बिहार के उद्योग और खनिज: जिले और संयंत्र
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बिहार के उद्योग और खनिज नोट्स: झारखंड विभाजन, चूना पत्थर और पाइराइट, चीनी, जूट, रेशम, मखाना, बरौनी रिफाइनरी तथा रेल इकाइयां।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

बिहार सामान्य ज्ञान का कोई अध्याय इस अध्याय की तरह एक तिथि पर नहीं टिकता। 15 नवंबर 2000 को राज्य का दक्षिणी पठार झारखंड बन गया और उसके साथ लगभग पूरी खनिज संपदा तथा भारी उद्योग चला गया: झरिया का कोयला, सिंहभूम का लोहा और तांबा, कोडरमा का अभ्रक, जमशेदपुर तथा बोकारो के इस्पात संयंत्र और रांची का भारी अभियंत्रण कारखाना। बचा गंगा का जलोढ़ मैदान, जो मिट्टी और जल में धनी तथा अयस्क में निर्धन है। इसीलिए बिहार का उद्योग कृषि आधारित है और उसके खनिज उन दो संकरी पट्टियों से आते हैं जो विभाजन के बाद बची रहीं।
विभाजन के बाद क्या बचा
वर्तमान बिहार के खनिज दक्षिण पश्चिम में कैमूर तथा रोहतास की पहाड़ियों में और दक्षिण पूर्व में मुंगेर, जमुई, नवादा तथा गया से गुजरती पुरानी चट्टानों की पतली पट्टी में हैं। राज्य का कोई भाग उस अर्थ में खनिज संपन्न नहीं है जिस अर्थ में झारखंड या छत्तीसगढ़ है, और यहां पेट्रोलियम या प्राकृतिक गैस नहीं मिली है।
| खनिज | जिले | उपयोग |
|---|---|---|
| चूना पत्थर | कैमूर, रोहतास, मुंगेर | रोहतास के बंजारी में सीमेंट |
| पाइराइट | रोहतास का अमझोर, देश का सर्वाधिक प्रसिद्ध निक्षेप | गंधकाम्ल और उर्वरक |
| अभ्रक | गया, नवादा, जमुई और मुंगेर, पुरानी कोडरमा पट्टी का छोर | विद्युत विसंवाहन |
| बॉक्साइट | मुंगेर, जमुई और रोहतास, छोटे क्षेत्रों में | अपघर्षक और उच्चतापसह सामग्री |
| क्वार्टजाइट और कांच बालू | मुंगेर, नालंदा और भागलपुर | कांच तथा निर्माण |
| चीनी मिट्टी | बांका और भागलपुर | मिट्टी के बरतन और सिरेमिक |
| नदी तल की बालू | गंगा, सोन और कोसी के तल | निर्माण; राज्य की सबसे बड़ी खनिज आय |
चीनी, जिस पर राज्य खड़ा हुआ
चीनी बिहार का सबसे पुराना बड़ा उद्योग है और एक समय इसी के कारण राज्य देश का अग्रणी चीनी उत्पादक था। मिलें उत्तर पश्चिम के गन्ने के पीछे चलती हैं: चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, समस्तीपुर और दरभंगा, जहां रीगा, सासामुसा, हसनपुर तथा मढ़ौरा के प्रसिद्ध कारखाने हैं। स्वतंत्रता के बाद के दशकों में बहुत सी मिलें बंद हो गईं और उनका पुनरुद्धार, साथ ही शीरा तथा अनाज से एथेनॉल बनाने की राज्य नीति, इस कहानी का वह भाग है जो आज के प्रश्नपत्र पूछते हैं। बिहार देश का पहला राज्य था जिसने एथेनॉल उत्पादन के लिए अलग नीति बनाई।
मैदान के कृषि आधारित उद्योग
जूट उत्तर पूर्व का दूसरा उद्योग है, जहां कटिहार, पूर्णिया और अररिया रेशा उगाते हैं और पश्चिम बंगाल के बाद बिहार देश में दूसरे स्थान पर है। भागलपुर अपनी तसर बुनाई के कारण रेशम नगरी कहलाता है, जिसका कपड़ा भागलपुरी सिल्क के नाम से बिकता है। मखाना, जो दरभंगा, मधुबनी, सहरसा तथा कटिहार के तालाबों में होता है, लगभग पूरा बिहार से आता है और भौगोलिक संकेतक कानून में मिथिला मखाना के नाम से पंजीकृत है; इसी प्रकार मुजफ्फरपुर की शाही लीची, भागलपुर का कतरनी चावल तथा जरदालू आम और गया नवादा क्षेत्र का मगही पान भी पंजीकृत हैं। डेयरी सहकारी संघ के माध्यम से संगठित है, जिसका दूध सुधा नाम से बिकता है और जिसका बड़ा संयंत्र बरौनी में है, तथा चावल और दाल की मिलें हर जिले में चलती हैं।
बरौनी और सार्वजनिक क्षेत्र
बेगूसराय जिला बरौनी में राज्य का औद्योगिक केंद्र रखता है, जहां इंडियन ऑयल की रिफाइनरी साठ के दशक में सोवियत सहयोग से बनी, और उसके साथ ताप विद्युत गृह, उर्वरक संयंत्र तथा डेयरी भी। बिहार में रिफाइनरी या उर्वरक संयंत्र के किसी भी प्रश्न का स्थायी उत्तर बरौनी है। नई सार्वजनिक इकाइयां रेलवे की हैं: मधेपुरा का विद्युत इंजन कारखाना, सारण के मढ़ौरा का डीजल इंजन कारखाना और सारण के बेला का रेल व्हील संयंत्र। रोहतास के बंजारी का सीमेंट, उसी जिले के डालमियानगर का पुराना कागज तथा रसायन कारखाना और मोकामा का जूता कारखाना उस सूची को पूरा करते हैं जो अभ्यर्थी से अपेक्षित है।
उद्योग छोटा क्यों रहा और अब क्या हो रहा है
इस विषय के हर उत्तर में तीन कारण दिए जाते हैं: 2000 में खनिज तथा भारी उद्योग का चले जाना, बंदरगाह, अपनी बिजली और कच्चे माल का अभाव, तथा उत्तर की बाढ़, जो कोसी और गंडक के मैदान से निवेश दूर रखती है। राज्य का उत्तर यह रहा है कि जो भूमि देती है उसी पर निर्माण किया जाए, इसलिए औद्योगिक नीति भारी उद्योग के बजाय खाद्य प्रसंस्करण, एथेनॉल, वस्त्र और चमड़े पर झुकी है, और मखाना, लीची तथा रेशम के समूह अपने आकार से अधिक महत्व रखते हैं। परीक्षा के लिए यह अध्याय जोड़ों की सूची है: खनिज अपने जिले के साथ, उद्योग अपने नगर के साथ, और इन सबके पीछे 15 नवंबर 2000 की तिथि।
परीक्षा की दृष्टि से
परीक्षक का पहला प्रश्न लगभग सदा विभाजन पर होता है: 15 नवंबर 2000 की तिथि, झारखंड को गया पठार और उसके साथ गए खनिज तथा संयंत्र, जिसमें जमशेदपुर या झरिया को अब भी बिहार में बताने वाले भ्रामक विकल्प रहते हैं। दूसरा प्रश्न खनिज और जिले का जोड़ा होता है, जिसमें अमझोर तथा पाइराइट, रोहतास और कैमूर तथा चूना पत्थर, और गया, नवादा, जमुई की अभ्रक पट्टी पक्के करने योग्य उत्तर हैं; प्रश्न यह भी पूछ सकता है कि बिहार में कौन सा खनिज नहीं है, जहां पेट्रोलियम और कोयला सही विकल्प हैं। तीसरा उद्योग और नगर का जोड़ा है: रिफाइनरी तथा उर्वरक के लिए बरौनी, सीमेंट के लिए बंजारी, तसर रेशम के लिए भागलपुर, जूट के लिए कटिहार, चीनी के लिए रीगा और सासामुसा, जूते के लिए मोकामा तथा रेल कारखानों के लिए मधेपुरा, मढ़ौरा और बेला। भौगोलिक संकेतक अब बढ़ता हुआ प्रिय विषय है, इसलिए मिथिला मखाना, शाही लीची, कतरनी चावल, जरदालू आम और मगही पान को उनके जिलों के साथ याद करें।
महत्वपूर्ण तथ्य
| राज्य का विभाजन | 15 नवंबर 2000, जब दक्षिणी पठार से झारखंड बना |
|---|---|
| बिहार ने क्या खोया | झरिया का कोयला, सिंहभूम का लोहा और तांबा, कोडरमा का अभ्रक, जमशेदपुर तथा बोकारो इस्पात |
| पाइराइट | अमझोर, रोहतास जिला, भारत का सर्वाधिक प्रसिद्ध निक्षेप |
| चूना पत्थर | कैमूर, रोहतास और मुंगेर; बंजारी में सीमेंट |
| अभ्रक पट्टी | गया, नवादा, जमुई और मुंगेर |
| अनुपलब्ध खनिज | पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस या काम लायक कोयला नहीं |
| सबसे बड़ी खनिज आय | गंगा, सोन और कोसी के तल की बालू |
| सबसे पुराना बड़ा उद्योग | चीनी, चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, सीतामढ़ी और समस्तीपुर में |
| एथेनॉल नीति | बिहार देश का पहला राज्य था जिसकी अलग एथेनॉल उत्पादन नीति बनी |
| जूट | पश्चिम बंगाल के बाद देश में दूसरा; कटिहार, पूर्णिया और अररिया |
| रेशम नगरी | भागलपुर, तसर या भागलपुरी रेशम के लिए |
| मखाना | दरभंगा, मधुबनी, सहरसा और कटिहार; मिथिला मखाना के नाम से पंजीकृत |
| अन्य जीआई उत्पाद | मुजफ्फरपुर की शाही लीची, भागलपुर का कतरनी चावल तथा जरदालू आम, मगही पान |
| बरौनी, बेगूसराय | इंडियन ऑयल रिफाइनरी, ताप विद्युत गृह, उर्वरक संयंत्र और सुधा डेयरी |
| रेलवे कारखाने | मधेपुरा में विद्युत इंजन, मढ़ौरा में डीजल इंजन, बेला में रेल व्हील |
| जूता उद्योग | पटना जिले के मोकामा का कारखाना |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
भारत में लोहा और इस्पात उद्योग का सर्वाधिक संकेंद्रण किस क्षेत्र में है?
- A.दक्कन पठार
- B.मालवा पठार
- C.छोटा नागपुर पठार
- D.छत्तीसगढ़ पठार
उत्तर देखें
वहां कोयला, लौह अयस्क, मैंगनीज, चूना पत्थर और जल एक दूसरे के निकट मिलते हैं, इसलिए देश के लोहा और इस्पात संयंत्र उसी में भर गए: जमशेदपुर, बोकारो, बर्नपुर तथा दुर्गापुर उसके किनारों पर और राउरकेला कुछ आगे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (टिस्को) की स्थापना दोराबजी टाटा ने किस वर्ष की?
- A.1911
- B.1919
- C.1913
- D.1907
उत्तर देखें
कंपनी उसी वर्ष साकची में पंजीकृत हुई, जो स्वर्णरेखा के किनारे का वह गांव था जो आगे जमशेदपुर बना, और स्थान का चुनाव आसपास के लौह अयस्क, कोयले तथा जल के कारण हुआ।
पूरी व्याख्या पढ़ें →झारखंड बिहार से किस तिथि को अलग हुआ?
- A.1 नवंबर 2000
- B.15 नवंबर 2000
- C.9 नवंबर 2000
- D.22 मार्च 2000
उत्तर देखें
झारखंड उस दिन बिहार के दक्षिणी जिलों से बना, जो बिरसा मुंडा की जयंती भी है, और यह तिथि नए राज्य के स्थापना दिवस के रूप में मनाई जाती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बरौनी तेल शोधनशाला बिहार के किस जिले में स्थित है?
- A.बेगूसराय
- B.मुंगेर
- C.पटना
- D.कटिहार
उत्तर देखें
बरौनी में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन की शोधनशाला साठ के दशक में सोवियत सहयोग से बनी और वह राज्य के एकमात्र भारी औद्योगिक समूह का केंद्र बन गई, जिसके चारों ओर ताप विद्युत गृह, उर्वरक संयंत्र और बड़ी डेयरी हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बिहार का अमझोर किस खनिज के निक्षेप के लिए प्रसिद्ध है?
- A.अभ्रक
- B.बॉक्साइट
- C.पाइराइट
- D.तांबा
उत्तर देखें
अमझोर कैमूर की पहाड़ियों में रोहतास जिले में है और भारत का सर्वाधिक प्रसिद्ध पाइराइट निक्षेप रखता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →तसर बुनाई के कारण बिहार का कौन सा नगर रेशम नगरी कहलाता है?
- A.भागलपुर
- B.दरभंगा
- C.गया
- D.छपरा
उत्तर देखें
भागलपुर के बुनकर पीढ़ियों से तसर रेशम पर काम करते आए हैं और उनका कपड़ा देश भर में भागलपुरी सिल्क के नाम से बिकता है, इसी से यह नगर बिहार की रेशम नगरी कहलाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बिहार का कौन सा उत्पाद भौगोलिक संकेतक कानून के अंतर्गत मिथिला मखाना के नाम से पंजीकृत है?
- A.लीची
- B.मखाना या गोरगन नट
- C.पान
- D.आम
उत्तर देखें
मखाना उस जलीय पौधे का फूला हुआ बीज है जो दरभंगा, मधुबनी, सहरसा और कटिहार के उथले तालाबों में उगाया जाता है, और देश का लगभग पूरा मखाना बिहार के इसी भाग से आता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बिहार के बंजारी का सीमेंट कारखाना किस जिले के चूना पत्थर पर आधारित है?
- A.रोहतास
- B.सारण
- C.पूर्णिया
- D.मधेपुरा
उत्तर देखें
बंजारी रोहतास जिले में है, जहां कैमूर की पहाड़ियां वह चूना पत्थर रखती हैं जिसका उपयोग सीमेंट कारखाना करता है, और उसी जिले में एक समय डालमियानगर का बड़ा कागज तथा रसायन परिसर भी था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बिहार का विद्युत इंजन कारखाना कहां स्थित है?
- A.मढ़ौरा
- B.मधेपुरा
- C.बेला
- D.मोकामा
उत्तर देखें
मधेपुरा का कारखाना भारतीय रेल के लिए अधिक शक्ति वाले विद्युत इंजन बनाता है और राज्य के उत्तर पूर्व की सबसे बड़ी नई औद्योगिक इकाई है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पश्चिम बंगाल के बाद बिहार किस रेशा फसल के उत्पादन में भारत में दूसरे स्थान पर है?
- A.कपास
- B.जूट
- C.रेशम
- D.ऊन
उत्तर देखें
उत्तर पूर्वी जिलों, विशेष रूप से कटिहार, पूर्णिया और अररिया की नम जलोढ़ मिट्टी तथा लंबा गर्म मानसून जूट के लिए उपयुक्त है, और बिहार बहुत समय से पश्चिम बंगाल के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा जूट उत्पादक है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आज बिहार खनिजों में निर्धन क्यों है?
क्योंकि खनिज धारक छोटा नागपुर पठार और संथाल परगना 15 नवंबर 2000 को झारखंड के रूप में अलग हो गए। झरिया का कोयला, सिंहभूम का लोहा तथा तांबा, कोडरमा का अभ्रक और जमशेदपुर तथा बोकारो के इस्पात संयंत्र नए राज्य के साथ चले गए, और बिहार के पास गंगा का जलोढ़ मैदान रह गया।
बिहार का अमझोर किस खनिज के लिए प्रसिद्ध है?
पाइराइट के लिए, जो लोहे का सल्फाइड है और जिससे गंधकाम्ल तथा उर्वरक बनते हैं। रोहतास जिले का अमझोर देश का सर्वाधिक प्रसिद्ध पाइराइट निक्षेप रखता है और यह बिहार के उन कुछ खनिज नामों में है जो प्रश्नपत्र सीधे पूछते हैं।
बिहार के मुख्य उद्योग कौन से हैं?
कृषि आधारित उद्योग: उत्तर पश्चिम में चीनी, उत्तर पूर्व में जूट, हर जिले में चावल तथा दाल मिलें, मिथिला में मखाना और लीची प्रसंस्करण, भागलपुर में तसर रेशम, सुधा नाम से डेयरी, और बेगूसराय में बरौनी का रिफाइनरी, उर्वरक तथा विद्युत समूह।
मिथिला मखाना क्या है?
दरभंगा, मधुबनी, सहरसा और कटिहार के उथले तालाबों में उगाया जाने वाला मखाना, जो भौगोलिक संकेतक कानून के अंतर्गत मिथिला मखाना के नाम से पंजीकृत है। देश का लगभग पूरा मखाना बिहार से आता है और उसका प्रसंस्करण राज्य द्वारा प्रोत्साहित खाद्य उद्योगों में एक है।
बिहार के रेलवे कारखाने कहां हैं?
विद्युत इंजन कारखाना मधेपुरा में, डीजल इंजन कारखाना सारण जिले के मढ़ौरा में और रेल व्हील संयंत्र सारण के बेला में है। विभाजन के बाद राज्य में लगी नई सार्वजनिक इकाइयों में ये सबसे महत्वपूर्ण हैं।
स्रोत
- बिहार के खनिज संसाधन और खनन — खान एवं भूतत्व विभाग, बिहार सरकार
- बिहार का औद्योगिक परिचय और समूह — उद्योग विभाग, बिहार सरकार
- कृषि उत्पादों के पंजीकृत भौगोलिक संकेतक — भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री, भारत सरकार





