बिहार का लोक संगीत, नृत्य और नाट्य: विधाएँ और क्षेत्र
बीपीएससी और एसएससी परीक्षाओं के लिए बिहार के लोक संगीत, नृत्य और नाट्य के नोट्स: अवसर के गीत, क्षेत्रवार नृत्य, बिदेसिया, कीर्तनिया तथा घराने।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

बिहार में उत्तर भारत की सबसे समृद्ध लोक प्रदर्शन परंपराओं में से एक सुरक्षित है, क्योंकि राज्य के भीतर तीन भाषा क्षेत्र मिलते हैं: पश्चिम में भोजपुरी, दक्षिण में मगही और उत्तर-पूर्व में मैथिली तथा अंगिका। गाँव के जीवन के हर पड़ाव का अपना गीत है, बच्चे के जन्म से लेकर धान की रोपनी और छठ के व्रत तक, और इन्हीं क्षेत्रों ने रंगमंच को भिखारी ठाकुर का बिदेसिया तथा मिथिला के कीर्तनिया नाटक दिए। परीक्षा की दृष्टि से इस अध्याय को चार सूचियों के रूप में याद करना चाहिए: अवसर के अनुसार गीत, क्षेत्र के अनुसार नृत्य, रचनाकारों के साथ नाट्य विधाएँ, और राज्य के शास्त्रीय घराने तथा वादक।
ऋतु और संस्कार के अनुसार लोकगीत
बिहार का लोकगीत पंचांग और परिवार से जुड़ा है और प्राय: स्त्रियाँ इसे समूह में, बिना लिखित स्वरलिपि के गाती हैं। आज सर्वाधिक प्रसिद्ध छठ गीत हैं, जो कार्तिक में नदी घाटों पर सूर्य और छठी मैया के लिए गाए जाते हैं; बिहार कोकिला कही जाने वाली शारदा सिन्हा इन गीतों तथा विवाह और सोहर गीतों की पहचान बनी हुई हैं।
| गीत विधा | अवसर या विषय |
|---|---|
| सोहर | संतान के जन्म पर |
| लगन और विवाह गीत | विवाह के संस्कार |
| जतसर | जाँता अर्थात हाथ की चक्की पीसते समय स्त्रियों के गीत |
| रोपनी और सोहनी गीत | धान की रोपाई और निराई |
| कजरी और बारहमासा | वर्षा ऋतु तथा बारह महीनों का विरह |
| छठ गीत | कार्तिक मास का छठ व्रत |
| पचरा या देवी गीत | देवी की आराधना |
| निर्गुण | मृत्यु और निराकार ईश्वर पर, कबीर परंपरा के गीत |
| फगुआ और जोगीरा | होली; जोगीरा प्रश्नोत्तर शैली में |
| सामा-चकेवा गीत | कार्तिक में मिथिला का भाई-बहन का पर्व |
इस क्षेत्र में लंबी गाथाएँ भी सुरक्षित हैं: भोजपुरी में अहीर नायक लोरिक पर लोरिकायन, कोशी तथा मिथिला क्षेत्र में सलहेस और दीना-भद्री, और मगही पट्टी में रेशमा-चुहरमल। विरह पर आधारित उपशास्त्रीय लोकगायन शैली पूर्वी के रचनाकार सारण के मिसरौलिया के महेंदर मिसिर हैं, जिन्हें पूर्वी सम्राट कहा जाता है।
लोक नृत्य और उनके क्षेत्र
| नृत्य | क्षेत्र | अवसर और स्वरूप |
|---|---|---|
| जट-जटिन | मिथिला और कोशी, उत्तर बिहार | वर्षा में युगल द्वारा, कलह, अकाल और पलायन के विषय पर |
| झिझिया | मिथिला | नवरात्र में स्त्रियाँ छिद्रों वाले घड़े में दीप रखकर नृत्य करती हैं, टोना-टोटका दूर करने के लिए |
| डोमकच | मगध और मिथिला | बारात के साथ पुरुषों के जाने पर वर पक्ष की स्त्रियों का नृत्य |
| झुमरी | पूरे राज्य में | स्त्रियों का वृत्ताकार नृत्य, अवकाश और उत्सव पर |
