उत्तर प्रदेश विधानसभा और विधान परिषद: सीटें और शक्तियाँ
यूपीपीएससी और एसएससी परीक्षाओं के लिए उत्तर प्रदेश विधानमंडल पर नोट्स: 403 विधानसभा सीटें, 100 सदस्यीय परिषद, कार्यकाल, योग्यताएँ, धन विधेयक और गणपूर्ति।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

उत्तर प्रदेश भारत के उन कुछ राज्यों में है जहाँ विधानमंडल के दो सदन हैं। अनुच्छेद 168 कहता है कि राज्य के विधानमंडल में राज्यपाल तथा एक या दो सदन होंगे, और उत्तर प्रदेश में ये दो सदन विधानसभा तथा विधान परिषद हैं। दोनों लखनऊ के विधान भवन में बैठते हैं और इनसे जुड़े उपबंध संविधान के अनुच्छेद 168 से 212 तक फैले हैं। चूँकि देश की सबसे बड़ी विधानसभा और सबसे बड़ी विधान परिषद इसी राज्य में है, इसलिए इसके आँकड़े यूपीपीएससी, यूपीएसएसएससी, यूपी पुलिस और एसएससी के प्रश्नपत्रों में लगभग हर वर्ष पूछे जाते हैं, और जिस विद्यार्थी के पास संख्याएँ तथा अनुच्छेद तैयार हैं उसके लिए ये सरल अंक हैं।
विधानसभा
अनुच्छेद 170 के अनुसार विधानसभा में अधिकतम 500 और न्यूनतम 60 सदस्य होंगे, जो क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने जाएँगे। उत्तर प्रदेश विधानसभा में 403 निर्वाचित सदस्य हैं, जो देश में सबसे अधिक है; 9 नवंबर 2000 को पर्वतीय जिले नए राज्य उत्तरांचल, अब उत्तराखंड, में जाने तक यहाँ 425 सीटें थीं। 2008 से प्रभावी परिसीमन के बाद 403 में से 84 सीटें अनुसूचित जातियों और 2 सीटें अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित हैं। आंग्ल-भारतीय सदस्य के मनोनयन वाली एक सीट जनवरी 2020 में समाप्त हो गई, जब अनुच्छेद 333 के अंतर्गत इस समुदाय का आरक्षण आगे नहीं बढ़ाया गया। अनुच्छेद 172 के अनुसार विधानसभा अपनी पहली बैठक की तारीख से पाँच वर्ष तक रहती है, यदि पहले विघटित न हो जाए, और आपात की उद्घोषणा लागू रहते हुए संसद इसे एक बार में एक वर्ष तक बढ़ा सकती है, परंतु उद्घोषणा समाप्त होने के छह मास से अधिक नहीं। अनुच्छेद 173 के अनुसार उम्मीदवार की आयु कम से कम 25 वर्ष होनी चाहिए। यह राज्य लोकसभा में 80 और राज्यसभा में 31 सदस्य भेजता है, जो किसी भी राज्य से अधिक है।
विधान परिषद
अनुच्छेद 171 विधान परिषद की सदस्य संख्या को विधानसभा की संख्या के एक-तिहाई तक सीमित करता है और न्यूनतम 40 रखता है। उत्तर प्रदेश विधान परिषद में 100 सदस्य हैं, जो किसी भी भारतीय राज्य की सबसे बड़ी परिषद है। इसका गठन अनुच्छेद 171(3) के अनुपातों के अनुसार होता है: एक-तिहाई नगरपालिकाओं और जिला बोर्डों जैसी स्थानीय संस्थाओं के निर्वाचकों द्वारा, एक-तिहाई विधानसभा के सदस्यों द्वारा उन व्यक्तियों में से जो विधानसभा के सदस्य नहीं हैं, एक-बारहवाँ तीन वर्ष पुराने स्नातकों द्वारा, एक-बारहवाँ माध्यमिक विद्यालय से नीचे के स्तर के न होने वाले शिक्षकों द्वारा, और शेष एक-छठा भाग राज्यपाल द्वारा साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारी आंदोलन तथा समाज सेवा के विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव वाले व्यक्तियों में से मनोनीत। सदस्य का कार्यकाल छह वर्ष का होता है, प्रत्येक दूसरे वर्ष एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं, और परिषद एक स्थायी सदन है जिसका विघटन नहीं होता। सदस्यता के लिए न्यूनतम आयु 30 वर्ष है। अनुच्छेद 169 संसद को विधि द्वारा परिषद बनाने या समाप्त करने की शक्ति देता है, परंतु तभी जब राज्य की विधानसभा अपनी कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित कर दे।
दोनों सदनों की तुलना
| बिंदु | विधानसभा | विधान परिषद |
|---|---|---|
| उत्तर प्रदेश में संख्या | 403 निर्वाचित सदस्य | 100 सदस्य |
| चुनाव का ढंग | निर्वाचन क्षेत्रों से प्रत्यक्ष निर्वाचन | अनुच्छेद 171 के अनुपातों में अप्रत्यक्ष निर्वाचन और मनोनयन |
| कार्यकाल | पाँच वर्ष, विघटन संभव | सदस्य का छह वर्ष; सदन कभी विघटित नहीं होता |
| न्यूनतम आयु | 25 वर्ष | 30 वर्ष |
| पीठासीन अधिकारी | अध्यक्ष और उपाध्यक्ष (अनुच्छेद 178) | सभापति और उपसभापति (अनुच्छेद 182) |
| धन विधेयक | केवल यहीं, राज्यपाल की सिफारिश पर पेश | केवल सिफारिश कर सकती है, 14 दिन में लौटाना होगा |
विधेयक कानून कैसे बनता है
साधारण विधेयक किसी भी सदन में आ सकता है, परंतु परिषद उसे रोक नहीं सकती। अनुच्छेद 197 परिषद को विधानसभा से आए विधेयक को पहली बार अधिकतम तीन मास तक रखने देता है; यदि विधानसभा उसे दोबारा पारित कर दे और परिषद दूसरी बार विलंब करे, तो वह विलंब एक मास से अधिक नहीं हो सकता और उसके बाद विधेयक दोनों सदनों से पारित माना जाता है। इस प्रकार साधारण विधेयक पर विधान परिषद की अधिकतम शक्ति चार मास का विलंब है, और राज्य विधानमंडल के लिए संविधान संयुक्त बैठक की कोई व्यवस्था नहीं करता, जो संसद से सबसे स्पष्ट अंतर है। अनुच्छेद 199 में परिभाषित धन विधेयक केवल विधानसभा में और केवल अनुच्छेद 207 के अंतर्गत राज्यपाल की सिफारिश पर पेश किया जा सकता है; परिषद चौदह दिन के भीतर सिफारिशें कर सकती है, जिन्हें विधानसभा मान या अस्वीकार कर सकती है। विधानमंडल से पारित विधेयक अनुच्छेद 200 के अंतर्गत राज्यपाल के पास जाता है, जो अनुमति दे सकता है, रोक सकता है, धन विधेयक के अतिरिक्त विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है या राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित कर सकता है।
सत्र, गणपूर्ति और सीटें
राज्यपाल अनुच्छेद 174 के अंतर्गत प्रत्येक सदन का आह्वान इस प्रकार करता है कि एक सत्र की अंतिम बैठक और अगले सत्र की पहली बैठक के बीच छह मास से अधिक का अंतर न हो, तथा वह किसी सदन का सत्रावसान या विधानसभा का विघटन कर सकता है। अनुच्छेद 176 के अनुसार वह प्रत्येक आम चुनाव के बाद के पहले सत्र और प्रत्येक वर्ष के पहले सत्र में सदन या दोनों सदनों को संबोधित करता है। अनुच्छेद 188 के अनुसार सदस्य राज्यपाल या उसके द्वारा नियुक्त व्यक्ति के समक्ष शपथ लेते हैं। अनुच्छेद 189 के अनुसार गणपूर्ति सदन की कुल सदस्य संख्या का एक-दसवाँ भाग या दस सदस्य है, जो भी अधिक हो। अनुच्छेद 190 के अंतर्गत सदन किसी सदस्य की सीट रिक्त घोषित कर सकता है यदि वह अनुमति के बिना साठ दिन तक सदन की सभी बैठकों से अनुपस्थित रहे, और अनुच्छेद 191 निरर्हताएँ गिनाता है, जिनमें दसवीं अनुसूची के दल-बदल विरोधी उपबंध जुड़ जाते हैं; दल-बदल का प्रश्न विधानसभा का अध्यक्ष या परिषद का सभापति तय करता है। अनुच्छेद 208 प्रत्येक सदन को अपनी प्रक्रिया के नियम बनाने देता है और अनुच्छेद 212 न्यायालयों को प्रक्रिया की अनियमितता के आधार पर विधानमंडल की कार्यवाही की जाँच करने से रोकता है।
परीक्षा की दृष्टि से
यूपीपीएससी, यूपीएसएसएससी, यूपी पुलिस और एसएससी के प्रश्नपत्र इस अध्याय को संख्याओं और अनुच्छेदों में बाँटकर पूछते हैं। पूछी जाने वाली संख्याएँ हैं 403 और पुरानी 425, विधान परिषद की 100 सीटें और उसकी 134 की ऊपरी सीमा, राज्य की 80 लोकसभा तथा 31 राज्यसभा सीटें, एक-दसवाँ भाग या दस सदस्यों की गणपूर्ति, तथा 25 और 30 वर्ष की आयु सीमाएँ। अनुच्छेदों में सदनों के लिए 168, परिषद बनाने या समाप्त करने के लिए 169, गठन के लिए 170 और 171, कार्यकाल के लिए 172, योग्यता के लिए 173, सत्र तथा राज्यपाल के अभिभाषण के लिए 174 और 176, विधेयकों के लिए 197 तथा 198 और गणपूर्ति के लिए 189 पूछे जाते हैं। भटकाव तीन जगह बनते हैं: परिषद के कार्यकाल में, जहाँ छह के स्थान पर पाँच वर्ष दिया जाता है; साधारण विधेयक के विलंब में, जहाँ चार के स्थान पर तीन मास दिया जाता है; और राज्यसभा की संख्या में, जहाँ 31 के स्थान पर राज्य की 80 लोकसभा सीटें रख दी जाती हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| सदन | द्विसदनीय: विधानसभा और विधान परिषद, राज्यपाल सहित (अनुच्छेद 168) |
|---|---|
| विधानसभा की संख्या | 403 निर्वाचित सदस्य, भारत की सबसे बड़ी राज्य विधानसभा |
| पहले की संख्या | 9 नवंबर 2000 को उत्तरांचल बनने तक 425 सीटें |
| आरक्षित सीटें | 2008 के परिसीमन के बाद अनुसूचित जातियों के लिए 84 और अनुसूचित जनजातियों के लिए 2 |
| विधानसभा का कार्यकाल | पहली बैठक से पाँच वर्ष (अनुच्छेद 172) |
| विधान परिषद की संख्या | 100 सदस्य, भारत की सबसे बड़ी विधान परिषद |
| परिषद की ऊपरी सीमा | विधानसभा का एक-तिहाई, न्यूनतम 40 (अनुच्छेद 171) |
| परिषद का सदस्य | छह वर्ष का कार्यकाल, हर दो वर्ष में एक-तिहाई सेवानिवृत्त; सदन स्थायी |
| न्यूनतम आयु | विधानसभा के लिए 25 वर्ष, परिषद के लिए 30 वर्ष (अनुच्छेद 173) |
| धन विधेयक | केवल विधानसभा में, राज्यपाल की सिफारिश पर; परिषद 14 दिन में लौटाएगी |
| साधारण विधेयक | परिषद तीन मास, फिर एक मास, कुल चार मास रोक सकती है (अनुच्छेद 197) |
| गणपूर्ति | कुल सदस्यों का एक-दसवाँ भाग या दस सदस्य, जो अधिक हो (अनुच्छेद 189) |
| परिषद का गठन या समाप्ति | विधानसभा के विशेष बहुमत के प्रस्ताव पर संसद द्वारा, अनुच्छेद 169 |
| राज्य की संसदीय सीटें | लोकसभा में 80 और राज्यसभा में 31 |
| विधानमंडल का स्थान | विधान भवन, लखनऊ |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कितने निर्वाचित सदस्य हैं?
- A.225
- B.325
- C.403
- D.425
उत्तर देखें
उत्तर प्रदेश विधानसभा का निर्वाचन 403 क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों से होता है, जिससे यह भारत की सबसे बड़ी राज्य विधानसभा बनती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उत्तर प्रदेश विधान परिषद की सदस्य संख्या कितनी है?
- A.75
- B.78
- C.100
- D.134
उत्तर देखें
उत्तर प्रदेश विधान परिषद में 100 सदस्य हैं और यह भारतीय राज्यों में सबसे बड़ी विधान परिषद है। अनुच्छेद 171 कहता है कि परिषद में विधानसभा की संख्या के एक-तिहाई से अधिक और 40 से कम सदस्य नहीं होंगे, इसलिए 403 सदस्यीय विधानसभा के लिए ऊपरी सीमा 134 बनती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य का कार्यकाल कितना होता है?
- A.चार वर्ष
- B.पाँच वर्ष
- C.छह वर्ष
- D.दो वर्ष
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विधान परिषद के सदस्य का कार्यकाल छह वर्ष का होता है और प्रत्येक दूसरे वर्ष एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं, इसलिए सदन अंशों में बदलता रहता है और पूरा सदन कभी विघटित नहीं होता।
पूरी व्याख्या पढ़ें →विधान परिषद का सदस्य चुने जाने के लिए न्यूनतम आयु कितनी है?
- A.21 वर्ष
- B.25 वर्ष
- C.30 वर्ष
- D.35 वर्ष
उत्तर देखें
अनुच्छेद 173 राज्य विधानमंडल की सदस्यता की योग्यताएँ बताता है: व्यक्ति भारत का नागरिक हो और विधानसभा की सीट के लिए कम से कम 25 वर्ष तथा विधान परिषद की सीट के लिए कम से कम 30 वर्ष की आयु का हो।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उत्तर प्रदेश में धन विधेयक कहाँ पेश किया जा सकता है?
- A.विधानमंडल के किसी भी सदन में
- B.केवल विधानसभा में, राज्यपाल की सिफारिश पर
- C.केवल विधान परिषद में
- D.विधानसभा में, राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति से
उत्तर देखें
अनुच्छेद 198 कहता है कि धन विधेयक विधान परिषद में पेश नहीं किया जाएगा, और अनुच्छेद 207 के अनुसार धन विधेयक या अनुच्छेद 199 में गिनाए विषयों वाले विधेयक को पेश करने से पहले राज्यपाल की सिफारिश आवश्यक है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →विधानसभा से पारित साधारण विधेयक को उत्तर प्रदेश विधान परिषद अधिकतम कितने समय तक रोक सकती है?
- A.एक मास
- B.तीन मास
- C.चार मास
- D.छह मास
उत्तर देखें
अनुच्छेद 197 के अनुसार विधानसभा से आए साधारण विधेयक को विधान परिषद पहली बार अधिकतम तीन मास तक रोक सकती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →किसी राज्य में विधान परिषद के गठन या समाप्ति से संबंधित अनुच्छेद कौन सा है?
- A.अनुच्छेद 168
- B.अनुच्छेद 169
- C.अनुच्छेद 170
- D.अनुच्छेद 171
उत्तर देखें
संसद विधि द्वारा उस राज्य में विधान परिषद बना सकती है जहाँ वह नहीं है, या विद्यमान परिषद समाप्त कर सकती है, परंतु तभी जब उस राज्य की विधानसभा अपनी कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव…
पूरी व्याख्या पढ़ें →राज्य विधानमंडल के किसी सदन की बैठक के लिए गणपूर्ति कितनी है?
- A.कुल सदस्यों का एक-चौथाई
- B.कुल सदस्यों का एक-दसवाँ भाग या दस सदस्य, जो भी अधिक हो
- C.पचास सदस्य
- D.कुल सदस्यों का एक-तिहाई
उत्तर देखें
अनुच्छेद 189(3) यह गणपूर्ति तब तक तय करता है जब तक सदन अपना नियम न बना ले। इस प्रकार 403 सदस्यों वाली उत्तर प्रदेश विधानसभा की गणपूर्ति 41 बनती है और 100 सदस्यों वाली विधान परिषद की 10।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अनुच्छेद 170 के अनुसार किसी राज्य की विधानसभा की अधिकतम सदस्य संख्या कितनी हो सकती है?
- A.400 सदस्य
- B.450 सदस्य
- C.500 सदस्य
- D.550 सदस्य
उत्तर देखें
अनुच्छेद 170 कहता है कि विधानसभा में क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने गए 500 से अधिक और 60 से कम सदस्य नहीं होंगे; अपवाद केवल वे छोटे राज्य हैं जिनके लिए कम न्यूनतम संख्या विशेष रूप से दी गई है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उत्तर प्रदेश राज्यसभा में कितने सदस्य भेजता है?
- A.19
- B.31
- C.34
- D.80
उत्तर देखें
उत्तर प्रदेश को राज्यसभा में 31 सीटें आवंटित हैं, जो किसी भी राज्य से अधिक हैं, और ये विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा एकल संक्रमणीय मत पद्धति से भरी जाती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उत्तर प्रदेश विधान परिषद की बैठकों की अध्यक्षता कौन करता है?
- A.राज्य का राज्यपाल
- B.विधानसभा का अध्यक्ष
- C.परिषद के सदस्यों द्वारा निर्वाचित सभापति
- D.मुख्यमंत्री द्वारा मनोनीत सभापति
उत्तर देखें
अनुच्छेद 182 कहता है कि राज्य की विधान परिषद अपने दो सदस्यों को क्रमशः सभापति और उपसभापति चुनेगी, और सभापति उसकी बैठकों की अध्यक्षता करता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अधिकांश राज्यों में एक सदन है, तो उत्तर प्रदेश में दो क्यों हैं?
अनुच्छेद 168 यह चुनाव संसद पर छोड़ता है, जो अनुच्छेद 169 के अंतर्गत राज्य विधानसभा के प्रस्ताव पर विधान परिषद बना या समाप्त कर सकती है। उत्तर प्रदेश ने अपनी परिषद बनाए रखी है, इसलिए इसके विधानमंडल में राज्यपाल, विधानसभा और विधान परिषद तीनों हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कितने सदस्य हैं?
इसमें 403 निर्वाचित सदस्य हैं, जो देश की सबसे बड़ी राज्य विधानसभा है। 9 नवंबर 2000 से पहले, जब पर्वतीय जिले उत्तरांचल, अब उत्तराखंड, बने, सदन में 425 सीटें थीं, और मनोनीत आंग्ल-भारतीय सीट जनवरी 2020 में समाप्त हो गई।
उत्तर प्रदेश में विधायक और विधान परिषद सदस्य में क्या अंतर है?
विधायक 403 निर्वाचन क्षेत्रों में से किसी एक से पाँच वर्ष के लिए प्रत्यक्ष निर्वाचित होता है और उसकी आयु कम से कम 25 वर्ष होनी चाहिए। परिषद सदस्य 100 सदस्यों में से एक होता है, जो छह वर्ष के लिए अप्रत्यक्ष रूप से चुना या राज्यपाल द्वारा मनोनीत होता है, और उसकी आयु कम से कम 30 वर्ष होनी चाहिए।
क्या उत्तर प्रदेश विधान परिषद विधानसभा से पारित विधेयक को अस्वीकार कर सकती है?
नहीं। अनुच्छेद 197 के अनुसार वह साधारण विधेयक को पहली बार तीन मास और दूसरी बार एक मास, कुल चार मास तक रोक सकती है, जिसके बाद विधेयक पारित माना जाता है। धन विधेयक पर वह केवल सिफारिश कर सकती है और चौदह दिन में उसे लौटाना होता है।
उत्तर प्रदेश की राज्यसभा में कितनी सीटें हैं?
इकतीस, जो चौथी अनुसूची के अंतर्गत किसी भी राज्य का सबसे बड़ा आवंटन है, और ये विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा भरी जाती हैं। राज्य में 80 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र भी हैं, जो देश में सबसे अधिक हैं।
स्रोत
- भारत का संविधान, भाग छह, अध्याय तीन: राज्य विधानमंडल, अनुच्छेद 168 से 212 — विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय
- उत्तर प्रदेश विधानसभा: गठन और प्रक्रिया — उत्तर प्रदेश विधानसभा सचिवालय
- संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन — भारत निर्वाचन आयोग





