मध्य प्रदेश में मराठा और रियासतें: होलकर और सिंधिया
एमपी परीक्षाओं के लिए नोट्स: मालवा में मराठा शासन, इंदौर के होलकर, अहिल्याबाई, ग्वालियर के सिंधिया और इस क्षेत्र की रियासतें, तिथियों तथा संधियों सहित।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

लगभग दो शताब्दियों तक वह भूमि, जो आज मध्य प्रदेश है, किसी एक शक्ति के अधीन नहीं रही बल्कि दर्जन भर शक्तियों में बँटी रही, और उनमें से लगभग सभी मराठा सेनापतियों की जागीरों से बनीं। मराठों ने सत्रह सौ बीस के दशक में नर्मदा पार की, मुगलों से मालवा लिया और अपने दो सेनापतियों के परिवारों को यहाँ बसाया: इंदौर में होलकर और ग्वालियर में सिंधिया। इन्हीं दो के चारों ओर रियासतों का नक्शा बना, नवाबों के अधीन भोपाल, बघेलों के अधीन रीवा, बुंदेलों के अधीन ओरछा और दतिया, पुआरों के अधीन धार और देवास, जो स्वतंत्रता के बाद रियासतों के विलय तक बना रहा। एमपीपीएससी और एमपीईएसबी के पेपर इस अध्याय को शासक, राजधानी और संधि के रूप में पूछते हैं।
मालवा मराठों के हाथ में
यह विस्तार पेशवा बाजीराव प्रथम का कार्य था, जिनके समय भारतीय राजनीति का केंद्र दिल्ली से हटकर पूना की ओर चला गया। मराठा सेनाओं ने 1728 में अमझेरा में मालवा के मुगल सूबेदार को हराया और 1741 में बादशाह ने अंततः प्रांत पर मराठा अधिकार स्वीकार कर लिया। बाजीराव के दो सेनापतियों को यहाँ भूमि मिली: मल्हार राव होलकर, जिन्हें 1733 में मालवा में क्षेत्र मिला और जिन्होंने इंदौर घराने की नींव रखी, तथा राणोजी सिंधिया, जिनके परिवार ने उज्जैन और बाद में ग्वालियर का क्षेत्र संभाला। 1761 के पानीपत के तीसरे युद्ध में मराठों को भारी हानि हुई और उसके बाद दोनों घराने पेशवा के सेवक से अधिक स्वतंत्र राजा की तरह व्यवहार करने लगे।
इंदौर के होलकर और अहिल्याबाई
राज्य की सबसे स्मरणीय शासक अहिल्याबाई होलकर हैं, खांडेराव की विधवा, जिन्होंने 1767 से 1795 तक नर्मदा तट के महेश्वर को राजधानी बनाकर शासन किया। उनका शासन प्रशासन के आदर्श के रूप में पढ़ा जाता है: हल्की राजस्व माँग, सड़कें और धर्मशालाएँ, तथा देश भर में मंदिर निर्माण और जीर्णोद्धार का कार्यक्रम, जिसमें 1780 में वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण तथा सोमनाथ, गया, ओंकारेश्वर और उज्जैन के कार्य सम्मिलित हैं। महेश्वर की बुनाई, अर्थात महेश्वरी साड़ी, उनके संरक्षण से जुड़ी है। यशवंत राव होलकर ने द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध में अंग्रेज़ों से लोहा लिया, और राज्य ने 1818 की मंदसौर संधि से अंग्रेज़ी संरक्षण स्वीकार किया, जिसके बाद इंदौर उसकी स्थिर राजधानी बना।
ग्वालियर के सिंधिया
सिंधिया घराने ने अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध का सबसे शक्तिशाली मराठा दिया, महादजी सिंधिया, जिन्होंने पानीपत के बाद उत्तर भारत में मराठा शक्ति फिर खड़ी की, दिल्ली पर अधिकार किया, मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय को अपने संरक्षण में लिया और फ्रांसीसी अधिकारी द बोइन के अधीन यूरोपीय ढंग से प्रशिक्षित बटालियनें खड़ी कीं। उनके उत्तराधिकारी दौलत राव सिंधिया ने द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध लड़ा और 1803 की सुर्जी-अंजनगाँव संधि पर हस्ताक्षर किए; उन्होंने राजधानी उज्जैन से ग्वालियर ले गए, जहाँ किले के नीचे लश्कर की छावनी आगे चलकर आधुनिक नगर बनी।
