मध्य प्रदेश के ज्योतिर्लिंग, मंदिर और धार्मिक स्थल: नोट्स
मध्य प्रदेश के धार्मिक स्थलों के नोट्स: महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, खजुराहो, साँची, भोजपुर, मैहर, अमरकंटक, ओरछा और चित्रकूट के तथ्य।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 3 मिनट

मध्य प्रदेश देश के मध्य में है और यहाँ लगभग हर भारतीय परंपरा के धार्मिक स्थल मिलते हैं: बारह ज्योतिर्लिंगों में से दो, सबसे पुराना सुरक्षित बौद्ध स्तूप, चंदेल और परमार कालीन मंदिर समूह, जैन विशाल प्रतिमाएँ, बुंदेला मंदिर और नर्मदा का उद्गम। एमपीपीएससी, एमपीईएसबी और एमपी पुलिस की परीक्षाओं में यह अध्याय स्थल, जिला, नदी और निर्माता के रूप में पूछा जाता है, इसलिए हर स्थान के लिए ये चारों बातें एक साथ याद करना सबसे उपयोगी है।
दो ज्योतिर्लिंग
बारह ज्योतिर्लिंगों में से दो मध्य प्रदेश में हैं। महाकालेश्वर उज्जैन में शिप्रा के तट पर है; यह एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है और भोर से पहले होने वाली इसकी भस्म आरती केवल यहीं होती है। ओंकारेश्वर खंडवा जिले में नर्मदा की मांधाता द्वीप पर है, और सामने के तट पर ममलेश्वर मंदिर है। उज्जैन स्वयं एक पूरा अध्याय है: यह अवंति महाजनपद की राजधानी था, यहाँ बारह वर्ष में सिंहस्थ कुंभ लगता है, और यहाँ हरसिद्धि तथा काल भैरव मंदिर, सांदीपनि आश्रम और सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा बनवाई वेधशाला है। कर्क रेखा इसके निकट से गुजरती है और प्राचीन भारतीय ज्योतिष ने उज्जैन को प्रमुख याम्योत्तर माना।
खजुराहो और मंदिर समूह
छतरपुर जिले का खजुराहो लगभग 950 से 1050 ईस्वी के बीच चंदेल शासकों ने नागर शैली में बनवाया, और 1986 में यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में इसे शामिल किया गया। सबसे बड़ा और सबसे विकसित मंदिर कंदारिया महादेव है, जो विद्याधर के समय बना; लक्ष्मण मंदिर यशोवर्मन का है, चौसठ योगिनी सबसे पुराना और एकमात्र ग्रेनाइट का मंदिर है, और मतंगेश्वर में आज भी नित्य पूजा होती है। पूर्वी समूह में पार्श्वनाथ और आदिनाथ के जैन मंदिर हैं। रायसेन जिले के भोजपुर में बेतवा तट पर परमार वंश के राजा भोज ने ग्यारहवीं शताब्दी में भोजेश्वर मंदिर आरंभ कराया, जो अधूरा रह गया; इसका एक ही पत्थर से बना शिवलिंग भारत के सबसे बड़े लिंगों में है। पास ही विदिशा का उदयगिरि गुप्तकालीन गुफाओं, वराह पट्ट और चंद्रगुप्त द्वितीय के अभिलेख के लिए प्रसिद्ध है, और ग्वालियर दुर्ग में सास-बहू मंदिर, तेली का मंदिर तथा गुरु हरगोबिंद से जुड़ा दाता बंदी छोड़ गुरुद्वारा है।
साँची तथा बौद्ध और जैन स्थल
रायसेन जिले के साँची में तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में अशोक द्वारा बनवाया महास्तूप है, जिसे बाद में बड़ा किया गया; इसके उत्कीर्ण तोरण सातवाहन काल में जोड़े गए और यहाँ अशोक स्तंभ पर संघभेद अभिलेख है। यह स्थल 1818 में प्रकाश में आया और 1989 में विश्व धरोहर घोषित हुआ। सतना जिले का भरहुत भी बड़ा स्तूप था, जिसकी वेदिकाएँ अब संग्रहालय में हैं। जैन तीर्थों में बड़वानी का बावनगजा है, जहाँ लगभग चौरासी फुट ऊँची आदिनाथ की शैलोत्कीर्ण प्रतिमा है, दतिया का सोनागिरि और दमोह का कुंडलपुर। धार जिले के मांडू में होशंगशाह का मकबरा है, जो भारत का पहला संगमरमर का भवन माना जाता है।
देवी स्थल, नदी उद्गम और राम स्थल
सतना जिले के मैहर में त्रिकूट पहाड़ी पर शारदा देवी का मंदिर है, जहाँ एक हजार से अधिक सीढ़ियाँ चढ़कर पहुँचा जाता है। अनूपपुर जिले का अमरकंटक मैकाल श्रेणी पर है और नर्मदा तथा सोन दोनों का उद्गम यहीं है, जहाँ नर्मदा कुंड के आसपास मंदिर समूह है। निवाड़ी जिले का ओरछा, जो बेतवा तट पर बुंदेला राजधानी था, राम राजा मंदिर के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ राम की पूजा शासक राजा के रूप में होती है; यहाँ चतुर्भुज मंदिर और जहाँगीर महल भी हैं। मंदाकिनी तट पर चित्रकूट राम के वनवास से जुड़ा है और वहाँ रामघाट, कामदगिरि तथा स्फटिक शिला हैं। अन्य परीक्षोपयोगी स्थल दतिया का पीतांबरा पीठ, सीहोर का सलकनपुर, पचमढ़ी की जटाशंकर और महादेव गुफाएँ, तथा रायसेन की भीमबेटका शैलाश्रय हैं, जो 2003 में राज्य का तीसरा विश्व धरोहर स्थल बना।
स्थल और जिला
| स्थल | जिला | प्रसिद्धि |
|---|---|---|
| महाकालेश्वर | उज्जैन | शिप्रा तट पर दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग; भस्म आरती |
| ओंकारेश्वर | खंडवा | नर्मदा की मांधाता द्वीप पर ज्योतिर्लिंग |
| खजुराहो | छतरपुर | चंदेल मंदिर, नागर शैली, विश्व धरोहर 1986 |
| साँची | रायसेन | अशोक का महास्तूप, विश्व धरोहर 1989 |
| भोजपुर | रायसेन | राजा भोज का अधूरा भोजेश्वर मंदिर |
| मैहर | सतना | त्रिकूट पहाड़ी पर शारदा देवी मंदिर |
| अमरकंटक | अनूपपुर | नर्मदा और सोन का उद्गम |
| ओरछा | निवाड़ी | बेतवा तट पर राम राजा मंदिर |
| भीमबेटका | रायसेन | शैलाश्रय, विश्व धरोहर 2003 |
परीक्षा की दृष्टि से
एमपीपीएससी, एमपीईएसबी और एमपी पुलिस की परीक्षाएँ इस अध्याय को स्थल, जिला, नदी और निर्माता के रूप में पूछती हैं। महाकालेश्वर के साथ उज्जैन, शिप्रा और भस्म आरती, ओंकारेश्वर के साथ नर्मदा और खंडवा, खजुराहो के साथ चंदेल और 1986, साँची के साथ अशोक और 1989, भोजपुर के साथ राजा भोज और परमार, मैहर के साथ शारदा देवी और सतना, अमरकंटक के साथ नर्मदा तथा सोन, और ओरछा के साथ बेतवा तट का राम राजा मंदिर जोड़कर याद करें। सामान्य भ्रम ये हैं: ओंकारेश्वर को शिप्रा पर बता देना, महाकालेश्वर को पूर्वमुखी कह देना, खजुराहो का श्रेय चंदेल के स्थान पर परमार या बुंदेला को देना, साँची के तोरणों को सातवाहन के बजाय अशोक से जोड़ देना, और अमरकंटक को ताप्ती का उद्गम बता देना।
महत्वपूर्ण तथ्य
| मध्य प्रदेश में ज्योतिर्लिंग | दो: महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर |
|---|---|
| महाकालेश्वर | उज्जैन, शिप्रा तट पर; एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग |
| भस्म आरती | केवल महाकालेश्वर में होने वाली भोर से पहले की आरती |
| ओंकारेश्वर | नर्मदा की मांधाता द्वीप, खंडवा जिला |
| सिंहस्थ कुंभ | उज्जैन में शिप्रा तट पर, बारह वर्ष में एक बार |
| उज्जैन की वेधशाला | वेध शाला, सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा निर्मित |
| खजुराहो | छतरपुर जिला; चंदेल वंश; नागर शैली; विश्व धरोहर 1986 |
| खजुराहो का सबसे बड़ा मंदिर | कंदारिया महादेव, विद्याधर के समय |
| खजुराहो का सबसे पुराना मंदिर | चौसठ योगिनी, ग्रेनाइट से निर्मित |
| भोजेश्वर मंदिर | भोजपुर, रायसेन; परमार राजा भोज द्वारा आरंभ; अधूरा |
| साँची | रायसेन जिला; अशोक का महास्तूप; विश्व धरोहर 1989 |
| उदयगिरि गुफाएँ | विदिशा; गुप्तकाल; वराह पट्ट और चंद्रगुप्त द्वितीय का अभिलेख |
| मैहर | सतना जिले में त्रिकूट पहाड़ी पर शारदा देवी मंदिर |
| अमरकंटक | अनूपपुर जिला; नर्मदा और सोन का उद्गम |
| ओरछा | निवाड़ी जिला, बेतवा तट पर; राम राजा मंदिर |
| बावनगजा | बड़वानी; लगभग चौरासी फुट ऊँची आदिनाथ की शैलोत्कीर्ण प्रतिमा |
| मध्य प्रदेश के विश्व धरोहर स्थल | खजुराहो 1986, साँची 1989, भीमबेटका 2003 |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
बारह ज्योतिर्लिंगों में से कौन से दो मध्य प्रदेश में स्थित हैं?
