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GK नोट्सराजस्थानप्रजामंडल आंदोलन और राजस्थान का एकीकरण

प्रजामंडल आंदोलन और राजस्थान का एकीकरण: सात चरण

राजपूताना के प्रजामंडल आंदोलन तथा 1948 से 1956 तक राजस्थान के एकीकरण के सात चरणों के पूरे नोट्स, प्रमुख नेताओं, तिथियों, राजधानियों और परीक्षा तथ्यों सहित।

लेखक · प्रकाशित · 4 मिनट

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प्रजामंडल आंदोलन और राजस्थान का एकीकरण: सात चरण — GK24 title card
प्रजामंडल आंदोलन और राजस्थान का एकीकरण: सात चरण — GK24 title card

1948 से पहले राजस्थान एक राजनीतिक इकाई के रूप में नहीं था। उस समय इस क्षेत्र को राजपूताना कहा जाता था, जिसमें 19 रियासतें, तीन ठिकाने (लावा, कुशलगढ़ और नीमराना) तथा अंग्रेजों के सीधे शासन वाला अजमेर-मेरवाड़ा शामिल थे, और इन सब पर माउंट आबू में मुख्यालय रखने वाली राजपूताना एजेंसी की निगरानी थी। आज का राजस्थान दो कहानियों से बना है। पहली कहानी प्रजामंडल आंदोलन की है, जिसमें रियासतों की जनता ने नागरिक अधिकार और उत्तरदायी शासन की मांग की। दूसरी कहानी 1948 से 1956 तक चले एकीकरण की है, जिसमें रियासतें सात चरणों में मिलाई गईं। परीक्षाएं दोनों को एक ही अध्याय मानती हैं, इसलिए संस्थापक, वर्ष और प्रत्येक चरण की राजधानी साथ याद रखनी चाहिए।

प्रजामंडलों का गठन क्यों हुआ

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ब्रिटिश भारत में काम करती थी, रियासतों के भीतर नहीं, इसलिए रियासतों की प्रजा ने अपने संगठन खड़े किए। वर्ष 1927 में बंबई में स्थापित अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद ने उन्हें एक साझा मंच दिया, और 1930 के दशक से एक के बाद एक रियासत में प्रजामंडल, अर्थात प्रजा की सभा, बनने लगे। उनकी पहली मांगें क्रांतिकारी नहीं, संवैधानिक थीं: बेगार और लाग-बाग की समाप्ति, भू-राजस्व में कमी, प्रेस और संगठन बनाने की स्वतंत्रता, तथा निर्वाचित सदस्यों वाली विधानसभा। कांग्रेस के 1938 के हरिपुरा अधिवेशन ने कहा कि पूर्ण स्वराज में रियासतें भी शामिल हैं, परंतु वहां की जनता अपनी लड़ाई स्वयं लड़े। वर्ष 1939 के त्रिपुरी अधिवेशन ने कांग्रेस को सीधी सहायता की अनुमति दी और उसी वर्ष से प्रजामंडल खुलकर राजनीतिक हो गए।

प्रमुख प्रजामंडल और उनके नेता

संगठनवर्षप्रमुख नेता
जयपुर प्रजामंडल1931, पुनर्गठन 1936-37कपूरचंद पाटनी; बाद में जमनालाल बजाज और हीरालाल शास्त्री
मारवाड़ प्रजामंडल (जोधपुर)1934जयनारायण व्यास, साथ में भंवरलाल सर्राफ
मेवाड़ प्रजामंडल (उदयपुर)1938माणिक्य लाल वर्मा
अलवर प्रजामंडल1938हरिभाऊ उपाध्याय
भरतपुर प्रजामंडल1938किशनलाल जोशी और गोपीलाल यादव
सिरोही प्रजामंडल1939गोकुल भाई भट्ट, राजस्थान के गांधी
कोटा प्रजामंडल1939पंडित नयनूराम शर्मा
बीकानेर प्रजा परिषद1942रियासत में राजनीति पर रोक के कारण बाहर से कार्य
डूंगरपुर प्रजामंडल1944भोगीलाल पंड्या, बागड़ के गांधी

