़गढ़ जिले का नगरी पतंजलि द्वारा उल्लिखित प्राचीन मध्यमिका है और पास का घोसुंडी वासुदेव पूजा से जुड़े आरंभिक संस्कृत शिलालेख के लिए जाना जाता है। टोंक जिले के नगर से बड़ी संख्या में मालव सिक्के मिले हैं, और जालोर जिले का भीनमाल अर्थात प्राचीन श्रीमाल वह स्थान है जहां चीनी यात्री ह्वेनसांग आया था और जो गणितज्ञ ब्रह्मगुप्त से जुड़ा है।
बैराठ और मौर्य काल
जयपुर जिले का बैराठ, जिसे विराटनगर भी कहते हैं, राजस्थान का सबसे महत्वपूर्ण मौर्यकालीन स्थल है और इसकी पहचान महाकाव्यों के मत्स्य जनपद से की जाती है। दयाराम साहनी द्वारा आरंभ किए गए उत्खनन में बीजक की पहाड़ी पर ईंट और लकड़ी का एक गोल बौद्ध मंदिर मिला, जो भारत की ज्ञात प्राचीनतम गोल बौद्ध संरचनाओं में से एक है, और उसके चारों ओर एक विहार भी मिला। बैराठ से अशोक के दो अभिलेख मिले हैं। भाब्रू या कलकत्ता बैराठ अभिलेख, जिसमें अशोक बुद्ध, धम्म और संघ में अपनी आस्था घोषित करता है तथा भिक्षुओं के पढ़ने योग्य ग्रंथ गिनाता है, उन्नीसवीं शताब्दी में हटाकर ले जाया गया और कोलकाता की एशियाटिक सोसाइटी के पास सुरक्षित है। यहां से मौर्यकालीन चमकदार पाषाण खंड, आहत सिक्के और इंडो ग्रीक सिक्के भी मिले हैं।
परीक्षा की दृष्टि से
राज्य स्तरीय प्रश्नपत्र इस अध्याय को स्थल मिलान के रूप में पूछते हैं। स्थल के साथ उसका जिला, उसकी नदी और उसकी एक प्रमुख विशेषता याद रखें: कालीबंगा के साथ हनुमानगढ़, घग्घर और जुता खेत; बागोर के साथ भीलवाड़ा, कोठारी और लघु उपकरण; आहड़ के साथ उदयपुर और तांबा; गणेश्वर के साथ सीकर और कांतली; बालाथल के साथ उदयपुर; गिलूंड के साथ राजसमंद; रैढ़ के साथ टोंक और सिक्के; सुनारी के साथ झुंझुनूं और लोहा; नोह के साथ भरतपुर; और बैराठ के साथ जयपुर तथा अशोक। आम भ्रम हैं कालीबंगा को श्रीगंगानगर में बता देना, तांबे के स्थल के रूप में आहड़ और गणेश्वर में उलझ जाना, तथा अशोक के अभिलेख को बैराठ के बजाय नगरी से जोड़ देना।
महत्वपूर्ण तथ्य
| कालीबंगा का जिला | हनुमानगढ़, सूखी घग्घर नदी की तलहटी पर |
|---|---|
| कालीबंगा की खोज | 1952 में अमलानंद घोष ने पहचाना; उत्खनन बी. बी. लाल और बी. के. थापर के निर्देशन में |
| कालीबंगा की विशेषता | प्राचीनतम ज्ञात जुता हुआ खेत और हवन कुंडों की पंक्ति |
| बागोर | भीलवाड़ा जिला, कोठारी नदी; मध्यपाषाणिक लघु उपकरण और आरंभिक पशुपालन |
| तिलवाड़ा | बाड़मेर जिला, लूणी नदी; मध्यपाषाणिक स्थल |
| डीडवाना | नागौर जिला; सिंगी तालाब से पुरापाषाणिक उपकरण |
| आहड़ | उदयपुर, आयड़ नदी; ताम्रपाषाणिक, ताम्रवती, कृष्ण लोहित मृद्भांड |
| गणेश्वर | सीकर जिला, कांतली नदी; तांबे की वस्तुएं, ताम्र संस्कृति का पालना |
| बालाथल और गिलूंड | उदयपुर और राजसमंद जिले; आहड़ या बनास संस्कृति |
| रैढ़ | टोंक जिला; आहत सिक्के और लोहे का धातुमल |
| सुनारी | झुंझुनूं जिला; लोहा गलाने की भट्ठियां |
| नगरी | चित्तौड़गढ़ जिला; प्राचीन मध्यमिका, पास में घोसुंडी अभिलेख |
| बैराठ | जयपुर जिला; बीजक की पहाड़ी पर गोल बौद्ध मंदिर और अशोक का भाब्रू अभिलेख |
| भाब्रू अभिलेख | कोलकाता की एशियाटिक सोसाइटी के पास; अशोक बुद्ध, धम्म और संघ में आस्था घोषित करता है |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
राजस्थान का हड़प्पाई स्थल कालीबंगा किस नदी के किनारे स्थित है?
- A.बनास
- B.घग्घर
- C.लूणी
- D.चंबल
उत्तर देखें
कालीबंगा हनुमानगढ़ जिले में अब सूख चुकी घग्घर नदी की तलहटी के बाएं किनारे पर स्थित है, और अनेक विद्वान इसी धारा को वैदिक ग्रंथों की सरस्वती मानते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →विश्व का प्राचीनतम ज्ञात जुता हुआ खेत किस स्थल से मिला है?
- A.लोथल
- B.कालीबंगा
- C.धौलावीरा
- D.बनावली
उत्तर देखें
कालीबंगा की पूर्व हड़प्पाई परत में उत्खननकर्ताओं को ऐसा खेत मिला जिसमें हल रेखाएं दो दिशाओं में चलकर समकोण पर एक दूसरे को काटती हैं, ठीक वैसे ही जैसे आज भी इस क्षेत्र में मिश्रित खेती की जाती है, जिसमें चौड़ी दूरी वाली रेखाओं में एक फसल और पास पास…
पूरी व्याख्या पढ़ें →राजस्थान का कौन सा प्राचीन स्थल ताम्रवती के नाम से जाना जाता था?
- A.आहड़
- B.बैराठ
- C.रैढ़
- D.नोह
उत्तर देखें
आहड़ वर्तमान उदयपुर नगर में आयड़ नदी पर स्थित है और उसे ताम्रवती अर्थात तांबे का स्थान कहा जाता था, क्योंकि वहां बड़ी मात्रा में तांबा गलाया और गढ़ा जाता था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के सबसे बड़े मध्यपाषाणिक स्थलों में गिना जाने वाला बागोर राजस्थान के किस जिले में है?
- A.भीलवाड़ा
- B.नागौर
- C.सीकर
- D.टोंक
उत्तर देखें
बागोर भीलवाड़ा जिले में कोठारी नदी पर स्थित है और इसका उत्खनन वी. एन. मिश्र ने किया था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राजस्थान में अशोक का अभिलेख किस स्थान से प्राप्त हुआ है?
- A.नगरी
- B.बैराठ
- C.बालाथल
- D.गिलूंड
उत्तर देखें
जयपुर जिले का बैराठ, जिसे विराटनगर भी कहते हैं, राजस्थान का प्रमुख मौर्यकालीन स्थल है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →ताम्र संस्कृति का पालना कहा जाने वाला गणेश्वर किस जिले में स्थित है?
- A.सीकर
- B.झुंझुनूं
- C.बाड़मेर
- D.हनुमानगढ़
उत्तर देखें
गणेश्वर शेखावाटी क्षेत्र में सीकर जिले की कांतली नदी पर, खेतड़ी की तांबा युक्त चट्टानों के निकट स्थित है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →टोंक जिले का रैढ़ मुख्यतः किस प्रकार की खोज के लिए प्रसिद्ध है?
- A.शैलकृत गुफाएं
- B.आहत चांदी के सिक्के और लोहे का धातुमल
- C.चित्रित शैलाश्रय
- D.महापाषाण समाधियां
उत्तर देखें
रैढ़ से राजस्थान में मिले आहत चांदी के सिक्कों के सबसे बड़े भंडारों में से एक प्राप्त हुआ है, साथ ही मालव सिक्के और लोहे के धातुमल के बड़े ढेर भी मिले हैं, जो दर्शाते हैं कि वहां लंबे समय तक लोहा गलाया जाता रहा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राजस्थान के ताम्रपाषाणिक स्थल बालाथल और गिलूंड किस संस्कृति से संबंधित हैं?
- A.आहड़ या बनास संस्कृति
- B.जोरवे संस्कृति
- C.मालवा संस्कृति
- D.चित्रित धूसर मृद्भांड संस्कृति
उत्तर देखें
उदयपुर जिले का बालाथल और राजसमंद जिले का गिलूंड दक्षिणी राजस्थान के बनास बेसिन में स्थित हैं और इनमें कृष्ण लोहित मृद्भांड, तांबे का काम तथा पत्थर और कच्ची ईंट के घर मिलते हैं, जो आहड़ संस्कृति की पहचान हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बीजक की पहाड़ी पर स्थित गोल बौद्ध मंदिर राजस्थान के किस स्थल पर है?
- A.बैराठ
- B.आहड़
- C.कालीबंगा
- D.बागोर
उत्तर देखें
जयपुर जिले के बैराठ में बीजक की पहाड़ी नामक टीले पर दयाराम साहनी द्वारा आरंभ किए गए उत्खनन में ईंट और लकड़ी का एक गोल मंदिर प्रकाश में आया, जिसके केंद्र में छोटा स्तूप और चारों ओर प्रदक्षिणा पथ था; इसे भारत की ज्ञात प्राचीनतम गोल बौद्ध संरचनाओं में गिना…
पूरी व्याख्या पढ़ें →हैंड ऐक्स और क्लीवर देने वाला पुरापाषाणिक स्थल सिंगी तालाब राजस्थान में किसके पास है?
- A.नागौर का डीडवाना
- B.भरतपुर का डीग
- C.अजमेर का पुष्कर
- D.डूंगरपुर नगर
उत्तर देखें
नागौर जिले में डीडवाना के आसपास के निक्षेपों, विशेषकर सिंगी तालाब में, पुरापाषाणिक उपकरणों का लंबा क्रम मिला है, जिसमें हैंड ऐक्स और क्लीवर शामिल हैं, और यह क्षेत्र पश्चिमी भारत में पाषाण युग के अध्ययन के प्रमुख स्थलों में गिना जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कालीबंगा राजस्थान के किस जिले में स्थित है?
हनुमानगढ़ जिले में, घग्घर नदी की सूखी तलहटी के बाएं किनारे पर। कालीबंगा नाम का अर्थ काली चूड़ियां है, जो टीलों पर बिखरी मिट्टी की चूड़ियों के टुकड़ों से पड़ा।
भारतीय पुरातत्व में कालीबंगा क्यों महत्वपूर्ण है?
क्योंकि वहां पूर्व हड़प्पाई जुता हुआ खेत मिला है जिसमें हल रेखाएं समकोण पर कटती हैं और जो विश्व का प्राचीनतम ज्ञात जुता खेत माना जाता है, तथा दुर्ग के भीतर चबूतरे पर हवन कुंडों की पंक्ति मिली है।
राजस्थान के किस स्थल को ताम्रवती कहा जाता था और क्यों?
आहड़ को, जो अब उदयपुर नगर में आयड़ नदी पर है। ताम्रपाषाण काल में वहां इतनी मात्रा में तांबा गलाया और गढ़ा जाता था कि उसे ताम्रवती अर्थात तांबे का स्थान कहा जाने लगा।
राजस्थान में अशोक का शिलालेख कहां मिला है?
जयपुर जिले के बैराठ में, जिसे विराटनगर भी कहते हैं। वहां मिले भाब्रू या कलकत्ता बैराठ अभिलेख में अशोक बुद्ध, धम्म और संघ में अपनी आस्था घोषित करता है; यह कोलकाता की एशियाटिक सोसाइटी के पास सुरक्षित है।
राजस्थान में ताम्र संस्कृति का पालना किस स्थल को कहा जाता है?
सीकर जिले के गणेश्वर को, जो कांतली नदी पर है। वहां से हजारों तांबे के बाणाग्र, मछली के कांटे, चूड़ियां और छेनियां मिली हैं और माना जाता है कि वहीं से हड़प्पाई नगरों को तांबा भेजा जाता था।
स्रोत
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, राजस्थान के उत्खनित स्थल — भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण
- भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग 1 (कक्षा 12), अध्याय 1: ईंटें, मनके तथा अस्थियां — एनसीईआरटी
- हमारे अतीत 1 (कक्षा 6), आरंभिक नगर और आरंभिक किसान से संबंधित अध्याय — एनसीईआरटी





