हरियाणा के लोक संगीत, नृत्य और सांग: विधाएं और तथ्य
एचएसएससी और सीईटी परीक्षाओं के लिए हरियाणा की प्रदर्शन कलाओं के नोट्स: धमाल, लूर, खोड़िया और गुग्गा नृत्य, सांग रंगमंच, रागिनी गीत विधा तथा लोक वाद्य।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

हरियाणा की प्रदर्शन कलाएं किसी राजदरबार की नहीं, गांव के आंगन और खुले मैदान की हैं। राज्य का अपना कोई शास्त्रीय नृत्य नहीं है और न अपना दरबारी घराना, और यही बात महत्वपूर्ण है: हरियाणा के पास इसके बदले अवसर के अनुसार बंधी घनी लोक परंपरा है। प्रत्येक नृत्य किसी ऋतु, किसी संस्कार अथवा पारिवारिक जीवन के किसी पड़ाव से जुड़ा है, गीत उसी पंचांग पर चलते हैं, और एक बड़ी नाट्य विधा सांग उन गांव के कवियों से निकली जो अपनी ही रचनाएं रात भर खड़े जनसमूह को सुनाते थे। परीक्षा के लिए सबसे सुरक्षित तरीका है कि प्रत्येक विधा को उसके अवसर, कलाकार और वाद्य के साथ याद किया जाए।
लोक नृत्य
| नृत्य | कौन करता है | अवसर |
|---|---|---|
| धमाल | पुरुष, घेरे में | फाल्गुन की पूर्णिमा की रातें, मुख्यतः महेंद्रगढ़ और झज्जर पट्टी में; राज्य का सबसे प्राचीन नृत्य माना जाता है |
| फाग | पुरुष, और अलग से महिलाएं | होली का मौसम, जब रबी फसल लगभग तैयार होती है |
| लूर | महिलाएं और किशोरियां, आमने सामने दो दलों में | बागड़ क्षेत्र में फाल्गुन और होली; दोनों दल प्रश्न उत्तर में गाते हैं |
| खोड़िया | घर की स्त्रियां, आपस में | बारात के वधू के गांव चले जाने के बाद; अक्सर पुरुषों की हास्य नकल |
| घूमर और झूमर | महिलाएं, गोल घेरे में | त्योहार और विवाह, मुख्यतः बागड़ तथा दक्षिणी जिलों में |
| गुग्गा या गुग्गा नौमी | सजी छड़ी लिए भक्त | भादों का महीना, गुग्गा पीर के सम्मान में |
| छठी | महिलाएं | संतान जन्म के छठे दिन |
| मंजीरा और डफ | पुरुष, हाथ में वाद्य लिए | मेले और गाथा गायन; नृत्य वाद्य के नाम से ही पुकारा जाता है |
| तीज और झूलन | किशोरियां और युवतियां | सावन के झूले, तीज पर्व पर |
सांग, लोक रंगमंच
सांग, जिसे स्वांग भी लिखा जाता है, हरियाणा तथा पड़ोसी हिंदी क्षेत्र का लोक ओपेरा है। यह रात में खाटों और पटरों के खुले चबूतरे पर खेला जाता है, जहां न परदा होता है, न दृश्य सज्जा और न प्रवेश शुल्क, तथा दर्शक तीन या चार दिशाओं में बैठते हैं। मंडली छोटी होती है: उसका नायक कवि, दो तीन गायक, और ढोलक, नगाड़ा, सारंगी, हारमोनियम तथा खड़ताल बजाने वाले। सभी भूमिकाएं, स्त्री पात्र भी, परंपरा में पुरुष निभाते थे। नाटक गाए जाने वाले छंदों में चलता है, जिनके बीच गद्य संवाद आते हैं, और एक ही कथा पूरी रात चल सकती है, जिसमें दर्शक अपनी पसंदीदा रागिनी दोहराने की मांग करते रहते हैं।
इस विधा को अठारहवीं सदी में पंडित दीपचंद ने स्वरूप दिया, जो सांग का पहला बड़ा नाम हैं और जिन्होंने इसे गाए जाने वाले नाटक का ढांचा दिया। इसके सबसे प्रसिद्ध उस्ताद पंडित लखमीचंद हैं, जो सूर्यकवि कहे जाते हैं और जिन्हें प्रायः हरियाणा का शेक्सपियर कहा जाता है; उनके पद्मावत, चापसिंह और सोमवती, सत्यवान और सावित्री, हीर और रांझा तथा राजा बने लकड़हारे पर आधारित सांग आज भी खेले और गाए जाते हैं। बाजे भगत, पंडित मांगेराम और धनपत सिंह इसी परंपरा के हैं। लोक कला के लिए राज्य का सर्वोच्च सम्मान पंडित लखमीचंद के नाम पर है।
रागिनी और गीत विधाएं
रागिनी हरियाणा की विशिष्ट छंद गीत विधा है, जिसमें एक स्थायी टेक होती है और उस पर दर्शन, भक्ति, व्यंग्य अथवा कथा का कोई प्रसंग चढ़ाया जा सकता है। यह सांग के भीतर जीती है परंतु मेलों में तथा कवियों की आपसी होड़ में अकेले भी गाई जाती है। इसके साथ घर के गीत वर्ष और जीवन चक्र को चिह्नित करते हैं: विवाह पर मंगल गीत तथा बन्ना और बन्नी, संतान जन्म पर जच्चा, सावन के झूलों पर तीज गीत, होली पर फाग, और भक्ति की बैठकों में भजन तथा निर्गुण। भाट और मिरासी नामक वंशानुगत गायक वंशावलियां और यशगान द्वार द्वार ले जाते थे, तथा किसी स्थानीय वीर अथवा आल्हा ऊदल की गाथा मेले का मुख्य आकर्षण होती थी।
वाद्य और संस्थाएं
वाद्य सरल और ऊंची आवाज वाले हैं: लय के लिए ढोलक और गहरा नगाड़ा, स्वर के लिए सारंगी और बाद में हारमोनियम, बीन, बांसुरी, तथा समय बांधने वाले धातु वाद्य खड़ताल, मंजीरा, चिमटा और घुंघरू, जिनमें दो वाद्य दो नृत्यों को नाम देते हैं। शास्त्रीय संगीत में हरियाणा और राजस्थान की सीमा का मेवात क्षेत्र मेवाती घराना देता है, जिससे हरियाणा के एक गांव में जन्मे पंडित जसराज जुड़े थे। हरियाणा कला परिषद तथा हरियाणा साहित्य अकादमी आज इन लोक कलाओं को सहारा देती हैं, और सूरजकुंड शिल्प मेला प्रत्येक फरवरी में उन्हें राष्ट्रीय मंच देता है।
परीक्षा की दृष्टि से
इस अध्याय पर तीन प्रकार के प्रश्न आते हैं। पहला, नृत्य और अवसर का मेल, जहां सर्वाधिक अंक कटते हैं: धमाल के साथ पूर्णिमा, लूर के साथ बागड़ क्षेत्र का फाल्गुन, खोड़िया के साथ बारात का प्रस्थान, छठी के साथ जन्म का छठा दिन, गुग्गा के साथ भादों तथा तीज के साथ सावन के झूले। दूसरा, सांग, जिसमें पूछा जाता है कि इस विधा को स्वरूप किसने दिया, उत्तर पंडित दीपचंद, और सूर्यकवि अथवा हरियाणा का शेक्सपियर कौन कहे जाते हैं, उत्तर पंडित लखमीचंद; राज्य के लोक कला सम्मान का नाम इसका अगला प्रश्न होता है। तीसरा, एक पंक्ति के तथ्य: राज्य की गीत विधा रागिनी, पंडित जसराज का घराना तथा वे वाद्य जो मंजीरा और डफ नृत्यों को नाम देते हैं। आम भ्रम यह है कि पड़ोसी राज्य की विधा, जैसे भांगड़ा, गिद्दा अथवा नौटंकी, हरियाणा से जोड़ दी जाए।
महत्वपूर्ण तथ्य
| हरियाणा का प्राचीनतम नृत्य | धमाल, पूर्णिमा की रातों को पुरुषों द्वारा |
|---|---|
| धमाल क्षेत्र | महेंद्रगढ़ और झज्जर क्षेत्र |
| लूर | बागड़ क्षेत्र की महिलाएं, फाल्गुन और होली पर |
| खोड़िया | बारात के प्रस्थान के बाद घर की स्त्रियां |
| छठी | संतान जन्म के छठे दिन |
| गुग्गा नौमी | भादों मास, गुग्गा पीर के लिए, छड़ी के साथ |
| तीज और झूलन | तीज पर्व पर सावन के झूले |
| लोक रंगमंच | सांग या स्वांग, रात में खुले चबूतरे पर |
| सांग को स्वरूप देने वाले | पंडित दीपचंद, अठारहवीं सदी |
| हरियाणा के सूर्यकवि | पंडित लखमीचंद |
| अन्य सांग कवि | बाजे भगत, पंडित मांगेराम, धनपत सिंह |
| राज्य की गीत विधा | रागिनी |
| सांग के वाद्य | ढोलक, नगाड़ा, सारंगी, हारमोनियम, खड़ताल |
| पंडित जसराज | हरियाणा में जन्म, मेवाती घराना |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
हरियाणा के सांग लोक रंगमंच को अठारहवीं सदी में स्वरूप किसने दिया?
- A.पंडित लखमीचंद
- B.पंडित दीपचंद
- C.बाजे भगत
- D.पंडित मांगेराम
उत्तर देखें
पंडित दीपचंद सांग के इतिहास का पहला बड़ा नाम हैं और उन्हें इस बात का श्रेय है कि उन्होंने ढीले ढाले गांव के मनोरंजन को ढांचे वाला गाया जाने वाला नाटक बनाया: आरंभ में वंदना, छंदों में चलती कथा, गीतों के बीच गद्य प्रसंग तथा कवि के चारों ओर बनी…
पूरी व्याख्या पढ़ें →हरियाणा के किस कवि को सूर्यकवि तथा हरियाणा का शेक्सपियर कहा जाता है?
- A.पंडित लखमीचंद
- B.बाजे भगत
- C.पंडित दीपचंद
- D.धनपत सिंह
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लखमीचंद हरियाणा के सबसे प्रसिद्ध सांग कवि हैं, जिन्हें सूर्यकवि कहा जाता है और अपने नाटकों के विस्तार तथा रागिनियों की गुणवत्ता के कारण प्रायः हरियाणा का शेक्सपियर कहा जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →हरियाणा का धमाल नृत्य मुख्य रूप से कौन करता है?
- A.विवाह में महिलाएं
- B.पूर्णिमा की रातों को घेरे में पुरुष
- C.होली पर बच्चे
- D.छड़ी लिए भक्त
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धमाल हरियाणा का सबसे प्राचीन नृत्य माना जाता है और मुख्यतः महेंद्रगढ़ तथा झज्जर पट्टी का है, जहां फाल्गुन के मौसम की पूर्णिमा रात को गांव के पुरुष खुले मैदान में जुटते हैं, बड़ा घेरा बनाते हैं और धमाल ढोल की थाप पर नाचते हैं, जिसमें बांसुरी तथा बीन भी…
पूरी व्याख्या पढ़ें →जिसमें महिलाओं के दो आमने सामने दल प्रश्न उत्तर के रूप में गाते हैं, वह लूर नृत्य हरियाणा के किस क्षेत्र का है?
- A.बागड़ क्षेत्र
- B.मेवात
- C.कुरुक्षेत्र का मैदान
- D.यमुना पट्टी
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लूर राज्य के दक्षिण पश्चिम के रेतीले बागड़ क्षेत्र का है, भिवानी और महेंद्रगढ़ के आसपास, और इसे महिलाएं तथा किशोरियां फाल्गुन मास में और होली पर करती हैं, जब रबी फसल खड़ी होती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →हरियाणा का खोड़िया नृत्य किस अवसर पर किया जाता है?
- A.बारात के वधू के गांव चले जाने के बाद
- B.संतान के जन्म पर
- C.फसल कटाई के अंत में
- D.गुग्गा नौमी पर
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खोड़िया घर की स्त्रियां आपस में उस समय करती हैं जब पुरुष बारात लेकर निकल जाते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →हरियाणा का गुग्गा नृत्य हिंदू पंचांग के किस महीने में किया जाता है?
- A.भादों
- B.फाल्गुन
- C.सावन
- D.कार्तिक
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गुग्गा या गुग्गा नौमी का आयोजन भादों मास में होता है, जब सर्प से रक्षा करने वाले लोक देवता गुग्गा पीर के अनुयायी मोर पंख और रंगीन कपड़े से सजी ऊंची छड़ी लेकर गांव गांव जाते हैं, नाचते और उनकी गाथा गाते चलते हैं तथा प्रत्येक द्वार पर भेंट लेते…
पूरी व्याख्या पढ़ें →हरियाणा की वह विशिष्ट छंद गीत विधा कौन सी है जो सांग के भीतर तथा अकेले भी गाई जाती है?
- A.रागिनी
- B.ठुमरी
- C.कजरी
- D.बिरहा
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रागिनी हरियाणा की छंद गीत विधा है, जो एक स्थायी टेक पर बनी होती है और गायक प्रत्येक छंद के बाद उसी पर लौटता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →हरियाणा के एक गांव में जन्मे पंडित जसराज हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के किस घराने के थे?
- A.मेवाती घराना
- B.ग्वालियर घराना
- C.किराना घराना
- D.आगरा घराना
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पंडित जसराज का जन्म हरियाणा के एक गांव में संगीतकारों के परिवार में हुआ और वे मेवाती घराने की सबसे प्रसिद्ध आवाज बने, जिसका नाम हरियाणा तथा राजस्थान की सीमा के मेवात क्षेत्र से आया है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →परंपरागत सांग प्रदर्शन में स्त्री पात्रों की भूमिकाएं कैसी होती थीं?
- A.मंडली के पुरुष निभाते थे
- B.गांव की महिलाएं निभाती थीं
- C.बिना संवाद मूक अभिनय से दिखाई जाती थीं
- D.कथा में रखी ही नहीं जाती थीं
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परंपरागत सांग मंडली पूरी तरह पुरुषों की होती थी और युवा गायक वेशभूषा धारण कर स्त्री पात्र निभाते थे, वही रागिनियां ऊंचे स्वर में गाते हुए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →हरियाणा के छठी गीत और नृत्य किस अवसर पर होते हैं?
- A.संतान जन्म के छठे दिन
- B.विवाह के छठे दिन
- C.नवरात्रि के छठे दिन
- D.फसल कटाई के छठे दिन
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छठी का नाम छह अंक से बना है और यह संस्कार जन्म के छठे दिन पड़ता है, जब मां और नवजात को बाहर लाया जाता है, घर की शुद्धि होती है तथा परिवार और पड़ोस की स्त्रियां आंगन में गाती और नाचती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हरियाणवी संस्कृति में सांग क्या है?
सांग, जिसे स्वांग भी कहते हैं, हरियाणा का लोक रंगमंच है, जो परदे और दृश्य सज्जा के बिना खुले चबूतरे पर रात भर चलता है, गाए छंदों तथा बीच के गद्य में, और जिसमें सभी भूमिकाएं पुरुष निभाते थे।
हरियाणा का सूर्यकवि किसे कहा जाता है?
पंडित लखमीचंद को, जो राज्य के सबसे बड़े सांग कवि थे, जिन्हें हरियाणा का शेक्सपियर भी कहा जाता है और जिनके नाम पर राज्य का लोक कला सम्मान है।
हरियाणा का सबसे प्राचीन लोक नृत्य कौन माना जाता है?
धमाल, जिसे पुरुष फाल्गुन के मौसम की पूर्णिमा रातों पर घेरे में करते हैं, मुख्यतः महेंद्रगढ़ और झज्जर पट्टी में।
खोड़िया नृत्य किस अवसर पर किया जाता है?
बारात के वधू के गांव चले जाने के बाद घर की स्त्रियां आपस में करती हैं, अक्सर गए हुए पुरुषों की हास्यपूर्ण नकल के रूप में।
रागिनी क्या है?
हरियाणा की विशिष्ट छंद गीत विधा, जिसमें स्थायी टेक पर भक्ति, दर्शन, व्यंग्य अथवा कथा का प्रसंग चढ़ाया जाता है और जो सांग के भीतर तथा अकेले भी गाई जाती है।
स्रोत
- भारत की लोक नाट्य और प्रदर्शन कला परंपराएं — संगीत नाटक अकादमी
- भारत की नृत्य, संगीत और नाट्य विधाएं — संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार
- हरियाणा के लोक नृत्य, मेले और त्योहार — हरियाणा पर्यटन
- हरियाणा की कला, संस्कृति और राज्य सम्मान — हरियाणा सरकार