- A.सोमनाथ और नागेश्वर
- B.महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर
- C.भीमाशंकर और त्र्यंबकेश्वर
- D.केदारनाथ और विश्वनाथ
उत्तर देखें
महाकालेश्वर उज्जैन में शिप्रा के तट पर है और एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है, जो भोर से पहले होने वाली भस्म आरती के लिए प्रसिद्ध है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →कौन सा ज्योतिर्लिंग एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग कहलाता है?
- A.ओंकारेश्वर
- B.महाकालेश्वर
- C.सोमनाथ
- D.घृष्णेश्वर
उत्तर देखें
उज्जैन का ज्योतिर्लिंग दक्षिण की ओर मुख किए स्थापित है, इसीलिए इसे दक्षिणमुखी कहते हैं, और बारह में केवल यही इस दिशा में है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग किस नदी के द्वीप पर स्थित है?
- A.शिप्रा
- B.बेतवा
- C.नर्मदा
- D.चंबल
उत्तर देखें
ओंकारेश्वर खंडवा जिले में नर्मदा की मांधाता द्वीप पर है, और कहा जाता है कि द्वीप का आकार ओम अक्षर जैसा है, जिससे यह नाम पड़ा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →खजुराहो के मंदिर किस राजवंश ने बनवाए थे?
- A.परमार
- B.चंदेल
- C.बुंदेला
- D.कलचुरि
उत्तर देखें
जेजाकभुक्ति के चंदेल शासकों ने छतरपुर जिले का खजुराहो समूह लगभग 950 से 1050 ईस्वी के बीच नागर शैली में बनवाया, जिसमें गर्भगृह के ऊपर शिखरों का समूह उठता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →खजुराहो समूह का सबसे बड़ा मंदिर कौन सा है?
- A.लक्ष्मण मंदिर
- B.चौसठ योगिनी मंदिर
- C.कंदारिया महादेव मंदिर
- D.मतंगेश्वर मंदिर
उत्तर देखें
यह खजुराहो का सबसे बड़ा और सबसे विकसित मंदिर है, जो पश्चिमी समूह में ग्यारहवीं शताब्दी के आरंभ में चंदेल शासक विद्याधर के समय बना, और इसमें नागर योजना अपने पूर्ण रूप में दिखती है, जहाँ छोटे शिखर तलहटी की तरह उठते हुए गर्भगृह के मुख्य शिखर तक पहुँचते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भोजपुर का अधूरा भोजेश्वर मंदिर, जिसमें भारत के सबसे बड़े शिवलिंगों में से एक है, किस शासक ने आरंभ कराया?
- A.परमार वंश के राजा भोज
- B.चंदेल वंश के विद्याधर
- C.बुंदेला वंश के बीर सिंह देव
- D.कलचुरि वंश के गांगेयदेव
उत्तर देखें
ग्यारहवीं शताब्दी में धार से शासन करने वाले और विद्वान राजा के रूप में प्रसिद्ध भोज ने रायसेन जिले में बेतवा तट पर भोजपुर का भोजेश्वर मंदिर आरंभ कराया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →साँची का महास्तूप मूल रूप से किस शासक ने बनवाया था?
- A.चंद्रगुप्त मौर्य
- B.अशोक
- C.कनिष्क
- D.हर्षवर्धन
उत्तर देखें
रायसेन जिले के साँची में महास्तूप का मूल भाग अशोक ने तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में ईंटों से बनवाया, और पत्थर का आवरण तथा वेदिका बाद में जोड़े गए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →त्रिकूट पहाड़ी पर लंबी चढ़ाई के बाद पहुँचा जाने वाला शारदा देवी मंदिर मध्य प्रदेश के किस स्थान पर है?
- A.दतिया
- B.सलकनपुर
- C.मैहर
- D.अमरकंटक
उत्तर देखें
शारदा देवी का मंदिर सतना जिले के मैहर में त्रिकूट पहाड़ी पर है, जहाँ श्रद्धालु एक हजार से अधिक सीढ़ियाँ चढ़कर पहुँचते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मध्य प्रदेश का अमरकंटक किन दो नदियों का उद्गम स्थल है?
- A.नर्मदा और ताप्ती
- B.नर्मदा और सोन
- C.सोन और बेतवा
- D.चंबल और क्षिप्रा
उत्तर देखें
अनूपपुर जिले का अमरकंटक वहाँ है जहाँ मैकाल श्रेणी विंध्य और सतपुड़ा से मिलती है, और नर्मदा तथा सोन दोनों वहीं से निकलती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मध्य प्रदेश के किस स्थान पर राम राजा मंदिर में राम की पूजा शासक राजा के रूप में होती है?
- A.चित्रकूट
- B.ओरछा
- C.मांडू
- D.भोजपुर
उत्तर देखें
निवाड़ी जिले में बेतवा तट पर बसी बुंदेला राजधानी ओरछा में राम राजा मंदिर मूलतः महल था, जो मंदिर बन गया, और वहाँ राम को केवल देवता नहीं बल्कि शासक राजा के रूप में सम्मान मिलता है, जिसमें प्रतिदिन गार्ड ऑफ ऑनर भी शामिल है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मध्य प्रदेश में कितने ज्योतिर्लिंग हैं और कहाँ हैं?
बारह ज्योतिर्लिंगों में से दो मध्य प्रदेश में हैं। महाकालेश्वर उज्जैन में शिप्रा के तट पर है और ओंकारेश्वर खंडवा जिले में नर्मदा की मांधाता द्वीप पर। महाकालेश्वर एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है, और ओंकारेश्वर के सामने दूसरे तट पर ममलेश्वर मंदिर है।
महाकालेश्वर की भस्म आरती क्या है?
यह उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की दिन की पहली आरती है, जो भोर से पहले होती है और जिसमें शिवलिंग पर भस्म अर्पित की जाती है। किसी अन्य ज्योतिर्लिंग में यह परंपरा नहीं है, और दक्षिणमुखी होने के साथ यही महाकालेश्वर की सबसे अधिक पूछी जाने वाली विशेषता है।
खजुराहो के मंदिर किसने और किस शैली में बनवाए?
जेजाकभुक्ति के चंदेल शासकों ने इन्हें लगभग 950 से 1050 ईस्वी के बीच नागर शैली में बनवाया, जिसमें गर्भगृह के ऊपर शिखरों की शृंखला उठती है। ये छतरपुर जिले में हैं और 1986 में यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किए गए। कंदारिया महादेव सबसे बड़ा है और ग्रेनाइट का चौसठ योगिनी सबसे पुराना।
अमरकंटक से कौन सी नदियाँ निकलती हैं?
नर्मदा और सोन दोनों अनूपपुर जिले के अमरकंटक से निकलती हैं, जहाँ मैकाल श्रेणी विंध्य और सतपुड़ा से मिलती है। नर्मदा पश्चिम की ओर अरब सागर में जाती है और सोन पूर्व की ओर बहकर गंगा में मिलती है, अर्थात एक ही पहाड़ी से दो अलग समुद्रों को जल जाता है, इसीलिए परीक्षक इसे पसंद करते हैं।
ओरछा के राम राजा मंदिर की विशेषता क्या है?
निवाड़ी जिले में बेतवा तट पर बसे ओरछा में राम की पूजा केवल गर्भगृह के देवता के रूप में नहीं, बल्कि शासक राजा के रूप में होती है: यह मंदिर मूलतः महल था और प्रतिमा को सम्मान में गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है। ओरछा बुंदेला राजधानी था और यहाँ चतुर्भुज मंदिर तथा जहाँगीर महल भी हैं।
स्रोत
- विश्व धरोहर सूची: खजुराहो, साँची और भीमबेटका — यूनेस्को विश्व धरोहर केंद्र
- मध्य प्रदेश के केंद्रीय संरक्षित स्मारक — भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण
- पर्यटन स्थल: तीर्थ और धरोहर परिपथ — मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड
- भारतीय कला का परिचय (कक्षा 11), मंदिर और स्तूप संबंधी अध्याय — एनसीईआरटी





