माधव मेनन स्मृति व्याख्यान: सीजेआई सूर्य कांत ने दूसरा संस्करण खोला
दूसरा माधव मेनन स्मृति व्याख्यान नई दिल्ली में हुआ, जिसका उद्घाटन मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने किया और व्याख्यान न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने दिया।

चर्चा में क्यों
5 अक्टूबर 2026 को डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र ने कॉमनवेल्थ लीगल एजुकेशन एसोसिएशन के साथ नई दिल्ली में दूसरा प्रोफेसर (डॉ.) एन. आर. माधव मेनन स्मृति व्याख्यान कराया। उद्घाटन भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने किया और व्याख्यान न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने दिया।
दूसरा प्रोफेसर (डॉ.) एन. आर. माधव मेनन स्मृति व्याख्यान 5 अक्टूबर 2026 की शाम नई दिल्ली के डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में हुआ। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीन चलने वाले इस केंद्र ने कॉमनवेल्थ लीगल एजुकेशन एसोसिएशन के साथ मिलकर यह व्याख्यान कराया।
कौन शामिल हुआ
कार्यक्रम का उद्घाटन भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने किया। व्याख्यान न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने दिया, जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश तथा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। प्रोफेसर माधव मेनन के जीवन और योगदान पर विशेष विचार आर. वेंकटरमणी ने रखे, जो भारत के महान्यायवादी हैं। भारतीय विधि संस्थान के वरिष्ठ प्रोफेसर, एसोसिएशन के अध्यक्ष तथा भारत के 21वें विधि आयोग के सदस्य प्रोफेसर (डॉ.) एस. शिवकुमार ने भी सभा को संबोधित किया।
विषय
व्याख्यान का विषय 'जजिंग विद कंपैशन: ह्यूमन अंडरस्टैंडिंग इन द प्रैक्टिस ऑफ लॉ' रखा गया था। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि न्याय देने में मानवीय और करुणा भरे रुख की जरूरत है, मगर करुणा कानून के सिद्धांतों, निष्पक्षता तथा संवैधानिक मूल्यों में टिकी रहनी चाहिए। न्यायाधीशों, विधि के शिक्षकों और वकीलों की सभा ने इस मौके पर न्यायिक प्रक्रिया के मानवीय पक्ष पर विचार किया।
दो पुस्तकों का विमोचन
| पुस्तक | लेखक |
| इंडियन पर्सनल लॉ: यूनिटी एंड डाइवर्सिटी | प्रोफेसर (डॉ.) एस. शिवकुमार |
| इकोनॉमिक्स एंड लॉ इन कॉन्टेक्स्ट | प्रोफेसर (डॉ.) एस. शिवकुमार, सौगत तालुकदार के साथ |
मुख्य न्यायाधीश ने समारोह में दोनों पुस्तकें जारी कीं। दोनों में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की भूमिका है। पुस्तकों का परिचय थॉमसन रॉयटर्स के प्रकाशक तथा साउथशोर इनोवेशंस प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी गौरीशंकर नटेसन, गुरुग्राम के एसजीटी विश्वविद्यालय की विधि विद्यालय की सहायक प्रोफेसर नबीला जेहरा और बर्दवान विश्वविद्यालय के सरकारी विधि शिक्षा केंद्र के डॉ. सौगत तालुकदार ने दिया।
व्याख्यान क्यों होता है
यह श्रृंखला प्रोफेसर (डॉ.) एन. आर. माधव मेनन की याद में होती है, जो विधि शिक्षक, विद्वान और संस्था निर्माता थे और जिनके काम ने देश में विधि शिक्षा की शक्ल बदल दी। व्याख्यान का मकसद उनकी बौद्धिक विरासत आगे बढ़ाना है, जिसके लिए न्यायाधीशों, विधि के विद्वानों, वकीलों और छात्रों के बीच कानून, न्याय तथा विधि शिक्षा पर संवाद चलता रहे। केंद्र के निदेशक कर्नल आकाश पाटिल ने स्वागत भाषण दिया और एसोसिएशन की संयुक्त महासचिव डॉ. रुचि शर्मा डी. ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा।
महत्वपूर्ण तथ्य
| आयोजन | दूसरा प्रोफेसर (डॉ.) एन. आर. माधव मेनन स्मृति व्याख्यान |
|---|---|
| विषय | जजिंग विद कंपैशन: ह्यूमन अंडरस्टैंडिंग इन द प्रैक्टिस ऑफ लॉ |
| स्थान | डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र, नई दिल्ली |
| आयोजक | डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र तथा कॉमनवेल्थ लीगल एजुकेशन एसोसिएशन |
| मंत्रालय | सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय |
| उद्घाटन | भारत के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति सूर्य कांत |
| व्याख्यान | न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, कार्यकारी अध्यक्ष, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण |
| महान्यायवादी | आर. वेंकटरमणी |
| जारी पुस्तकें | इंडियन पर्सनल लॉ: यूनिटी एंड डाइवर्सिटी; इकोनॉमिक्स एंड लॉ इन कॉन्टेक्स्ट |
| दोनों के लेखक | प्रोफेसर (डॉ.) एस. शिवकुमार, एसोसिएशन के अध्यक्ष |
परीक्षा की दृष्टि से
संस्करण (दूसरा), विषय ('जजिंग विद कंपैशन: ह्यूमन अंडरस्टैंडिंग इन द प्रैक्टिस ऑफ लॉ'), स्थान (डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र, नई दिल्ली), आयोजक (केंद्र तथा कॉमनवेल्थ लीगल एजुकेशन एसोसिएशन) और केंद्र का मंत्रालय याद रखें। उद्घाटन करने वाले (मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत), व्याख्यान देने वाले (न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष), महान्यायवादी आर. वेंकटरमणी तथा जारी दोनों पुस्तकें और उनके लेखक भी नोट करें।
अभ्यास प्रश्न
डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में दूसरा प्रोफेसर (डॉ.) एन. आर. माधव मेनन स्मृति व्याख्यान किसने दिया?
- A.मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत
- B.न्यायमूर्ति विक्रम नाथ
- C.महान्यायवादी आर. वेंकटरमणी
- D.प्रोफेसर एस. शिवकुमार
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. न्यायमूर्ति विक्रम नाथ
व्याख्या
सही उत्तर न्यायमूर्ति विक्रम नाथ हैं, जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश तथा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। उन्होंने करुणा के साथ न्याय देने के विषय पर व्याख्यान दिया और कहा कि न्याय का मानवीय रुख कानून के सिद्धांतों, निष्पक्षता तथा संवैधानिक मूल्यों में टिका रहना चाहिए। विकल्प A भारत के मुख्य न्यायाधीश का नाम है, जिन्होंने कार्यक्रम का उद्घाटन किया और वहीं दो विधि पुस्तकें जारी कीं, मगर व्याख्यान उन्होंने नहीं दिया। विकल्प C भारत के महान्यायवादी का नाम है, जिन्होंने प्रोफेसर माधव मेनन के जीवन और योगदान पर विशेष विचार रखे। विकल्प D उन दोनों पुस्तकों के लेखक तथा कॉमनवेल्थ लीगल एजुकेशन एसोसिएशन के अध्यक्ष का नाम है, जिन्होंने भी सभा को संबोधित किया। चारों कार्यक्रम में मौजूद थे, इसलिए सवाल इसी पर टिका है कि व्याख्यान किसने दिया।
दूसरे माधव मेनन स्मृति व्याख्यान का विषय क्या था?
- A.नए भारत के लिए विधि शिक्षा
- B.अंतिम नागरिक तक न्याय की पहुंच
- C.जजिंग विद कंपैशन: ह्यूमन अंडरस्टैंडिंग इन द प्रैक्टिस ऑफ लॉ
- D.इंडियन पर्सनल लॉ: यूनिटी एंड डाइवर्सिटी
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. जजिंग विद कंपैशन: ह्यूमन अंडरस्टैंडिंग इन द प्रैक्टिस ऑफ लॉ
व्याख्या
सही उत्तर जजिंग विद कंपैशन: ह्यूमन अंडरस्टैंडिंग इन द प्रैक्टिस ऑफ लॉ है। डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र ने कॉमनवेल्थ लीगल एजुकेशन एसोसिएशन के साथ यह व्याख्यान कराया, जिसमें न्यायाधीश, विधि के शिक्षक और वकील जुटे और न्यायिक प्रक्रिया के मानवीय पक्ष तथा न्याय देने में करुणा, सहानुभूति और संवेदनशीलता की जगह पर विचार हुआ। विकल्प D जाल है, क्योंकि वह उसी समारोह में जारी दो पुस्तकों में से एक का नाम है, व्याख्यान का विषय नहीं। विकल्प A और B दूसरे विधि सम्मेलनों तथा विधिक सहायता अभियानों में चलने वाले वाक्य हैं और इस आयोजन का विषय नहीं हैं। यह व्याख्यान श्रृंखला प्रोफेसर एन. आर. माधव मेनन की याद में होती है, जिनके काम ने देश में विधि शिक्षा की शक्ल बदली, इसलिए विषय, स्थान और संस्करण साथ याद रखने चाहिए।
डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र किस मंत्रालय के अधीन काम करता है?
- A.विधि एवं न्याय मंत्रालय
- B.सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
- C.संस्कृति मंत्रालय
- D.शिक्षा मंत्रालय
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
व्याख्या
सही उत्तर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय है, जिसके अधीन नई दिल्ली का डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र चलता है और जिसने वहां दूसरे माधव मेनन स्मृति व्याख्यान की जानकारी दी। विकल्प A लुभाता है क्योंकि आयोजन कानून और न्याय पर था तथा उसमें मुख्य न्यायाधीश, उच्चतम न्यायालय के एक न्यायाधीश और महान्यायवादी मौजूद रहे, मगर यह केंद्र उस मंत्रालय के अधीन नहीं है। विकल्प C और D उन मंत्रालयों के नाम हैं जो राजधानी में दूसरे सांस्कृतिक तथा शैक्षिक संस्थान चलाते हैं, इस केंद्र से उनका नाता नहीं है। केंद्र ने यह व्याख्यान कॉमनवेल्थ लीगल एजुकेशन एसोसिएशन के साथ मिलकर कराया, इसके निदेशक कर्नल आकाश पाटिल ने स्वागत भाषण दिया और एसोसिएशन की संयुक्त महासचिव ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा। इसलिए केवल विकल्प B सही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दूसरे माधव मेनन स्मृति व्याख्यान का विषय क्या था?
विषय 'जजिंग विद कंपैशन: ह्यूमन अंडरस्टैंडिंग इन द प्रैक्टिस ऑफ लॉ' था। व्याख्यान उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने नई दिल्ली के डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में दिया।
व्याख्यान में कौन सी पुस्तकें जारी हुईं?
दो पुस्तकें, 'इंडियन पर्सनल लॉ: यूनिटी एंड डाइवर्सिटी' और 'इकोनॉमिक्स एंड लॉ इन कॉन्टेक्स्ट'। दोनों के लेखक प्रोफेसर (डॉ.) एस. शिवकुमार हैं, दूसरी सौगत तालुकदार के साथ। मुख्य न्यायाधीश ने इन्हें जारी किया।
प्रोफेसर एन. आर. माधव मेनन कौन थे?
वे विधि शिक्षक, विद्वान और संस्था निर्माता थे, जिनके काम ने देश में विधि शिक्षा के विकास में बड़ी भूमिका निभाई। उनकी विरासत आगे बढ़ाने के लिए यह स्मृति व्याख्यान श्रृंखला होती है।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2319413 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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