राजस्थान के उद्योग और हस्तशिल्प: जिले और शिल्प
परीक्षा के लिए राजस्थान के उद्योग और हस्तशिल्प नोट्स: भीलवाड़ा वस्त्र, सीमेंट, संगमरमर, जस्ता, ताँबा, नमक, ब्लू पॉटरी, कोटा डोरिया और भौगोलिक संकेत।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

राजस्थान शुष्क राज्य है, जहाँ कोयला कम है और बारहमासी नदी लगभग नहीं है, इसलिए उसका उद्योग उन तीन चीजों पर खड़ा हुआ जो उसके पास हैं — खनिज, ऊन और कपास, तथा उसके शिल्पियों के हाथ। खनिज आधारित उद्योग ने सीमेंट, संगमरमर, जस्ता और ताँबा दिया; कृषि ने वस्त्र, तिलहन पेराई और डेयरी दी; और पुराने रियासती नगरों के शिल्प ने छपाई, मिट्टी के बरतन, आभूषण तथा फर्नीचर का निर्यात व्यापार दिया। इस अध्याय के प्रश्न लगभग सदा स्थान के होते हैं — कौन सा नगर क्या बनाता है और कौन सा संयंत्र किस जिले में है।
राज्य में उद्योग का ढाँचा
1980 में बनी राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं विनियोग निगम, जिसे रीको कहा जाता है, राज्य के औद्योगिक क्षेत्र बनाती और चलाती है, जबकि 1955 से चल रहा राजस्थान वित्त निगम लघु इकाइयों को ऋण देता है। 1995 में स्थापित ग्रामीण गैर-कृषि विकास अभिकरण गाँवों के ऊन, चमड़ा, हथकरघा और पत्थर शिल्प के लिए काम करता है। दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा राज्य से होकर जाता है और उसने उत्तर-पूर्व में खुशखेड़ा, भिवाड़ी तथा नीमराना और पश्चिम में जोधपुर, पाली तथा मारवाड़ के आसपास निवेश क्षेत्र खड़े किए हैं। अलवर जिले का भिवाड़ी राज्य का सबसे बड़ा औद्योगिक नगर है, नीमराना में जापानी औद्योगिक क्षेत्र है, और जयपुर के निकट महिंद्रा वर्ल्ड सिटी विशेष आर्थिक क्षेत्र है।
बड़े उद्योग, जिलेवार
| उद्योग | स्थान | टिप्पणी |
|---|---|---|
| वर्स्टेड यार्न और सूटिंग | भीलवाड़ा | राजस्थान का वस्त्र नगर कहलाता है, सूटिंग कपड़े का प्रमुख केंद्र |
| कपड़े की रंगाई और छपाई | पाली, बालोतरा, जसोल, सांगानेर, बगरू | हाथ की ठप्पा छपाई तथा बड़े रंगाई कारखाने; प्रदूषण की समस्या भी पूछी जाती है |
| सीमेंट | चित्तौड़गढ़ में निंबाहेड़ा और चंदेरिया, बूंदी में लाखेरी, सवाई माधोपुर, ब्यावर, नागौर में गोटन | विंध्य तथा अरावली पट्टी के चूना पत्थर पर आधारित |
| संगमरमर | नागौर में मकराना, अजमेर में किशनगढ़ | मकराना सफेद संगमरमर के लिए, किशनगढ़ एशिया की सबसे बड़ी संगमरमर मंडी के लिए |
| जस्ता और सीसा प्रगलन | उदयपुर में देबारी, चित्तौड़गढ़ में चंदेरिया, राजसमंद में दरीबा | हिंदुस्तान जिंक; अयस्क जावर, रामपुरा आगुचा और राजपुरा दरीबा से आता है |
| ताँबा | झुंझुनूं में खेतड़ी और कोलिहान, अलवर में खो-दरीबा | हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड का खेतड़ी ताम्र परिसर |
| नमक | जयपुर में सांभर, नागौर में डीडवाना, बाड़मेर में पचपदरा | सांभर देश का सबसे बड़ा अंतर्देशीय नमक स्रोत है |
| उर्वरक और रसायन | कोटा में गडेपान तथा कोटा नगर | गडेपान में यूरिया; कोटा में कॉस्टिक सोडा और उर्वरक |
| तेल शोधन | बाड़मेर में पचपदरा | हिंदुस्तान पेट्रोलियम और राज्य के संयुक्त उपक्रम की रिफाइनरी तथा पेट्रो रसायन परिसर |
| परमाणु बिजली | चित्तौड़गढ़ में रावतभाटा | कोटा के निकट चंबल पर |
| रत्न तराशी और आभूषण | जयपुर, सीतापुरा क्षेत्र के साथ | निर्यात के लिए पन्ना तथा अन्य रंगीन पत्थरों की तराशी |
हस्तशिल्प और उनके स्थान
| शिल्प | स्थान |
|---|---|
| ब्लू पॉटरी | जयपुर |
| लोक देवताओं की टेराकोटा पट्टिकाएँ | मोलेला, राजसमंद |
| कोटा डोरिया, अत्यंत हल्का बुना कपड़ा | कैथून, कोटा |
| थेवा, रंगीन काँच पर जड़ा स्वर्ण कार्य | प्रतापगढ़ |
| सांगानेरी और बगरू की ठप्पा छपाई | जयपुर जिला |
| बंधेज और लहरिया | जोधपुर, जयपुर, सीकर, उदयपुर |
| अजरक और दाबू छपाई | बाड़मेर तथा चित्तौड़गढ़ का आकोला |
| उस्ता या मुनब्बतकारी, ऊँट की खाल पर स्वर्ण उभार | बीकानेर |
| फड़, लोक गाथाओं की चित्र-पट्टी | शाहपुरा, भीलवाड़ा |
| पिछवाई, देवता के पीछे टाँगे जाने वाले वस्त्र चित्र | नाथद्वारा, राजसमंद |
| कावड़, पल्लों में खुलने वाला लकड़ी का मंदिर | बस्सी, चित्तौड़गढ़ |
| लाख की चूड़ियाँ और लाख कार्य | जयपुर और सवाई माधोपुर |
| कढ़ाई वाली जूतियाँ और मोजड़ी | जोधपुर, जयपुर, जालोर का भीनमाल |
| नमदा, ऊन को दबाकर बनाया बिछावन | टोंक |
| कठपुतली | उदयपुर और बस्सी |
| हाथ से बना कागज | सांगानेर, जयपुर |
| दरियाँ और कालीन | जयपुर, बीकानेर, टोंक |
| पत्थर की नक्काशी | हरे पत्थर के लिए डूंगरपुर, पीले बलुआ पत्थर के लिए जैसलमेर |
छपाई, बुनाई और भौगोलिक संकेत
छपाई वह शिल्प है जिसमें सबसे अधिक लोग लगे हैं। सांगानेरी छपाई सफेद जमीन पर बारीक फूलों के ठप्पे लगाती है, बगरू की छपाई मिट्टी के रंगों और दाबू नामक मिट्टी के अवरोध का प्रयोग करती है, और बाड़मेर की छपाई मोटे सूत पर लाल तथा काले नमूने रखती है। बंधेज रंगने से पहले हजारों छोटी गाँठें बाँधकर बनाया जाता है, और लहरिया की तिरछी धारियाँ कपड़े को बियास में लपेटकर बाँधने से बनती हैं। राज्य के जिन शिल्पों को भौगोलिक संकेत मिला है, उनमें कोटा डोरिया, जयपुर की ब्लू पॉटरी, मोलेला का मिट्टी कार्य, थेवा कला, सांगानेरी तथा बगरू की ठप्पा छपाई, मकराना संगमरमर, पोकरण पॉटरी और बीकानेरी भुजिया हैं। भौगोलिक संकेत किसी उत्पाद को उसके मूल स्थान से जोड़ता है, और इस पर प्रश्न प्रायः शिल्प देकर जिला पूछते हैं।
राज्य शिल्पी की सहायता कैसे करता है
- राजस्थान लघु उद्योग निगम अपने राजस्थली विक्रय केंद्रों से शिल्प का विपणन करता है।
- 1995 का ग्रामीण गैर-कृषि विकास अभिकरण ऊन, चमड़ा, पत्थर और हथकरघा के समूह खड़े करता है।
- रीको औद्योगिक क्षेत्र तथा विशेष आर्थिक क्षेत्र विकसित करती है, जिनमें सीतापुरा का रत्न एवं आभूषण क्षेत्र भी है।
- जोधपुर राज्य का सबसे बड़ा हस्तशिल्प निर्यातक नगर है, मुख्यतः लकड़ी तथा लोहे के फर्नीचर के लिए।
- खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड और जयपुर एवं पुष्कर जैसे मेले इस व्यापार को खरीदारों तक पहुँचाते हैं।
परीक्षा की दृष्टि से
यहाँ हर दूसरा प्रश्न स्थान का जोड़ा है, इसलिए नगर के साथ उत्पाद याद करें — भीलवाड़ा के साथ सूटिंग, किशनगढ़ के साथ संगमरमर मंडी, मकराना के साथ सफेद संगमरमर, खेतड़ी के साथ ताँबा, देबारी तथा चंदेरिया के साथ जस्ता, गडेपान के साथ यूरिया, रावतभाटा के साथ परमाणु बिजली, सांभर के साथ नमक और पचपदरा के साथ रिफाइनरी। शिल्प की ओर परीक्षक शिल्प बताकर जिला पूछता है या जिला बताकर शिल्प, और नियमित समूह है ब्लू पॉटरी, कोटा डोरिया, थेवा, मोलेला, फड़, पिछवाई, कावड़, उस्ता तथा नमदा। भौगोलिक संकेत सूची के रूप में पूछे जाते हैं, और संस्थागत प्रश्नों में रीको, ग्रामीण गैर-कृषि विकास अभिकरण तथा दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा आते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| वस्त्र नगर | भीलवाड़ा, वर्स्टेड यार्न तथा सूटिंग कपड़े के लिए |
|---|---|
| संगमरमर | सफेद संगमरमर के लिए नागौर का मकराना; एशिया की सबसे बड़ी मंडी के लिए अजमेर का किशनगढ़ |
| जस्ता-सीसा संयंत्र | उदयपुर में देबारी, चित्तौड़गढ़ में चंदेरिया, राजसमंद में दरीबा |
| ताँबा | झुंझुनूं में खेतड़ी और कोलिहान; अलवर में खो-दरीबा |
| सीमेंट | निंबाहेड़ा तथा चंदेरिया, बूंदी में लाखेरी, सवाई माधोपुर, ब्यावर, नागौर में गोटन |
| नमक | जयपुर में सांभर, नागौर में डीडवाना, बाड़मेर में पचपदरा |
| उर्वरक और रिफाइनरी | कोटा के गडेपान में यूरिया; बाड़मेर के पचपदरा में रिफाइनरी परिसर |
| औद्योगिक संस्था | रीको, 1980 में स्थापित; राजस्थान वित्त निगम 1955 से |
| भौगोलिक संकेत वाले शिल्प | कोटा डोरिया, जयपुर ब्लू पॉटरी, मोलेला मिट्टी कार्य, थेवा कला, सांगानेरी तथा बगरू छपाई, मकराना संगमरमर |
| हस्तशिल्प निर्यात नगर | जोधपुर, लकड़ी और लोहे के फर्नीचर के लिए |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
राजस्थान का वस्त्र नगर किस शहर को कहा जाता है?
- A.कोटा
- B.भीलवाड़ा
- C.पाली
- D.जोधपुर
उत्तर देखें
भीलवाड़ा वर्स्टेड यार्न और सूटिंग कपड़े के बल पर राजस्थान का सबसे बड़ा वस्त्र केंद्र बना, जहाँ कताई, बुनाई और प्रोसेसिंग इकाइयाँ एक ही जगह हैं, इसलिए इसे राज्य का वस्त्र नगर और कभी-कभी मैनचेस्टर कहा जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अजमेर जिले का किशनगढ़ किस सामग्री के व्यापार के लिए प्रसिद्ध है?
- A.ग्रेनाइट
- B.संगमरमर
- C.बलुआ पत्थर
- D.जिप्सम
उत्तर देखें
अजमेर जिले के किशनगढ़ में एशिया की सबसे बड़ी संगमरमर मंडी है, जहाँ राजस्थान की खदानों के स्लैब और आयातित खंड काटे, पॉलिश किए और बेचे जाते हैं, इसीलिए इस नगर को मार्बल सिटी कहा जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राजस्थान में हिंदुस्तान जिंक के जस्ता और सीसा प्रगलन संयंत्र कहाँ स्थित हैं?
- A.खेतड़ी और कोलिहान
- B.देबारी और चंदेरिया
- C.झामरकोटड़ा और कपासन
- D.डीडवाना और पचपदरा
उत्तर देखें
हिंदुस्तान जिंक उदयपुर के निकट देबारी और चित्तौड़गढ़ जिले के चंदेरिया में जस्ता तथा सीसा गलाती है, और राजसमंद के दरीबा में भी उसका संयंत्र है; अयस्क जावर, रामपुरा आगुचा तथा राजपुरा दरीबा की खानों से आता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →झुंझुनूं जिले का खेतड़ी किस धातु के खनन के लिए प्रसिद्ध है?
- A.सीसा
- B.ताँबा
- C.जस्ता
- D.मैंगनीज
उत्तर देखें
झुंझुनूं जिले में हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड द्वारा संचालित खेतड़ी ताम्र परिसर खेतड़ी तथा कोलिहान खानों के ताम्र अयस्क पर काम करता है, और अलवर का खो-दरीबा राज्य की दूसरी ताम्र पट्टी है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →साधारण मिट्टी के बजाय क्वार्ट्ज और पिसे काँच से बनने वाली ब्लू पॉटरी किस नगर का शिल्प है?
- A.जोधपुर
- B.जयपुर
- C.बीकानेर
- D.अलवर
उत्तर देखें
ब्लू पॉटरी मुगल काल में फारसी तथा अफगान शिल्पियों के साथ जयपुर पहुँची और बीसवीं शताब्दी में चित्रकार कृपाल सिंह शेखावत ने इसे पुनर्जीवित किया; इसका लेप मिट्टी के बजाय क्वार्ट्ज, मुल्तानी मिट्टी और पिसे काँच से बनता है, और बरतन कोबाल्ट नीले रंग से चित्रित कर कम ताप पर…
पूरी व्याख्या पढ़ें →भौगोलिक संकेत प्राप्त राजस्थान का शिल्प कोटा डोरिया क्या है?
- A.बंधेज की छपाई
- B.अत्यंत हल्का बुना कपड़ा
- C.टेराकोटा शिल्प
- D.काँच पर जड़ा स्वर्ण कार्य
उत्तर देखें
कोटा डोरिया कोटा जिले के कैथून तथा आसपास के गाँवों में सूत और रेशम के धागे से ऐसी चौकोर बुनावट में बुना जाता है कि कपड़ा इतना बारीक और खुला होता है कि वह लगभग भारहीन लगता है, और उससे बनी साड़ियों को भौगोलिक संकेत प्राप्त है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →रंगीन काँच पर गढ़ी स्वर्ण पत्ती जड़ने की थेवा कला राजस्थान के किस स्थान की है?
- A.प्रतापगढ़
- B.मोलेला
- C.नाथद्वारा
- D.बस्सी
उत्तर देखें
थेवा दक्षिण राजस्थान के प्रतापगढ़ के एक ही परिवार परंपरा का शिल्प है, जिसमें सोने की पतली पत्ती को नमूने में काटकर रंगीन काँच पर जड़ा जाता है और उससे लॉकेट, डिब्बे तथा थालियाँ बनती हैं; इस शिल्प को भौगोलिक संकेत प्राप्त है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राजसमंद जिले का मोलेला किस शिल्प के लिए प्रसिद्ध है?
- A.लकड़ी के खिलौने
- B.लोक देवताओं की टेराकोटा पट्टिकाएँ
- C.लाख की चूड़ियाँ
- D.ऊन का नमदा
उत्तर देखें
राजसमंद जिले के गाँव मोलेला के कुम्हार मिट्टी की चपटी पट्टिकाओं पर उभार में धर्मराज, देवनारायण, नागराज तथा अन्य लोक देवताओं की आकृतियाँ बनाते हैं, जिन्हें राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश के जनजातीय जिलों से आए यात्री अपने देवस्थानों के लिए ले जाते हैं; मोलेला के मिट्टी कार्य को भौगोलिक…
पूरी व्याख्या पढ़ें →देवनारायण और पाबूजी की लोक गाथाओं की चित्र-पट्टी फड़ चित्रकला किस जिले से जुड़ी है?
- A.राजसमंद
- B.अजमेर का किशनगढ़
- C.भीलवाड़ा
- D.बूंदी
उत्तर देखें
फड़ भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा में, परंपरा से जोशी चितेरा परिवार द्वारा, कपड़े की लंबी पट्टी पर चित्रित की जाती है, जिसे भोपा रात में देवनारायण तथा पाबूजी की गाथा गाते हुए खोलता जाता है; आकृतियाँ चपटी, एक पार्श्व में और गहरे लाल, पीले तथा हरे रंगों में होती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राजस्थान की सांभर झील किसके उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है?
- A.जिप्सम
- B.साधारण नमक
- C.सोडा ऐश
- D.ताँबा
उत्तर देखें
जयपुर के पश्चिम में फैली खारी झील सांभर देश का सबसे बड़ा अंतर्देशीय नमक स्रोत है, जहाँ खारा पानी उथले क्यारों में भरकर वाष्पित होने दिया जाता है; नागौर का डीडवाना और बाड़मेर का पचपदरा राज्य के अन्य नमक क्षेत्र हैं, जबकि देश का शेष अधिकांश नमक गुजरात तथा तमिलनाडु…
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भीलवाड़ा को राजस्थान का वस्त्र नगर क्यों कहा जाता है?
क्योंकि वहाँ कताई, बुनाई और प्रोसेसिंग इकाइयाँ एक ही जगह केंद्रित हैं और यह जिला भारत में वर्स्टेड यार्न तथा सूटिंग कपड़े के सबसे बड़े उत्पादकों में है। इसके विपरीत पाली, बालोतरा और जसोल रंगाई तथा छपाई के केंद्र हैं।
राजस्थान को संगमरमर किन जिलों से मिलता है?
नागौर जिले का मकराना उस सफेद संगमरमर का स्रोत है जो ताजमहल में लगा, और अजमेर जिले का किशनगढ़ व्यापार तथा प्रसंस्करण का केंद्र है, जहाँ एशिया की सबसे बड़ी संगमरमर मंडी है। हरा संगमरमर उदयपुर और राजसमंद से आता है।
ब्लू पॉटरी किससे बनती है?
साधारण मिट्टी से नहीं। इसका लेप क्वार्ट्ज, मुल्तानी मिट्टी और पिसे काँच से बनता है, इसीलिए बरतन केवल एक बार और कम ताप पर पकाए जाते हैं। यह शिल्प जयपुर का है और इसे भौगोलिक संकेत प्राप्त है।
कोटा डोरिया क्या है?
कोटा जिले के कैथून तथा आसपास के गाँवों में बना सूत और रेशम का अत्यंत हल्का खुला बुनाव। बुनावट का चौकोर नमूना कपड़े को लगभग भारहीन बना देता है, और कोटा डोरिया साड़ियों को भौगोलिक संकेत प्राप्त है।
राजस्थान के किन शिल्पों को भौगोलिक संकेत मिला है?
इनमें कोटा डोरिया, जयपुर की ब्लू पॉटरी, मोलेला का मिट्टी कार्य, थेवा कला, सांगानेरी तथा बगरू की ठप्पा छपाई, मकराना संगमरमर, पोकरण पॉटरी और बीकानेरी भुजिया हैं। भौगोलिक संकेत उत्पाद को उसके बनाने वाले स्थान से जोड़ता है।
स्रोत
- राजस्थान आर्थिक समीक्षा, उद्योग तथा खनिज आधारित उद्योग अध्याय — आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय, राजस्थान सरकार
- पंजीकृत भौगोलिक संकेत, राजस्थान के हस्तशिल्प और वस्त्र — भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री, भारत सरकार
- इंडियन मिनरल्स ईयरबुक, राजस्थान राज्य समीक्षा — भारतीय खान ब्यूरो





