बिहार में 1857 और वीर कुंवर सिंह: परीक्षा नोट्स
राज्य परीक्षाओं के लिए बिहार में 1857 के नोट्स: दानापुर की बगावत, आरा की घेराबंदी, जगदीशपुर के वीर कुंवर सिंह और पटना में फाँसी पाए नेता, तिथियों सहित।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

1857 के विद्रोह में बिहार की भूमिका एक ही व्यक्ति के माध्यम से स्मरण की जाती है। शाहाबाद ज़िले के जगदीशपुर के ज़मींदार बाबू वीर कुंवर सिंह लगभग अस्सी वर्ष के थे जब उन्होंने विद्रोही सिपाहियों का नेतृत्व संभाला, महीनों तक कंपनी की टुकड़ियों के विरुद्ध पश्चिमी बिहार को थामे रखा, विद्रोह के अन्य नेताओं के साथ उत्तर भारत में अभियान चलाया, अपने ही ज़िले में लौटे और अंतिम विजय के कुछ दिन बाद वहीं शहीद हुए। बीपीएससी, बीएसएससी और बिहार पुलिस के पेपर इस अध्याय को तिथियों और नामों की छोटी श्रृंखला के रूप में पूछते हैं, और लगभग हर प्रश्न कुंवर सिंह से जुड़ता है।
विद्रोह से पहले का बिहार
प्रांत ने प्रतिरोध पहले भी देखा था। सिदो और कान्हू भाइयों के नेतृत्व में 1855-56 का संथाल विद्रोह केवल एक वर्ष पहले दबाया गया था और उसने पहाड़ी ज़िलों में अशांति छोड़ दी थी। उस समय बिहार बंगाल प्रेसिडेंसी का भाग था, जिसमें पटना के कमिश्नर विलियम टेलर थे, जो प्रांत में 1857 के केंद्रीय अंग्रेज़ अधिकारी बने। शाहाबाद के पुराने ज़मींदार घराने कंपनी की राजस्व नीति से कमज़ोर हो चुके थे, और कुंवर सिंह स्वयं कंपनी की अदालतों के माध्यम से कर्ज़ में फँसे थे, जिसे इतिहासकार उनके विद्रोह में सम्मिलित होने के कारणों में गिनते हैं।
दानापुर, आरा और पहला अभियान
बिहार में विद्रोह छावनी से आरंभ हुआ। 25 जुलाई 1857 को पटना के निकट दानापुर की तीन भारतीय रेजिमेंटों ने बगावत की, सोन नदी पार की और आरा पहुँचीं, जहाँ कुंवर सिंह ने उनका नेतृत्व संभाला। 27 जुलाई से अंग्रेज़ और सिख सैनिकों की छोटी टुकड़ी लगभग एक सप्ताह तक आरा के एक मज़बूत मकान में घिरी रही, जिसकी रक्षा इंजीनियर विकर्स बॉयल और मजिस्ट्रेट हेरवाल्ड वेक ने की। पहली राहत टुकड़ी घात में फँस गई, पर मेजर विंसेंट आयर की दूसरी टुकड़ी ने अगस्त के आरंभ में बीबीगंज में कुंवर सिंह को हराया, आरा की घेराबंदी तोड़ी और फिर जगदीशपुर को नष्ट कर दिया, जिसके बाद विद्रोही नेता अपने ज़िले से बाहर निकल गए।
| तिथि | घटना |
|---|---|
| 25 जुलाई 1857 | पटना के निकट दानापुर में सिपाहियों की बगावत |
| 27 जुलाई 1857 | आरा के मकान की घेराबंदी आरंभ |
| अगस्त 1857 का आरंभ | बीबीगंज के बाद मेजर विंसेंट आयर द्वारा आरा की मुक्ति |
| 1857-58 | लखनऊ, कानपुर, रीवा, बांदा और कालपी तक कुंवर सिंह का अभियान |
| 23 अप्रैल 1858 | जगदीशपुर में कैप्टन ली ग्रैंड पर विजय |
| 26 अप्रैल 1858 | जगदीशपुर में वीर कुंवर सिंह का निधन |
लंबा अभियान और अंतिम विजय
शाहाबाद से निकलकर कुंवर सिंह उत्तर और पश्चिम की ओर गए और विद्रोह के अन्य सेनापतियों के साथ लड़े, लखनऊ, कानपुर, रीवा, बांदा और कालपी तक गए और नाना साहेब तथा तात्या टोपे के साथ कार्रवाई की। 1858 के वसंत में वे बिहार की ओर लौटे। परंपरा शिवपुर घाट के निकट गंगा पार करने की वह कथा स्मरण रखती है जिसमें गोली उनकी बाँह में लगी और कहा जाता है कि उन्होंने स्वयं अपनी घायल बाँह काटकर गंगा को अर्पित कर दी। 23 अप्रैल 1858 को उन्होंने जगदीशपुर के जंगल में कैप्टन ली ग्रैंड को हराया और अपनी राजधानी में फिर प्रवेश किया, पर वे घायल थे और 26 अप्रैल 1858 को वहीं उनका निधन हो गया। उनके भाई अमर सिंह ने निशान सिंह और हरे कृष्ण सिंह जैसे साथियों के साथ कई महीने संघर्ष जारी रखा और वे प्रांत के अंतिम विद्रोही नेता थे जिनका पीछा अंग्रेज़ों को करना पड़ा।
पटना, तिरहुत और फाँसी पाए लोग
शाहाबाद से बाहर विद्रोह नगरों में दिखा। पटना में पीर अली खाँ, जिनकी किताब की दुकान विद्रोहियों की बैठक का स्थान थी, ने 3 जुलाई 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किया और टेलर के आदेश पर कई अन्य लोगों के साथ उन्हें फाँसी दी गई; उन्हें पटना का शहीद कहा जाता है। तिरहुत में मुज़फ्फरपुर के पुलिस अधिकारी वारिस अली को विद्रोहियों से पत्र-व्यवहार के आरोप में पकड़कर फाँसी दी गई। गया, भागलपुर और पूर्णिया में भी अशांति रही और कई स्थानों के सिपाही छोड़कर चले गए, पर जगदीशपुर जैसी ताकत का दूसरा केंद्र नहीं बना।
बिहार उन्हें कैसे स्मरण करता है
कुंवर सिंह का नाम राज्य के सार्वजनिक जीवन से गहराई से जुड़ा है। 1966 में उनके सम्मान में डाक टिकट जारी हुआ, आरा का विश्वविद्यालय उनका नाम धारण करता है, आरा में गंगा पर बना सड़क-रेल पुल उनके नाम पर है, और उनकी अंतिम विजय की तिथि 23 अप्रैल विजयोत्सव के रूप में मनाई जाती है। परीक्षा के लिए याद रखें कि वे जगदीशपुर के उज्जैनिया राजपूत घराने के थे, उनका ज़िला शाहाबाद आज विभाजित है और जगदीशपुर भोजपुर में पड़ता है, तथा वे 1857 के नेताओं में सबसे वृद्ध थे।
परीक्षा की दृष्टि से
बीपीएससी और बीएसएससी इस अध्याय को तिथियों, स्थानों और अंग्रेज़ अधिकारियों के रूप में पूछते हैं। चार तिथियाँ रटें: दानापुर की बगावत 25 जुलाई 1857, आरा की घेराबंदी का आरंभ 27 जुलाई 1857, ली ग्रैंड पर विजय 23 अप्रैल 1858 और कुंवर सिंह का निधन 26 अप्रैल 1858। पूछे जाने वाले अधिकारी हैं पटना के कमिश्नर विलियम टेलर, आरा को मुक्त कराने वाले विंसेंट आयर, और जगदीशपुर में पराजित कैप्टन ली ग्रैंड। सामान्य जाल ये हैं: घिरे नगर के रूप में आरा के स्थान पर पटना, आयर की सफलता का श्रेय टेलर को, कुंवर सिंह का ज़िला शाहाबाद के स्थान पर भागलपुर या गया बताना, और उनका निधन युद्ध के ही दिन मान लेना जबकि वह तीन दिन बाद हुआ। प्रश्नों की दूसरी धारा पूछती है कि उनके बाद नेतृत्व किसने किया, जिसका उत्तर उनके भाई अमर सिंह हैं, और पटना का शहीद कौन था, जिसका उत्तर पीर अली खाँ हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| वीर कुंवर सिंह | शाहाबाद ज़िले के जगदीशपुर के ज़मींदार, जो अब बिहार के भोजपुर ज़िले में है |
|---|---|
| 1857 में आयु | लगभग अस्सी वर्ष; विद्रोह के नेताओं में सबसे वृद्ध |
| दानापुर की बगावत | 25 जुलाई 1857; सिपाही आरा की ओर बढ़े |
| आरा की घेराबंदी | 27 जुलाई 1857 से; मकान की रक्षा विकर्स बॉयल और हेरवाल्ड वेक ने की |
| आरा की मुक्ति | मेजर विंसेंट आयर, अगस्त 1857 के आरंभ में बीबीगंज की कार्रवाई के बाद |
| पटना के कमिश्नर | विलियम टेलर |
| पटना का शहीद | पीर अली खाँ, किताब विक्रेता, 3 जुलाई 1857 के विद्रोह के बाद फाँसी |
| तिरहुत | वारिस अली, मुज़फ्फरपुर के पुलिस अधिकारी, विद्रोहियों से संपर्क के कारण फाँसी |
| बिहार से बाहर अभियान | लखनऊ, कानपुर, रीवा, बांदा और कालपी, नाना साहेब तथा तात्या टोपे के साथ |
| अंतिम विजय | 23 अप्रैल 1858, जगदीशपुर में कैप्टन ली ग्रैंड पर |
| निधन | 26 अप्रैल 1858, जगदीशपुर में घावों के कारण |
| विद्रोह में उत्तराधिकारी | उनके भाई अमर सिंह |
| पूर्व का विद्रोह | 1855-56 का संथाल विद्रोह, सिदो और कान्हू के नेतृत्व में |
| स्मारक | 1966 का डाक टिकट, आरा का विश्वविद्यालय, आरा में गंगा पुल और 23 अप्रैल का विजयोत्सव |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
बिहार में 1857 के विद्रोह के नेता वीर कुंवर सिंह किस स्थान के ज़मींदार थे?
- A.जगदीशपुर
- B.दानापुर
- C.रोहतास
- D.मुंगेर
उत्तर देखें
कुंवर सिंह शाहाबाद ज़िले के जगदीशपुर के उज्जैनिया राजपूत घराने के थे; वह ज़िला बाद में विभाजित हुआ और आज जगदीशपुर बिहार के भोजपुर ज़िले में पड़ता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →25 जुलाई 1857 को दानापुर में बगावत करने वाले सिपाही किस नगर की ओर बढ़े, जहाँ कुंवर सिंह ने उनका नेतृत्व संभाला?
- A.गया
- B.आरा
- C.भागलपुर
- D.मुज़फ्फरपुर
उत्तर देखें
पटना के निकट दानापुर छावनी की तीन भारतीय रेजिमेंटों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह किया, सोन नदी पार की और शाहाबाद ज़िले के मुख्यालय आरा पहुँचीं, जहाँ कुंवर सिंह उनसे मिले और नेतृत्व संभाला।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अगस्त 1857 में आरा में घिरी अंग्रेज़ टुकड़ी को किस अधिकारी ने मुक्त कराया?
- A.मेजर विंसेंट आयर
- B.विलियम टेलर
- C.कैप्टन ली ग्रैंड
- D.विकर्स बॉयल
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आरा की ओर भेजी गई पहली राहत टुकड़ी घात में फँसकर पीछे हट गई थी, और मेजर विंसेंट आयर की टुकड़ी ने अगस्त 1857 के आरंभ में बीबीगंज में कुंवर सिंह को हराया, आरा के मकान की घेराबंदी तोड़ी और उसके बाद जगदीशपुर को नष्ट किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →23 अप्रैल 1858 को वीर कुंवर सिंह ने जगदीशपुर के जंगल में किस अंग्रेज़ अधिकारी को हराया?
- A.मेजर विंसेंट आयर
- B.कैप्टन ली ग्रैंड
- C.जनरल लुगार्ड
- D.हेरवाल्ड वेक
उत्तर देखें
1858 के वसंत में अपने ज़िले लौटकर कुंवर सिंह ने 23 अप्रैल 1858 को जगदीशपुर के निकट जंगल में कैप्टन ली ग्रैंड की टुकड़ी को हराया और अपनी राजधानी में फिर प्रवेश किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →वीर कुंवर सिंह का निधन कब हुआ?
- A.3 अगस्त 1857
- B.23 अप्रैल 1858
- C.26 अप्रैल 1858
- D.9 मई 1858
उत्तर देखें
अंतिम अभियान की लड़ाई में कुंवर सिंह घायल हुए और कैप्टन ली ग्रैंड पर विजय के तीन दिन बाद, 26 अप्रैल 1858 को जगदीशपुर में उनका निधन हुआ।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1857 के विद्रोह के समय पटना के कमिश्नर कौन थे?
- A.विलियम टेलर
- B.विंसेंट आयर
- C.हेनरी लॉरेंस
- D.जॉन निकोलसन
उत्तर देखें
टेलर 1857 में पटना प्रमंडल के कमिश्नर थे, और उन्होंने ही नगर के प्रमुख संदिग्धों को गिरफ्तार किया, 3 जुलाई 1857 के विद्रोह को दबाया तथा पीर अली खाँ और अन्य लोगों को फाँसी देने का आदेश दिया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जुलाई 1857 में फाँसी पाए और पटना का शहीद कहे जाने वाले पीर अली खाँ का पेशा क्या था?
- A.किताब विक्रेता
- B.पुलिस अधिकारी
- C.दानापुर रेजिमेंट का सिपाही
- D.शाहाबाद का ज़मींदार
उत्तर देखें
पीर अली खाँ की पटना में किताब की दुकान थी, जो विद्रोह की योजना बनाने वालों की बैठक का स्थान बनी, और उन्होंने 3 जुलाई 1857 को नगर में हुए हमले का नेतृत्व किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →वीर कुंवर सिंह के निधन के बाद शाहाबाद में विद्रोह का नेतृत्व किसने किया?
- A.अमर सिंह
- B.निशान सिंह
- C.तात्या टोपे
- D.वारिस अली
उत्तर देखें
उन्होंने 26 अप्रैल 1858 के बाद शाहाबाद की कमान संभाली और शेष विद्रोहियों के साथ जंगलों में घूमते हुए कई महीने ज़िले में संघर्ष जीवित रखा, और वे बिहार में विद्रोह के अंतिम नेता थे जिनका पीछा अंग्रेज़ों को करना पड़ा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1857 के विद्रोह से पहले हुए 1855-56 के संथाल विद्रोह का नेतृत्व किन भाइयों ने किया था?
- A.सिदो और कान्हू
- B.कुंवर सिंह और अमर सिंह
- C.तिलका मांझी और जतरा भगत
- D.बिरसा मुंडा और गया मुंडा
उत्तर देखें
संथाल विद्रोह अर्थात हूल 1855 में तत्कालीन बिहार के राजमहल पहाड़ी क्षेत्र दामिन-इ-कोह में भड़का और इसका नेतृत्व सिदो तथा कान्हू मुर्मू भाइयों ने महाजनों, ज़मींदारों और कंपनी के अधिकारियों के विरुद्ध किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →वीर कुंवर सिंह का केंद्र जगदीशपुर आज बिहार के किस ज़िले में है?
- A.भोजपुर
- B.रोहतास
- C.बक्सर
- D.पटना
उत्तर देखें
कुंवर सिंह की जागीर पुराने शाहाबाद ज़िले में थी, जिसका मुख्यालय आरा था। शाहाबाद बाद में विभाजित हुआ और जगदीशपुर आरा के साथ वर्तमान भोजपुर ज़िले में पड़ता है, इसी कारण परीक्षा में आधुनिक ज़िले के लिए भोजपुर और 1857 के ज़िले के लिए शाहाबाद लिखा जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वीर कुंवर सिंह कौन थे?
वे बिहार के शाहाबाद ज़िले के जगदीशपुर के ज़मींदार थे, जो आज भोजपुर ज़िले में है, और लगभग अस्सी वर्ष की आयु में उन्होंने पश्चिमी बिहार में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किया। उन्होंने दानापुर के विद्रोही सिपाहियों की कमान संभाली, उत्तर भारत में संघर्ष किया और 26 अप्रैल 1858 को जगदीशपुर में उनका निधन हुआ।
बिहार में 1857 का विद्रोह कब आरंभ हुआ?
25 जुलाई 1857 को, जब पटना के निकट दानापुर छावनी की भारतीय रेजिमेंटों ने बगावत की और आरा की ओर बढ़ीं। पटना में पीर अली खाँ के नेतृत्व वाला विद्रोह कुछ सप्ताह पहले, 3 जुलाई 1857 को हुआ था।
आरा की घेराबंदी क्या थी?
दानापुर की बगावत के बाद विद्रोहियों ने 27 जुलाई 1857 से आरा के एक मज़बूत मकान में अंग्रेज़ और सिख सैनिकों की छोटी टुकड़ी को घेर लिया। यह घेरा लगभग एक सप्ताह चला, जब तक मेजर विंसेंट आयर की टुकड़ी ने बीबीगंज में कुंवर सिंह को हराकर नगर को मुक्त नहीं करा लिया।
वीर कुंवर सिंह का निधन कैसे हुआ?
उन्होंने 23 अप्रैल 1858 को जगदीशपुर में कैप्टन ली ग्रैंड को हराकर अपनी राजधानी में फिर प्रवेश किया, पर अभियान में वे घायल हो गए थे और 26 अप्रैल 1858 को वहीं उनका निधन हुआ। उनके भाई अमर सिंह ने उसके बाद कई महीने संघर्ष जारी रखा।
विद्रोह के समय पटना के कमिश्नर कौन थे?
विलियम टेलर, जिन्होंने जुलाई 1857 के पटना विद्रोह को दबाया और पीर अली खाँ तथा अन्य लोगों को फाँसी देने का आदेश दिया। प्रांत के प्रबंधन के कारण उनकी आलोचना हुई और बाद में उन्हें पद से हटा दिया गया।
स्रोत
- हमारे अतीत III (कक्षा आठ), अध्याय: 1857 और उसके बाद — एनसीईआरटी
- भारतीय इतिहास के विषय भाग तीन (कक्षा बारह), अध्याय: विद्रोही और राज — एनसीईआरटी
- राज्य का इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम, बिहार सरकार पोर्टल — बिहार सरकार
- बिहार में राष्ट्रीय महत्व के स्मारक — भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण





