भारत में यूरेनियम अयस्क का सबसे पुराना स्रोत जादूगोड़ा खदान किस राज्य में है?
- A.झारखंड
- B.आंध्र प्रदेश
- C.मेघालय
- D.राजस्थान
सही उत्तर
A. झारखंड
व्याख्या
सही उत्तर A, झारखंड है। जादूगोड़ा खदान झारखंड की सिंहभूम पट्टी में है और 1967 में बनी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया इसे साठ के दशक के अंत से चला रही है; यह देश की पहली यूरेनियम खदान थी। विकल्प B गलत है क्योंकि आंध्र प्रदेश में यूरेनियम के बड़े भंडार अवश्य हैं, विशेषकर कडप्पा द्रोणी के तुम्मलपल्ले में, पर वह खदान बहुत बाद की है। विकल्प C गलत है क्योंकि मेघालय के डोमियासिएट क्षेत्र में भंडार ज्ञात हैं पर वहां खनन नहीं हुआ है। विकल्प D गलत है क्योंकि राजस्थान का संबंध रावतभाटा बिजलीघर और पोखरण परीक्षण स्थल से है, यूरेनियम खनन से नहीं। यह याद रखें कि भारत यूरेनियम में निर्धन पर थोरियम में धनी है, जो केरल और ओडिशा के तटों की मोनाजाइट बालू से मिलता है।
पूरा लेख पढ़ें: भारत का परमाणु कार्यक्रम: तीन चरण, रिएक्टर और परीक्षण
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंभारत का पहला परमाणु बिजलीघर कहां स्थापित किया गया था?
- A.तारापुर
- B.कुडनकुलम
- C.कैगा
- D.रावतभाटा
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. तारापुर
व्याख्या
सही उत्तर A, तारापुर है। महाराष्ट्र का तारापुर परमाणु बिजलीघर 1969 में अमेरिकी सहयोग से शुरू हुआ और वह भारत ही नहीं, एशिया का भी पहला परमाणु बिजलीघर था; उसकी पहली दो इकाइयों में क्वथन जल रिएक्टर लगे हैं, जो देश में और कहीं नहीं हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि तमिलनाडु का कुडनकुलम बड़े बिजलीघरों में सबसे नया है और उसमें रूसी वीवीईआर प्रकार के दाबित जल रिएक्टर लगे हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि कर्नाटक का कैगा बहुत बाद में आया और उसमें स्वदेशी दाबित भारी जल रिएक्टर लगे हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि कनाडा के सहयोग से बना राजस्थान का रावतभाटा दूसरा बिजलीघर था और वह दूसरे कारण से महत्वपूर्ण है, क्योंकि वहीं पहली बार दाबित भारी जल रिएक्टर लगा जिसे भारत ने बाद में स्वयं बनाया। पहला बिजलीघर तारापुर और पहला भारी जल रिएक्टर रावतभाटा याद रखें।
प्राकृतिक यूरेनियम से चलने वाले कनाडा ड्यूटीरियम यूरेनियम अर्थात कैंडू रिएक्टर में मंदक और शीतलक का काम कौन करता है?
- A.भारी जल
- B.हल्का जल
- C.कार्बन डाइऑक्साइड
- D.सोडियम
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. भारी जल
व्याख्या
सही उत्तर A, भारी जल है। कैंडू डिजाइन, जिससे भारत के दाबित भारी जल रिएक्टर निकले हैं, प्राकृतिक यूरेनियम जलाता है, और प्राकृतिक यूरेनियम में विखंडनीय समस्थानिक यूरेनियम 235 केवल हजार में लगभग सात भाग होता है। इतना कमजोर ईंधन तभी शृंखला अभिक्रिया चला सकता है जब बहुत कम न्यूट्रॉन व्यर्थ जाएं, और भारी जल साधारण जल की तुलना में बहुत कम न्यूट्रॉन सोखता है पर उन्हें धीमा कर देता है, इसलिए वह मंदक और शीतलक दोनों का काम करता है। विकल्प B गलत है क्योंकि हल्का जल बहुत अधिक न्यूट्रॉन सोख लेता है, इसीलिए उसे प्रयोग करने वाले रिएक्टरों में समृद्ध यूरेनियम डालना पड़ता है। विकल्प C गलत है क्योंकि कार्बन डाइऑक्साइड गैस शीतित रिएक्टरों में शीतलक होती है, जहां मंदक ग्रेफाइट होता है। विकल्प D गलत है क्योंकि द्रव सोडियम तीव्र प्रजनक रिएक्टर का शीतलक है, जिसमें जानबूझकर कोई मंदक रखा ही नहीं जाता।
क्वथन जल रिएक्टर में शीतलक के रूप में क्या प्रयोग होता है?
- A.कार्बन डाइऑक्साइड
- B.दाबित जल
- C.जल और भाप का मिश्रण
- D.द्रव धातु
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. जल और भाप का मिश्रण
व्याख्या
सही उत्तर C, जल और भाप का मिश्रण है। क्वथन जल रिएक्टर में, जो डिजाइन तारापुर में लगा है, साधारण जल को रिएक्टर पात्र के भीतर ही उबलने दिया जाता है, इसलिए क्रोड से निकलने वाला शीतलक जल और भाप का मिश्रण होता है; ऊपर भाप अलग करके सीधे टरबाइन तक भेज दी जाती है और अलग भाप जनित्र की आवश्यकता नहीं पड़ती। विकल्प A गलत है क्योंकि कार्बन डाइऑक्साइड गैस शीतित रिएक्टरों को ठंडा करती है, जल रिएक्टरों को नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि दाबित जल, दाबित जल रिएक्टर का शीतलक है, जहां दाब इसीलिए ऊंचा रखा जाता है कि जल उबले नहीं, और यही दोनों डिजाइनों का अंतर है। विकल्प D गलत है क्योंकि द्रव धातु, प्रायः सोडियम, तीव्र प्रजनक रिएक्टर को ठंडा करती है। परीक्षा के लिए यही एक बात याद रखें कि क्वथन जल रिएक्टर में जल क्रोड में ही उबलता है और दाबित रिएक्टर में नहीं।
भारतीय परमाणु कार्यक्रम का जनक किसे माना जाता है?
- A.विक्रम साराभाई
- B.होमी जहांगीर भाभा
- C.राजा रामन्ना
- D.ए पी जे अब्दुल कलाम
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. होमी जहांगीर भाभा
व्याख्या
सही उत्तर B, होमी जहांगीर भाभा है। भाभा ने 1945 में टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान की स्थापना की, 1948 में परमाणु ऊर्जा आयोग के पहले अध्यक्ष बने, भारत के थोरियम पर आधारित तीन चरणों की योजना बनाई और ट्रॉम्बे की उस संस्था का नेतृत्व किया जिसका नाम 1966 में उनके निधन के बाद भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र रखा गया। विकल्प A गलत है क्योंकि विक्रम साराभाई भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक हैं, यद्यपि भाभा के बाद वे परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष भी रहे। विकल्प C गलत है क्योंकि राजा रामन्ना ने 1974 के पोखरण परीक्षण करने वाले दल का नेतृत्व किया, जो महत्वपूर्ण पर बाद की भूमिका है। विकल्प D गलत है क्योंकि ए पी जे अब्दुल कलाम मिसाइल विकास और 1998 के पोखरण परीक्षणों से जुड़े हैं। परमाणु ऊर्जा के लिए भाभा और अंतरिक्ष के लिए साराभाई, यही जोड़ी याद रखें।
एशिया का पहला परमाणु अनुसंधान रिएक्टर अप्सरा 1956 में किस स्थान पर क्रांतिक हुआ था?
- A.कलपक्कम
- B.ट्रॉम्बे
- C.रावतभाटा
- D.तारापुर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. ट्रॉम्बे
व्याख्या
सही उत्तर B, ट्रॉम्बे है। अप्सरा 4 अगस्त 1956 को मुंबई के पास ट्रॉम्बे में क्रांतिक हुआ और वह न केवल भारत बल्कि पूरे एशिया का पहला परमाणु अनुसंधान रिएक्टर था; 1960 का सायरस और 1985 का ध्रुव रिएक्टर भी इसी स्थल पर बने, जो आज भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र है। विकल्प A गलत है क्योंकि तमिलनाडु का कलपक्कम इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र और तीव्र प्रजनक रिएक्टरों का स्थान है, जहां काम बहुत बाद में शुरू हुआ। विकल्प C गलत है क्योंकि राजस्थान का रावतभाटा बिजलीघर का स्थल है, अनुसंधान रिएक्टर का नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि तारापुर भी बिजलीघर है, जो अप्सरा के तेरह वर्ष बाद शुरू हुआ। अनुसंधान रिएक्टर ट्रॉम्बे में और तीव्र प्रजनक रिएक्टर कलपक्कम में, यह अंतर स्पष्ट रखें।