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GK नोट्समध्य प्रदेशखजुराहो, सांची, भीमबेटका और अन्य स्मारक

खजुराहो, सांची और भीमबेटका: मध्य प्रदेश के स्मारक

राज्य परीक्षाओं के लिए मध्य प्रदेश के स्मारकों पर नोट्स: खजुराहो 1986, सांची 1989, भीमबेटका 2003, ग्वालियर दुर्ग, माण्डू, ओरछा और उदयगिरि गुफाएँ।

लेखक · प्रकाशित · 3 मिनट

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खजुराहो, सांची और भीमबेटका: मध्य प्रदेश के स्मारक — GK24 title card
खजुराहो, सांची और भीमबेटका: मध्य प्रदेश के स्मारक — GK24 title card

मध्य प्रदेश में भारत के सबसे पुराने चित्रित शैलाश्रय, सबसे पुराने खड़े बौद्ध स्तूप, नागर शैली के श्रेष्ठ मंदिर समूहों में से एक, और ग्वालियर से माण्डू तक फैले किले और महल हैं। इसके तीन स्थल यूनेस्को विश्व विरासत सूची में हैं: खजुराहो 1986 में, सांची 1989 में और भीमबेटका 2003 में। एमपीपीएससी और एमपी व्यापम के प्रश्नपत्रों में वंश, जिला, खोजकर्ता और सूची में शामिल होने का वर्ष पूछा जाता है, इसलिए प्रत्येक स्थल को जोड़ों के रूप में याद करें।

खजुराहो

छतरपुर जिले में स्थित खजुराहो के मंदिर चंदेल शासकों ने लगभग 950 से 1050 ईस्वी के बीच नागर शैली में बनवाए, ऊँची जगती पर, जिनमें अर्धमंडप, मंडप, अंतराल और गर्भगृह की श्रृंखला के ऊपर चढ़ते हुए शिखरों का समूह है। सबसे बड़ा और विकसित मंदिर कंदारिया महादेव है, जो विद्याधर के शासनकाल में बना; लक्ष्मण मंदिर, जो वैकुंठ विष्णु को समर्पित है, यशोवर्मन ने बनवाया; और ग्रेनाइट का चौंसठ योगिनी मंदिर इस समूह में सबसे पुराना है। मंदिरों को पश्चिमी, पूर्वी और दक्षिणी समूहों में रखा जाता है, और पूर्वी समूह में पार्श्वनाथ, आदिनाथ और घंटाई के जैन मंदिर हैं, जो याद दिलाते हैं कि खजुराहो दोनों धर्मों के लिए बना। मूर्तिकला का केवल एक भाग शृंगारिक है; अधिकांश में देवता, नर्तक, वादक, योद्धा और दैनिक जीवन दिखाया गया है।

सांची

रायसेन जिले का सांची वह एकमात्र बौद्ध स्थल है जहाँ तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से बारहवीं शताब्दी ईस्वी तक निर्माण का सिलसिला मिलता है। महास्तूप यानी स्तूप 1 अशोक ने आरंभ कराया, बाद में उसका विस्तार हुआ, और सातवाहन काल में उसे चार नक्काशीदार तोरण मिले; इन द्वारों पर जातक कथाओं के दृश्य हैं और बुद्ध को मानव रूप में नहीं, प्रतीकों से दिखाया गया है। इसके पास अशोक स्तंभ है, जिस पर संघभेद का लेख अंकित है। स्तूप 3 से बुद्ध के शिष्यों सारिपुत्त और महामोग्गल्लान के अवशेष मिले, और स्तूप 2 पर इस स्थल की सबसे पुरानी कथात्मक उत्कीर्णन मिलती है। यह परिसर 1818 में प्रकाश में आया और जॉन मार्शल के निर्देशन में इसका संरक्षण हुआ। परीक्षा का एक प्रिय बिंदु: बुद्ध के जीवन की कोई घटना सांची में नहीं हुई और बुद्ध कभी यहाँ नहीं आए।

