राजस्थान में हिंदुस्तान जिंक के जस्ता और सीसा प्रगलन संयंत्र कहाँ स्थित हैं?
- A.खेतड़ी और कोलिहान
- B.देबारी और चंदेरिया
- C.झामरकोटड़ा और कपासन
- D.डीडवाना और पचपदरा
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B, देबारी और चंदेरिया। हिंदुस्तान जिंक उदयपुर के निकट देबारी और चित्तौड़गढ़ जिले के चंदेरिया में जस्ता तथा सीसा गलाती है, और राजसमंद के दरीबा में भी उसका संयंत्र है; अयस्क जावर, रामपुरा आगुचा तथा राजपुरा दरीबा की खानों से आता है। विकल्प A झुंझुनूं के खेतड़ी और कोलिहान हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की ताँबा खदानें हैं, जस्ता संयंत्र नहीं। विकल्प C उदयपुर का झामरकोटड़ा राज्य की बड़ी रॉक फॉस्फेट खान है, जो उर्वरक में काम आती है, और कपासन चित्तौड़गढ़ का नगर है जहाँ कोई प्रगलन संयंत्र नहीं है। विकल्प D नागौर का डीडवाना और बाड़मेर का पचपदरा नमक के स्रोत हैं, तथा पचपदरा रिफाइनरी परियोजना का स्थल भी है। धातु और स्थान का जोड़ा याद रखना चाहिए — जस्ते के साथ देबारी, ताँबे के साथ खेतड़ी।
पूरा लेख पढ़ें: राजस्थान के उद्योग और हस्तशिल्प: जिले और शिल्प
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंराजस्थान का वस्त्र नगर किस शहर को कहा जाता है?
- A.कोटा
- B.भीलवाड़ा
- C.पाली
- D.जोधपुर
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भीलवाड़ा वर्स्टेड यार्न और सूटिंग कपड़े के बल पर राजस्थान का सबसे बड़ा वस्त्र केंद्र बना, जहाँ कताई, बुनाई और प्रोसेसिंग इकाइयाँ एक ही जगह हैं, इसलिए इसे राज्य का वस्त्र नगर और कभी-कभी मैनचेस्टर कहा जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अजमेर जिले का किशनगढ़ किस सामग्री के व्यापार के लिए प्रसिद्ध है?
- A.ग्रेनाइट
- B.संगमरमर
- C.बलुआ पत्थर
- D.जिप्सम
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अजमेर जिले के किशनगढ़ में एशिया की सबसे बड़ी संगमरमर मंडी है, जहाँ राजस्थान की खदानों के स्लैब और आयातित खंड काटे, पॉलिश किए और बेचे जाते हैं, इसीलिए इस नगर को मार्बल सिटी कहा जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →झुंझुनूं जिले का खेतड़ी किस धातु के खनन के लिए प्रसिद्ध है?
- A.सीसा
- B.ताँबा
- C.जस्ता
- D.मैंगनीज
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झुंझुनूं जिले में हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड द्वारा संचालित खेतड़ी ताम्र परिसर खेतड़ी तथा कोलिहान खानों के ताम्र अयस्क पर काम करता है, और अलवर का खो-दरीबा राज्य की दूसरी ताम्र पट्टी है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →साधारण मिट्टी के बजाय क्वार्ट्ज और पिसे काँच से बनने वाली ब्लू पॉटरी किस नगर का शिल्प है?
- A.जोधपुर
- B.जयपुर
- C.बीकानेर
- D.अलवर
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ब्लू पॉटरी मुगल काल में फारसी तथा अफगान शिल्पियों के साथ जयपुर पहुँची और बीसवीं शताब्दी में चित्रकार कृपाल सिंह शेखावत ने इसे पुनर्जीवित किया; इसका लेप मिट्टी के बजाय क्वार्ट्ज, मुल्तानी मिट्टी और पिसे काँच से बनता है, और बरतन कोबाल्ट नीले रंग से चित्रित कर कम ताप पर…
पूरी व्याख्या पढ़ें →भौगोलिक संकेत प्राप्त राजस्थान का शिल्प कोटा डोरिया क्या है?
- A.बंधेज की छपाई
- B.अत्यंत हल्का बुना कपड़ा
- C.टेराकोटा शिल्प
- D.काँच पर जड़ा स्वर्ण कार्य
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कोटा डोरिया कोटा जिले के कैथून तथा आसपास के गाँवों में सूत और रेशम के धागे से ऐसी चौकोर बुनावट में बुना जाता है कि कपड़ा इतना बारीक और खुला होता है कि वह लगभग भारहीन लगता है, और उससे बनी साड़ियों को भौगोलिक संकेत प्राप्त है।
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