बिहार की मंजूषा कला किस अन्य नाम से जानी जाती है?
- A.सर्प चित्रकला
- B.कमल चित्रकला
- C.जीवन वृक्ष चित्रकला
- D.सूर्य चित्रकला
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर A, सर्प चित्रकला है। मंजूषा को सर्प चित्रकला कहा जाता है क्योंकि बिषहरी कथा का सर्प उसका प्रमुख अलंकरण है: चित्र पटों में सर्प भरे रहते हैं और किनारियों में लगातार लहरदार रेखा चलती है जो सर्प जैसी दिखती है, तथा एक किनारी का नाम ही लहरिया है। कथा बिहुला की है, जो सर्पदंश के बाद अपने पति को जीवित करा लाती है, और देवी बिषहरी की, इसलिए सर्प अलंकरण के साथ विषय में भी है।
विकल्प B, कमल चित्रकला, मधुबनी की कोहबर रचना पर अधिक बैठती है, जहां कमल विवाह कक्ष का केंद्रीय प्रतीक है। विकल्प C, जीवन वृक्ष, वारली तथा वस्त्र कला का अलंकरण है, मंजूषा का नाम नहीं। विकल्प D, सूर्य चित्रकला, किसी परंपरा में इस अर्थ में नहीं है। मंजूषा के तीन रंग, गुलाबी, हरा और पीला, इसके साथ पूछा जाने वाला दूसरा विवरण हैं।
पूरा लेख पढ़ें: मधुबनी, मंजूषा और बिहार की अन्य कलाएं: शैली और तथ्य
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंमधुबनी चित्रकला बिहार के किस क्षेत्र की है?
- A.भागलपुर के आसपास का अंग
- B.उत्तर का मिथिला
- C.गया के आसपास का मगध
- D.पश्चिम का भोजपुर
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मधुबनी चित्रकला को मिथिला चित्रकला भी कहा जाता है क्योंकि यह उत्तर बिहार के मिथिला क्षेत्र में, मुख्यतः मधुबनी और दरभंगा जिलों में विकसित हुई, और इसका प्रचलित नाम इनमें पहले जिले से आया है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बिहुला और बिषहरी की कथा कहने वाली मंजूषा कला बिहार के किस जिले की है?
- A.मधुबनी
- B.भागलपुर
- C.गया
- D.पटना
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मंजूषा कला भागलपुर तथा उसके आसपास के अंगिका भाषी क्षेत्र की है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन मधुबनी चित्रकला की शैली नहीं है?
- A.भरनी
- B.कचनी
- C.गोदना
- D.कलमकारी
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कलमकारी आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की कपड़े पर कलम तथा प्राकृतिक रंगों से की जाने वाली कला है, जो श्रीकालहस्ती और मछलीपट्टनम में होती है, और उसका मिथिला से कोई संबंध नहीं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मिथिला परंपरा में जिस कोहबर घर की दीवार पर चित्र बनाया जाता है, वह क्या है?
- A.नवविवाहित दंपति का कक्ष
- B.घर की रसोई
- C.गोशाला
- D.गांव का देवस्थान
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कोहबर घर वह कक्ष है जिसमें विवाह के बाद वर और वधू को एक साथ लाया जाता है, और उसकी दीवार पर कोहबर चित्र बनता है, जिसमें पत्तों के घेरे वाला कमल, बांस का झुरमुट, मछली, तोते तथा सूर्य और चंद्रमा होते हैं, और ये सब उर्वरता तथा मिलन के…
पूरी व्याख्या पढ़ें →पटना की टिकुली कला मूल रूप से किस वस्तु को सजाती थी?
- A.मिट्टी के बर्तन
- B.माथे पर पहनी जाने वाली बिंदी
- C.मंदिर के द्वार
- D.ताड़पत्र की पांडुलिपियां
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टिकुली नाम उस टिकुली या टिकली से आया है जिसे स्त्रियां माथे पर लगाती थीं और जो पटना में पतले कांच पर स्वर्ण पत्र तथा रंगीन मीनाकारी चढ़ाकर बनाई जाती थी।
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