विधानसभा से पारित साधारण विधेयक को उत्तर प्रदेश विधान परिषद अधिकतम कितने समय तक रोक सकती है?
- A.एक मास
- B.तीन मास
- C.चार मास
- D.छह मास
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर C, चार मास है। अनुच्छेद 197 के अनुसार विधानसभा से आए साधारण विधेयक को विधान परिषद पहली बार अधिकतम तीन मास तक रोक सकती है। यदि विधानसभा उसे दोबारा पारित करके भेजे, तो परिषद केवल एक मास और विलंब कर सकती है, जिसके बाद विधेयक उस रूप में दोनों सदनों से पारित माना जाता है जिसमें विधानसभा ने उसे दूसरी बार पारित किया था। तीन मास और एक मास मिलाकर चार मास की संख्या बनती है।
विकल्प A, एक मास, विलंब का केवल दूसरा चरण है। विकल्प B, तीन मास, केवल पहला चरण है। विकल्प D, छह मास, अनुच्छेद 174 के अंतर्गत सदन के दो सत्रों के बीच अनुमत अधिकतम अंतर है और विधेयकों से इसका कोई संबंध नहीं। यह भी ध्यान रखें कि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की कोई व्यवस्था नहीं है।
पूरा लेख पढ़ें: उत्तर प्रदेश विधानसभा और विधान परिषद: सीटें और शक्तियाँ
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंउत्तर प्रदेश विधानसभा में कितने निर्वाचित सदस्य हैं?
- A.225
- B.325
- C.403
- D.425
उत्तर देखें
उत्तर प्रदेश विधानसभा का निर्वाचन 403 क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों से होता है, जिससे यह भारत की सबसे बड़ी राज्य विधानसभा बनती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उत्तर प्रदेश विधान परिषद की सदस्य संख्या कितनी है?
- A.75
- B.78
- C.100
- D.134
उत्तर देखें
उत्तर प्रदेश विधान परिषद में 100 सदस्य हैं और यह भारतीय राज्यों में सबसे बड़ी विधान परिषद है। अनुच्छेद 171 कहता है कि परिषद में विधानसभा की संख्या के एक-तिहाई से अधिक और 40 से कम सदस्य नहीं होंगे, इसलिए 403 सदस्यीय विधानसभा के लिए ऊपरी सीमा 134 बनती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य का कार्यकाल कितना होता है?
- A.चार वर्ष
- B.पाँच वर्ष
- C.छह वर्ष
- D.दो वर्ष
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विधान परिषद के सदस्य का कार्यकाल छह वर्ष का होता है और प्रत्येक दूसरे वर्ष एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं, इसलिए सदन अंशों में बदलता रहता है और पूरा सदन कभी विघटित नहीं होता।
पूरी व्याख्या पढ़ें →विधान परिषद का सदस्य चुने जाने के लिए न्यूनतम आयु कितनी है?
- A.21 वर्ष
- B.25 वर्ष
- C.30 वर्ष
- D.35 वर्ष
उत्तर देखें
अनुच्छेद 173 राज्य विधानमंडल की सदस्यता की योग्यताएँ बताता है: व्यक्ति भारत का नागरिक हो और विधानसभा की सीट के लिए कम से कम 25 वर्ष तथा विधान परिषद की सीट के लिए कम से कम 30 वर्ष की आयु का हो।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उत्तर प्रदेश में धन विधेयक कहाँ पेश किया जा सकता है?
- A.विधानमंडल के किसी भी सदन में
- B.केवल विधानसभा में, राज्यपाल की सिफारिश पर
- C.केवल विधान परिषद में
- D.विधानसभा में, राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति से
उत्तर देखें
अनुच्छेद 198 कहता है कि धन विधेयक विधान परिषद में पेश नहीं किया जाएगा, और अनुच्छेद 207 के अनुसार धन विधेयक या अनुच्छेद 199 में गिनाए विषयों वाले विधेयक को पेश करने से पहले राज्यपाल की सिफारिश आवश्यक है।
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