उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और मंत्रिपरिषद: अनुच्छेद और शक्तियाँ
यूपीपीएससी और एसएससी परीक्षाओं के लिए उत्तर प्रदेश की राज्य कार्यपालिका पर नोट्स: राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद, उनके अनुच्छेद और राज्य के प्रथम नाम।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

भारत के प्रत्येक राज्य की कार्यपालिका का ढाँचा संविधान के भाग छह, अनुच्छेद 153 से 167 में दिया गया है और उत्तर प्रदेश भी इसी व्यवस्था से चलता है। कागज पर राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित है, परंतु व्यवहार में उसका प्रयोग मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद करती है, जो तभी तक पद पर रहती है जब तक विधानसभा का विश्वास उसके साथ है। यूपीपीएससी, यूपीएसएसएससी, यूपी पुलिस और एसएससी की परीक्षाओं में यह अध्याय अनुच्छेदों, नियुक्तियों और प्रथम नामों का भंडार है, इसलिए इसे संविधान के क्रम में ही पढ़ना ठीक है: पहले राज्यपाल, फिर मुख्यमंत्री और फिर मंत्रिपरिषद।
उत्तर प्रदेश के राज्यपाल
अनुच्छेद 153 प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल की व्यवस्था करता है और अनुच्छेद 154 राज्य की कार्यपालिका शक्ति उसमें निहित करता है, जिसका प्रयोग वह स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से करता है। अनुच्छेद 155 के अनुसार राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा करता है, अर्थात वह निर्वाचित पदाधिकारी नहीं, संघ का नियुक्त व्यक्ति है। अनुच्छेद 156 उसे पाँच वर्ष का कार्यकाल देता है, परंतु यह भी कहता है कि वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है; त्यागपत्र वह राष्ट्रपति को ही देता है। अनुच्छेद 157 केवल दो योग्यताएँ रखता है: वह भारत का नागरिक हो और पैंतीस वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो। अनुच्छेद 158 उसे संसद या किसी विधानमंडल का सदस्य बनने तथा लाभ का पद धारण करने से रोकता है और उसके वेतन-भत्ते राज्य की संचित निधि पर भारित करता है। अनुच्छेद 159 के अनुसार वह राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष शपथ लेता है, और उनकी अनुपस्थिति में उपलब्ध वरिष्ठतम न्यायाधीश के समक्ष; उत्तर प्रदेश के लिए इसका अर्थ इलाहाबाद उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश है। उसका आवास लखनऊ का राजभवन है और राज्य के विश्वविद्यालय अधिनियमों के अंतर्गत वह राज्य विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति भी होता है। अगस्त 1947 में संयुक्त प्रांत में नियुक्त सरोजिनी नायडू यहाँ की पहली राज्यपाल और भारत के किसी प्रांत या राज्य की पहली महिला राज्यपाल थीं; मार्च 1949 में लखनऊ में पद पर रहते हुए उनका निधन हुआ।
राज्यपाल की शक्तियाँ
| शक्ति | अनुच्छेद | विषय |
|---|---|---|
| कार्यपालिका | 154, 164, 165 | मुख्यमंत्री, अन्य मंत्रियों और राज्य के महाधिवक्ता की नियुक्ति |
| विधायी | 174, 175, 176 | सदन का सत्रावसान, आह्वान और विधानसभा का विघटन, संदेश तथा अभिभाषण |
| विधेयकों पर | 200, 201 | अनुमति देना, रोकना, धन विधेयक के अतिरिक्त विधेयक लौटाना या राष्ट्रपति के लिए आरक्षित करना |
| अध्यादेश | 213 | सदन के सत्र में न होने पर अध्यादेश जारी करना, जिसे बाद में सदन के समक्ष रखना आवश्यक है |
| वित्तीय | 202, 207 | वार्षिक वित्तीय विवरण रखवाना; धन विधेयक उसकी सिफारिश के बिना पेश नहीं हो सकता |
| न्यायिक | 161 | राज्य विधि के अपराधों में क्षमा, प्रविलंबन, विराम, परिहार, निलंबन और लघुकरण |
