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GK नोट्सउत्तर प्रदेशमेले, त्योहार और कुंभ मेला

उत्तर प्रदेश के मेले, त्योहार और कुंभ मेला

उत्तर प्रदेश के मेलों और त्योहारों के नोट्स: कुंभ तथा अर्ध कुंभ, माघ मेला, ब्रज की लट्ठमार होली, देव दीपावली, नौचंदी, देवा शरीफ, बटेश्वर और कजली मेला।

लेखक · प्रकाशित · 5 मिनट

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उत्तर प्रदेश के मेले, त्योहार और कुंभ मेला — GK24 title card
उत्तर प्रदेश के मेले, त्योहार और कुंभ मेला — GK24 title card

उत्तर प्रदेश में भारत के किसी भी राज्य से अधिक बड़े मेले लगते हैं, और इसका कारण भूगोल है: गंगा, यमुना और उनकी सहायक नदियां इसके बीच से बहती हैं, तथा उनके तट का लगभग हर घाट, मंदिर नगर और दरगाह कोई मेला संभालता है। यूपीपीएससी, यूपीएसएसएससी, यूपी पुलिस और एसएससी की परीक्षाएं इस अध्याय को मेला, स्थान, जिला और अवसर के रूप में पूछती हैं, जिसमें कुंभ मेला सबसे बड़ा शीर्षक है। नीचे पहले कुंभ और फिर ब्रज, वाराणसी, अयोध्या तथा पश्चिमी जिलों के मेले क्रम से दिए गए हैं।

कुंभ मेला और उसके चार स्थान

कुंभ मेला चार स्थानों पर क्रम से लगता है और हर स्थान किसी नदी पर है: गंगा-यमुना के संगम पर प्रयागराज, गंगा पर हरिद्वार, शिप्रा पर उज्जैन और गोदावरी पर नासिक तथा त्रयंबकेश्वर। इसके पीछे समुद्र मंथन की कथा है, जिसके अनुसार अमृत की बूंदें इन्हीं चार स्थानों पर गिरी थीं। किस स्थान की बारी कब आएगी, यह बृहस्पति और सूर्य की स्थिति से तय होता है: प्रयागराज का कुंभ तब होता है जब बृहस्पति वृषभ में हो और सूर्य मकर में प्रवेश करे, हरिद्वार का तब जब बृहस्पति कुंभ राशि में और सूर्य मेष में हो, उज्जैन का तब जब बृहस्पति सिंह में और सूर्य मेष में हो, तथा नासिक का तब जब बृहस्पति और सूर्य दोनों सिंह में हों। पूर्ण कुंभ किसी स्थान पर लगभग बारह वर्ष में एक बार आता है; प्रयागराज और हरिद्वार में लगभग छह वर्ष के मध्य बिंदु पर अर्ध कुंभ भी होता है। 2017 में कुंभ मेला यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में दर्ज किया गया, और 2025 का महाकुंभ प्रयागराज में हुआ अंतिम कुंभ था। इसकी शोभायात्राएं और स्नान पर्व अखाड़ों के होते हैं, जिनकी संख्या परंपरा से तेरह मानी जाती है; उनके प्रवेश जुलूस को पेशवाई और मुख्य स्नान को शाही या अमृत स्नान कहा जाता है।

वर्ष भर का प्रयागराज

साधारण वर्ष में भी प्रयागराज में माघ मेला लगता है, जो संगम की रेती पर पौष पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक चलता है। जो श्रद्धालु पूरे मास तंबुओं में रहकर नियम निभाते हैं, उन्हें कल्पवासी कहा जाता है, और मुख्य स्नान पर्व पौष पूर्णिमा, मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी, माघी पूर्णिमा तथा महाशिवरात्रि हैं। यह एकमात्र नगर है जहां कुंभ, अर्ध कुंभ और वार्षिक मेला, तीनों एक ही पंचांग पर चलते हैं।

ब्रज के मेले

मथुरा और वृंदावन का अंचल कृष्ण के पर्व संभालता है। जन्माष्टमी पर मथुरा और कृष्ण जन्मभूमि भर जाती है; लट्ठमार होली बरसाना और नंदगांव में खेली जाती है, जहां बरसाना की स्त्रियां नंदगांव के पुरुषों को लाठियों से पीछे धकेलती हैं; वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में फूलों वाली होली होती है; और दीवाली के बाद गोवर्धन में गोवर्धन पूजा अथवा अन्नकूट होता है। ब्रज की होली बसंत पंचमी के आसपास आरंभ होकर लगभग चालीस दिन चलती है, इसी कारण इस अंचल की होली भारत की सबसे लंबी होली कही जाती है।

वाराणसी और पूर्वी मेले

वाराणसी में देव दीपावली कार्तिक पूर्णिमा को मनाई जाती है, जब घाटों पर दीप जलाए और प्रवाहित किए जाते हैं, और संगीत तथा शिल्प का गंगा महोत्सव उसी दिन समाप्त होता है। काशी नरेश के संरक्षण में रामनगर में लगभग एक मास चलने वाली रामनगर की रामलीला देश की सबसे प्रसिद्ध रामलीला है, और चेतगंज की नक्कटैया उसकी सबसे जीवंत रात होती है। बुद्ध पूर्णिमा सारनाथ का मुख्य मेला है, जहां बुद्ध ने प्रथम उपदेश दिया, और कुशीनगर का भी, जो उनके महापरिनिर्वाण का स्थान है। मिर्जापुर में विंध्यवासिनी देवी के नवरात्र मेले लगते हैं और सीतापुर में नैमिषारण्य की तीर्थयात्रा होती है।

अयोध्या और पश्चिमी जिले

अयोध्या में चैत्र का राम नवमी मेला, वर्षा का सावन झूला मेला, कार्तिक पूर्णिमा की परिक्रमा और दीवाली की पूर्व संध्या का दीपोत्सव होता है। पश्चिम में मेरठ का नौचंदी मेला, जिसे परंपरा 1672 से जोड़ती है, होली के बाद के रविवार से आरंभ होता है और नौचंदी देवी मंदिर तथा बाले मियां की दरगाह पर साथ-साथ लगता है, इसी कारण इसे गंगा-जमुनी तहजीब का उदाहरण कहा जाता है। बाराबंकी में हाजी वारिस अली शाह की दरगाह पर देवा शरीफ का मेला कार्तिक में मुशायरे के साथ लगता है; आगरा जिले का बटेश्वर मेला यमुना किनारे शिव मंदिरों की श्रृंखला पर कार्तिक पूर्णिमा का पशु मेला है; हापुड़ जिले के गढ़मुक्तेश्वर में गंगा पर कार्तिक पूर्णिमा का स्नान मेला लगता है; सहारनपुर में शाकंभरी देवी का मेला नवरात्र में भरता है; और महोबा का कजली मेला, जो रक्षाबंधन के तुरंत बाद लगता है, बुंदेली वीर आल्हा और ऊदल की स्मृति जीवित रखता है। राज्य हर फरवरी में आगरा के शिल्पग्राम में ताज महोत्सव और शीत ऋतु में लखनऊ महोत्सव भी कराता है।

मेला या पर्वस्थान या जिलाअवसर
कुंभ और अर्ध कुंभप्रयागराजबृहस्पति वृषभ में, सूर्य मकर में
माघ मेलाप्रयागराजपौष पूर्णिमा से महाशिवरात्रि
लट्ठमार होलीबरसाना, मथुराफाल्गुन, होली से पहले
देव दीपावलीवाराणसीकार्तिक पूर्णिमा
नौचंदी मेलामेरठहोली के बाद का रविवार
देवा शरीफ मेलाबाराबंकीकार्तिक
बटेश्वर मेलाआगराकार्तिक पूर्णिमा
कजली मेलामहोबारक्षाबंधन के बाद

पूरे राज्य में मनाए जाने वाले पर्व

मेलों के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश में ज्येष्ठ की दशमी को गंगा दशहरा गंगावतरण के दिन के रूप में, वर्षा में कजरी तीज तथा हरियाली तीज, लखनऊ में ज्येष्ठ के मंगलवारों को भंडारों के साथ बड़ा मंगल और लखनऊ के इमामबाड़ों में ताजियों के साथ मुहर्रम के जुलूस मनाए जाते हैं। महाशिवरात्रि, जो फाल्गुन मास में पड़ती है, प्रयागराज के माघ मेले का अंतिम स्नान और काशी विश्वनाथ मंदिर की वर्ष की सबसे बड़ी रात होती है। ये सभी मेले मिलकर इस राज्य को उस परंपरा का मुख्य केंद्र बनाते हैं जिसे पाठ्यक्रम उत्तर भारत की मिश्रित संस्कृति कहता है।

परीक्षा की दृष्टि से

यूपीपीएससी, यूपीएसएसएससी, यूपी पुलिस और एसएससी की परीक्षाएं इस अध्याय को मेला, स्थान, जिला और अवसर के रूप में पूछती हैं। कुंभ के चार स्थानों को उनकी नदियों के साथ, बारह वर्ष के चक्र को प्रयागराज तथा हरिद्वार के छह वर्षीय अर्ध कुंभ के साथ, यूनेस्को अंकन को 2017 के साथ और माघ मेले को प्रयागराज के साथ याद रखें। जिलों के मेल में लट्ठमार होली को मथुरा के बरसाना, देव दीपावली को वाराणसी तथा कार्तिक पूर्णिमा, रामनगर की रामलीला को वाराणसी, नौचंदी को मेरठ, देवा शरीफ को बाराबंकी, बटेश्वर को आगरा, गढ़मुक्तेश्वर को हापुड़, शाकंभरी देवी को सहारनपुर और कजली को महोबा के साथ जोड़ें। सामान्य भ्रम ये हैं कि अर्ध कुंभ उज्जैन या नासिक तक बढ़ा दिया जाता है, लट्ठमार होली वृंदावन में रख दी जाती है, देव दीपावली कार्तिक पूर्णिमा के बजाय कार्तिक अमावस्या पर मान ली जाती है और देवा शरीफ बहराइच खिसका दिया जाता है, जहां का उर्स अलग है।

महत्वपूर्ण तथ्य

कुंभ के स्थान और नदियांप्रयागराज गंगा-यमुना, हरिद्वार गंगा, उज्जैन शिप्रा, नासिक गोदावरी
प्रयागराज कुंभ की स्थितिबृहस्पति वृषभ में और सूर्य मकर में प्रवेश
हरिद्वार कुंभ की स्थितिबृहस्पति कुंभ राशि में और सूर्य मेष में
अर्ध कुंभकेवल प्रयागराज और हरिद्वार, लगभग छह वर्ष बाद
कुंभ का यूनेस्को अंकनअमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची, 2017
माघ मेलाप्रयागराज, पौष पूर्णिमा से महाशिवरात्रि; श्रद्धालु कल्पवासी कहे जाते हैं
लट्ठमार होलीबरसाना और नंदगांव, मथुरा जिला
फूलों वाली होलीबांके बिहारी मंदिर, वृंदावन
देव दीपावलीवाराणसी, कार्तिक पूर्णिमा
गंगा महोत्सववाराणसी, कार्तिक पूर्णिमा को समापन
रामनगर की रामलीलावाराणसी, लगभग एक मास, काशी नरेश का संरक्षण
नौचंदी मेलामेरठ, होली के बाद का रविवार; देवी मंदिर के साथ बाले मियां की दरगाह
देवा शरीफ मेलाबाराबंकी, हाजी वारिस अली शाह की दरगाह, कार्तिक
बटेश्वर मेलाआगरा जिला, कार्तिक पूर्णिमा, यमुना तट का पशु मेला
गढ़मुक्तेश्वर मेलाहापुड़ जिला, कार्तिक पूर्णिमा स्नान मेला
कजली मेलामहोबा, रक्षाबंधन के बाद, आल्हा-ऊदल की स्मृति
ताज महोत्सवशिल्पग्राम, आगरा, प्रति वर्ष फरवरी
महाशिवरात्रिफाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.उत्तर प्रदेशआसान

नासिक और त्रयंबकेश्वर में लगने वाला कुंभ मेला किस नदी के तट पर होता है?

  1. A.शिप्रा
  2. B.गोदावरी
  3. C.नर्मदा
  4. D.ताप्ती
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. गोदावरी

कुंभ के चार स्थानों में नासिक और उसके पास त्रयंबकेश्वर गोदावरी पर स्थित हैं, जिसका उद्गम त्रयंबकेश्वर में ही है; नासिक का कुंभ तब आता है जब बृहस्पति और सूर्य दोनों सिंह राशि में हों।

Q2.उत्तर प्रदेशमध्यम

कुंभ मेला यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में किस वर्ष दर्ज किया गया?

  1. A.2010
  2. B.2013
  3. C.2017
  4. D.2021
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 2017

कुंभ मेला 2017 में यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में जोड़ा गया, और रामलीला, वैदिक पाठ, कुटियाट्टम, छऊ, योग तथा नवरोज के साथ यह उस सूची में भारत की सबसे अधिक पूछी जाने वाली प्रविष्टि है।

Q3.उत्तर प्रदेशमध्यम

पूर्ण कुंभ के लगभग छह वर्ष बाद लगने वाला अर्ध कुंभ किन दो स्थानों पर होता है?

  1. A.प्रयागराज और हरिद्वार
  2. B.उज्जैन और नासिक
  3. C.प्रयागराज और उज्जैन
  4. D.हरिद्वार और नासिक
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. प्रयागराज और हरिद्वार

चारों कुंभ स्थानों पर पूर्ण कुंभ लगभग बारह वर्ष में एक बार होता है, पर गंगा पर स्थित केवल दो स्थान, प्रयागराज और हरिद्वार, लगभग छह वर्ष के मध्य बिंदु पर अर्ध कुंभ भी कराते हैं।

Q4.उत्तर प्रदेशपूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 10 Jan 2023, Shift 2आसान

महाशिवरात्रि हिंदू देवता भगवान शिव के सम्मान में किस हिंदू मास में मनाई जाती है?

  1. A.कार्तिक
  2. B.चैत्र
  3. C.फाल्गुन
  4. D.वैशाख
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. फाल्गुन

महाशिवरात्रि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ती है, जो फरवरी या मार्च में आती है, और उत्तर प्रदेश में यह प्रयागराज के माघ मेले का अंतिम स्नान पर्व तथा वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर की वर्ष की सबसे बड़ी रात होती है।

Q5.उत्तर प्रदेशआसान

पौष पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक चलने वाला वार्षिक माघ मेला उत्तर प्रदेश के किस नगर में लगता है?

  1. A.वाराणसी
  2. B.प्रयागराज
  3. C.मथुरा
  4. D.अयोध्या
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. प्रयागराज

माघ मेला प्रति वर्ष प्रयागराज में संगम की रेती पर लगता है, पौष पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक चलता है, और जो श्रद्धालु पूरे मास नियमपूर्वक वहां रहते हैं उन्हें कल्पवासी कहा जाता है।

Q6.उत्तर प्रदेशआसान

लट्ठमार होली, जिसमें स्त्रियां पुरुषों को लाठियों से पीछे धकेलती हैं, मथुरा जिले के किस स्थान की प्रसिद्ध है?

  1. A.वृंदावन
  2. B.गोवर्धन
  3. C.बरसाना
  4. D.गोकुल
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. बरसाना

लट्ठमार होली राधा के गांव के रूप में स्मरण किए जाने वाले बरसाना और कृष्ण के गांव के रूप में स्मरण किए जाने वाले नंदगांव के बीच खेली जाती है: नंदगांव के पुरुष बरसाना आते हैं और बरसाना की स्त्रियां उन्हें लाठियों से पीछे धकेलती हैं, जिससे इस पर्व को…

Q7.उत्तर प्रदेशमध्यम

देवी मंदिर और बाले मियां की दरगाह पर साथ-साथ लगने वाला तथा होली के बाद के रविवार से आरंभ होने वाला नौचंदी मेला किस नगर का है?

  1. A.मेरठ
  2. B.सहारनपुर
  3. C.बरेली
  4. D.अलीगढ़
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. मेरठ

मेरठ का नौचंदी मेला उस मैदान में लगता है जहां नौचंदी देवी मंदिर और बाले मियां की दरगाह दोनों हैं, और यह होली के बाद के रविवार से आरंभ होता है।

Q8.उत्तर प्रदेशमध्यम

देव दीपावली, जब वाराणसी के घाटों पर दीप जलाए जाते हैं, किस दिन मनाई जाती है?

  1. A.कार्तिक पूर्णिमा
  2. B.कार्तिक अमावस्या
  3. C.माघी पूर्णिमा
  4. D.शरद पूर्णिमा
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. कार्तिक पूर्णिमा

देव दीपावली कार्तिक की पूर्णिमा को, दीवाली के पंद्रह दिन बाद पड़ती है, जब वाराणसी के घाटों की सीढ़ियों पर लाखों मिट्टी के दीप जलाए और नदी में प्रवाहित किए जाते हैं; संगीत तथा शिल्प का गंगा महोत्सव भी उसी दिन समाप्त होता है।

Q9.उत्तर प्रदेशमध्यम

काशी नरेश के संरक्षण में पूरे कस्बे में लगभग एक मास चलने वाली रामलीला कहां होती है?

  1. A.अयोध्या
  2. B.वाराणसी का रामनगर
  3. C.चित्रकूट
  4. D.शृंगवेरपुर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. वाराणसी का रामनगर

काशी नरेश के संरक्षण वाली रामनगर की रामलीला पूरे कस्बे में मंचित होती है, जहां विभिन्न मोहल्ले अयोध्या, जनकपुर, चित्रकूट और लंका बनते हैं, और यह भाद्रपद से लगभग एक मास चलती है।

Q10.उत्तर प्रदेशमध्यम

हाजी वारिस अली शाह की दरगाह पर लगने वाला देवा शरीफ मेला उत्तर प्रदेश के किस जिले से जुड़ा है?

  1. A.बाराबंकी
  2. B.बहराइच
  3. C.सीतापुर
  4. D.उन्नाव
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. बाराबंकी

बाराबंकी जिले के देवा में सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की दरगाह है, और कार्तिक में लगने वाले उसके वार्षिक मेले में बड़ी भीड़ तथा प्रसिद्ध मुशायरा होता है, जिसमें हिंदू और मुसलमान दोनों भाग लेते हैं।

Q11.उत्तर प्रदेशकठिन

यमुना किनारे शिव मंदिरों की श्रृंखला पर लगने वाला कार्तिक पूर्णिमा का बड़ा पशु मेला बटेश्वर किस जिले में है?

  1. A.इटावा
  2. B.आगरा
  3. C.फिरोजाबाद
  4. D.मैनपुरी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. आगरा

बटेश्वर आगरा जिले में यमुना के तट पर है, जहां घाट के साथ शिव मंदिरों की लंबी श्रृंखला खड़ी है; उसका कार्तिक पूर्णिमा मेला स्नान मेला भी है और उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े पशु मेलों में भी गिना जाता है, तथा जैन तीर्थ शौरीपुर पास ही है।

Q12.उत्तर प्रदेशकठिन

रक्षाबंधन के तुरंत बाद लगने वाला तथा आल्हा और ऊदल की स्मृति से जुड़ा कजली मेला उत्तर प्रदेश के किस जिले का है?

  1. A.झांसी
  2. B.महोबा
  3. C.बांदा
  4. D.हमीरपुर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. महोबा

महोबा का कजली अथवा कजलियां मेला रक्षाबंधन के तुरंत बाद लगता है और उस युद्ध की स्मृति दिलाता है जिसमें बुंदेलखंड के वीर आल्हा तथा ऊदल ने नगर की रक्षा की कही जाती है; इसी मेले में क्षेत्र के आल्हा गीत गाए जाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुंभ मेला किन चार स्थानों पर और किन नदियों पर लगता है?

कुंभ मेला प्रयागराज में गंगा और यमुना के संगम पर, हरिद्वार में गंगा पर, उज्जैन में शिप्रा पर तथा नासिक और त्रयंबकेश्वर में गोदावरी पर लगता है। हर स्थान की बारी लगभग बारह वर्ष में एक बार आती है, जो बृहस्पति और सूर्य की स्थिति से तय होती है। उज्जैन के कुंभ को सिंहस्थ भी कहा जाता है क्योंकि वह तब आता है जब बृहस्पति सिंह राशि में हो।

कुंभ, अर्ध कुंभ और माघ मेले में क्या अंतर है?

पूर्ण कुंभ किसी स्थान पर लगभग बारह वर्ष में एक बार आता है। अर्ध कुंभ लगभग छह वर्ष बाद का मध्यवर्ती मेला है और वह केवल प्रयागराज तथा हरिद्वार में लगता है। माघ मेला वार्षिक मेला है, जो प्रति वर्ष प्रयागराज में संगम की रेती पर पौष पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक चलता है, इसलिए प्रयागराज में मेलों के तीन भिन्न चक्र चलते हैं।

मेरठ के नौचंदी मेले को मिश्रित संस्कृति का उदाहरण क्यों कहा जाता है?

मेरठ के मेला मैदान में नौचंदी देवी का मंदिर और बाले मियां की दरगाह दोनों हैं, और होली के बाद के रविवार से आरंभ होने वाला मेला हिंदू तथा मुसलमान साथ मनाते हैं, जिसमें उन्हीं दिनों दोनों स्थानों पर जाया जाता है। परंपरा इस मेले को 1672 से जोड़ती है, और उसका मुशायरा तथा शिल्प बाजार इसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े मेलों में रखते हैं।

उत्तर प्रदेश के कौन-कौन से मेले कार्तिक पूर्णिमा को पड़ते हैं?

कार्तिक पूर्णिमा राज्य का सबसे व्यस्त मेला दिवस है। वाराणसी के घाटों पर देव दीपावली मनाई जाती है और उसी दिन गंगा महोत्सव समाप्त होता है; आगरा जिले का बटेश्वर मेला, जो स्नान तथा पशु मेला दोनों है, उसी दिन लगता है; और हापुड़ जिले के गढ़मुक्तेश्वर में बड़ा गंगा स्नान मेला भरता है। अयोध्या में भी कार्तिक पूर्णिमा की परिक्रमा होती है।

माघ मेले में कल्पवास क्या होता है?

कल्पवास प्रयागराज में संगम की रेती पर तंबू में पूरे माघ मास रहने, प्रतिदिन नदी में स्नान करने, दिन में एक बार भोजन करने तथा पूजा-पाठ का नियम निभाने की परंपरा है। इसे निभाने वालों को कल्पवासी कहा जाता है। यह पौष पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक चलता है और प्रयागराज के मेले का उतना ही पुराना अंग है जितना कुंभ स्वयं।

स्रोत

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