हरियाणा की जलवायु, मिट्टियां और वन: संपूर्ण जीके नोट्स
हरियाणा की जलवायु, मिट्टियों और वनों के परीक्षा उपयोगी नोट्स: ऋतुएं, लू, वर्षा की प्रवणता, रौसली, भूड़ और कल्लर मिट्टी, कंटीले वन तथा राज्य प्रतीक।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 6 मिनट

हरियाणा उत्तर-पूर्व में शिवालिक की तलहटी और दक्षिण-पश्चिम में थार की रेत के बीच बसा है। न इसके पास समुद्र है और न इसके भीतर कोई बड़ी नदी। यही स्थिति राज्य की जलवायु, मिट्टियों और वनों को तय करती है। वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून से थोड़े समय में और बहुत असमान रूप से मिलती है, मैदान की मिट्टी जलोढ़ है पर राजस्थान की ओर बढ़ते ही रेतीली हो जाती है, और वन क्षेत्र किसी भी बड़े राज्य से कम है। एचएसएससी, एचपीएससी, हरियाणा पुलिस तथा एसएससी और रेलवे के हरियाणा संबंधी प्रश्न इसी अध्याय के कुछ तथ्यों पर बार-बार लौटते हैं: वर्षा घटने की दिशा, मिट्टियों के हरियाणवी नाम, नहरी क्षेत्रों की लवणता और राज्य के प्रतीक।
हरियाणा की जलवायु
हरियाणा की जलवायु महाद्वीपीय मानसूनी है, जो दक्षिण-पश्चिम में अर्ध-शुष्क और उत्तर-पूर्व में उप-आर्द्र है। राज्य समुद्र से बहुत दूर भीतर है, इसलिए तापमान का वार्षिक अंतर बहुत अधिक रहता है। मई-जून में सिरसा, हिसार और नारनौल का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है और दिसंबर-जनवरी की रातों में इन्हीं जिलों का तापमान हिमांक के पास आ जाता है। दोनों चरम सीमाओं के लिए सबसे अधिक नाम हिसार का लिया जाता है, क्योंकि उसके चारों ओर का खुला मैदान जल्दी गर्म और जल्दी ठंडा होता है। वर्ष को सामान्यतः चार भागों में पढ़ा जाता है।
| ऋतु | महीने | विशेषता |
|---|---|---|
| शीत ऋतु | दिसंबर से फरवरी | ठंडी रातें, पाला, पश्चिमी विक्षोभ से हल्की वर्षा |
| ग्रीष्म ऋतु | मार्च से जून | अत्यधिक गर्म और शुष्क, लू, आंधी |
| दक्षिण-पश्चिम मानसून | जुलाई से सितंबर | वर्ष की अधिकांश वर्षा, आर्द्र दिन |
| लौटता मानसून | अक्टूबर-नवंबर | शुष्क और साफ मौसम, गिरता तापमान, रबी की बुवाई |
वर्षा और उसका वितरण
हरियाणा में वर्षा उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर तेजी से घटती है और यही इस अध्याय का सबसे अधिक पूछा जाने वाला तथ्य है। शिवालिक से लगे पंचकूला, अंबाला और यमुनानगर में अच्छे वर्ष में एक हजार मिलीमीटर से अधिक वर्षा होती है, जबकि दक्षिण-पश्चिम के सिरसा, भिवानी और महेंद्रगढ़ में प्रायः तीन सौ मिलीमीटर से भी कम। राज्य का औसत पांच सौ मिलीमीटर से कुछ ही अधिक बैठता है, जो देश के अन्न भंडार को भरने वाले राज्य के लिए बहुत कम है।
इस वर्षा का लगभग चार-पांचवां भाग जुलाई से सितंबर के दक्षिण-पश्चिम मानसून से आता है। दिसंबर, जनवरी और फरवरी में पश्चिमी विक्षोभ से होने वाली वर्षा मात्रा में कम है पर प्रभाव में निर्णायक, क्योंकि वह खड़ी गेहूं, चना और सरसों की फसल पर पड़ती है और किसान की एक सिंचाई बचा देती है। आपदाएं भी जानी-पहचानी हैं: मई-जून की गर्म शुष्क पश्चिमी हवा लू, मानसून से पहले की आंधी, शीत ऋतु के अंत में ओलावृष्टि, और दिसंबर के अंत का पाला, जो सरसों, आलू और चने को नुकसान पहुंचाता है। वर्षा कम और अनिश्चित होने के कारण हरियाणा यमुना तथा भाखड़ा प्रणाली से निकली नहरों और नलकूपों पर टिका है।
कृषि-जलवायु की दृष्टि से स्थिति
देश के कृषि-जलवायु प्रदेशों के विभाजन में हरियाणा ट्रांस-गंगा मैदान प्रदेश में आता है, जिसमें पंजाब, दिल्ली, चंडीगढ़ और राजस्थान का गंगानगर क्षेत्र भी शामिल हैं। राज्य के भीतर कृषि नियोजन दो क्षेत्रों में किया जाता है: उत्तर-पूर्वी क्षेत्र, जहां नहर और नलकूप का निश्चित जल है और धान-गेहूं का चक्र चलता है, तथा दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र, जहां कम वर्षा और रेतीली मिट्टी में कपास, बाजरा, चना और सरसों अधिक उपयुक्त हैं।
हरियाणा की मिट्टियां
लगभग पूरा हरियाणा सिंधु-गंगा के जलोढ़ से ढका है; केवल उत्तर में शिवालिक का किनारा और दक्षिण में अरावली की शाखाएं इससे भिन्न हैं। राज्य में जो बदलता है वह गठन है, उत्पत्ति नहीं: दक्षिण-पश्चिम की ओर बढ़ते हुए मिट्टी हल्की और रेतीली होती जाती है। हरियाणा सामान्य ज्ञान में इन्हें हरियाणवी नामों से पढ़ा जाता है और प्रश्न भी इन्हीं नामों पर बनते हैं।
| स्थानीय नाम | मिट्टी का स्वरूप | कहां मिलती है |
|---|---|---|
| रौसली | दोमट, राज्य की सबसे उपजाऊ और सबसे आसानी से जुतने वाली मिट्टी | करनाल, पानीपत, सोनीपत, रोहतक आदि मध्य जिले |
| डाकर | भारी चिकनी मिट्टी, जल रोकती है, सूखने पर कठोर | पूर्वी भाग के निचले क्षेत्र |
| भूड़ | रेतीली, भुरभुरी, नमी और जैव पदार्थ में कमजोर | दक्षिण-पश्चिम: सिरसा, हिसार, भिवानी, महेंद्रगढ़ |
| ढांकर | चिकनी मिट्टी, जिसके नीचे कठोर कंकड़ की परत | मध्य मैदान के कुछ भाग |
| कंडी | मोटे कणों वाली, कंकरीली, पथरीली और उथली | पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर की शिवालिक तलहटी |
| कल्लर या रेह | लवणीय-क्षारीय, सतह पर सफेद पपड़ी, उपज कम | रोहतक, झज्जर, सोनीपत के जलभराव वाले नहरी क्षेत्र |
मिट्टी की समस्याएं
- लवणता और क्षारीयता। दशकों तक जल निकासी के बिना नहरी सिंचाई से मध्य जिलों में भूजल स्तर ऊपर उठ गया; उसके साथ लवण भी ऊपर आते हैं और सूखकर कल्लर की सफेद पपड़ी छोड़ जाते हैं। जिप्सम, भूमिगत जल निकासी और लवण-सहिष्णु किस्में इसका उपचार हैं।
- गिरता भूजल स्तर। उत्तर-पश्चिमी धान पट्टी में उलटी समस्या है: नलकूप वर्षा से लौटने वाले जल से अधिक खींच लेते हैं और जल स्तर हर वर्ष नीचे जाता है।
- वायु अपरदन। दक्षिण-पश्चिम की भुरभुरी भूड़ मिट्टी गर्मी की हवा में उड़कर छोटे टीले बना देती है; इसके विरुद्ध वृक्षों की पट्टियां लगाई जाती हैं।
- अवनालिका और परत अपरदन। शिवालिक की ढालें और अरावली की शाखाएं मानसून के बहाव में मिट्टी खोती हैं, इसलिए वहां चेक डैम और वृक्षारोपण किए जाते हैं।
इन्हीं समस्याओं पर काम करने वाला राष्ट्रीय संस्थान, केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, हरियाणा के करनाल में है, और राज्य का कृषि विश्वविद्यालय, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार में है। दोनों एक पंक्ति के प्रश्नों में नियमित रूप से आते हैं।
हरियाणा के वन
बड़े राज्यों में हरियाणा सबसे कम वन वाला राज्य है। इसका अभिलिखित वन क्षेत्र राज्य के क्षेत्रफल का बहुत छोटा अंश है और 1988 की राष्ट्रीय वन नीति के एक-तिहाई भूभाग के लक्ष्य से बहुत पीछे है। कारण सीधा है: मैदान बहुत पहले हल के नीचे आ गया और जो वन बचा वह पहाड़ी ढालों तथा न जोती जा सकने वाली भूमि पर ही टिका रहा।
यहां दो प्रकार के वन मिलते हैं। पंचकूला और यमुनानगर की शिवालिक पट्टी में उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन हैं, जिनमें साल, खैर, शीशम, सैन और मोरनी की ऊंची ढालों पर चीड़ मिलते हैं। अरावली की शाखाओं और शुष्क दक्षिण-पश्चिम में उष्णकटिबंधीय कंटीले वन हैं, जिनमें कीकर या बबूल, खेजड़ी, बेर, ढाक और कंटीली झाड़ियां हैं। पंचकूला जिले में राज्य का सबसे अधिक वन क्षेत्र है और वहीं मोरनी पहाड़ियों में करोह चोटी है, जो लगभग 1,467 मीटर के साथ हरियाणा का सर्वोच्च बिंदु है; मोरनी राज्य का एकमात्र पर्वतीय स्थल भी है।
प्राकृतिक वन इतना कम होने के कारण हरियाणा ने लगाए गए वृक्षों पर भरोसा किया है। खेतों की मेड़ों और नहरों के किनारे सामाजिक तथा कृषि वानिकी ने राज्य को कृषि-वानिकी में अग्रणी बनाया: यमुनानगर में खेतों पर उगाए गए पॉपलर और यूकेलिप्टस वहां के प्लाईवुड उद्योग को कच्चा माल देते हैं। बीड़ कहे जाने वाले छोटे घिरे वन खंड, जो कभी शिकारगाह थे, आज संरक्षित क्षेत्रों के रूप में बचे हैं, जैसे पंचकूला का बीड़ शिकारगाह और जींद का बीड़ बारा बन। राज्य प्राणवायु देवता योजना भी चलाता है, जिसमें पचहत्तर वर्ष से पुराने वृक्षों की देखभाल के लिए पेंशन दी जाती है।
याद रखने योग्य राज्य प्रतीक
- राज्य वृक्ष: पीपल
- राज्य पुष्प: कमल
- राज्य पक्षी: काला तीतर
- राज्य पशु: कृष्णमृग (ब्लैकबक)
परीक्षा की दृष्टि से
परीक्षक का पहला प्रश्न वर्षा की प्रवणता पर होता है, अर्थात आर्द्र शिवालिक उत्तर-पूर्व से शुष्क दक्षिण-पश्चिम की ओर घटाव, और जाल प्रायः दिशा उलट देने का होता है। लू को कालबैसाखी और आम्र वर्षा के विरुद्ध पूछा जाता है तथा शीतकालीन वर्षा को उत्तर-पूर्वी मानसून के विरुद्ध, जो हरियाणा तक पहुंचता ही नहीं। मिट्टी के प्रश्न लगभग सदैव हरियाणवी नामों को गठन से मिलाने के होते हैं, इसलिए रौसली, डाकर, भूड़, ढांकर, कंडी और कल्लर एक समूह के रूप में याद होने चाहिए; कठिन रूप में कल्लर की पपड़ी का कारण पूछा जाता है, जो नहरी सिंचाई से जलभराव है, उर्वरक या हवा नहीं। करनाल का मृदा लवणता संस्थान और हिसार का कृषि विश्वविद्यालय एक पंक्ति के प्रिय प्रश्न हैं, वैसे ही ट्रांस-गंगा मैदान प्रदेश भी। वनों में दो वन प्रकार, सर्वाधिक वन वाला जिला पंचकूला, करोह चोटी तथा मोरनी पहाड़ियां और चारों राज्य प्रतीक पूछे जाते हैं, जिन्हें राष्ट्रीय वृक्ष और राजस्थान की खेजड़ी के विरुद्ध रखा जाता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| जलवायु का प्रकार | महाद्वीपीय मानसूनी; दक्षिण-पश्चिम में अर्ध-शुष्क, उत्तर-पूर्व में उप-आर्द्र |
|---|---|
| वर्षा की दिशा | उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर घटती है |
| सर्वाधिक वर्षा वाले जिले | पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर (शिवालिक पट्टी) |
| सबसे शुष्क जिले | सिरसा, भिवानी, महेंद्रगढ़ |
| ग्रीष्म की हवा | लू, मई-जून की गर्म शुष्क पश्चिमी हवा |
| शीतकालीन वर्षा | पश्चिमी विक्षोभ से, दिसंबर से फरवरी |
| कृषि-जलवायु प्रदेश | ट्रांस-गंगा मैदान प्रदेश |
| सर्वाधिक उपजाऊ मिट्टी | मध्य जिलों की रौसली (दोमट) |
| रेतीली मिट्टी | भूड़, दक्षिण-पश्चिमी जिलों की |
| लवण प्रभावित मिट्टी | कल्लर या रेह, जलभराव वाले नहरी क्षेत्रों की |
| मृदा लवणता संस्थान | केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, करनाल |
| कृषि विश्वविद्यालय | चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार |
| वनों के प्रकार | उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती (शिवालिक) और कंटीले (अरावली, दक्षिण-पश्चिम) |
| सर्वाधिक वन वाला जिला | पंचकूला |
| सर्वोच्च बिंदु | करोह चोटी, मोरनी पहाड़ियां, पंचकूला, लगभग 1,467 मीटर |
| राज्य वृक्ष और पुष्प | पीपल और कमल |
| राज्य पक्षी और पशु | काला तीतर और कृष्णमृग |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
मई-जून में हरियाणा पर चलने वाली गर्म और शुष्क पश्चिमी हवा कौन-सी है?
- A.कालबैसाखी
- B.लू
- C.आम्र वर्षा
- D.नॉर्वेस्टर
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, लू है। लू वह गर्म और शुष्क हवा है जो मई-जून में पश्चिम तथा उत्तर-पश्चिम से हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मैदानों पर चलती है। यह दिन का तापमान तेजी से बढ़ा देती है, हवा को सुखा देती है और इतनी घातक होती है कि इसके चलते दोपहर में बाहर का काम टाल दिया जाता है।
विकल्प A, कालबैसाखी, बंगाल, बिहार और असम में मानसून से पहले शाम को आने वाला प्रचंड गरज-तूफान है, हरियाणा की हवा नहीं। विकल्प C, आम्र वर्षा, केरल, कर्नाटक और कोंकण में मानसून पूर्व होने वाली वह वर्षा है जो आम के पकने में सहायक होती है, अर्थात प्रायद्वीपीय घटना है। विकल्प D, नॉर्वेस्टर, उसी कालबैसाखी का अंग्रेजी नाम है। ध्यान रखें कि हरियाणा समुद्र से दूर गर्म मैदान में है, इसलिए उसकी ग्रीष्म की विशिष्ट हवा शुष्क ताप-हवा है, वर्षा लाने वाली नहीं।
हरियाणा में वर्षा किस दिशा में घटती जाती है?
- A.दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर
- B.उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर
- C.उत्तर से दक्षिण की ओर समान रूप से
- D.केवल यमुना के साथ पूर्व से पश्चिम की ओर
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर है। उत्तर-पूर्व में शिवालिक से लगे पंचकूला, अंबाला और यमुनानगर मानसून को पहाड़ियों से टकराकर सबसे पहले पकड़ते हैं और राज्य की सर्वाधिक वर्षा पाते हैं, जबकि दक्षिण-पश्चिम के सिरसा, भिवानी और महेंद्रगढ़ थार के शुष्क किनारे पर पड़ते हैं और सबसे कम वर्षा पाते हैं।
विकल्प A इसी क्रम को उलट देता है और यही परीक्षक का सामान्य जाल है। विकल्प C गलत है क्योंकि यह गिरावट विकर्ण दिशा में है, सीधी उत्तर-दक्षिण नहीं; उत्तर-मध्य का करनाल और दक्षिण का रेवाड़ी किसी सरल उत्तर-दक्षिण नियम के अनुसार नहीं बंटते। विकल्प D गलत है क्योंकि यमुना के मार्ग का वर्षा पर कोई नियंत्रण नहीं; नदी राज्य के पूर्वी किनारे पर बहती है जबकि वर्षा की प्रवणता उसे काटती हुई चलती है। नियम इस तरह याद रखें: पहाड़ की ओर आर्द्र, मरुस्थल की ओर शुष्क।
हरियाणा के किस जिले में सामान्यतः सबसे अधिक वार्षिक वर्षा होती है?
- A.सिरसा
- B.भिवानी
- C.पंचकूला
- D.महेंद्रगढ़
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, पंचकूला है। पंचकूला राज्य के उत्तर-पूर्वी कोने में शिवालिक की तलहटी में है। वहां पहाड़ियां मानसून की धारा को ऊपर उठा देती हैं, इसलिए अच्छे वर्ष में जिले को एक हजार मिलीमीटर से अधिक वर्षा मिलती है, जो हरियाणा में सर्वाधिक है; इसी कारण यह राज्य का सबसे अधिक वन वाला जिला भी है।
विकल्प A, सिरसा, और विकल्प B, भिवानी, राजस्थान की सीमा की ओर शुष्क दक्षिण-पश्चिम में हैं और सबसे सूखे जिलों में गिने जाते हैं, जहां प्रायः तीन सौ मिलीमीटर से भी कम वर्षा होती है। विकल्प D, महेंद्रगढ़, दक्षिणी हरियाणा के अरावली कोने में है और उससे भी अधिक शुष्क है; जल की कमी के लिए उसी का नाम सबसे अधिक लिया जाता है। तथ्य को जोड़ी में याद रखें: एक छोर पर पंचकूला और अंबाला, दूसरे छोर पर सिरसा और महेंद्रगढ़।
हरियाणा में दोमट और सबसे उपजाऊ मिट्टी को स्थानीय रूप से किस नाम से जाना जाता है?
- A.भूड़
- B.डाकर
- C.रौसली
- D.कल्लर
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, रौसली है। रौसली मध्य हरियाणा के मैदान की दोमट मिट्टी है, जिसमें रेत, गाद और चिकनी मिट्टी का संतुलित मिश्रण होता है। इसमें जल निकासी भी ठीक है और फसल के लिए पर्याप्त नमी भी रुकती है, और यह आसानी से जुत जाती है; इसी कारण करनाल, पानीपत, सोनीपत और रोहतक की उपजाऊ पट्टी इसी पर टिकी है।
विकल्प A, भूड़, दक्षिण-पश्चिम के सिरसा, हिसार और भिवानी जैसे जिलों की भुरभुरी रेतीली मिट्टी है, जो नमी और जैव पदार्थ में कमजोर है। विकल्प B, डाकर, पूर्वी निचले क्षेत्रों की भारी चिकनी मिट्टी है; वह जल तो रोकती है पर सूखने पर फट जाती है और कठोर हो जाती है। विकल्प D, कल्लर, कोई गठन नहीं बल्कि एक दशा है: जलभराव वाले नहरी क्षेत्रों की लवणीय-क्षारीय मिट्टी, जिसे सफेद पपड़ी से पहचाना जाता है। चार नामों को चार दशाओं से जोड़ लें तो मिट्टी के अधिकांश प्रश्न हल हो जाते हैं।
दक्षिण-पश्चिमी हरियाणा की रेतीली मिट्टी को स्थानीय रूप से क्या कहा जाता है?
- A.भूड़
- B.रौसली
- C.ढांकर
- D.कंडी
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, भूड़ है। भूड़ वह हल्की, भुरभुरी और रेतीली मिट्टी है जो सिरसा, हिसार, भिवानी और महेंद्रगढ़ में मिलती है, जहां हरियाणा राजस्थान के रेतीले क्षेत्र में बदलने लगता है। इसमें जैव पदार्थ कम है, जल इतनी तेजी से निकल जाता है कि सूखे दिनों में फसल नहीं टिकती, और गर्मी की हवा में यह उड़कर छोटे टीले बना देती है; इसी कारण वहां वृक्षों की पट्टियां लगाई जाती हैं।
विकल्प B, रौसली, मध्य जिलों की दोमट और हरियाणा की सबसे उपजाऊ मिट्टी है, अर्थात गठन के पैमाने का दूसरा छोर। विकल्प C, ढांकर, वह चिकनी मिट्टी है जिसके नीचे कठोर कंकड़ की परत होती है और वह जड़ों तथा जल निकासी दोनों को रोकती है। विकल्प D, कंडी, पंचकूला, अंबाला और यमुनानगर की शिवालिक तलहटी की मोटे कणों वाली पथरीली मिट्टी है, जो मौसमी नालों द्वारा लाए गए पहाड़ी मलबे से बनी है। भूड़ और कंडी दोनों मोटे कणों की हैं, पर एक दक्षिण-पश्चिम की उड़ाई हुई रेत है और दूसरी उत्तर-पूर्व की पहाड़ी कंकड़।
केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान हरियाणा के किस शहर में स्थित है?
- A.हिसार
- B.करनाल
- C.अंबाला
- D.रोहतक
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, करनाल है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अधीन केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान करनाल में है। यह लवण और क्षार से प्रभावित भूमि के सुधार, जिप्सम उपचार और भूमिगत जल निकासी तथा लवण-सहिष्णु फसल किस्मों पर काम करता है, और ये सभी समस्याएं हरियाणा के नहरी जिलों की अपनी समस्याएं हैं।
विकल्प A, हिसार, इस संस्थान के लिए गलत है पर दूसरे संस्थानों के लिए याद रखने योग्य है: चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार में है और भैंस अनुसंधान का केंद्रीय संस्थान भी वहीं है। विकल्प C, अंबाला, अपनी छावनी तथा वैज्ञानिक उपकरण और मिक्सी उद्योग के लिए जाना जाता है, मृदा संस्थान के लिए नहीं। विकल्प D, रोहतक, में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय और चिकित्सा विज्ञान का स्नातकोत्तर संस्थान है। करनाल में राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान भी है, इसलिए करनाल के दोनों संस्थान प्रायः एक-दूसरे के विरुद्ध विकल्प बनाकर पूछे जाते हैं।
हरियाणा भारत के किस कृषि-जलवायु प्रदेश का भाग है?
- A.ऊपरी गंगा मैदान प्रदेश
- B.ट्रांस-गंगा मैदान प्रदेश
- C.पश्चिमी शुष्क प्रदेश
- D.मध्य गंगा मैदान प्रदेश
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, ट्रांस-गंगा मैदान प्रदेश है। देश के कृषि-जलवायु प्रदेशों के विभाजन में ट्रांस-गंगा मैदान प्रदेश में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़ और राजस्थान का गंगानगर क्षेत्र आते हैं। यह निश्चित नहर और नलकूप सिंचाई वाला गेहूं-धान का प्रदेश है और हरित क्रांति यहीं सबसे आगे बढ़ी।
विकल्प A, ऊपरी गंगा मैदान प्रदेश, हरियाणा के पूर्व में पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश को समेटता है। विकल्प C, पश्चिमी शुष्क प्रदेश, राजस्थान का शुष्क भाग है, जहां वर्षा कहीं कम है और बाजरा तथा दलहन प्रमुख हैं; दक्षिण-पश्चिमी हरियाणा उससे मिलता-जुलता अवश्य है पर राज्य उसमें नहीं रखा जाता। विकल्प D, मध्य गंगा मैदान प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार का है। हरियाणा के भीतर नियोजन दो क्षेत्रों में होता है: उत्तर-पूर्वी धान-गेहूं क्षेत्र और दक्षिण-पश्चिमी कपास, बाजरा तथा सरसों क्षेत्र।
निम्नलिखित में से हरियाणा का राज्य वृक्ष कौन-सा है?
- A.बरगद
- B.शीशम
- C.पीपल
- D.खेजड़ी
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, पीपल है। पीपल हरियाणा का राज्य वृक्ष है। यह मैदान का दीर्घजीवी वृक्ष है, जो गांवों की चौपालों और देवस्थानों पर लगाया जाता है, और राज्य की जो योजना बहुत पुराने वृक्षों की देखभाल के लिए पेंशन देती है उसमें बड़ी संख्या में पीपल ही संरक्षित हैं।
विकल्प A, बरगद, भारत का राष्ट्रीय वृक्ष है और कुछ अन्य राज्यों का राज्य वृक्ष है, पर हरियाणा का नहीं। विकल्प B, शीशम, हरियाणा में नहरों और सड़कों के किनारे सबसे अधिक लगाए जाने वाले इमारती वृक्षों में है, इसलिए यह आकर्षक विकल्प लगता है, पर यह राज्य वृक्ष नहीं है। विकल्प D, खेजड़ी, दक्षिण-पश्चिम का कठोर मरुस्थलीय वृक्ष है और राजस्थान का राज्य वृक्ष है। हरियाणा के चारों प्रतीक साथ याद करें: वृक्ष पीपल, पुष्प कमल, पक्षी काला तीतर और पशु कृष्णमृग।
हरियाणा का सर्वोच्च बिंदु करोह चोटी किस जिले में स्थित है?
- A.यमुनानगर
- B.पंचकूला
- C.महेंद्रगढ़
- D.अंबाला
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, पंचकूला है। करोह चोटी राज्य के उत्तरी किनारे पर शिवालिक पट्टी में पंचकूला जिले की मोरनी पहाड़ियों में है और लगभग 1,467 मीटर ऊंची है। मोरनी हरियाणा का एकमात्र पर्वतीय स्थल भी है और पंचकूला राज्य का सबसे अधिक वन क्षेत्र वाला जिला है, इसलिए ये तीनों तथ्य साथ ही याद रखने चाहिए।
विकल्प A, यमुनानगर, भी शिवालिक जिला है और वहां कलेसर का साल वन है, पर उसकी पहाड़ियां मोरनी श्रेणी से नीची हैं। विकल्प C, महेंद्रगढ़, राज्य के दूसरे छोर पर दक्षिण में अरावली कोने में है; वहां की पहाड़ियां प्राचीन, घिसी हुई और कहीं नीची हैं, और जिला शुष्कता तथा ढोसी पहाड़ी के लिए जाना जाता है। विकल्प D, अंबाला, शिवालिक के ठीक नीचे मैदान में है और वहां कोई उल्लेखनीय चोटी नहीं है। अंतर याद रखें: उत्तर की शिवालिक नवीन और ऊंची, दक्षिण की अरावली प्राचीन और बहुत घिसी हुई।
हरियाणा में कौन-से प्रकार के प्राकृतिक वन पाए जाते हैं?
- A.उष्णकटिबंधीय सदाबहार और पर्वतीय आर्द्र वन
- B.उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती और कंटीले वन
- C.मैंग्रोव और वेलांचली वन
- D.पूरे राज्य में शीतोष्ण कोणधारी वन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती और कंटीले वन है। पंचकूला और यमुनानगर की शिवालिक पट्टी में शुष्क पर्णपाती वन हैं, जिनमें साल, खैर, शीशम और सैन मिलते हैं, जबकि दक्षिण की अरावली शाखाओं और शुष्क दक्षिण-पश्चिम में कीकर या बबूल, खेजड़ी, बेर और ढाक के कंटीले वन हैं। दोनों प्रकार कम और मौसमी वर्षा वाले राज्य के अनुकूल हैं।
विकल्प A गलत है क्योंकि उष्णकटिबंधीय सदाबहार और पर्वतीय आर्द्र वनों के लिए भारी और वर्ष भर फैली वर्षा चाहिए, जो पश्चिमी घाट, पूर्वोत्तर और अंडमान में है, किसी अर्ध-शुष्क मैदान में नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि मैंग्रोव और वेलांचली वन ज्वारीय तटों और डेल्टाओं पर उगते हैं और हरियाणा स्थलरुद्ध है। विकल्प D गलत है क्योंकि शीतोष्ण कोणधारी वन ऊंचे हिमालय के हैं; हरियाणा में केवल मोरनी की ऊपरी ढालों पर चीड़ का एक टुकड़ा है, जो अपवाद है, सामान्य प्रकार नहीं।
हरियाणा के नहरी जिलों में कल्लर या रेह कही जाने वाली सफेद लवणीय-क्षारीय पपड़ी का मुख्य कारण क्या है?
- A.रासायनिक उर्वरक का अत्यधिक प्रयोग
- B.नहरी सिंचाई से जलभराव और भूजल स्तर का ऊपर उठना
- C.रेतीली मिट्टी का वायु अपरदन
- D.शिवालिक से आने वाला भारी मानसूनी बहाव
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, नहरी सिंचाई से जलभराव और भूजल स्तर का ऊपर उठना है। जहां दशकों तक जल निकासी की व्यवस्था किए बिना नहर का जल दिया गया, वहां भूजल स्तर सतह की ओर चढ़ आया। केशिका क्रिया से जल ऊपर खिंचता है, शुष्क गर्मी में वाष्पित हो जाता है और अपने साथ लाए लवण सतह पर सफेद कल्लर या रेह की पपड़ी के रूप में छोड़ जाता है। रोहतक, झज्जर और सोनीपत में यह सबसे स्पष्ट है, और उपचार जिप्सम, भूमिगत जल निकासी तथा लवण-सहिष्णु किस्में हैं।
विकल्प A गलत है क्योंकि उर्वरक मृदा स्वास्थ्य को हानि पहुंचा सकता है पर इस विशेष लवण पपड़ी का कारण नहीं है। विकल्प C दक्षिण-पश्चिम की अलग समस्या बताता है, जहां भुरभुरी भूड़ मिट्टी उड़कर टीले बनाती है; वह मिट्टी का भौतिक क्षय है, लवणीकरण नहीं। विकल्प D शिवालिक ढालों के अवनालिका और परत अपरदन की बात है, जिसका उपचार चेक डैम और वृक्षारोपण है। तीनों को अलग रखें: नहरी मैदान में लवण, दक्षिण-पश्चिम में रेत और पहाड़ियों में अपरदन।
दिसंबर-जनवरी में हरियाणा को मिलने वाली थोड़ी शीतकालीन वर्षा किससे होती है?
- A.दक्षिण-पश्चिम मानसून
- B.लौटते मानसून
- C.पश्चिमी विक्षोभ
- D.बंगाल की खाड़ी से आने वाले उत्तर-पूर्वी मानसून
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, पश्चिमी विक्षोभ है। ये वे निम्न दाब तंत्र हैं जो भूमध्यसागर और पश्चिम एशिया के ऊपर बनते हैं और पछुआ जेट धारा के साथ पूर्व की ओर बढ़ते हुए शीत ऋतु में उत्तर-पश्चिम भारत तक आते हैं। हरियाणा को इनसे मिलने वाली वर्षा मात्रा में कम पर प्रभाव में निर्णायक है, क्योंकि वह खड़ी गेहूं, चना और सरसों पर पड़ती है और किसान की एक सिंचाई बचा देती है; शीत लहर और पाला भी इन्हीं तंत्रों से जुड़े हैं।
विकल्प A, दक्षिण-पश्चिम मानसून, हरियाणा को उसकी अधिकांश वर्षा देता है, पर केवल जुलाई से सितंबर के बीच। विकल्प B, अक्टूबर-नवंबर का लौटता मानसून, उत्तर-पश्चिम भारत को शुष्क और साफ छोड़ जाता है और वह वर्षा की नहीं, रबी की बुवाई की ऋतु है। विकल्प D गलत है क्योंकि अक्टूबर से दिसंबर का उत्तर-पूर्वी मानसून कोरोमंडल तट, मुख्यतः तमिलनाडु और तटीय आंध्र प्रदेश को भिगोता है और हरियाणा तक कभी नहीं पहुंचता। परीक्षक का जाल यही है कि उत्तर-पूर्वी मानसून को पूरे देश की शीतकालीन वर्षा बता दिया जाए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हरियाणा की जलवायु किस प्रकार की है?
महाद्वीपीय मानसूनी। राज्य समुद्र से दूर भीतर है, इसलिए ग्रीष्म अत्यधिक गर्म और शीत ऋतु ठंडी रहती है; दक्षिण-पश्चिम अर्ध-शुष्क और शिवालिक से लगा उत्तर-पूर्व उप-आर्द्र है। लगभग पूरी वर्षा जुलाई से सितंबर के बीच होती है।
हरियाणा के किस जिले में सबसे अधिक और किसमें सबसे कम वर्षा होती है?
शिवालिक की तलहटी में बसे पंचकूला में सामान्यतः सबसे अधिक वर्षा होती है, अच्छे वर्ष में एक हजार मिलीमीटर से भी ऊपर। दक्षिण-पश्चिम के सिरसा, भिवानी और महेंद्रगढ़ में सबसे कम, प्रायः तीन सौ मिलीमीटर से भी कम।
हरियाणा की प्रमुख मिट्टियां और उनके स्थानीय नाम क्या हैं?
सभी जलोढ़ हैं और उन्हें गठन के अनुसार नाम दिए गए हैं: रौसली दोमट और सबसे उपजाऊ, डाकर भारी चिकनी, भूड़ दक्षिण-पश्चिम की रेतीली, ढांकर कंकड़ की परत वाली चिकनी, कंडी तलहटी की कंकरीली और कल्लर या रेह लवण प्रभावित मिट्टी।
हरियाणा में वन इतने कम क्यों हैं?
मैदान बहुत पहले हल के नीचे आ गया और वर्षा कम है, इसलिए प्राकृतिक वन मुख्यतः शिवालिक की ढालों और अरावली की शाखाओं पर ही बचा है। बड़े राज्यों में हरियाणा सबसे कम वन वाला राज्य है और 1988 की राष्ट्रीय वन नीति के एक-तिहाई लक्ष्य से बहुत पीछे है।
हरियाणा का सर्वोच्च बिंदु कौन-सा है?
पंचकूला जिले की मोरनी पहाड़ियों में स्थित करोह चोटी, जिसकी ऊंचाई लगभग 1,467 मीटर है। मोरनी राज्य का एकमात्र पर्वतीय स्थल भी है और पंचकूला में हरियाणा का सर्वाधिक वन क्षेत्र है।
हरियाणा के राज्य प्रतीक कौन-से हैं?
राज्य वृक्ष पीपल, राज्य पुष्प कमल, राज्य पक्षी काला तीतर और राज्य पशु कृष्णमृग अर्थात ब्लैकबक है।
स्रोत
- भारत: भौतिक पर्यावरण (कक्षा XI), अध्याय 4: जलवायु तथा अध्याय 6: मृदा — एनसीईआरटी
- हरियाणा के वन और वन्यजीव — वन विभाग, हरियाणा सरकार
- हरियाणा राज्य परिचय: जलवायु, मिट्टी और कृषि-जलवायु क्षेत्र — हरियाणा सरकार


