इसरो और भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम: मिशन और तथ्य
परीक्षा के लिए स्टेटिक जीके नोट्स: इसरो की स्थापना, उसके केंद्र तथा प्रक्षेपण यान, उपग्रह श्रृंखलाएँ और आर्यभट्ट से चंद्रयान-3 तक के प्रमुख मिशन।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम हर सामान्य ज्ञान के पेपर में पूछा जाता है, क्योंकि यह तिथियों सहित प्रथम उपलब्धियों की कथा है और ऐसी उपलब्धि से साफ प्रश्न बनता है। इसकी शुरुआत 1963 में थुंबा में उस साउंडिंग रॉकेट से हुई जिसे साइकिल पर प्रक्षेपण स्थल तक ले जाया गया था, और आज यह संचार, दूर संवेदन, नौवहन तथा चंद्र एवं ग्रह मिशनों तक फैला है। यह नोट कार्यक्रम को क्रम से रखता है: संगठन कैसे बना, केंद्र कहाँ हैं, प्रक्षेपण यान क्या ले जाते हैं और किन मिशनों ने वे कीर्तिमान बनाए जिन पर प्रश्न पूछे जाते हैं।
संगठन कैसे बना
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान राष्ट्रीय समिति की स्थापना 1962 में परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत हुई, जिसके अध्यक्ष विक्रम साराभाई थे, और पहला साउंडिंग रॉकेट 21 नवंबर 1963 को तिरुवनंतपुरम के पास थुंबा भूमध्यरेखीय रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र से छोड़ा गया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन का गठन 15 अगस्त 1969 को हुआ, और 1972 में सरकार ने अंतरिक्ष आयोग तथा अंतरिक्ष विभाग बनाए, जिनके अधीन इसरो तब से काम करता है। विक्रम साराभाई को भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक कहा जाता है, और इसरो का मुख्यालय बेंगलुरु में है।
केंद्र और उनका काम
| केंद्र | स्थान | कार्य |
|---|---|---|
| विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र | तिरुवनंतपुरम | प्रक्षेपण यानों का डिज़ाइन और विकास |
| यू आर राव उपग्रह केंद्र | बेंगलुरु | उपग्रहों का निर्माण |
| सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र | श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश | देश का प्रक्षेपण स्थल |
| द्रव नोदन प्रणाली केंद्र | वलियामला और महेंद्रगिरि | द्रव तथा क्रायोजेनिक इंजन |
| अंतरिक्ष उपयोग केंद्र | अहमदाबाद | पेलोड तथा अंतरिक्ष आँकड़ों का उपयोग |
| राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र | हैदराबाद | दूर संवेदन के आँकड़े और उनका प्रयोग |
| इसट्रैक तथा मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी | बेंगलुरु और हासन | उपग्रहों की ट्रैकिंग और नियंत्रण |
प्रक्षेपण यान
- एसएलवी-3, पहला भारतीय प्रक्षेपण यान, जिसने 18 जुलाई 1980 को रोहिणी उपग्रह को कक्षा में स्थापित किया, जिसके मिशन निदेशक ए. पी. जे. अब्दुल कलाम थे।
- एएसएलवी, 1980 के दशक का संवर्धित यान, जिसका उपयोग बड़े रॉकेटों की तकनीक परखने में हुआ।
- पीएसएलवी, ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान, कार्यक्रम का सबसे भरोसेमंद यान, जो दूर संवेदी उपग्रहों को ध्रुवीय कक्षा में ले जाता है और भारत के अधिकांश ग्रह मिशन इसी ने छोड़े हैं।
- जीएसएलवी, जो क्रायोजेनिक ऊपरी चरण से भारी संचार उपग्रहों को भूतुल्यकालिक अंतरण कक्षा तक ले जाता है, और एलवीएम3, सबसे भारी भारतीय यान, जिसका उपयोग चंद्रयान मिशनों में हुआ।
- एसएसएलवी, लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान, जो छोटे पेलोड को कम समय में छोड़ने के लिए बनाया गया है।
उपग्रह और उनके उपयोग
भारत का पहला उपग्रह आर्यभट्ट 19 अप्रैल 1975 को सोवियत सहयोग से छोड़ा गया, और उसके बाद पृथ्वी अवलोकन के लिए भास्कर आया। फिर दो लंबी श्रृंखलाओं ने काम सँभाला: संचार, टेलीविजन तथा आपदा चेतावनी के लिए इनसैट और जीसैट उपग्रह, और दूर संवेदन के लिए आईआरएस उपग्रह, जिनके आँकड़े कृषि, वानिकी, नगर नियोजन और भूजल की खोज में काम आते हैं। आईआरएनएसएस समूह पर बनी नाविक प्रणाली भारत तथा आसपास के क्षेत्र में स्थिति और समय बताती है, और गगन प्रणाली भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के साथ मिलकर विमानों के लिए उपग्रह नौवहन को सुधारती है।
कीर्तिमान बनाने वाले मिशन
| मिशन | वर्ष | उपलब्धि |
|---|---|---|
| चंद्रयान-1 | 2008 | चंद्रमा पर जल के अणुओं के प्रमाण मिले |
| मंगल कक्षित्र मिशन | प्रक्षेपण 2013, 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में | भारत पहले ही प्रयास में मंगल पर सफल रहा |
| पीएसएलवी-सी37 | 2017 | एक ही उड़ान में एक सौ चार उपग्रह |
| चंद्रयान-2 | 2019 | ऑर्बिटर काम करता रहा; लैंडर योजना के अनुसार नहीं उतरा |
| चंद्रयान-3 | 2023 | 23 अगस्त को चंद्र दक्षिणी ध्रुव के पास सफल लैंडिंग |
| आदित्य-एल1 | प्रक्षेपण 2023 | सूर्य के अध्ययन का भारत का पहला मिशन, प्रथम लैग्रेंज बिंदु के पास |
राकेश शर्मा 1984 में एक सोवियत मिशन से जाकर अंतरिक्ष में पहुँचने वाले पहले भारतीय बने, और प्रधानमंत्री के प्रश्न पर दिए उनके उत्तर सारे जहाँ से अच्छा के लिए याद किए जाते हैं। कार्यक्रम का व्यापारिक पक्ष अब न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड सँभालती है, जबकि पहले यह काम एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन करती थी, और अहमदाबाद स्थित इन-स्पेस निजी कंपनियों के अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रवेश का नियमन तथा प्रोत्साहन करती है।
दोहराव कैसे करें
पहले चार तिथियाँ पक्की करें: समिति के लिए 1962, इसरो के लिए 1969, आर्यभट्ट के लिए 1975 और पहले भारतीय प्रक्षेपण के लिए 1980। फिर हर केंद्र को उसके नगर से जोड़ें, क्योंकि यही पसंदीदा युग्म प्रश्न है, और अंत में हर मिशन को उस एक उपलब्धि के साथ याद रखें जिसके लिए वह जाना जाता है।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्न तीन रूपों में आते हैं। पहला वर्ष पूछता है, और 1962, 1969, 1972 तथा 1975 ये चार वर्ष एक साथ रखे जाते हैं, इसलिए हर वर्ष को उसकी घटना से बाँधें: समिति, इसरो, अंतरिक्ष विभाग और आर्यभट्ट। दूसरा केंद्रों और नगरों का युग्म प्रश्न है, जिसमें प्रक्षेपण के लिए श्रीहरिकोटा, प्रक्षेपण यानों के लिए तिरुवनंतपुरम, उपग्रहों तथा मुख्यालय के लिए बेंगलुरु, उपयोग के लिए अहमदाबाद और नियंत्रण के लिए हासन मानक जोड़े हैं। तीसरा पूछता है कि किस मिशन ने क्या पाया, जहाँ चंद्रयान-1 और जल के अणु, मंगल मिशन और पहले प्रयास की सफलता, पीएसएलवी-सी37 और एक सौ चार उपग्रह तथा चंद्रयान-3 और दक्षिणी ध्रुव उत्तर हैं। राकेश शर्मा बनाम कल्पना चावला, अर्थात भारतीय बनाम भारतीय मूल का व्यक्ति, बार-बार आने वाला जाल है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक | विक्रम साराभाई |
|---|---|
| इसरो का गठन | 15 अगस्त 1969 |
| अंतरिक्ष विभाग और अंतरिक्ष आयोग | 1972 |
| पहला साउंडिंग रॉकेट | थुंबा, 21 नवंबर 1963 |
| पहला भारतीय उपग्रह | आर्यभट्ट, 19 अप्रैल 1975 |
| भारतीय यान से पहला उपग्रह | रोहिणी, एसएलवी-3 द्वारा, 18 जुलाई 1980 |
| मुख्यालय | बेंगलुरु |
| प्रक्षेपण केंद्र | सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा |
| प्रक्षेपण यान केंद्र | विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, तिरुवनंतपुरम |
| चंद्रयान-1 | 2008, चंद्रमा पर जल के अणुओं के प्रमाण |
| मंगल कक्षित्र मिशन | 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में |
| चंद्रयान-3 | 23 अगस्त 2023 को चंद्र दक्षिणी ध्रुव के पास लैंडिंग |
| अंतरिक्ष में पहला भारतीय | राकेश शर्मा, 1984 |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक किसे कहा जाता है?
- A.होमी जे. भाभा
- B.विक्रम साराभाई
- C.सतीश धवन
- D.यू. आर. राव
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. विक्रम साराभाई
व्याख्या
सही उत्तर B, विक्रम साराभाई है। वे 1962 में बनी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान राष्ट्रीय समिति के अध्यक्ष थे, उन्होंने पहले साउंडिंग रॉकेट के लिए थुंबा को चुना और यह तर्क दिया कि एक निर्धन देश को अंतरिक्ष तकनीक प्रतिष्ठा के लिए नहीं, संचार, शिक्षा और मौसम के लिए चाहिए। विकल्प A गलत है क्योंकि होमी जे. भाभा ने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम खड़ा किया, यद्यपि आरंभिक अंतरिक्ष कार्य उन्हीं के विभाग के अधीन रखा गया था। विकल्प C गलत है क्योंकि सतीश धवन ने साराभाई के बाद इसरो का नेतृत्व किया और श्रीहरिकोटा का प्रक्षेपण केंद्र उन्हीं के नाम पर है। विकल्प D गलत है क्योंकि यू. आर. राव ने आर्यभट्ट बनाने वाले दल का नेतृत्व किया और बेंगलुरु का उपग्रह केंद्र उनके नाम पर है। चारों नाम विकल्पों में आते हैं, इसलिए हर व्यक्ति का योगदान अलग से याद रखें।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन का गठन किस वर्ष हुआ था?
- A.1962
- B.1969
- C.1972
- D.1975
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1969
व्याख्या
सही उत्तर B, 1969 है। इसरो का गठन 15 अगस्त 1969 को हुआ और उसने उस समिति का काम सँभाला जो तब तक कार्यक्रम चला रही थी। विकल्प A गलत है क्योंकि 1962 में परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान राष्ट्रीय समिति बनी थी, जिसके अध्यक्ष विक्रम साराभाई थे। विकल्प C गलत है क्योंकि 1972 में सरकार ने अंतरिक्ष आयोग तथा अंतरिक्ष विभाग बनाए, जिनके अधीन इसरो तब से कार्य करता है। विकल्प D गलत है क्योंकि 1975 भारत के पहले उपग्रह आर्यभट्ट का वर्ष है। ये चारों वर्ष इस विषय के लगभग हर प्रश्न में एक साथ रखे जाते हैं, इसलिए हर वर्ष को उसकी अपनी घटना से बाँधकर याद रखना चाहिए। यह तिथि याद रखना सरल है क्योंकि यह स्वतंत्रता दिवस पर पड़ती है, और पेपर कभी-कभी इसी संकेत को प्रश्न में रख देता है।
1975 में छोड़ा गया भारत का पहला उपग्रह कौन-सा था?
- A.भास्कर
- B.रोहिणी
- C.आर्यभट्ट
- D.एप्पल
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. आर्यभट्ट
व्याख्या
सही उत्तर C, आर्यभट्ट है। इसे 19 अप्रैल 1975 को सोवियत प्रक्षेपण स्थल से छोड़ा गया था, इसका नाम पाँचवीं शताब्दी के खगोलशास्त्री के नाम पर रखा गया और इसमें खगोल विज्ञान तथा सौर भौतिकी के प्रयोग थे। विकल्प A गलत है क्योंकि भास्कर उसके बाद आया पृथ्वी अवलोकन उपग्रह था। विकल्प B गलत है क्योंकि रोहिणी वह उपग्रह है जिसे 1980 में पहले भारतीय प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 ने कक्षा में स्थापित किया, जो अलग कीर्तिमान है। विकल्प D गलत है क्योंकि एप्पल 1980 के दशक के आरंभ का प्रायोगिक संचार उपग्रह था, जो बैलगाड़ी पर ले जाए जाने की तस्वीर के लिए याद किया जाता है। इस प्रश्न का जाल 1975 और 1980 की जोड़ी है, इसलिए पढ़ें कि उपग्रह पूछा गया है या प्रक्षेपण यान।
किसी भारतीय प्रक्षेपण यान द्वारा कक्षा में स्थापित किया गया पहला उपग्रह कौन-सा था?
- A.आर्यभट्ट
- B.रोहिणी
- C.इनसैट-1ए
- D.आईआरएस-1ए
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. रोहिणी
व्याख्या
सही उत्तर B, रोहिणी है। एसएलवी-3 ने इसे 18 जुलाई 1980 को श्रीहरिकोटा से कक्षा में स्थापित किया, जिसके मिशन निदेशक ए. पी. जे. अब्दुल कलाम थे, और इस उड़ान से भारत अपने उपग्रह स्वयं छोड़ने वाला देश बना। विकल्प A गलत है क्योंकि 1975 में छोड़ा गया आर्यभट्ट सोवियत रॉकेट से गया था। विकल्प C गलत है क्योंकि इनसैट-1ए 1980 के दशक के आरंभ का संचार उपग्रह था, जिसे विदेश से छोड़ा गया क्योंकि भारी भारतीय यान तब बने नहीं थे। विकल्प D गलत है क्योंकि 1988 का पहला भारतीय दूर संवेदी उपग्रह आईआरएस-1ए भी विदेशी सहयोग से छोड़ा गया था। ऐसे प्रश्न भारतीय प्रक्षेपण यान द्वारा वाक्यांश पर टिके होते हैं। एसएलवी-3 चार चरणों वाला ठोस ईंधन रॉकेट था और उसकी सफलता ने भारत को अपनी प्रक्षेपण क्षमता वाले गिने-चुने देशों में ला खड़ा किया।
इसरो का मुख्यालय किस नगर में स्थित है?
- A.नई दिल्ली
- B.अहमदाबाद
- C.बेंगलुरु
- D.तिरुवनंतपुरम
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. बेंगलुरु
व्याख्या
सही उत्तर C, बेंगलुरु है। इसरो तथा अंतरिक्ष विभाग का मुख्यालय बेंगलुरु में है, जहाँ यू आर राव उपग्रह केंद्र और टेलीमेट्री एवं ट्रैकिंग नेटवर्क इसट्रैक भी स्थित हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि नई दिल्ली में मंत्रालय हैं, इसरो का मुख्यालय नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि अहमदाबाद में अंतरिक्ष उपयोग केंद्र है, जो पेलोड बनाता है और अंतरिक्ष आँकड़ों के उपयोग विकसित करता है, तथा वहीं इन-स्पेस भी है जो निजी अंतरिक्ष गतिविधि का नियमन करती है। विकल्प D गलत है क्योंकि तिरुवनंतपुरम में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र है, जहाँ प्रक्षेपण यानों का डिज़ाइन होता है। केंद्रों को नगरों से मिलाना इस विषय का सबसे आम प्रश्न है, इसलिए पूरी तालिका याद करें। अंतरिक्ष विभाग सीधे प्रधानमंत्री के अधीन आता है, जो अपने आप में एक अलग प्रश्न के रूप में पूछा जाता है।
भारत का उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र किस स्थान पर है?
- A.श्रीहरिकोटा
- B.थुंबा
- C.हासन
- D.महेंद्रगिरि
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. श्रीहरिकोटा
व्याख्या
सही उत्तर A, श्रीहरिकोटा है, जो आंध्र प्रदेश के तट का एक द्वीप है और जहाँ से पीएसएलवी, जीएसएलवी तथा एलवीएम3 की उड़ानें होती हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि तिरुवनंतपुरम के पास थुंबा वह भूमध्यरेखीय केंद्र है जहाँ से 21 नवंबर 1963 को पहला साउंडिंग रॉकेट छोड़ा गया था, और वहाँ से उपग्रह प्रक्षेपण नहीं होते। विकल्प C गलत है क्योंकि कर्नाटक के हासन में मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी है, जो कक्षा में पहुँचे संचार उपग्रहों को नियंत्रित करती है। विकल्प D गलत है क्योंकि तमिलनाडु के महेंद्रगिरि में द्रव तथा क्रायोजेनिक इंजनों का परीक्षण होता है। प्रश्न इसलिए कठिन बनता है कि चारों विकल्प इसरो के असली स्थान हैं, इसलिए हर स्थान को उसके कार्य से जोड़ें। श्रीहरिकोटा इसलिए चुना गया कि वह भूमध्य रेखा के निकट है और उसके पूर्व में समुद्र है, जिससे रॉकेट के खर्च हो चुके चरण खुले जल में गिरते हैं।
चंद्रयान-1 किस खोज के लिए सबसे अधिक याद किया जाता है?
- A.चंद्रमा के दूरस्थ भाग के पहले चित्रों के लिए
- B.चंद्रमा पर जल के अणुओं के प्रमाण के लिए
- C.हीलियम-3 के भंडारों की खोज के लिए
- D.दक्षिणी ध्रुव के पास सफल लैंडिंग के लिए
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. चंद्रमा पर जल के अणुओं के प्रमाण के लिए
व्याख्या
सही उत्तर B, चंद्रमा पर जल के अणुओं के प्रमाण है। चंद्रयान-1 को 2008 में छोड़ा गया, उसमें मून इंपैक्ट प्रोब तथा कई देशों के उपकरण थे, और उसके आँकड़ों से चंद्र सतह पर जल के अणुओं की उपस्थिति सामने आई, जिसने चंद्रमा के बारे में समझ बदल दी। विकल्प A गलत है क्योंकि चंद्रमा के दूरस्थ भाग के चित्र बहुत पहले सोवियत तथा अमेरिकी यानों ने लिए थे। विकल्प C गलत है क्योंकि हीलियम-3 की चर्चा संभावित चंद्र संसाधन के रूप में होती है, वह इस मिशन की खोज नहीं थी। विकल्प D गलत है क्योंकि दक्षिणी ध्रुव के पास सफल लैंडिंग 2023 में चंद्रयान-3 ने की थी; चंद्रयान-1 ऑर्बिटर था और उसे उतरना था ही नहीं। यह मिशन पीएसएलवी से छोड़ा गया था और उसके आँकड़े आज भी चंद्र सतह के खनिजों का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिक प्रयोग करते हैं।
भारत का मंगल कक्षित्र मिशन किस वर्ष मंगल की कक्षा में पहुँचा था?
- A.2013
- B.2014
- C.2016
- D.2019
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 2014
व्याख्या
सही उत्तर B, 2014 है। यह यान नवंबर 2013 में पीएसएलवी से छोड़ा गया और 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में पहुँचा, जिससे भारत पहले ही प्रयास में मंगल पर सफल होने वाला पहला देश और मंगल की कक्षा तक पहुँचने वाला एशिया का पहला देश बना। विकल्प A गलत है क्योंकि 2013 प्रक्षेपण का वर्ष है, पहुँचने का नहीं, और प्रश्न इसी जाल पर बना होता है। विकल्प C गलत है क्योंकि 2016 का इस मिशन से कोई संबंध नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि 2019 चंद्रयान-2 का वर्ष है। ध्यान से पढ़ें कि प्रश्न प्रक्षेपण पूछ रहा है या कक्षा में पहुँचना, क्योंकि पेपर दोनों पूछता है और दोनों वर्ष अलग हैं। इस यान को मंगलयान भी कहा जाता है और इसमें पाँच उपकरण थे, जिनमें वह कैमरा भी था जिसके मंगल के चित्र व्यापक रूप से प्रकाशित हुए।
आदित्य-एल1 किस पिंड के अध्ययन के लिए भेजा गया भारत का पहला मिशन है?
- A.चंद्रमा
- B.मंगल
- C.सूर्य
- D.शुक्र
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. सूर्य
व्याख्या
सही उत्तर C, सूर्य है। आदित्य-एल1 को 2023 में छोड़ा गया और इसे पृथ्वी तथा सूर्य के बीच के प्रथम लैग्रेंज बिंदु के चारों ओर हेलो कक्षा में स्थापित किया गया, जहाँ से सूर्य को बिना ग्रहण की बाधा के देखा जा सकता है, और इसमें कोरोना, सौर पवन तथा सौर ज्वालाओं के अध्ययन के उपकरण हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि चंद्रमा के मिशन चंद्रयान श्रृंखला के हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि मंगल का मिशन मंगल कक्षित्र मिशन था, जिसे मंगलयान भी कहा जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि शुक्र के मिशन की चर्चा हुई है, परंतु वह यह मिशन नहीं है। नाम ही संकेत है, क्योंकि आदित्य सूर्य का नाम है, और शीर्षक में एल1 यान की स्थिति बताता है। लैग्रेंज बिंदु वे स्थान हैं जहाँ दो पिंडों का गुरुत्वाकर्षण संतुलित रहता है, और यही इस मिशन के नाम की व्याख्या है।
अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय कौन थे?
- A.राकेश शर्मा
- B.कल्पना चावला
- C.सुनीता विलियम्स
- D.रवीश मल्होत्रा
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. राकेश शर्मा
व्याख्या
सही उत्तर A, राकेश शर्मा है। वे 1984 में इंटरकॉसमॉस कार्यक्रम के अंतर्गत एक सोवियत मिशन से गए और लगभग एक सप्ताह कक्षा में रहे, और ऊपर से भारत कैसा दिखता है इस प्रश्न पर दिया उनका उत्तर बार-बार उद्धृत किया जाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि हरियाणा में जन्मी कल्पना चावला अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी की अंतरिक्ष यात्री थीं और भारतीय मूल की होते हुए भी उड़ान के समय अमेरिकी नागरिक थीं। विकल्प C गलत है क्योंकि भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स भी उसी एजेंसी के लिए गईं। विकल्प D गलत है क्योंकि रवीश मल्होत्रा 1984 की उड़ान के लिए बैकअप थे और अंतरिक्ष में नहीं गए। प्रश्न भारतीय और भारतीय मूल के व्यक्ति के अंतर पर टिका है। उनकी उड़ान सोयुज टी-11 यान से हुई थी, जो इस विषय में अगला पूछा जाने वाला तथ्य है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इसरो का गठन कब हुआ और उसका नेतृत्व पहले किसने किया?
इसरो का गठन 15 अगस्त 1969 को हुआ, और 1962 की समिति के अध्यक्ष रहे विक्रम साराभाई ने कार्यक्रम का नेतृत्व किया। उन्हें भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक कहा जाता है।
आर्यभट्ट और रोहिणी में क्या अंतर है?
1975 में छोड़ा गया आर्यभट्ट भारत का पहला उपग्रह था, परंतु वह सोवियत रॉकेट से गया। 1980 में छोड़ा गया रोहिणी वह पहला उपग्रह है जिसे किसी भारतीय प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 ने कक्षा में स्थापित किया।
मंगल कक्षित्र मिशन को कीर्तिमान क्यों माना जाता है?
क्योंकि भारत पहले ही प्रयास में 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में पहुँच गया और ऐसा करने वाला एशिया का पहला देश बना। यह यान नवंबर 2013 में पीएसएलवी से छोड़ा गया था।
चंद्रयान-3 ने क्या उपलब्धि पाई?
उसके विक्रम लैंडर ने 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफल लैंडिंग की, जिससे भारत चंद्रमा पर उतरने वाला चौथा और उस क्षेत्र में उतरने वाला पहला देश बना। उसके साथ गए रोवर का नाम प्रज्ञान था।
भारत का प्रक्षेपण केंद्र कहाँ है?
आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में, जिसका नाम सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र है। केरल का थुंबा पुराना साउंडिंग रॉकेट केंद्र है और वहाँ से उपग्रह प्रक्षेपण नहीं होते।
स्रोत
- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, मिशन एवं केंद्र — इसरो, अंतरिक्ष विभाग
- इंडिया ईयर बुक, वैज्ञानिक विकास अध्याय — प्रकाशन विभाग, भारत सरकार