सत्याग्रह और बलिदान

यह आंदोलन केवल प्रार्थना-पत्रों तक सीमित नहीं था। जयपुर प्रजामंडल को अवैध घोषित किया गया और उसने 1939 में हीरालाल शास्त्री के नेतृत्व में सत्याग्रह किया। मारवाड़ में प्रजामंडल ने काश्तकारी कानून और सभाओं पर लगी रोक के विरुद्ध संघर्ष किया; उसके कार्यकर्ता बालमुकुंद बिस्सा जून 1942 में अनशन के बाद जोधपुर जेल में शहीद हुए। मेवाड़ प्रजामंडल ने माणिक्य लाल वर्मा के नेतृत्व में 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया। इससे पहले मेवाड़ के बिजोलिया और बेगूं किसान आंदोलनों ने इस क्षेत्र को संगठित संघर्ष का अभ्यास करा दिया था। वर्ष 1947 तक राजपूताना की लगभग हर रियासत में ऐसा प्रजामंडल था जो लोकप्रिय मंत्रिमंडल बनवाने की स्थिति में था।

एकीकरण के सात चरण

15 अगस्त 1947 के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल के अधीन रियासत विभाग ने, जिसके सचिव वी. पी. मेनन थे, प्रत्येक शासक से विलय-पत्र लिया और छोटी रियासतों को व्यवहार्य इकाइयों में मिलाया। राजपूताना में यह कार्य सात चरणों में पूरा हुआ।

चरणतिथिक्या बनाराजधानी
118 मार्च 1948मत्स्य संघ: अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौलीअलवर
225 मार्च 1948राजस्थान संघ: बांसवाड़ा, बूंदी, डूंगरपुर, झालावाड़, किशनगढ़, कोटा, प्रतापगढ़, शाहपुरा, टोंककोटा
318 अप्रैल 1948संयुक्त राजस्थान: उदयपुर का राजस्थान संघ में विलयउदयपुर
430 मार्च 1949वृहद राजस्थान: जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और जैसलमेर का विलयजयपुर
515 मई 1949संयुक्त वृहद राजस्थान: मत्स्य संघ का विलयजयपुर
626 जनवरी 1950राजस्थान: सिरोही का विलय, आबू और देलवाड़ा को छोड़करजयपुर
71 नवंबर 1956राज्य पुनर्गठन अधिनियम के अंतर्गत पुनर्गठनजयपुर

मत्स्य संघ का नाम के. एम. मुंशी ने प्राचीन मत्स्य जनपद के आधार पर सुझाया था; उसके राजप्रमुख धौलपुर के महाराजा और प्रधानमंत्री शोभाराम कुमावत थे। कोटा में राजस्थान संघ के प्रधानमंत्री गोकुल लाल असावा और उदयपुर में संयुक्त राजस्थान के प्रधानमंत्री माणिक्य लाल वर्मा बने। वृहद राजस्थान का उद्घाटन 30 मार्च 1949 को सरदार पटेल ने किया, इसीलिए 30 मार्च राजस्थान दिवस के रूप में मनाया जाता है; जयपुर के सवाई मानसिंह द्वितीय राजप्रमुख बने, उदयपुर के महाराणा महाराजप्रमुख बनाए गए और हीरालाल शास्त्री उसकी सरकार के पहले प्रमुख बने।

1956 के पुनर्गठन के बाद

राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 ने अजमेर-मेरवाड़ा, बंबई राज्य से आबू रोड तहसील तथा सुनेल टप्पा क्षेत्र को राजस्थान में मिलाया, जबकि कोटा की सिरोंज तहसील मध्य प्रदेश को दे दी गई। राजप्रमुख का वंशानुगत पद समाप्त कर दिया गया और उसके स्थान पर राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त राज्यपाल आया, जिनमें पहले गुरुमुख निहाल सिंह थे। इसके बाद राजस्थान को वही स्वरूप और सीमाएं मिलीं जो आज हैं, और क्षेत्रफल की दृष्टि से यह देश का सबसे बड़ा राज्य बना।

परीक्षा की दृष्टि से

यह अध्याय चार रूपों में पूछा जाता है। पहला, प्रजामंडलों के संस्थापक और वर्ष का मेल, जिसमें मारवाड़ के साथ जयनारायण व्यास और मेवाड़ के साथ माणिक्य लाल वर्मा सबसे अधिक आते हैं। दूसरा, उपनाम: राजस्थान के गांधी गोकुल भाई भट्ट और बागड़ के गांधी भोगीलाल पंड्या हैं। तीसरा, एकीकरण के चरण, जो तिथि और संघ के मेल अथवा इस रूप में पूछे जाते हैं कि कौन सी रियासत किसी संघ में शामिल नहीं थी; मत्स्य संघ में कोटा और पहले राजस्थान संघ में उदयपुर सामान्य भ्रम हैं। चौथा, प्रथम तथ्य: राजप्रमुख, वृहद राजस्थान के पहले प्रधानमंत्री तथा 1956 के पहले राज्यपाल। ध्यान रखें कि 30 मार्च राजस्थान दिवस इसलिए है कि उस दिन वृहद राजस्थान का उद्घाटन हुआ था, अंतिम राज्य का गठन नहीं।

महत्वपूर्ण तथ्य

राजपूताना की इकाइयां19 रियासतें, तीन ठिकाने और अजमेर-मेरवाड़ा
देशी राज्य लोक परिषद1927, बंबई
मारवाड़ प्रजामंडल1934, जयनारायण व्यास
मेवाड़ प्रजामंडल1938, माणिक्य लाल वर्मा
राजस्थान के गांधीसिरोही के गोकुल भाई भट्ट
मत्स्य संघ18 मार्च 1948, राजधानी अलवर, नाम के. एम. मुंशी का सुझाव
राजस्थान संघ25 मार्च 1948, राजधानी कोटा, प्रधानमंत्री गोकुल लाल असावा
संयुक्त राजस्थान18 अप्रैल 1948, राजधानी उदयपुर, प्रधानमंत्री माणिक्य लाल वर्मा
वृहद राजस्थान30 मार्च 1949, जयपुर में सरदार पटेल द्वारा उद्घाटन
राजस्थान दिवस30 मार्च
सिरोही का विलय26 जनवरी 1950, आबू और देलवाड़ा के बिना
पुनर्गठन1 नवंबर 1956, अजमेर-मेरवाड़ा और आबू रोड तहसील जुड़े, सिरोंज गई
प्रथम राज्यपालगुरुमुख निहाल सिंह, 1956

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.राजस्थानआसान

18 मार्च 1948 को बने मत्स्य संघ में निम्नलिखित में से कौन सी रियासत शामिल नहीं थी?

  1. A.अलवर
  2. B.भरतपुर
  3. C.धौलपुर
  4. D.कोटा
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. कोटा

राजस्थान के एकीकरण का पहला चरण मत्स्य संघ 18 मार्च 1948 को राजपूताना के पूर्वी छोर की केवल चार रियासतों से बना था: अलवर, भरतपुर, धौलपुर और करौली।

Q2.राजस्थानआसान

1934 में मारवाड़ प्रजामंडल की स्थापना किसने की?

  1. A.माणिक्य लाल वर्मा
  2. B.जयनारायण व्यास
  3. C.हीरालाल शास्त्री
  4. D.गोकुल भाई भट्ट
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. जयनारायण व्यास

मारवाड़ प्रजामंडल की स्थापना 1934 में जोधपुर में जयनारायण व्यास ने की, जो इससे पहले 1920 के दशक की मारवाड़ हितकारिणी सभा के माध्यम से काम कर चुके थे।

Q3.राजस्थानमध्यम

प्रजामंडल आंदोलन के किस नेता को राजस्थान का गांधी कहा जाता है?

  1. A.भोगीलाल पंड्या
  2. B.गोकुल भाई भट्ट
  3. C.पंडित नयनूराम शर्मा
  4. D.हरिभाऊ उपाध्याय
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. गोकुल भाई भट्ट

गोकुल भाई भट्ट ने 1939 में सिरोही प्रजामंडल की स्थापना की, खादी और रचनात्मक कार्य वाला सादा गांधीवादी जीवन जिया, इसलिए उन्हें राजस्थान का गांधी कहा जाता है।

Q4.राजस्थानआसान

30 मार्च 1949 को जयपुर में वृहद राजस्थान का उद्घाटन किसने किया?

  1. A.जवाहरलाल नेहरू
  2. B.सरदार वल्लभभाई पटेल
  3. C.लॉर्ड माउंटबेटन
  4. D.वी. पी. मेनन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सरदार वल्लभभाई पटेल

एकीकरण के चौथे चरण वृहद राजस्थान में जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और जैसलमेर को पहले के संयुक्त राजस्थान में मिलाया गया, और सरदार पटेल ने 30 मार्च 1949 को जयपुर में इसका उद्घाटन किया।

Q5.राजस्थानमध्यम

1949 में वृहद राजस्थान की सरकार के पहले प्रमुख, जिन्हें तब प्रधानमंत्री कहा गया, कौन बने?

  1. A.माणिक्य लाल वर्मा
  2. B.गोकुल लाल असावा
  3. C.हीरालाल शास्त्री
  4. D.मोहनलाल सुखाड़िया
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. हीरालाल शास्त्री

जयपुर प्रजामंडल के नेता हीरालाल शास्त्री, जिन्होंने 1939 में उसका सत्याग्रह चलाया था, 1949 में वृहद राजस्थान के पहले प्रधानमंत्री बने, और यही पद बाद में मुख्यमंत्री कहलाया।

Q6.राजस्थानमध्यम

25 मार्च 1948 को बने राजस्थान संघ की राजधानी कौन थी?