| लौंडा नाच | भोजपुरी क्षेत्र | नाच मंडलियों में पुरुष स्त्री वेश में नृत्य करते हैं, जैसे भिखारी ठाकुर की मंडली में |
| कठघोड़वा नाच | भोजपुरी क्षेत्र | कमर में लकड़ी के घोड़े का ढाँचा बाँधकर किया जाने वाला नृत्य |
| नटुआ नाच | मगध और अंग | पुरुषों का कलाबाज़ी और संतुलन वाला नृत्य |
| झरनी | मुस्लिम गाँव | मुहर्रम के अवसर पर लाठी के साथ |
| करमा और पाइका | दक्षिणी जनजातीय क्षेत्र और जमुई पट्टी | करमा करम पर्व पर; पाइका तलवार-ढाल के साथ युद्ध नृत्य |
लोक रंगमंच और भिखारी ठाकुर
सारण जिले के कुतुबपुर दियारा में 1887 में जन्मे भिखारी ठाकुर भोजपुरी रंगमंच के केंद्रीय व्यक्तित्व हैं और उन्हें भोजपुरी का शेक्सपियर कहा जाता है। उनके नाटक बिदेसिया में उस स्त्री की पीड़ा है जिसका पति रोज़गार के लिए कलकत्ता चला जाता है, और आगे चलकर बिदेसिया नाम उनकी पूरी नाच शैली के लिए प्रयुक्त हुआ, जिसके अपने गीत, लौंडा नर्तक और सामाजिक संदेश थे। बेटी-बेचवा, जो बेटियों के विक्रय के विरुद्ध है, गबरघिचोर, भाई-विरोध तथा विधवा विलाप उनकी अन्य रचनाएँ हैं। मिथिला की प्राचीन परंपरा कीर्तनिया रंगमंच है, जो मैथिली कवि विद्यापति के पदों से विकसित हुई और बिदापत नाच के रूप में भी खेली जाती है; भकुली-बंका तथा दीना-भद्री इसी क्षेत्र में मंचित होते हैं। मगही क्षेत्र में रेशमा-चुहरमल खेला जाता है, जो दुसाध समाज के आराध्य नायक चुहरमल की गाथा का नाट्य रूप है, जबकि भोजपुरी जिलों में नौटंकी और रामलीला होती है। पटना में आधुनिक रंगमंच है: नाटकों के लिए कालिदास रंगालय तथा प्रेमचंद रंगशाला और संगीत-नृत्य के प्रशिक्षण के लिए भारतीय नृत्य कला मंदिर।
शास्त्रीय परंपरा और वाद्य
बिहार केवल लोक विधाओं की भूमि नहीं है। दरभंगा और बेतिया, दोनों के पास ध्रुपद का अपना घराना है, जो हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन की सबसे प्राचीन बची हुई शैली है; दरभंगा की परंपरा को मल्लिक परिवार ने, पंडित राम चतुर मल्लिक और पंडित सियाराम तिवारी जैसे गायकों के माध्यम से जीवित रखा, और गया अपनी टप्पा तथा ठुमरी के लिए जाना जाता है। सबसे बड़ा नाम उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ का है, जिनका जन्म 1916 में बक्सर जिले के डुमराँव में हुआ; उन्होंने शहनाई को एकल मंचीय वाद्य बनाया, 15 अगस्त 1947 को लाल किले पर वादन किया और 2001 में उन्हें भारत रत्न दिया गया। लोक प्रदर्शन के वाद्यों में ताल के लिए ढोलक और नगाड़ा, कीर्तन में मृदंग और झाल, तथा स्वर के लिए बाँसुरी, सारंगी और शहनाई प्रमुख हैं।
विद्यार्थी क्या अवश्य याद रखे
चार जोड़ियाँ बार-बार पूछी जाती हैं: बिदेसिया के साथ भिखारी ठाकुर, पूर्वी के साथ महेंदर मिसिर, कीर्तनिया के साथ विद्यापति और शहनाई के साथ डुमराँव के बिस्मिल्लाह खाँ। इनके साथ प्रत्येक नृत्य का क्षेत्र भी याद रखें, क्योंकि प्रश्नपत्र झिझिया या जट-जटिन देकर पूछता है कि यह मिथिला, मगध या भोजपुरी क्षेत्र का है; और प्रत्येक गीत का अवसर भी, क्योंकि सोहर, जतसर तथा सामा-चकेवा में अंतर केवल गाने के अवसर का है।
परीक्षा की दृष्टि से
बीपीएससी, बीएसएससी, बिहार पुलिस और एसएससी के प्रश्नपत्र इस अध्याय से चार प्रकार के प्रश्न बनाते हैं। पहला, विधा और उसका रचनाकार: बिदेसिया के साथ भिखारी ठाकुर, पूर्वी के साथ महेंदर मिसिर, कीर्तनिया के साथ विद्यापति। दूसरा, नृत्य और उसका क्षेत्र या अवसर, जिसमें झिझिया तथा जट-जटिन मिथिला के, डोमकच विवाह घर का और झरनी मुहर्रम का है। तीसरा, गीत और उसका अवसर, इसलिए सोहर, जतसर, रोपनी, छठ गीत और सामा-चकेवा में अंतर स्पष्ट रखें। चौथा, शास्त्रीय पक्ष: दरभंगा तथा बेतिया के ध्रुपद घराने और डुमराँव के बिस्मिल्लाह खाँ, 2001 का भारत रत्न। कथन आधारित प्रश्न बिहार के नृत्यों की सूची में पाइका या छऊ जैसी झारखंड की विधा मिला देते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| जन्म का गीत | सोहर |
|---|---|
| चक्की का गीत | जतसर, जाँता पीसते समय स्त्रियों द्वारा |
| धान के गीत | रोपाई पर रोपनी, निराई पर सोहनी |
| छठ गीत | कार्तिक में; बिहार कोकिला शारदा सिन्हा |
| पूर्वी | सारण के मिसरौलिया के महेंदर मिसिर; पूर्वी सम्राट |
| बिदेसिया | सारण के कुतुबपुर दियारा के भिखारी ठाकुर, जन्म 1887 |
| भिखारी ठाकुर के अन्य नाटक | बेटी-बेचवा, गबरघिचोर, भाई-विरोध, विधवा विलाप |
| जट-जटिन | मिथिला और कोशी; अकाल तथा पलायन पर युगल नृत्य |
| झिझिया | मिथिला; नवरात्र; छिद्रों वाले घड़े में दीप |
| डोमकच | विवाह में वर पक्ष की स्त्रियों का नृत्य |
| नटुआ नाच | मगध तथा अंग क्षेत्र का कलाबाज़ी वाला पुरुष नृत्य |
| झरनी | मुहर्रम पर लाठी के साथ |
| कीर्तनिया रंगमंच | मिथिला; विद्यापति के पदों से; बिदापत नाच भी |
| रेशमा-चुहरमल | नायक चुहरमल पर मगही लोक नाटक |
| लोक गाथाएँ | भोजपुरी में लोरिकायन; मिथिला में सलहेस और दीना-भद्री |
| ध्रुपद घराने | दरभंगा और बेतिया |
| बिस्मिल्लाह खाँ | शहनाई; जन्म डुमराँव, बक्सर, 1916; भारत रत्न 2001 |
| पटना के रंगमंच | कालिदास रंगालय, प्रेमचंद रंगशाला, भारतीय नृत्य कला मंदिर |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
भोजपुरी का शेक्सपियर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर किस लोक नाट्य विधा के रचनाकार के रूप में प्रसिद्ध हैं?
- A.कीर्तनिया
- B.बिदेसिया
- C.नौटंकी
- D.रेशमा-चुहरमल
उत्तर देखें
सारण जिले के कुतुबपुर दियारा में 1887 में जन्मे भिखारी ठाकुर ने बिदेसिया नाटक लिखा, जिसमें उस स्त्री की व्यथा है जिसका पति रोज़गार के लिए कलकत्ता चला जाता है; आगे यही नाम उनकी पूरी भोजपुरी नाच शैली के लिए प्रयुक्त हुआ, जिसमें अपने गीत और लौंडा नर्तक होते थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →झिझिया नृत्य, जिसमें स्त्रियाँ छिद्रों वाले घड़े में दीप रखकर उसे सिर पर संभालती हैं, बिहार के किस क्षेत्र का है?
- A.मिथिला
- B.मगध
- C.शाहाबाद
- D.छोटानागपुर
उत्तर देखें
झिझिया मिथिला क्षेत्र की स्त्रियाँ नवरात्र में करती हैं; प्रत्येक स्त्री सिर पर अनेक छिद्रों वाला मिट्टी का घड़ा रखती है जिसमें जलता दीप होता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उत्तर बिहार का कौन सा लोक नृत्य युगल द्वारा वर्षा ऋतु में कलह, अकाल और पलायन के विषय पर किया जाता है?
- A.डोमकच
- B.जट-जटिन
- C.झुमरी
- D.झरनी
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जट-जटिन उत्तर बिहार के मिथिला तथा कोशी क्षेत्र में किया जाता है, प्राय: एक युगल द्वारा, जिसमें एक पति जट और दूसरी पत्नी जटिन बनती है; गीत उनके कलह, वर्षा के न होने और रोज़गार की खोज में पति के गाँव छोड़ने तक पहुँचता है, इसलिए यह उत्तर बिहार से…
पूरी व्याख्या पढ़ें →शहनाई को एकल मंचीय वाद्य बनाने वाले उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ का जन्म बिहार के किस स्थान पर हुआ था?
- A.बक्सर का डुमराँव
- B.पश्चिम चंपारण का बेतिया
- C.सारण का मिसरौलिया
- D.सारण का कुतुबपुर
उत्तर देखें
बिस्मिल्लाह खाँ का जन्म 1916 में वर्तमान बक्सर जिले के डुमराँव में शहनाई वादकों के परिवार में हुआ और आगे वे वाराणसी में बस गए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →ध्रुपद गायन का कौन सा घराना बिहार का है?
- A.ग्वालियर
- B.किराना
- C.दरभंगा
- D.जयपुर-अतरौली
उत्तर देखें
दरभंगा राज के आश्रय में मल्लिक परिवार द्वारा संभाला गया दरभंगा घराना ध्रुपद के बचे हुए घरानों में एक है, और ध्रुपद हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन की सबसे प्राचीन शैली है; पंडित राम चतुर मल्लिक तथा पंडित सियाराम तिवारी इसी घराने के हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भोजपुरी क्षेत्र की पूर्वी गायन शैली किस रचनाकार से जुड़ी है?
- A.महेंदर मिसिर
- B.विद्यापति
- C.भिखारी ठाकुर
- D.सियाराम तिवारी
उत्तर देखें
सारण जिले के मिसरौलिया गाँव के महेंदर मिसिर ने पूर्वी की रचना और गायन किया, जो उस पत्नी के विरह पर आधारित उपशास्त्रीय लोक शैली है जिसका पति परदेस चला गया हो; उन्हें पूर्वी सम्राट कहा जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मिथिला के सामा-चकेवा गीत और मूर्तियाँ किस संबंध तथा ऋतु से जुड़ी हैं?
- A.पति-पत्नी, वर्षा ऋतु में
- B.बहन-भाई, कार्तिक में
- C.माता-पुत्र, होली पर
- D.किसान और खेत, बुवाई पर
उत्तर देखें
सामा-चकेवा मिथिला का वह पर्व है जिसमें लड़कियाँ सामा और चकेवा पक्षियों की मिट्टी की मूर्तियाँ बनाती हैं, कार्तिक की रातों में अपने भाइयों की दीर्घायु के लिए गीत गाती हैं और अंत में इन मूर्तियों को विदा करती हैं; ये गीत मैथिली लोक संगीत के सर्वाधिक प्रसिद्ध गीतों में…
पूरी व्याख्या पढ़ें →मिथिला का कीर्तनिया रंगमंच किस कवि के पदों से विकसित हुआ?
- A.कबीर
- B.विद्यापति
- C.जायसी
- D.सूरदास
उत्तर देखें
चौदहवीं-पंद्रहवीं शताब्दी के मैथिली कवि विद्यापति, जिन्हें मैथिल कवि कोकिल कहा गया, ने राधा-कृष्ण पर पद लिखे जो मंच पर गाए जाते थे, और इसी गायन से मिथिला के कीर्तनिया नाटक विकसित हुए, जो बिदापत नाच के रूप में भी खेले जाते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बिहार का कौन सा नृत्य बारात के साथ पुरुषों के चले जाने पर वर पक्ष की स्त्रियाँ करती हैं?
- A.झिझिया
- B.डोमकच
- C.कठघोड़वा नाच
- D.करमा
उत्तर देखें
डोमकच घर की स्त्रियों का विवाह नृत्य है: पुरुष बारात के साथ चले जाते हैं, तब वर पक्ष की स्त्रियाँ रातभर आँगन में गाती-नाचती हैं और हास्य अनुकरण में पुरुषों की भूमिकाएँ भी स्वयं निभाती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बिहार कोकिला कही जाने वाली कौन सी गायिका सबसे अधिक छठ गीतों के लिए जानी जाती हैं?
- A.शारदा सिन्हा
- B.शांति जैन
- C.विंध्यवासिनी देवी
- D.कुमार गंधर्व
उत्तर देखें
बिहार कोकिला कही जाने वाली शारदा सिन्हा ने बिहार के छठ गीतों को नदी घाटों से निकालकर उन रिकॉर्डिंग तक पहुँचाया जो पूरे देश में सुनी गईं, और उन्होंने मैथिली तथा भोजपुरी के विवाह, सोहर और सामा-चकेवा गीत भी गाए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →नायक चुहरमल की गाथा पर आधारित लोक नाटक रेशमा-चुहरमल बिहार के किस भाषा क्षेत्र का है?
- A.मैथिली
- B.मगही
- C.अंगिका
- D.बज्जिका
उत्तर देखें
रेशमा-चुहरमल गंगा के दक्षिण के मगही भाषी क्षेत्र में, पटना, नालंदा और मोकामा के आसपास गाया और मंचित किया जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बिहार के प्रमुख लोक नृत्य कौन से हैं?
मिथिला के जट-जटिन और झिझिया, विवाह घर का डोमकच, झुमरी, भोजपुरी क्षेत्र के लौंडा नाच तथा कठघोड़वा नाच, मगध-अंग का नटुआ नाच, मुहर्रम की झरनी, और जनजातीय क्षेत्रों में करमा तथा पाइका।
भिखारी ठाकुर कौन थे?
भोजपुरी के कवि, गायक और नाटककार, जिनका जन्म 1887 में सारण जिले के कुतुबपुर दियारा में हुआ। उन्होंने बिदेसिया लोक नाट्य शैली बनाई और बेटी-बेचवा, गबरघिचोर तथा भाई-विरोध लिखे; उन्हें भोजपुरी का शेक्सपियर कहा जाता है।
बिदेसिया विधा क्या है?
भिखारी ठाकुर द्वारा पलायन की पीड़ा पर रची गई भोजपुरी नृत्य नाटिका, जिसमें पति रोज़गार के लिए कलकत्ता चला जाता है और पत्नी पीछे रह जाती है। इसमें अपने गीत, समूह गान और स्त्री भूमिकाओं में पुरुष नर्तक होते हैं।
छठ पर कौन से लोकगीत गाए जाते हैं?
छठ गीत, जो कार्तिक में नदी घाटों पर सूर्य और छठी मैया के लिए गाए जाते हैं। ये बिहार के सर्वाधिक प्रसिद्ध लोकगीत हैं और सबसे अधिक गायिका शारदा सिन्हा से जुड़े हैं।
बिहार के ध्रुपद घराने कौन से हैं?
दरभंगा घराना, जिसे दरभंगा राज के आश्रय में मल्लिक परिवार ने संभाला, और पश्चिम चंपारण का बेतिया घराना। गया अलग से टप्पा और ठुमरी गायन के लिए जाना जाता है।
उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ का जन्म कहाँ हुआ था?
बिहार के वर्तमान बक्सर जिले के डुमराँव में, वर्ष 1916 में। उन्होंने शहनाई को एकल मंचीय वाद्य बनाया, 15 अगस्त 1947 को लाल किले पर वादन किया और 2001 में उन्हें भारत रत्न मिला।
स्रोत
- भारत की लोक संगीत, नृत्य और नाट्य परंपराएँ — संगीत नाटक अकादमी
- बिहार की लोक कलाएँ, मेले और सांस्कृतिक संस्थाएँ — बिहार सरकार
- भारत की नृत्य, संगीत और नाट्य विधाएँ — संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार





