राजस्थान सिंचाई और जल परियोजनाएं: नहरें और बांध
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए राजस्थान सिंचाई नोट्स: इंदिरा गांधी नहर, गंग नहर, चंबल घाटी के बांध, माही बजाज सागर, बीसलपुर और परंपरागत जल संग्रहण।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

राजस्थान के पास देश की लगभग दसवां भाग भूमि है, पर धरातलीय जल का बहुत छोटा हिस्सा। इसी कारण राज्य का लगभग हर सिंचित खेत किसी बांध में रुके जल, किसी कुएं से उठाए जल या दूसरे बेसिन से लाए जल पर निर्भर है। राज्य का सिंचाई नक्शा तीन भागों में बंटता है: उत्तर पश्चिम की लंबी नहरें, जो सतलुज और ब्यास का जल मरुस्थल तक लाती हैं; दक्षिण पूर्व के बांध, जो चंबल और माही को रोकते हैं; और कुएं तथा नलकूप, जो चुपचाप सबसे बड़े क्षेत्र की सिंचाई करते हैं। परीक्षक इस अध्याय को पसंद करते हैं, क्योंकि हर परियोजना किसी नदी को किसी जिले से और अक्सर किसी नाम तथा वर्ष से जोड़ती है।
राजस्थान में सिंचाई के साधन
कुएं और नलकूप सबसे बड़ा साधन हैं और राज्य के सिंचित क्षेत्र के लगभग सत्तर प्रतिशत भाग को जल देते हैं। नहरें दूसरे स्थान पर हैं और श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, कोटा, बूंदी तथा बारां में केंद्रित हैं; तालाब और अन्य लघु साधन शेष भाग संभालते हैं। भूजल स्तर तेजी से गिरने के कारण फव्वारा और बूंद बूंद सिंचाई राजस्थान में अधिकांश राज्यों से अधिक फैली है, और पश्चिम में नर्मदा नहर का कमांड देश का पहला क्षेत्र था जहां नहर का जल लेने वाले हर किसान के लिए सूक्ष्म सिंचाई अनिवार्य की गई।
इंदिरा गांधी नहर परियोजना
इस नहर की कल्पना अभियंता कंवर सेन ने 1948 में राजस्थान नहर के नाम से की थी और इसका शिलान्यास 31 मार्च 1958 को हुआ। वर्ष 1984 में इसका नाम इंदिरा गांधी नहर रखा गया। जल पंजाब के हरिके बैराज से लिया जाता है, जो सतलुज और ब्यास के संगम से कुछ नीचे बना है। लगभग 204 किलोमीटर लंबा लाइनिंग युक्त फीडर जल को राजस्थान की सीमा तक लाता है और वहां से मुख्य नहर लगभग 445 किलोमीटर थार में आगे बढ़कर जैसलमेर के मोहनगढ़ के पास समाप्त होती है। प्रथम चरण में श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ तथा उत्तरी बीकानेर आते हैं; द्वितीय चरण जल को बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर तक ले जाता है। कंवर सेन, पन्नालाल बारूपाल, चौधरी कुंभाराम, डॉ कर्णी सिंह और राजीव गांधी लिफ्ट नहरें जल को नहर से ऊंची भूमि तक उठाती हैं, तथा राजीव गांधी लिफ्ट नहर जोधपुर की ओर पेयजल भी ले जाती है। इस नहर ने बालू के मैदान को गेहूं, सरसों, कपास और चने की दो फसलों वाला क्षेत्र बना दिया, पर प्रथम चरण के कुछ भागों में उसी जल से जलभराव और लवणता यानी सेम की समस्या भी आई।
उत्तर पश्चिम की पुरानी नहरें
