उत्तर प्रदेश का स्वतंत्रता संग्राम: नेता और घटनाएँ
राज्य परीक्षाओं के लिए उत्तर प्रदेश के स्वतंत्रता संग्राम के नोट्स: 1857 में मेरठ, लखनऊ और कानपुर, चौरी चौरा, काकोरी, बलिया में भारत छोड़ो और प्रमुख नेता।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

संयुक्त प्रांत, अर्थात आज का उत्तर प्रदेश, ने राष्ट्रीय आंदोलन का सबसे बड़ा भार उठाया। 1857 का विद्रोह मेरठ से आरंभ हुआ और उसके सबसे उग्र केंद्र लखनऊ, कानपुर और झाँसी रहे; कांग्रेस ने अपने कुछ सबसे बड़े अधिवेशन इलाहाबाद और लखनऊ में किए; बीस के दशक के क्रांतिकारी कानपुर, लखनऊ और बनारस से काम करते रहे; और जवाहरलाल नेहरू से लेकर लाल बहादुर शास्त्री तक, स्वतंत्र भारत का नेतृत्व इसी भूमि से निकला। परीक्षा के लिए यह अध्याय स्थानों की सूची है, जिसमें प्रत्येक स्थान के साथ एक तिथि और एक नाम जुड़ा है, इसलिए इसे उसी रूप में याद करें।
1857: मेरठ, लखनऊ, कानपुर, झाँसी
तात्कालिक चिंगारी इसी प्रांत से उठी। 34वीं नेटिव इन्फैंट्री के सिपाही मंगल पांडे, जो बलिया ज़िले के नगवा गाँव के थे, ने मार्च 1857 में बैरकपुर में अपने अधिकारियों पर आक्रमण किया और उन्हें फाँसी दी गई। 10 मई 1857 को मेरठ के सिपाही उठ खड़े हुए, बंदी साथियों को छुड़ाया और दिल्ली की ओर बढ़े, और उसी दिन से विद्रोह दोआब तथा अवध में फैल गया। प्रांत में असंतोष पहले से था, क्योंकि 1856 में लॉर्ड डलहौज़ी ने कुशासन का आरोप लगाकर अवध का विलय कर लिया था और उसके शासक वाजिद अली शाह को कलकत्ता भेज दिया गया था।
| केंद्र | 1857 का नेतृत्व | याद रखने योग्य बात |
|---|---|---|
| मेरठ | छावनी के सिपाही | 10 मई 1857 का विद्रोह |
| लखनऊ | बेगम हज़रत महल | अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कद्र के नाम पर; रेजिडेंसी की घेराबंदी |
| कानपुर | नाना साहेब, तात्या टोपे के साथ | अज़ीमुल्ला खाँ उनके सलाहकार थे |
| झाँसी | रानी लक्ष्मीबाई | 1858 में ग्वालियर तक संघर्ष |
| फैज़ाबाद | मौलवी अहमदुल्ला शाह | अवध की सेनाओं का नेतृत्व करने वाले उपदेशक |
| बरेली | खान बहादुर खाँ | रुहेलखंड में विद्रोह का केंद्र |
कांग्रेस का दौर: इलाहाबाद और लखनऊ
इलाहाबाद स्वयं एक राजनीतिक राजधानी बन गया, मोतीलाल नेहरू और आनंद भवन का नगर, तथा 1889 में जवाहरलाल नेहरू की जन्मभूमि। 1916 के लखनऊ अधिवेशन में लखनऊ समझौता हुआ, कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच वह समझौता जिसमें पृथक निर्वाचन स्वीकार किया गया, और उसी अधिवेशन में कांग्रेस के नरम तथा गरम दल फिर एक हुए। उसी वर्ष मदन मोहन मालवीय ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना की। 1928 में साइमन कमीशन के बहिष्कार के समय लखनऊ में जवाहरलाल नेहरू और गोविंद बल्लभ पंत पर लाठीचार्ज हुआ; पंत आगे चलकर उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री बने।
असहयोग, चौरी चौरा और अवध के किसान
