बिहार के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और विधानमंडल: अनुच्छेद
बीपीएससी और एसएससी परीक्षाओं के लिए बिहार की कार्यपालिका और विधानमंडल के नोट्स: राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधानसभा, विधान परिषद और उनके अनुच्छेद।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 7 मिनट

बिहार का शासन संविधान के भाग छह के अंतर्गत चलता है। अनुच्छेद 153 से 167 तक राज्य कार्यपालिका की व्यवस्था है और अनुच्छेद 168 से 212 तक राज्य विधानमंडल की। राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित है, परंतु उसका प्रयोग मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद करती है, जो तब तक पद पर रहती है जब तक विधानसभा का विश्वास उसे प्राप्त है। बिहार उन कुछ राज्यों में है जिन्होंने दूसरा सदन बनाए रखा, इसलिए यहाँ विधानमंडल के दो सदन हैं: सीधे जनता द्वारा चुनी गई विधानसभा और विधान परिषद, जो स्थायी सदन है और कभी भंग नहीं होती। बीपीएससी, बीएसएससी, बिहार पुलिस और एसएससी के प्रश्नपत्रों में यह अध्याय अनुच्छेदों और संख्याओं का भंडार है, और अभ्यर्थी सबसे अधिक अंक संख्याओं पर ही गँवाते हैं।
बिहार के राज्यपाल
अनुच्छेद 153 प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल का प्रावधान करता है और अनुच्छेद 154 राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित करता है, जिसका प्रयोग वह स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से करता है। अनुच्छेद 155 के अनुसार राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा करता है, अर्थात यह पद नियुक्ति से भरा जाता है, निर्वाचन से कभी नहीं। अनुच्छेद 156 उसका कार्यकाल पाँच वर्ष रखता है, परंतु यह भी कहता है कि वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है, इसलिए कार्यकाल की कोई गारंटी नहीं है; त्यागपत्र वह राष्ट्रपति को संबोधित करता है। अनुच्छेद 157 केवल दो योग्यताएँ रखता है: वह भारत का नागरिक हो और पैंतीस वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो। अनुच्छेद 158 उसे संसद या किसी राज्य विधानमंडल की सदस्यता तथा किसी भी लाभ के पद से वर्जित करता है और उसके वेतन-भत्ते राज्य की संचित निधि पर भारित करता है। अनुच्छेद 159 के अनुसार वह राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष शपथ लेता है, जो बिहार के लिए पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश हैं। उसका सरकारी निवास पटना का राजभवन है और राज्य के विश्वविद्यालय अधिनियमों के अंतर्गत वह राज्य के विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति भी होता है।
राज्यपाल की शक्तियाँ
| शक्ति | अनुच्छेद | सार |
|---|---|---|
| कार्यपालिका | 154, 164, 165 | मुख्यमंत्री, अन्य मंत्रियों तथा राज्य के महाधिवक्ता की नियुक्ति |
| विधायी | 174, 175, 176 | सदन का सत्रावसान, सत्र आहूत करना, विघटन, संदेश भेजना और अभिभाषण |
| विधेयक पर | 200, 201 | अनुमति देना, रोकना, धन विधेयक के अतिरिक्त विधेयक लौटाना या राष्ट्रपति के लिए आरक्षित रखना |
| अध्यादेश | 213 | विधानमंडल के सत्र में न होने पर अध्यादेश जारी करना, जो सदन के समक्ष रखा जाना आवश्यक है |
| वित्तीय | 202, 207 | वार्षिक वित्तीय विवरण रखवाना; धन विधेयक के लिए उसकी सिफारिश आवश्यक |
| न्यायिक | 161 | राज्य विधि के विरुद्ध अपराधों में क्षमा, लघुकरण, परिहार और निलंबन |
अनुच्छेद 161 की क्षमादान शक्ति अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राष्ट्रपति की शक्ति से दो बातों में संकुचित है, और परीक्षक यही पूछते हैं: राज्यपाल मृत्युदंड को क्षमा नहीं कर सकता और सेना न्यायालय द्वारा दिए गए दंड पर उसका कोई अधिकार नहीं है, हालाँकि वह मृत्युदंड को निलंबित, परिहृत या लघुकृत कर सकता है।
मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद
अनुच्छेद 164 कहता है कि मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करता है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर करता है। संविधान मुख्यमंत्री चुनने की कोई प्रक्रिया नहीं देता; परंपरा से राज्यपाल उस दल या गठबंधन के नेता को बुलाता है जिसे विधानसभा में बहुमत प्राप्त है। किसी भी सदन का सदस्य न होने पर भी व्यक्ति नियुक्त हो सकता है, परंतु अनुच्छेद 164(4) के अनुसार उसे छह लगातार मास के भीतर सदस्य बनना होगा, अन्यथा वह मंत्री नहीं रहेगा। अनुच्छेद 163 मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद का प्रावधान करता है जो राज्यपाल को सहायता और सलाह देती है, सिवाय उन विषयों में जहाँ वह स्वविवेक से कार्य करता है, और यह भी कहता है कि कोई न्यायालय यह जाँच नहीं करेगा कि विषय स्वविवेक का था या नहीं। अनुच्छेद 164(1ए), जो 2003 के इक्यानबेवें संविधान संशोधन से जोड़ा गया, मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या को विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के पंद्रह प्रतिशत तक सीमित करता है और न्यूनतम बारह रखता है; बिहार विधानसभा में 243 सदस्य होने से राज्य में अधिकतम छत्तीस मंत्री हो सकते हैं। मंत्रिपरिषद विधानसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी है, इसी कारण अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर पूरी मंत्रिपरिषद जाती है, कोई एक मंत्री नहीं। अनुच्छेद 167 मुख्यमंत्री का कर्तव्य बताता है कि वह परिषद के निर्णय राज्यपाल को बताए, माँगी गई प्रशासनिक जानकारी दे और किसी मंत्री के एकल निर्णय को परिषद के समक्ष रखे। अनुच्छेद 165 महाधिवक्ता का और अनुच्छेद 166 यह प्रावधान करता है कि राज्य की समस्त कार्यपालिका कार्रवाई राज्यपाल के नाम से की जाएगी। श्रीकृष्ण सिंह, जो 1946 से 1961 में अपने निधन तक पद पर रहे, बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री थे और अनुग्रह नारायण सिंह प्रथम उपमुख्यमंत्री तथा वित्त मंत्री; राबड़ी देवी 1997 में राज्य की प्रथम महिला मुख्यमंत्री बनीं।
बिहार विधानसभा
विधानसभा में 243 सदस्य हैं, जो एक सदस्यीय प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों से वयस्क मताधिकार द्वारा चुने जाते हैं। राज्य के विभाजन से पहले सदन बहुत बड़ा था, उसमें 324 सीटें थीं, और नवंबर 2000 में उनमें से इक्यासी सीटें नवगठित झारखंड को चली गईं, जिससे बिहार के पास 243 रह गईं। अनुच्छेद 172 सदन को प्रथम बैठक से पाँच वर्ष का कार्यकाल देता है, जिसे आपातकाल की उद्घोषणा के समय संसद एक बार में एक वर्ष बढ़ा सकती है; राज्यपाल उसे पहले भी भंग कर सकता है। अनुच्छेद 173 सदस्यता के लिए न्यूनतम आयु पच्चीस वर्ष रखता है और अनुच्छेद 332 अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थान आरक्षित करता है। अनुच्छेद 178 अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का प्रावधान करता है, जिन्हें सदन अपने सदस्यों में से चुनता है; अध्यक्ष यह प्रमाणित करता है कि विधेयक धन विधेयक है या नहीं, दसवीं अनुसूची के अंतर्गत दलबदल पर निरर्हता का निर्णय करता है और मत बराबर होने पर ही मत देता है। अनुच्छेद 174 के अनुसार एक सत्र की अंतिम बैठक और अगले सत्र की प्रथम बैठक के बीच छह मास से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए।