गंग नहर राजस्थान की सबसे पुरानी नहर है। इसे बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह ने बनवाया और यह 1927 में चालू हुई। यह फिरोजपुर के पास हुसैनीवाला हेडवर्क्स से सतलुज का जल लेकर श्रीगंगानगर पहुंचाती है, जहां आज भी रबी की फसल इसी पर टिकी है। सतलुज पर बनी भाखड़ा नांगल परियोजना पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की साझा है; भाखड़ा बांध हिमाचल प्रदेश में है और गोविंद सागर जलाशय बनाता है, तथा राजस्थान अपना हिस्सा भाखड़ा नहर प्रणाली से हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर में लेता है। सिद्धमुख नोहर परियोजना यही जल चूरू और हनुमानगढ़ तक पहुंचाती है।
चंबल घाटी परियोजना
चंबल मध्य प्रदेश की विंध्य श्रेणी में जानापाव पहाड़ी से निकलती है, उत्तर की ओर बहकर राजस्थान से गुजरती है और यमुना में मिल जाती है। चंबल घाटी परियोजना राजस्थान और मध्य प्रदेश की संयुक्त परियोजना है, जिसमें लागत और लाभ बराबर बंटते हैं। नदी पर चार संरचनाएं ऊपर से नीचे इस क्रम में हैं।
| संरचना | स्थान | कार्य |
|---|---|---|
| गांधी सागर | मंदसौर जिला, मध्य प्रदेश | सबसे ऊपरी भंडारण बांध, विद्युत गृह सहित |
| राणा प्रताप सागर | रावतभाटा, चित्तौड़गढ़ जिला | भंडारण और विद्युत; पास में राजस्थान परमाणु विद्युत गृह |
| जवाहर सागर | बोरावास, कोटा जिला | मुख्यतः विद्युत के लिए पिकअप बांध |
| कोटा बैराज | कोटा नगर | दाईं और बाईं मुख्य नहरों में जल मोड़ना |
दाईं मुख्य नहर कोटा, बूंदी और बारां की सिंचाई करती है, जो राजस्थान का सर्वाधिक नहर सिंचित क्षेत्र है, और बाईं मुख्य नहर मध्य प्रदेश को जल देती है।
दक्षिण, पूर्व और पश्चिम की परियोजनाएं
बांसवाड़ा के पास माही बजाज सागर माही नदी को रोकता है और यह परियोजना गुजरात के साथ साझा है, जिसमें राजस्थान का जल में हिस्सा पैंतालीस प्रतिशत है। टोंक जिले में बनास नदी पर बना बीसलपुर बांध राज्य की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना है और जयपुर, अजमेर तथा टोंक को जल देता है। पाली का जवाई बांध, जो जोधपुर के महाराजा उम्मेद सिंह के समय बना, गोडवाड़ क्षेत्र की जीवन रेखा है, और प्रतापगढ़ का जाखम बांध राज्य का सबसे ऊंचा बांध है। करौली का पांचना पांच धाराओं पर बना मिट्टी का बांध है, सोम कमला आंबा डूंगरपुर को और मानसी वाकल उदयपुर नगर को जल देता है। नर्मदा नहर सरदार सरोवर का जल जालोर और बाड़मेर तक लाती है, जिससे राजस्थान उस कमांड का अंतिम छोर वाला राज्य बनता है। पार्वती, कालीसिंध और चंबल के जोड़ पर आधारित पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना चंबल बेसिन के मानसूनी अतिरिक्त जल को पूर्वी जिलों तक पहुंचाने के लिए प्रस्तावित है।
परंपरागत जल संग्रहण
नहरों से बहुत पहले मरुस्थल इन ढांचों पर जीता था, जिन्हें अभ्यर्थी को क्षेत्र के साथ जोड़कर याद रखना चाहिए: जैसलमेर का खड़ीन, जो चट्टानी ढाल के नीचे बांध बनाकर रुकी नमी पर खेती करता है; टांका या कुंड, वर्षा जल का भूमिगत टैंक; नाडी और जोहड़, गांव के तालाब; बावड़ी और झालरा, नगरों के सीढ़ीदार कुएं; बाड़मेर का तोबा; तथा धोरे के पास खोदी जाने वाली बेरी या कुई। परीक्षा में ये मिलान के रूप में पूछे जाते हैं और गिरते भूजल के उपाय के प्रश्न का उत्तर भी बनते हैं।
परीक्षा की दृष्टि से
इस अध्याय से तीन प्रकार के प्रश्न बनते हैं। पहला इंदिरा गांधी नहर पर: इसकी कल्पना करने वाला अभियंता, पुराना नाम, शिलान्यास की तिथि, निकासी का बैराज, दोनों चरणों के जिले और लिफ्ट नहरें, जिसमें हरिके के स्थान पर गंग नहर का हुसैनीवाला हेडवर्क्स देना सबसे आम जाल है। दूसरा चंबल घाटी पर: बराबर हिस्सेदारी वाले दो राज्य, चार संरचनाओं का क्रम और उनके जिले, रावतभाटा का परमाणु विद्युत गृह तथा कोटा, बूंदी और बारां की नहरें। तीसरा मिलान पर, जिसमें बांध को नदी और जिले के साथ जोड़ना होता है, जैसे बीसलपुर के साथ बनास और टोंक, माही बजाज सागर के साथ बांसवाड़ा और गुजरात, जवाई के साथ पाली तथा जाखम के साथ प्रतापगढ़। सिंचाई की विधियां और खड़ीन, टांका, जोहड़, तोबा जैसे परंपरागत ढांचे एक पंक्ति के प्रश्नों में आते हैं, और सिंचित क्षेत्र में कुओं का हिस्सा राज्य की अभियांत्रिकी भर्तियों का प्रिय प्रश्न है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| सिंचाई का सबसे बड़ा साधन | कुएं और नलकूप, सिंचित क्षेत्र का लगभग सत्तर प्रतिशत |
|---|---|
| इंदिरा गांधी नहर का पुराना नाम | राजस्थान नहर, कल्पना अभियंता कंवर सेन ने 1948 में की |
| शिलान्यास | 31 मार्च 1958; 1984 में नाम इंदिरा गांधी नहर हुआ |
| निकासी स्थल | हरिके बैराज, पंजाब, सतलुज और ब्यास के संगम से नीचे |
| लंबाई | लगभग 204 किलोमीटर फीडर और लगभग 445 किलोमीटर मुख्य नहर |
| प्रथम चरण के जिले | श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और उत्तरी बीकानेर |
| द्वितीय चरण के जिले | बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर |
| सबसे पुरानी नहर | गंग नहर, 1927, महाराजा गंगा सिंह बीकानेर द्वारा |
| गंग नहर का स्रोत | फिरोजपुर के पास सतलुज पर हुसैनीवाला हेडवर्क्स |
| चंबल घाटी परियोजना | राजस्थान और मध्य प्रदेश, बराबर हिस्सेदारी |
| चंबल की संरचनाएं क्रम में | गांधी सागर, राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर, कोटा बैराज |
| राणा प्रताप सागर | चित्तौड़गढ़ जिले का रावतभाटा, राजस्थान परमाणु विद्युत गृह के पास |
| माही बजाज सागर | बांसवाड़ा, माही नदी पर, गुजरात के साथ साझा; राजस्थान का हिस्सा पैंतालीस प्रतिशत |
| बीसलपुर बांध | टोंक जिले में बनास नदी पर; जयपुर, अजमेर और टोंक को पेयजल |
| राज्य का सबसे ऊंचा बांध | जाखम बांध, प्रतापगढ़ |
| नर्मदा नहर कमांड | जालोर और बाड़मेर; सूक्ष्म सिंचाई अनिवार्य |
| परंपरागत ढांचे | खड़ीन, टांका या कुंड, नाडी, जोहड़, बावड़ी, झालरा, तोबा, बेरी |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
राजस्थान में लगभग 70% सिंचाई किससे होती है?
- A.तालाब और झीलें
- B.कुएं और नलकूप
- C.नाडी और बावड़ी
- D.नदियां और नहरें
उत्तर देखें
इंदिरा गांधी नहर और चंबल की नहरें राज्य की प्रसिद्ध परियोजनाएं हैं, पर वे राज्य के एक भाग को ही जल देती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →इंदिरा गांधी नहर किस बैराज से निकलती है?
- A.हरिके बैराज
- B.हुसैनीवाला हेडवर्क्स
- C.हथनीकुंड बैराज
- D.कोटा बैराज
उत्तर देखें
यह पंजाब में ठीक उस स्थान से नीचे बना है जहां ब्यास सतलुज में मिलती है, इसलिए यह दोनों नदियों के संयुक्त प्रवाह पर नियंत्रण रख सकता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1984 से पहले इंदिरा गांधी नहर किस नाम से जानी जाती थी?
- A.गंग नहर
- B.भाखड़ा नहर
- C.राजस्थान नहर
- D.मारवाड़ नहर
उत्तर देखें
इस परियोजना की योजना अभियंता कंवर सेन ने 1948 में इसी नाम से बनाई थी, शिलान्यास 31 मार्च 1958 को हुआ और 1984 में इसका नाम इंदिरा गांधी नहर कर दिया गया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह के शासन में बनी राजस्थान की सबसे पुरानी नहर कौन सी है?
- A.इंदिरा गांधी नहर
- B.गंग नहर
- C.चंबल दाईं मुख्य नहर
- D.नर्मदा नहर
उत्तर देखें
यह 1927 में चालू हुई, फिरोजपुर के पास हुसैनीवाला हेडवर्क्स से सतलुज का जल लेती है और उसे श्रीगंगानगर तक पहुंचाती है, जिससे वह जिला राजस्थान का पहला और लंबे समय तक एकमात्र नहर सिंचित जिला बना।
पूरी व्याख्या पढ़ें →चंबल घाटी परियोजना राजस्थान और किस अन्य राज्य की संयुक्त परियोजना है?
- A.गुजरात
- B.पंजाब
- C.मध्य प्रदेश
- D.उत्तर प्रदेश
उत्तर देखें
चंबल मध्य प्रदेश की विंध्य श्रेणी में जानापाव पहाड़ी से निकलती है और फिर राजस्थान की सीमा तथा भूमि से बहती है, इसलिए दोनों राज्यों ने यह घाटी योजना मिलकर बनाई और उसकी लागत तथा लाभ बराबर बांटे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →चंबल घाटी परियोजना का सबसे ऊपरी बांध कौन सा है?
- A.राणा प्रताप सागर
- B.गांधी सागर
- C.जवाहर सागर
- D.कोटा बैराज
उत्तर देखें
परियोजना की चार संरचनाएं ऊपर से नीचे एक निश्चित क्रम में हैं और यही क्रम प्रश्न बनता है: पहले मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में गांधी सागर, फिर चित्तौड़गढ़ के रावतभाटा में राणा प्रताप सागर, फिर कोटा के बोरावास के पास जवाहर सागर और अंत में कोटा बैराज, जो जल…
पूरी व्याख्या पढ़ें →राजस्थान की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना बीसलपुर बांध किस नदी पर बना है?
- A.लूनी
- B.माही
- C.बनास
- D.चंबल
उत्तर देखें
बीसलपुर बांध टोंक जिले में बनास नदी पर बना है और मुख्यतः पेयजल के लिए बनाया गया था, जिसे वह जयपुर, अजमेर और टोंक तक पाइप से भेजता है, साथ ही टोंक जिले में सिंचाई भी करता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →खड़ीन जल संग्रहण और कृषि प्रणाली परंपरागत रूप से राजस्थान के किस क्षेत्र से जुड़ी है?
- A.जैसलमेर
- B.कोटा
- C.भरतपुर
- D.बांसवाड़ा
उत्तर देखें
खड़ीन मरुस्थल में चट्टानी ढाल के निचले किनारे पर बनाया गया मिट्टी का बांध है। चट्टान से बहा वर्षा जल बांध के पीछे इकट्ठा होकर मिट्टी में गहरे उतर जाता है और उसी संचित नमी पर गेहूं, चना या सरसों की रबी फसल बिना अतिरिक्त सिंचाई बो दी जाती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →रेतीले और असमान क्षेत्र में जल देने की सर्वोत्तम विधि कौन सी है?
- A.मुक्त बाढ़ सिंचाई
- B.अधोभूमि सिंचाई
- C.कूंड विधि
- D.फव्वारा सिंचाई
उत्तर देखें
रेतीली मिट्टी जल को इतनी तेजी से सोखती है कि कोई भी सतही विधि समान रूप से जल नहीं पहुंचा पाती, और असमान सतह को भारी समतलीकरण के बिना भरा नहीं जा सकता।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सिंचाई की वह विधि, जिसमें छोटी संकरी खेत नालियों से जल दिया जाता है और जो कतारों में बोई फसलों के लिए उपयुक्त है, तथा जिसमें पूरे क्षेत्र को जल न देने के कारण जल की खपत कम होती है, कौन सी है?
- A.बाढ़ सिंचाई
- B.कूंड सिंचाई
- C.सदाबहार सिंचाई
- D.क्यारी सिंचाई
उत्तर देखें
इस विधि में कतार वाली फसल की मेड़ों के बीच छोटी संकरी नालियां बनाई जाती हैं और केवल उन्हीं नालियों में जल भरा जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इंदिरा गांधी नहर को जल कहां से मिलता है?
पंजाब के हरिके बैराज से, जो सतलुज में ब्यास के मिलने के स्थान से कुछ नीचे बना है। लाइनिंग युक्त फीडर जल को राजस्थान की सीमा तक लाता है और मुख्य नहर उसे श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर तथा जोधपुर तक पहुंचाती है।
राजस्थान की सबसे पुरानी नहर कौन सी है?
गंग नहर, जो 1927 में चालू हुई। इसे बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह ने बनवाया और यह फिरोजपुर के पास हुसैनीवाला हेडवर्क्स से सतलुज का जल श्रीगंगानगर लाती है, इसीलिए वह जिला राज्य का सबसे पुराना नहर सिंचित क्षेत्र है।
चंबल घाटी परियोजना में कौन कौन राज्य साझेदार हैं?
राजस्थान और मध्य प्रदेश, जो लागत तथा लाभ बराबर बांटते हैं। गांधी सागर मध्य प्रदेश में है, जबकि राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर और कोटा बैराज राजस्थान में हैं, और कोटा से निकली दाईं मुख्य नहर कोटा, बूंदी तथा बारां की सिंचाई करती है।
खड़ीन क्या है?
जैसलमेर क्षेत्र की परंपरागत खेती प्रणाली, जिसमें चट्टानी ढाल के निचले किनारे पर मिट्टी का बांध बनाया जाता है। चट्टान से बहा जल बांध के पीछे जमा होकर मिट्टी में उतरता है और उसी नमी पर गेहूं या चने की रबी फसल बिना सिंचाई ली जाती है।
जयपुर और अजमेर को पेयजल कौन सा बांध देता है?
बीसलपुर बांध, जो टोंक जिले में बनास नदी पर बना है। यह राजस्थान की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना है और जयपुर, अजमेर तथा टोंक को पाइप से जल भेजता है, साथ ही टोंक जिले में सिंचाई भी करता है।
स्रोत
- राजस्थान में सिंचाई परियोजनाएं और सिंचाई के साधन — जल संसाधन विभाग, राजस्थान सरकार
- इंदिरा गांधी नहर परियोजना: चरण, फीडर और कमांड क्षेत्र — इंदिरा गांधी नहर बोर्ड, राजस्थान सरकार
- चंबल बेसिन की अंतरराज्यीय नदी परियोजनाएं — केंद्रीय जल आयोग, जल शक्ति मंत्रालय





