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मध्य प्रदेश की जलवायु और मिट्टियां: वर्षा और मृदा प्रकार

राज्य परीक्षाओं के लिए मध्य प्रदेश की जलवायु तथा मिट्टियां: कर्क रेखा, वर्षा पट्टियां, काली, लाल, जलोढ़ और लैटराइट मिट्टी, अपरदन, फसलें और एमसीक्यू।

लेखक · प्रकाशित · 4 मिनट

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मध्य प्रदेश की जलवायु और मिट्टियां: वर्षा और मृदा प्रकार — GK24 title card
मध्य प्रदेश की जलवायु और मिट्टियां: वर्षा और मृदा प्रकार — GK24 title card

मध्य प्रदेश देश के मध्य में है, जहां न समुद्र तट है और न हिमपात, इसलिए इसकी जलवायु सामान्य उष्णकटिबंधीय मानसूनी प्रकार की है: गर्म शुष्क ग्रीष्म, लगभग तीन महीने की वर्षा ऋतु और छोटी सुखद शीत ऋतु। कर्क रेखा लगभग राज्य के मध्य से होकर जाती है और रतलाम, उज्जैन, भोपाल, विदिशा, सागर, जबलपुर तथा शहडोल से निकलती है, और यही पहला तथ्य प्रत्येक राज्य प्रश्नपत्र पूछता है। वर्षा मुख्य रूप से दक्षिण-पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा से होती है, जो पूर्व से राज्य में प्रवेश करती है, और यही एक तथ्य पूरे वर्षा नक्शे को समझा देता है: पूर्वी तथा दक्षिणी जिले आर्द्र हैं और उत्तर-पश्चिम की ओर वर्षा घटती जाती है।

जलवायु और वर्षा

मध्य प्रदेश में वर्षा दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की ओर घटती है। सर्वाधिक आर्द्र क्षेत्र पूर्व में तथा सतपुड़ा पर है, जहां बालाघाट, मंडला, डिंडोरी, सीधी और पचमढ़ी के आसपास की पहाड़ियों में 1,400 मिलीमीटर से काफी अधिक वर्षा होती है; सबसे शुष्क क्षेत्र उत्तर-पश्चिम का ग्वालियर तथा चंबल अंचल है, जहां भिंड, मोरेना, ग्वालियर और शिवपुरी में लगभग 700 से 800 मिलीमीटर वर्षा होती है। राज्य का औसत लगभग 1,000 से 1,100 मिलीमीटर बैठता है, जिसका लगभग पूरा भाग जून के मध्य से सितंबर के अंत के बीच गिरता है।

उत्तर में ग्रीष्म कठोर होती है और ग्वालियर, भिंड तथा मोरेना में लू कहलाने वाली गर्म शुष्क हवा चलती है, जबकि सतपुड़ा और मैकल की पहाड़ियां ठंडी रहती हैं। सतपुड़ा का पचमढ़ी राज्य का एकमात्र पर्वतीय स्थल है और वहीं राज्य का सर्वोच्च बिंदु धूपगढ़ है, इसी कारण वह जलवायु के अध्याय में भी आता है और भू-आकृति के अध्याय में भी। शीत ऋतु में आकाश स्वच्छ और मौसम शुष्क रहता है, और कोई पश्चिमी विक्षोभ गुजरने पर हल्की वर्षा हो जाती है, जो खड़े गेहूं तथा चने के लिए लाभकारी होती है।

अंचलवर्षाजिले
आर्द्र पूर्व तथा सतपुड़ा1,400 मिलीमीटर से अधिकबालाघाट, मंडला, डिंडोरी, सीधी, पचमढ़ी क्षेत्र
मध्यम आर्द्र मध्य तथा दक्षिण1,000 से 1,400 मिलीमीटरजबलपुर, बैतूल, छिंदवाड़ा, होशंगाबाद पट्टी
मालवा तथा निमाड़800 से 1,000 मिलीमीटरइंदौर, उज्जैन, देवास, खरगोन
शुष्क उत्तर-पश्चिम700 से 800 मिलीमीटरभिंड, मोरेना, ग्वालियर, शिवपुरी

मध्य प्रदेश की मिट्टियां

राज्य की मिट्टी अपने नीचे की चट्टान का अनुसरण करती है। मध्य प्रदेश के बहुत बड़े भाग में वह चट्टान दक्कन ट्रैप का बेसाल्ट है, और उसके अपक्षय से काली मिट्टी बनी है, जिसे रेगुर या कपास की मिट्टी भी कहते हैं, और वही राज्य के सर्वाधिक क्षेत्र पर फैली है। यह चिकनी है, लोहा, चूना तथा मैग्नीशियम से समृद्ध परंतु नाइट्रोजन और जैव पदार्थ में निर्बल है, गीली होने पर फूलकर चिपचिपी हो जाती है, ग्रीष्म में गहरी दरक जाती है और इस प्रकार स्वयं की जुताई कर लेती है; नमी रोकने के कारण यही मिट्टी राज्य की सोयाबीन, कपास, गेहूं तथा चने की फसल संभालती है। सबसे गहरी काली मिट्टी नर्मदा घाटी और मालवा के पठार में है, इसी कारण वह पट्टी राज्य का अन्न भंडार और देश के सोयाबीन क्षेत्र का हृदय है।

मिट्टीकहां पाई जाती हैफसलें
काली मिट्टी, गहरी तथा मध्यममालवा पठार, नर्मदा घाटी, निमाड़, सतपुड़ासोयाबीन, कपास, गेहूं, चना
लाल-पीली मिट्टीबघेलखंड तथा पूर्व: रीवा, सतना, सीधी, शहडोल, मंडलाचावल, मोटे अनाज, दलहन
जलोढ़ मिट्टीउत्तरी मैदान: ग्वालियर, भिंड, मोरेना, श्योपुरगेहूं, सरसों, चना
मिश्रित लाल-काली मिट्टीबैतूल, छिंदवाड़ा, बालाघाट पट्टीमक्का, ज्वार, दलहन
लैटराइट मिट्टीमंडला, बालाघाट, शहडोल, सीधी का अधिक वर्षा वाला पठारचावल, मोटे अनाज, बागान
कंकरीली तथा पथरीली मिट्टीविंध्य तथा सतपुड़ा के तीव्र ढालवन, चराई

मिट्टी को क्या हानि पहुंचाता है

  • भिंड, मोरेना तथा श्योपुर में चंबल के साथ अवनालिका अपरदन, जहां बीहड़ कहे जाने वाले क्षेत्र सदियों से अच्छी कृषि भूमि को खाते आए हैं।
  • विंध्य तथा सतपुड़ा के ढालों पर परत अपरदन, जहां वन कट जाने से पहली तेज वर्षा में ही ऊपरी मिट्टी बह जाती है।
  • काली मिट्टी में नाइट्रोजन तथा जैव पदार्थ की कमी, जिसमें ये दोनों स्वभाव से ही कम होते हैं, इसलिए फसल खाद और फसल चक्र पर निर्भर रहती है।
  • नहरी क्षेत्रों के कुछ भागों में जल भराव तथा लवण, जहां सिंचाई का जल भारी चिकनी मिट्टी पर अधिक समय तक ठहर जाता है।

परीक्षा के लिए सूची से अधिक मूल्य इस तर्क का है: बेसाल्ट से काली मिट्टी बनती है और काली मिट्टी से सोयाबीन, कपास तथा गेहूं; पूर्व की प्राचीन रवेदार चट्टान से लाल-पीली मिट्टी बनती है और उससे चावल; पठार पर अधिक वर्षा मिट्टी का निक्षालन कर उसे लैटराइट बना देती है; और उत्तर की नदियां जलोढ़ बिछाती हैं और फिर उसी को काटकर बीहड़ बना देती हैं।

परीक्षा की दृष्टि से

प्रश्नपत्र वर्षा का कोई चरम, मिट्टी से अंचल का मेल और कर्क रेखा पूछता है। बालाघाट तथा मंडला को सर्वाधिक आर्द्र और ग्वालियर-चंबल अंचल को सबसे शुष्क याद रखें, तथा ढाल भी ध्यान में रखें, दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम, क्योंकि कारण पूछने वाला प्रश्न भी आ सकता है। मिट्टियों में जनक चट्टान को मिट्टी के साथ पकड़ें: मालवा तथा नर्मदा घाटी में बेसाल्ट के साथ काली मिट्टी, बघेलखंड में नाइस और ग्रेनाइट के साथ लाल-पीली मिट्टी, उत्तर में नदी की गाद के साथ जलोढ़ मिट्टी तथा मंडला-बालाघाट में अधिक वर्षा के साथ लैटराइट। फसलों की जोड़ियां इसके बाद अपने आप बनती हैं, काली मिट्टी पर सोयाबीन तथा कपास, लाल-पीली पर चावल, उत्तरी जलोढ़ पर गेहूं और सरसों।

महत्वपूर्ण तथ्य

कर्क रेखारतलाम, उज्जैन, भोपाल, विदिशा, सागर, जबलपुर तथा शहडोल से निकलती है
मुख्य वर्षा शाखादक्षिण-पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा, पूर्व से
सर्वाधिक आर्द्र जिलेबालाघाट, मंडला, डिंडोरी, सीधी तथा पचमढ़ी क्षेत्र, 1,400 मिलीमीटर से अधिक
सबसे शुष्क जिलेभिंड, मोरेना, ग्वालियर, शिवपुरी, लगभग 700 से 800 मिलीमीटर
राज्य का औसत वर्षालगभग 1,000 से 1,100 मिलीमीटर, जून मध्य से सितंबर अंत तक
एकमात्र पर्वतीय स्थलपचमढ़ी, सतपुड़ा में, साथ में राज्य का सर्वोच्च बिंदु धूपगढ़
सर्वाधिक क्षेत्र वाली मिट्टीकाली मिट्टी, दक्कन ट्रैप के बेसाल्ट से
सबसे गहरी काली मिट्टीनर्मदा घाटी तथा मालवा पठार
काली मिट्टी का रसायनलोहा, चूना तथा मैग्नीशियम से समृद्ध, नाइट्रोजन और जैव पदार्थ में निर्बल
लाल-पीली मिट्टीबघेलखंड तथा पूर्व: रीवा, सतना, सीधी, शहडोल, मंडला
जलोढ़ मिट्टीउत्तर में ग्वालियर, भिंड, मोरेना तथा श्योपुर
लैटराइट मिट्टीमंडला, बालाघाट, शहडोल तथा सीधी, जहां वर्षा सर्वाधिक है
अवनालिका अपरदनभिंड, मोरेना तथा श्योपुर में चंबल के बीहड़

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.मध्य प्रदेशआसान

कर्क रेखा मध्य प्रदेश के निम्नलिखित में से किस नगर से होकर निकलती है?

  1. A.इंदौर
  2. B.भोपाल
  3. C.ग्वालियर
  4. D.रीवा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. भोपाल

कर्क रेखा मध्य प्रदेश को लगभग मध्य से काटती है और रतलाम, उज्जैन, भोपाल, विदिशा, सागर, जबलपुर तथा शहडोल से होकर जाती है, इसलिए राज्य उससे लगभग दो भागों में बंट जाता है और मध्य प्रदेश के उतने जिले इस रेखा से छूते हैं जितने किसी अन्य राज्य के नहीं।

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Q2.मध्य प्रदेशआसान

मध्य प्रदेश के सर्वाधिक क्षेत्र पर कौन सी मिट्टी फैली है?

  1. A.जलोढ़ मिट्टी
  2. B.काली मिट्टी
  3. C.लैटराइट मिट्टी
  4. D.लाल-पीली मिट्टी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. काली मिट्टी

दक्कन ट्रैप का बेसाल्ट राज्य के बहुत बड़े भाग के नीचे है, मालवा के पठार से नर्मदा घाटी तक और निमाड़ तथा सतपुड़ा तक, और उसके अपक्षय से बनी काली मिट्टी, जिसे रेगुर या कपास की मिट्टी भी कहते हैं, राज्य के सर्वाधिक क्षेत्र पर है।

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Q3.मध्य प्रदेशमध्यम

मध्य प्रदेश की काली मिट्टी मुख्य रूप से किस चट्टान के अपक्षय से बनी है?

  1. A.ग्रेनाइट
  2. B.बलुआ पत्थर
  3. C.दक्कन ट्रैप का बेसाल्ट
  4. D.चूना पत्थर
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. दक्कन ट्रैप का बेसाल्ट

क्रिटेशियस के अंत में मध्य तथा पश्चिमी भारत पर फैले लावा प्रवाहों ने बेसाल्ट की मोटी चादरें छोड़ दीं, और मानसूनी जलवायु में बेसाल्ट का अपक्षय होने पर लोहा, चूना तथा मैग्नीशियम से समृद्ध बारीक चिकनी मिट्टी बनती है, और वही मालवा, नर्मदा घाटी तथा निमाड़ की काली मिट्टी है।

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Q4.मध्य प्रदेशमध्यम

मध्य प्रदेश में लाल-पीली मिट्टी मुख्य रूप से किस अंचल में पाई जाती है?

  1. A.मालवा पठार
  2. B.नर्मदा घाटी
  3. C.बघेलखंड तथा पूर्वी जिले
  4. D.निमाड़
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. बघेलखंड तथा पूर्वी जिले

वहां प्राचीन रवेदार चट्टानें, नाइस तथा ग्रेनाइट, सतह पर हैं, और उनके अपक्षय से निकला लोहा मिट्टी को लाल रंग देता है, तथा अधिक वर्षा से लोहा जलयोजित होने पर वह पीली हो जाती है।

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Q5.मध्य प्रदेशमध्यम

मध्य प्रदेश के किस अंचल में औसत वार्षिक वर्षा सबसे कम होती है?

  1. A.बालाघाट तथा मंडला
  2. B.ग्वालियर तथा चंबल
  3. C.जबलपुर तथा मंडला
  4. D.बैतूल तथा छिंदवाड़ा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. ग्वालियर तथा चंबल

कारण यह है कि राज्य की वर्षा अधिकांशत: मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा से होती है, जो पूर्व से प्रवेश करती है और भीतर बढ़ते-बढ़ते क्षीण होती जाती है, इसलिए सुदूर उत्तर-पश्चिमी कोना सबसे शुष्क रहता है।

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Q6.मध्य प्रदेशआसान

मध्य प्रदेश का एकमात्र पर्वतीय स्थल पचमढ़ी तथा राज्य का सर्वोच्च बिंदु धूपगढ़ किस श्रेणी में हैं?

  1. A.विंध्य
  2. B.सतपुड़ा
  3. C.मैकल
  4. D.कैमूर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सतपुड़ा

पचमढ़ी नर्मदा के दक्षिण में सतपुड़ा श्रेणी के एक पठार पर है, और उसके पास लगभग 1,350 मीटर ऊंचा धूपगढ़ मध्य प्रदेश का सर्वोच्च बिंदु है; इसी ऊंचाई से उस स्थान को ठंडी जलवायु, अधिक वर्षा और उसके चारों ओर का जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र मिला है।

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Q7.मध्य प्रदेशमध्यम

मध्य प्रदेश में जलोढ़ मिट्टी मुख्य रूप से राज्य के किस भाग में मिलती है?

  1. A.ग्वालियर, भिंड तथा मोरेना का उत्तरी मैदान
  2. B.मालवा पठार
  3. C.सतपुड़ा श्रेणी
  4. D.बघेलखंड
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. ग्वालियर, भिंड तथा मोरेना का उत्तरी मैदान

यह राज्य का एकमात्र वास्तविक जलोढ़ क्षेत्र है, वहां की सबसे उपजाऊ मिट्टी है और उसमें गेहूं, सरसों तथा चना होते हैं।

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Q8.मध्य प्रदेशआसान

मालवा पठार की काली मिट्टी से सबसे अधिक निकटता से जुड़ी फसल कौन है?

  1. A.चावल
  2. B.सोयाबीन
  3. C.जूट
  4. D.चाय
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सोयाबीन

मालवा की गहरी काली मिट्टी मानसून के बीच के अंतरालों में भी नमी रोक लेती है, और सोयाबीन को ठीक इसी की आवश्यकता होती है, तथा यह फसल इंदौर, उज्जैन, देवास और धार में इतनी फैली कि मध्य प्रदेश सोया राज्य कहा जाने लगा; वही मिट्टी कपास, गेहूं तथा चना…

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Q9.मध्य प्रदेशमध्यम

भिंड, मोरेना तथा श्योपुर में कृषि भूमि को नष्ट करने वाले बीहड़ किस नदी तंत्र ने काटे हैं?

  1. A.नर्मदा
  2. B.ताप्ती
  3. C.चंबल
  4. D.सोन
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. चंबल

चंबल मुलायम जलोढ़ में से उत्तर की ओर यमुना तक बहती है, और मानसून का बहाव उसमें नालियां काट देता है, जो हर वर्ष गहरी तथा चौड़ी होकर बीहड़ बनाती जाती हैं, जो कृषि भूमि को निगल लेते हैं और जिनसे इस अंचल को एक समय डाकुओं की शरणस्थली की…

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Q10.मध्य प्रदेशकठिन

मध्य प्रदेश में लैटराइट मिट्टी मुख्य रूप से किन जिलों में मिलती है?

  1. A.इंदौर, उज्जैन तथा देवास
  2. B.भिंड, मोरेना तथा श्योपुर
  3. C.मंडला, बालाघाट तथा शहडोल
  4. D.खरगोन, खंडवा तथा बड़वानी
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. मंडला, बालाघाट तथा शहडोल

लैटराइट वहां बनती है जहां अधिक वर्षा और गर्म तापमान मिट्टी से सिलिका तथा क्षार बहा देते हैं और लोहे तथा एल्युमिनियम के ऑक्साइड पीछे छोड़ जाते हैं, इसलिए यह पूर्वी मध्य प्रदेश के उस ऊंचे पठार पर मिलती है जहां वर्षा 1,400 मिलीमीटर से अधिक होती है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्क रेखा मध्य प्रदेश के किन नगरों से निकलती है?

यह राज्य को लगभग मध्य से काटती है और रतलाम, उज्जैन, भोपाल, विदिशा, सागर, जबलपुर तथा शहडोल से होकर जाती है, इसलिए मध्य प्रदेश इस रेखा से लगभग दो भागों में बंट जाता है।

मध्य प्रदेश में वर्षा उत्तर-पश्चिम की ओर क्यों घटती है?

क्योंकि अधिकांश वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा से होती है, जो पूर्व से राज्य में आती है और भीतर बढ़ते-बढ़ते नमी खोती जाती है, इसलिए ग्वालियर तथा मोरेना का उत्तर-पश्चिमी कोना सबसे शुष्क है।

मध्य प्रदेश के सर्वाधिक क्षेत्र पर कौन सी मिट्टी है?

काली मिट्टी, जिसे रेगुर या कपास की मिट्टी भी कहते हैं, जो दक्कन ट्रैप के बेसाल्ट के अपक्षय से बनी है। यह मालवा पठार, नर्मदा घाटी, निमाड़ तथा सतपुड़ा के बड़े भाग पर फैली है।

काली मिट्टी कपास तथा सोयाबीन के लिए क्यों उपयुक्त है?

क्योंकि वह चिकनी है और मानसून के बीच के अंतरालों में भी नमी रोक लेती है, इसलिए फसल दो वर्षाओं के बीच सूखती नहीं। यह लोहा, चूना तथा मैग्नीशियम से समृद्ध है, परंतु नाइट्रोजन के लिए उसे खाद चाहिए।

मध्य प्रदेश में लैटराइट मिट्टी कहां मिलती है?

पूर्व के अधिक वर्षा वाले पठार पर, मंडला, बालाघाट, शहडोल, सीधी तथा डिंडोरी में, जहां भारी वर्षा मिट्टी से सिलिका और क्षार बहा देती है और लोहे तथा एल्युमिनियम के ऑक्साइड पीछे छोड़ जाती है।

स्रोत

  • भारत: भौतिक पर्यावरण (कक्षा 11), जलवायु तथा मृदा अध्याय — एनसीईआरटी
  • मध्य प्रदेश के कृषि-जलवायु क्षेत्र और मिट्टियां — किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, मध्य प्रदेश शासन
  • मध्य प्रदेश के जलवायु सामान्य आंकड़े — भारत मौसम विज्ञान विभाग, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
  • मृदा संसाधन तथा भूमि क्षरण मानचित्रण — राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग नियोजन ब्यूरो, आईसीएआर
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