भीमबेटका

विंध्य की तलहटी में, रायसेन जिले में ही स्थित भीमबेटका के शैलाश्रय की खोज वी. एस. वाकणकर ने 1957 में की। यहाँ सात सौ से अधिक शैलाश्रय दर्ज हैं और कई सौ में चित्र हैं, जो लाल और सफेद गेरू से बने हैं, जिनमें शिकारी, नर्तक, घोड़े, हाथी, बैल और बाद के तलवारधारी घुड़सवार दिखते हैं; सबसे पुरानी परतें उच्च पुरापाषाण काल तक जाती हैं। ऑडिटोरियम गुफा सबसे प्रसिद्ध है। भीमबेटका 2003 में विश्व विरासत सूची में शामिल हुआ।

किले, महल और अन्य मंदिर

स्मारकस्थान या जिलानिर्माता या काल
ग्वालियर दुर्ग, मान मंदिर, तेली का मंदिरग्वालियरमान मंदिर मानसिंह तोमर का; तेली का मंदिर प्रतिहार काल का
भोजेश्वर शिव मंदिरभोजपुर, रायसेन जिलाराजा भोज, परमार वंश, ग्यारहवीं शताब्दी
उदयगिरि गुफाएँ, वराह पट्ट सहितविदिशा के पासगुप्तकाल; चंद्रगुप्त द्वितीय का अभिलेख
जहाज महल, हिंडोला महल, होशंगशाह का मकबरामाण्डू, धार जिलामालवा के सुल्तान, पंद्रहवीं शताब्दी
जहाँगीर महल और राजा महलओरछा, बेतवा के किनारेबुंदेला शासक; बीरसिंह देव
बाघ गुफाएँ, चित्रों सहितधार जिलाबौद्ध, पाँचवीं और छठी शताब्दी

दो और याद रखने योग्य तथ्य

बुरहानपुर के पास असीरगढ़ दुर्ग को दक्षिण की कुंजी कहा जाता था, क्योंकि दक्षिण जाने वाला मार्ग इसके नीचे से जाता था; बुरहानपुर में शाही किला और वह आहूखाना भी है जहाँ मुमताज महल को पहले दफनाया गया था। नर्मदा के तट पर महेश्वर अहिल्याबाई होल्कर की राजधानी था, जिन्होंने वहाँ तथा वाराणसी में घाट और मंदिर बनवाए। ग्वालियर में 876 ईस्वी के एक अभिलेख में शून्य के साथ लिखी संख्या मिलती है, जो भारत के ऐसे सबसे पुराने अभिलेखों में है, इसीलिए ग्वालियर स्थापत्य के साथ गणित के इतिहास के प्रश्नों में भी आता है।

परीक्षा की दृष्टि से

एमपीपीएससी और एमपी व्यापम के प्रश्नपत्र स्थल, जिला, वंश, खोजकर्ता और सूची में शामिल होने का वर्ष पूछते हैं। खजुराहो के साथ चंदेल और छतरपुर, सबसे बड़े मंदिर के रूप में कंदारिया महादेव, सांची के साथ अशोक और रायसेन, स्तूप 3 के साथ सारिपुत्त-महामोग्गल्लान, भीमबेटका के साथ वाकणकर और 1957, भोजपुर के साथ राजा भोज, उदयगिरि के साथ विदिशा और चंद्रगुप्त द्वितीय, माण्डू के साथ जहाज महल, ग्वालियर के साथ तेली का मंदिर और मान मंदिर, तथा तीन वर्ष 1986, 1989 और 2003 याद रखें। जाल हैं: तीनों वर्ष बदल देना, सांची को कनिष्क के नाम कर देना, भीमबेटका को छतरपुर में बता देना, लक्ष्मण मंदिर को सबसे बड़ा कह देना, मध्य प्रदेश की उदयगिरि को ओडिशा की उदयगिरि गुफाओं से उलझा देना, और माण्डू को विश्व विरासत स्थल बता देना।

महत्वपूर्ण तथ्य

खजुराहो का वंशचंदेल, लगभग 950 से 1050 ईस्वी; छतरपुर जिला
खजुराहो की शैलीनागर, ऊँची जगती पर बने मंदिर
खजुराहो का सबसे बड़ा मंदिरकंदारिया महादेव, विद्याधर का काल
लक्ष्मण मंदिरयशोवर्मन द्वारा वैकुंठ विष्णु के लिए निर्मित
खजुराहो का सबसे पुराना मंदिरचौंसठ योगिनी, ग्रेनाइट का
खजुराहो के जैन मंदिरपार्श्वनाथ, आदिनाथ और घंटाई, पूर्वी समूह
सांची का महास्तूपअशोक ने आरंभ कराया; रायसेन जिला
सांची के तोरणसातवाहन काल; बुद्ध प्रतीकों से दर्शाए गए
सांची स्तूप 3सारिपुत्त और महामोग्गल्लान के अवशेष
भीमबेटकारायसेन जिला; 1957 में वी. एस. वाकणकर द्वारा खोज
भोजेश्वर मंदिरभोजपुर; राजा भोज, परमार वंश
उदयगिरि गुफाएँविदिशा के पास; गुप्तकाल; वराह पट्ट
माण्डूधार जिला; जहाज महल, हिंडोला महल, होशंगशाह का मकबरा
ओरछाबुंदेला महल: जहाँगीर महल और राजा महल
महेश्वरअहिल्याबाई होल्कर की राजधानी, नर्मदा तट पर
विश्व विरासत वर्षखजुराहो 1986, सांची 1989, भीमबेटका 2003

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.मध्य प्रदेशआसान

खजुराहो के मंदिर किस वंश ने बनवाए?

  1. A.चंदेल
  2. B.परमार
  3. C.बुंदेला
  4. D.तोमर
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. चंदेल

जेजाकभुक्ति के चंदेलों ने छतरपुर जिले में लगभग 950 से 1050 ईस्वी के बीच खजुराहो समूह बनवाया, और उनके शासकों के नाम अलग-अलग मंदिरों से जुड़े हैं: यशोवर्मन लक्ष्मण मंदिर से और विद्याधर कंदारिया महादेव से।

Q2.मध्य प्रदेशमध्यम

खजुराहो समूह का सबसे बड़ा और सर्वाधिक विकसित मंदिर कौन-सा है?

  1. A.लक्ष्मण मंदिर
  2. B.कंदारिया महादेव मंदिर
  3. C.चौंसठ योगिनी मंदिर
  4. D.पार्श्वनाथ मंदिर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. कंदारिया महादेव मंदिर

विद्याधर के शासनकाल में बना यह खजुराहो का सबसे ऊँचा और सबसे पूर्ण विकसित मंदिर है, जिसमें अर्धमंडप, मंडप, अंतराल और गर्भगृह की पूरी श्रृंखला है, मुख्य शिखर की ओर चढ़ते हुए छोटे शिखरों का समूह है और दीवारों पर मूर्तियों की पट्टियाँ हैं।

Q3.मध्य प्रदेशआसान

सांची का महास्तूप मूल रूप से किस शासक ने बनवाया?

  1. A.अशोक
  2. B.कनिष्क
  3. C.हर्षवर्धन
  4. D.पुलकेशिन द्वितीय
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. अशोक

रायसेन जिले के सांची में स्तूप 1 का मूल भाग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में अशोक के शासनकाल में बना, और उसके पास संघभेद के लेख वाला अशोक स्तंभ है।

Q4.मध्य प्रदेशमध्यम

भीमबेटका के शैलाश्रयों की खोज 1957 में किसने की?

