पानीपत और तराइन के युद्ध: वर्ष और विजेता
हरियाणा सामान्य ज्ञान नोट्स: 1191 और 1192 के तराइन के दो युद्ध तथा 1526, 1556 और 1761 के पानीपत के तीन युद्ध, उनके सेनानायक, परिणाम और स्मारक।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

भारत में दिल्ली का भाग्य जितनी बार पानीपत ने तय किया, उतना किसी अन्य जिले ने नहीं, और तराइन जैसा कोई गाँव दो युद्धों के लिए याद नहीं किया जाता। दोनों स्थान हरियाणा के खुले और सूखे मैदान में उस पुराने मार्ग पर हैं जो उत्तर-पश्चिम के दर्रों से यमुना के साथ-साथ दिल्ली तक आता है; इस मैदान में सेना को रोकने वाली कोई नदी या पहाड़ी नहीं है। काबुल या गजनी से आने वाले आक्रमणकारी का सामना यहीं, राजधानी से लगभग अस्सी किलोमीटर पहले करना पड़ता था, और जो यहाँ हारा वह दिल्ली हार गया। हरियाणा की परीक्षाएँ, एसएससी, रेलवे और राज्य परीक्षाएँ इन पाँच युद्धों से वर्ष, विजेता, पराजित और परिणाम पूछती हैं, इसलिए इन्हें एक तालिका की तरह और फिर कहानी की तरह याद कीजिए।
तराइन के दो युद्ध, 1191 और 1192
तराइन, अर्थात करनाल जिले में थानेसर के निकट आज का तरावड़ी, अजमेर और दिल्ली के पृथ्वीराज चौहान तृतीय तथा मुहम्मद गोरी के बीच युद्ध का स्थल बना। 1191 के तराइन के प्रथम युद्ध में राजपूत सेना ने तुर्क सेना का मध्य भाग तोड़ दिया, दिल्ली के गोविंद राय ने गोरी को घायल किया और उसे युद्धक्षेत्र से उठाकर ले जाया गया; चौहानों ने पीछा करने के बजाय उसे जाने दिया। गोरी अगले वर्ष बड़ी और अधिक अनुशासित सेना के साथ लौटा। 1192 के तराइन के द्वितीय युद्ध में उसने घुड़सवार तीरंदाजों और छल से पीछे हटने की चाल से भारी राजपूत घुड़सवार सेना की पंक्ति बिगाड़ दी और फिर उसे नष्ट कर दिया। पृथ्वीराज बंदी बनाकर मार डाले गए, गोविंद राय युद्ध में मारे गए और दिल्ली का मार्ग खुल गया। तराइन का द्वितीय युद्ध मध्यकालीन भारतीय इतिहास का निर्णायक मोड़ माना जाता है, क्योंकि उत्तर भारत में तुर्क शासन इसी से आरंभ होता है; गोरी ने 1194 में चंदावर में कन्नौज के जयचंद को हराकर यह काम पूरा किया।
पानीपत का प्रथम युद्ध, 21 अप्रैल 1526
काबुल के तैमूरवंशी शासक बाबर का सामना 21 अप्रैल 1526 को लोदी वंश के अंतिम सुल्तान इब्राहिम लोदी से हुआ। बाबर की सेना बहुत छोटी थी, पर उसके पास दो बड़ी बातें थीं: गाड़ियों की पंक्ति के पीछे लगे तोपखाने को चलाने वाले उस्ताद अली कुली और मुस्तफा रूमी, तथा तुलुगमा पद्धति, जिसमें सेना को टुकड़ियों में बाँटकर शत्रु को दोनों पार्श्व से घेरा जाता था। इब्राहिम लोदी युद्धक्षेत्र में मारा गया और वह दिल्ली का एकमात्र सुल्तान था जिसकी मृत्यु युद्ध में हुई; बाबर ने दिल्ली और आगरा पर अधिकार कर लिया। इस युद्ध से भारत में मुगल शासन की स्थापना हुई। विजय की स्मृति में बाबर ने पानीपत में काबुली बाग मस्जिद बनवाई और इब्राहिम लोदी का मकबरा आज भी नगर में है।
