भारत को दस जैव-भौगोलिक क्षेत्रों में बांटने का कार्य किस वैज्ञानिक जोड़ी ने किया?
- A.चैंपियन और सेठ
- B.रॉजर्स और पंवार
- C.हूकर और थॉमसन
- D.सालिम अली और रिप्ले
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B, रॉजर्स और पंवार। भारतीय वन्यजीव संस्थान के डब्ल्यू. ए. रॉजर्स और एच. एस. पंवार ने 1988 में देश के लिए प्रतिनिधिक संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क की योजना बनाते समय दस क्षेत्रों वाला जैव-भौगोलिक वर्गीकरण प्रस्तुत किया और ये दस क्षेत्र तथा उनके जैविक प्रांत आज भी आधिकारिक ढांचा हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि चैंपियन और सेठ ने 1968 में भारतीय वनों को सोलह प्रमुख वन प्रकारों में बांटा था, जो वनस्पति का वर्गीकरण है, जैव-भूगोल का नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि हूकर और थॉमसन ने उन्नीसवीं शताब्दी में भारतीय वनस्पति विज्ञान तथा फ्लोरा ऑफ ब्रिटिश इंडिया पर कार्य किया। विकल्प D गलत है क्योंकि सालिम अली और डिलन रिप्ले ने भारत एवं पाकिस्तान के पक्षियों की मानक पुस्तिका लिखी, जो प्राणी विवरण है। याद रखें: रॉजर्स-पंवार के साथ दस और चैंपियन-सेठ के साथ सोलह।
पूरा लेख पढ़ें: भारत के जैव-भौगोलिक क्षेत्र: दसों क्षेत्र और वन्यजीव
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंक्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा जैव-भौगोलिक क्षेत्र कौन है?
- A.अर्ध-शुष्क क्षेत्र
- B.दक्कन प्रायद्वीप
- C.गंगा का मैदान
- D.हिमालय
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दक्कन प्रायद्वीप क्षेत्र देश के लगभग बयालीस प्रतिशत भाग, यानी करीब दो-पांचवें हिस्से में फैला है और इसमें मध्य उच्चभूमि, छोटा नागपुर, पूर्वी उच्चभूमि तथा दक्कन पठार आते हैं; भारत के अधिकांश साल और सागौन वन तथा बाघ अभयारण्य यहीं हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत का निम्नलिखित में से कौन-सा जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र मेघालय में स्थित है?
- A.पन्ना
- B.सिमलीपाल
- C.मानस
- D.नोकरेक
उत्तर देखें
नोकरेक मेघालय की गारो पहाड़ियों में स्थित है और जीवमंडल आरक्षित क्षेत्रों के नेटवर्क में उत्तर-पूर्व भारत जैव-भौगोलिक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है; यह जंगली नींबू प्रजाति भारतीय जंगली संतरे तथा हूलॉक गिबन के लिए जाना जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →लद्दाख तथा लाहौल-स्पीति का शीत मरुस्थल भारत के किस जैव-भौगोलिक क्षेत्र में आता है?
- A.हिमालय
- B.ट्रांस-हिमालय
- C.भारतीय मरुस्थल
- D.अर्ध-शुष्क
उत्तर देखें
ट्रांस-हिमालय वह पट्टी है जो बृहद् हिमालय के पीछे लद्दाख, लाहौल-स्पीति और उत्तरी सिक्किम में फैली है; ऊंची श्रेणियों की वृष्टि छाया में होने के कारण यह शीत मरुस्थल है और यही एकमात्र भारतीय क्षेत्र है जिसके प्राणी, जैसे कियांग, जंगली याक और काली गर्दन वाला सारस, तिब्बती या पैलिआर्कटिक…
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में टिकाऊ और कठोर इमारती लकड़ी देने वाले सुंदरी वृक्ष कहां पाए जाते हैं?
- A.उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन
- B.मैंग्रोव वन
- C.पर्वतीय वन
- D.उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन
उत्तर देखें
सुंदरी तट क्षेत्र के ज्वारीय डेल्टाई वनों का मैंग्रोव वृक्ष है और गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा के सुंदरवन का नाम इसी से पड़ा; इसकी लकड़ी कठोर और टिकाऊ होती है तथा अन्य मैंग्रोव की तरह इसमें लवण सहने वाली जड़ें और दलदली मिट्टी में श्वसन मूल होती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सिंहपुच्छी लंगूर और नीलगिरि तहर किस जैव-भौगोलिक क्षेत्र के विशिष्ट प्राणी हैं?
- A.दक्कन प्रायद्वीप
- B.पश्चिमी घाट
- C.उत्तर-पूर्व भारत
- D.तट
उत्तर देखें
पश्चिमी घाट क्षेत्र में पहाड़ी श्रृंखला के साथ मालाबार तटीय मैदान भी शामिल है और इसके आर्द्र सदाबहार वन तथा ऊंचाई पर शोला-घास मिश्रण में स्थानिक प्रजातियों का बहुत बड़ा भाग मिलता है, जिनमें वर्षावन की छत्रछाया में रहने वाला सिंहपुच्छी लंगूर और इरविकुलम की घास भूमि का नीलगिरि तहर…
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