बिहार विधान परिषद
अनुच्छेद 168 राज्य विधानमंडल को एक या दो सदन रखने की अनुमति देता है और अनुच्छेद 169 के अनुसार राज्य की विधानसभा विशेष बहुमत से संकल्प पारित करे तो संसद दूसरा सदन बना या समाप्त कर सकती है। बिहार की परिषद उस विधान परिषद की उत्तराधिकारी है जो 1912 में बंगाल से बिहार के पृथक होने के बाद बिहार और उड़ीसा प्रांत के लिए बनी थी, इसलिए यह देश के सबसे पुराने दूसरे सदनों में गिनी जाती है। इसमें पचहत्तर सदस्य हैं। अनुच्छेद 171 प्रत्येक परिषद का ढाँचा तय करता है: कुल संख्या विधानसभा की सदस्य संख्या के एक तिहाई से अधिक और चालीस से कम नहीं होगी, तथा सदस्यों में लगभग एक तिहाई स्थानीय निकायों के सदस्यों द्वारा, एक तिहाई विधानसभा के सदस्यों द्वारा, एक बारहवाँ तीन वर्ष के अनुभव वाले शिक्षकों द्वारा, एक बारहवाँ तीन वर्ष पुराने स्नातकों द्वारा चुने जाते हैं और शेष को राज्यपाल साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन तथा समाज सेवा के विशेष ज्ञान वाले व्यक्तियों में से मनोनीत करता है। सदस्य का कार्यकाल छह वर्ष है, एक तिहाई सदस्य प्रत्येक दो वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं और सदन कभी भंग नहीं होता। न्यूनतम आयु तीस वर्ष है और अनुच्छेद 182 सभापति तथा उपसभापति का प्रावधान करता है।
विधेयक कैसे कानून बनता है
धन विधेयक केवल विधानसभा में, और केवल राज्यपाल की सिफारिश पर, पुरःस्थापित किया जा सकता है; अनुच्छेद 198 के अनुसार विधान परिषद उसे चौदह दिन से अधिक नहीं रोक सकती, जिसके बाद वह उसी रूप में पारित माना जाता है जिस रूप में विधानसभा ने भेजा था। साधारण विधेयक के लिए अनुच्छेद 197 परिषद को पहली बार तीन मास और दूसरी बार एक मास, कुल चार मास देता है, जिसके बाद विधानसभा की इच्छा ही चलती है। राज्य विधानमंडल के लिए संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नहीं है, और अभ्यर्थी इसे ही अनुच्छेद 108 से भ्रमित करते हैं। दोनों सदनों से पारित विधेयक अनुच्छेद 200 के अंतर्गत राज्यपाल के पास जाता है, जो अनुमति दे सकता है, रोक सकता है, धन विधेयक न होने पर पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है, या राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रख सकता है; तब अनुच्छेद 201 लागू होता है।
स्वविवेक और राष्ट्रपति शासन
राज्यपाल कुछ स्थितियों में अपने विवेक से कार्य करता है: किसी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने पर मुख्यमंत्री का चयन, सदन का विश्वास खो चुकी प्रतीत होती सरकार के बारे में निर्णय, अनुच्छेद 200 के अंतर्गत विधेयक राष्ट्रपति के लिए आरक्षित रखना, और अनुच्छेद 356 के अंतर्गत यह प्रतिवेदन देना कि राज्य का शासन संविधान के उपबंधों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता। ऐसे प्रतिवेदन पर राष्ट्रपति शासन लगता है, जिसमें राज्य का प्रशासन राष्ट्रपति के नाम से राज्यपाल के माध्यम से चलता है और विधानसभा की विधायी शक्ति संसद प्रयोग करती है। बिहार में कई अवसरों पर राष्ट्रपति शासन लगा है, जिनमें 2005 में दो विधानसभा चुनावों के बीच का काल भी है।
परीक्षा की दृष्टि से
