बिहार की जलवायु, मिट्टियां और वन: वर्षा एवं क्षेत्र
बिहार की जलवायु, मिट्टियों और वनों पर परीक्षोपयोगी नोट्स: मानसूनी ऋतुएं, वर्षा का प्रतिरूप, कृषि-जलवायु क्षेत्र, ताल एवं करैल मिट्टी तथा संरक्षित क्षेत्र।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

बिहार की जलवायु आर्द्र उपोष्ण मानसूनी है, मिट्टियां लगभग पूरी तरह जलोढ़ हैं और वन बहुत कम हैं। ये तीनों तथ्य आपस में जुड़े हैं। हिमालयी गाद से नदियों द्वारा बनाया समतल मैदान गहरी जलोढ़ मिट्टी देता है और प्राकृतिक आवरण लगभग नहीं छोड़ता, तथा वह जलवायु जो अपनी लगभग पूरी वर्षा चार महीनों में गिरा देती है, राज्य के एक भाग में बाढ़ और दूसरे में सूखा देती है। राज्य के प्रश्नपत्र इसी अध्याय से वर्षा के आंकड़े, कृषि-जलवायु क्षेत्र, मिट्टियों के स्थानीय नाम और राज्य के बचे-खुचे संरक्षित वन पूछते हैं।
जलवायु और उसकी ऋतुएं
राज्य की जलवायु आर्द्र उपोष्ण, अर्थात उत्तरी मैदान की मानसूनी प्रकार की मानी जाती है, और वर्ष चार ऋतुओं में बंटा है। ग्रीष्म, मार्च से मई, गर्म और शुष्क होती है, जब मैदान पर लू नाम की गर्म शुष्क हवा चलती है और गया के आसपास राज्य का दक्षिण-पश्चिम सबसे तप्त भागों में रहता है। वर्षा ऋतु जून के दूसरे सप्ताह में आरंभ होती है, जब दक्षिण-पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा पूर्व से प्रवेश करती है, और अक्टूबर के आरंभ तक चलती है; वर्ष की लगभग पूरी वर्षा इन्हीं महीनों में होती है। अक्टूबर और नवंबर लौटते मानसून की ऋतु है, जिसमें आकाश साफ रहता है और तापमान गिरता है, तथा शीत ऋतु, दिसंबर से फरवरी, उत्तर-पश्चिम से शीत लहरें लाती है, जिसमें जनवरी सबसे ठंडा महीना होता है। मानसून से पहले के सप्ताहों में राज्य के उत्तर-पूर्व में तीखी गरज वाली आंधियां आती हैं, जिन्हें नॉर्वेस्टर कहा जाता है।
वर्षा और कृषि-जलवायु क्षेत्र
बिहार में औसतन वर्ष में कुछ अधिक 1,200 मिलीमीटर वर्षा होती है, पर आंकड़े से अधिक महत्व प्रतिरूप का है: वर्षा उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर घटती जाती है। उत्तर-पूर्व के किशनगंज, अररिया तथा पूर्णिया सबसे अधिक वर्षा वाले जिले हैं, चंपारण की पट्टी भी भरपूर सिंचित है, और दक्षिण-पश्चिम में गया, औरंगाबाद तथा कैमूर क्षेत्र सबसे शुष्क हैं; इसीलिए बिहार में सूखे और सिंचाई के प्रश्न सदा दक्षिण बिहार से जुड़े होते हैं। नियोजन के लिए राज्य तीन कृषि-जलवायु क्षेत्रों में बांटा गया है: क्षेत्र I, उत्तर-पश्चिम जलोढ़ मैदान; क्षेत्र II, उत्तर-पूर्व जलोढ़ मैदान; और क्षेत्र III, दक्षिण बिहार जलोढ़ मैदान, जो आगे III A तथा III B में बंटा है। जिस अभ्यर्थी को तीन की संख्या याद है और यह भी कि विभाजन गंगा तथा वर्षा के ढाल का अनुसरण करता है, वह इस विषय के अधिकांश प्रश्न हल कर लेगा।
बिहार की मिट्टियां
