बिहार की नदियां और बाढ़: कोसी, गंडक और कांवर झील
बिहार की नदियों पर परीक्षोपयोगी नोट्स: गंगा, उत्तरी एवं दक्षिणी तट की सहायक नदियां, कोसी, बैराज, बाढ़ के कारण, चौर आर्द्रभूमियां तथा रामसर स्थल।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 6 मिनट

बिहार को अपने आकार के किसी भी दूसरे मैदान से अधिक नदियां सींचती हैं, और लगभग सभी अंत में गंगा में मिल जाती हैं। राज्य का जल-भूगोल वास्तव में दो भिन्न नदी-परिवारों की कहानी है: एक वे जो नेपाल और हिमालय से उतरकर उत्तरी तट पर आती हैं, दूसरी वे जो छोटानागपुर पठार तथा कैमूर की पहाड़ियों से निकलकर दक्षिण से गंगा में मिलती हैं। परीक्षाएं इस अध्याय पर हर वर्ष लौटती हैं, क्योंकि यही कुछ तथ्य बाढ़, सिंचाई, मखाना और मिथिलांचल की आर्द्रभूमियों के प्रश्नों का उत्तर दे देते हैं।
गंगा: राज्य की मुख्य धारा
गंगा बक्सर जिले के चौसा के पास बिहार में प्रवेश करती है, पश्चिम से पूर्व लगभग 445 किलोमीटर बहती है और राजमहल के निकट पश्चिम बंगाल में चली जाती है। वह राज्य को उत्तर बिहार के मैदान और दक्षिण बिहार के मैदान में बांटती है, और बिहार की हर दूसरी नदी अंततः उसकी सहायक है। पटना, बक्सर, मुंगेर और भागलपुर, सभी इसके तट पर बसे हैं। वर्षा काल में गंगा स्वयं ऊंचे जलस्तर पर रहती है, इसलिए पीछे की सहायक नदियां खुलकर नहीं निकल पातीं और उनका पानी मैदान पर फैल जाता है। इस तरह गंगा राज्य की जीवनरेखा भी है और उसके बाढ़ के पानी पर लगा ताला भी।
उत्तरी तट की नदियां: हिमालयी और सदावाहिनी
उत्तरी तट की नदियां नेपाल में या शिवालिक की तलहटी में जन्म लेती हैं। इन्हें हिमपात और भारी मानसूनी वर्षा, दोनों का जल मिलता है, इसलिए ये वर्ष भर बहती हैं और एक नवीन, उठते पर्वत-तंत्र से भारी मात्रा में गाद लाती हैं। ये अपनी तलहटी को मैदान के धरातल से ऊपर उठा लेती हैं, मार्ग बदलती हैं और हर मानसून में फैल जाती हैं।
| नदी | उद्गम | संगम |
|---|---|---|
| घाघरा (सरयू) | नेपाल हिमालय, करनाली के रूप में | गंगा से डोरीगंज, सारण में |
| गंडक (नारायणी) | नेपाल, सप्त गंडकी के रूप में | गंगा से सोनपुर, पटना के सामने |
| बूढ़ी गंडक | सोमेश्वर पहाड़ियां, पश्चिम चंपारण | गंगा से खगड़िया के निकट |
| बागमती | शिवपुरी पहाड़ियां, काठमांडू घाटी | कोसी से, खगड़िया जिले में |
| कमला बलान | महाभारत श्रेणी, नेपाल | कोसी से |
| कोसी | नेपाल और तिब्बत, सप्त कोसी के रूप में | गंगा से कुरसेला, कटिहार में |
| महानंदा | दार्जिलिंग की पहाड़ियां | गंगा से, बिहार से निकलने के बाद |
दक्षिणी तट की नदियां: पठारी और मौसमी
दक्षिण की नदियां कठोर चट्टानों पर जन्म लेती हैं, तेजी से मैदान में उतरती हैं और मानसून बीतने पर बालू के पाट में सिमट जाती हैं। ये गाद कम लाती हैं, कम अवधि की बाढ़ देती हैं और उत्तरी नदियों की तुलना में इन पर बांध तथा बैराज बनाना सरल रहा है।
- सोन: मध्य प्रदेश के अमरकंटक से निकलकर रोहतास के रास्ते बिहार में आती है और पटना से पश्चिम मनेर के पास गंगा में मिलती है; यह गंगा की सबसे बड़ी दक्षिणी सहायक नदी है। डेहरी-ऑन-सोन का इंद्रपुरी बैराज सोन नहर प्रणाली को जल देता है, जो देश की सबसे पुरानी नहर प्रणालियों में है।
- पुनपुन: छोटानागपुर पठार से निकलकर पटना के दक्षिण-पूर्व फतुहा के पास गंगा में मिलती है।
- फल्गु: गया के ऊपर लीलाजन और मोहाना के मिलने से बनती है, पितृपक्ष के तर्पण के लिए प्रसिद्ध है और इसका चौड़ा बालू पाट वर्ष के अधिकांश समय सूखा रहता है।
- किउल, हरोहर और सकरी: जमुई तथा नवादा की पहाड़ियों का जल लेकर लखीसराय के सूर्यगढ़ा के पास गंगा तक पहुंचती हैं।
- चंदन और बदुआ: झारखंड की पहाड़ियों से उतरकर बांका और भागलपुर में आती हैं।
- कर्मनाशा: उत्तर प्रदेश से लगी पश्चिमी सीमा के साथ बहती है और बक्सर के चौसा के पास गंगा में मिलती है।
कोसी: बिहार का शोक
कोसी को बिहार का शोक कहा जाता है। इसकी सात शीर्ष धाराओं के कारण इसे सप्त कोसी कहते हैं, और इनमें तीन प्रमुख, सुन कोसी, अरुण तथा तमुर, नेपाल में बराहक्षेत्र के ऊपर मिलती हैं। यह नदी विश्व की सर्वाधिक गाद ढोने वाली नदियों में है; समतल मैदान में पहुंचते ही गाद गिरा देती है और फिर अपनी धारा एक ओर खिसका लेती है। लगभग दो सौ वर्षों में यह करीब 112 किलोमीटर पश्चिम की ओर हट गई और सुपौल, सहरसा तथा मधेपुरा में छोड़ी हुई धाराओं का पंखा बना गई। 1954 के भारत-नेपाल कोसी समझौते के अंतर्गत सीमा पर भीमनगर में बैराज बना, दोनों तटों पर लंबे तटबंध बने और सिंचाई के लिए पूर्वी कोसी मुख्य नहर निकाली गई। अगस्त 2008 में नेपाल के कुसहा में पूर्वी तटबंध टूट गया, नदी पुरानी धारा में मुड़ गई और सुपौल, मधेपुरा, अररिया तथा सहरसा में राज्य की सबसे भीषण बाढ़ों में से एक आई।
उत्तर बिहार में बाढ़ क्यों आती है
चार तथ्य मिलकर बाढ़ समझा देते हैं। नदियां नवीन पर्वत-तंत्र से आती हैं और जो गाद लाती हैं वह उनकी तलहटी ऊंची कर देती है। जिस मैदान में वे उतरती हैं उसका ढाल बहुत कम है, इसलिए पानी बहकर निकलने के बजाय फैल जाता है। उसी समय गंगा स्वयं उच्च बाढ़ पर होती है और उनके मुहाने रोक लेती है। और जो तटबंध उन्हें बांधने के लिए बने, उनके पीछे विस्तृत क्षेत्र में निकासी ही नहीं बची, इसलिए जलजमाव अब बाढ़ जितनी ही बड़ी समस्या है। देश में सर्वाधिक बाढ़-प्रवण क्षेत्र बिहार में है। परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण निर्माण हैं भीमनगर का कोसी बैराज, पश्चिम चंपारण में वाल्मीकिनगर (भैंसालोटन) का गंडक बैराज और सोन पर इंद्रपुरी बैराज; नेपाल के बराहक्षेत्र में प्रस्तावित ऊंचा बांध आज तक नहीं बना।
चौर, मौन, दियारा और ताल
उत्तर बिहार का समतल धरातल उथले बेसिनों में पानी रोक लेता है, और इनके स्थानीय नाम सीधे पूछे जाते हैं। चौर तश्तरीनुमा गड्ढा है जो वर्ष के बड़े भाग में जलमग्न रहता है; मौन गोखुर झील है, जो धारा बदलने पर नदी के छूटे लूप से बनती है; दियारा गंगा की धाराओं के बीच की बलुई भूमि है, जिस पर तरबूज और सब्जियां उगाई जाती हैं; और ताल दक्षिण बिहार की भारी चिकनी मिट्टी की पट्टी है, जैसे पटना और नालंदा जिलों का मोकामा ताल, जहां पानी उतरने पर रबी की दालें होती हैं। दरभंगा, मधुबनी और कटिहार के चौरों में मखाना उगाया जाता है, और देश का अधिकांश मखाना बिहार में होता है; मिथिला मखाना को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त है।
रामसर स्थल और डॉल्फिन अभयारण्य
बेगूसराय जिले का कांवर ताल, जिसे कांवर झील भी कहते हैं, बूढ़ी गंडक की गोखुर झील है और राज्य का पहला रामसर स्थल है, जो 2020 में सूचीबद्ध हुआ; इसे अक्सर एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की गोखुर झील कहा जाता है। जमुई के नागी और नकटी पक्षी अभयारण्य, जो मूलतः सिंचाई के लिए बने जलाशय हैं और 1984 में पक्षी अभयारण्य घोषित हुए, भी अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों की रामसर सूची में हैं। भागलपुर जिले में सुल्तानगंज से कहलगांव तक गंगा के लगभग साठ किलोमीटर खंड में 1991 में अधिसूचित विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन अभयारण्य देश का एकमात्र अभयारण्य है जो गांगेय डॉल्फिन, भारत के राष्ट्रीय जलीय जीव, के लिए बना है। कटिहार जिले का गोगाबील सामुदायिक रिजर्व के रूप में संरक्षित आर्द्रभूमि है।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्नपत्र सबसे अधिक नदी और संगम के जोड़े पूछते हैं: गंडक सोनपुर, घाघरा डोरीगंज, कोसी कुरसेला, पुनपुन फतुहा और सोन मनेर के पास। दूसरा पसंदीदा प्रश्न उत्तरी बनाम दक्षिणी तट का विभाजन है, जिसमें एक ओर हिमालयी, सदावाहिनी और गाद-भरी नदियां हैं तथा दूसरी ओर पठारी और मौसमी; इसलिए कौन नदी नेपाल से नहीं निकलती, इसका उत्तर दक्षिणी नामों में मिलेगा। कोसी निश्चित है: बिहार का शोक, लगभग 112 किमी का पश्चिमी विस्थापन, 1954 का नेपाल समझौता, भीमनगर बैराज और अगस्त 2008 का कुसहा तटबंध भंग। बैराज और नदी के जोड़े मिलान वाले प्रश्नों में आते हैं, जैसे गंडक पर वाल्मीकिनगर और सोन पर इंद्रपुरी। आर्द्रभूमियों में कांवर ताल को बिहार का पहला रामसर स्थल और बेगूसराय को उसका जिला बार-बार पूछा जाता है, और जाल जमुई का विकल्प है, जो नागी-नकटी का जिला है। चौर, मौन, दियारा और ताल, चारों शब्द अलग-अलग याद करें, क्योंकि परिभाषा वाले प्रश्न इन्हें आपस में उलझाते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| बिहार में गंगा | लगभग 445 किमी, बक्सर के चौसा से राजमहल के निकट तक |
|---|---|
| बिहार का शोक | कोसी नदी |
| सबसे बड़ी दक्षिणी सहायक नदी | सोन, उद्गम मध्य प्रदेश का अमरकंटक |
| गंडक का संगम | सोनपुर, पटना के सामने |
| घाघरा का संगम | डोरीगंज, सारण जिला |
| कोसी का संगम | कुरसेला, कटिहार जिला |
| कोसी बैराज | भीमनगर, भारत-नेपाल सीमा पर, 1954 के कोसी समझौते के तहत |
| गंडक बैराज | वाल्मीकिनगर (भैंसालोटन), पश्चिम चंपारण |
| सोन बैराज | इंद्रपुरी, रोहतास जिले के डेहरी-ऑन-सोन में |
| 2008 की कोसी बाढ़ | नेपाल के कुसहा में तटबंध भंग, अगस्त 2008 |
| बिहार का पहला रामसर स्थल | कांवर ताल (कांवर झील), बेगूसराय, 2020 में सूचीबद्ध |
| अन्य रामसर आर्द्रभूमियां | नागी और नकटी पक्षी अभयारण्य, जमुई जिला |
| डॉल्फिन अभयारण्य | विक्रमशिला, सुल्तानगंज से कहलगांव, भागलपुर, 1991 |
| पश्चिमी सीमा की नदी | कर्मनाशा, बक्सर के चौसा के पास गंगा में मिलती है |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
किस नदी को 'बिहार का शोक' कहा जाता है?
- A.गंडक
- B.कोसी
- C.सोन
- D.पुनपुन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, कोसी है। कोसी को यह नाम इसलिए मिला कि वह नेपाल से असाधारण रूप से भारी गाद लाती है, समतल उत्तर बिहार के मैदान में पहुंचते ही उसे गिरा देती है, अपनी तलहटी आसपास की भूमि से ऊंची कर लेती है और फिर नई धारा में फूट पड़ती है। लगभग दो सौ वर्षों में यह नदी करीब 112 किलोमीटर पश्चिम की ओर खिसक गई, इसलिए बाढ़ उसी क्षेत्र में नहीं लौटी, बल्कि हर बार नया क्षेत्र उजाड़ती रही।
विकल्प A, गंडक, चंपारण और मुजफ्फरपुर में भीषण बाढ़ लाती है, पर वाल्मीकिनगर बैराज से नियंत्रित होती है और उसका इस प्रकार धारा बदलने का इतिहास नहीं है। विकल्प C, सोन, दक्षिणी पठारी नदी है, मौसमी तथा तुलनात्मक रूप से शांत, और उसे गंगा की सबसे बड़ी दक्षिणी सहायक नदी के रूप में याद रखा जाता है। विकल्प D, पुनपुन, छोटानागपुर की छोटी धारा है जो फतुहा के पास गंगा में मिलती है। परीक्षा के लिए शोक के जोड़े याद रखें: कोसी बिहार का शोक, दामोदर बंगाल का शोक और ह्वांगहो चीन का शोक।
गंगा नदी बिहार में निम्नलिखित में से किस स्थान के पास प्रवेश करती है?
- A.चौसा, बक्सर जिला
- B.मनेर, पटना जिला
- C.कुरसेला, कटिहार जिला
- D.राजमहल
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, बक्सर जिले का चौसा है। गंगा उत्तर प्रदेश से चौसा के पास बिहार में आती है, पश्चिम से पूर्व लगभग 445 किलोमीटर बहती है और राजमहल के निकट पश्चिम बंगाल के लिए राज्य छोड़ देती है; इसी मार्ग में वह बिहार को उत्तर बिहार के मैदान और दक्षिण बिहार के मैदान में विभाजित करती है।
विकल्प B, मनेर, पटना से पश्चिम वह स्थान है जहां सबसे बड़ी दक्षिणी सहायक नदी सोन गंगा में मिलती है, अतः वह राज्य के भीतर का संगम है, प्रवेश बिंदु नहीं। विकल्प C, कटिहार जिले का कुरसेला, राज्य के पूर्व में कोसी और गंगा का संगम है, वह भी प्रवेश बिंदु नहीं। विकल्प D, राजमहल, निर्गम है: गंगा वहीं से पश्चिम बंगाल में जाती है, और प्रश्नपत्र प्रवेश तथा निर्गम को आपस में बदलकर यही देखते हैं कि अभ्यर्थी ने दोनों याद किए हैं या नहीं। चौसा इतिहास के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि 1539 के चौसा युद्ध में शेरशाह सूरी ने हुमायूं को हराया था।
गंडक नदी गंगा से किस स्थान पर मिलती है?
- A.डोरीगंज, सारण जिला
- B.सोनपुर, पटना के सामने
- C.खगड़िया
- D.कुरसेला
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व्याख्या
सही उत्तर B, सोनपुर, पटना के सामने है। गंडक नेपाल में जन्म लेती है, जहां उसे नारायणी या सप्त गंडकी कहा जाता है, पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर से बिहार में प्रवेश करती है और दक्षिण-पूर्व बहकर पटना के सामने सोनपुर में गंगा से मिलती है। यही संगम सोनपुर पशु मेले का स्थल है, जिससे यह जोड़ा आसानी से याद रहता है।
विकल्प A, सारण जिले का डोरीगंज, घाघरा का संगम है, वह नदी जो नेपाल से करनाली के रूप में आती है और बिहार की पश्चिमी सीमा का एक भाग बनाती है। विकल्प C, खगड़िया, वह स्थान है जहां बूढ़ी गंडक गंगा तक पहुंचती है, और नामों की समानता ही इस प्रश्न का जाल है: गंडक और बूढ़ी गंडक अलग नदियां हैं और उनके मुहाने भी अलग हैं। विकल्प D, कटिहार जिले का कुरसेला, कोसी का संगम है। चारों संगम एक समूह में याद करें, क्योंकि मिलान वाले प्रश्न इन सबको साथ रखते हैं।
बिहार में गंगा की सबसे बड़ी दक्षिणी सहायक नदी कौन है?
- A.पुनपुन
- B.सोन
- C.किउल
- D.चंदन
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व्याख्या
सही उत्तर B, सोन है। सोन मध्य प्रदेश के अमरकंटक से निकलती है, उसी पठार से जहां नर्मदा का उद्गम है, उत्तर-पूर्व दिशा में रोहतास से बहती है और पटना से कुछ पश्चिम मनेर के पास गंगा में मिल जाती है। दक्षिण से गंगा तक पहुंचने वाली नदियों में यह सबसे बड़ी है, और डेहरी-ऑन-सोन का इंद्रपुरी बैराज इसका जल सोन नहर प्रणाली में मोड़ता है, जो भारत की सबसे पुरानी नहर प्रणालियों में से एक है।
विकल्प A, पुनपुन, छोटानागपुर की बहुत छोटी धारा है जो पटना के दक्षिण-पूर्व फतुहा के पास गंगा में मिलती है। विकल्प C, किउल, जमुई और लखीसराय क्षेत्र का जल लेकर सूर्यगढ़ा के पास गंगा से मिलती है। विकल्प D, चंदन, झारखंड की पहाड़ियों से बांका और भागलपुर में आती है। तीनों दक्षिणी नदियां हैं, इसलिए प्रश्न वास्तव में सबसे बड़ी नदी पूछ रहा है, और सोन देश में यमुना के बाद गंगा की दूसरी सबसे लंबी दक्षिणी सहायक नदी भी है।
बिहार का पहला रामसर स्थल कांवर ताल (कांवर झील) किस जिले में स्थित है?
- A.बेगूसराय
- B.जमुई
- C.कटिहार
- D.समस्तीपुर
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व्याख्या
सही उत्तर A, बेगूसराय है। कांवर ताल, जिसे कांवर झील भी कहते हैं, बेगूसराय जिले में है और बूढ़ी गंडक द्वारा छोड़ी गई गोखुर झील है। इसे 2020 में रामसर अभिसमय के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि के रूप में सूचीबद्ध किया गया, और यह बिहार का पहला ऐसा स्थल है; इसे अक्सर एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की गोखुर झील कहा जाता है। यह मध्य एशियाई उड़ान मार्ग के प्रवासी जलपक्षियों का महत्वपूर्ण पड़ाव है।
विकल्प B, जमुई, नागी और नकटी पक्षी अभयारण्यों का जिला है, जो सिंचाई के जलाशय थे और बाद में रामसर सूची में जोड़े गए; बेगूसराय के सामने यही सबसे अधिक रखा जाने वाला भ्रामक विकल्प है। विकल्प C, कटिहार, में गोगाबील आर्द्रभूमि है, जो सामुदायिक रिजर्व के रूप में संरक्षित है, और वहीं कोसी गंगा से मिलती है। विकल्प D, समस्तीपुर, में चौर आर्द्रभूमियां हैं, पर कोई रामसर स्थल नहीं। याद रखने योग्य जोड़ा है कांवर ताल, बेगूसराय और वर्ष 2020।
1954 के भारत-नेपाल कोसी समझौते के अंतर्गत बना कोसी बैराज कहां स्थित है?
- A.वाल्मीकिनगर
- B.भीमनगर
- C.डेहरी-ऑन-सोन
- D.फरक्का
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, भीमनगर है। 1954 के भारत-नेपाल समझौते के बाद बनी कोसी परियोजना के तीन भाग हैं: सीमा पर भीमनगर में बैराज, नीचे की ओर नदी के दोनों तटों पर लंबे तटबंध, और नहरें, जिनमें पूर्वी कोसी मुख्य नहर सबसे बड़ी है। बैराज नहरों को जल देता है और बाढ़ के प्रवाह को नियंत्रित करने की सुविधा भी देता है।
विकल्प A, वाल्मीकिनगर, जिसे भैंसालोटन भी कहते हैं, पश्चिम चंपारण में गंडक का बैराज है, कोसी का नहीं, और मिलान वाले प्रश्नों में यही शास्त्रीय जोड़ा बनता है। विकल्प C, रोहतास जिले का डेहरी-ऑन-सोन, सोन पर इंद्रपुरी बैराज का स्थान है, जो पुरानी सोन नहर प्रणाली को जल देता है। विकल्प D, फरक्का, पश्चिम बंगाल में गंगा पर है, जो हुगली से गाद बहाने और कोलकाता बंदरगाह को नौगम्य रखने के लिए बना और बिहार से बाहर है। तीनों जोड़े साथ याद करें: कोसी पर भीमनगर, गंडक पर वाल्मीकिनगर और सोन पर इंद्रपुरी।
कौन नदी उत्तर प्रदेश से लगी बिहार की पश्चिमी सीमा के साथ बहती है और बक्सर जिले के चौसा के पास गंगा में मिलती है?
- A.कर्मनाशा
- B.पुनपुन
- C.सोन
- D.बूढ़ी गंडक
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, कर्मनाशा है। कर्मनाशा कैमूर पठार से निकलती है, बिहार और उत्तर प्रदेश की सीमा के एक भाग के साथ उत्तर की ओर बहती है और बक्सर जिले के चौसा के पास गंगा में मिल जाती है, उसी स्थान के निकट जहां गंगा बिहार में प्रवेश करती है। लोकमान्यता में इस नदी को अशुभ माना जाता है, और इसी से इसका नाम पड़ा; प्रश्न अक्सर इसी कथा पर टिका होता है।
विकल्प B, पुनपुन, दक्षिणी नदी है जो पटना से काफी पूर्व फतुहा के पास गंगा में मिलती है और राज्य की सीमा को छूती ही नहीं। विकल्प C, सोन, भी दक्षिण-पश्चिम से आती है, पर वह मनेर के पास गंगा से मिलती है और सीमा के साथ नहीं, राज्य के भीतर बहती है। विकल्प D, बूढ़ी गंडक, उत्तरी तट की नदी है जो पश्चिम चंपारण की सोमेश्वर पहाड़ियों से निकलकर खगड़िया के पास गंगा में मिलती है, अर्थात राज्य के दूसरे छोर पर। पश्चिमी सीमा से जुड़ी दूसरी नदी घाघरा है, पर उसका संगम सारण के डोरीगंज में है।
अगस्त 2008 की विनाशकारी कोसी बाढ़ नदी के पूर्वी तटबंध के किस स्थान पर टूटने से आई थी?
- A.कुसहा, नेपाल
- B.बीरपुर, सुपौल
- C.भीमनगर बैराज
- D.कुरसेला, कटिहार
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, नेपाल का कुसहा है। अगस्त 2008 में कोसी का पूर्वी तटबंध भीमनगर बैराज से ऊपर, नेपाल की सीमा के भीतर कुसहा में टूट गया। नदी अपने बंधे मार्ग से निकलकर पूर्व की एक पुरानी छोड़ी हुई धारा में मुड़ गई और सुपौल, मधेपुरा, अररिया तथा सहरसा जिलों पर फैल गई, जिससे लाखों लोग विस्थापित हुए। इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित किया गया और यह आज भी इसका मानक उदाहरण है कि सौ वर्ष के तटबंध निर्माण के बाद भी कोसी की धारा बदलने की प्रवृत्ति क्या कर सकती है।
विकल्प B, सुपौल जिले का बीरपुर, भारतीय पक्ष में कोसी परियोजना के कार्यालयों का केंद्र है, तटबंध भंग का स्थल नहीं। विकल्प C, भीमनगर बैराज स्वयं टिका रहा; विफलता उससे ऊपर के मिट्टी के तटबंध में हुई, और प्रश्न यही बिंदु जांच रहा है। विकल्प D, कटिहार का कुरसेला, कोसी और गंगा का संगम है, जो भंग स्थल से बहुत नीचे है। वर्ष 2008 को स्थान कुसहा के साथ याद रखें।
विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन अभयारण्य बिहार के किस जिले में गंगा पर स्थित है?
- A.भागलपुर
- B.पटना
- C.मुंगेर
- D.कटिहार
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, भागलपुर है। यह अभयारण्य 1991 में भागलपुर जिले में सुल्तानगंज से कहलगांव तक गंगा के लगभग साठ किलोमीटर खंड में अधिसूचित किया गया। गांगेय डॉल्फिन, जो भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव है, के लिए विशेष रूप से बनाया गया यह देश का एकमात्र संरक्षित क्षेत्र है, और इसका नाम पास ही अंतीचक में स्थित प्राचीन विक्रमशिला विश्वविद्यालय से लिया गया है।
विकल्प B, पटना, गंगा के तट पर है और उससे जुड़ा डॉल्फिन शोध केंद्र भी है, पर अभयारण्य वहां नहीं है। विकल्प C, मुंगेर, अभयारण्य के खंड से ठीक ऊपर की ओर है और इसी कारण उत्तर जैसा दिखता है। विकल्प D, कटिहार, नीचे की ओर कोसी संगम पर है। परीक्षा में दो तथ्य साथ चलते हैं: गांगेय डॉल्फिन को 2009 में राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया और उसका एकमात्र अभयारण्य बिहार का विक्रमशिला है।
बिहार में उत्तरी मैदान के उथले, तश्तरीनुमा जलमग्न गड्ढे, जिनमें मखाना उगाया जाता है, क्या कहलाते हैं?
- A.दियारा
- B.चौर
- C.ताल
- D.मौन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, चौर है। चौर समतल उत्तर बिहार के मैदान का उथला, तश्तरीनुमा बेसिन है, जो वर्ष के बड़े भाग में जल रोके रखता है, क्योंकि भूमि का ढाल लगभग नहीं है और नदियों ने अपनी तलहटी ऊंची कर ली है। दरभंगा, मधुबनी और कटिहार के चौर मखाना की खेती का केंद्र हैं, और देश का अधिकांश मखाना बिहार में होता है; मिथिला मखाना को जीआई टैग प्राप्त है।
विकल्प A, दियारा, गंगा की धाराओं के बीच की बलुई नदी-भूमि है, जहां बाढ़ उतरने पर तरबूज, खीरा और सब्जियां बोई जाती हैं। विकल्प C, ताल, दक्षिण बिहार की भारी चिकनी मिट्टी की पट्टी है, जैसे पटना और नालंदा जिलों का मोकामा ताल, जहां पानी उतरने पर रबी की दालें होती हैं। विकल्प D, मौन, गोखुर झील है, अर्थात धारा बदल चुकी नदी का कटा हुआ लूप, जैसे बेगूसराय का कांवर ताल। वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में चारों शब्द साथ आते हैं, इसलिए प्रत्येक को अलग से याद करना आवश्यक है।
पितृपक्ष के तर्पण से जुड़ी फल्गु नदी बिहार के किस शहर के पास बहती है?
- A.गया
- B.राजगीर
- C.सासाराम
- D.बोधगया
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, गया है। फल्गु नदी गया से कुछ ऊपर लीलाजन और मोहाना के मिलने से बनती है और शहर के पास चौड़े पाट के साथ बहती है, जो वर्ष के अधिकांश समय बालू भरा और सूखा रहता है। पितृपक्ष में श्रद्धालु गया में इसी तट पर अपने पूर्वजों का तर्पण करते हैं, और इसीलिए यह नदी बिहार के प्रश्नपत्रों में भूगोल जितनी ही संस्कृति के प्रश्न के रूप में भी आती है।
विकल्प B, नालंदा जिले का राजगीर, अपने गर्म जल स्रोतों और मगध की पुरानी राजधानी को घेरने वाली पहाड़ियों के लिए जाना जाता है, फल्गु के लिए नहीं। विकल्प C, रोहतास जिले का सासाराम, सोन बेसिन में है और शेरशाह सूरी के मकबरे के लिए प्रसिद्ध है। विकल्प D, बोधगया, गया के निकट और उसी नदी तंत्र पर है, पर प्रश्नपत्र जिस नगर का नाम लेते हैं वह गया ही है। फल्गु दक्षिणी नदियों के मौसमी स्वभाव का भी अच्छा उदाहरण है।
सप्त कोसी का निर्माण सुन कोसी, अरुण और किस तीसरी प्रमुख धारा के मिलने से होता है?
- A.तमुर
- B.बागमती
- C.कमला बलान
- D.महानंदा
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, तमुर है। कोसी को सप्त कोसी कहा जाता है क्योंकि नेपाल हिमालय में सात शीर्ष धाराएं मिलकर इसे बनाती हैं, और इनमें तीन प्रमुख हैं: पश्चिम से सुन कोसी, उत्तर से अरुण और पूर्व से तमुर। ये नेपाल में बराहक्षेत्र के ऊपर मिलती हैं, जहां एक ऊंचा बांध बहुत समय से प्रस्तावित है पर कभी बना नहीं, और संयुक्त नदी इसके बाद भीमनगर के पास बिहार में प्रवेश करती है।
विकल्प B, बागमती, काठमांडू घाटी के पास शिवपुरी पहाड़ियों से निकलती है और अलग नदी है, जो बाद में बिहार के भीतर खगड़िया जिले में कोसी से मिलती है। विकल्प C, कमला बलान, महाभारत श्रेणी से आती है और वह भी बिहार के भीतर कोसी में मिलती है, अतः वह कोसी की सहायक है, सप्त कोसी की शीर्ष धारा नहीं। विकल्प D, महानंदा, दार्जिलिंग की पहाड़ियों से निकलती है, किशनगंज तथा कटिहार से बहती है और पूरी तरह दूसरे बेसिन की नदी है, जो बिहार से निकलने के बाद ही गंगा तक पहुंचती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
किस नदी को बिहार का शोक कहा जाता है और क्यों?
कोसी को। यह नेपाल से बहुत भारी गाद लाती है, समतल मैदान में गिरा देती है, अपनी तलहटी ऊंची कर लेती है और फिर धारा बदल लेती है, जिससे हर बार नया क्षेत्र बाढ़ में आ जाता है। लगभग दो सौ वर्षों में यह करीब 112 किलोमीटर पश्चिम खिसक गई।
गंगा बिहार में कहां प्रवेश करती है और कहां से निकलती है?
वह बक्सर जिले के चौसा के पास प्रवेश करती है और राजमहल के निकट पश्चिम बंगाल में चली जाती है। इस बीच वह पश्चिम से पूर्व लगभग 445 किलोमीटर बहती है और राज्य को उत्तर बिहार तथा दक्षिण बिहार के मैदानों में बांटती है।
बिहार का पहला रामसर स्थल कौन है?
बेगूसराय जिले का कांवर ताल (कांवर झील), जो 2020 में सूचीबद्ध हुआ। यह बूढ़ी गंडक की गोखुर झील है और इसे अक्सर एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की गोखुर झील कहा जाता है।
बिहार में चौर क्या है?
चौर उत्तर बिहार के मैदान का उथला, तश्तरीनुमा गड्ढा है जो वर्ष के बड़े भाग में जलमग्न रहता है। दरभंगा, मधुबनी और कटिहार के चौर राज्य के मुख्य मखाना उत्पादक क्षेत्र हैं।
बिहार की कौन-कौन नदियां नेपाल से आती हैं?
घाघरा, गंडक, बागमती, कमला बलान और कोसी नेपाल में या उससे आगे हिमालय में जन्म लेती हैं, तथा बूढ़ी गंडक पश्चिम चंपारण की शिवालिक पट्टी की सोमेश्वर पहाड़ियों से निकलती है।
स्रोत
- भारत: भौतिक पर्यावरण (कक्षा 11), अध्याय 3: अपवाह तंत्र — एनसीईआरटी
- बिहार की नदी प्रणाली और बाढ़ प्रबंधन — जल संसाधन विभाग, बिहार सरकार
- रामसर साइट्स इनफॉर्मेशन सर्विस: नागी पक्षी अभयारण्य, बिहार — रामसर अभिसमय सचिवालय

