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राजपूत, मुगल और मराठा: राजस्थान का इतिहास

राजस्थान की रियासतों का मुगलों और मराठों से संघर्ष: खानवा 1527, हल्दीघाटी 1576, 1615 की संधि, हुरड़ा 1734, बगरू 1748 और तुंगा 1787 के परीक्षोपयोगी तथ्य।

लेखक · प्रकाशित · 4 मिनट

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राजपूत, मुगल और मराठा: राजस्थान का इतिहास — GK24 title card
राजपूत, मुगल और मराठा: राजस्थान का इतिहास — GK24 title card

1526 में बाबर के आगमन से लेकर 1817-18 की अंग्रेजी संधियों तक राजपूताना की रियासतों को बारी-बारी से दो बड़ी बाहरी शक्तियों का सामना करना पड़ा: पहले दिल्ली और आगरा के मुगल और फिर दक्कन के मराठा। राज्य सेवा आयोग इस कालखंड से लगातार प्रश्न पूछते हैं, क्योंकि इसमें तिथि, स्थान और सेनापति तीनों स्पष्ट हैं। इसे याद रखने का सबसे सुरक्षित तरीका यह है कि हर घटना को वर्ष, स्थान और दो पक्षों की जोड़ी के रूप में याद किया जाए।

राणा सांगा और मुगलों का आगमन

मेवाड़ के महाराणा सांगा अपने समय के सबसे शक्तिशाली राजपूत शासक थे। उन्होंने 1517 में खातोली और 1519 में धौलपुर के निकट इब्राहिम लोदी को हराया, और 1527 में बयाना में बाबर की अग्रिम टुकड़ी को पराजित किया। निर्णायक संघर्ष 17 मार्च 1527 को खानवा का युद्ध था, जहाँ बाबर की तोपों और तुलुगमा व्यूह ने राजपूत संघ को तोड़ दिया। सांगा युद्धभूमि से बच निकले पर शीघ्र ही उनकी मृत्यु हो गई, और उत्तर भारत में राजपूत साम्राज्य की अंतिम संभावना समाप्त हो गई। इसके बाद मारवाड़ के राव मालदेव ने बड़ी शक्ति खड़ी की, जिन्हें 1544 में गिरी सुमेल के युद्ध में शेरशाह सूरी ने रोका। कहा जाता है कि शेरशाह ने तब कहा था कि मुट्ठी भर बाजरे के लिए वे हिंदुस्तान की बादशाहत खो बैठते।

अकबर: किसी से संधि, किसी से घेराबंदी

अकबर ने राजपूतों को अधीनता के बदले मनसब और सम्मान दिया। आमेर के राजा भारमल ने 1562 में यह प्रस्ताव स्वीकार किया और वे ऐसा करने वाले राजस्थान के पहले राजपूत शासक बने; उनकी पुत्री जहाँगीर की माता बनीं, और उनके वंशज मानसिंह प्रथम तथा मिर्जा राजा जयसिंह प्रथम मुगल साम्राज्य के सर्वोच्च सेनापति बने। मेवाड़ ने इनकार किया। अकबर ने 1567 में चित्तौड़गढ़ को घेरा और फरवरी 1568 में जीत लिया, जहाँ मेड़ता के जयमल और केलवा के पत्ता लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए; महाराणा उदयसिंह द्वितीय पहले ही पहाड़ों में चले गए थे और 1559 में उदयपुर बसा चुके थे। उनके पुत्र महाराणा प्रताप ने 18 जून 1576 को हल्दीघाटी का युद्ध लड़ा, जिसमें मुगल सेना का नेतृत्व आमेर के मानसिंह प्रथम ने किया। प्रताप, उनका घोड़ा चेतक और भील सरदार राणा पूंजा इस दिन के स्थायी नाम हैं। आगे चलकर प्रताप ने 1582 में दिवेर जीतकर मेवाड़ का अधिकांश भाग पुनः प्राप्त किया और चावंड को राजधानी बनाया। यह लंबा संघर्ष उनके पुत्र अमरसिंह प्रथम के समय 1615 की संधि से समाप्त हुआ, जिसे शहजादा खुर्रम ने तय कराया।

औरंगजेब और राजपूत युद्ध

औरंगजेब ने 1679 में जजिया फिर से लगाया और 1678 में जमरूद में महाराजा जसवंतसिंह की मृत्यु के बाद मारवाड़ के उत्तराधिकार पर अधिकार जमाना चाहा। दुर्गादास राठौड़ शिशु अजीतसिंह को सुरक्षित निकाल ले गए और दशकों तक छापामार युद्ध चलाया; मारवाड़ और मेवाड़ एक साथ आए, और मेवाड़ के महाराणा राजसिंह प्रथम ने अजीतसिंह को शरण दी। राजसिंह ने राजसमंद झील बनवाई और उसकी पाल पर राज प्रशस्ति उत्कीर्ण कराई, जो भारत का सबसे बड़ा शिलालेख है। मेवाड़ का मोर्चा 1681 में महाराणा जयसिंह के समय संधि से बंद हुआ। 1707 में औरंगजेब की मृत्यु के बाद अजीतसिंह ने जोधपुर पुनः प्राप्त किया।

राजपूताना में मराठे

मराठा सेनाएँ उत्तराधिकार के झगड़ों के रास्ते राजपूताना में आईं और चौथ तथा खिराज माँगने लगीं। इनका सामना करने के लिए जयपुर के सवाई जयसिंह द्वितीय ने 1734 में हुरड़ा सम्मेलन बुलाया, जिसकी अध्यक्षता मेवाड़ के महाराणा जगतसिंह द्वितीय ने की; यह प्रतिज्ञा एक वर्ष में ही टूट गई। जयपुर के उत्तराधिकार ने मराठों को और भीतर खींच लिया: ईश्वरीसिंह ने 1747 में राजमहल का युद्ध जीता, पर उनके भाई माधोसिंह ने मल्हारराव होल्कर की सहायता से 1748 में बगरू का युद्ध जीत लिया, और 1750 में ईश्वरीसिंह ने प्राण त्याग दिए। अंतिम चरण में जयपुर और जोधपुर ने मिलकर 1787 में तुंगा में महादजी सिंधिया को रोका, पर सिंधिया के फ्रांसीसी प्रशिक्षित सेनापति बेनोइट द बोइन ने 1790 में पाटन और मेड़ता में उन्हें हरा दिया।

अंग्रेजी संधियाँ

मराठा और पिंडारी आक्रमणों से थककर राजपूत रियासतों ने लॉर्ड हेस्टिंग्स के समय ईस्ट इंडिया कंपनी से सहायक संधियाँ कीं, जिनकी शर्तें चार्ल्स मेटकाफ ने तय कीं। नवंबर 1817 में करौली ने सबसे पहले संधि की; जोधपुर, उदयपुर, बूंदी, कोटा, जयपुर और शेष रियासतों ने 1817-18 में हस्ताक्षर किए, और सिरोही ने सबसे अंत में, 1823 में। इसके बाद राजपूताना 1949 के एकीकरण तक संरक्षित रियासतों का समूह बना रहा।

एक नजर में तिथियाँ

वर्षघटनापक्ष
1527खानवा का युद्धबाबर ने राणा सांगा को हराया
1544गिरी सुमेल का युद्धशेरशाह सूरी बनाम राव मालदेव
1568चित्तौड़गढ़ का पतनअकबर बनाम जयमल और पत्ता
1576हल्दीघाटी का युद्धमानसिंह प्रथम बनाम महाराणा प्रताप
1615मेवाड़ संधिअमरसिंह प्रथम और जहाँगीर
1734हुरड़ा सम्मेलनराजपूत रियासतें बनाम मराठे
1748बगरू का युद्धमाधोसिंह और होल्कर बनाम ईश्वरीसिंह
1787तुंगा का युद्धजयपुर-जोधपुर बनाम महादजी सिंधिया
1790पाटन और मेड़ताद बोइन बनाम राजपूत

परीक्षा की दृष्टि से

आरपीएससी, आरएएस और आरएसएसबी के प्रश्न इस अध्याय से वर्ष, युद्ध, विजेता और संधि के रूप में आते हैं। 1527 खानवा के साथ बाबर और राणा सांगा, 1544 गिरी सुमेल के साथ शेरशाह और मालदेव, 1568 चित्तौड़ के साथ जयमल-पत्ता, 1576 हल्दीघाटी के साथ मानसिंह प्रथम, 1615 के साथ अमरसिंह प्रथम और खुर्रम, 1734 हुरड़ा के साथ जयसिंह द्वितीय, 1748 बगरू के साथ होल्कर, 1787 तुंगा के साथ महादजी सिंधिया और 1790 पाटन के साथ द बोइन जोड़कर याद करें। सामान्य भ्रम ये हैं: राणा सांगा को खानवा के स्थान पर पानीपत से जोड़ देना, हल्दीघाटी में अकबर को उपस्थित बताना, 1615 की संधि का श्रेय प्रताप को देना, हुरड़ा सम्मेलन को मुगलकाल में रख देना, और बगरू तथा राजमहल को आपस में बदल देना।

महत्वपूर्ण तथ्य

खानवा का युद्ध17 मार्च 1527, बाबर ने मेवाड़ के राणा सांगा को हराया
गिरी सुमेल का युद्ध1544, शेरशाह सूरी बनाम मारवाड़ के राव मालदेव
पहली मुगल संधिआमेर के राजा भारमल, 1562, अकबर के साथ
चित्तौड़गढ़ का पतनफरवरी 1568; रक्षक मेड़ता के जयमल और केलवा के पत्ता
उदयपुर की स्थापना1559, महाराणा उदयसिंह द्वितीय द्वारा
हल्दीघाटी का युद्ध18 जून 1576, महाराणा प्रताप बनाम मानसिंह प्रथम
दिवेर का युद्ध1582, महाराणा प्रताप की विजय
मेवाड़-मुगल संधि1615, महाराणा अमरसिंह प्रथम, शहजादा खुर्रम के माध्यम से
जजिया पुनः लागू1679, औरंगजेब द्वारा
मारवाड़ के छापामार नेतादुर्गादास राठौड़, अजीतसिंह के रक्षक
सबसे बड़ा शिलालेखराजसमंद की राज प्रशस्ति, महाराणा राजसिंह प्रथम के समय
हुरड़ा सम्मेलन1734, जयपुर के सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा बुलाया गया
राजमहल का युद्ध1747, जयपुर के ईश्वरीसिंह की विजय
बगरू का युद्ध1748, माधोसिंह और मल्हारराव होल्कर
तुंगा का युद्ध1787, जयपुर-जोधपुर बनाम महादजी सिंधिया
पहली अंग्रेजी संधिकरौली, नवंबर 1817; अंतिम सिरोही, 1823

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.राजस्थानआसान

1527 में हुए खानवा के युद्ध में बाबर ने किस राजपूत शासक को पराजित किया?

  1. A.मेवाड़ के राणा कुम्भा
  2. B.मेवाड़ के राणा सांगा
  3. C.मारवाड़ के राव मालदेव
  4. D.बीकानेर के राव बीका
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मेवाड़ के राणा सांगा

खानवा का युद्ध 17 मार्च 1527 को फतेहपुर सीकरी के निकट लड़ा गया, जहाँ बाबर ने तोपखाने और तुलुगमा व्यूह से महाराणा सांगा के नेतृत्व वाले राजपूत संघ को तोड़ दिया।

Q2.राजस्थानआसान

1562 में अकबर से संधि करने वाले राजस्थान के पहले राजपूत शासक कौन थे?

  1. A.मारवाड़ के राव चंद्रसेन
  2. B.मेवाड़ के उदयसिंह द्वितीय
  3. C.आमेर के राजा भारमल
  4. D.बीकानेर के रायसिंह
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. आमेर के राजा भारमल

1562 में कछवाहा वंश के भारमल सांगानेर में अकबर से मिले, मुगल अधीनता स्वीकार की और वैवाहिक संबंध से इसे पक्का किया; मुगल परिवार में गई राजकुमारी जहाँगीर की माता के रूप में याद की जाती हैं।

Q3.राजस्थानआसान

मेड़ता के जयमल और केलवा के पत्ता अकबर के विरुद्ध किस दुर्ग की रक्षा के लिए प्रसिद्ध हैं?

  1. A.रणथंभौर
  2. B.चित्तौड़गढ़
  3. C.मेहरानगढ़
  4. D.जूनागढ़
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. चित्तौड़गढ़

अकबर ने 1567 में चित्तौड़गढ़ को घेरा और फरवरी 1568 में उसे जीत लिया।

Q4.राजस्थानआसान

1576 में हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप के विरुद्ध मुगल सेना का नेतृत्व किसने किया?

  1. A.स्वयं अकबर ने
  2. B.मिर्जा राजा जयसिंह प्रथम ने
  3. C.आमेर के मानसिंह प्रथम ने
  4. D.टोडरमल ने
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. आमेर के मानसिंह प्रथम ने

हल्दीघाटी का युद्ध 18 जून 1576 को राजसमंद जिले के खमनोर के निकट दर्रे में लड़ा गया।

Q5.राजस्थानमध्यम

मेवाड़ और मुगलों के बीच 1615 की संधि किस महाराणा ने की?

  1. A.महाराणा प्रताप
  2. B.अमरसिंह प्रथम
  3. C.राजसिंह प्रथम
  4. D.जगतसिंह द्वितीय
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अमरसिंह प्रथम

महाराणा प्रताप के पुत्र और उत्तराधिकारी अमरसिंह प्रथम ने वर्षों तक मुगल टुकड़ियों से संघर्ष किया और अंततः जहाँगीर के शासनकाल में 1615 में संधि स्वीकार की।

Q6.राजस्थानमध्यम

औरंगजेब के काल में दुर्गादास राठौड़ ने किस रियासत के शिशु उत्तराधिकारी की रक्षा की?

  1. A.मारवाड़
  2. B.मेवाड़
  3. C.आमेर
  4. D.बूंदी
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. मारवाड़

1678 में जमरूद में महाराजा जसवंतसिंह की मृत्यु हो गई और औरंगजेब ने मारवाड़ को सीधे मुगल नियंत्रण में लेने का प्रयास किया।

Q7.राजस्थानमध्यम

1734 का हुरड़ा सम्मेलन किसने और किसके विरुद्ध बुलाया था?

  1. A.महाराणा राजसिंह प्रथम ने, औरंगजेब के विरुद्ध
  2. B.जयपुर के सवाई जयसिंह द्वितीय ने, मराठों के विरुद्ध
  3. C.जोधपुर के महाराजा अजीतसिंह ने, पिंडारियों के विरुद्ध
  4. D.जोधपुर के महाराजा मानसिंह ने, अंग्रेजों के विरुद्ध
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. जयपुर के सवाई जयसिंह द्वितीय ने, मराठों के विरुद्ध

1730 के दशक तक मराठा सेनाएँ चौथ और खिराज के लिए राजपूताना पर दबाव बना रही थीं, इसलिए जयसिंह द्वितीय ने 1734 में वर्तमान भीलवाड़ा जिले के हुरड़ा में शासकों की बैठक बुलाई।

Q8.राजस्थानकठिन

1748 के बगरू युद्ध में माधोसिंह ने किस मराठा सरदार की सहायता से जयपुर के ईश्वरीसिंह को हराया?

  1. A.महादजी सिंधिया
  2. B.मल्हारराव होल्कर
  3. C.रघुनाथराव
  4. D.दमाजी गायकवाड़
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मल्हारराव होल्कर

सवाई जयसिंह द्वितीय की मृत्यु के बाद उनके पुत्र ईश्वरीसिंह और माधोसिंह जयपुर की गद्दी के लिए भिड़े। ईश्वरीसिंह ने 1747 में राजमहल का युद्ध जीता, पर माधोसिंह मराठा सहायता ले आए, जिसमें मुख्य भूमिका इंदौर के मल्हारराव होल्कर की थी, और 1748 में बगरू का युद्ध जीत लिया।

Q9.राजस्थानमध्यम

1787 के तुंगा युद्ध में जयपुर और जोधपुर की संयुक्त सेनाओं का सामना किससे हुआ?

  1. A.महादजी सिंधिया
  2. B.मल्हारराव होल्कर
  3. C.अमीर खाँ पिंडारी
  4. D.लॉर्ड लेक
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. महादजी सिंधिया

तुंगा का युद्ध 1787 में वर्तमान दौसा जिले के लालसोट के निकट लड़ा गया, जहाँ जयपुर के महाराजा प्रतापसिंह और जोधपुर के महाराजा विजयसिंह ने मिलकर सिंधिया की खिराज माँग का विरोध किया।

Q10.राजस्थानकठिन

1817 में अंग्रेजों से सहायक संधि करने वाली पहली राजपूत रियासत कौन सी थी?

  1. A.मेवाड़
  2. B.मारवाड़
  3. C.करौली
  4. D.सिरोही
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. करौली

मराठा माँगों और पिंडारी आक्रमणों से त्रस्त राजपूत रियासतें लॉर्ड हेस्टिंग्स के समय ईस्ट इंडिया कंपनी की ओर मुड़ीं और शर्तें चार्ल्स मेटकाफ ने तय कीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हल्दीघाटी का युद्ध किनके बीच हुआ और मुगल सेना का नेतृत्व किसने किया?

हल्दीघाटी का युद्ध 18 जून 1576 को मेवाड़ के महाराणा प्रताप और मुगल सेना के बीच हुआ। मुगल सेना का नेतृत्व आमेर के मानसिंह प्रथम ने किया, उनके साथ आसफ खाँ भी थे। अकबर स्वयं युद्धभूमि में उपस्थित नहीं थे। प्रताप चेतक पर सवार थे और भील सरदार राणा पूंजा उनके साथ लड़े।

अकबर से संधि करने वाले पहले राजपूत शासक कौन थे?

आमेर के राजा भारमल, 1562 में। वे मुगल अधीनता और वैवाहिक संबंध स्वीकार करने वाले राजस्थान के पहले राजपूत शासक थे; उनकी पुत्री जहाँगीर की माता बनीं। उनके उत्तराधिकारी मानसिंह प्रथम और मिर्जा राजा जयसिंह प्रथम मुगल साम्राज्य के प्रमुख सेनापति बने।

1734 का हुरड़ा सम्मेलन क्या था?

यह वर्तमान भीलवाड़ा जिले के हुरड़ा में राजपूत शासकों की बैठक थी, जिसे जयपुर के सवाई जयसिंह द्वितीय ने बुलाया और जिसकी अध्यक्षता मेवाड़ के महाराणा जगतसिंह द्वितीय ने की। इसका उद्देश्य मराठों की चौथ और खिराज की माँग के विरुद्ध संयुक्त मोर्चा बनाना था। शासकों ने प्रतिज्ञा-पत्र पर हस्ताक्षर किए, पर आपसी प्रतिद्वंद्विता से यह एक वर्ष में टूट गया।

मेवाड़ और मुगलों का लंबा संघर्ष किस संधि से समाप्त हुआ?

1615 में महाराणा अमरसिंह प्रथम और जहाँगीर के बीच हुई संधि से, जिसे शहजादा खुर्रम यानी बाद के शाहजहाँ ने तय कराया। मेवाड़ ने मुगल अधीनता स्वीकार की, पर उसके शासक को स्वयं दरबार में उपस्थित होने से छूट मिली और कोई राजकुमारी विवाह में नहीं दी गई, इसलिए मेवाड़ की अलग प्रतिष्ठा बनी रही।

अंग्रेजों से पहली संधि करने वाली राजपूत रियासत कौन सी थी?

करौली, नवंबर 1817 में। लॉर्ड हेस्टिंग्स के समय ईस्ट इंडिया कंपनी से सहायक संधि करने वाली यह पहली राजपूत रियासत थी। शेष अधिकांश रियासतों ने 1817 और 1818 में संधि की, और सिरोही ने सबसे अंत में 1823 में हस्ताक्षर किए।

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