पानीपत का द्वितीय युद्ध, 5 नवंबर 1556
हुमायूँ की मृत्यु के बाद मुगल दावा तेरह वर्ष के बालक अकबर और उसके संरक्षक बैरम खान पर टिका था। उनके सामने सूर वंश का सेनापति हेमू था, जिसने आगरा और दिल्ली जीतकर विक्रमादित्य की उपाधि के साथ राज्याभिषेक कराया था। 5 नवंबर 1556 को हेमू की सेना बड़ी थी और उसके पास युद्ध हाथियों की पंक्ति थी; वह जीत भी रहा था, पर एक तीर उसकी आँख में लगा और अचेत अवस्था में उसे ले जाते ही सेना बिखर गई, बाद में उसे मार डाला गया। इस युद्ध ने मुगल साम्राज्य को पुनः स्थापित और सुरक्षित किया, इसलिए परीक्षा इसे अकबर के साथ नहीं, बैरम खान के साथ जोड़कर पूछती है।
पानीपत का तृतीय युद्ध, 14 जनवरी 1761
तीनों में अंतिम युद्ध 14 जनवरी 1761 को सदाशिवराव भाऊ के नेतृत्व वाली मराठा सेना और अफगान शासक अहमद शाह अब्दाली के बीच हुआ, जिसे अहमद शाह दुर्रानी भी कहा जाता है। अब्दाली के साथ रुहेला सरदार नजीब-उद-दौला और अवध का शुजा-उद-दौला थे, जबकि मराठे रसद से कटे हुए और उत्तर भारत में मित्रहीन थे, इसलिए उन्हें आक्रमण करना पड़ा। इब्राहिम खान गार्दी का तोपखाना अच्छा था पर पंक्तियाँ मिल जाने पर वह काम न आया। पेशवा का पुत्र विश्वासराव मारा गया, सदाशिवराव भाऊ युद्ध में लापता हो गए और मराठा सेनानायकों की एक पूरी पीढ़ी एक ही दिन में समाप्त हो गई। अब्दाली शासन करने के लिए रुका नहीं, इसलिए इस युद्ध ने भारत को नया स्वामी नहीं दिया; इसने केवल उस समय मराठा शक्ति तोड़ दी जब वह दिल्ली के सबसे निकट थी और मैदान ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए खाली कर दिया। पानीपत के छोर पर काला आम स्मारक इस युद्धक्षेत्र का चिह्न है।
एक दृष्टि में पाँच युद्ध
| युद्ध | वर्ष | विजेता | पराजित |
|---|---|---|---|
| तराइन का प्रथम युद्ध | 1191 | पृथ्वीराज चौहान तृतीय | मुहम्मद गोरी |
| तराइन का द्वितीय युद्ध | 1192 | मुहम्मद गोरी | पृथ्वीराज चौहान तृतीय |
| पानीपत का प्रथम युद्ध | 1526 | बाबर | इब्राहिम लोदी |
| पानीपत का द्वितीय युद्ध | 1556 | अकबर, नेतृत्व बैरम खान | हेमू |
| पानीपत का तृतीय युद्ध | 1761 | अहमद शाह अब्दाली | सदाशिवराव भाऊ के मराठे |
आज के युद्धक्षेत्र
पानीपत अपने तीनों युद्ध अपने स्मारकों में सहेजे हुए है: 1527 की काबुली बाग मस्जिद, इब्राहिम लोदी का मकबरा, हेमू की मृत्यु का चिह्न बनी समाधि, तृतीय युद्ध का काला आम स्तंभ और उसके पास बना पानीपत युद्ध संग्रहालय। करनाल जिले का तरावड़ी ग्रैंड ट्रंक रोड पर बसा छोटा कस्बा है, जहाँ 1191 और 1192 का नाम के सिवा कुछ शेष नहीं, और परीक्षा में यह नाम पुराने रूप तराइन में ही लिखा जाता है। हरियाणा की परीक्षाओं में यह प्रश्न सामान्य है कि कौन सा युद्धक्षेत्र किस जिले में है: तीनों पानीपत युद्ध पानीपत जिले में और तराइन करनाल जिले में।
परीक्षा की दृष्टि से
हरियाणा सीईटी, एचएसएससी, एचपीएससी, एसएससी और रेलवे इन पाँच युद्धों को मिलान के रूप में पूछते हैं, इसलिए पहले वर्ष, विजेता और पराजित याद कीजिए: 1191 में पृथ्वीराज से गोरी की पराजय, 1192 में गोरी से पृथ्वीराज की, 1526 में बाबर से इब्राहिम लोदी की, 1556 में बैरम खान के नेतृत्व में अकबर से हेमू की, और 1761 में अब्दाली से सदाशिवराव भाऊ की। दूसरा स्तर व्यक्ति और स्थान का है: गोरी को घायल करने वाला गोविंद राय, तोपखाने के उस्ताद अली कुली और मुस्तफा रूमी, तुलुगमा, हेमू की विक्रमादित्य उपाधि, इब्राहिम खान गार्दी और विश्वासराव, काबुली बाग मस्जिद, इब्राहिम लोदी का मकबरा तथा काला आम। भ्रम इनमें होता है: तराइन के दोनों वर्ष बदल जाना, 1526 के स्थान पर 1527 का खानवा, 1556 के सेनापति के रूप में बैरम खान के बजाय अकबर, 1761 में अब्दाली के स्थान पर नादिर शाह, और तराइन को करनाल के बजाय पानीपत जिले में बता देना।
महत्वपूर्ण तथ्य
| तराइन आज | तरावड़ी, थानेसर के निकट, हरियाणा के करनाल जिले में |
|---|---|
| तराइन का प्रथम युद्ध | 1191; पृथ्वीराज चौहान तृतीय ने मुहम्मद गोरी को हराया |
| तराइन का द्वितीय युद्ध | 1192; गोरी ने पृथ्वीराज चौहान तृतीय को हराकर मार डाला |
| चंदावर का युद्ध | 1194; गोरी ने कन्नौज के जयचंद को हराया |
| पानीपत का प्रथम युद्ध | 21 अप्रैल 1526; बाबर ने इब्राहिम लोदी को हराया |
| बाबर के तोपची | उस्ताद अली कुली और मुस्तफा रूमी, गाड़ियों की पंक्ति के पीछे |
| बाबर की युद्धनीति | तुलुगमा, सेना को घेरने वाली टुकड़ियों में बाँटना |
| पानीपत का द्वितीय युद्ध | 5 नवंबर 1556; अकबर की ओर से बैरम खान ने हेमू को हराया |
| हेमू की उपाधि | विक्रमादित्य, दिल्ली जीतने के बाद धारण की |
| पानीपत का तृतीय युद्ध | 14 जनवरी 1761; अहमद शाह अब्दाली ने मराठों को हराया |
| 1761 के मराठा नायक | सदाशिवराव भाऊ, विश्वासराव और इब्राहिम खान गार्दी |
| अब्दाली के सहयोगी | रुहेलों का नजीब-उद-दौला और अवध का शुजा-उद-दौला |
| काबुली बाग मस्जिद | 1526 के बाद बाबर द्वारा पानीपत में; नाम काबुली बेगम पर |
| काला आम | पानीपत के तृतीय युद्ध का स्मारक, पास में युद्ध संग्रहालय |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
निम्नलिखित राजपूत शासकों में से किसने 1191 ईस्वी में तराइन के प्रथम युद्ध में मुहम्मद गोरी को पराजित किया?
- A.मालदेव राठौड़
- B.राणा कुंभा
- C.पृथ्वीराज चौहान
- D.बप्पा रावल
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अजमेर और दिल्ली के चाहमान शासक पृथ्वीराज चौहान तृतीय ने 1191 में तराइन, अर्थात हरियाणा के करनाल जिले के आज के तरावड़ी, में मुहम्मद गोरी का सामना किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →तराइन का द्वितीय युद्ध, जिसमें मुहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान को पराजित किया, किस वर्ष हुआ?
- A.1191
- B.1192
- C.1194
- D.1206
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पराजय के एक वर्ष बाद गोरी घुड़सवार तीरंदाजों की बड़ी सेना लेकर तराइन लौटा, छल से पीछे हटने की चाल चलकर भारी राजपूत घुड़सवार सेना की पंक्ति बिगाड़ी और फिर उसे नष्ट कर दिया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1526 का पानीपत का प्रथम युद्ध बाबर और किस शासक के बीच हुआ?
- A.इब्राहिम लोदी
- B.सिकंदर लोदी
- C.राणा सांगा
- D.हेमू
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21 अप्रैल 1526 को बाबर ने लोदी वंश के अंतिम सुल्तान इब्राहिम लोदी को हराया। उसने गाड़ियों की पंक्ति के पीछे उस्ताद अली कुली और मुस्तफा रूमी के तोपखाने तथा तुलुगमा पद्धति का प्रयोग किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1556 के पानीपत के द्वितीय युद्ध में बालक अकबर की ओर से मुगल सेना का नेतृत्व किसने किया?
- A.बैरम खान
- B.तारदी बेग खान
- C.मुनीम खान
- D.अब्दुल रहीम खान-ए-खानाँ
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हुमायूँ की मृत्यु के समय अकबर लगभग तेरह वर्ष का था, इसलिए हेमू के विरुद्ध अभियान उसके संरक्षक बैरम खान ने चलाया, जिसने काबुल लौटने के बजाय पानीपत तक बढ़ने का निर्णय लिया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पानीपत के द्वितीय युद्ध से कुछ पहले दिल्ली जीतने के बाद हेमू ने कौन सी उपाधि धारण की?
- A.सिकंदर शाह
- B.विक्रमादित्य
- C.गाजी
- D.आदिल शाह
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हेमू, जिसे हेमचंद्र भी कहा जाता है, व्यापारी और सूर वंश के अधिकारी से उठकर उसका प्रमुख सेनापति बना, 1556 में दिल्ली के मुगल सूबेदार को हराया और वहीं प्राचीन भारतीय सम्राट उपाधि विक्रमादित्य के साथ राज्याभिषेक कराया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1761 के पानीपत के तृतीय युद्ध में मराठा सेना का नेतृत्व किसने किया?
- A.सदाशिवराव भाऊ
- B.बालाजी बाजीराव
- C.महादजी सिंधिया
- D.मल्हारराव होलकर
उत्तर देखें
पेशवा बालाजी बाजीराव ने अपने चचेरे भाई सदाशिवराव भाऊ को सेनापति बनाकर उत्तर भेजा और अभियान का नाममात्र प्रमुख पेशवा का पुत्र विश्वासराव था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1761 का पानीपत का तृतीय युद्ध किस शासक ने जीता?
- A.नादिर शाह
- B.अहमद शाह अब्दाली
- C.शाह आलम द्वितीय
- D.नजीब-उद-दौला
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कंधार में अफगान राज्य की स्थापना करने वाले अब्दाली, जिसे अहमद शाह दुर्रानी भी कहते हैं, ने 14 जनवरी 1761 को रुहेला सरदार नजीब-उद-दौला और अवध के शुजा-उद-दौला की सहायता से मराठों को पानीपत में पराजित किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पानीपत की काबुली बाग मस्जिद किस शासक की विजय की स्मृति में बनवाई गई?
- A.बाबर
- B.अकबर
- C.शेरशाह सूरी
- D.अहमद शाह अब्दाली
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बाबर ने 1526 के पानीपत के प्रथम युद्ध के बाद पानीपत में काबुली बाग मस्जिद और बाग बनवाया, जिसका नाम उसकी पत्नी काबुली बेगम के नाम पर पड़ा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पानीपत जिले का काला आम स्मारक किस युद्ध के युद्धक्षेत्र का चिह्न है?
- A.पानीपत का प्रथम युद्ध
- B.पानीपत का द्वितीय युद्ध
- C.पानीपत का तृतीय युद्ध
- D.तराइन का द्वितीय युद्ध
उत्तर देखें
पानीपत नगर के छोर पर स्थित काला आम वही स्थान है जहाँ 14 जनवरी 1761 को मराठों और अफगानों के बीच युद्ध हुआ।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत पर आक्रमण करने वाला पहला मुस्लिम आक्रमणकारी कौन था?
- A.फिरदौसी शाह
- B.मुहम्मद गोरी
- C.मुहम्मद बिन कासिम
- D.महमूद गजनवी
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अरब सेनापति मुहम्मद बिन कासिम ने 712 ईस्वी में इराक के उमय्यद सूबेदार की ओर से सिंध पर आक्रमण किया, रावर में राजा दाहिर को हराकर मार डाला और सिंध तथा मुल्तान पर अधिकार कर लिया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तराइन कहाँ है और हरियाणा के किस जिले में पड़ता है?
तराइन आज करनाल जिले में ग्रैंड ट्रंक रोड पर थानेसर के निकट बसा तरावड़ी कस्बा है। वहाँ 1191 और 1192 में लड़े गए दो युद्धों ने तय किया कि तुर्क सेनाएँ दिल्ली तक पहुँचेंगी या नहीं, और परीक्षा में पुराना नाम तराइन ही प्रयोग होता है।
तराइन के द्वितीय युद्ध को निर्णायक मोड़ क्यों कहा जाता है?
क्योंकि 1192 में पृथ्वीराज चौहान की पराजय ने दिल्ली के मार्ग पर सबसे बड़ी राजपूत शक्ति समाप्त कर दी। इसके बाद मुहम्मद गोरी ने 1194 में चंदावर जीता और उसके सेनापति कुतुबुद्दीन ऐबक ने दिल्ली सल्तनत की स्थापना की, इसलिए उत्तर भारत में तुर्क शासन इसी युद्ध से गिना जाता है।
पानीपत के प्रथम युद्ध में बाबर की विजय का कारण क्या था?
छोटी पर अधिक कुशल सेना। बाबर ने गाड़ियों की पंक्ति के पीछे उस्ताद अली कुली और मुस्तफा रूमी के तोपखाने लगाए, तुलुगमा पद्धति से लोदी सेना को दोनों पार्श्व से घेरा और कुछ घंटों में तोड़ दिया। इब्राहिम लोदी मारा गया और वह युद्ध में मरने वाला दिल्ली का एकमात्र सुल्तान था।
1556 का पानीपत का द्वितीय युद्ध किनके बीच हुआ?
तेरह वर्ष के अकबर की सेना, जिसका नेतृत्व संरक्षक बैरम खान कर रहा था, और हेमू के बीच, जो सूर वंश का सेनापति था और दिल्ली जीतकर विक्रमादित्य उपाधि से राज्याभिषेक करा चुका था। हेमू की आँख में तीर लगा, उसकी सेना बिखर गई और मुगल साम्राज्य पुनः स्थापित हो गया।
पानीपत के तृतीय युद्ध का परिणाम क्या रहा?
अहमद शाह अब्दाली ने 14 जनवरी 1761 को मराठों को हराया, जिसमें विश्वासराव और मराठा सेनानायकों की एक पूरी पीढ़ी मारी गई। अब्दाली शासन करने के बजाय अफगानिस्तान लौट गया, इसलिए दिल्ली किसी नई शक्ति के हाथ नहीं आई; मराठा विस्तार रुक गया और ईस्ट इंडिया कंपनी का मार्ग खुल गया।
स्रोत
- हमारे अतीत II (कक्षा सात), दिल्ली के सुल्तान और मुगल साम्राज्य अध्याय — एनसीईआरटी
- काबुली बाग मस्जिद और इब्राहिम लोदी का मकबरा, पानीपत, राष्ट्रीय महत्व के स्मारक — भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण
- इतिहास और दर्शनीय स्थल, पानीपत जिला पोर्टल — हरियाणा सरकार





