हरियाणा की सिंचाई और नहरें: डब्ल्यूवाईसी, भाखड़ा तथा एसवाईएल
परीक्षा के लिए हरियाणा सिंचाई नोट्स: पश्चिमी यमुना नहर और हथनीकुंड, आगरा तथा गुड़गांव नहर, भाखड़ा प्रणाली, लिफ्ट नहरें और एसवाईएल नहर विवाद।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

हरियाणा के पास पूर्वी किनारे की यमुना के अतिरिक्त अपनी कोई बारहमासी नदी नहीं है, फिर भी वह भारत के सर्वाधिक सिंचित राज्यों में है। कारण यह है कि वह लगभग हर बूंद यमुना तथा सतलुज से नहर द्वारा लाता है या भूमि के नीचे से खींचता है। इसलिए सिंचाई राज्य की कृषि की रीढ़ भी है और उसके सबसे लंबे कानूनी विवाद, सतलुज यमुना संपर्क नहर, का विषय भी है।
दो नहर प्रणालियां
राज्य की नहरें दो स्रोतों से आती हैं। यमुना प्रणाली पुरानी है। पश्चिमी यमुना नहर चौदहवीं शताब्दी में फिरोज शाह तुगलक के समय यमुना का जल पश्चिम में हिसार तक ले जाने के लिए काटी गई, और उन्नीसवीं शताब्दी में अंग्रेजों ने ताजेवाला पर शीर्ष कार्य बनाकर उसका पुनर्निर्माण किया। 1999 से यह नहर यमुनानगर जिले के हथनीकुंड बैराज से जल पाती है, जिसने ताजेवाला का स्थान लिया और जो उत्तर प्रदेश की पूर्वी यमुना नहर को भी जल देता है। उसकी शाखाएं, जिनमें हांसी, बुटाना, सिरसा, जींद तथा दिल्ली शाखा हैं, मध्य के जिलों को सींचती हैं। यमुना पर नीचे की ओर आगरा नहर तथा गुड़गांव नहर ओखला बैराज से निकलती हैं और फरीदाबाद, पलवल एवं नूंह तथा गुरुग्राम क्षेत्र को जल देती हैं।
दूसरा स्रोत भाखड़ा नंगल परियोजना के माध्यम से सतलुज है, जिसमें हरियाणा की हिस्सेदारी पंजाब तथा राजस्थान के साथ है। भाखड़ा मुख्य लाइन और उसकी नरवाना शाखा सतलुज का जल हिसार, फतेहाबाद, सिरसा, जींद तथा भिवानी में लाती है, अर्थात् उन जिलों में जहां यमुना का कमांड नहीं है। दक्षिण में भूमि अरावली की ओर ऊंची होती जाती है, इसलिए वहां जल पंप करना पड़ता है: जवाहरलाल नेहरू लिफ्ट नहर तथा लोहारू लिफ्ट नहर चरणों में जल उठाकर भिवानी, महेंद्रगढ़, चरखी दादरी और रेवाड़ी तक पहुंचाती हैं, और इन लिफ्ट योजनाओं से ही राज्य के सबसे शुष्क कोने में खेती संभव है।
सतलुज यमुना संपर्क नहर
1966 में पंजाब से अलग होने पर हरियाणा ने रावी तथा ब्यास के जल में हिस्सा मांगा, और वह हिस्सा सतलुज से यमुना तक लाने के लिए एक संपर्क नहर की योजना बनी। पंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान के बीच 1981 के समझौते में हरियाणा को लगभग 3.5 मिलियन एकड़ फुट जल मिला, और प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1982 में पटियाला जिले के कपूरी गांव में नहर की नींव रखी। हरियाणा ने अपनी लगभग इकानबे किलोमीटर लंबाई बना ली; पंजाब ने अपने लंबे भाग पर काम रोक दिया और 2004 में पंजाब विधानसभा ने जल समझौते समाप्त करने के लिए पंजाब टर्मिनेशन ऑफ एग्रीमेंट्स अधिनियम पारित किया। राष्ट्रपति के संदर्भ पर उच्चतम न्यायालय ने 2016 में कहा कि यह अधिनियम संवैधानिक रूप से वैध नहीं है, और नहर पूरी करने का मामला न्यायालय में चल रहा है। परीक्षा के लिए 1966, 1981, 1982, 2004 तथा 2016 की श्रृंखला याद रखें।
जल देने की विधियां
सतही विधियां अब भी प्रमुख हैं। क्यारी या चेक बेसिन विधि में खेत को समतल कर छोटी मेड़ों से घिरे भागों में बांटकर बारी बारी भरा जाता है, जो उत्तर के भारी धान तथा गेहूं के खेतों के अनुकूल है। कपास, गन्ना तथा सब्जियों जैसी कतार वाली फसलों में कूंड विधि चलती है। जहां भूमि असमान हो या मिट्टी रेतीली तथा सरलता से कटने वाली हो, वहां फुहारा विधि बेहतर है, क्योंकि वह वर्षा की तरह जल बिखेरती है और समतलीकरण नहीं मांगती; हरियाणा का रेतीला दक्षिण पश्चिम ठीक ऐसा ही क्षेत्र है। टपक विधि, जो उत्सर्जकों से जड़ क्षेत्र तक जल पहुंचाती है, बाग, कपास और सब्जियों के लिए बढ़ाई जाती है और सर्वाधिक जल बचाती है। राज्य फुहारा तथा टपक दोनों को सूक्ष्म सिंचाई के रूप में अनुदान देता है।
भूजल और उसकी समस्याएं
नलकूप लगभग उतनी ही भूमि सींचते हैं जितनी नहरें, और इससे दो विपरीत समस्याएं बनी हैं। कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल तथा अंबाला की धान पट्टी में जलस्तर तेजी से गिरा है और अनेक खंड अति दोहित श्रेणी में हैं। रोहतक, झज्जर, सिरसा तथा फतेहाबाद के भागों में उल्टा हुआ है: नहरों के रिसाव और निकासी रहित समतल भूमि ने जलस्तर ऊपर उठा दिया, जिससे जल भराव होता है और लवण सतह पर आ जाते हैं। करनाल का केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान ऐसी भूमि को भूमिगत निकासी तथा लवण सहिष्णु किस्मों से सुधारने पर कार्य करता है। जल उपयोग घटाने के लिए राज्य ने मेरा पानी मेरी विरासत नाम से फसल विविधीकरण योजना चलाई है, जो किसानों को धान के स्थान पर मक्का, दलहन, कपास या बाजरा लेने पर भुगतान करती है, और दोहन नियंत्रित करने के लिए जल संसाधन प्राधिकरण भी बनाया है।
साझा नदियां और संस्थाएं
चूंकि हर स्रोत साझा है, हरियाणा कई जल व्यवस्थाओं का पक्षकार है: 1981 का रावी ब्यास समझौता, सतलुज कार्यों के लिए भाखड़ा ब्यास प्रबंध बोर्ड, और हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान तथा दिल्ली के साथ ऊपरी यमुना पर 1994 का ज्ञापन, जिसे ऊपरी यमुना नदी बोर्ड देखता है। ऊपर की ओर प्रस्तावित भंडारण, जैसे लखवाड़ तथा रेणुकाजी परियोजनाएं, राज्य को गर्मियों में अधिक पक्की आपूर्ति देंगी। अभ्यर्थी को सरल ढांचा याद रखना चाहिए: पूर्व तथा मध्य में यमुना का जल, पश्चिम में सतलुज का जल, दक्षिण में लिफ्ट, हर जगह नलकूप, और उत्तर पश्चिम की ओर एक नहर जिस पर चार दशक से विवाद है।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्न चार समूहों में बंटते हैं। नहरों के नाम तथा स्रोत: सबसे पुरानी नहर कौन है, पश्चिमी यमुना नहर पहले किसने बनवाई, आज उसे कौन बैराज जल देता है, आगरा तथा गुड़गांव नहर कहां से निकलती हैं, और भाखड़ा नहरें कौन जिले सींचती हैं। एसवाईएल विवाद: 1981 का समझौता तथा हरियाणा का हिस्सा, 1982 में कपूरी की नींव, 2004 का पंजाब अधिनियम और 2016 की उच्चतम न्यायालय राय। सिंचाई विधियां: किस विधि में समतल खेत मेड़ों से घिरी क्यारियों में बंटता है, फुहारा विधि किस भूमि के अनुकूल है, और कौन विधि सर्वाधिक जल बचाती है। भूजल: कौन जिले अति दोहित हैं, कहां जल भराव तथा लवणता है, और करनाल का कौन संस्थान लवणीय मृदा पर कार्य करता है। जाल ये हैं कि वर्तमान शीर्ष कार्य के लिए हथनीकुंड के बजाय ताजेवाला लिख देना, आगरा नहर का शीर्ष हरियाणा में बता देना जबकि वह ओखला पर है, और दक्षिण की लिफ्ट नहरों को पश्चिम की भाखड़ा शाखाओं से मिला देना।
महत्वपूर्ण तथ्य
| हरियाणा की सबसे पुरानी नहर | पश्चिमी यमुना नहर, फिरोज शाह तुगलक के समय कटी |
|---|---|
| डब्ल्यूवाईसी का वर्तमान शीर्ष कार्य | हथनीकुंड बैराज, यमुनानगर जिला, 1999 |
| पहले का शीर्ष कार्य | ताजेवाला, यमुना पर |
| डब्ल्यूवाईसी की मुख्य शाखाएं | हांसी, बुटाना, सिरसा, जींद तथा दिल्ली शाखा |
| आगरा और गुड़गांव नहर | यमुना पर ओखला बैराज से निकलती हैं |
| हरियाणा को सतलुज जल | भाखड़ा मुख्य लाइन तथा नरवाना शाखा |
| लिफ्ट नहरें | दक्षिण के लिए जवाहरलाल नेहरू लिफ्ट नहर तथा लोहारू लिफ्ट नहर |
| रावी ब्यास समझौता | 1981; हरियाणा का हिस्सा लगभग 3.5 मिलियन एकड़ फुट |
| एसवाईएल की नींव | 1982, कपूरी गांव, पटियाला जिला, इंदिरा गांधी द्वारा |
| हरियाणा में बनी एसवाईएल लंबाई | लगभग 91 किलोमीटर |
| पंजाब समझौता समाप्ति अधिनियम | 2004; उच्चतम न्यायालय ने 2016 में संवैधानिक रूप से अवैध बताया |
| ऊपरी यमुना व्यवस्था | 1994 का ज्ञापन, ऊपरी यमुना नदी बोर्ड द्वारा संचालित |
| लवणता संस्थान | केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, करनाल |
| फसल विविधीकरण योजना | मेरा पानी मेरी विरासत, धान के स्थान पर कम जल वाली फसलें |
| अति दोहित पट्टी | कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल तथा अंबाला की धान पट्टी |
| जल भराव तथा लवणीय पट्टी | रोहतक, झज्जर, सिरसा और फतेहाबाद के भाग |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
अंबाला जिला सिंचाई के लिए किस पर निर्भर है?
- A.नलकूप
- B.नहर
- C.वर्षा
- D.बहु चैनल
उत्तर देखें
अंबाला हरियाणा के उत्तर पूर्वी कोने में, यमुना प्रणाली से निकली नहरों के कमांड में पड़ता है, और उसके खेत मुख्यतः उसी प्रवाह आपूर्ति से सींचे जाते हैं; पश्चिमी यमुना नहर पर दादूपुर का शीर्ष इसी क्षेत्र में जल पहुंचाने के लिए बनाया गया था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1999 में आरंभ हुआ कौन बैराज ताजेवाला शीर्ष कार्य के स्थान पर पश्चिमी यमुना नहर को जल देता है?
- A.ओखला बैराज
- B.हथनीकुंड बैराज
- C.दादूपुर बैराज
- D.कौशल्या बैराज
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यह बैराज यमुनानगर जिले में यमुना पर पुराने ताजेवाला शीर्ष कार्य से कुछ ऊपर बनाया गया और 1999 में आरंभ हुआ।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पश्चिमी यमुना नहर मूल रूप से किस शासक के काल में काटी गई थी?
- A.अकबर
- B.शाहजहां
- C.फिरोज शाह तुगलक
- D.शेरशाह सूरी
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दिल्ली सुल्तान फिरोज शाह तुगलक ने चौदहवीं शताब्दी में यमुना से नहर कटवाई, जो जल पश्चिम में हिसार की ओर ले जाती थी, जहां उन्होंने हिसार फिरोजा बसाया, और वही धारा आज की पश्चिमी यमुना नहर की पूर्वज है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →आगरा नहर तथा गुड़गांव नहर यमुना से कहां से निकलती हैं?
- A.हथनीकुंड
- B.ताजेवाला
- C.ओखला
- D.वजीराबाद
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दोनों नहरें दिल्ली के नीचे यमुना पर ओखला बैराज से शीर्षित हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1982 में कपूरी गांव में सतलुज यमुना संपर्क नहर की नींव किसने रखी थी?
- A.जवाहरलाल नेहरू
- B.इंदिरा गांधी
- C.राजीव गांधी
- D.मोरारजी देसाई
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रावी तथा ब्यास के जल बंटवारे पर पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के 1981 के समझौते के बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1982 में पटियाला जिले के कपूरी में इस नहर की नींव रखी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →रावी तथा ब्यास जल पर 1981 के समझौते में हरियाणा का हिस्सा लगभग कितना तय हुआ था?
- A.1.5 मिलियन एकड़ फुट
- B.2.5 मिलियन एकड़ फुट
- C.3.5 मिलियन एकड़ फुट
- D.4.5 मिलियन एकड़ फुट
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पंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान के बीच 1981 में हुए समझौते ने रावी और ब्यास के अतिरिक्त जल का पुनः बंटवारा किया, और हरियाणा का हिस्सा लगभग 3.5 मिलियन एकड़ फुट तय हुआ, जिसे प्रस्तावित सतलुज यमुना संपर्क नहर से लाया जाना था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →फुहारा सिंचाई प्रणाली किसके लिए उपयुक्त है?
- A.भूमि का ढाल तीव्र हो और मिट्टी सरलता से कटने वाली हो
- B.मिट्टी की पारगम्यता कम हो
- C.जलस्तर नीचा हो
- D.उगाई जाने वाली फसलों की जड़ें गहरी हों
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फुहारा जल को बूंदों में तोड़कर वर्षा की तरह बिखेरता है, इसलिए खेत समतल करने की आवश्यकता नहीं रहती और बहते जल की चादर भी नहीं चाहिए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सिंचाई की किस विधि में संपूर्ण खेत को मेड़ों से घिरे अनेक समतल भागों में बांटा जाता है?
- A.बेसिन विधि
- B.बॉर्डर पट्टी विधि
- C.चेक विधि
- D.कूंड विधि
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चेक या क्यारी सिंचाई में खेत समतल कर छोटे आयताकार भागों में बांटा जाता है, प्रत्येक भाग नीची मेड़ों से घिरा रहता है, और एक समय में एक भाग में जल छोड़ा जाता है जब तक उसमें आवश्यक गहराई तक जल खड़ा न हो।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भाखड़ा मुख्य लाइन तथा उसकी नरवाना शाखा मुख्यतः हरियाणा के कौन जिलों को नहर जल देती है?
- A.हिसार, फतेहाबाद तथा सिरसा
- B.फरीदाबाद तथा पलवल
- C.पंचकूला तथा अंबाला
- D.गुरुग्राम तथा नूंह
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ये पश्चिमी जिले यमुना नहरों के कमांड से बाहर हैं, इसलिए उनकी आपूर्ति भाखड़ा नंगल कार्यों से सतलुज से आती है: भाखड़ा मुख्य लाइन और नरवाना शाखा उसे हिसार, फतेहाबाद, सिरसा तथा जींद एवं भिवानी के भागों में लाती हैं, और इसी जल ने शुष्क पश्चिम को कपास, गेहूं और…
पूरी व्याख्या पढ़ें →जवाहरलाल नेहरू लिफ्ट नहर तथा लोहारू लिफ्ट नहर हरियाणा के किस भाग की सिंचाई के लिए बनीं?
- A.उत्तर की शिवालिक तलहटी
- B.अरावली के निकट दक्षिणी जिले
- C.पूर्व का यमुना कछार
- D.उत्तर पश्चिम का घग्घर मैदान
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भिवानी, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़ तथा रेवाड़ी की भूमि मुख्य नहरों के स्तर से ऊपर उठती है, इसलिए वहां जल चरणों में पंप करना पड़ता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →लवणीय तथा जल भराव वाली भूमि के सुधार पर कार्य करने वाला केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान कहां स्थित है?
- A.हिसार
- B.करनाल
- C.रोहतक
- D.सिरसा
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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान करनाल में है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →हरियाणा की मेरा पानी मेरी विरासत योजना किसानों को किसके लिए प्रेरित करती है?
- A.नहर जल से अधिक धान उगाने के लिए
- B.धान के स्थान पर कम जल वाली फसलें लेने के लिए
- C.गेहूं छोड़कर गन्ना लेने के लिए
- D.डार्क जोन खंडों में नए नलकूप खोदने के लिए
उत्तर देखें
इस योजना में राज्य उन खंडों के किसानों को प्रति एकड़ प्रोत्साहन देता है जहां भूजल सर्वाधिक गिरा है, यदि वे धान के स्थान पर मक्का, दलहन, कपास, बाजरा या अन्य शुष्क फसल बोएं, और सहायता को राज्य पोर्टल पर फसल पंजीकरण से जोड़ता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हरियाणा की सबसे पुरानी नहर कौन है?
पश्चिमी यमुना नहर। वह चौदहवीं शताब्दी में फिरोज शाह तुगलक के शासन में यमुना का जल पश्चिम में हिसार की ओर ले जाने के लिए काटी गई, बाद में बंद पड़ गई, और उन्नीसवीं शताब्दी में अंग्रेजों ने ताजेवाला पर शीर्ष कार्य बनाकर उसका पुनर्निर्माण किया। आज वह हथनीकुंड बैराज से जल पाती है और उसकी शाखाएं राज्य के मध्यवर्ती जिलों को सींचती हैं।
सतलुज यमुना संपर्क नहर का विवाद किस बात पर है?
1966 में हरियाणा बनने पर उसने रावी तथा ब्यास के उस जल में हिस्सा मांगा जो अविभाजित पंजाब को मिला था। 1981 के समझौते में हरियाणा को लगभग 3.5 मिलियन एकड़ फुट मिला और उसे लाने के लिए नहर की योजना बनी; हरियाणा ने अपना भाग पूरा किया, किंतु पंजाब ने काम रोक दिया और 2004 में जल समझौते समाप्त करने वाला अधिनियम पारित किया। उच्चतम न्यायालय ने 2016 में उस अधिनियम को संवैधानिक रूप से अवैध बताया, और नहर पूरी करने का मामला अब भी न्यायालय में है।
दक्षिण हरियाणा को लिफ्ट नहरों की आवश्यकता क्यों है?
क्योंकि वहां भूमि अरावली की ओर ऊंची होती जाती है और मुख्य नहरों के स्तर से ऊपर है, इसलिए जल गुरुत्व से नहीं पहुंच सकता। जवाहरलाल नेहरू तथा लोहारू लिफ्ट नहरों के पंप गृह चरणों में जल उठाकर भिवानी, महेंद्रगढ़, चरखी दादरी और रेवाड़ी तक पहुंचाते हैं, जहां वर्षा कम है, मिट्टी रेतीली है और भूजल प्रायः खारा होता है।
हरियाणा में फुहारा सिंचाई कहां सर्वाधिक उपयुक्त है?
रेतीले तथा असमान दक्षिण पश्चिम में, सिरसा, भिवानी और महेंद्रगढ़ जैसे जिलों में। फुहारा विधि वर्षा की तरह जल बिखेरती है, इसलिए खेत समतल करने की आवश्यकता नहीं रहती, रेतीली मिट्टी में कम जल व्यर्थ जाता है और सतह कटती नहीं, जबकि बाढ़ विधि समतल खेत तथा भारी प्रवाह मांगती है।
उत्तरी हरियाणा में जलस्तर क्यों गिर रहा है?
क्योंकि कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल तथा अंबाला में खड़े पानी की मांग वाली धान फसल बड़े क्षेत्र में होती है और नलकूपों के लिए बिजली निःशुल्क या सस्ती है, इसलिए वर्षा तथा नहरों के पुनर्भरण से कहीं अधिक जल खींचा जाता है। वहां अनेक खंड अति दोहित श्रेणी में हैं, इसीलिए राज्य मेरा पानी मेरी विरासत के अंतर्गत किसानों को धान के स्थान पर मक्का, दलहन, कपास या बाजरा लेने पर भुगतान करता है।
स्रोत
- हरियाणा का नहर तंत्र, शीर्ष कार्य तथा लिफ्ट सिंचाई योजनाएं — सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, हरियाणा सरकार
- पंजाब टर्मिनेशन ऑफ एग्रीमेंट्स अधिनियम 2004 पर राष्ट्रपति संदर्भ का निर्णय — भारत का उच्चतम न्यायालय
- उत्तर पश्चिम भारत की लवण प्रभावित तथा जल भराव वाली मृदा का सुधार — भाकृअनुप केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, करनाल





