बर्फ की गलन की गुप्त ऊष्मा का लगभग मान है
- A.22.4 कैलोरी प्रति ग्राम
- B.80 कैलोरी प्रति ग्राम
- C.540 कैलोरी प्रति ग्राम
- D.1000 कैलोरी प्रति ग्राम
सही उत्तर
B. 80 कैलोरी प्रति ग्राम
व्याख्या
सही उत्तर B, 80 कैलोरी प्रति ग्राम है, यानी लगभग 334 जूल प्रति ग्राम। यह वह ऊष्मा है जो 0 डिग्री सेल्सियस की एक ग्राम बर्फ को उसी ताप का एक ग्राम जल बनने के लिए सोखनी पड़ती है; पिघलते समय ताप तनिक भी नहीं बढ़ता, क्योंकि ऊर्जा हाइड्रोजन आबंध वाले जालक को तोड़ने में लगती है। जल जमने पर उतनी ही ऊष्मा मुक्त होती है। विकल्प C, 540 कैलोरी प्रति ग्राम, जल के वाष्पन की गुप्त ऊष्मा है, यानी 100 डिग्री सेल्सियस के एक ग्राम जल को उसी ताप की भाप बनाने की ऊष्मा; अभ्यर्थी इन दोनों मानों को अक्सर बदल देते हैं, इसलिए गलन के लिए 80 और क्वथन के लिए 540 पक्का कर लें। विकल्प A, 22.4, ऊष्मा का मान ही नहीं है, बल्कि 0 डिग्री सेल्सियस और एक वायुमंडल पर गैस का लीटर में मोलर आयतन है। विकल्प D बहुत बड़ा है। गलन की गुप्त ऊष्मा अधिक होने के कारण बर्फ कुशल शीतलक है और पेय को देर तक ठंडा रखती है।
पूरा लेख पढ़ें: पदार्थ की अवस्थाएं और गुण: नोट्स और प्रश्न
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंपदार्थ की एक अवस्था को दूसरी अवस्था में कैसे बदला जा सकता है?
- A.विकिरित ऊष्मा ऊर्जा का अवशोषण करके
- B.विद्युत अपघट्यों का उपयोग करके
- C.दाब बढ़ाकर
- D.अम्ल और क्षार का उपयोग करके
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. विकिरित ऊष्मा ऊर्जा का अवशोषण करके
व्याख्या
सही उत्तर A, विकिरित ऊष्मा ऊर्जा का अवशोषण करके है। अवस्था परिवर्तन कणों की ऊर्जा से तय होता है। जब ठोस ऊष्मा सोखता है तो उसके कण अधिक तेजी से कंपन करते हैं, जब तक जालक में बांधने वाला बल पार नहीं हो जाता और वह पिघल जाता है; और ऊष्मा मिलने पर द्रव के कण वाष्प बनकर निकल जाते हैं। ऊष्मा हटाने पर दोनों चरण उलट जाते हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि विद्युत अपघट्य विलयन में विद्युत चालन करते हैं और रासायनिक परिवर्तन में भाग लेते हैं, अवस्था नहीं बदलते। विकल्प D इसी कारण गलत है, क्योंकि अम्ल और क्षार रासायनिक अभिक्रिया करके नए पदार्थ बनाते हैं, भौतिक अवस्था परिवर्तन नहीं। विकल्प C लुभावना जाल है: दाब का महत्व है और गैस को पर्याप्त दबाने पर वह द्रव बन जाती है, पर यह विकल्प अपूर्ण है क्योंकि केवल ठोस या द्रव पर दाब बढ़ाने से अवस्था नहीं बदलती, उलटे क्वथनांक बढ़ जाता है। प्रश्न सामान्य कारक ऊष्मा पूछ रहा है।
अल्बर्ट आइंस्टाइन ने भारतीय भौतिकशास्त्री सत्येंद्र नाथ बोस के क्वांटम विवेचन के आधार पर पदार्थ की नई अवस्था बोस-आइंस्टाइन संघनित (बीईसी) की भविष्यवाणी किस वर्ष की थी?
- A.1935
- B.1924
- C.1930
- D.1919
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1924
व्याख्या
सही उत्तर B, 1924 है। 1924 में सत्येंद्र नाथ बोस ने अल्बर्ट आइंस्टाइन को एक शोधपत्र भेजा जिसमें अविभेद्य प्रकाश क्वांटा की गणना से प्लांक का विकिरण नियम व्युत्पन्न किया गया था। आइंस्टाइन ने तुरंत समझ लिया कि यही सांख्यिकी परमाणुओं पर भी लागू होती है, उन्होंने शोधपत्र का जर्मन में अनुवाद कराकर प्रकाशित कराया और उसे आगे बढ़ाया, तथा भविष्यवाणी की कि ऐसे कणों की विरल गैस को परम शून्य के निकट ठंडा करने पर वह एक ही निम्नतम क्वांटम अवस्था में सिमट जाएगी। वही अवस्था बोस-आइंस्टाइन संघनित है और वह सांख्यिकी बोस-आइंस्टाइन सांख्यिकी कहलाती है। विकल्प A, 1935, क्वांटम उलझाव पर आइंस्टाइन-पोडोल्स्की-रोजन शोधपत्र का वर्ष है, इस भविष्यवाणी का नहीं। विकल्प D, 1919, उस सूर्य ग्रहण प्रेक्षण का वर्ष है जिसने सामान्य आपेक्षिकता की पुष्टि की। विकल्प C, 1930, का संघनित से कोई संबंध नहीं। क्रम याद रखें: 1924 में बोस की सांख्यिकी और आइंस्टाइन की भविष्यवाणी, 1995 में प्रयोगशाला में पहला संघनित, और 2001 में उसके लिए भौतिकी का नोबेल पुरस्कार।
पूर्ण गैस के लिए बॉयल के नियम के अनुसार
- A.T2/T1 = P2/P1, यदि V स्थिर रखा जाए
- B.T2/T1 = V2/V1, यदि P स्थिर रखा जाए
- C.P1/P2 = V2/V1, यदि T स्थिर रखा जाए
- D.इनमें से कोई नहीं
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. P1/P2 = V2/V1, यदि T स्थिर रखा जाए
व्याख्या
सही उत्तर C, P1/P2 = V2/V1 यदि T स्थिर रखा जाए है। बॉयल का नियम स्थिर ताप पर गैस की निश्चित मात्रा पर लागू होता है और कहता है कि दाब आयतन के व्युत्क्रमानुपाती होता है, इसलिए दोनों का गुणनफल स्थिर रहता है: P1 गुणा V1 बराबर P2 गुणा V2। इस समता को पुनर्व्यवस्थित करने पर ठीक वही अनुपात मिलता है जो विकल्प C में है, यानी पहला दाब दूसरे दाब से उसी अनुपात में है जिसमें दूसरा आयतन पहले आयतन से है। विकल्प A दाब नियम है, जिसका श्रेय अक्सर गे-लुसाक को दिया जाता है: स्थिर आयतन पर गैस का दाब उसके परम ताप के समानुपाती होता है। विकल्प B चार्ल्स का नियम है: स्थिर दाब पर आयतन परम ताप के समानुपाती होता है। दोनों अन्य नियमों के सही कथन हैं, इसीलिए वे यहां अच्छे जाल बनते हैं, पर कोई भी बॉयल का नियम नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि विकल्प C सही कथन है। ध्यान दें कि A और B में ताप केल्विन में होना चाहिए, डिग्री सेल्सियस में नहीं।
जल का घनत्व किस ताप पर अधिकतम होता है?
- A.0 डिग्री सेल्सियस
- B.4 डिग्री सेल्सियस
- C.10 डिग्री सेल्सियस
- D.100 डिग्री सेल्सियस
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 4 डिग्री सेल्सियस
व्याख्या
सही उत्तर B, 4 डिग्री सेल्सियस है। अन्य द्रवों की तरह जल भी ऊंचे ताप से ठंडा होने पर सिकुड़ता है, पर केवल 4 डिग्री सेल्सियस तक। उससे नीचे हाइड्रोजन आबंध अणुओं को एक खुली, पिंजरे जैसी व्यवस्था में जकड़ने लगते हैं और जल फिर फैलने लगता है। इसलिए उसका घनत्व 4 डिग्री सेल्सियस पर सर्वाधिक होता है, जहां एक घन सेंटीमीटर का द्रव्यमान लगभग एक ग्राम होता है। इस व्यवहार को जल का असामान्य प्रसार कहते हैं। विकल्प A, 0 डिग्री सेल्सियस, हिमांक है, जहां जल पहले ही फैल चुका होता है और बनी बर्फ लगभग नौ प्रतिशत कम घनी होती है, इसलिए तैरती है। विकल्प C, 10 डिग्री सेल्सियस, अधिकतम घनत्व के ताप से ऊपर है, इसलिए वहां जल कुछ कम घना होता है। विकल्प D, 100 डिग्री सेल्सियस, क्वथनांक है, जहां द्रव रूप में जल का घनत्व सबसे कम होता है। इसका व्यावहारिक परिणाम यह है कि तालाब ऊपर से नीचे की ओर जमता है और तली 4 डिग्री सेल्सियस पर रहती है, जिससे मछलियां जीवित रहती हैं।
निम्नलिखित में से ब्रह्मांड में पदार्थ की सर्वाधिक पाई जाने वाली अवस्था कौन सी है?
- A.ठोस
- B.द्रव
- C.गैस
- D.प्लाज्मा
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. प्लाज्मा
व्याख्या
सही उत्तर D, प्लाज्मा है। प्लाज्मा मुक्त इलेक्ट्रॉनों और धनायनों का गर्म, विद्युत चालक मिश्रण है, जो गैस को गर्म करने या प्रबल आयनन से बनता है। सूर्य सहित सभी तारे प्लाज्मा से बने हैं, और चूंकि तारे तथा उनके बीच की आयनित गैस ब्रह्मांड के दृश्य पदार्थ का अत्यधिक बड़ा भाग रखते हैं, इसलिए प्लाज्मा सर्वाधिक पाई जाने वाली अवस्था है। पृथ्वी पर यह असामान्य है और तड़ित, ध्रुवीय प्रकाश, विद्युत आर्क की ज्वाला, नियॉन साइन तथा प्रतिदीप्ति नलिकाओं में दिखती है। विकल्प A, ठोस, ग्रहों, उपग्रहों और धूल की अवस्था है, जो ब्रह्मांडीय पदार्थ का अत्यंत छोटा अंश है। विकल्प B, द्रव, ब्रह्मांड में उससे भी विरल है, क्योंकि द्रव के अस्तित्व के लिए ताप और दाब की संकरी सीमा चाहिए। विकल्प C, गैस, प्रायः दिया जाने वाला गलत उत्तर है, क्योंकि अंतरतारकीय बादलों में उदासीन गैस होती है, पर ब्रह्मांड का कहीं अधिक भाग आयनित है, उदासीन नहीं। प्लाज्मा को अक्सर पदार्थ की चौथी अवस्था कहा जाता है।