यदि एक्स-रे नलिका पर लगाई गई विभवांतर दोगुनी कर दी जाए और तंतु तथा लक्ष्य के बीच की दूरी वही रखी जाए, तो कटऑफ तरंगदैर्ध्य का क्या होगा?
- A.वह वही रहेगी
- B.वह दोगुनी हो जाएगी
- C.वह आधी हो जाएगी
- D.वह मूल तरंगदैर्ध्य की चार गुनी हो जाएगी
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है ग, वह आधी हो जाएगी। सतत एक्स-रे स्पेक्ट्रम की कटऑफ या न्यूनतम तरंगदैर्ध्य तब बनती है जब कोई इलेक्ट्रॉन लक्ष्य से एक ही टक्कर में अपनी पूरी गतिज ऊर्जा दे देता है। त्वरक वोल्टता द्वारा किए गए कार्य को फोटॉन ऊर्जा के बराबर रखने पर यह संबंध मिलता है कि न्यूनतम तरंगदैर्ध्य प्लांक नियतांक और प्रकाश वेग के गुणनफल को इलेक्ट्रॉनिक आवेश तथा वोल्टता से भाग देने पर प्राप्त होती है। अतः तरंगदैर्ध्य वोल्टता के व्युत्क्रमानुपाती है और वोल्टता दोगुनी करने पर आधी हो जाती है। इसे ड्यूएन-हंट नियम कहते हैं।
विकल्प क गलत है क्योंकि कटऑफ केवल वोल्टता पर निर्भर है, जो बदल दी गई है। विकल्प ख संबंध को उलट देता है और सबसे सामान्य भूल है। विकल्प घ व्युत्क्रम वर्ग निर्भरता से निकलता, जो यहाँ लागू नहीं होती। यह भी ध्यान दें कि तंतु और लक्ष्य की दूरी तथा लक्ष्य की धातु तीव्रता और अभिलक्षणिक रेखाओं को प्रभावित करती है, कटऑफ तरंगदैर्ध्य को नहीं।
पूरा लेख पढ़ें: चिकित्सा निदान तकनीक: एक्स-रे, सीटी, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंएक्स-रे की खोज 1895 में किस वैज्ञानिक ने की थी?
- A.मैरी क्यूरी
- B.विल्हेम कॉनराड रोएंटजेन
- C.हेनरी बेकरल
- D.जोसेफ जॉन थॉमसन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है ख, विल्हेम कॉनराड रोएंटजेन। नवंबर 1895 में वुर्ट्सबर्ग विश्वविद्यालय में विसर्जन नलिका पर काम करते हुए रोएंटजेन ने देखा कि प्रतिदीप्त लवण से लेपित एक पर्दा नलिका ढकी होने पर भी चमक उठता है, और उन्होंने इसका कारण एक अज्ञात भेदक विकिरण को बताया जिसे उन्होंने एक्स-विकिरण नाम दिया। इसके लिए उन्हें 1901 में दिया गया भौतिकी का सर्वप्रथम नोबेल पुरस्कार मिला।
विकल्प क, मैरी क्यूरी, ने पियरे क्यूरी के साथ पोलोनियम और रेडियम की खोज की और 1903 में भौतिकी तथा 1911 में रसायन का नोबेल पुरस्कार पाया, पर उनका कार्य रेडियोसक्रियता पर था, एक्स-रे पर नहीं। विकल्प ग, हेनरी बेकरल, ने 1896 में यूरेनियम लवणों में प्राकृतिक रेडियोसक्रियता खोजी, जो रोएंटजेन के एक वर्ष बाद थी और जिसकी प्रेरणा एक्स-रे की ही खबर से मिली थी। विकल्प घ, जे. जे. थॉमसन, ने 1897 में इलेक्ट्रॉन की खोज की। क्रम याद रखें: 1895 एक्स-रे, 1896 रेडियोसक्रियता, 1897 इलेक्ट्रॉन।
निम्नलिखित में से कौन-सी प्रतिबिंबन तकनीक आयनकारी विकिरण का उपयोग नहीं करती?
- A.साधारण एक्स-रे रेडियोग्राफी
- B.संगणित टोमोग्राफी
- C.चुंबकीय अनुनाद प्रतिबिंबन
- D.पॉज़िट्रॉन उत्सर्जन टोमोग्राफी
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है ग, चुंबकीय अनुनाद प्रतिबिंबन। एमआरआई शरीर के हाइड्रोजन नाभिकों को प्रबल स्थिर चुंबकीय क्षेत्र में रखकर रेडियो आवृत्ति स्पंदों से विचलित करती है, और ये स्पंद विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम के कम ऊर्जा वाले हानिरहित भाग में आते हैं। इसमें कोई आयनकारी विकिरण नहीं होता, इसीलिए चिकित्सक जितनी बार चाहे एमआरआई दोहरा सकता है।
विकल्प क, साधारण रेडियोग्राफी, एक्स-रे का उपयोग करती है, जो परिभाषा से आयनकारी हैं क्योंकि उनमें परमाणुओं से इलेक्ट्रॉन निकालने भर की ऊर्जा होती है। विकल्प ख, संगणित टोमोग्राफी, उन्हीं एक्स-रे को अनेक कोणों से भेजती है और एक फिल्म से अधिक मात्रा देती है। विकल्प घ, पॉज़िट्रॉन उत्सर्जन टोमोग्राफी, में रेडियोसक्रिय अनुचिह्न दिया जाता है जिसके पॉज़िट्रॉन इलेक्ट्रॉन से मिलकर गामा फोटॉन छोड़ते हैं, अतः वह भी आयनकारी है। अल्ट्रासाउंड दूसरी ऐसी सामान्य तकनीक है जिसमें आयनकारी विकिरण नहीं होता, इसी कारण गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड और एमआरआई को वरीयता मिलती है।
हाउंसफील्ड मात्रक, जिस पैमाने पर जल शून्य और वायु ऋण एक हज़ार है, किस प्रतिबिंबन तकनीक में प्रयुक्त होता है?
- A.चुंबकीय अनुनाद प्रतिबिंबन
- B.संगणित टोमोग्राफी
- C.अल्ट्रासोनोग्राफी
- D.विद्युत हृद्लेखन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है ख, संगणित टोमोग्राफी। गॉडफ्रे हाउंसफील्ड के नाम पर बना यह मात्रक बताता है कि ऊतक का कोई सूक्ष्म आयतन एक्स-रे को कितनी प्रबलता से क्षीण करता है, और इस पैमाने पर परिभाषा से जल शून्य तथा वायु ऋण एक हज़ार है। वसा शून्य से नीचे, कोमल ऊतक कुछ ऊपर, और घनी अस्थि एक हज़ार तथा उससे आगे जाती है, जिससे रेडियोलॉजिस्ट केवल संख्याओं से ऊतक का प्रकार आँक लेता है।
विकल्प क गलत है क्योंकि एमआरआई चित्र संकेत तीव्रता और अनुक्रम भारण से बताए जाते हैं, किसी निश्चित परम पैमाने से नहीं। विकल्प ग गलत है क्योंकि अल्ट्रासाउंड चित्र प्रतिध्वनिता से वर्णित होते हैं, जिसमें अतिप्रतिध्वनिक और अप्रतिध्वनिक जैसे पद आते हैं, और उपयोगी माप डॉप्लर प्रवाह वेग है। विकल्प घ गलत है क्योंकि विद्युत हृद्लेखन समय के सापेक्ष मिलीवोल्ट में वोल्टता अंकित करता है और वह लेखाचित्र है, चित्र नहीं। जोड़ियाँ याद रखें: हाउंसफील्ड सीटी से, टेस्ला एमआरआई से, मेगाहर्ट्ज़ अल्ट्रासाउंड से।
नैदानिक चुंबकीय अनुनाद प्रतिबिंबन का संकेत मुख्यतः शरीर के जल और वसा में उपस्थित किस तत्व के नाभिकों से मिलता है?
- A.कार्बन
- B.हाइड्रोजन
- C.सोडियम
- D.फॉस्फोरस
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है ख, हाइड्रोजन। साधारण हाइड्रोजन का नाभिक एक अकेला प्रोटॉन है, जिसमें चक्रण और इसलिए चुंबकीय आघूर्ण होता है, और शरीर मुख्यतः जल तथा वसा से बना होने के कारण हाइड्रोजन ऐसा सबसे बहुल नाभिक है। यही बहुलता और प्रबल चुंबकीय अनुक्रिया मिलकर साधारण एमआरआई को वस्तुतः प्रोटॉन प्रतिबिंबन बना देती है।
विकल्प क, कार्बन, शरीर में बहुल है पर उसका सामान्य समस्थानिक कार्बन-12 शुद्ध नाभिकीय चक्रण नहीं रखता और कोई संकेत नहीं देता; केवल दुर्लभ कार्बन-13 चुंबकीय रूप से सक्रिय है और शोध स्पेक्ट्रमिकी में काम आता है। विकल्प ग, सोडियम, और विकल्प घ, फॉस्फोरस, के नाभिक चुंबकीय रूप से सक्रिय हैं, और सोडियम-23 तथा फॉस्फोरस-31 का प्रतिबिंबन विशिष्ट शोध कार्य में होता भी है, पर ऊतक में उनकी सांद्रता सामान्य नैदानिक जाँच के लिए बहुत कम है। श्रृंखला याद रखें: हाइड्रोजन प्रोटॉन, प्रबल स्थिर क्षेत्र, रेडियो आवृत्ति स्पंद, शिथिलन संकेत, चित्र।
एमआरआई स्कैनर के स्थिर चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता किस मात्रक में मापी जाती है?
- A.सीवर्ट
- B.टेस्ला
- C.बेकरल
- D.ग्रे
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है ख, टेस्ला। टेस्ला चुंबकीय फ्लक्स घनत्व का एसआई मात्रक है, और नैदानिक एमआरआई स्कैनर सामान्यतः डेढ़ या तीन टेस्ला पर चलते हैं, जिसके लिए द्रव हीलियम से ठंडी रखी गई अतिचालक कुंडली काम करती है। तुलना के लिए, पृथ्वी का अपना चुंबकीय क्षेत्र कुछ दसियों माइक्रोटेस्ला के क्रम का है, इसीलिए स्कैनर कक्ष में ढीली लोहचुंबकीय वस्तुएँ वर्जित हैं।
विकल्प क, सीवर्ट, आयनकारी विकिरण की जैविक रूप से भारित तुल्य मात्रा मापता है, जो एमआरआई में अप्रासंगिक है क्योंकि उसमें विकिरण नहीं होता। विकल्प ग, बेकरल, रेडियोसक्रिय स्रोत की सक्रियता को प्रति सेकंड एक विघटन के रूप में मापता है। विकल्प घ, ग्रे, आयनकारी विकिरण की अवशोषित मात्रा को प्रति किलोग्राम एक जूल के रूप में मापता है। ये तीनों विकिरण मात्रक एक्स-रे, सीटी और नाभिकीय चिकित्सा के हैं; एमआरआई का मात्रक केवल टेस्ला है। फ्लक्स घनत्व का पुराना मात्रक गाउस एक टेस्ला का दस-हज़ारवाँ भाग है।