  1. A.वी. एस. वाकणकर
  2. B.एच. डी. सांकलिया
  3. C.दयाराम साहनी
  4. D.रॉबर्ट ब्रूस फुट
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. वी. एस. वाकणकर

पुरातत्वविद् विष्णु श्रीधर वाकणकर ने 1957 में रायसेन जिले की विंध्य तलहटी में इन शैलाश्रयों को देखा और उनके चित्रों का अध्ययन आरंभ किया, जो लाल और सफेद गेरू से बने हैं तथा जिनमें शिकारी, नर्तक, पशु और बाद के हथियारबंद घुड़सवार दिखते हैं।

Q5.मध्य प्रदेशमध्यम

खजुराहो के मंदिर मंदिर स्थापत्य की किस शैली के हैं?

  1. A.द्रविड़
  2. B.नागर
  3. C.वेसर
  4. D.होयसल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. नागर

खजुराहो के मंदिर उत्तर भारतीय नागर शैली के प्रतिनिधि मंदिर हैं: वे ऊँची जगती पर बने हैं, उनके चारों ओर परकोटा या गोपुरम नहीं है, गर्भगृह के ऊपर वक्र शिखर है जिसके चारों ओर छोटे शिखर समूह में हैं, और उनके मंडप प्रवेश से गर्भगृह तक एक सीध में चलते…

Q6.मध्य प्रदेशकठिन

सांची में बुद्ध के शिष्यों सारिपुत्त और महामोग्गल्लान के अवशेष किस संरचना से मिले?

  1. A.स्तूप 1, महास्तूप
  2. B.स्तूप 2
  3. C.स्तूप 3
  4. D.अशोक स्तंभ
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. स्तूप 3

बुद्ध के दो प्रमुख शिष्यों सारिपुत्त और महामोग्गल्लान के अवशेष-पात्र सांची के स्तूप 3 से प्राप्त हुए, जो महास्तूप के उत्तर-पूर्व में है और जिसका एक ही तोरण है।

Q7.मध्य प्रदेशमध्यम

जहाज महल और हिंडोला महल मध्य प्रदेश में किस स्थान पर हैं?

  1. A.माण्डू
  2. B.ओरछा
  3. C.चंदेरी
  4. D.महेश्वर
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. माण्डू

धार जिले का माण्डू मालवा के सुल्तानों की पहाड़ी राजधानी था, और यहाँ की इमारतों में जहाज महल है, जो दो तालाबों के बीच बना है और जहाज जैसा तैरता दिखता है, ढलुआ दीवारों वाला हिंडोला महल, जामा मस्जिद, रानी रूपमती का मंडप तथा होशंगशाह का संगमरमरी मकबरा है, जो…

Q8.मध्य प्रदेशमध्यम

भोजपुर का भोजेश्वर शिव मंदिर किस शासक को श्रेय दिया जाता है?

  1. A.परमार वंश के राजा भोज
  2. B.चंदेल शासक विद्याधर
  3. C.मानसिंह तोमर
  4. D.बुंदेला शासक बीरसिंह देव
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. परमार वंश के राजा भोज

रायसेन जिले के भोजपुर का यह मंदिर, जिसमें एक ही पत्थर से तराशा विशाल लिंग है, ग्यारहवीं शताब्दी के धार के परमार शासक भोज को श्रेय दिया जाता है, वही राजा जो अपनी विद्वत्ता और भोपाल में बनवाए गए कहे जाने वाले तालाब के लिए याद किए जाते हैं।

Q9.मध्य प्रदेशकठिन

प्रसिद्ध वराह पट्ट और चंद्रगुप्त द्वितीय के अभिलेख वाली उदयगिरि गुफाएँ किस नगर के पास हैं?

  1. A.विदिशा
  2. B.छतरपुर
  3. C.बुरहानपुर
  4. D.खंडवा
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. विदिशा

उदयगिरि की गुफाएँ विदिशा के पास एक पहाड़ी पर हैं, सांची से थोड़ी दूर, और गुप्तकाल की हैं; यहाँ पृथ्वी देवी को उठाते वराह रूपी विष्णु का विशाल उत्कीर्णन है, और चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल का एक अभिलेख उनके एक अधिकारी की यात्रा का उल्लेख करता है।

Q10.मध्य प्रदेशआसान

तेली का मंदिर और मान मंदिर किस दुर्ग का भाग हैं?

  1. A.ग्वालियर दुर्ग
  2. B.असीरगढ़ दुर्ग
  3. C.चंदेरी दुर्ग
  4. D.ओरछा दुर्ग
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. ग्वालियर दुर्ग

ग्वालियर की लंबी बलुआ पत्थर की पहाड़ी पर बने दुर्ग में प्रतिहार काल का तेली का मंदिर, सास-बहू मंदिर, मानसिंह तोमर द्वारा मृगनयनी के लिए बनवाया गूजरी महल और उसी शासक का मान मंदिर है, जिसकी दीवारों पर रंगीन टाइलों की सजावट है।

Q11.मध्य प्रदेशमध्यम

मध्य प्रदेश का कौन-सा स्थल 2003 में यूनेस्को विश्व विरासत सूची में शामिल हुआ?

  1. A.खजुराहो स्मारक समूह
  2. B.सांची के बौद्ध स्मारक
  3. C.भीमबेटका के शैलाश्रय
  4. D.माण्डू स्मारक समूह
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. भीमबेटका के शैलाश्रय

रायसेन जिले का भीमबेटका अपने प्रागैतिहासिक चित्रों के कारण 2003 में सूची में शामिल हुआ, जो एक ही शैलाश्रय समूह में उच्च पुरापाषाण काल से ऐतिहासिक काल तक का विस्तार दिखाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश के कौन-से स्मारक विश्व विरासत स्थल हैं?

तीन: खजुराहो स्मारक समूह, जो 1986 में शामिल हुआ, सांची के बौद्ध स्मारक, जो 1989 में शामिल हुए, और भीमबेटका के शैलाश्रय, जो 2003 में शामिल हुए। खजुराहो छतरपुर जिले में है तथा सांची और भीमबेटका दोनों रायसेन जिले में हैं।

यह क्यों कहा जाता है कि बुद्ध कभी सांची नहीं आए?

क्योंकि किसी परंपरा में उनके जीवन की कोई घटना यहाँ नहीं रखी गई है। सांची का महत्व अशोक के कारण है, जिन्होंने पहाड़ी पर पहला स्तूप बनवाया, और बाद के वंशों के कारण, जिन्होंने उसका विस्तार किया; इसलिए यह बौद्ध निर्माण का स्थल है, बुद्ध की यात्राओं का नहीं।

भीमबेटका के चित्रों में क्या दिखाया गया है?

ये लाल और सफेद गेरू से बने हैं और इनमें धनुषधारी शिकारी, नर्तक, तथा गौर, हाथी, बाघ और हिरण जैसे पशु दिखते हैं, और बाद की परतों में तलवार-ढाल लिए घुड़सवार। ये परतें उच्च पुरापाषाण काल से ऐतिहासिक काल तक फैली हैं।

खजुराहो के मंदिर किसने बनवाए और क्या वे सभी हिंदू मंदिर हैं?

चंदेल शासकों ने इन्हें लगभग 950 से 1050 ईस्वी के बीच बनवाया, और ये सभी हिंदू मंदिर नहीं हैं। पूर्वी समूह में पार्श्वनाथ, आदिनाथ और घंटाई के जैन मंदिर हैं, अर्थात यह स्थल एक ही समय में दोनों धर्मों की सेवा करता था।

असीरगढ़ को दक्षिण की कुंजी क्यों कहा जाता है?

क्योंकि यह दुर्ग बुरहानपुर के पास सतपुड़ा की उस घाटी के ऊपर है जिससे उत्तर के मैदानों और दक्कन के बीच सेनाएँ तथा व्यापार आते-जाते थे। जिसके पास असीरगढ़ रहता, उसी का उस मार्ग पर नियंत्रण होता, इसीलिए मुगल इसे अत्यंत महत्वपूर्ण मानते थे।

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