दक्षिण में पुरानी चट्टान की पतली पट्टी छोड़ दें तो बिहार की प्रत्येक मिट्टी जलोढ़ है, और परीक्षा उसकी पट्टियों के स्थानीय नाम पूछती है।
| मिट्टी | कहां मिलती है | विशेषता |
|---|---|---|
| गिरिपदीय दलदली मिट्टी | पश्चिम चंपारण की शिवालिक तलहटी | कंकरीली, खराब निकास वाली, गहरे रंग की |
| तराई मिट्टी | नेपाल सीमा से लगी संकरी पट्टी | बलुई और दलदली, चूने में कम |
| नवीन जलोढ़ (खादर) | उत्तर बिहार का मैदान | हल्की, चूनायुक्त, हर बाढ़ से नवीन |
| पुरानी जलोढ़ (बांगर) | दक्षिण बिहार का मैदान | भारी, चिकनी, चूना कम |
| ताल मिट्टी | पटना, नालंदा तथा लखीसराय का मोकामा ताल | अत्यंत भारी गहरी चिकनी मिट्टी, रबी की दालें |
| करैल मिट्टी | सोन घाटी, रोहतास और भोजपुर के भाग | काली चिकनी, नमी रोकने वाली |
| लाल-पीली और लैटेराइट मिट्टी | कैमूर का किनारा, जमुई, बांका, मुंगेर | पतली, अम्लीय, पुरानी चट्टान पर बनी |
| दियारा मिट्टी | गंगा के सहारे बलुई नदी-भूमि | मोटे कण, तरबूज तथा सब्जियों की खेती |
दो शब्द अलग रखने योग्य हैं क्योंकि प्रश्नपत्र इन्हें जोड़े में पूछते हैं: उत्तर बिहार की नवीन जलोढ़ मिट्टी चूनायुक्त है, अर्थात उसमें चूना अधिक है, जबकि दक्षिण की पुरानी जलोढ़ में चूना कम और चिकनाई अधिक है। इन मिट्टियों की समस्याएं भी उतनी ही परीक्षोपयोगी हैं: उत्तर में बाढ़ से खेतों पर चढ़ती बालू, तटबंधों के पीछे जलजमाव, उत्तर-पूर्व में अम्लीयता, नहरी क्षेत्रों में लवणीय तथा क्षारीय ऊसर भूमि के टुकड़े, और लगभग सर्वत्र कम जैव पदार्थ।
वन और संरक्षित क्षेत्र
बड़े राज्यों में बिहार सबसे कम वन वाले राज्यों में है। नवंबर 2000 में झारखंड के अलग होने पर पुराने प्रांत का लगभग पूरा वन तथा खनिज क्षेत्र चला गया, और उसके बाद से भारत वन स्थिति रिपोर्ट की श्रृंखला बिहार का वन आवरण उसके भौगोलिक क्षेत्र के आठ प्रतिशत से नीचे बताती है, जबकि राष्ट्रीय वन नीति 1988 का लक्ष्य भूभाग का एक तिहाई है। जो वन बचा है वह दो प्रकार का है। उष्ण कटिबंधीय आर्द्र पतझड़ वन, जिसमें साल मुख्य वृक्ष है, नेपाल सीमा के सहारे पश्चिम चंपारण में बचा है। उष्ण कटिबंधीय शुष्क पतझड़ वन, जिसमें खैर, पलाश, महुआ तथा बांस होते हैं, रोहतास और कैमूर जिलों के कैमूर पठार तथा जमुई, बांका एवं मुंगेर की पहाड़ियों पर फैला है। नदियों के सहारे दियारा भूमि पर खैर और शीशम की पट्टियां मिलती हैं।
संरक्षित क्षेत्र भी इन्हीं दो पट्टियों का अनुसरण करते हैं। पश्चिम चंपारण का वाल्मीकि बाघ अभयारण्य, राज्य का एकमात्र बाघ अभयारण्य, साल वन में है; कैमूर तथा रोहतास में फैला कैमूर वन्यजीव अभयारण्य बिहार का सबसे बड़ा अभयारण्य है; और मुंगेर का भीमबांध, गया का गौतम बुद्ध, नालंदा का राजगीर, पश्चिम चंपारण का उदयपुर तथा जमुई के नागी एवं नकटी पक्षी अभयारण्य शेष का बड़ा भाग बनाते हैं, जिनके साथ भागलपुर में गंगा पर विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन अभयारण्य है। राज्य के प्रतीक नियमित रूप से पूछे जाते हैं: गौर (भारतीय बाइसन) राज्य पशु है, गौरैया राज्य पक्षी, पीपल राज्य वृक्ष और कचनार राज्य पुष्प।