1920 का असहयोग आंदोलन प्रांत में खिलाफत आंदोलन से जुड़ गया, जिसमें रामपुर के अली भाई, मुहम्मद अली और शौकत अली, प्रमुख स्वर थे। अवध के ग्रामीण क्षेत्र में बाबा रामचंद्र के नेतृत्व में किसान सभा ने 1920 से आंदोलन को काश्तकारों तक पहुँचाया, और 1921 में हरदोई तथा बाराबंकी में एका आंदोलन चला। मोड़ 4 फरवरी 1922 को गोरखपुर ज़िले के चौरी चौरा में आया, जहाँ भीड़ ने थाना जला दिया और बाईस पुलिसकर्मी मारे गए; कुछ दिन बाद महात्मा गांधी ने बारदोली प्रस्ताव द्वारा असहयोग आंदोलन वापस ले लिया।
क्रांतिकारी: कानपुर, काकोरी और अल्फ्रेड पार्क
हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन 1924 में कानपुर में संगठित हुआ, जिसके संस्थापकों में सचिंद्रनाथ सान्याल और राम प्रसाद बिस्मिल थे, और 1928 में इसका पुनर्गठन हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के रूप में हुआ। इसकी सबसे चर्चित कार्रवाई 9 अगस्त 1925 को लखनऊ के निकट काकोरी में सरकारी धन ले जा रही रेलगाड़ी रोकना थी, जो दल के लिए धन जुटाने के लिए की गई। उसके बाद चले मुकदमे में दिसंबर 1927 में बिस्मिल को गोरखपुर जेल में, अशफाक उल्ला खाँ को फैज़ाबाद में, रोशन सिंह को इलाहाबाद के नैनी में और राजेंद्र लाहिड़ी को गोंडा में फाँसी दी गई। दल को फिर खड़ा करने वाले चंद्रशेखर आज़ाद 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में घिरकर लड़ते हुए शहीद हुए।
भारत छोड़ो और प्रांत के नेता
अगस्त 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में कई स्थानों पर समांतर सरकारें बनीं, और इस प्रांत में बलिया कुछ दिनों तक चित्तू पांडे के नेतृत्व में स्वतंत्र रहा, जिन्हें शेर-ए-बलिया कहा जाता है। आज़मगढ़ और ग़ाज़ीपुर में भी ऐसे ही विद्रोह हुए। आंदोलन से आगे बढ़कर, प्रांत ने राष्ट्रीय नेतृत्व में असाधारण हिस्सा दिया: जवाहरलाल नेहरू और मोतीलाल नेहरू, मुगलसराय के लाल बहादुर शास्त्री, इलाहाबाद और बाराबंकी के पुरुषोत्तम दास टंडन तथा रफी अहमद किदवई, आचार्य नरेंद्र देव, और अकबरपुर के राम मनोहर लोहिया। 1963 में सुचेता कृपलानी उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं, जो भारत में किसी राज्य सरकार का नेतृत्व करने वाली पहली महिला थीं।
परीक्षा की दृष्टि से
यूपीपीएससी, यूपीएसएसएससी और यूपी पुलिस के पेपर इस अध्याय को स्थान और तिथि के जोड़ों के रूप में पूछते हैं। 1857 के केंद्रों को उनके नेताओं के साथ पक्का करें (मेरठ, लखनऊ में बेगम हज़रत महल, कानपुर में नाना साहेब, झाँसी में रानी लक्ष्मीबाई, फैज़ाबाद में मौलवी अहमदुल्ला शाह, बरेली में खान बहादुर खाँ); फिर सर्वाधिक पूछी जाने वाली चार तिथियाँ: 10 मई 1857, 4 फरवरी 1922, 9 अगस्त 1925 और 27 फरवरी 1931। जाल तय हैं: बलिया के मंगल पांडे को बैरकपुर के स्थान पर मेरठ से जोड़ देना, चौरी चौरा को गोरखपुर नगर या किसी अन्य वर्ष में रख देना, काकोरी कांड का नेतृत्व बिस्मिल के स्थान पर चंद्रशेखर आज़ाद को देना, और लखनऊ समझौते को 1917 या लाहौर अधिवेशन से जोड़ देना। नेताओं पर प्रश्न आमतौर पर जन्मस्थान या पद पूछते हैं, इसलिए प्रत्येक नाम के लिए एक पंक्ति याद रखें।
महत्वपूर्ण तथ्य
| विद्रोह का आरंभ | मेरठ, 10 मई 1857, छावनी के सिपाहियों द्वारा |
|---|---|
| मंगल पांडे | बलिया ज़िले के नगवा गाँव के; मार्च 1857 का बैरकपुर कांड |
| 1857 में लखनऊ | बेगम हज़रत महल, पुत्र बिरजिस कद्र के नाम पर |
| 1857 में कानपुर | नाना साहेब और तात्या टोपे; सलाहकार अज़ीमुल्ला खाँ |
| अवध का विलय | 1856, लॉर्ड डलहौज़ी द्वारा; वाजिद अली शाह कलकत्ता भेजे गए |
| लखनऊ समझौता | 1916, कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच |
| काशी हिंदू विश्वविद्यालय | 1916 में मदन मोहन मालवीय द्वारा स्थापित |
| चौरी चौरा | 4 फरवरी 1922, गोरखपुर ज़िला; असहयोग आंदोलन वापस |
| काकोरी कांड | 9 अगस्त 1925, लखनऊ के निकट; नेतृत्व राम प्रसाद बिस्मिल |
| काकोरी की फाँसियाँ | दिसंबर 1927: बिस्मिल गोरखपुर, अशफाक उल्ला खाँ फैज़ाबाद, रोशन सिंह नैनी, राजेंद्र लाहिड़ी गोंडा |
| चंद्रशेखर आज़ाद | 27 फरवरी 1931, इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में शहीद |
| अवध किसान सभा | 1920 से बाबा रामचंद्र का नेतृत्व; 1921 का एका आंदोलन |
| बलिया में भारत छोड़ो | अगस्त 1942, चित्तू पांडे अर्थात शेर-ए-बलिया के नेतृत्व में |
| उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री | गोविंद बल्लभ पंत; 1963 में सुचेता कृपलानी मुख्यमंत्री बनीं |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
1857 का विद्रोह 10 मई 1857 को किस नगर में सिपाहियों के विद्रोह से आरंभ हुआ?
- A.बैरकपुर
- B.मेरठ
- C.कानपुर
- D.लखनऊ
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10 मई 1857 को मेरठ छावनी के सिपाहियों ने अपने अधिकारियों के विरुद्ध विद्रोह किया, नए कारतूस लेने से इनकार करने पर बंदी बनाए गए साथियों को छुड़ाया और दिल्ली की ओर बढ़े, जहाँ उन्होंने बहादुर शाह ज़फर को बादशाह घोषित किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →लखनऊ में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कद्र के नाम पर किसने किया?
- A.रानी लक्ष्मीबाई
- B.बेगम हज़रत महल
- C.रानी अवंतीबाई
- D.ज़ीनत महल
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अपदस्थ नवाब वाजिद अली शाह की बेगम ने अवध के विलय के बाद लखनऊ में नेतृत्व संभाला और अपने बालक पुत्र बिरजिस कद्र को शासक घोषित कराया, जबकि अंग्रेज़ सेना रेजिडेंसी में घिरी रही।
पूरी व्याख्या पढ़ें →4 फरवरी 1922 की चौरी चौरा घटना, जिसके बाद असहयोग आंदोलन वापस लिया गया, किस ज़िले में हुई थी?
- A.गोरखपुर
- B.बलिया
- C.बाराबंकी
- D.आज़मगढ़
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चौरी चौरा गोरखपुर ज़िले का स्थान है, जहाँ 4 फरवरी 1922 को जुलूस पुलिस पर पलट पड़ा और थाने में आग लगा दी गई, जिसमें बाईस पुलिसकर्मी मारे गए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →9 अगस्त 1925 के काकोरी कांड का नेतृत्व किसने किया था?
- A.चंद्रशेखर आज़ाद
- B.राम प्रसाद बिस्मिल
- C.भगत सिंह
- D.सचिंद्रनाथ सान्याल
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1924 में कानपुर में संगठित हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन को हथियारों के लिए धन चाहिए था, और बिस्मिल ने 9 अगस्त 1925 को लखनऊ के निकट काकोरी में सरकारी खज़ाना ले जा रही रेलगाड़ी रोकने की योजना बनाई और उसका नेतृत्व किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना 1916 में किस नेता ने की थी?
- A.मदन मोहन मालवीय
- B.मोतीलाल नेहरू
- C.पुरुषोत्तम दास टंडन
- D.एनी बेसेंट
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इलाहाबाद के कांग्रेस नेता मालवीय ने 1916 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना की और वर्षों तक उसका नेतृत्व किया; यह विश्वविद्यालय आज भी प्रांत में राष्ट्रीय आंदोलन द्वारा खड़ी की गई सबसे बड़ी संस्था है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →चंद्रशेखर आज़ाद 27 फरवरी 1931 को पुलिस से लड़ते हुए किस स्थान पर शहीद हुए?
- A.लखनऊ के निकट काकोरी
- B.इलाहाबाद का अल्फ्रेड पार्क
- C.लाहौर सेंट्रल जेल
- D.गोरखपुर का चौरी चौरा
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काकोरी मुकदमे के बाद आज़ाद ने क्रांतिकारी दल को हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के रूप में फिर खड़ा किया, और 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में पुलिस से घिरकर वे वहीं लड़ते हुए शहीद हुए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1916 का लखनऊ समझौता किन दो संगठनों के बीच हुआ था?
- A.कांग्रेस और हिंदू महासभा
- B.कांग्रेस और मुस्लिम लीग
- C.मुस्लिम लीग और ब्रिटिश सरकार
- D.कांग्रेस और खिलाफत समिति
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1916 में लखनऊ में हुए अपने अधिवेशनों में दोनों संगठनों ने सुधारों की संयुक्त योजना पर सहमति बनाई, जिसमें कांग्रेस ने मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन स्वीकार किया, और उसी अधिवेशन में कांग्रेस के नरम तथा गरम दल फिर एक हुए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1857 के बैरकपुर कांड के बाद फाँसी पाए सिपाही मंगल पांडे वर्तमान उत्तर प्रदेश के किस ज़िले के थे?
- A.बलिया
- B.मेरठ
- C.झाँसी
- D.बरेली
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मंगल पांडे तत्कालीन संयुक्त प्रांत के बलिया ज़िले के नगवा गाँव के थे और बंगाल के बैरकपुर में 34वीं नेटिव इन्फैंट्री में सेवा कर रहे थे, जहाँ मार्च 1857 में उन्होंने अधिकारियों पर आक्रमण किया और उन्हें फाँसी दी गई।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अगस्त 1942 में बलिया में भारत छोड़ो आंदोलन का नेतृत्व किसने किया, जहाँ कुछ दिनों तक समांतर प्रशासन चला?
- A.चित्तू पांडे
- B.बाबा रामचंद्र
- C.रफी अहमद किदवई
- D.आचार्य नरेंद्र देव
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भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अगस्त 1942 में बलिया के लोगों ने चित्तू पांडे के नेतृत्व में कुछ दिनों तक ज़िले का प्रशासन अपने हाथ में ले लिया, और उन्हें शेर-ए-बलिया कहा जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1963 में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनने वाली, भारत में किसी राज्य सरकार का नेतृत्व करने वाली पहली महिला कौन थीं?
- A.विजया लक्ष्मी पंडित
- B.सुचेता कृपलानी
- C.अरुणा आसफ अली
- D.सरोजिनी नायडू
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भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने वाली कांग्रेस नेता सुचेता कृपलानी 1963 में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं और वे किसी भी भारतीय राज्य में यह पद संभालने वाली पहली महिला थीं, और प्रश्न आमतौर पर इसी रूप में पूछा जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →खिलाफत आंदोलन किस वर्ष आरंभ हुआ था?
- A.1922
- B.1923
- C.1919
- D.1921
उत्तर देखें
प्रथम विश्वयुद्ध में तुर्की की पराजय के बाद भारतीय मुसलमानों को तुर्की के सुल्तान की खलीफा के रूप में स्थिति की चिंता हुई, और 1919 में अखिल भारतीय खिलाफत समिति बनी, जिसका पहला सम्मेलन उसी वर्ष नवंबर में दिल्ली में हुआ।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन उन नेताओं में थे जिन्होंने महात्मा गांधी को खिलाफत के समर्थन में असहयोग आंदोलन आरंभ करने की आवश्यकता पर सहमत किया?
- A.शौकत अली
- B.मोहम्मद अली जिन्ना
- C.मौलाना अबुल कलाम आज़ाद
- D.अब्दुल गफ्फार खाँ
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शौकत अली और उनके भाई मुहम्मद अली, अर्थात संयुक्त प्रांत के रामपुर के अली भाई, खिलाफत आंदोलन के नेता थे और उन्होंने महात्मा गांधी से मिलकर यह तर्क रखा कि खिलाफत के प्रश्न और स्वराज की लड़ाई को साथ लड़ा जाए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1857 का विद्रोह कहाँ और कब आरंभ हुआ?
यह संयुक्त प्रांत के मेरठ में 10 मई 1857 को आरंभ हुआ, जब छावनी के सिपाही उठ खड़े हुए, बंदी साथियों को छुड़ाया और दिल्ली की ओर बढ़े। मार्च 1857 का बैरकपुर कांड, जिसमें मंगल पांडे ने अधिकारियों पर आक्रमण किया, इसकी भूमिका माना जाता है।
चौरी चौरा घटना क्यों महत्वपूर्ण है?
4 फरवरी 1922 को गोरखपुर ज़िले के चौरी चौरा में भीड़ ने थाने में आग लगा दी और बाईस पुलिसकर्मी मारे गए। गांधीजी ने माना कि आंदोलन हिंसक हो गया है और कुछ दिन बाद बारदोली प्रस्ताव द्वारा असहयोग आंदोलन वापस ले लिया।
काकोरी कांड का नेतृत्व किसने किया और उनका क्या हुआ?
9 अगस्त 1925 को लखनऊ के निकट यह कार्रवाई राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में हुई, जिसमें अशफाक उल्ला खाँ, राजेंद्र लाहिड़ी, रोशन सिंह तथा हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के अन्य साथी शामिल थे। इनमें से चार को दिसंबर 1927 में गोरखपुर, फैज़ाबाद, गोंडा और नैनी में फाँसी दी गई।
लखनऊ में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किसने किया?
बेगम हज़रत महल ने, जिन्होंने अवध के विलय के बाद अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कद्र के नाम पर प्रतिरोध का नेतृत्व किया। अंग्रेज़ सेना लखनऊ की रेजिडेंसी में घिर गई थी और रेजिडेंसी के अवशेष आज भी वहाँ खड़े हैं।
भारत छोड़ो आंदोलन में उत्तर प्रदेश का कौन सा ज़िला स्वतंत्र हुआ?
बलिया, जहाँ अगस्त 1942 में चित्तू पांडे के नेतृत्व में लोगों ने कुछ दिनों तक समांतर प्रशासन चलाया। उन्हें शेर-ए-बलिया कहा जाता है, और आज़मगढ़ तथा ग़ाज़ीपुर में भी ऐसे ही विद्रोह हुए।
स्रोत
- हमारे अतीत III (कक्षा आठ), 1857 तथा राष्ट्रीय आंदोलन से संबंधित अध्याय — एनसीईआरटी
- भारतीय इतिहास के विषय भाग तीन (कक्षा बारह), स्वतंत्रता संग्राम के अध्याय — एनसीईआरटी
- लखनऊ की रेजिडेंसी तथा राष्ट्रीय महत्व के अन्य स्मारक — भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण
- राज्य का इतिहास, उत्तर प्रदेश सरकार पोर्टल — उत्तर प्रदेश सरकार





