बिहार की सिंचाई और बिजली परियोजनाएं: नहरें और बांध
बिहार सिंचाई एवं विद्युत नोट्स: सोन, गंडक और कोसी नहर प्रणालियां, इंद्रपुरी तथा भीमनगर बैराज, जलाशय, लिफ्ट योजनाएं और प्रमुख ताप विद्युत केंद्र।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

बिहार एक साथ दो जल समस्याओं का राज्य है। गंगा के उत्तर में हिमालयी नदियां कोसी, गंडक, बागमती, बूढ़ी गंडक और कमला इतना जल लाती हैं कि मैदान संभाल नहीं पाता और लगभग हर वर्ष बाढ़ आती है। गंगा के दक्षिण में नदियां छोटानागपुर के किनारे से निकलती हैं, मानसून के बाद सूख जाती हैं और गया, नवादा तथा जमुई को प्यासा छोड़ देती हैं। इसलिए राज्य की सिंचाई नीति का अर्थ रहा है उत्तर में बैराज और नहरें, ताकि बाढ़ का जल काम आए, तथा दक्षिण में जलाशय और नहरें, ताकि जो थोड़ा जल है वह संचित हो। बिजली का इतिहास अलग है: सन 2000 के विभाजन में कोयला क्षेत्र और बड़े केंद्र झारखंड में चले गए और बिहार को फिर से निर्माण करना पड़ा।
सोन नहर प्रणाली
सोन प्रणाली राज्य का सबसे पुराना और सबसे बड़ा नहर तंत्र है। औपनिवेशिक काल में रोहतास जिले के डेहरी में सोन पर एनीकट बनाया गया था और 1968 में उसी स्थान पर इंद्रपुरी बैराज ने उसका स्थान ले लिया। बैराज से पूर्वी सोन नहर औरंगाबाद, अरवल, जहानाबाद, गया और पटना को तथा पश्चिमी सोन नहर रोहतास, भोजपुर और बक्सर को सींचती है। इन्हीं नहरों ने सोन मैदान को दक्षिण बिहार का धान का कटोरा बनाया। इसी नदी पर मध्य प्रदेश में बाणसागर बांध है, जिसका जल मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच समझौते से बंटता है।
गंडक और कोसी परियोजनाएं
उत्तर की दोनों बड़ी परियोजनाएं नेपाल के साथ बनीं। गंडक परियोजना का आधार पश्चिमी चंपारण के वाल्मीकि नगर में बना बैराज है। इसकी मुख्य पश्चिमी नहर यानी सारण नहर सारण, सीवान और गोपालगंज को सींचती है और पूर्वी उत्तर प्रदेश तक जल ले जाती है, जबकि मुख्य पूर्वी नहर यानी तिरहुत नहर चंपारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और समस्तीपुर को सींचती है। वाल्मीकि नगर में बैराज की ढलान से एक छोटा जल विद्युत केंद्र भी चलता है।
कोसी परियोजना 1954 के नेपाल समझौते के बाद उस नदी को बांधने के लिए ली गई जिसे लंबे समय से बिहार का शोक कहा जाता था और जो मैदान में पश्चिम की ओर अपनी धारा बदलती रहती थी। कोसी बैराज सीमा पर सुपौल जिले के भीमनगर में है। लंबे तटबंध नदी को रोकते हैं, पूर्वी कोसी मुख्य नहर सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया, अररिया और कटिहार को सींचती है तथा पश्चिमी कोसी नहर मधुबनी और दरभंगा को। सीमा पार बना कटैया जल विद्युत केंद्र इसी समझौते के अंतर्गत बिजली देता है।
जलाशय, लिफ्ट योजनाएं और नलकूप
| परियोजना | नदी | लाभान्वित जिले |
|---|---|---|
| इंद्रपुरी बैराज और सोन नहरें | सोन | रोहतास, भोजपुर, औरंगाबाद, गया, पटना |
| गंडक परियोजना | गंडक | चंपारण, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली |
| कोसी परियोजना | कोसी | सुपौल, सहरसा, पूर्णिया, मधुबनी |
| दुर्गावती जलाशय | दुर्गावती | कैमूर और रोहतास |
| चानन और बदुआ जलाशय | चानन, बदुआ | बांका और भागलपुर |
| उत्तर कोयल जलाशय, झारखंड के साथ साझा | उत्तर कोयल | औरंगाबाद और गया |
| बटेश्वर स्थान गंगा पंप नहर | गंगा | भागलपुर |
नहरों के साथ-साथ मैदान में नलकूप तेजी से फैले हैं क्योंकि जलस्तर उथला है, और अब वे सिंचित भूमि का बड़ा भाग सींचते हैं, विशेषकर वहां जहां नहर का अंतिम छोर सूखा रह जाता है। जहां गुरुत्व से जल नहीं पहुंचता वहां लिफ्ट योजनाएं गंगा का जल उठाती हैं, जिनमें कहलगांव की बटेश्वर स्थान योजना सबसे प्रसिद्ध है।
बिहार के विद्युत केंद्र
बिहार अपनी अधिकांश बिजली झारखंड और बंगाल की खदानों से आए कोयले से बनाता है। सबसे पुराना बड़ा केंद्र बेगूसराय का बरौनी ताप विद्युत केंद्र है। एनटीपीसी भागलपुर में कहलगांव सुपर ताप केंद्र, पटना जिले में बाढ़ सुपर ताप केंद्र, कांटी बिजली उत्पादन निगम के माध्यम से मुजफ्फरपुर केंद्र और औरंगाबाद जिले में नबीनगर के केंद्र चलाता है। नबीनगर का एक संयंत्र भारतीय रेल बिजली कंपनी का है, जो एनटीपीसी और भारतीय रेल का संयुक्त उपक्रम है और रेल तंत्र को बिजली देने के लिए बना। बक्सर जिले के चौसा में नया ताप संयंत्र बन रहा है।
जल विद्युत कम है क्योंकि मैदान में ढलान नहीं है। गंडक पर वाल्मीकि नगर, कोसी नहर प्रणाली पर कटैया और डेहरी के पास सोन नहरों की ढलानें ही इसका अधिकांश भाग हैं, और राज्य में कोई परमाणु केंद्र नहीं है। सौर पार्क और जलाशयों पर तैरते सौर पैनल नवीनतम जोड़ हैं। संस्थागत स्तर पर पुराना विद्युत बोर्ड 2012 में तोड़कर एक होल्डिंग कंपनी तथा अलग-अलग उत्पादन, पारेषण और वितरण कंपनियां बनाई गईं, और सात निश्चय योजना के अंतर्गत हर घर बिजली कार्यक्रम ने घर-घर तक कनेक्शन पहुंचाए।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्न तीन रूपों में आते हैं। पहला किसी परियोजना का बैराज या जिला पूछता है: सोन के लिए रोहतास के डेहरी में इंद्रपुरी, गंडक के लिए पश्चिमी चंपारण का वाल्मीकि नगर और कोसी के लिए सुपौल का भीमनगर। दूसरा पूछता है कि कौन सी नहर किस परियोजना की है, जहां गंडक के साथ तिरहुत और सारण तथा सोन की पूर्वी और पश्चिमी नहरें स्थायी उत्तर हैं। तीसरा किसी विद्युत केंद्र का जिला पूछता है, जहां कहलगांव के साथ भागलपुर, बाढ़ के साथ पटना, बरौनी के साथ बेगूसराय और नबीनगर के साथ औरंगाबाद याद रखना अनिवार्य है। संयुक्त परियोजनाएं भी जोड़ लें, क्योंकि प्रश्न प्रायः पूछता है कि कोई परियोजना किन राज्यों या किस देश के साथ है: गंडक और कोसी नेपाल के साथ, उत्तर कोयल झारखंड के साथ तथा बाणसागर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के साथ। कोसी के लिए बिहार का शोक लगभग हर वर्ष पूछा जाता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| सबसे पुरानी और बड़ी नहर प्रणाली | सोन नहर प्रणाली |
|---|---|
| सोन बैराज | रोहतास जिले के डेहरी में इंद्रपुरी बैराज, 1968 में पूर्ण |
| पूर्वी सोन नहर | औरंगाबाद, अरवल, जहानाबाद, गया, पटना |
| पश्चिमी सोन नहर | रोहतास, भोजपुर, बक्सर |
| गंडक बैराज | वाल्मीकि नगर, पश्चिमी चंपारण, नेपाल के साथ संयुक्त |
| गंडक की नहरें | पूर्व में तिरहुत नहर, पश्चिम में सारण नहर |
| कोसी बैराज | भीमनगर, सुपौल जिला, 1954 के भारत-नेपाल समझौते के अंतर्गत |
| बिहार का शोक | कोसी नदी |
| दुर्गावती जलाशय | कैमूर जिला, दुर्गावती नदी पर |
| उत्तर कोयल जलाशय | झारखंड के साथ साझा; औरंगाबाद और गया को लाभ |
| बाणसागर | मध्य प्रदेश में सोन पर, उत्तर प्रदेश और बिहार के साथ साझा |
| सबसे पुराना ताप केंद्र | बरौनी, बेगूसराय जिला |
| एनटीपीसी के केंद्र | भागलपुर में कहलगांव, पटना में बाढ़, मुजफ्फरपुर, औरंगाबाद में नबीनगर |
| रेलवे विद्युत संयंत्र | भारतीय रेल बिजली कंपनी, नबीनगर, एनटीपीसी और भारतीय रेल |
| निर्माणाधीन ताप संयंत्र | बक्सर जिले का चौसा |
| जल विद्युत केंद्र | गंडक पर वाल्मीकि नगर, कोसी प्रणाली पर कटैया, डेहरी की नहर ढलानें |
| परमाणु विद्युत | बिहार में कोई नहीं |
| विद्युत सुधार | 2012 में बोर्ड का विभाजन, अलग उत्पादन, पारेषण और वितरण कंपनियां |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
बिहार की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी नहर सिंचाई प्रणाली कौन सी है?
- A.कोसी नहर प्रणाली
- B.गंडक नहर प्रणाली
- C.सोन नहर प्रणाली
- D.बागमती नहर प्रणाली
उत्तर देखें
सोन पर कार्य औपनिवेशिक काल में रोहतास जिले के डेहरी में एनीकट बनाकर आरंभ हुआ और तब से प्रणाली बढ़ती रही, 1968 में इंद्रपुरी बैराज ने पुराने एनीकट का स्थान ले लिया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →डेहरी में सोन नदी पर बना इंद्रपुरी बैराज बिहार के किस जिले में है?
- A.रोहतास
- B.औरंगाबाद
- C.भोजपुर
- D.कैमूर
उत्तर देखें
डेहरी ऑन सोन रोहतास जिले में है और वहीं पुराने एनीकट के स्थान पर इंद्रपुरी बैराज बनाया गया, जो 1968 में पूरा हुआ।
पूरी व्याख्या पढ़ें →नेपाल के साथ संयुक्त रूप से बनी गंडक परियोजना का बैराज किस स्थान पर है?
- A.भीमनगर
- B.वाल्मीकि नगर
- C.डेहरी
- D.बरौनी
उत्तर देखें
गंडक बैराज पश्चिमी चंपारण जिले के वाल्मीकि नगर में, नेपाल की सीमा पर, दोनों देशों के समझौते के अंतर्गत बनाया गया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भीमनगर स्थित कोसी बैराज बिहार के किस जिले में है?
- A.सहरसा
- B.मधेपुरा
- C.सुपौल
- D.अररिया
उत्तर देखें
कोसी बैराज सुपौल जिले के भीमनगर में है, जहां नदी नेपाल से भारत में प्रवेश करती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बिहार की किस नदी को परंपरागत रूप से बिहार का शोक कहा जाता है?
- A.गंडक
- B.कोसी
- C.सोन
- D.पुनपुन
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कोसी नेपाल से भारी मात्रा में गाद लेकर उतरती है, समतल मैदान में उसे छोड़ देती है और इस प्रकार अपना ही तल ऊंचा करती जाती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →तिरहुत नहर बिहार की किस सिंचाई परियोजना का भाग है?
- A.कोसी परियोजना
- B.सोन परियोजना
- C.गंडक परियोजना
- D.दुर्गावती परियोजना
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तिरहुत नहर गंडक परियोजना की मुख्य पूर्वी नहर है और उसका नाम उत्तर बिहार के प्राचीन तिरहुत क्षेत्र से आया है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →कहलगांव सुपर ताप विद्युत केंद्र बिहार के किस जिले में है?
- A.बेगूसराय
- B.भागलपुर
- C.पटना
- D.औरंगाबाद
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एनटीपीसी द्वारा संचालित कहलगांव सुपर ताप विद्युत केंद्र पूर्वी बिहार के भागलपुर जिले में गंगा किनारे कहलगांव में है, जो झारखंड और बंगाल की खदानों से आने वाले कोयला मार्गों के पास है और जिसे नदी से शीतलन जल मिलता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बिहार का सबसे पुराना बड़ा ताप विद्युत केंद्र कौन सा है?
- A.बरौनी ताप विद्युत केंद्र
- B.बाढ़ सुपर ताप विद्युत केंद्र
- C.नबीनगर ताप विद्युत केंद्र
- D.मुजफ्फरपुर ताप विद्युत केंद्र
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बेगूसराय जिले का बरौनी अपनी तेल रिफाइनरी और उर्वरक कारखाने के चारों ओर औद्योगिक केंद्र बना, और स्वतंत्रता के बाद के आरंभिक दशकों में वहां बना ताप विद्युत केंद्र राज्य का पहला बड़ा उत्पादन केंद्र था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बिहार में भारतीय रेल बिजली कंपनी लिमिटेड का नबीनगर विद्युत संयंत्र एनटीपीसी और किसका संयुक्त उपक्रम है?
- A.कोल इंडिया लिमिटेड
- B.भारतीय रेल
- C.दामोदर घाटी निगम
- D.भारतीय इस्पात प्राधिकरण
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भारतीय रेल बिजली कंपनी लिमिटेड एनटीपीसी और रेल मंत्रालय के संयुक्त उपक्रम के रूप में बनी, ताकि औरंगाबाद जिले के नबीनगर में कोयला आधारित संयंत्र खड़ा किया जा सके, जिसकी अधिकांश बिजली रेलवे के कर्षण तथा अन्य उपयोग के लिए आरक्षित है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सोन नदी पर बना बाणसागर बांध किन राज्यों की संयुक्त परियोजना है?
- A.बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल
- B.मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार
- C.बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड
- D.मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार
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बाणसागर बांध मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में सोन नदी पर बना है, और चूंकि नदी आगे उत्तर प्रदेश में बहती है और फिर बिहार में गंगा से मिलती है, इसलिए तीनों राज्यों ने जल और लागत बांटने का समझौता किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बिहार में विद्युत उत्पादन के विषय में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- A.बिहार में दो परमाणु विद्युत केंद्र हैं
- B.राज्य का अधिकांश उत्पादन जल विद्युत है
- C.राज्य का अधिकांश उत्पादन कोयला आधारित है
- D.राज्य स्वयं कोई बिजली नहीं बनाता
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बिहार झारखंड और पश्चिम बंगाल के कोयला क्षेत्रों के निकट है, और कहलगांव, बाढ़, नबीनगर, बरौनी तथा मुजफ्फरपुर के उसके बड़े केंद्र कोयला जलाते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →गंडक नदी निम्नलिखित में से किस नदी तंत्र से संबंधित है?
- A.सिंधु
- B.गंगा
- C.ब्रह्मपुत्र
- D.गोदावरी
उत्तर देखें
गंडक नेपाल हिमालय से निकलती है, जहां उसे नारायणी या सप्त गंडकी कहा जाता है, पश्चिमी चंपारण के वाल्मीकि नगर से भारत में प्रवेश करती है और उत्तर बिहार को पार करती हुई दक्षिण-पूर्व बहकर पटना के सामने सोनपुर और हाजीपुर के पास गंगा में मिल जाती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बिहार की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी नहर प्रणाली कौन सी है?
सोन नहर प्रणाली। पहले रोहतास जिले के डेहरी में सोन पर एनीकट बना था और 1968 में उसकी जगह इंद्रपुरी बैराज बना। इसकी पूर्वी और पश्चिमी नहरें दक्षिण बिहार के पूरे सोन मैदान को सींचती हैं।
कोसी बैराज कहां है और वह क्यों बनाया गया?
भारत-नेपाल सीमा पर सुपौल जिले के भीमनगर में, 1954 के कोसी समझौते के अंतर्गत। कोसी पश्चिम की ओर धारा बदलकर मैदान में बाढ़ लाती थी, इसी कारण उसे बिहार का शोक कहा गया, इसलिए बैराज और लंबे तटबंध बनाए गए।
गंडक परियोजना की नहरें कौन सी हैं?
मुख्य पूर्वी नहर तिरहुत नहर है, जो चंपारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली और सीतामढ़ी को सींचती है, तथा मुख्य पश्चिमी नहर सारण नहर है, जो सारण, सीवान और गोपालगंज को सींचती है और पूर्वी उत्तर प्रदेश तक जल ले जाती है।
बिहार के प्रमुख ताप विद्युत केंद्र कौन से हैं?
बेगूसराय का बरौनी सबसे पुराना बड़ा केंद्र है। एनटीपीसी भागलपुर में कहलगांव, पटना जिले में बाढ़, कांटी बिजली उत्पादन निगम के माध्यम से मुजफ्फरपुर तथा औरंगाबाद में नबीनगर के केंद्र चलाता है, जिनमें एक भारतीय रेल के साथ संयुक्त उपक्रम है।
क्या बिहार में कोई परमाणु विद्युत केंद्र है?
नहीं। बिहार में कोई परमाणु केंद्र नहीं है और जल विद्युत क्षमता भी बहुत कम है क्योंकि मैदान में ढलान नहीं मिलती। राज्य का उत्पादन लगभग पूरा कोयले से है, साथ में वाल्मीकि नगर तथा कटैया की छोटी इकाइयां और बढ़ती सौर क्षमता है।
बिहार किन परियोजनाओं में दूसरे राज्यों या देशों के साथ भागीदार है?
गंडक और कोसी परियोजनाएं नेपाल के साथ, उत्तर कोयल जलाशय झारखंड के साथ तथा सोन पर बाणसागर बांध मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के साथ साझा है। साझी परियोजनाएं राज्य परीक्षाओं का प्रिय प्रश्न हैं।
स्रोत
- बिहार की वृहद और मध्यम सिंचाई योजनाएं: सोन, गंडक और कोसी प्रणालियां — जल संसाधन विभाग, बिहार सरकार
- बिहार में स्थापित विद्युत केंद्र और क्षमता — केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, विद्युत मंत्रालय
- कोसी और गंडक परियोजनाओं पर भारत-नेपाल समझौते — विदेश मंत्रालय, भारत सरकार