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्न जलवायु के प्रकार, आर्द्र उपोष्ण मानसूनी, और जून के दूसरे सप्ताह में बंगाल की खाड़ी शाखा से मानसून के आगमन से आरंभ होते हैं, जो यह भी समझाता है कि वर्षा पटना से पहले पूर्णिया क्यों पहुंचती है। उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर घटता वर्षा ढाल सीधे और घुमाकर, दोनों तरह पूछा जाता है, जैसे सर्वाधिक वर्षा वाला जिला कौन, अर्थात किशनगंज, या सूखा किस भाग में, अर्थात दक्षिण-पश्चिम। कृषि-जलवायु क्षेत्रों की संख्या तीन याद रखें, दोनों उत्तरी क्षेत्रों के नाम और दक्षिणी के दो भाग भी। मिट्टियों में शब्द स्वयं प्रश्न हैं: ताल, करैल, दियारा, तराई तथा गिरिपदीय दलदली मिट्टी, और साथ में नवीन जलोढ़ का चूनायुक्त उत्तर बिहार से तथा पुरानी जलोढ़ का चिकने दक्षिण बिहार से जोड़ा। वनों में पूछे जाने वाले तथ्य हैं कि आवरण राज्य के दसवें भाग से कम है, यह हानि 2000 में झारखंड बनने के बाद हुई, साल तथा आर्द्र पतझड़ वन पश्चिम चंपारण के हैं और शुष्क पतझड़ वन कैमूर पठार के, वाल्मीकि एकमात्र बाघ अभयारण्य तथा कैमूर सबसे बड़ा अभयारण्य है, और राज्य के चार प्रतीक।
महत्वपूर्ण तथ्य
| जलवायु प्रकार | उत्तरी मैदान की आर्द्र उपोष्ण मानसूनी जलवायु |
|---|---|
| मानसून का आगमन | जून का दूसरा सप्ताह, बंगाल की खाड़ी शाखा से, पूर्व की ओर से |
| औसत वार्षिक वर्षा | कुछ अधिक 1,200 मिमी, जिसका लगभग पूरा भाग जून से सितंबर तक |
| सर्वाधिक वर्षा वाले जिले | उत्तर-पूर्व के किशनगंज, अररिया और पूर्णिया |
| सबसे शुष्क क्षेत्र | दक्षिण-पश्चिम बिहार: गया, औरंगाबाद तथा कैमूर क्षेत्र |
| ग्रीष्म की गर्म हवा | लू, जो मई तथा जून के आरंभ में चलती है |
| कृषि-जलवायु क्षेत्र | तीन: उत्तर-पश्चिम मैदान, उत्तर-पूर्व मैदान और दक्षिण बिहार मैदान (III A तथा III B) |
| नवीन जलोढ़ | उत्तर बिहार, हल्की और चूनायुक्त, बाढ़ से नवीन होती रहती है |
| पुरानी जलोढ़ | दक्षिण बिहार, भारी तथा चिकनी, चूना कम |
| ताल मिट्टी | पटना, नालंदा और लखीसराय के मोकामा ताल की भारी गहरी चिकनी मिट्टी |
| करैल मिट्टी | सोन घाटी की काली, नमी रोकने वाली चिकनी मिट्टी |
| वन आवरण | राज्य के क्षेत्र के आठ प्रतिशत से कम, 1988 की नीति के एक तिहाई लक्ष्य के सामने |
| एकमात्र बाघ अभयारण्य | वाल्मीकि बाघ अभयारण्य, पश्चिम चंपारण |
| सबसे बड़ा अभयारण्य | कैमूर वन्यजीव अभयारण्य, कैमूर तथा रोहतास जिलों में |
| राज्य प्रतीक | गौर (पशु), गौरैया (पक्षी), पीपल (वृक्ष), कचनार (पुष्प) |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
बिहार की जलवायु को सबसे उपयुक्त रूप से क्या कहा जाएगा?
- A.विषुवतीय
- B.उष्ण मरुस्थलीय
- C.आर्द्र उपोष्ण मानसूनी
- D.भूमध्यसागरीय
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, आर्द्र उपोष्ण मानसूनी है। बिहार उत्तरी मैदान में है, जहां ग्रीष्म गर्म रहती है, वर्षा जून मध्य से अक्टूबर के आरंभ तक दक्षिण-पश्चिम मानसून से एक ही अवधि में होती है, और शीत ऋतु ठंडी तथा शुष्क रहती है जिसमें कभी-कभी शीत लहरें आती हैं। गर्म ग्रीष्म, आर्द्र मानसून और शुष्क शीत का यही मेल आर्द्र उपोष्ण मानसूनी प्रकार कहलाता है।
विकल्प A, विषुवतीय, उस जलवायु को कहते हैं जो वर्ष भर गर्म तथा आर्द्र रहती है और जिसमें शुष्क ऋतु नहीं होती, जैसे अमेजन या कांगो बेसिन में; भारत में अंडमान-निकोबार के कुछ भाग को छोड़ वह कहीं नहीं मिलती। विकल्प B, उष्ण मरुस्थलीय, पश्चिमी राजस्थान की जलवायु है, जहां वर्षा बहुत कम तथा अनिश्चित है। विकल्प D, भूमध्यसागरीय, में वर्षा शीत ऋतु में होती है और ग्रीष्म शुष्क रहती है, जो बिहार के प्रतिरूप के ठीक विपरीत है। यह भी याद रखें कि पूरा राज्य कर्क रेखा के उत्तर में है, इसीलिए वह उष्ण के बजाय उपोष्ण प्रकार का है।
बिहार में वर्षा सामान्यतः किस दिशा में घटती जाती है?
- A.उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर
- B.दक्षिण से उत्तर की ओर
- C.पश्चिम से पूर्व की ओर
- D.वह सर्वत्र समान है
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर है। बिहार में वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा से आती है, जो पूर्व से प्रवेश करती है और भीतर बढ़ने पर नमी खोती जाती है। इसलिए उत्तर-पूर्व के किशनगंज, अररिया तथा पूर्णिया सर्वाधिक वर्षा वाले जिले हैं, चंपारण की पट्टी भी भरपूर वर्षा पाती है, और दक्षिण-पश्चिम में गया, औरंगाबाद तथा कैमूर क्षेत्र सबसे कम वर्षा पाकर बार-बार सूखे की चपेट में आते हैं।
विकल्प B उत्तर के वास्तविक प्रतिरूप को उलट देता है, क्योंकि हिमालय की तलहटी में वर्षा अधिक होती है, कम नहीं। विकल्प C, पश्चिम से पूर्व, पूरे गंगा मैदान के लिए उलटी दिशा में सही है: वर्षा पंजाब से बंगाल की ओर बढ़ती जाती है। विकल्प D गलत है क्योंकि बिहार में अंतर बड़ा है, उत्तर-पूर्व में 1,500 मिलीमीटर से काफी ऊपर और दक्षिण-पश्चिम में लगभग एक हजार। यही ढाल बताता है कि बाढ़ उत्तर बिहार की समस्या है और सूखा दक्षिण बिहार की।
निम्नलिखित में बिहार के किस जिले में सर्वाधिक वार्षिक वर्षा होती है?
- A.किशनगंज
- B.गया
- C.औरंगाबाद
- D.रोहतास
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, किशनगंज है। किशनगंज राज्य के सुदूर उत्तर-पूर्व में, दार्जिलिंग की पहाड़ियों और बंगाल के आर्द्र डुआर्स के सबसे निकट कोने में है, और मानसूनी प्रवाह बिहार में सबसे पहले वहीं पहुंचता है। यह राज्य का सर्वाधिक वर्षा वाला जिला है, और उसके पड़ोसी अररिया तथा पूर्णिया उसके निकट आते हैं।
विकल्प B, गया, दक्षिण-पश्चिम में सबसे शुष्क तथा सबसे गर्म जिलों में है और सूखा-प्रवण दक्षिण बिहार मैदान का मानक उदाहरण है। विकल्प C, औरंगाबाद, गया से लगे उसी शुष्क क्षेत्र में है और सिंचाई के लिए सोन नहर प्रणाली पर निर्भर है। विकल्प D, रोहतास, भी दक्षिण-पश्चिम में कैमूर क्षेत्र में है और वहां सिंचाई है, भरपूर वर्षा नहीं। परीक्षक का बिंदु सदा वही विरोध है: सर्वाधिक वर्षा उत्तर-पूर्व में, न्यूनतम दक्षिण-पश्चिम में।
बिहार की अधिकांश वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून की किस शाखा से होती है?
- A.अरब सागर शाखा
- B.बंगाल की खाड़ी शाखा
- C.लौटता मानसून
- D.पश्चिमी विक्षोभ
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, बंगाल की खाड़ी शाखा है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की यह शाखा बंगाल के तट से टकराती है, हिमालय द्वारा पश्चिम की ओर मोड़ दी जाती है और गंगा के मैदान पर आगे बढ़ती हुई जून के दूसरे सप्ताह में बिहार पहुंचती है। चूंकि यह प्रवाह राज्य पर पूर्व से पश्चिम की ओर चलता है, उत्तर-पूर्व में वर्षा पहले और सर्वाधिक होती है तथा दक्षिण-पश्चिम में सबसे कम।
विकल्प A, अरब सागर शाखा, पश्चिमी तट, पश्चिमी घाट तथा मध्य एवं उत्तर-पश्चिम भारत को सींचती है, और उसका कमजोर अवशेष ही पूर्वी मैदान तक पहुंचता है। विकल्प C, अक्टूबर-नवंबर का लौटता मानसून, तमिलनाडु तट को वर्षा देता है, बिहार को नहीं, जहां वे महीने शुष्क और साफ रहते हैं। विकल्प D, पश्चिमी विक्षोभ, भूमध्यसागर से आने वाले शीतकालीन अवदाब हैं, जो उत्तर-पश्चिम भारत में कुछ वर्षा और कभी बिहार में जनवरी की हल्की बूंदाबांदी लाते हैं; वे रबी फसल के लिए उपयोगी हैं पर वार्षिक वर्षा में उनका भाग बहुत छोटा है।
बिहार को कितने कृषि-जलवायु क्षेत्रों में बांटा गया है?
- A.दो
- B.तीन
- C.पांच
- D.सात
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, तीन है। कृषि नियोजन के लिए बिहार को क्षेत्र I, उत्तर-पश्चिम जलोढ़ मैदान, क्षेत्र II, उत्तर-पूर्व जलोढ़ मैदान, तथा क्षेत्र III, दक्षिण बिहार जलोढ़ मैदान में बांटा गया है, और अंतिम आगे III A एवं III B में विभाजित है। यह विभाजन उन्हीं दो बातों का अनुसरण करता है जो राज्य में वास्तव में भिन्न हैं: गंगा, जो उत्तर को दक्षिण से अलग करती है, और वर्षा का ढाल, जो आर्द्र उत्तर-पूर्व को अधिक शुष्क उत्तर-पश्चिम तथा दक्षिण से अलग करता है।
विकल्प A, दो, तभी सही होता जब विभाजन का एकमात्र आधार गंगा होती। विकल्प C, पांच, और विकल्प D, सात, उस प्रकार की संख्याएं हैं जो अन्य राज्यों तथा कृषि-जलवायु प्रदेशों की राष्ट्रीय योजना में आती हैं, जिसमें बिहार मध्य गंगा मैदान प्रदेश में पड़ता है। परीक्षा के लिए तीन मुख्य क्षेत्र और दक्षिणी क्षेत्र के दो उपभाग याद रखें, तथा यह भी कि क्षेत्र II, अर्थात उत्तर-पूर्व, सर्वाधिक वर्षा वाला और सर्वाधिक बाढ़ प्रभावित है।
उत्तर बिहार के मैदान की नवीन जलोढ़ मिट्टी की विशेषता क्या है?
- A.वह चूनायुक्त, अर्थात चूने से समृद्ध है
- B.वह लैटेराइट है
- C.वह काली और अत्यधिक चिकनी है
- D.वह पूरी तरह लवणीय है
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, वह चूनायुक्त, अर्थात चूने से समृद्ध है। उत्तर बिहार की नदियां नवीन हिमालय से उतरती हैं और हर बाढ़ में मैदान पर ताजी गाद फैला देती हैं, और उस गाद में चूने का अनुपात ऊंचा रहता है। इसलिए यह मिट्टी हल्की बुनावट की, हल्के रंग की, नाइट्रोजन तथा जैव पदार्थ में कम और प्रतिवर्ष नवीन होती रहती है, और इसी कारण वह गोबर खाद तथा संतुलित उर्वरक पर बहुत अच्छा प्रतिफल देती है।
विकल्प B, लैटेराइट मिट्टी, भारी वर्षा में पुरानी चट्टान पर निक्षालन से बनती है, और बिहार में वह केवल कैमूर के किनारे तथा जमुई, बांका एवं मुंगेर में टुकड़ों में मिलती है। विकल्प C, काली और अत्यधिक चिकनी, सोन घाटी की करैल मिट्टी तथा मोकामा क्षेत्र की ताल मिट्टी का वर्णन है, और दोनों दक्षिण बिहार की हैं। विकल्प D सामान्य कथन के रूप में गलत है: नहरी क्षेत्रों में लवणीय तथा क्षारीय ऊसर टुकड़े मिलते हैं, पर वे स्थानीय हैं, पूरी पट्टी का लक्षण नहीं। स्पष्ट जोड़ा याद रखें: नवीन जलोढ़ के साथ चूनायुक्त उत्तर बिहार और पुरानी जलोढ़ के साथ चिकना दक्षिण बिहार।
रबी की दालों के लिए मूल्यवान, अत्यंत भारी गहरी चिकनी ताल मिट्टी बिहार में मुख्यतः किस पट्टी में मिलती है?
- A.पटना, नालंदा तथा लखीसराय की मोकामा पट्टी
- B.पश्चिम चंपारण की शिवालिक तलहटी
- C.रोहतास का कैमूर पठार
- D.किशनगंज और अररिया का मैदान
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, पटना, नालंदा तथा लखीसराय की मोकामा पट्टी है। गंगा के दक्षिण में, नदी और भीतर की ऊंची भूमि के बीच नीची तश्तरीनुमा भूमि की एक पट्टी है जिसे ताल कहा जाता है, और उसमें सबसे बड़ा मोकामा ताल है। वहां मानसून भर पानी जमा रहता है और देर से निकलता है, जिससे अत्यंत भारी, गहरे रंग की, नमी रोकने वाली चिकनी मिट्टी बची रहती है, जिस पर रबी की दालें, विशेषतः चना, मसूर तथा खेसारी, बहुत अच्छी होती हैं।
विकल्प B, पश्चिम चंपारण की शिवालिक तलहटी, में गिरिपदीय दलदली मिट्टी है, जो कंकरीली तथा खराब निकास वाली है, अर्थात बिलकुल दूसरा प्रकार। विकल्प C, रोहतास का कैमूर पठार, में पुरानी चट्टान पर बनी पतली लाल, पीली तथा लैटेराइट मिट्टी है। विकल्प D, उत्तर-पूर्व का किशनगंज-अररिया मैदान, में राज्य की सर्वाधिक वर्षा के नीचे हल्की, अम्लीय, बलुई जलोढ़ मिट्टी है। परीक्षा के लिए चार स्थानीय नाम अलग रखें: ताल, करैल, दियारा तथा तराई, और ताल वही है जो दालों से जुड़ा है।
सोन घाटी में मिलने वाली बिहार की करैल मिट्टी कैसी है?
- A.नदी तल की मोटे कण वाली बलुई मिट्टी
- B.काली, नमी रोकने वाली चिकनी मिट्टी
- C.चूने से समृद्ध हल्की जलोढ़ मिट्टी
- D.लाल लैटेराइट मिट्टी
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, काली, नमी रोकने वाली चिकनी मिट्टी है। करैल सोन घाटी तथा उससे लगे रोहतास और भोजपुर जिलों के भागों की गहरे रंग की चिपचिपी चिकनी मिट्टी है। वह लंबे समय तक नमी रोकती है, सूखने पर दरक जाती है, और सोन नहर प्रणाली के नीचे उसमें खरीफ में अच्छा धान तथा उसके बाद गेहूं एवं चना होते हैं; इसी कारण यह क्षेत्र दक्षिण बिहार के अधिक उत्पादक भागों में गिना जाता है।
विकल्प A, नदी तल की मोटे कण वाली बलुई मिट्टी, दियारा मिट्टी है, अर्थात गंगा की धाराओं के बीच की भूमि, जहां बाढ़ उतरने पर तरबूज, खीरा तथा सब्जियां उगाई जाती हैं। विकल्प C, चूने से समृद्ध हल्की जलोढ़ मिट्टी, उत्तर बिहार के मैदान की नवीन जलोढ़ या खादर है, जिसे हिमालयी नदियां नवीन करती रहती हैं। विकल्प D, लाल लैटेराइट मिट्टी, कैमूर के किनारे तथा जमुई, बांका एवं मुंगेर में उन जगहों पर मिलती है जहां पुरानी चट्टान सतह के निकट है। विकल्पों में जब भी काली मिट्टी दिखे, करैल को सोन घाटी के साथ जोड़ लें।
बिहार का एकमात्र बाघ अभयारण्य कौन है?
- A.कैमूर
- B.वाल्मीकि
- C.भीमबांध
- D.गौतम बुद्ध
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, वाल्मीकि है। वाल्मीकि बाघ अभयारण्य पश्चिम चंपारण जिले में, शिवालिक की तलहटी में नेपाल सीमा के सहारे है, और यह बिहार का एकमात्र बाघ अभयारण्य है। उसका वन उष्ण कटिबंधीय आर्द्र पतझड़ प्रकार का है, जिसमें साल मुख्य वृक्ष है, और सीमा पार नेपाल का चितवन परिदृश्य उससे लगा है, जिससे बाघों की आवाजाही के लिए वह महत्वपूर्ण बन जाता है।
विकल्प A, कैमूर, कैमूर तथा रोहतास जिलों में वन्यजीव अभयारण्य है और राज्य का सबसे बड़ा संरक्षित क्षेत्र है, पर बाघ अभयारण्य नहीं। विकल्प C, मुंगेर जिले का भीमबांध, शुष्क पतझड़ वन में अपने गर्म जल स्रोतों के लिए जाना जाने वाला अभयारण्य है। विकल्प D, गौतम बुद्ध, गया तथा जमुई क्षेत्र का अभयारण्य है। यहां दो तथ्य साथ चलते हैं और अक्सर एक ही प्रश्न में पूछे जाते हैं: वाल्मीकि एकमात्र बाघ अभयारण्य और कैमूर बिहार का सबसे बड़ा अभयारण्य है।
बिहार का सबसे बड़ा वन्यजीव अभयारण्य कौन है?
- A.कैमूर वन्यजीव अभयारण्य
- B.भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य
- C.राजगीर वन्यजीव अभयारण्य
- D.उदयपुर वन्यजीव अभयारण्य
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, कैमूर वन्यजीव अभयारण्य है। यह राज्य के दक्षिण-पश्चिम में कैमूर पठार पर कैमूर तथा रोहतास जिलों में फैला है और क्षेत्रफल में बिहार का सबसे बड़ा संरक्षित क्षेत्र है। वहां का वन उष्ण कटिबंधीय शुष्क पतझड़ प्रकार का है, जिसमें खैर, पलाश, महुआ और बांस होते हैं, तथा पठार पर जलप्रपात, गुफाएं एवं दुर्गावती जलाशय भी हैं।
विकल्प B, मुंगेर जिले का भीमबांध, गर्म जल स्रोतों के कारण प्रसिद्ध अभयारण्य है पर बहुत छोटा है। विकल्प C, नालंदा जिले का राजगीर, मगध की पुरानी राजधानी को घेरने वाली पहाड़ियों में छोटा अभयारण्य है। विकल्प D, पश्चिम चंपारण का उदयपुर, वाल्मीकि वन के पास का छोटा अभयारण्य है। अतिशयोक्ति वाले तथ्य एक समूह में याद रखें: वाल्मीकि एकमात्र बाघ अभयारण्य, कैमूर सबसे बड़ा अभयारण्य और भागलपुर का विक्रमशिला एकमात्र गांगेय डॉल्फिन अभयारण्य।
निम्नलिखित में से बिहार का राज्य पशु कौन है?
- A.गौर (भारतीय बाइसन)
- B.बाघ
- C.गांगेय डॉल्फिन
- D.सांभर
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, गौर अर्थात भारतीय बाइसन है। गौर बिहार का राज्य पशु है, गौरैया राज्य पक्षी, पीपल राज्य वृक्ष तथा कचनार राज्य पुष्प। ये चार प्रतीक राज्य की भर्ती परीक्षाओं में लगभग हर वर्ष पूछे जाते हैं, सामान्यतः मिलान वाले प्रश्न के रूप में, इसलिए इन्हें एक-एक करके नहीं, साथ याद करना चाहिए।
विकल्प B, बाघ, भारत का राष्ट्रीय पशु है और वाल्मीकि अभयारण्य की प्रमुख प्रजाति भी, इसीलिए वह सबसे आकर्षक गलत उत्तर है। विकल्प C, गांगेय डॉल्फिन, भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव है और भागलपुर के विक्रमशिला अभयारण्य में संरक्षित है, पर वह राज्य पशु नहीं है। विकल्प D, सांभर, राज्य के शुष्क पतझड़ वनों का बड़ा हिरण है और उसका कोई प्रतीकात्मक दर्जा नहीं। राष्ट्रीय तथा राज्य की सूचियां अलग रखें: भारत के लिए बाघ और डॉल्फिन, बिहार के लिए गौर और गौरैया।
बिहार में पश्चिम चंपारण के साल वन किस वन प्रकार के अंतर्गत आते हैं?
- A.उष्ण कटिबंधीय आर्द्र पतझड़ वन
- B.उष्ण कटिबंधीय कंटीले वन
- C.पर्वतीय शीतोष्ण वन
- D.उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, उष्ण कटिबंधीय आर्द्र पतझड़ वन है। पश्चिम चंपारण नेपाल सीमा के सहारे शिवालिक की तलहटी में है और वहां भारी वर्षा होती है, तथा उसका वन, जिसमें साल प्रमुख वृक्ष है, उष्ण कटिबंधीय आर्द्र पतझड़ वर्ग में रखा जाता है। वाल्मीकि बाघ अभयारण्य इसी पट्टी में है। इन वनों के वृक्ष शुष्क महीनों में पत्ते गिरा देते हैं, इसीलिए वे पतझड़ कहलाते हैं, पर वर्षा इतनी है कि वन को आर्द्र कहा जाता है।
विकल्प B, उष्ण कटिबंधीय कंटीले वन, पश्चिमी राजस्थान जैसे शुष्क प्रदेशों के वन हैं, जिनमें बबूल तथा कैक्टस जैसी वनस्पति होती है, और बिहार में उनका स्थान नहीं। विकल्प C, पर्वतीय शीतोष्ण वन, के लिए ऊंचाई आवश्यक है, और बिहार का सर्वोच्च बिंदु, उसी जिले का सोमेश्वर शिखर, उसके लिए बहुत नीचा है। विकल्प D, उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन, के लिए वर्ष भर बहुत भारी वर्षा चाहिए, जैसी पश्चिमी घाट तथा पूर्वोत्तर में है, और बिहार का कोई वन उस कसौटी पर नहीं उतरता। परीक्षा में यही विरोध ले जाएं: चंपारण में आर्द्र पतझड़ साल वन और कैमूर पठार पर शुष्क पतझड़ खैर, पलाश तथा महुआ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बिहार की जलवायु किस प्रकार की है?
आर्द्र उपोष्ण मानसूनी, वही प्रकार जो पूरे उत्तरी मैदान में मिलता है। ग्रीष्म गर्म तथा शुष्क होती है और लू चलती है, लगभग पूरी वर्षा जून मध्य से अक्टूबर के आरंभ तक दक्षिण-पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा से होती है, और शीत ऋतु ठंडी रहती है जिसमें उत्तर-पश्चिम से शीत लहरें आती हैं।
बिहार में वर्षा उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर क्यों घटती है?
क्योंकि मानसूनी प्रवाह बंगाल की खाड़ी की ओर से, अर्थात पूर्व से प्रवेश करता है और भीतर बढ़ने पर नमी खोता जाता है। इसलिए किशनगंज, अररिया तथा पूर्णिया में सबसे अधिक वर्षा होती है, जबकि दक्षिण-पश्चिम के गया, औरंगाबाद और कैमूर क्षेत्र सबसे शुष्क एवं सूखा-प्रवण हैं।
बिहार में कितने कृषि-जलवायु क्षेत्र हैं?
तीन। क्षेत्र I उत्तर-पश्चिम जलोढ़ मैदान है, क्षेत्र II उत्तर-पूर्व जलोढ़ मैदान, और क्षेत्र III दक्षिण बिहार जलोढ़ मैदान, जो आगे III A तथा III B में बंटा है। यह विभाजन गंगा और वर्षा के ढाल का अनुसरण करता है।
ताल मिट्टी क्या है?
ताल मिट्टी दक्षिण बिहार की नीची ताल पट्टी की अत्यंत भारी, गहरे रंग की चिकनी मिट्टी है, मुख्यतः पटना, नालंदा तथा लखीसराय जिलों के मोकामा ताल की। यह मानसून भर पानी रोके रखती है और पानी उतरने पर उसमें रबी की दालें बहुत अच्छी होती हैं।
बिहार में वन आवरण इतना कम क्यों है?
क्योंकि जिन पठारी जिलों में वन थे, वे नवंबर 2000 में अलग राज्य झारखंड बन गए और बिहार के पास मैदान रह गया। अब वन आवरण राज्य के क्षेत्र के आठ प्रतिशत से कम है, जो मुख्यतः पश्चिम चंपारण तथा कैमूर पठार पर है।
स्रोत
- भारत: भौतिक पर्यावरण (कक्षा 11), अध्याय 4 तथा 6: जलवायु एवं मृदा — एनसीईआरटी
- बिहार: कृषि, कृषि-जलवायु क्षेत्र और राज्य की मिट्टियां — कृषि विभाग, बिहार सरकार
- भारत वन स्थिति रिपोर्ट: बिहार का वन आवरण — भारतीय वन सर्वेक्षण, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय

