मधुबनी, मंजूषा और बिहार की अन्य कलाएं: शैली और तथ्य
बीपीएससी और एसएससी परीक्षाओं के लिए बिहार की कला के नोट्स: मधुबनी की शैलियां, भागलपुर की मंजूषा, पटना कलम चित्रकला तथा टिकुली, सुजनी, सिक्की और खटवा शिल्प।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

बिहार की कला गांव की कला है जो राष्ट्रीय कला बन गई। परीक्षाओं में राज्य का नाम दो चित्रकला परंपराएं लेकर चलती हैं, उत्तर के मिथिला क्षेत्र की मधुबनी तथा पूर्व में भागलपुर के आसपास अंग क्षेत्र की मंजूषा, और तीसरी परंपरा पटना कलम शहर में औपनिवेशिक ग्राहकों के लिए विकसित हुई। इनके चारों ओर कुछ शिल्प हैं, जिनमें प्रत्येक एक या दो जिलों से जुड़ा है। प्रश्न लगभग सदा विधा का क्षेत्र, सामग्री और प्रसिद्ध कलाकार के मेल पर आते हैं, इसलिए इन्हें इसी क्रम में याद करें।
मधुबनी या मिथिला चित्रकला
मधुबनी चित्रकला उत्तर बिहार के मिथिला क्षेत्र की है, विशेषकर मधुबनी और दरभंगा जिलों की, और नाम इनमें पहले जिले से मिला है। परंपरागत रूप से इसे स्त्रियां विवाह और त्योहारों पर घर की मिट्टी से पुती दीवारों तथा आंगन पर बनाती थीं, बिक्री के लिए कभी नहीं: कोहबर घर अर्थात नवविवाहितों के कक्ष की दीवार पर विवाह के कमल और बांस के प्रतीक बनते थे और फर्श पर अरिपन की आकृतियां। रंग घर में ही काजल, हल्दी, पेड़ों की छाल, फूलों और नील से बनते थे, और कूची बांस की कलम या रुई लिपटी तीली होती थी। कोई स्थान खाली नहीं छोड़ा जाता: आकृतियों के बीच की जगह पक्षी, मछली, सूर्य, चंद्रमा, सर्प और कछुए से भरी जाती है और पूरी रचना दोहरी रेखा की किनारी से बंद होती है।
| शैली | पहचान |
|---|---|
| भरनी | आकृतियों में चटक रंग भरना |
| कचनी | महीन रेखाओं का काम, रंग बहुत कम |
| गोदना | छोटे अलंकरणों की पंक्तियों में गुदने जैसी शैली, दुसाध समुदाय द्वारा विकसित |
| तांत्रिक | देवी देवता और तांत्रिक प्रतीक, अनुष्ठान में प्रयुक्त |
| कोहबर | विवाह कक्ष की कमल, बांस और मछली वाली रचना |
1960 के दशक के अकाल के बाद यह विधा दीवार से कागज और कपड़े पर आई, जब अधिकारियों ने मिथिला की स्त्रियों को बिक्री के लिए कागज पर चित्र बनाने के लिए प्रेरित किया, और इसे भौगोलिक संकेतक अर्थात जीआई टैग प्राप्त है। सीता देवी, गंगा देवी, जगदंबा देवी, महासुंदरी देवी और बउआ देवी ऐसे नाम हैं जो सर्वाधिक पूछे जाते हैं और इनमें कई पद्म श्री से सम्मानित हैं।
मंजूषा, अंग की कथात्मक कला
मंजूषा कला भागलपुर और उसके आसपास के अंगिका भाषी क्षेत्र की है, और यह भारत की वह एकमात्र लोक चित्रकला है जो कथा को क्रमवार, चित्र पट्टियों की तरह कहती है। कथा बिहुला और सर्प देवी बिषहरी की है, और चित्र उस मंजूषा पर ही बनते हैं जो बांस की तीलियों और जूट के कागज से बना मंदिर जैसा बक्सा होता है और वर्षा ऋतु के बिहुला-बिषहरी पर्व में जुलूस में ले जाया जाता है। परंपरा में केवल तीन रंग प्रयोग होते हैं, गुलाबी, हरा और पीला, और किनारियों में सर्प लहरदार रेखा के रूप में चलता है, इसीलिए इसे सर्प चित्रकला भी कहा जाता है। इसकी किनारियों के अपने नाम हैं, जिनमें लहरिया, बेलपत्र और त्रिभुज शामिल हैं। दशकों की उपेक्षा के बाद स्थानीय कलाकारों और राज्य के संरक्षण से बीसवीं सदी के अंत में इसका पुनरुद्धार हुआ।
पटना कलम
पटना कलम अर्थात पटना चित्रशैली उन चित्रकार परिवारों ने बनाई जो अठारहवीं सदी में मुगल और मुर्शिदाबाद दरबारों से निकलकर पटना में बसे। अंग्रेज अधिकारियों और व्यापारियों के लिए काम करते हुए उन्होंने दरबारी चित्रण छोड़कर अपने आसपास का जीवन चित्रित किया: अपने काम में लगे शिल्पी, मेले, सेवक, त्योहार और जुलूस, जो कागज तथा अभ्रक की छोटी पट्टियों पर बने। चित्रकार केवल कूची से काम करते थे और पहले रेखांकन किए बिना सीधे आकृति भरते थे, तथा उनकी रंग योजना मुगल काम के मुकाबले संयत है। सेवक राम, हुलास लाल, शिव लाल, शिव दयाल लाल और ईश्वरी प्रसाद वर्मा इस शैली के नाम हैं, और यूरोपीय संरक्षकों के लिए बनने के कारण इसे कंपनी शैली में गिना जाता है।
बिहार के शिल्प
| शिल्प | क्षेत्र | स्वरूप |
|---|---|---|
| टिकुली | पटना | मीनाकारी और स्वर्ण पत्र का काम, पहले माथे की टिकुली के लिए, अब हार्डबोर्ड पर |
| सुजनी | मुजफ्फरपुर का भुसुरा और आसपास के गांव | स्त्रियों की रजाईदार कढ़ाई, जिसकी आकृतियां सामाजिक कथा कहती हैं |
| सिक्की | मिथिला | सुनहरी सिक्की घास से बनी टोकरियां, डिब्बे और गुड़िया |
| खटवा | पटना और भागलपुर | अप्लीक कार्य, कटे कपड़े को शामियाने और तंबू पर टांकना |
| तसर रेशम | भागलपुर | हाथ से बुना रेशम, जिससे नगर को सिल्क सिटी नाम मिला |
| पत्थर तराशी | गया का पत्थरकट्टी | काले पत्थर की मूर्तियां और पात्र |
| लाह की चूड़ियां | मुजफ्फरपुर | विवाहित स्त्रियों की लहठी |
पटना का उपेंद्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान, जिसका नाम टिकुली कार्य का पुनरुद्धार करने वाले कलाकार पर है, शिल्पियों को प्रशिक्षण देता है और इन विधाओं का दस्तावेजीकरण करता है, तथा पटना का बिहार संग्रहालय इन्हें प्रदर्शित करता है। राज्य के कई उत्पादों को भौगोलिक संकेतक टैग मिले हैं, जिनमें मधुबनी चित्रकला और सुजनी कढ़ाई शामिल हैं, जिससे क्षेत्र का नाम बाहर की नकल से सुरक्षित रहता है।
परीक्षा की दृष्टि से
इस अध्याय से तीन बातें पूछी जाती हैं। पहली, विधा का क्षेत्र: मधुबनी के साथ मिथिला, मंजूषा के साथ भागलपुर और अंग, पटना कलम के साथ पटना, सुजनी के साथ मुजफ्फरपुर तथा सिक्की के साथ मिथिला। दूसरी, वह भीतरी विवरण जो तैयार परीक्षार्थी को अंदाजा लगाने वाले से अलग करता है: मधुबनी की पांच शैलियां, मंजूषा के तीन रंग, कोहबर और अरिपन का अर्थ, सिक्की की सामग्री तथा टिकुली का मूल प्रयोग। तीसरी, कलाकार और सम्मान, जिसमें मधुबनी के लिए सीता देवी, गंगा देवी, जगदंबा देवी और महासुंदरी देवी तथा पटना कलम के लिए सेवक राम और शिव लाल आते हैं। सबसे आम भ्रम यह है कि किसी दूसरे राज्य की शैली, जैसे कलमकारी, वारली, पट्टचित्र या फड़, को मधुबनी की शैली बताकर विकल्प में रख दिया जाए।
महत्वपूर्ण तथ्य
| मधुबनी का क्षेत्र | मिथिला, मुख्यतः मधुबनी और दरभंगा जिले |
|---|---|
| मधुबनी की शैलियां | भरनी, कचनी, गोदना, तांत्रिक, कोहबर |
| कोहबर घर | नवविवाहितों का कक्ष, जिसकी दीवार पर विवाह चित्र बनता है |
| अरिपन | मिथिला के घरों की आंगन आकृति |
| मधुबनी के कलाकार | सीता देवी, गंगा देवी, जगदंबा देवी, महासुंदरी देवी, बउआ देवी |
| मंजूषा का क्षेत्र | भागलपुर और अंग प्रदेश |
| मंजूषा की कथा | बिहुला और सर्प देवी बिषहरी |
| मंजूषा के रंग | गुलाबी, हरा और पीला |
| मंजूषा का दूसरा नाम | सर्प चित्रकला, किनारियों के सर्प के कारण |
| पटना कलम | कंपनी शैली की चित्रकला, कागज और अभ्रक पर रोजमर्रा का जीवन |
| टिकुली | पटना; मीनाकारी और स्वर्ण पत्र का काम, पहले माथे की बिंदी के लिए |
| सुजनी | मुजफ्फरपुर की रजाईदार कढ़ाई |
| सिक्की | मिथिला का सुनहरी घास शिल्प |
| बिहार की सिल्क सिटी | भागलपुर, तसर रेशम के कारण |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
मधुबनी चित्रकला बिहार के किस क्षेत्र की है?
- A.भागलपुर के आसपास का अंग
- B.उत्तर का मिथिला
- C.गया के आसपास का मगध
- D.पश्चिम का भोजपुर
उत्तर देखें
मधुबनी चित्रकला को मिथिला चित्रकला भी कहा जाता है क्योंकि यह उत्तर बिहार के मिथिला क्षेत्र में, मुख्यतः मधुबनी और दरभंगा जिलों में विकसित हुई, और इसका प्रचलित नाम इनमें पहले जिले से आया है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बिहुला और बिषहरी की कथा कहने वाली मंजूषा कला बिहार के किस जिले की है?
- A.मधुबनी
- B.भागलपुर
- C.गया
- D.पटना
उत्तर देखें
मंजूषा कला भागलपुर तथा उसके आसपास के अंगिका भाषी क्षेत्र की है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन मधुबनी चित्रकला की शैली नहीं है?
- A.भरनी
- B.कचनी
- C.गोदना
- D.कलमकारी
उत्तर देखें
कलमकारी आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की कपड़े पर कलम तथा प्राकृतिक रंगों से की जाने वाली कला है, जो श्रीकालहस्ती और मछलीपट्टनम में होती है, और उसका मिथिला से कोई संबंध नहीं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मिथिला परंपरा में जिस कोहबर घर की दीवार पर चित्र बनाया जाता है, वह क्या है?
- A.नवविवाहित दंपति का कक्ष
- B.घर की रसोई
- C.गोशाला
- D.गांव का देवस्थान
उत्तर देखें
कोहबर घर वह कक्ष है जिसमें विवाह के बाद वर और वधू को एक साथ लाया जाता है, और उसकी दीवार पर कोहबर चित्र बनता है, जिसमें पत्तों के घेरे वाला कमल, बांस का झुरमुट, मछली, तोते तथा सूर्य और चंद्रमा होते हैं, और ये सब उर्वरता तथा मिलन के…
पूरी व्याख्या पढ़ें →पटना की टिकुली कला मूल रूप से किस वस्तु को सजाती थी?
- A.मिट्टी के बर्तन
- B.माथे पर पहनी जाने वाली बिंदी
- C.मंदिर के द्वार
- D.ताड़पत्र की पांडुलिपियां
उत्तर देखें
टिकुली नाम उस टिकुली या टिकली से आया है जिसे स्त्रियां माथे पर लगाती थीं और जो पटना में पतले कांच पर स्वर्ण पत्र तथा रंगीन मीनाकारी चढ़ाकर बनाई जाती थी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बिहार की सुजनी कढ़ाई किस जिले से जुड़ी है?
- A.मुजफ्फरपुर
- B.नालंदा
- C.सारण
- D.पूर्णिया
उत्तर देखें
सुजनी वह रजाईदार कढ़ाई है जिसमें पुराने कपड़े की परतें चलते टांकों की पंक्तियों से जोड़ी जाती हैं, और वही टांके स्त्रियों, पशुओं, पेड़ों तथा गांव के दृश्यों की आकृतियां बनाते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मिथिला क्षेत्र का सिक्की शिल्प किस सामग्री से बनता है?
- A.बांस की चिरी तीलियां
- B.सुनहरे रंग की घास
- C.लाह
- D.ताड़ का पत्ता
उत्तर देखें
सिक्की उत्तर बिहार की आर्द्र भूमि की वह घास है जिसके तिनके सूखने पर चमकीले सुनहरे हो जाते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पटना कलम चित्रशैली किसकी शाखा के रूप में विकसित हुई?
- A.पहाड़ी चित्रकला
- B.मुगल लघुचित्र शैली
- C.राजस्थान की किशनगढ़ शैली
- D.तंजौर चित्रकला
उत्तर देखें
पटना कलम उन चित्रकार परिवारों ने बनाई जो मुगल पद्धति में प्रशिक्षित थे और अठारहवीं सदी में दिल्ली तथा मुर्शिदाबाद छोड़कर पटना में बसे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बिहार की मंजूषा कला किस अन्य नाम से जानी जाती है?
- A.सर्प चित्रकला
- B.कमल चित्रकला
- C.जीवन वृक्ष चित्रकला
- D.सूर्य चित्रकला
उत्तर देखें
मंजूषा को सर्प चित्रकला कहा जाता है क्योंकि बिषहरी कथा का सर्प उसका प्रमुख अलंकरण है: चित्र पटों में सर्प भरे रहते हैं और किनारियों में लगातार लहरदार रेखा चलती है जो सर्प जैसी दिखती है, तथा एक किनारी का नाम ही लहरिया है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बिहार का कौन सा नगर तसर रेशम की बुनाई के लिए प्रसिद्ध है और सिल्क सिटी कहा जाता है?
- A.भागलपुर
- B.दरभंगा
- C.गया
- D.मुंगेर
उत्तर देखें
गंगा के किनारे बसा भागलपुर सदियों से तसर रेशम बुनता आया है और उसे बिहार की सिल्क सिटी कहा जाता है; यहां के हथकरघा बुनकर वन के पेड़ों पर पले कोयों से मिलने वाला खुरदरा सुनहरा रेशम तैयार करते हैं और नगर साड़ी तथा गृह सज्जा के रेशम का समूह…
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मधुबनी चित्रकला किस राज्य की है?
बिहार की, और उसमें उत्तर के मिथिला क्षेत्र की, मुख्यतः मधुबनी और दरभंगा जिलों की, इसीलिए इसे मिथिला चित्रकला भी कहा जाता है।
मधुबनी चित्रकला की शैलियां कौन सी हैं?
रंग भरने वाली भरनी, महीन रेखाओं वाली कचनी, गुदने जैसी गोदना, देवी देवताओं और प्रतीकों वाली तांत्रिक शैली तथा विवाह कक्ष की कोहबर रचना।
मंजूषा कला को सर्प चित्रकला क्यों कहा जाता है?
क्योंकि बिषहरी कथा का सर्प इसकी किनारियों में लगातार लहरदार रेखा के रूप में चलता है और बिहुला की कथा के चित्रों में सर्प आकृतियां भरी रहती हैं।
पटना की टिकुली कला क्या है?
मीनाकारी और स्वर्ण पत्र की चित्रकला, जो मूलतः माथे पर पहनी जाने वाली सजी बिंदी टिकुली बनाने में प्रयुक्त होती थी और उपेंद्र महारथी ने इसे हार्डबोर्ड पर पुनर्जीवित किया।
बिहार का कौन सा शिल्प स्त्रियों की रजाईदार कढ़ाई है?
सुजनी, जो मुजफ्फरपुर जिले के भुसुरा और आसपास के गांवों में होती है, जिसमें परतदार कपड़े पर चलते टांके आकृतियां बनाकर सामाजिक कथा कहते हैं।
स्रोत
- भारत की लोक और जनजातीय कला परंपराएं — संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार
- भारत के पंजीकृत भौगोलिक संकेतक — पेटेंट, डिजाइन तथा ट्रेड मार्क महानियंत्रक कार्यालय
- बिहार के हस्तशिल्प और चित्रकला परंपराएं — उद्योग विभाग, बिहार सरकार
- चित्रकला और शिल्प संग्रह — बिहार संग्रहालय, पटना