  1. A.उदयपुर
  2. B.कोटा
  3. C.जयपुर
  4. D.अलवर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. कोटा

दूसरे चरण के 25 मार्च 1948 के राजस्थान संघ में दक्षिण और पूर्व की नौ रियासतें मिलीं: बांसवाड़ा, बूंदी, डूंगरपुर, झालावाड़, किशनगढ़, कोटा, प्रतापगढ़, शाहपुरा और टोंक।

Q7.राजस्थानकठिन

आबू और देलवाड़ा को छोड़कर सिरोही का राजस्थान में विलय कब हुआ?

  1. A.30 मार्च 1949
  2. B.15 मई 1949
  3. C.26 जनवरी 1950
  4. D.1 नवंबर 1956
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 26 जनवरी 1950

एकीकरण का छठा चरण उसी दिन पड़ा जिस दिन संविधान लागू हुआ: सिरोही का विलय हुआ और इकाई को पहली बार केवल राजस्थान नाम मिला।

Q8.राजस्थानकठिन

राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के अंतर्गत निम्नलिखित में से क्या राजस्थान में जोड़ा गया?

  1. A.सिरोंज तहसील
  2. B.आबू रोड तहसील
  3. C.झालावाड़ रियासत
  4. D.करौली रियासत
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. आबू रोड तहसील

सातवें चरण में 1 नवंबर 1956 को बंबई राज्य से आबू रोड तहसील राजस्थान में आई, साथ ही अजमेर-मेरवाड़ा तथा सुनेल टप्पा क्षेत्र भी मिले, और इसी प्रकार माउंट आबू राजस्थान का भाग बना।

Q9.राजस्थानकठिन

माणिक्य लाल वर्मा इनमें से किस इकाई के प्रधानमंत्री थे?

  1. A.मत्स्य संघ
  2. B.राजस्थान संघ
  3. C.संयुक्त राजस्थान
  4. D.वृहद राजस्थान
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. संयुक्त राजस्थान

जब 18 अप्रैल 1948 को उदयपुर राजस्थान संघ में मिला तो बड़ी इकाई का नाम संयुक्त राजस्थान रखा गया, जिसकी राजधानी उदयपुर, राजप्रमुख उदयपुर के महाराणा और प्रधानमंत्री मेवाड़ प्रजामंडल के संस्थापक माणिक्य लाल वर्मा बने।

Q10.राजस्थानमध्यम

1956 में राजप्रमुख का पद समाप्त होने पर राजस्थान के पहले राज्यपाल कौन बने?

  1. A.सवाई मानसिंह द्वितीय
  2. B.गुरुमुख निहाल सिंह
  3. C.महाराणा भूपाल सिंह
  4. D.जयनारायण व्यास
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. गुरुमुख निहाल सिंह

राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 ने राजप्रमुख का वंशानुगत पद समाप्त किया, जिस पर कोई पूर्व शासक बैठता था, और उसके स्थान पर संविधान के सामान्य प्रावधान के अनुसार राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त राज्यपाल आया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान के एकीकरण में कितने चरण थे?

सात चरण, 18 मार्च 1948 के मत्स्य संघ से लेकर 1 नवंबर 1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम वाले पुनर्गठन तक।

राजस्थान दिवस 30 मार्च को क्यों मनाया जाता है?

क्योंकि जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और जैसलमेर को मिलाने वाले वृहद राजस्थान का उद्घाटन सरदार वल्लभभाई पटेल ने 30 मार्च 1949 को जयपुर में किया था।

मारवाड़ प्रजामंडल की स्थापना किसने की?

जयनारायण व्यास ने 1934 में जोधपुर में इसकी स्थापना की, जिनके निकट सहयोगियों में भंवरलाल सर्राफ थे।

मत्स्य संघ में कौन सी रियासतें थीं?

अलवर, भरतपुर, धौलपुर और करौली, जिसकी राजधानी अलवर थी; मत्स्य नाम के. एम. मुंशी ने सुझाया था।

1 नवंबर 1956 को राजस्थान में क्या बदला?

अजमेर-मेरवाड़ा, आबू रोड तहसील और सुनेल टप्पा राजस्थान में मिले, सिरोंज तहसील मध्य प्रदेश को गई तथा राजप्रमुख के स्थान पर राज्यपाल आया।

स्रोत

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