बीपीएससी, बीएसएससी, बिहार पुलिस और एसएससी के प्रश्नपत्र इस अध्याय को तीन तरह से पूछते हैं। पहला, अनुच्छेद और उसका विषय: 155 नियुक्ति, 156 कार्यकाल, 157 योग्यता, 159 शपथ, 161 क्षमादान, 163 सलाह, 164 मंत्री, 164(1ए) पंद्रह प्रतिशत की सीमा, 164(4) छह मास का नियम, 171 परिषद का गठन, 172 विधानसभा का कार्यकाल, 197 और 198 विधेयक, 213 अध्यादेश। दूसरा, संख्याएँ, जिनमें विधानसभा के 243, विधान परिषद के 75, छत्तीस मंत्री और विभाजन से पूर्व की 324 सीटें सीधे पूछी जाती हैं। तीसरा, प्रथम व्यक्तियों की सूची, जिसमें प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह और प्रथम महिला मुख्यमंत्री राबड़ी देवी आते हैं। सामान्य भूलें तीन हैं: शपथ में पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की जगह राष्ट्रपति लिख देना, धन विधेयक के चौदह दिन और साधारण विधेयक के चार मास को आपस में बदल देना, तथा संयुक्त बैठक को राज्य पर भी लागू मान लेना, जो अनुच्छेद 108 के अंतर्गत केवल संसद के लिए है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| भाग और अनुच्छेद | भाग छह; अनुच्छेद 153 से 167 राज्य कार्यपालिका, 168 से 212 राज्य विधानमंडल |
|---|---|
| विधानमंडल का स्वरूप | अनुच्छेद 168 के अंतर्गत द्विसदनीय: विधानसभा और विधान परिषद |
| विधानसभा की सदस्य संख्या | 243 निर्वाचित सदस्य |
| सन 2000 से पूर्व सीटें | 324; इक्यासी सीटें झारखंड जाने से बिहार में 243 बचीं |
| विधान परिषद की सदस्य संख्या | पचहत्तर सदस्य |
| अधिकतम मंत्री | छत्तीस, अनुच्छेद 164(1ए) के अनुसार 243 का पंद्रह प्रतिशत |
| राज्यपाल की नियुक्ति | अनुच्छेद 155 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा, हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र से |
| राज्यपाल की शपथ | पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष (अनुच्छेद 159) |
| राज्यपाल की योग्यता | भारत का नागरिक, पैंतीस वर्ष की आयु (अनुच्छेद 157) |
| विधानसभा का कार्यकाल | अनुच्छेद 172 के अंतर्गत प्रथम बैठक से पाँच वर्ष |
| विधान परिषद का कार्यकाल | छह वर्ष; प्रत्येक दो वर्ष में एक तिहाई सेवानिवृत्त, सदन कभी भंग नहीं |
| न्यूनतम आयु | विधानसभा के लिए पच्चीस वर्ष, विधान परिषद के लिए तीस वर्ष (अनुच्छेद 173) |
| धन विधेयक | केवल विधानसभा में; परिषद चौदह दिन रोक सकती है (अनुच्छेद 198) |
| साधारण विधेयक | परिषद कुल चार मास रोक सकती है (अनुच्छेद 197); राज्य में संयुक्त बैठक नहीं |
| अध्यादेश | अनुच्छेद 213, विधानमंडल के सत्र में न होने पर |
| पीठासीन अधिकारी | अध्यक्ष और उपाध्यक्ष (अनुच्छेद 178); सभापति और उपसभापति (अनुच्छेद 182) |
| प्रथम मुख्यमंत्री | श्रीकृष्ण सिंह, 1946 से 1961 तक पद पर |
| प्रथम महिला मुख्यमंत्री | राबड़ी देवी, 1997 में शपथ |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
बिहार विधानसभा में कितने सदस्य निर्वाचित होते हैं?
- A.234
- B.240
- C.243
- D.324
उत्तर देखें
बिहार विधानसभा में एक सदस्यीय प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों से वयस्क मताधिकार द्वारा 243 सदस्य चुने जाते हैं, और राज्य से जुड़ी हर गणना, बहुमत के आँकड़े से लेकर मंत्रिपरिषद की सीमा तक, इसी संख्या से निकलती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बिहार में मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद में अधिकतम कितने मंत्री हो सकते हैं?
- A.30
- B.34
- C.36
- D.44
उत्तर देखें
अनुच्छेद 164(1ए), जो 2003 के इक्यानबेवें संविधान संशोधन से जोड़ा गया, कहता है कि किसी राज्य में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के पंद्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी और न्यूनतम बारह होगी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बिहार विधान परिषद में कितने सदस्य होते हैं?
- A.60
- B.75
- C.81
- D.96
उत्तर देखें
राज्य विधानमंडल के दूसरे सदन बिहार विधान परिषद में पचहत्तर सदस्य हैं। अनुच्छेद 171 किसी विधान परिषद को राज्य की विधानसभा की सदस्य संख्या के एक तिहाई से अधिक और चालीस से कम सदस्य नहीं देता, और 243 सदस्यीय विधानसभा के लिए पचहत्तर इस दायरे में आता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बिहार के राज्यपाल को पद की शपथ कौन दिलाता है?
- A.भारत के राष्ट्रपति
- B.बिहार के मुख्यमंत्री
- C.पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
- D.भारत के मुख्य न्यायाधीश
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अनुच्छेद 159 कहता है कि अपना पद ग्रहण करने से पहले राज्यपाल उस राज्य के संबंध में अधिकारिता रखने वाले उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष, या उनकी अनुपस्थिति में उस न्यायालय के उपलब्ध वरिष्ठतम न्यायाधीश के समक्ष शपथ लेगा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →संविधान का कौन सा अनुच्छेद राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद का प्रावधान करता है?
- A.अनुच्छेद 161
- B.अनुच्छेद 163
- C.अनुच्छेद 164
- D.अनुच्छेद 167
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यह उपबंध करता है कि राज्यपाल को उसके कृत्यों के प्रयोग में सहायता और सलाह देने के लिए मुख्यमंत्री के नेतृत्व में एक मंत्रिपरिषद होगी, सिवाय उन कृत्यों के जिन्हें उसे स्वविवेक से करना है, और यह भी जोड़ता है कि विषय स्वविवेक का था या नहीं, इसकी जाँच कोई…
पूरी व्याख्या पढ़ें →बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री कौन थे?
- A.अनुग्रह नारायण सिंह
- B.श्रीकृष्ण सिंह
- C.सच्चिदानंद सिन्हा
- D.राजेंद्र प्रसाद
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उन्होंने 1946 से बिहार की सरकार का नेतृत्व किया, संविधान लागू होने के बाद भी मुख्यमंत्री बने रहे और 1961 में अपने निधन तक पद पर रहे, जो किसी भी राज्य के आरंभिक इतिहास में सबसे लंबे अखंड कार्यकालों में है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बिहार विधान परिषद का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु क्या है?
- A.21 वर्ष
- B.25 वर्ष
- C.30 वर्ष
- D.35 वर्ष
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अनुच्छेद 173 राज्य विधानमंडल की सदस्यता की योग्यताएँ रखता है: व्यक्ति भारत का नागरिक हो, निर्धारित शपथ ले, तथा विधान परिषद के स्थान के लिए तीस वर्ष और विधानसभा के स्थान के लिए पच्चीस वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो।
पूरी व्याख्या पढ़ें →विधानसभा द्वारा पारित धन विधेयक को बिहार विधान परिषद अधिकतम कितने समय तक रोक सकती है?
- A.14 दिन
- B.एक मास
- C.तीन मास
- D.छह मास
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अनुच्छेद 198 के अनुसार धन विधेयक केवल विधानसभा में पुरःस्थापित हो सकता है, और विधानसभा से पारित होकर विधान परिषद के पास जाने पर परिषद उसे चौदह दिन के भीतर सिफारिशों के साथ लौटा सकती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →विधानमंडल के सत्र में न होने पर बिहार के राज्यपाल किस अनुच्छेद के अंतर्गत अध्यादेश जारी कर सकते हैं?
- A.अनुच्छेद 123
- B.अनुच्छेद 200
- C.अनुच्छेद 213
- D.अनुच्छेद 356
उत्तर देखें
यह राज्यपाल को अध्यादेश जारी करने की शक्ति देता है जब राज्य का विधानमंडल, या दो सदन होने पर उनमें से कोई एक, सत्र में न हो और वह संतुष्ट हो कि ऐसी परिस्थितियाँ हैं जिनमें तुरंत कार्रवाई आवश्यक है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →नवंबर 2000 में झारखंड के गठन से पहले बिहार विधानसभा में कितनी सीटें थीं?
- A.294
- B.310
- C.324
- D.330
उत्तर देखें
अविभाजित बिहार की विधानसभा में 324 निर्वाचित सदस्य थे। जब बिहार पुनर्गठन अधिनियम 2000 ने 15 नवंबर 2000 को झारखंड का गठन किया, तो उनमें से इक्यासी निर्वाचन क्षेत्र नए राज्य में पड़े और उसकी विधानसभा बने, जिससे बिहार के पास आज की 243 सीटें रह गईं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बिहार की प्रथम महिला मुख्यमंत्री कौन थीं?
- A.राबड़ी देवी
- B.सुचेता कृपलानी
- C.उमा भारती
- D.मायावती
उत्तर देखें
उन्होंने 1997 में बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और अब तक वे इस पद पर पहुँचने वाली राज्य की एकमात्र महिला हैं; बाद में उन्होंने कई कार्यकाल पूरे किए और राज्य विधानमंडल में विपक्ष का नेतृत्व भी किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बिहार विधानसभा में कितने सदस्य होते हैं?
243 निर्वाचित सदस्य, जो एक सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्रों से चुने जाते हैं। नवंबर 2000 से पहले सदन में 324 सीटें थीं, जिनमें से इक्यासी नवगठित झारखंड को चली गईं और बिहार के पास वर्तमान संख्या 243 रह गई।
क्या बिहार में विधान परिषद है?
हाँ। बिहार उन कुछ राज्यों में है जहाँ द्विसदनीय विधानमंडल है और उसकी विधान परिषद में पचहत्तर सदस्य हैं। यह 1912 में बंगाल से बिहार के पृथक होने पर बने बिहार और उड़ीसा प्रांत की विधान परिषद की उत्तराधिकारी है, इसलिए इसे देश के सबसे पुराने दूसरे सदनों में गिना जाता है।
बिहार में अधिकतम कितने मंत्री हो सकते हैं?
मुख्यमंत्री सहित छत्तीस से अधिक नहीं। अनुच्छेद 164(1ए) यह सीमा विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के पंद्रह प्रतिशत पर रखता है और 243 का पंद्रह प्रतिशत भिन्न छोड़ने पर छत्तीस होता है। यही उपबंध प्रत्येक राज्य के लिए न्यूनतम बारह मंत्री भी तय करता है।
बिहार के राज्यपाल को शपथ कौन दिलाता है?
अनुच्छेद 159 के अंतर्गत पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, और उनकी अनुपस्थिति में उस न्यायालय के उपलब्ध वरिष्ठतम न्यायाधीश। राज्यपाल स्वयं मुख्यमंत्री तथा अन्य मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाते हैं।
बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री कौन थे?
श्रीकृष्ण सिंह, जिन्होंने 1946 से सरकार का नेतृत्व किया और 1961 में अपने निधन तक मुख्यमंत्री रहे। अनुग्रह नारायण सिंह राज्य के प्रथम उपमुख्यमंत्री तथा वित्त मंत्री थे और राबड़ी देवी 1997 में राज्य की प्रथम महिला मुख्यमंत्री बनीं।
स्रोत
- भारत का संविधान, भाग छह: राज्य, अनुच्छेद 152 से 212 — विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय
- बिहार सरकार: प्रशासन और विभाग — बिहार सरकार
- बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000 — इंडिया कोड, भारत सरकार