अनुच्छेद 161 की क्षमादान शक्ति अनुच्छेद 72 की राष्ट्रपति की शक्ति से दो बातों में छोटी है, और परीक्षा इसी अंतर पर प्रश्न बनाती है: राज्यपाल मृत्युदंड को क्षमा नहीं कर सकता और सेना न्यायालय द्वारा दिए दंड पर उसका कोई अधिकार नहीं है। हाँ, वह मृत्युदंड को निलंबित, परिहार या लघुकृत कर सकता है।
मुख्यमंत्री
अनुच्छेद 164 कहता है कि मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करता है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति मुख्यमंत्री की सलाह पर करता है। संविधान मुख्यमंत्री चुनने की कोई प्रक्रिया नहीं देता; परंपरा के अनुसार राज्यपाल उस दल या गठबंधन के नेता को बुलाता है जिसे विधानसभा में बहुमत प्राप्त है। किसी सदन का सदस्य न होने पर भी व्यक्ति मंत्री बन सकता है, परंतु अनुच्छेद 164(4) के अनुसार उसे छह लगातार मास के भीतर सदस्यता लेनी होगी, अन्यथा वह मंत्री नहीं रहेगा। मुख्यमंत्री विभागों का बँटवारा करता है, मंत्रिमंडल की अध्यक्षता करता है, मंत्रिपरिषद और राज्यपाल के बीच एकमात्र कड़ी होता है, और अनुच्छेद 167 के अनुसार प्रशासन से जुड़ी जो सूचना राज्यपाल माँगे वह देता है तथा किसी मंत्री के अकेले लिए निर्णय को मंत्रिपरिषद के समक्ष रखता है। गोविंद बल्लभ पंत उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री थे और 1954 तक पद पर रहे। अक्टूबर 1963 में शपथ लेने वाली सुचेता कृपलानी भारत के किसी भी राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री थीं। जून 1995 में पहली बार मुख्यमंत्री बनीं मायावती देश में राज्य सरकार का नेतृत्व करने वाली पहली दलित महिला थीं, और मार्च 2012 में शपथ लेने वाले अखिलेश यादव इस राज्य के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री रहे।
मंत्रिपरिषद
अनुच्छेद 163 मुख्यमंत्री के नेतृत्व में एक मंत्रिपरिषद की व्यवस्था करता है जो राज्यपाल को सहायता और सलाह देगी, सिवाय उन विषयों में जहाँ उसे स्वविवेक से कार्य करना है, और यह भी कहता है कि कोई विषय स्वविवेक का है या नहीं, इसकी जाँच किसी न्यायालय में नहीं की जाएगी। संविधान के इक्यानबेवें संशोधन अधिनियम, 2003 से जोड़ा गया अनुच्छेद 164(1A) मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या को विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के पंद्रह प्रतिशत तक सीमित करता है और न्यूनतम बारह रखता है; उत्तर प्रदेश विधानसभा में 403 निर्वाचित सदस्य होने के कारण राज्य में अधिकतम साठ मंत्री हो सकते हैं। मंत्री राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं और मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होती है; इसी नियम के कारण अविश्वास प्रस्ताव पूरी सरकार को गिरा देता है। परिषद में तीन श्रेणियाँ होती हैं: कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्री और राज्यमंत्री। अनुच्छेद 165 राज्यपाल द्वारा नियुक्त महाधिवक्ता को राज्य का प्रमुख विधि अधिकारी बनाता है और अनुच्छेद 166 कहता है कि राज्य की सारी कार्यपालिका कार्रवाई राज्यपाल के नाम से की जाएगी तथा वह कार्य के सुविधापूर्ण संचालन के लिए नियम बना सकता है। मंत्रियों के नीचे स्थायी तंत्र लखनऊ का सचिवालय है, जिसका प्रमुख मुख्य सचिव होता है और प्रत्येक विभाग प्रमुख सचिव या सचिव के अधीन रहता है।
स्वविवेक और राष्ट्रपति शासन
राज्यपाल कुछ ही स्थितियों में अपने विवेक से कार्य करता है: किसी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने पर मुख्यमंत्री का चयन, सदन का विश्वास खो चुकी सरकार को हटाने का निर्णय, अनुच्छेद 200 के अंतर्गत किसी विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित करना, और अनुच्छेद 356 के अंतर्गत राष्ट्रपति को यह प्रतिवेदन भेजना कि राज्य का शासन संविधान के अनुसार नहीं चलाया जा सकता। इसी प्रतिवेदन पर राष्ट्रपति शासन लगता है, जिसमें राज्य का प्रशासन राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम से चलता है और विधानसभा की विधि बनाने की शक्ति संसद प्रयोग करती है। उत्तर प्रदेश में कई बार राष्ट्रपति शासन लगा है और प्रत्येक बार उसके बाद नए चुनाव हुए या नई सरकार बनी।
परीक्षा की दृष्टि से
यूपीपीएससी, यूपीएसएसएससी, यूपी पुलिस और एसएससी के प्रश्नपत्र इस अध्याय से तीन तरह के प्रश्न बनाते हैं। पहला, अनुच्छेद और उसका विषय: 155 नियुक्ति, 156 कार्यकाल, 157 योग्यता, 159 शपथ, 161 क्षमादान, 163 सलाह, 164 मंत्रियों की नियुक्ति, 164(1A) पंद्रह प्रतिशत की सीमा, 164(4) छह मास का नियम, 165 महाधिवक्ता, 166 कार्य संचालन और 167 मुख्यमंत्री के कर्तव्य। दूसरा, गणना पर आधारित प्रश्न: 403 का पंद्रह प्रतिशत लेने पर उत्तर प्रदेश में साठ मंत्रियों की अधिकतम सीमा निकलती है। तीसरा, प्रथम नामों की सूची, जिसमें पहली महिला राज्यपाल सरोजिनी नायडू को पहली महिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी के सामने रखा जाता है। भटकाव दो जगह बनता है: शपथ में, जहाँ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के स्थान पर राष्ट्रपति लिख दिया जाता है, और क्षमादान में, जहाँ अनुच्छेद 161 की सीमाओं को अनुच्छेद 72 की व्यापक शक्ति से मिला दिया जाता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| भाग और अनुच्छेद | भाग छह, अनुच्छेद 153 से 167, राज्य कार्यपालिका |
|---|---|
| राज्यपाल की नियुक्ति | अनुच्छेद 155 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा, अधिपत्र से |
| कार्यकाल | अनुच्छेद 156 के अनुसार पाँच वर्ष, परंतु राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत |
| योग्यता | भारत का नागरिक, 35 वर्ष की आयु (अनुच्छेद 157) |
| शपथ | राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष (अनुच्छेद 159) |
| क्षमादान शक्ति | अनुच्छेद 161; मृत्युदंड की क्षमा नहीं, सेना न्यायालय पर अधिकार नहीं |
| अध्यादेश | अनुच्छेद 213, विधानमंडल का सत्र न होने पर |
| मंत्रिपरिषद | अनुच्छेद 163; सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी |
| उत्तर प्रदेश में मंत्री | अधिकतम 60, अर्थात 403 सदस्यीय विधानसभा का 15 प्रतिशत (अनुच्छेद 164(1A)) |
| छह मास का नियम | अनुच्छेद 164(4), गैर-सदस्य मंत्री को छह मास में विधानमंडल में आना होगा |
| महाधिवक्ता | अनुच्छेद 165 के अंतर्गत राज्यपाल द्वारा नियुक्त |
| पहली राज्यपाल | सरोजिनी नायडू, संयुक्त प्रांत, अगस्त 1947 |
| पहले मुख्यमंत्री | गोविंद बल्लभ पंत, 1954 तक पद पर |
| पहली महिला मुख्यमंत्री | सुचेता कृपलानी, अक्टूबर 1963, भारत में पहली |
| राज्य विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति | राज्यपाल, राज्य विश्वविद्यालय अधिनियमों के अंतर्गत |
| सचिवालय का प्रमुख | मुख्य सचिव, लखनऊ |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
उत्तर प्रदेश के राज्यपाल की नियुक्ति कौन करता है?
- A.भारत का प्रधानमंत्री
- B.भारत का राष्ट्रपति
- C.इलाहाबाद उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश
- D.उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री
उत्तर देखें
अनुच्छेद 155 कहता है कि राज्य के राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा करेगा, अर्थात यह पद नियुक्ति से भरा जाता है, चुनाव से कभी नहीं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राज्यपाल पद पर नियुक्ति के लिए न्यूनतम आयु कितनी निर्धारित है?
- A.25 वर्ष
- B.30 वर्ष
- C.35 वर्ष
- D.40 वर्ष
उत्तर देखें
अनुच्छेद 157 राज्यपाल पद के लिए केवल दो योग्यताएँ रखता है: व्यक्ति भारत का नागरिक हो और पैंतीस वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मुख्यमंत्री सहित उत्तर प्रदेश की मंत्रिपरिषद में अधिकतम कितने मंत्री हो सकते हैं?
- A.40
- B.50
- C.60
- D.80
उत्तर देखें
संविधान के इक्यानबेवें संशोधन अधिनियम, 2003 से जोड़ा गया अनुच्छेद 164(1A) मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या को विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के पंद्रह प्रतिशत तक सीमित करता है और न्यूनतम बारह रखता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उत्तर प्रदेश के राज्यपाल किसके समक्ष पद की शपथ लेते हैं?
- A.भारत के राष्ट्रपति
- B.भारत के मुख्य न्यायाधीश
- C.राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
- D.विधानसभा के अध्यक्ष
उत्तर देखें
अनुच्छेद 159 के अनुसार प्रत्येक राज्यपाल पद ग्रहण करने से पूर्व उस राज्य के संबंध में अधिकारिता रखने वाले उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष, और उनकी अनुपस्थिति में उस न्यायालय के उपलब्ध वरिष्ठतम न्यायाधीश के समक्ष, शपथ लेता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अनुच्छेद 161 के अंतर्गत राज्यपाल की क्षमादान शक्ति के बाहर इनमें से क्या है?
- A.राज्य विधि के अपराध में दंड का परिहार
- B.मृत्युदंड का निलंबन
- C.मृत्युदंड की क्षमा
- D.मृत्युदंड का लघुकरण
उत्तर देखें
अनुच्छेद 161 राज्यपाल को उस विधि के विरुद्ध अपराध के लिए दोषसिद्ध व्यक्ति के दंड में क्षमा, प्रविलंबन, विराम या परिहार देने तथा दंड को निलंबित, परिहार या लघुकृत करने की शक्ति देता है जो राज्य की कार्यपालिका शक्ति के विषय से संबंधित है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री कौन थे?
- A.संपूर्णानंद
- B.गोविंद बल्लभ पंत
- C.चंद्रभानु गुप्त
- D.कमलापति त्रिपाठी
उत्तर देखें
पंत 1937 से संयुक्त प्रांत की सरकार के प्रमुख रहे, स्वतंत्रता के बाद फिर पद पर आए और 1954 तक उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री रहे, जिसके बाद वे गृह मंत्री बनकर केंद्रीय मंत्रिमंडल में गए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1963 में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं सुचेता कृपलानी को कौन सा श्रेय प्राप्त है?
- A.किसी भारतीय राज्य की पहली महिला राज्यपाल
- B.किसी भारतीय राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री
- C.किसी विधानसभा की पहली महिला अध्यक्ष
- D.संविधान सभा की पहली महिला सदस्य
उत्तर देखें
सुचेता कृपलानी ने अक्टूबर 1963 में उत्तर प्रदेश सरकार की बागडोर संभाली और भारत में किसी राज्य सरकार का नेतृत्व करने वाली पहली महिला बनीं; यह तथ्य राज्य और राष्ट्रीय दोनों स्तर के सामान्य ज्ञान प्रश्नपत्रों में पूछा जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →संविधान का कौन सा अनुच्छेद राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद की व्यवस्था करता है?
- A.अनुच्छेद 161
- B.अनुच्छेद 163
- C.अनुच्छेद 166
- D.अनुच्छेद 167
उत्तर देखें
यह कहता है कि राज्यपाल को अपने कृत्यों के प्रयोग में सहायता और सलाह देने के लिए मुख्यमंत्री के नेतृत्व में एक मंत्रिपरिषद होगी, सिवाय उन कृत्यों के जिन्हें उसे स्वविवेक से करना है, और यह भी कि कोई विषय स्वविवेक का था या नहीं, इसकी जाँच किसी न्यायालय में…
पूरी व्याख्या पढ़ें →उत्तर प्रदेश का कोई मंत्री यदि लगातार छह मास तक राज्य विधानमंडल के किसी सदन का सदस्य नहीं रहता है, तो
- A.राज्यपाल की अनुमति से वह एक वर्ष तक पद पर रह सकता है
- B.उस अवधि की समाप्ति पर वह मंत्री नहीं रहेगा
- C.विधानसभा उसे विधान परिषद में निर्वाचित करेगी
- D.विधानसभा का प्रस्ताव पारित होने पर वह पद पर रह सकता है
उत्तर देखें
अनुच्छेद 164(4) कहता है कि जो मंत्री किसी निरंतर छह मास की अवधि तक राज्य के विधानमंडल का सदस्य नहीं है, वह उस अवधि की समाप्ति पर मंत्री नहीं रहेगा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति कौन होता है?
- A.मुख्यमंत्री
- B.राज्यपाल
- C.उच्च शिक्षा मंत्री
- D.मुख्य सचिव
उत्तर देखें
संविधान इस विषय पर कुछ नहीं कहता; राज्य के विश्वविद्यालय अधिनियम ही उत्तर प्रदेश के राज्यपाल को राज्य विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति बनाते हैं, और इसी रूप में वह दीक्षांत समारोहों की अध्यक्षता करता है तथा कुलपतियों की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ा रहता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अनुच्छेद 167 के अंतर्गत राज्य के मुख्यमंत्री का कर्तव्य इनमें से कौन है?
- A.विधानसभा का आह्वान और सत्रावसान करना
- B.राज्य के महाधिवक्ता की नियुक्ति करना
- C.राज्य के प्रशासन से संबंधित सूचना राज्यपाल को देना
- D.किसी विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित करना
उत्तर देखें
अनुच्छेद 167 मुख्यमंत्री को तीन कर्तव्य देता है: राज्य के प्रशासन और विधान के प्रस्तावों से जुड़े मंत्रिपरिषद के सभी निर्णय राज्यपाल को बताना, प्रशासन से संबंधित जो सूचना राज्यपाल माँगे वह देना, और राज्यपाल के कहने पर किसी ऐसे विषय को मंत्रिपरिषद के विचार के लिए रखना जिस पर…
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उत्तर प्रदेश की वास्तविक कार्यपालिका का प्रमुख कौन है?
मुख्यमंत्री। अनुच्छेद 154 राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित करता है, परंतु अनुच्छेद 163 उसे मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह पर कार्य करने को कहता है, इसलिए वास्तविक प्रमुख मुख्यमंत्री है और राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख।
उत्तर प्रदेश में अधिकतम कितने मंत्री हो सकते हैं?
मुख्यमंत्री सहित साठ से अधिक नहीं। अनुच्छेद 164(1A) यह सीमा विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के पंद्रह प्रतिशत पर रखता है और उत्तर प्रदेश विधानसभा के 403 सदस्यों का पंद्रह प्रतिशत भिन्न छोड़ने पर साठ होता है।
क्या विधायक न होने वाला व्यक्ति उत्तर प्रदेश में मंत्री बन सकता है?
हाँ, उसकी नियुक्ति हो सकती है, परंतु अनुच्छेद 164(4) के अनुसार उसे लगातार छह मास के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना होगा; अन्यथा उस अवधि की समाप्ति पर वह मंत्री नहीं रहेगा।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को शपथ कौन दिलाता है?
राज्यपाल। वह मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों को पद तथा गोपनीयता की शपथ दिलाता है, जबकि राज्यपाल स्वयं अनुच्छेद 159 के अंतर्गत इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष शपथ लेता है।
उत्तर प्रदेश की पहली महिला राज्यपाल कौन थीं?
सरोजिनी नायडू, जो अगस्त 1947 में संयुक्त प्रांत की राज्यपाल नियुक्त हुईं। वे भारत में राज्यपाल का पद संभालने वाली पहली महिला थीं और मार्च 1949 में लखनऊ में पद पर रहते हुए उनका निधन हुआ।
स्रोत
- भारत का संविधान, भाग छह: राज्य, अनुच्छेद 152 से 167 — विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय
- उत्तर प्रदेश के राज्यपाल का कार्यालय, राजभवन लखनऊ — उत्तर प्रदेश सरकार
- उत्तर प्रदेश सरकार: प्रशासन और विभाग — उत्तर प्रदेश सरकार





