उत्तर प्रदेश का कोई मंत्री यदि लगातार छह मास तक राज्य विधानमंडल के किसी सदन का सदस्य नहीं रहता है, तो
- A.राज्यपाल की अनुमति से वह एक वर्ष तक पद पर रह सकता है
- B.उस अवधि की समाप्ति पर वह मंत्री नहीं रहेगा
- C.विधानसभा उसे विधान परिषद में निर्वाचित करेगी
- D.विधानसभा का प्रस्ताव पारित होने पर वह पद पर रह सकता है
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर B, उस अवधि की समाप्ति पर वह मंत्री नहीं रहेगा है। अनुच्छेद 164(4) कहता है कि जो मंत्री किसी निरंतर छह मास की अवधि तक राज्य के विधानमंडल का सदस्य नहीं है, वह उस अवधि की समाप्ति पर मंत्री नहीं रहेगा। यह नियम सरकार को सदन के बाहर से किसी व्यक्ति को लाने की छूट देता है, परंतु समय-सीमा तय कर देता है जिसके भीतर उसे विधानसभा की सीट जीतनी होगी या, जिस राज्य में परिषद है, विधान परिषद में निर्वाचित होना होगा।
विकल्प A गलत है, क्योंकि राज्यपाल किसी संवैधानिक समय-सीमा को बढ़ा नहीं सकता। विकल्प C रूप से ही गलत है: विधानसभा के सदस्य परिषद के केवल एक कोटे का निर्वाचन करते हैं और किसी मंत्री के लिए कोई सीट आरक्षित नहीं होती। विकल्प D गलत है, क्योंकि सदन प्रस्ताव पारित करके किसी गैर-सदस्य को पद पर नहीं रख सकता। संघ के मंत्री के लिए यही नियम अनुच्छेद 75(5) में है।
पूरा लेख पढ़ें: उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और मंत्रिपरिषद: अनुच्छेद और शक्तियाँ
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंउत्तर प्रदेश के राज्यपाल की नियुक्ति कौन करता है?
- A.भारत का प्रधानमंत्री
- B.भारत का राष्ट्रपति
- C.इलाहाबाद उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश
- D.उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री
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अनुच्छेद 155 कहता है कि राज्य के राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा करेगा, अर्थात यह पद नियुक्ति से भरा जाता है, चुनाव से कभी नहीं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राज्यपाल पद पर नियुक्ति के लिए न्यूनतम आयु कितनी निर्धारित है?
- A.25 वर्ष
- B.30 वर्ष
- C.35 वर्ष
- D.40 वर्ष
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अनुच्छेद 157 राज्यपाल पद के लिए केवल दो योग्यताएँ रखता है: व्यक्ति भारत का नागरिक हो और पैंतीस वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मुख्यमंत्री सहित उत्तर प्रदेश की मंत्रिपरिषद में अधिकतम कितने मंत्री हो सकते हैं?
- A.40
- B.50
- C.60
- D.80
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संविधान के इक्यानबेवें संशोधन अधिनियम, 2003 से जोड़ा गया अनुच्छेद 164(1A) मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या को विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के पंद्रह प्रतिशत तक सीमित करता है और न्यूनतम बारह रखता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उत्तर प्रदेश के राज्यपाल किसके समक्ष पद की शपथ लेते हैं?
- A.भारत के राष्ट्रपति
- B.भारत के मुख्य न्यायाधीश
- C.राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
- D.विधानसभा के अध्यक्ष
उत्तर देखें
अनुच्छेद 159 के अनुसार प्रत्येक राज्यपाल पद ग्रहण करने से पूर्व उस राज्य के संबंध में अधिकारिता रखने वाले उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष, और उनकी अनुपस्थिति में उस न्यायालय के उपलब्ध वरिष्ठतम न्यायाधीश के समक्ष, शपथ लेता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अनुच्छेद 161 के अंतर्गत राज्यपाल की क्षमादान शक्ति के बाहर इनमें से क्या है?
- A.राज्य विधि के अपराध में दंड का परिहार
- B.मृत्युदंड का निलंबन
- C.मृत्युदंड की क्षमा
- D.मृत्युदंड का लघुकरण
उत्तर देखें
अनुच्छेद 161 राज्यपाल को उस विधि के विरुद्ध अपराध के लिए दोषसिद्ध व्यक्ति के दंड में क्षमा, प्रविलंबन, विराम या परिहार देने तथा दंड को निलंबित, परिहार या लघुकृत करने की शक्ति देता है जो राज्य की कार्यपालिका शक्ति के विषय से संबंधित है।
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