| रियासत | शासक घराना | राजधानी |
|---|---|---|
| इंदौर | होलकर, मल्हार राव होलकर से | महेश्वर, बाद में इंदौर |
| ग्वालियर | सिंधिया, राणोजी सिंधिया से | उज्जैन, बाद में ग्वालियर |
| भोपाल | नवाब, दोस्त मोहम्मद खाँ से | भोपाल |
| रीवा | बघेल राजपूत | रीवा |
| ओरछा और दतिया | बुंदेला राजपूत | ओरछा, दतिया |
| धार और देवास | पुआर, एक मराठा घराना | धार, देवास |
| पन्ना | बुंदेला राजपूत | पन्ना |
भोपाल और अन्य रियासतें
भोपाल की स्थापना अठारहवीं शताब्दी के आरंभ में दोस्त मोहम्मद खाँ ने की, जो उत्तर-मुगल सेवा के अफगान सैनिक थे, और परीक्षा में यह रियासत उन्नीसवीं शताब्दी की अपनी बेगमों के लिए स्मरण की जाती है, कुदसिया बेगम, सिकंदर बेगम, शाहजहाँ बेगम और सुल्तान जहाँ बेगम, जिन्होंने क्रम से शासन किया और पुराने नगर का बड़ा भाग बनवाया। बघेलखंड की रीवा बघेल राजपूत रियासत थी, ओरछा, दतिया, पन्ना और छतरपुर बुंदेलखंड की बुंदेला रियासतें थीं, और धार, देवास, रतलाम तथा झाबुआ मालवा की छोटी रियासतें थीं। 1817-18 के तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध के बाद अंग्रेज़ों ने इन सबसे सेंट्रल इंडिया एजेंसी के माध्यम से व्यवहार किया, और उसी युद्ध में मालवा से सक्रिय पिंडारियों की शक्ति भी तोड़ी गई।
रियासतों से एक प्रांत तक
1857 के विद्रोह की अंतिम लड़ाइयाँ इसी क्षेत्र में हुईं: जून 1858 में ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई शहीद हुईं और तात्या टोपे का पीछा मालवा में किया गया। स्वतंत्रता के बाद रियासतें चरणों में जोड़ी गईं। मालवा की मराठा रियासतें 1948 में मध्य भारत बनीं, बुंदेलखंड और बघेलखंड की रियासतें रीवा को केंद्र बनाकर विंध्य प्रदेश बनीं, और भोपाल अलग प्रशासित रहा; 1956 में इन सबको पुराने सेंट्रल प्रोविंसेज़ के हिंदी भाषी ज़िलों के साथ मिलाकर मध्य प्रदेश बनाया गया।
परीक्षा की दृष्टि से
एमपीपीएससी और एमपीईएसबी इस अध्याय को घराने, राजधानी और संधि के रूप में पूछते हैं। पहले दो मुख्य जोड़े पक्के करें: होलकर के साथ इंदौर और महेश्वर, सिंधिया के साथ उज्जैन और ग्वालियर। फिर वे चार तथ्य जो दोहराए जाते हैं: इंदौर के संस्थापक मल्हार राव होलकर, अहिल्याबाई का 1767 से 1795 तक महेश्वर से शासन और 1780 का काशी विश्वनाथ मंदिर, पानीपत के बाद महादजी सिंधिया का दिल्ली पर नियंत्रण, तथा दो संधियाँ, सिंधिया के साथ 1803 की सुर्जी-अंजनगाँव और होलकर के साथ 1818 की मंदसौर। जाल ये हैं: दोनों संधियाँ घरानों के बीच बदल देना, अहिल्याबाई की राजधानी महेश्वर के स्थान पर इंदौर बताना, भोपाल को मराठा रियासत कह देना जबकि उसके शासक नवाब थे, और रीवा को बुंदेला रियासत बताना जबकि बुंदेलों के पास ओरछा, दतिया और पन्ना थे तथा रीवा बघेल थी। प्रत्येक रियासत और उसके घराने की एक पंक्ति अधिकांश मिलान प्रश्नों का उत्तर दे देती है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| मराठा विस्तार | पेशवा बाजीराव प्रथम के अधीन; 1741 में मालवा पर मराठा अधिकार स्वीकृत |
|---|---|
| इंदौर रियासत के संस्थापक | मल्हार राव होलकर, 1733 में मालवा में क्षेत्र प्राप्त |
| अहिल्याबाई होलकर | 1767-1795 तक नर्मदा तट के महेश्वर से शासन |
| काशी विश्वनाथ मंदिर | 1780 में वाराणसी में अहिल्याबाई होलकर द्वारा पुनर्निर्मित |
| मंदसौर संधि | 1818, इंदौर के होलकर और अंग्रेज़ों के बीच |
| सिंधिया घराने के संस्थापक | राणोजी सिंधिया, बाजीराव प्रथम के सेनापति |
| महादजी सिंधिया | पानीपत के बाद दिल्ली के स्वामी और शाह आलम द्वितीय के संरक्षक |
| सुर्जी-अंजनगाँव संधि | 1803, दौलत राव सिंधिया द्वारा अंग्रेज़ों के साथ |
| सिंधिया राजधानी | उज्जैन से ग्वालियर; किले के नीचे लश्कर नगर |
| भोपाल रियासत | दोस्त मोहम्मद खाँ द्वारा स्थापित; उन्नीसवीं शताब्दी में चार शासक बेगमें |
| रीवा | बघेलखंड की बघेल राजपूत रियासत |
| बुंदेला रियासतें | ओरछा, दतिया, पन्ना और छतरपुर |
| तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध | 1817-18; मालवा के पिंडारियों की शक्ति भी तोड़ी गई |
| 1947 के बाद समूहीकरण | 1948 में मालवा की रियासतों से मध्य भारत; रीवा को केंद्र बनाकर विंध्य प्रदेश |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
इंदौर की होलकर रियासत की स्थापना किसने की थी?
- A.मल्हार राव होलकर
- B.यशवंत राव होलकर
- C.राणोजी सिंधिया
- D.तुकोजी राव होलकर
उत्तर देखें
मालवा की मराठा विजय के समय मल्हार राव पेशवा बाजीराव प्रथम की सेवा में घुड़सवार सेनापति थे, और 1733 में उन्हें वहाँ क्षेत्र मिला, जो आगे चलकर होलकर रियासत बना।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अहिल्याबाई होलकर ने नर्मदा तट के किस नगर से होलकर रियासत का शासन चलाया?
- A.इंदौर
- B.महेश्वर
- C.उज्जैन
- D.मंदसौर
उत्तर देखें
खांडेराव होलकर की विधवा अहिल्याबाई ने 1767 से 1795 तक शासन किया और नर्मदा के उत्तरी तट पर स्थित महेश्वर को अपनी राजधानी बनाया, जहाँ उनका किला-महल, घाट और मंदिर आज भी खड़े हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर का 1780 में पुनर्निर्माण किस शासक ने कराया था?
- A.अहिल्याबाई होलकर
- B.रानी दुर्गावती
- C.सुल्तान जहाँ बेगम
- D.रानी लक्ष्मीबाई
उत्तर देखें
महेश्वर से अहिल्याबाई ने जो मंदिर निर्माण और जीर्णोद्धार कराया, वह उनकी रियासत से बहुत आगे तक फैला, और 1780 में वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण उनका सर्वाधिक पूछा जाने वाला कार्य है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पानीपत के तीसरे युद्ध के बाद कौन मराठा सरदार दिल्ली के वास्तविक स्वामी और मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय के संरक्षक बने?
- A.महादजी सिंधिया
- B.मल्हार राव होलकर
- C.दौलत राव सिंधिया
- D.रघुनाथ राव
उत्तर देखें
1761 में पानीपत की पराजय के बाद ग्वालियर के महादजी सिंधिया ने उत्तर में मराठा शक्ति फिर खड़ी की, दिल्ली पर अधिकार किया, मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय को अपने संरक्षण में लिया और शाही दरबार में वास्तविक सत्ता अपने हाथ में रखी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सिंधिया घराने ने अपनी राजधानी उज्जैन से किस नगर में स्थानांतरित की?
- A.इंदौर
- B.ग्वालियर
- C.भोपाल
- D.रीवा
उत्तर देखें
मालवा में सिंधिया परिवार का प्रारंभिक केंद्र शिप्रा तट का उज्जैन था, और दौलत राव सिंधिया के समय रियासत का मुख्यालय ग्वालियर ले जाया गया, जहाँ पहाड़ी किले के नीचे लश्कर की छावनी आगे चलकर आधुनिक नगर बनी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1818 की मंदसौर संधि अंग्रेज़ों और किस शासक घराने के बीच हुई थी?
- A.ग्वालियर के सिंधिया
- B.इंदौर के होलकर
- C.भोपाल के नवाब
- D.रीवा के बघेल
उत्तर देखें
तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध के अंत में होलकर रियासत ने 1818 में मंदसौर संधि पर हस्ताक्षर किए, अंग्रेज़ी संरक्षण तथा सहायक संबंध स्वीकार किया, और उसके बाद इंदौर सेंट्रल इंडिया एजेंसी के अधीन मध्य भारत की एक रियासत के रूप में स्थिर हो गया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1803 में अंग्रेज़ों के साथ सुर्जी-अंजनगाँव संधि किसने की थी?
- A.महादजी सिंधिया
- B.दौलत राव सिंधिया
- C.यशवंत राव होलकर
- D.बाजीराव द्वितीय
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द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध मराठा सरदारों के विरुद्ध गया, और 1803 में दौलत राव सिंधिया ने सुर्जी-अंजनगाँव संधि पर हस्ताक्षर किए, जिसमें क्षेत्र छोड़ना पड़ा और कंपनी की शर्तें स्वीकार करनी पड़ीं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भोपाल रियासत की स्थापना अठारहवीं शताब्दी के आरंभ में किसने की थी?
- A.दोस्त मोहम्मद खाँ
- B.राणोजी सिंधिया
- C.कुदसिया बेगम
- D.आनंद राव पुआर
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वे उत्तर-मुगल सेवा के अफगान सैनिक थे, जिन्होंने अठारहवीं शताब्दी के आरंभ में भोपाल के आसपास अपना क्षेत्र खड़ा किया, और उनके वंशज भारत में विलय तक नवाब के रूप में शासन करते रहे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बघेलखंड की रीवा रियासत पर किस वंश का शासन था?
- A.बुंदेला राजपूत
- B.बघेल राजपूत
- C.पुआर मराठा
- D.गोंड शासक
उत्तर देखें
रीवा बघेलखंड की प्रमुख रियासत थी, और उस क्षेत्र का नाम ही उसके बघेल राजपूत शासकों से पड़ा; स्वतंत्रता के बाद यह विंध्य प्रदेश का केंद्र बनी, और 1956 में वह इकाई मध्य प्रदेश में मिला दी गई।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1948 में बना मध्य भारत मुख्यतः किन रियासतों से मिलकर बना था?
- A.ग्वालियर, इंदौर और मालवा की छोटी रियासतें
- B.रीवा, पन्ना और बुंदेलखंड की रियासतें
- C.भोपाल और सेंट्रल प्रोविंसेज़ के ज़िले
- D.नागपुर और बरार
उत्तर देखें
स्वतंत्रता के बाद रियासतों के समूहीकरण में दोनों बड़ी मराठा रियासतें तथा धार, देवास, रतलाम और झाबुआ जैसी मालवा की छोटी रियासतें 1948 में मिलाकर मध्य भारत बनाया गया, जो 1956 के पुनर्गठन तक बना रहा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारतीय राजनीति का सत्ता केंद्र दिल्ली से हटकर पूना किस पेशवा के काल में चला गया?
- A.बाजीराव प्रथम
- B.पेशवा बालाजी विश्वनाथ
- C.माधव राव प्रथम
- D.बालाजी बाजीराव
उत्तर देखें
1720 से 1740 तक पेशवा रहे बाजीराव प्रथम ने मराठा सेनाओं को नर्मदा के उत्तर में गुजरात, मालवा और बुंदेलखंड तक पहुँचाया, पालखेड़ में निज़ाम को हराया और दिल्ली के बाहर तक धावा बोला, जिससे भारतीय राजनीति की पहल मुगल राजधानी से पूना के हाथ में चली गई।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इंदौर की होलकर रियासत की स्थापना किसने की?
पेशवा बाजीराव प्रथम के घुड़सवार सेनापति मल्हार राव होलकर ने, जिन्हें 1733 में मालवा में क्षेत्र मिला। उनका परिवार पहले महेश्वर और बाद में इंदौर से शासन करता रहा, और रियासत ने 1818 की मंदसौर संधि से अंग्रेज़ी संरक्षण स्वीकार किया।
अहिल्याबाई होलकर कहाँ से शासन करती थीं और वे किसलिए स्मरणीय हैं?
वे 1767 से 1795 तक नर्मदा तट के महेश्वर से शासन करती रहीं। वे हल्की राजस्व माँग और सुव्यवस्थित प्रशासन के लिए, तथा देश भर में मंदिरों के निर्माण और जीर्णोद्धार के लिए स्मरणीय हैं, जिसमें 1780 में पुनर्निर्मित वाराणसी का काशी विश्वनाथ मंदिर सम्मिलित है।
पानीपत के तीसरे युद्ध के बाद दिल्ली पर किस मराठा सरदार का नियंत्रण रहा?
ग्वालियर के महादजी सिंधिया का, जिन्होंने उत्तर में मराठा शक्ति फिर खड़ी की, दिल्ली के वास्तविक स्वामी बने, मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय को संरक्षण दिया और फ्रांसीसी अधिकारी द बोइन के अधीन यूरोपीय ढंग की बटालियनें खड़ी कीं।
सिंधिया और होलकर अंग्रेज़ी संरक्षण में किन संधियों से आए?
दौलत राव सिंधिया ने द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध के अंत में 1803 की सुर्जी-अंजनगाँव संधि की, और इंदौर के होलकरों ने तृतीय युद्ध के अंत में 1818 की मंदसौर संधि की।
भोपाल रियासत की स्थापना किसने की?
उत्तर-मुगल सेवा के अफगान सैनिक दोस्त मोहम्मद खाँ ने अठारहवीं शताब्दी के आरंभ में भोपाल की स्थापना की। उन्नीसवीं शताब्दी में इस रियासत पर क्रम से चार बेगमों ने शासन किया, कुदसिया बेगम से सुल्तान जहाँ बेगम तक।
स्रोत
- हमारे अतीत II और III (कक्षा सात और आठ), अठारहवीं शताब्दी की राजनीतिक व्यवस्थाएँ तथा कंपनी शासन के अध्याय — एनसीईआरटी
- ग्वालियर किला, महेश्वर तथा राष्ट्रीय महत्व के अन्य स्मारक — भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण
- राज्य का इतिहास और गठन, मध्य प्रदेश सरकार पोर्टल — मध्य प्रदेश सरकार





