हरियाणा में पंचायती राज और नगरीय निकाय: अधिनियम और अनुच्छेद
हरियाणा के स्थानीय शासन के नोट्स: 73वां और 74वां संशोधन, 1994 का अधिनियम, राजबाला मामला, आरक्षण तथा राज्य के नगरीय निकाय, परीक्षा के तथ्यों के साथ।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

स्थानीय शासन भारतीय संघीय ढांचे की तीसरी कड़ी है, और हरियाणा में यह गांवों की पंचायतों तथा नगरों के नगरीय निकायों के माध्यम से चलता है। वर्ष 1992 के 73वें और 74वें संविधान संशोधन अधिनियमों ने दोनों को संविधान में स्थान दिया, और राज्य इन्हें हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994, हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 तथा हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 के माध्यम से चलाता है। एचएसएससी, एचपीएससी, हरियाणा पुलिस, क्लर्क तथा एसएससी के प्रश्नपत्र इस अध्याय से एक जैसी बातें पूछते हैं, अर्थात स्तर और उनके पदाधिकारियों के नाम, भाग नौ तथा भाग नौ-क के अनुच्छेद, विषयों की दो अनुसूचियां, और हरियाणा की अपनी विशेषताएं, जिनमें सबसे प्रमुख 2015 में उम्मीदवारों के लिए तय की गई योग्यताएं तथा उन्हें वैध ठहराने वाला उच्चतम न्यायालय का निर्णय है।
पंचायती राज संविधान तक कैसे पहुंचा
अनुच्छेद 40, जो नीति निदेशक तत्व है, राज्य से ग्राम पंचायतों को स्वशासन की इकाई के रूप में संगठित करने को कहता है। वर्ष 1957 की बलवंत राय मेहता समिति ने त्रिस्तरीय ढांचे की सिफारिश की, जिसका उद्घाटन राजस्थान में 2 अक्टूबर 1959 को नागौर में हुआ। वर्ष 1977 की अशोक मेहता समिति ने दो स्तर सुझाए, 1985 की जी. वी. के. राव समिति ने खंड को नियोजन की इकाई बनाने की बात कही, और 1986 की एल. एम. सिंघवी समिति ने सबसे पहले संवैधानिक दर्जे की मांग की। 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 ने भाग नौ, अनुच्छेद 243 से 243-ण, तथा 29 विषयों वाली ग्यारहवीं अनुसूची जोड़ी और यह 24 अप्रैल 1993 को लागू हुआ, जो अब राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस है। 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 ने भाग नौ-क, अनुच्छेद 243-ब से 243-यग, तथा 18 विषयों वाली बारहवीं अनुसूची जोड़ी और यह 1 जून 1993 को लागू हुआ। वर्ष 1966 में बने हरियाणा में तब तक पंजाब ग्राम पंचायत अधिनियम, 1952 तथा पंजाब पंचायत समिति एवं जिला परिषद अधिनियम, 1961 चलते थे, जिन्हें संशोधन लागू करने के लिए हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 ने हटाया।
हरियाणा के तीन स्तर
| निकाय | स्तर | प्रमुख | कैसे चुना जाता है |
|---|---|---|---|
| ग्राम पंचायत | गांव | सरपंच, साथ में उपसरपंच | सरपंच सीधे मतदाताओं से, पंच वार्डों से निर्वाचित |
| पंचायत समिति | खंड | चेयरमैन, साथ में उपचेयरमैन | समिति के सदस्य अपने में से चुनते हैं |
| जिला परिषद | जिला | अध्यक्ष, साथ में उपाध्यक्ष | परिषद के सदस्य अपने में से चुनते हैं |
अनुच्छेद 243-क के अंतर्गत ग्राम सभा पंचायत क्षेत्र के सभी पंजीकृत मतदाताओं का निकाय है और इस व्यवस्था में एकमात्र प्रत्यक्ष लोकतंत्र है, जो वार्षिक लेखे पारित करती है तथा योजनाओं के लाभार्थियों की सूची स्वीकृत करती है। अनुच्छेद 243-ख तीनों स्तर आवश्यक करता है, जिसमें बीस लाख से कम जनसंख्या वाले राज्य में मध्यवर्ती स्तर वैकल्पिक है। अनुच्छेद 243-ङ पांच वर्ष का कार्यकाल तय करता है और उसके समाप्त होने से पहले या विघटन से छह माह के भीतर नया चुनाव अनिवार्य करता है, तथा विघटन के बाद गठित निकाय केवल शेष अवधि तक रहता है। अनुच्छेद 243-च चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु इक्कीस वर्ष रखता है, जबकि लोक सभा और विधान सभा के लिए यह पच्चीस वर्ष है। अनुच्छेद 243-घ अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में और महिलाओं के लिए कुल सीटों तथा अध्यक्ष पदों के एक तिहाई से कम नहीं, आरक्षण देता है, और हरियाणा ने अपने संशोधनों से इस संवैधानिक न्यूनतम से आगे बढ़कर पिछड़े वर्गों के लिए भी आरक्षण दिया तथा महिलाओं का हिस्सा बढ़ाया। अनुच्छेद 243-छ तथा ग्यारहवीं अनुसूची उन 29 विषयों की सूची देते हैं जो सौंपे जा सकते हैं, और कार्य, धन एवं कर्मचारी तभी हस्तांतरित होते हैं जब राज्य विधानमंडल उसके लिए कानून बनाए।
वर्ष 2015 का हरियाणा संशोधन और राजबाला मामला
वर्ष 2015 में हरियाणा ने अपने पंचायती राज अधिनियम में संशोधन कर पंचायत चुनाव लड़ने के लिए शर्तें तय कीं। सामान्य वर्ग के उम्मीदवार के लिए मैट्रिक उत्तीर्ण होना आवश्यक था, महिलाओं तथा अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए कक्षा आठ और पंच पद पर लड़ने वाली अनुसूचित जाति की महिला के लिए कक्षा पांच। उम्मीदवार पर बिजली का बकाया अथवा सहकारी बैंक या समिति के ऋण का बकाया नहीं होना चाहिए था, घर में चालू शौचालय होना चाहिए था और गंभीर आपराधिक मामले में आरोप तय नहीं होने चाहिए थे। इस संशोधन को मनमाना और चुनाव लड़ने के अधिकार पर आघात बताकर चुनौती दी गई। दिसंबर 2015 में निर्णीत राजबाला बनाम हरियाणा राज्य में उच्चतम न्यायालय ने इसे वैध ठहराया और कहा कि चुनाव लड़ना वैधानिक अधिकार है तथा विधानमंडल ऐसी योग्यताएं तय कर सकता है। भूमि का स्वामित्व कभी शर्त नहीं था, और परीक्षक यही पूछकर जांचते हैं कि कौन-सी शर्त नहीं लगाई गई थी। यह मामला 1994 के अधिनियम के साथ इस अध्याय से सबसे अधिक पूछा जाता है।
नगरीय निकाय और उनका धन
अनुच्छेद 243-थ तीन प्रकार की नगरपालिकाएं देता है, अर्थात संक्रमणशील क्षेत्र के लिए नगर पंचायत, छोटे नगरीय क्षेत्र के लिए नगर परिषद और बड़े नगरीय क्षेत्र के लिए नगर निगम, तथा श्रेणी राज्यपाल जनसंख्या, घनत्व, राजस्व, गैर कृषि रोजगार और आर्थिक महत्व से तय करते हैं। हरियाणा में परिषदें तथा समितियां हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 से और निगम हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 से चलते हैं, तथा राज्य का पहला निगम सबसे बड़े नगर फरीदाबाद में बना, जबकि गुरुग्राम, पंचकूला, करनाल, रोहतक, हिसार, यमुनानगर, सोनीपत, अंबाला और मानेसर के निगम बाद में बनाए गए। निगम का प्रमुख महापौर होता है और उसका कार्यकारी प्रमुख नगर निगम आयुक्त, तथा राज्य ने अपने कानून में संशोधन कर महापौर और नगर परिषद के प्रधान का चुनाव सीधे मतदाताओं से कराने की व्यवस्था की है। इन सभी निकायों के चुनाव अनुच्छेद 243-ट तथा 243-यक के अंतर्गत हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग कराता है, भारत निर्वाचन आयोग नहीं। अनुच्छेद 243-झ पंचायतों के लिए और अनुच्छेद 243-य नगरपालिकाओं के लिए प्रत्येक पांच वर्ष पर राज्य वित्त आयोग आवश्यक करता है, तथा अनुच्छेद 243-ज-घ जिला योजना समिति देता है जो जिले के ग्रामीण और नगरीय निकायों की योजनाओं को समेकित करती है।
परीक्षा की दृष्टि से
एचएसएससी, एचपीएससी, हरियाणा पुलिस, क्लर्क तथा एसएससी इस अध्याय को चार तरह से पूछते हैं। पहला, राज्य के कानून और उनके वर्ष, अर्थात 1994 का हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1973 का हरियाणा नगरपालिका अधिनियम और 1994 का हरियाणा नगर निगम अधिनियम, तथा पूर्ववर्ती के रूप में 1952 एवं 1961 के पंजाब अधिनियम। दूसरा, 2015 का संशोधन और राजबाला निर्णय, जो दोनों रूपों में पूछा जाता है, सीधे भी और इस रूप में भी कि कौन-सी शर्त नहीं रखी गई थी। तीसरा, अनुच्छेद, अर्थात 243-क ग्राम सभा, 243-ख स्तर, 243-घ आरक्षण, 243-ङ कार्यकाल, 243-च आयु, 243-छ तथा ग्यारहवीं अनुसूची, 243-झ एवं 243-य वित्त आयोग, 243-ट तथा 243-यक चुनाव, 243-थ नगरपालिकाओं के प्रकार, 243-ब तथा बारहवीं अनुसूची और 243-ज-घ जिला योजना समिति। चौथा, पदाधिकारियों के नाम, जहां हरियाणा के सरपंच के स्थान पर बिहार का मुखिया नहीं रखना चाहिए और महापौर को नगर निगम आयुक्त से नहीं मिलाना चाहिए। सामान्य जाल दो हैं, राज्य निर्वाचन आयोग के स्थान पर भारत निर्वाचन आयोग, और 29 तथा 18 विषयों वाली दोनों अनुसूचियों का आपस में बदल जाना।
महत्वपूर्ण तथ्य
| राज्य का पंचायत कानून | हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 |
|---|---|
| पूर्ववर्ती कानून | पंजाब ग्राम पंचायत अधिनियम, 1952 तथा पंजाब पंचायत समिति एवं जिला परिषद अधिनियम, 1961 |
| नगरीय कानून | हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 तथा हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 |
| 73वां संशोधन लागू | 24 अप्रैल 1993, राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस |
| 74वां संशोधन लागू | 1 जून 1993 |
| अनुसूचियां | ग्यारहवीं अनुसूची 29 विषय, बारहवीं अनुसूची 18 विषय |
| गांव का प्रमुख | सरपंच, उपप्रमुख उपसरपंच |
| खंड स्तर | पंचायत समिति, प्रमुख चेयरमैन |
| जिला स्तर | जिला परिषद, प्रमुख अध्यक्ष |
| शैक्षणिक योग्यता, 2015 | सामान्य के लिए मैट्रिक, महिला तथा अनुसूचित जाति के लिए कक्षा आठ, पंच पद की अनुसूचित जाति महिला के लिए कक्षा पांच |
| अन्य शर्तें, 2015 | बिजली या सहकारी ऋण का बकाया न होना तथा घर में चालू शौचालय |
| उच्चतम न्यायालय का मामला | राजबाला बनाम हरियाणा राज्य, दिसंबर 2015, शर्तें वैध ठहराई गईं |
| न्यूनतम आयु | 21 वर्ष, अनुच्छेद 243-च |
| कार्यकाल | प्रत्येक स्तर के लिए पांच वर्ष, अनुच्छेद 243-ङ |
| चुनाव कराने वाला निकाय | हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग, अनुच्छेद 243-ट तथा 243-यक |
| पहला नगर निगम | फरीदाबाद, राज्य का सबसे बड़ा नगर |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
हरियाणा में पंचायती राज वर्तमान में किस राज्य कानून से संचालित होता है?
- A.पंजाब ग्राम पंचायत अधिनियम, 1952
- B.हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994
- C.हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973
- D.हरियाणा पंचायत समिति अधिनियम, 1966
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वर्ष 1992 के 73वें संविधान संशोधन के बाद प्रत्येक राज्य को अपना कानून संविधान के भाग नौ के अनुरूप बनाना था, और हरियाणा ने यह काम हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 से किया, जो आज भी राज्य की ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों तथा जिला परिषदों को संचालित करता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →हरियाणा में ग्राम पंचायत का सीधे निर्वाचित मुखिया किस नाम से जाना जाता है?
- A.मुखिया
- B.सरपंच
- C.प्रमुख
- D.महापौर
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हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 के अंतर्गत ग्राम पंचायत का प्रमुख सरपंच होता है, जिसे पंचायत क्षेत्र के सभी मतदाता सीधे चुनते हैं, उसका उप प्रमुख उपसरपंच होता है और गांव के वार्डों से पंच निर्वाचित होते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उच्चतम न्यायालय का राजबाला बनाम हरियाणा राज्य (2015) मामला किस विषय से संबंधित था?
- A.नगरपालिकाओं में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण
- B.पंचायत चुनाव लड़ने के लिए निर्धारित न्यूनतम योग्यताएं
- C.पंचायत चुनाव कराने में देरी
- D.राज्य वित्त आयोग की शक्तियां
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हरियाणा ने 2015 में अपने पंचायती राज अधिनियम में संशोधन कर उम्मीदवारों के लिए शर्तें जोड़ीं, जिनमें न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता, बिजली बकाया या सहकारी ऋण का बकाया न होना तथा घर में चालू शौचालय शामिल थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →हरियाणा पंचायती राज (संशोधन) अधिनियम, 2015 में सामान्य वर्ग के पुरुष उम्मीदवार के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता क्या रखी गई थी?
- A.कक्षा पांच उत्तीर्ण
- B.कक्षा आठ उत्तीर्ण
- C.मैट्रिक
- D.स्नातक
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संशोधन में सामान्य वर्ग के उम्मीदवार के लिए मैट्रिक यानी कक्षा दस उत्तीर्ण होना आवश्यक किया गया, जबकि महिलाओं तथा अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों को छूट देकर कक्षा आठ और पंच पद पर लड़ने वाली अनुसूचित जाति की महिला के लिए कक्षा पांच पर्याप्त रखी गई।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पंचायतों को संवैधानिक दर्जा देने वाला 73वां संविधान संशोधन अधिनियम किस तिथि को लागू हुआ?
- A.2 अक्टूबर 1959
- B.24 अप्रैल 1993
- C.1 जून 1993
- D.15 अगस्त 1994
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73वां संशोधन अधिनियम 1992 में पारित हुआ और 24 अप्रैल 1993 को लागू किया गया, जिसे तब से प्रतिवर्ष राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के रूप में मनाया जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →73वें संशोधन से जोड़ी गई ग्यारहवीं अनुसूची में पंचायतों के लिए कितने विषय हैं?
- A.18
- B.21
- C.29
- D.32
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अनुच्छेद 243-छ के साथ पढ़ी जाने वाली ग्यारहवीं अनुसूची में कृषि, लघु सिंचाई, पशुपालन, ग्रामीण आवास, पेयजल, सड़कें, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसे 29 विषय हैं, जिन्हें राज्य विधानमंडल पंचायतों को सौंप सकता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम, ये तीन प्रकार की नगरपालिकाएं किस अनुच्छेद में दी गई हैं?
- A.अनुच्छेद 243-ख
- B.अनुच्छेद 243-थ
- C.अनुच्छेद 243-ब
- D.अनुच्छेद 243-ज-घ
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अनुच्छेद 243-थ प्रत्येक राज्य से अपेक्षा करता है कि ग्रामीण से नगरीय बनते संक्रमणशील क्षेत्र के लिए नगर पंचायत, छोटे नगरीय क्षेत्र के लिए नगर परिषद और बड़े नगरीय क्षेत्र के लिए नगर निगम गठित किया जाए, तथा श्रेणी राज्यपाल जनसंख्या, घनत्व, राजस्व, गैर कृषि रोजगार के अनुपात और आर्थिक…
पूरी व्याख्या पढ़ें →हरियाणा में पंचायतों और नगरपालिकाओं के चुनाव कौन कराता है?
- A.भारत निर्वाचन आयोग
- B.हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग
- C.प्रत्येक जिले का उपायुक्त
- D.विकास एवं पंचायत विभाग
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पंचायतों के लिए अनुच्छेद 243-ट और नगरपालिकाओं के लिए अनुच्छेद 243-यक निर्वाचक नामावली तैयार कराने तथा इन चुनावों के संचालन का अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण राज्य निर्वाचन आयोग को देते हैं, जिसके आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं और जिन्हें उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की तरह ही और उन्हीं आधारों…
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में पंचायत चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु कितनी है?
- A.18 वर्ष
- B.21 वर्ष
- C.25 वर्ष
- D.30 वर्ष
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अनुच्छेद 243-च कहता है कि जो व्यक्ति राज्य विधानमंडल का सदस्य बनने के योग्य है वह पंचायत का सदस्य हो सकता है, परंतु एक अपवाद के साथ, कि इक्कीस वर्ष की आयु पूरी कर चुके व्यक्ति को केवल आयु के आधार पर अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा, इसलिए पंचायत सीट के…
पूरी व्याख्या पढ़ें →हरियाणा में सबसे पहले कौन-सा नगर निगम बनाया गया?
- A.गुरुग्राम
- B.फरीदाबाद
- C.पंचकूला
- D.करनाल
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दिल्ली से सटा पुराना औद्योगिक नगर और राज्य का सबसे बड़ा शहर फरीदाबाद वह स्थान है जहां हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 के अंतर्गत राज्य का पहला नगर निगम बना, और शेष निगम नगरों के बढ़ने के साथ बाद में बनाए गए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा के लिए राज्य वित्त आयोग किस अनुच्छेद के अंतर्गत और कितने समय पर गठित होता है?
- A.अनुच्छेद 243-झ, प्रत्येक पांच वर्ष पर
- B.अनुच्छेद 243-ङ, प्रत्येक वर्ष
- C.अनुच्छेद 280, प्रत्येक दस वर्ष पर
- D.अनुच्छेद 243-ट, प्रत्येक तीन वर्ष पर
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अनुच्छेद 243-झ राज्यपाल से अपेक्षा करता है कि प्रत्येक पांचवें वर्ष की समाप्ति पर राज्य के लिए वित्त आयोग गठित किया जाए, जो पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करे और सिफारिश करे कि राज्य के कर, शुल्क, पथकर तथा फीस उनके साथ किस प्रकार बांटे जाएं, कौन-से उन्हें सौंपे…
पूरी व्याख्या पढ़ें →हरियाणा के 2015 के संशोधन में पंचायत उम्मीदवारों के लिए निम्नलिखित में से कौन-सी शर्त नहीं जोड़ी गई थी?
- A.घर में चालू शौचालय
- B.बिजली बकाया या सहकारी ऋण बकाया न होना
- C.न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता
- D.गांव में कृषि भूमि का स्वामित्व
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संशोधन ने भूमि के स्वामित्व को कभी चुनाव लड़ने की शर्त नहीं बनाया, क्योंकि ऐसी शर्त भूमिहीन ग्रामीणों को पूरी तरह बाहर कर देती और वह उस कानून का भाग नहीं थी जिसकी परीक्षा उच्चतम न्यायालय ने की।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हरियाणा में पंचायती राज किस अधिनियम से चलता है?
हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 से, जो 73वें संविधान संशोधन को लागू करने के लिए बनाया गया। इससे पहले राज्य में पंजाब ग्राम पंचायत अधिनियम, 1952 तथा पंजाब पंचायत समिति एवं जिला परिषद अधिनियम, 1961 चलते थे, जो 1966 में हरियाणा बनने पर विरासत में मिले थे। नगरीय निकाय अलग से हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 और हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 से संचालित होते हैं।
हरियाणा पंचायती राज (संशोधन) अधिनियम, 2015 में क्या तय किया गया?
इसमें पंचायत चुनाव लड़ने की शर्तें तय की गईं, अर्थात सामान्य उम्मीदवार के लिए मैट्रिक, महिलाओं तथा अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए कक्षा आठ और पंच पद पर लड़ने वाली अनुसूचित जाति की महिला के लिए कक्षा पांच की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता, बिजली का बकाया अथवा सहकारी बैंक या समिति के ऋण का बकाया न होना, घर में चालू शौचालय, और गंभीर आपराधिक मामले में आरोप तय न होना। भूमि का स्वामित्व कभी शर्त नहीं था।
राजबाला बनाम हरियाणा राज्य में क्या निर्णय हुआ?
उच्चतम न्यायालय ने दिसंबर 2015 में हरियाणा के 2015 के संशोधन से जोड़ी गई शर्तों को वैध ठहराया। न्यायालय ने कहा कि चुनाव लड़ना मूल अधिकार नहीं बल्कि कानून से मिला अधिकार है, इसलिए विधानमंडल उम्मीदवारों के लिए योग्यताएं तय कर सकता है, और ये शर्तें इतनी मनमानी नहीं थीं कि रद्द की जाएं। हरियाणा के प्रश्नपत्रों में इस अध्याय से यही मामला सबसे अधिक पूछा जाता है।
हरियाणा में पंचायती राज के तीनों स्तरों का प्रमुख कौन होता है?
ग्राम पंचायत का प्रमुख सरपंच होता है, जिसे पंचायत क्षेत्र के सभी मतदाता सीधे चुनते हैं, उसका उपप्रमुख उपसरपंच होता है और पंच वार्डों से चुने जाते हैं। खंड स्तर पर पंचायत समिति का प्रमुख चेयरमैन और जिला स्तर पर जिला परिषद का प्रमुख अध्यक्ष होता है, और इन दोनों को उन्हीं निकायों के सदस्य अपने में से चुनते हैं।
हरियाणा में पंचायत और नगरपालिका चुनाव कौन कराता है?
हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग, जो पंचायतों के लिए अनुच्छेद 243-ट और नगरपालिकाओं के लिए अनुच्छेद 243-यक के अंतर्गत बना है। इसके राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं और उन्हें उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की तरह ही तथा उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है। इन चुनावों में भारत निर्वाचन आयोग की कोई भूमिका नहीं है, और प्रश्न में यही सामान्य जाल होता है।
हरियाणा में नगरीय निकाय कितने प्रकार के हैं?
अनुच्छेद 243-थ के अनुसार तीन प्रकार हैं, अर्थात ग्रामीण से नगरीय बनते संक्रमणशील क्षेत्र के लिए नगर पंचायत, छोटे नगरीय क्षेत्र के लिए नगर परिषद और बड़े नगरीय क्षेत्र के लिए नगर निगम, तथा श्रेणी राज्यपाल जनसंख्या, घनत्व, राजस्व, गैर कृषि रोजगार और आर्थिक महत्व के आधार पर तय करते हैं। राज्य का सबसे पुराना निगम फरीदाबाद में है और परिषदें तथा समितियां 1973 के अधिनियम से चलती हैं।
स्रोत
- भारत का संविधान, भाग नौ: पंचायतें, अनुच्छेद 243 से 243-ण तथा ग्यारहवीं अनुसूची — विधायी विभाग, विधि एवं न्याय मंत्रालय
- भारत का संविधान, भाग नौ-क: नगरपालिकाएं, अनुच्छेद 243-ब से 243-यग तथा बारहवीं अनुसूची — विधायी विभाग, विधि एवं न्याय मंत्रालय
- हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 — इंडिया कोड, विधायी विभाग
- हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 — इंडिया कोड, विधायी विभाग





