हरियाणा की कृषि और हरित क्रांति: फसलें और प्रश्न
हरियाणा कृषि नोट्स: हरित क्रांति, गेहूं और बासमती पट्टी, नहर तथा नलकूप सिंचाई, मुर्रा भैंस, डेयरी तथा हिसार एवं करनाल के प्रमुख अनुसंधान संस्थान।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

हरियाणा 1 नवंबर 1966 को अस्तित्व में आया और उसी मौसम में हरित क्रांति आरंभ हुई। दोनों घटनाओं ने मिलकर एक छोटे राज्य को केंद्रीय पूल में गेहूं और चावल देने वाले सबसे बड़े राज्यों में पहुंचा दिया, जहां वह पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर है। समतल भूमि, यमुना और सतलुज का नहरी जल, नलकूपों की पहुंच में उथला भूजल और नया बीज आजमाने को तैयार किसान, नई तकनीक को जो चाहिए था वह सब यहां मिला। परीक्षक इस अध्याय से हरित क्रांति की तिथियां और नाम, किसी जिले की फसल पट्टी, डेयरी नस्लें तथा हिसार और करनाल में जमे अनुसंधान संस्थान पूछते हैं।
हरित क्रांति क्या थी
हरित क्रांति एक पैकेज थी, कोई अकेला परिवर्तन नहीं। उसका केंद्र मेक्सिको में विकसित बौनी अधिक उपज देने वाली गेहूं किस्में थीं, लरमा रोजो और सोनेरा 64, जिनसे भारत में कल्याण सोना और सोनालिका तैयार हुईं। बौना पौधा अपनी शक्ति भूसे के बजाय दाने में लगाता है और अधिक खाद देने पर गिरता नहीं, इसलिए बीज तभी काम करता जब उसके साथ रासायनिक उर्वरक, निश्चित सिंचाई, कीटनाशक और ट्रैक्टर आते, तथा संस्थागत ऋण, न्यूनतम समर्थन मूल्य और सरकारी खरीद उसका सहारा बनते। गेहूं नॉर्मन बोरलॉग ने विकसित किया, भारतीय कार्यक्रम का नेतृत्व एम. एस. स्वामीनाथन ने किया और उन्हें भारत में हरित क्रांति का जनक कहा जाता है, तथा सी. सुब्रमण्यम उस समय के कृषि मंत्री थे जिन्होंने इसे आगे बढ़ाया। सबसे पहले गेहूं ने प्रतिक्रिया दी, इसीलिए आरंभिक वर्षों को प्रायः गेहूं क्रांति कहा जाता है, और पंजाब, हरियाणा तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश उसका केंद्र क्षेत्र रहे।
फसलें और फसल पट्टियां
| ऋतु | फसलें | प्रमुख जिले |
|---|---|---|
| खरीफ | धान सहित बासमती, कपास, बाजरा, गन्ना, चारे की ज्वार | धान के लिए करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल; कपास के लिए सिरसा, फतेहाबाद, हिसार; बाजरा के लिए महेंद्रगढ़ और भिवानी |
| रबी | गेहूं, सरसों, चना, जौ | गेहूं के लिए करनाल, कुरुक्षेत्र, जींद, सोनीपत; सरसों के लिए रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, भिवानी |
| जायद और बागवानी | सब्जियां, चारा, मूंग, खरबूजा-तरबूज, मशरूम | नहरी सिंचाई वाला उत्तरी भाग और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से लगी पट्टी |
राज्य स्पष्ट रूप से दो कृषि क्षेत्रों में बंटा है। पश्चिमी यमुना नहर और नलकूपों से सींचा गया उत्तरी तथा पूर्वी भाग गेहूं-धान चक्र चलाता है, और करनाल तथा तरावड़ी क्षेत्र की बासमती वहीं से निर्यात होती है। भिवानी और महेंद्रगढ़ से सिरसा तक फैला शुष्क दक्षिण-पश्चिम नहरों के अंतिम छोर और कम पानी मांगने वाली फसलों पर निर्भर है, इसलिए वहां सरसों, बाजरा, चना और कपास प्रमुख हैं। गन्ना यमुनानगर, करनाल, पानीपत और शाहाबाद की मिलों में जाता है।
जल, जो हर चीज की सीमा है
हरियाणा अपने लगभग पूरे बोये क्षेत्र की सिंचाई करता है, जिसके लिए दो नहर प्रणालियां और नलकूपों का घना जाल है। पश्चिमी यमुना नहर यमुनानगर जिले के हथनीकुंड बैराज से निकलती है; यह नहर मध्यकाल में खोदी गई थी और ब्रिटिश अभियंताओं ने उसका पुनर्निर्माण किया। भाखड़ा नहर प्रणाली नरवाना शाखा के माध्यम से सतलुज का जल मध्य जिलों तक लाती है। ओखला बैराज से निकली गुड़गांव नहर तथा जुई और लोहारू लिफ्ट नहरें शुष्क दक्षिण तक पानी पहुंचाती हैं, और सतलुज-यमुना लिंक नहर अब भी अधूरी तथा विवादित है। इस सारी सफलता की कीमत है धान पट्टी के नीचे वर्ष दर वर्ष गिरता भूजल स्तर, दक्षिण-पश्चिम के कुछ भागों में जलभराव तथा लवणता, और धान की कटाई के बाद पराली जलाना।
पशुधन, डेयरी और अनुसंधान
यहां पशुपालन हल जितना ही महत्वपूर्ण है। रोहतक, जींद और हिसार की गहरी काली मुर्रा भैंस, जिसके सींग कसकर मुड़े होते हैं, देश की सर्वश्रेष्ठ दुधारू भैंस है और उसे हरियाणा का काला सोना कहा जाता है। हरियाणा गौ नस्ल सफेद या धूसर रंग की तथा लंबे और सकरे मुख वाली होती है और रोहतक-हिसार क्षेत्र की दोहरे उपयोग वाली नस्ल है। सिरसा के आसपास नीली-रावी भैंसें और उत्तर में बीटल बकरियां पाली जाती हैं। राज्य का सहकारी दूध ब्रांड वीटा है, और प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता में हरियाणा देश में सबसे आगे के राज्यों में है।
अनुसंधान का मानचित्र याद रखना सरल है क्योंकि उसके दो केंद्र हैं। हिसार में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय है, जो एशिया के सबसे बड़े कृषि विश्वविद्यालयों में गिना जाता है, तथा पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय और केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान भी वहीं हैं। करनाल में राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान तथा राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो हैं। राज्य योजनाओं में मेरा पानी मेरी विरासत किसानों को धान छोड़कर भूजल बचाने पर प्रोत्साहन देती है, भावांतर भरपाई योजना बागवानी फसलों का मूल्य अंतर पूरा करती है, किसान मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर अपनी बुवाई दर्ज करते हैं, और हैफेड वह राज्य सहकारी संस्था है जो उनकी उपज बेचती है।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्न तीन समूहों में बंटते हैं। पहला स्वयं हरित क्रांति है: वर्ष, अगुआ फसल, मेक्सिको की बौनी किस्में, बोरलॉग और स्वामीनाथन, तथा वे राज्य जहां यह सफल हुई, जिसमें सामान्य भ्रम यह है कि स्वामीनाथन को गेहूं का विकासकर्ता मान लिया जाता है जबकि वे भारतीय कार्यक्रम के नेता थे। दूसरा राज्य का भूगोल है: नहर और उसका बैराज, किसी फसल का जिला, तथा 1 नवंबर 1966 का स्थापना दिवस। तीसरा संस्थान और नस्लें हैं, जहां कृषि विश्वविद्यालय तथा भैंस संस्थान के लिए हिसार, डेयरी, गेहूं और लवणता संस्थानों के लिए करनाल, भैंस के रूप में मुर्रा तथा गौ नस्ल के रूप में हरियाणा स्थायी उत्तर हैं। योजनाओं के नाम भी पूछे जाते हैं, विशेषकर फसल विविधीकरण के लिए मेरा पानी मेरी विरासत और वह पोर्टल जिस पर किसान बुवाई दर्ज करते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| हरियाणा की स्थापना | 1 नवंबर 1966 |
|---|---|
| हरित क्रांति की फसल | गेहूं, जिसने पहला चरण संभाला |
| आयातित किस्में | मेक्सिको की लरमा रोजो और सोनेरा 64 |
| भारतीय किस्में | कल्याण सोना और सोनालिका |
| भारत में हरित क्रांति के जनक | एम. एस. स्वामीनाथन |
| गेहूं के विकासकर्ता | नॉर्मन बोरलॉग |
| केंद्रीय पूल | गेहूं और चावल देने में हरियाणा पंजाब के बाद दूसरा |
| पश्चिमी यमुना नहर | शीर्ष हथनीकुंड बैराज, यमुनानगर |
| अन्य नहरें | नरवाना शाखा से भाखड़ा प्रणाली, गुड़गांव नहर, जुई और लोहारू लिफ्ट नहरें |
| धान और बासमती पट्टी | करनाल, तरावड़ी, कुरुक्षेत्र, कैथल |
| कपास पट्टी | दक्षिण-पश्चिम में सिरसा, फतेहाबाद, हिसार |
| सरसों और बाजरा पट्टी | रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, भिवानी |
| भैंस नस्ल | मुर्रा, हरियाणा का काला सोना |
| गौ नस्ल | हरियाणा, सफेद या धूसर, लंबा और सकरा मुख |
| डेयरी ब्रांड | वीटा, राज्य सहकारी डेयरी फेडरेशन का |
| हिसार के संस्थान | चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, लुवास, केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान |
| करनाल के संस्थान | एनडीआरआई, भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, सीएसएसआरआई, एनबीएजीआर |
| विविधीकरण योजना | मेरा पानी मेरी विरासत, धान से भूमि हटाने के लिए |
| विपणन संघ | हैफेड |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
हरियाणा पृथक राज्य के रूप में किस तिथि को अस्तित्व में आया?
- A.1 नवंबर 1956
- B.1 नवंबर 1966
- C.1 अप्रैल 1966
- D.15 अगस्त 1966
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उस दिन तत्कालीन पंजाब राज्य के हिंदी भाषी जिलों को अलग कर हरियाणा बनाया गया, और यह तिथि प्रतिवर्ष हरियाणा दिवस के रूप में मनाई जाती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में हरित क्रांति आरंभ करने वाली बौनी अधिक उपज देने वाली गेहूं किस्में सर्वप्रथम किस देश में विकसित हुईं?
- A.मेक्सिको
- B.जापान
- C.ऑस्ट्रेलिया
- D.सोवियत संघ
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बौनी गेहूं किस्में लरमा रोजो और सोनेरा 64 मेक्सिको के उस अनुसंधान कार्यक्रम में विकसित हुईं जहां नॉर्मन बोरलॉग कार्यरत थे, और साठ के दशक के मध्य में इनका बीज भारत लाया गया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में हरित क्रांति का जनक किसे कहा जाता है?
- A.वर्गीज कुरियन
- B.एम. एस. स्वामीनाथन
- C.नॉर्मन बोरलॉग
- D.सी. सुब्रमण्यम
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वे वही आनुवंशिकीविद् थे जो मेक्सिको की बौनी गेहूं भारत लाए, भारतीय प्रजनकों के साथ मिलकर उसे यहां के अनुकूल बनाया और सरकार तथा किसानों को उसे अपनाने के लिए तैयार किया, इसीलिए उन्हें भारत में हरित क्रांति का जनक कहा जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में हरित क्रांति के पहले चरण की अगुआ फसल कौन सी थी?
- A.चावल
- B.गेहूं
- C.कपास
- D.गन्ना
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भारतीय किसानों को सबसे पहले जो अधिक उपज वाली किस्में मिलीं वे बौनी गेहूं थीं, और उन्हें उत्तर-पश्चिमी सिंचित मैदानों में बोया गया, जहां पानी और उर्वरक समय पर दिए जा सकते थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एशिया के सबसे बड़े कृषि विश्वविद्यालयों में गिना जाने वाला चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय कहां स्थित है?
- A.करनाल
- B.हिसार
- C.रोहतक
- D.कुरुक्षेत्र
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हरियाणा का कृषि विश्वविद्यालय राज्य बनने के शीघ्र बाद हिसार में स्थापित हुआ और बाद में उसका नाम चौधरी चरण सिंह के नाम पर रखा गया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत का राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान हरियाणा के किस नगर में है?
- A.हिसार
- B.करनाल
- C.पानीपत
- D.अंबाला
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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत मानद विश्वविद्यालय का दर्जा रखने वाले राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान का मुख्य परिसर करनाल में है, जो दुधारू गाय-भैंस प्रजनन, दूध प्रसंस्करण और डेयरी प्रौद्योगिकी पर कार्य करता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →हरियाणा की किस भैंस नस्ल को राज्य का काला सोना कहा जाता है?
- A.नीली-रावी
- B.मुर्रा
- C.जाफराबादी
- D.सुरती
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मुर्रा गहरी काली भैंस है, जिसके सींग छोटे और कसकर मुड़े होते हैं, और यह रोहतक, जींद, हिसार तथा आसपास के जिलों में पाली जाती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →हरियाणा की मुख्य नहर पश्चिमी यमुना नहर किस बैराज से निकलती है?
- A.ओखला बैराज
- B.हथनीकुंड बैराज
- C.भीमगोड़ा बैराज
- D.नरोरा बैराज
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यह बैराज यमुनानगर जिले में यमुना पर वहां बना है जहां नदी मैदान में प्रवेश करती है, और यह एक ओर हरियाणा की पश्चिमी यमुना नहर और दूसरी ओर उत्तर प्रदेश की पूर्वी यमुना नहर को जल देता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →हरियाणा में कपास मुख्यतः राज्य के किस भाग में उगाई जाती है?
- A.यमुनानगर और अंबाला के आसपास उत्तर-पूर्व
- B.सिरसा, फतेहाबाद और हिसार के आसपास दक्षिण-पश्चिम
- C.करनाल और कुरुक्षेत्र की मध्यवर्ती पट्टी
- D.शिवालिक की तलहटी
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यह हरियाणा का अधिक शुष्क भाग है, जहां वर्षा कम है, ग्रीष्म तीव्र है और मिट्टी हल्की है, और इन परिस्थितियों में कपास धान की तुलना में कहीं अधिक उपयुक्त है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →हरियाणा की मेरा पानी मेरी विरासत योजना किस उद्देश्य से आरंभ की गई?
- A.किसानों को धान छोड़कर भूजल बचाने के लिए प्रोत्साहित करना
- B.साठ वर्ष से ऊपर के किसानों को पेंशन देना
- C.हर जिले में शीतगृह बनाना
- D.गांवों में निःशुल्क बिजली कनेक्शन बांटना
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दशकों के धान-गेहूं चक्र ने मध्य हरियाणा में जलस्तर बहुत नीचे गिरा दिया है और अनेक ब्लॉक अतिदोहित श्रेणी में आ चुके हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →वीटा हरियाणा के किस उत्पाद से जुड़ा ब्रांड नाम है?
- A.दूध और दुग्ध उत्पाद
- B.सूती धागा
- C.सरसों का तेल
- D.बासमती चावल
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वीटा हरियाणा डेयरी विकास सहकारी फेडरेशन का ब्रांड है, जो गांव की समितियों से दूध एकत्र करता है और उसी नाम से दूध, घी, मक्खन, पनीर तथा मिठाइयां बेचता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →हरियाणा गाय की पहचान की मुख्य विशेषता है:
- A.लंबा और सकरा मुख
- B.छोटा और सकरा मुख
- C.लंबा और चौड़ा मुख
- D.छोटा और चौड़ा मुख
उत्तर देखें
हरियाणा रोहतक, हिसार, जींद और गुरुग्राम क्षेत्र की देशी गौ नस्ल है, जो दोहरे उपयोग की है, दूध देती है और जिसके बैल कभी उत्तर-पश्चिमी मैदानों के मानक भारवाहक पशु थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हरित क्रांति में हरियाणा इतना महत्वपूर्ण क्यों रहा?
क्योंकि नई तकनीक को जो चाहिए था वह सब यहां था: समतल भूमि, यमुना और सतलुज का नहरी जल, नलकूपों के लिए उथला भूजल और बौना गेहूं अपनाने को तैयार किसान। पंजाब तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ यह राज्य देश का अन्न अधिशेष क्षेत्र बन गया।
भारत में हरित क्रांति की अगुआ फसल कौन सी थी?
गेहूं। मेक्सिको में विकसित बौनी अधिक उपज वाली किस्मों ने सबसे पहले और सबसे तेज प्रतिक्रिया दी, इसलिए आरंभिक चरण को प्रायः गेहूं क्रांति कहा जाता है। चावल, मक्का और अन्य फसलें अपनी अधिक उपज वाली किस्मों के साथ बाद में आईं।
भारत में हरित क्रांति का जनक किसे कहा जाता है?
एम. एस. स्वामीनाथन को, जिन्होंने भारतीय कार्यक्रम का नेतृत्व किया और नई किस्मों को भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल बनाया। मेक्सिको की बौनी गेहूं विकसित करने वाले नॉर्मन बोरलॉग को विश्व में हरित क्रांति का जनक कहा जाता है, और उस समय के कृषि मंत्री सी. सुब्रमण्यम थे।
हरियाणा की किस भैंस नस्ल को काला सोना कहा जाता है?
मुर्रा को, जो कसकर मुड़े सींगों वाली गहरी काली भैंस है और मुख्यतः रोहतक, जींद तथा हिसार में पाली जाती है। यह भारत की सर्वाधिक दूध देने वाली भैंस है और स्थानीय नस्लों के सुधार के लिए अनेक राज्यों और देशों में ले जाई गई है।
करनाल में कौन से अनुसंधान संस्थान हैं?
राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान और राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो। हिसार में कृषि विश्वविद्यालय, पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय और भैंस अनुसंधान संस्थान हैं।
मेरा पानी मेरी विरासत योजना क्या है?
हरियाणा की वह योजना जिसमें जिन ब्लॉकों में जलस्तर तेजी से गिरा है वहां धान छोड़कर मक्का, बाजरा, दलहन, कपास या बागवानी लेने वाले किसान को प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसका उद्देश्य अधिक पानी मांगने वाली धान फसल से निकाला जाने वाला भूजल घटाना है।
स्रोत
- हरियाणा सांख्यिकीय सार: फसल प्रतिरूप और सिंचाई — कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, हरियाणा सरकार
- अधिक उपज वाली किस्म कार्यक्रम और खाद्यान्न उत्पादन की वृद्धि — भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद
- उत्तर-पश्चिमी मैदान की पंजीकृत भैंस और गौ नस्लें — राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, करनाल





