पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, HPSC और राज्य आयोग
हरियाणा की न्यायपालिका और आयोगों पर नोट्स: चंडीगढ़ का उच्च न्यायालय, अनुच्छेद 214 से 237, अनुच्छेद 315 से 323 के अंतर्गत HPSC, HSSC तथा राज्य के आयोग।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 6 मिनट

हरियाणा उन थोड़े से राज्यों में है जिनका अपना उच्च न्यायालय नहीं है। पंजाब और संघ राज्यक्षेत्र चंडीगढ़ की तरह उसकी न्यायपालिका का शीर्ष भी चंडीगढ़ स्थित पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय है, जो संविधान के अनुच्छेद 231 द्वारा अनुमत साझा उच्च न्यायालय है। उसके नीचे राज्य के जिला एवं सत्र न्यायालय हैं तथा उसके साथ भर्ती और निगरानी की संस्थाएँ — उच्च सेवाओं के लिए हरियाणा लोक सेवा आयोग, समूह ग और घ के पदों के लिए हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग, तथा मानवाधिकार, सूचना, महिला, बाल अधिकार और पिछड़ा वर्ग के आयोग। एचपीएससी, एचएसएससी, हरियाणा पुलिस और एसएससी के प्रश्नपत्र इस अध्याय को तिथियों, मुख्यालयों, अनुच्छेदों और नियुक्ति-पदच्युति के अधिकार के रूप में पूछते हैं, और ये सभी स्थिर तथ्य हैं।
लाहौर से चंडीगढ़ तक
1919 में स्थापित लाहौर उच्च न्यायालय अविभाजित पंजाब प्रांत के लिए कार्य करता था। विभाजन के बाद लाहौर पाकिस्तान में चला गया और 15 अगस्त 1947 को शिमला में पूर्वी पंजाब उच्च न्यायालय स्थापित हुआ, जिसके पहले मुख्य न्यायाधीश सर एरिक वेस्टन थे। संविधान लागू होने पर नाम से पूर्वी शब्द हट गया और यह पंजाब उच्च न्यायालय कहलाया; 1955 में न्यायालय नई राजधानी चंडीगढ़ आ गया। 1 नवंबर 1966 को पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 ने पंजाब से हरियाणा को अलग किया, पहाड़ी क्षेत्र हिमाचल प्रदेश को दिए और चंडीगढ़ को संघ राज्यक्षेत्र बनाया; उसी दिन से यह न्यायालय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय है, जिसका क्षेत्राधिकार पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ पर है। इसकी कहीं कोई स्थायी न्यायपीठ नहीं है, इसलिए हरियाणा की प्रत्येक रिट याचिका चंडीगढ़ में ही दायर होती है। अलग-अलग याद रखने योग्य तिथियाँ हैं — 1919 लाहौर, 1947 शिमला, 1955 चंडीगढ़ और 1966 वर्तमान नाम।
संविधान में उच्च न्यायालय
अनुच्छेद 214 प्रत्येक राज्य के लिए उच्च न्यायालय देता है और अनुच्छेद 231 संसद को यह शक्ति देता है कि वह दो या अधिक राज्यों के लिए, अथवा राज्य और संघ राज्यक्षेत्र के लिए, एक ही उच्च न्यायालय स्थापित करे; हरियाणा की व्यवस्था इसी पर आधारित है। अनुच्छेद 215 उच्च न्यायालय को अभिलेख न्यायालय बनाता है, जिसे अवमानना के लिए दंड देने की शक्ति है। अनुच्छेद 216 कहता है कि न्यायालय में एक मुख्य न्यायाधीश तथा उतने अन्य न्यायाधीश होंगे जितने राष्ट्रपति समय-समय पर नियुक्त करना आवश्यक समझे, अर्थात संविधान में अधिकतम संख्या तय नहीं है। अनुच्छेद 217 के अंतर्गत न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायमूर्ति, राज्य के राज्यपाल तथा मुख्य न्यायाधीश से भिन्न न्यायाधीश की दशा में उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद करता है और वह 62 वर्ष की आयु तक पद धारण करता है; अर्हता है भारत की नागरिकता के साथ दस वर्ष न्यायिक पद पर या दस वर्ष उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में। शपथ अनुच्छेद 219 के अंतर्गत राज्यपाल के समक्ष ली जाती है, वेतन अनुच्छेद 221 के अनुसार राज्य की संचित निधि पर भारित होता है और एक उच्च न्यायालय से दूसरे में स्थानांतरण अनुच्छेद 222 के अंतर्गत राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायमूर्ति से परामर्श कर करता है। अनुच्छेद 226 रिट जारी करने की व्यापक शक्ति देता है, जो अनुच्छेद 32 से व्यापक है क्योंकि वह मौलिक अधिकारों के साथ किसी अन्य विधिक अधिकार को भी समेटती है, और अनुच्छेद 227 अपने क्षेत्र के सभी न्यायालयों तथा अधिकरणों पर अधीक्षण की शक्ति देता है। न्यायाधीश को केवल राष्ट्रपति, संसद के प्रत्येक सदन के कुल सदस्यता के बहुमत तथा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के दो तिहाई बहुमत से समर्थित समावेदन के बाद ही हटा सकता है।
अधीनस्थ न्यायपालिका
हरियाणा के प्रत्येक जिले में शीर्ष पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश होता है और उसके नीचे अपर जिला न्यायाधीश, सिविल न्यायाधीश तथा न्यायिक दंडाधिकारी। अनुच्छेद 233 के अनुसार जिला न्यायाधीश की नियुक्ति, पदस्थापना और पदोन्नति राज्यपाल उच्च न्यायालय से परामर्श कर करता है तथा सात वर्ष की वकालत वाला अधिवक्ता सीधे नियुक्त हो सकता है। अनुच्छेद 234 अन्य न्यायिक अधिकारियों की भर्ती की व्यवस्था करता है, जो राज्यपाल लोक सेवा आयोग की सिफारिश पर और उच्च न्यायालय से परामर्श कर करता है, तथा अनुच्छेद 235 जिला न्यायालयों और उनके अधीनस्थ न्यायालयों का नियंत्रण, जिसमें अधिकारियों की पदस्थापना, पदोन्नति और छुट्टी भी है, उच्च न्यायालय को देता है। राज्य में विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के अंतर्गत राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण तथा लोक अदालतें भी कार्य करती हैं, जिनके मुख्य संरक्षक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश होते हैं।
हरियाणा लोक सेवा आयोग
एचपीएससी का गठन 1966 में राज्य के गठन के साथ हुआ और इसका कार्यालय पंचकूला में है। यह संविधान के भाग 14 के अंतर्गत संवैधानिक निकाय है: अनुच्छेद 315 प्रत्येक राज्य के लिए लोक सेवा आयोग देता है, अनुच्छेद 316 राज्यपाल को अध्यक्ष तथा सदस्यों की नियुक्ति छह वर्ष अथवा 62 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, तक करने का अधिकार देता है और अपेक्षा करता है कि लगभग आधे सदस्य ऐसे व्यक्ति हों जिन्होंने संघ या राज्य के अधीन कम से कम दस वर्ष पद धारण किया हो। सदस्य राज्यपाल को त्यागपत्र दे सकता है, परंतु अनुच्छेद 317 के अनुसार उसे केवल राष्ट्रपति ही, दुराचरण की जाँच पर उच्चतम न्यायालय की रिपोर्ट के आधार पर, हटा सकता है; निर्देश लंबित रहते राज्यपाल उसे निलंबित कर सकता है। अनुच्छेद 320 आयोग के कार्य गिनाता है, जिनमें राज्य की सेवाओं में नियुक्ति के लिए परीक्षाएँ कराना तथा भर्ती, पदोन्नति, स्थानांतरण और अनुशासनिक मामलों में परामर्श देना शामिल है। अनुच्छेद 322 आयोग के व्यय को राज्य की संचित निधि पर भारित करता है, इसलिए उस पर विधानमंडल में मतदान नहीं होता, और अनुच्छेद 323 आयोग से अपेक्षा करता है कि वह राज्यपाल को वार्षिक प्रतिवेदन दे, जो उस ज्ञापन सहित विधानमंडल के समक्ष रखा जाता है जिसमें बताया जाता है कि उसकी सलाह कहाँ स्वीकार नहीं की गई। एचपीएससी हरियाणा सिविल सेवा तथा संबद्ध परीक्षाएँ कराता है और समूह क एवं ख के पदों पर भर्ती करता है।
एचएसएससी और राज्य के आयोग
| निकाय | विधिक आधार | कार्य |
|---|---|---|
| हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग | राज्य सरकार का आदेश, कार्यालय पंचकूला | सामान्य पात्रता परीक्षा और विषय परीक्षाओं से समूह ग तथा घ के पदों पर भर्ती |
| हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग | अनुच्छेद 243K और 243ZA | पंचायत और नगरपालिका चुनाव |
| हरियाणा मानवाधिकार आयोग | मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 | लोक सेवकों द्वारा मानवाधिकार हनन की जाँच |
| हरियाणा राज्य सूचना आयोग | सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 | आरटीआई के द्वितीय अपील और शिकायतें |
| हरियाणा राज्य महिला आयोग | राज्य का अधिनियम | महिलाओं के संरक्षण और शिकायतों की जाँच |
| राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग | बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 | बच्चों के अधिकार और शिक्षा के अधिकार की निगरानी |
| लोकायुक्त, हरियाणा | राज्य का लोकायुक्त अधिनियम | लोक सेवकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार और कुप्रशासन की शिकायतें |
इन सभी में दो सूत्र समान हैं और दोनों परीक्षा में पूछे जाते हैं। पहला यह कि नियुक्ति कौन करता है और पदच्युति कौन: एचपीएससी, राज्य मानवाधिकार आयोग और राज्य सूचना आयोग के सदस्य की नियुक्ति राज्यपाल करता है, परंतु एचपीएससी अथवा मानवाधिकार आयोग के सदस्य को केवल राष्ट्रपति हटा सकता है, जबकि राज्य निर्वाचन आयुक्त को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जैसा संरक्षण प्राप्त है। दूसरा सूत्र शक्ति का स्रोत है: लोक सेवा आयोग और निर्वाचन आयोग संवैधानिक हैं, जबकि मानवाधिकार, सूचना, बाल अधिकार तथा उपभोक्ता आयोग सांविधिक हैं, जो संसद के अधिनियमों से बने हैं, और महिला आयोग राज्य के अधिनियम से। सांविधिक निकाय साधारण विधि से बदला जा सकता है, संवैधानिक निकाय नहीं।
परीक्षा की दृष्टि से
एचपीएससी, एचएसएससी, हरियाणा पुलिस और एसएससी के प्रश्नपत्र इस अध्याय को तीन तरह से पूछते हैं। पहला, तिथियों और मुख्यालयों की श्रृंखला — 1919 लाहौर, 15 अगस्त 1947 शिमला, 1955 चंडीगढ़, 1 नवंबर 1966 पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, तथा यह तथ्य कि न्यायालय की चंडीगढ़ के बाहर कोई न्यायपीठ नहीं है जबकि एचपीएससी और एचएसएससी पंचकूला में बैठते हैं। दूसरा, अनुच्छेद — उच्च न्यायालय के लिए 214, 215, 216, 217, 219, 221, 222, 226, 227, 228 और 231, अधीनस्थ न्यायपालिका के लिए 233 से 235, लोक सेवा आयोग के लिए 315 से 323 तथा राज्य निर्वाचन आयोग के लिए 243K। तीसरा, नियुक्ति और पदच्युति का अधिकार, जहाँ सबसे अधिक अंक कटते हैं — उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है और शपथ राज्यपाल दिलाता है; एचपीएससी के सदस्य की नियुक्ति राज्यपाल करता है परंतु उसे हटा केवल राष्ट्रपति सकता है। सामान्य जाल हैं — उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के लिए 62 के स्थान पर 65 वर्ष, राज्य आयोग के सदस्य के लिए 62 के स्थान पर 65 वर्ष, न्यायालय का मुख्यालय पंचकूला बताना, और यह मान लेना कि हरियाणा का अपना उच्च न्यायालय है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| उच्च न्यायालय | पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, मुख्यालय चंडीगढ़, कोई बाहरी न्यायपीठ नहीं |
|---|---|
| क्षेत्राधिकार | पंजाब, हरियाणा और संघ राज्यक्षेत्र चंडीगढ़ |
| पूर्ववर्ती न्यायालय | लाहौर उच्च न्यायालय, 1919, अविभाजित पंजाब के लिए |
| शिमला में स्थापना | पूर्वी पंजाब उच्च न्यायालय, 15 अगस्त 1947 |
| पहले मुख्य न्यायाधीश | सर एरिक वेस्टन |
| चंडीगढ़ स्थानांतरण | 1955 |
| वर्तमान नाम | 1 नवंबर 1966, पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 |
| साझा उच्च न्यायालय | अनुच्छेद 231 द्वारा अनुमत |
| सेवानिवृत्ति आयु | उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के लिए 62 वर्ष (अनुच्छेद 217) |
| शपथ | राज्य के राज्यपाल के समक्ष (अनुच्छेद 219) |
| जिला न्यायाधीश | राज्यपाल द्वारा उच्च न्यायालय से परामर्श कर; सात वर्ष की वकालत (अनुच्छेद 233) |
| एचपीएससी | 1966 में गठित; कार्यालय पंचकूला; समूह क और ख की भर्ती |
| एचपीएससी कार्यकाल | छह वर्ष या 62 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो (अनुच्छेद 316) |
| एचपीएससी पदच्युति | उच्चतम न्यायालय की जाँच के बाद केवल राष्ट्रपति द्वारा (अनुच्छेद 317) |
| एचपीएससी का व्यय | राज्य की संचित निधि पर भारित (अनुच्छेद 322) |
| एचएसएससी | सामान्य पात्रता परीक्षा से समूह ग और घ की भर्ती; कार्यालय पंचकूला |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का मुख्यालय किस नगर में है?
- A.पंचकूला
- B.चंडीगढ़
- C.अंबाला
- D.शिमला
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पंजाब, हरियाणा और संघ राज्यक्षेत्र चंडीगढ़ का यह साझा उच्च न्यायालय चंडीगढ़ में बैठता है, जहाँ न्यायालय 1955 में आया था, और इसकी कहीं कोई स्थायी न्यायपीठ नहीं है; इसलिए हरियाणा के किसी भी जिले की रिट याचिका वहीं दायर होती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →यह न्यायालय किस तिथि से पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय कहलाता है?
- A.15 अगस्त 1947
- B.26 जनवरी 1950
- C.1 नवंबर 1955
- D.1 नवंबर 1966
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पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 ने 1 नवंबर 1966 को पंजाब से हरियाणा को अलग किया, पहाड़ी क्षेत्र हिमाचल प्रदेश को सौंपे और चंडीगढ़ को संघ राज्यक्षेत्र बनाया; उसी दिन से पंजाब उच्च न्यायालय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय बन गया, जो दोनों राज्यों तथा संघ राज्यक्षेत्र का साझा उच्च न्यायालय…
पूरी व्याख्या पढ़ें →विभाजन के बाद 1947 में पूर्वी पंजाब उच्च न्यायालय कहाँ स्थापित किया गया था?
- A.लाहौर
- B.शिमला
- C.चंडीगढ़
- D.दिल्ली
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लाहौर उच्च न्यायालय विभाजन के साथ पाकिस्तान चला गया और पूर्वी पंजाब के लिए नया उच्च न्यायालय 15 अगस्त 1947 को शिमला में स्थापित हुआ; उसके पहले मुख्य न्यायाधीश सर एरिक वेस्टन थे और नई राजधानी चंडीगढ़ के तैयार होने तक न्यायालय शिमला से ही कार्य करता रहा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →दो या अधिक राज्यों के लिए एक ही उच्च न्यायालय की स्थापना की अनुमति संविधान का कौन सा अनुच्छेद देता है?
- A.अनुच्छेद 214
- B.अनुच्छेद 226
- C.अनुच्छेद 230
- D.अनुच्छेद 231
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अनुच्छेद 231 कहता है कि संसद विधि द्वारा दो या अधिक राज्यों के लिए, अथवा दो या अधिक राज्यों और किसी संघ राज्यक्षेत्र के लिए, एक ही उच्च न्यायालय स्थापित कर सकती है; इसी अनुच्छेद के आधार पर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की सेवा करता…
पूरी व्याख्या पढ़ें →उच्च न्यायालय का न्यायाधीश कितनी आयु तक पद धारण करता है?
- A.60 वर्ष
- B.62 वर्ष
- C.65 वर्ष
- D.70 वर्ष
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अनुच्छेद 217 के अनुसार उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बासठ वर्ष की आयु प्राप्त करने तक पद धारण करता है; यह सीमा 1963 के 15वें संशोधन अधिनियम द्वारा साठ से बढ़ाकर बासठ की गई थी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उच्च न्यायालय का न्यायाधीश किसके समक्ष पद की शपथ लेता है?
- A.भारत के राष्ट्रपति
- B.भारत के मुख्य न्यायमूर्ति
- C.राज्य के राज्यपाल
- D.उसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
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अनुच्छेद 219 कहता है कि उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया प्रत्येक व्यक्ति अपना पद ग्रहण करने से पहले राज्य के राज्यपाल अथवा उसके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति के समक्ष तीसरी अनुसूची में दिए प्रारूप में शपथ लेगा या प्रतिज्ञान करेगा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →हरियाणा लोक सेवा आयोग के सदस्य को पद से कौन हटा सकता है?
- A.हरियाणा का राज्यपाल
- B.भारत का राष्ट्रपति
- C.हरियाणा का मुख्यमंत्री
- D.पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
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अनुच्छेद 317 के अनुसार राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य को केवल राष्ट्रपति के आदेश से, दुराचरण के आधार पर, उच्चतम न्यायालय द्वारा जाँच कर यह प्रतिवेदन देने के बाद हटाया जा सकता है कि उसे हटाया जाना चाहिए; दिवालिया होने, कर्तव्यों के बाहर वेतनभोगी काम करने अथवा…
पूरी व्याख्या पढ़ें →हरियाणा लोक सेवा आयोग जैसे राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्य का कार्यकाल कितना होता है?
- A.छह वर्ष या 62 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो
- B.छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो
- C.पाँच वर्ष या 60 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो
- D.पाँच वर्ष या 62 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो
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अनुच्छेद 316 राज्य लोक सेवा आयोग तथा संयुक्त लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के लिए यही कार्यकाल तय करता है और नियुक्ति राज्य का राज्यपाल करता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →हरियाणा सरकार के समूह ग और समूह घ के पदों पर भर्ती कौन सी संस्था करती है?
- A.हरियाणा लोक सेवा आयोग
- B.हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग
- C.संघ लोक सेवा आयोग
- D.भारत सरकार का कर्मचारी चयन आयोग
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पंचकूला स्थित एचएसएससी राज्य सरकार तथा उसके बोर्डों और निगमों के समूह ग एवं समूह घ के पदों पर भर्ती करता है, और अभ्यर्थी पहले सामान्य पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करते हैं, उसके बाद संबंधित पदों की परीक्षा देते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अपने क्षेत्राधिकार के सभी न्यायालयों और अधिकरणों पर उच्च न्यायालय को अधीक्षण की शक्ति कौन सा अनुच्छेद देता है?
- A.अनुच्छेद 226
- B.अनुच्छेद 227
- C.अनुच्छेद 228
- D.अनुच्छेद 235
उत्तर देखें
अनुच्छेद 227 प्रत्येक उच्च न्यायालय को उन समस्त राज्यक्षेत्रों के सभी न्यायालयों और अधिकरणों पर अधीक्षण की शक्ति देता है जिनके संबंध में वह अधिकारिता रखता है; वह विवरणी मँगा सकता है, उनकी प्रक्रिया के लिए नियम बना सकता है और अभिलेखों के प्रारूप निर्धारित कर सकता है, यद्यपि यह…
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या हरियाणा का अपना उच्च न्यायालय है?
नहीं। हरियाणा चंडीगढ़ स्थित पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय को पंजाब तथा संघ राज्यक्षेत्र चंडीगढ़ के साथ साझा करता है। अनुच्छेद 231 संसद को दो या अधिक राज्यों के लिए एक ही उच्च न्यायालय स्थापित करने की अनुमति देता है और 1 नवंबर 1966 को हरियाणा के गठन के समय पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 ने इसी शक्ति का उपयोग किया। चंडीगढ़ के बाहर इसकी कोई स्थायी न्यायपीठ नहीं है।
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का इतिहास क्या है?
1919 का लाहौर उच्च न्यायालय अविभाजित पंजाब के लिए कार्य करता था। विभाजन के बाद 15 अगस्त 1947 को शिमला में पूर्वी पंजाब उच्च न्यायालय स्थापित हुआ, जिसके पहले मुख्य न्यायाधीश सर एरिक वेस्टन थे। संविधान लागू होने पर नाम से पूर्वी शब्द हटा, न्यायालय 1955 में चंडीगढ़ आया और 1 नवंबर 1966 को वह पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय बना।
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति कौन करता है?
राष्ट्रपति, अनुच्छेद 217 के अंतर्गत अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा, भारत के मुख्य न्यायमूर्ति, राज्य के राज्यपाल तथा मुख्य न्यायाधीश से भिन्न न्यायाधीश की दशा में उसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद; व्यवहार में सिफारिश उच्चतम न्यायालय का कॉलेजियम करता है। न्यायाधीश अनुच्छेद 219 के अनुसार राज्यपाल के समक्ष शपथ लेता है और 62 वर्ष पर सेवानिवृत्त होता है।
हरियाणा लोक सेवा आयोग के सदस्य का कार्यकाल कितना होता है?
अनुच्छेद 316 के अनुसार पद ग्रहण की तिथि से छह वर्ष या 62 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो। संघ लोक सेवा आयोग का सदस्य छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक रहता है, और दोनों आयु सीमाओं का यही अंतर पूरे अध्याय में सबसे अधिक पूछा जाता है।
एचपीएससी और एचएसएससी में क्या अंतर है?
एचपीएससी अनुच्छेद 315 के अंतर्गत संवैधानिक निकाय है और राज्य के समूह क तथा ख के पदों पर भर्ती करता है, जिसके लिए वह हरियाणा सिविल सेवा और संबद्ध परीक्षाएँ कराता है। एचएसएससी राज्य सरकार द्वारा गठित है और समूह ग तथा घ के पदों पर भर्ती करता है, जिसके लिए अभ्यर्थी पहले सामान्य पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करते हैं। दोनों के कार्यालय पंचकूला में हैं।
हरियाणा के कौन से आयोग सांविधिक हैं, संवैधानिक नहीं?
लोक सेवा आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग संवैधानिक हैं, जो अनुच्छेद 315 तथा 243K से बने हैं। मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत मानवाधिकार आयोग, सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत सूचना आयोग, 2005 के अधिनियम के अंतर्गत बाल अधिकार आयोग तथा राज्य के अधिनियम से बना महिला आयोग सांविधिक हैं और साधारण विधि से बदले जा सकते हैं।
स्रोत
- भारत का संविधान, भाग 6, अध्याय 5: राज्यों के उच्च न्यायालय, अनुच्छेद 214 से 232 — विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय
- भारत का संविधान, भाग 6, अध्याय 6: अधीनस्थ न्यायालय, अनुच्छेद 233 से 237 — विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय
- भारत का संविधान, भाग 14, अध्याय 2: लोक सेवा आयोग, अनुच्छेद 315 से 323 — विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय
- पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 — इंडिया कोड, विधायी विभाग
- पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का इतिहास — पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय





