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GK नोट्समध्य प्रदेशमध्य प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और विधानसभा

मध्य प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और विधानसभा: तथ्य

एमपीपीएससी और एसएससी परीक्षाओं के लिए मध्य प्रदेश की कार्यपालिका और विधानमंडल के नोट्स: राज्यपाल, मुख्यमंत्री, 230 सदस्यीय विधानसभा और उनके अनुच्छेद।

लेखक · प्रकाशित · 7 मिनट

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मध्य प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और विधानसभा: तथ्य — GK24 title card
मध्य प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और विधानसभा: तथ्य — GK24 title card

मध्य प्रदेश का शासन संविधान के भाग छह के अंतर्गत चलता है, जिसमें अनुच्छेद 153 से 167 तक राज्य कार्यपालिका और अनुच्छेद 168 से 212 तक राज्य विधानमंडल की व्यवस्था है। राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित है, परंतु उसका प्रयोग मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद करती है, जो तब तक पद पर रहती है जब तक विधानसभा का विश्वास उसे प्राप्त है। बिहार या उत्तर प्रदेश के विपरीत मध्य प्रदेश में केवल एक सदन है: यहाँ विधान परिषद नहीं है, इसलिए प्रत्येक विधेयक, प्रत्येक बजट और प्रत्येक विश्वास प्रस्ताव केवल 230 सदस्यीय विधानसभा से होकर जाता है। एमपीपीएससी, एमपी पुलिस, व्यापम और एसएससी के प्रश्नपत्रों में यह अध्याय अनुच्छेदों, संख्याओं और प्रथम व्यक्तियों का समुच्चय है, और इस राज्य की संख्याएँ दो पुनर्गठनों की स्मृति अपने साथ रखती हैं।

राज्य का गठन

मध्य प्रदेश का गठन 1 नवंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन अधिनियम के अंतर्गत हुआ, जिसने पुराने मध्य प्रदेश, मध्य भारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल को मिलाकर भोपाल को राजधानी बनाया। इसके बाद चौवालीस वर्ष तक यह क्षेत्रफल के हिसाब से देश का सबसे बड़ा राज्य रहा। 1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम ने छत्तीसगढ़ अलग किया, जो अपने साथ नब्बे विधानसभा क्षेत्र ले गया; जिस विधानसभा में उससे पहले 320 सीटें थीं, उसमें तब से 230 हैं। मध्य प्रदेश लोकसभा में उनतीस और राज्यसभा में ग्यारह सदस्य भेजता है।

मध्य प्रदेश के राज्यपाल

अनुच्छेद 153 प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल का प्रावधान करता है और अनुच्छेद 154 राज्य की कार्यपालिका शक्ति उसमें निहित करता है, जिसका प्रयोग वह स्वयं या अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से करता है। अनुच्छेद 155 के अंतर्गत उसकी नियुक्ति राष्ट्रपति हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा करता है, और अनुच्छेद 156 के अनुसार वह पाँच वर्ष के लिए, परंतु राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है और त्यागपत्र राष्ट्रपति को संबोधित करता है। अनुच्छेद 157 केवल यह चाहता है कि वह भारत का नागरिक हो और पैंतीस वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो, तथा अनुच्छेद 158 उसे किसी विधानमंडल की सदस्यता और लाभ के पद से वर्जित करते हुए उसके वेतन-भत्ते राज्य की संचित निधि पर भारित करता है। अनुच्छेद 159 के अनुसार उसे राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश शपथ दिलाते हैं, जो मध्य प्रदेश के लिए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश हैं, जिसका मुख्य पीठ जबलपुर में तथा खंडपीठ इंदौर और ग्वालियर में है। उसका निवास भोपाल का राजभवन है और वह राज्य के विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति होता है। पट्टाभि सीतारमैया पुनर्गठित राज्य के प्रथम राज्यपाल थे।

राज्यपाल की शक्तियाँ

शक्तिअनुच्छेदसार
कार्यपालिका154, 164, 165मुख्यमंत्री, अन्य मंत्रियों और महाधिवक्ता की नियुक्ति
विधायी174, 175, 176सदन का सत्र आहूत करना, सत्रावसान, विघटन, संदेश और अभिभाषण
विधेयक पर200, 201अनुमति, अनुमति रोकना, धन विधेयक के अतिरिक्त विधेयक लौटाना या राष्ट्रपति के लिए आरक्षित रखना
अध्यादेश213सदन के सत्र में न होने पर अध्यादेश जारी करना, जो सदन के समक्ष रखना आवश्यक है
वित्तीय202, 207वार्षिक वित्तीय विवरण रखवाना; धन विधेयक के लिए उसकी सिफारिश आवश्यक
न्यायिक161राज्य विधि के अपराधों में क्षमा, परिहार, लघुकरण और निलंबन

अनुच्छेद 161 की दो सीमाएँ बार-बार पूछी जाती हैं: राज्यपाल मृत्युदंड को क्षमा नहीं कर सकता और सेना न्यायालय द्वारा दिए दंड पर उसका कोई अधिकार नहीं है, हालाँकि वह मृत्युदंड को निलंबित, परिहृत या लघुकृत कर सकता है। अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राष्ट्रपति के पास दोनों शक्तियाँ हैं।

मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद

अनुच्छेद 164 के अनुसार मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करता है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर करता है। संविधान चयन की कोई प्रक्रिया नहीं देता; परंपरा से राज्यपाल उस दल या गठबंधन के नेता को बुलाता है जिसे विधानसभा में बहुमत है। सदन का सदस्य न होने पर भी व्यक्ति नियुक्त हो सकता है, परंतु अनुच्छेद 164(4) के अनुसार उसे छह लगातार मास में सदस्य बनना होगा, अन्यथा वह मंत्री नहीं रहेगा। अनुच्छेद 163 मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद देता है जो राज्यपाल को सहायता और सलाह देती है, सिवाय स्वविवेक के विषयों में, और किसी न्यायालय को यह जाँचने से रोकता है कि विषय स्वविवेक का था या नहीं। अनुच्छेद 164(1ए), जो 2003 के इक्यानबेवें संशोधन से जोड़ा गया, मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की संख्या विधानसभा की सदस्य संख्या के पंद्रह प्रतिशत तक सीमित करता है और न्यूनतम बारह रखता है; 230 का पंद्रह प्रतिशत 34.5 होता है, इसलिए मध्य प्रदेश में अधिकतम चौंतीस मंत्री हो सकते हैं। मंत्रिपरिषद विधानसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी है, अतः विश्वास प्रस्ताव गिरने पर पूरी मंत्रिपरिषद जाती है। अनुच्छेद 167 मुख्यमंत्री का कर्तव्य बताता है कि वह परिषद के निर्णय राज्यपाल को बताए और माँगी गई प्रशासनिक जानकारी दे; अनुच्छेद 165 महाधिवक्ता का प्रावधान करता है और अनुच्छेद 166 कहता है कि समस्त कार्यपालिका कार्रवाई राज्यपाल के नाम से व्यक्त की जाएगी। मंत्रियों के नीचे स्थायी तंत्र भोपाल का सचिवालय है, जो वल्लभ भवन में है और जिसका प्रमुख मुख्य सचिव होता है।

मध्य प्रदेश विधानसभा

सदन में 230 सदस्य हैं, जो एक सदस्यीय प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों से वयस्क मताधिकार द्वारा चुने जाते हैं; इनमें अनुच्छेद 332 के अंतर्गत पैंतीस स्थान अनुसूचित जातियों और सैंतालीस स्थान अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित हैं। जनवरी 2020 तक राज्यपाल अनुच्छेद 333 के अंतर्गत आंग्ल-भारतीय समुदाय के एक सदस्य को मनोनीत भी कर सकता था, इसी कारण पुरानी पुस्तकें सदस्य संख्या 231 बताती हैं; 2019 के एक सौ चौथे संविधान संशोधन से वह प्रावधान 25 जनवरी 2020 को समाप्त हो गया, अतः अब सदन पूर्णतः निर्वाचित है। अनुच्छेद 172 विधानसभा को प्रथम बैठक से पाँच वर्ष का कार्यकाल देता है, जिसे आपातकाल की उद्घोषणा के समय संसद एक बार में एक वर्ष बढ़ा सकती है, और राज्यपाल उसे पहले भंग कर सकता है। अनुच्छेद 173 के अनुसार सदस्यता की न्यूनतम आयु पच्चीस वर्ष है। अनुच्छेद 178 अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का प्रावधान करता है, जिन्हें सदन चुनता है; अध्यक्ष धन विधेयक प्रमाणित करता है, दसवीं अनुसूची के अंतर्गत दलबदल पर निरर्हता तय करता है और केवल निर्णायक मत देता है। अनुच्छेद 174 दो सत्रों के बीच छह मास से अधिक अंतर की अनुमति नहीं देता। भोपाल का वर्तमान विधान भवन, जिसे वास्तुकार चार्ल्स कोरिया ने डिजाइन किया, देश के प्रसिद्ध विधानमंडल भवनों में है।

मध्य प्रदेश में एक ही सदन क्यों

अनुच्छेद 168 प्रत्येक राज्य पर छोड़ता है कि उसके एक सदन हो या दो, और अनुच्छेद 169 के अनुसार राज्य की विधानसभा अपनी कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के दो तिहाई बहुमत से संकल्प पारित करे तो संसद विधान परिषद बना या समाप्त कर सकती है। मध्य प्रदेश में ऐसी परिषद कभी कार्यरत नहीं रही, इसलिए उसका विधानमंडल राज्यपाल और विधानसभा से ही बनता है। व्यावहारिक परिणाम यह है कि विधानसभा से पारित विधेयक सीधे अनुच्छेद 200 के अंतर्गत राज्यपाल के पास जाता है, और कोई दूसरा सदन नहीं है जो धन विधेयक को चौदह दिन या साधारण विधेयक को चार मास रोके, जैसा बिहार या उत्तर प्रदेश में होता है।

प्रथम व्यक्ति, पड़ाव और राष्ट्रपति शासन

विषयतथ्य
राज्य का गठन1 नवंबर 1956, राज्य पुनर्गठन अधिनियम के अंतर्गत
प्रथम मुख्यमंत्रीपंडित रविशंकर शुक्ल, जिनका दिसंबर 1956 में पद पर रहते निधन हुआ
प्रथम राज्यपालपट्टाभि सीतारमैया
प्रथम महिला मुख्यमंत्रीउमा भारती, दिसंबर 2003 में पद ग्रहण
सर्वाधिक समय तक मुख्यमंत्रीशिवराज सिंह चौहान, नवंबर 2005 से, दिसंबर 2018 और मार्च 2020 के बीच के अंतराल के साथ
राज्य का विभाजन1 नवंबर 2000, जब छत्तीसगढ़ 320 में से नब्बे सीटें ले गया

राज्यपाल अपने विवेक से कार्य करता है जब किसी दल को स्पष्ट बहुमत न हो, जब कोई सरकार सदन का विश्वास खो चुकी प्रतीत हो, जब वह अनुच्छेद 200 के अंतर्गत विधेयक राष्ट्रपति के लिए आरक्षित रखे, और जब वह अनुच्छेद 356 के अंतर्गत यह प्रतिवेदन दे कि राज्य का शासन संविधान के उपबंधों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता। मध्य प्रदेश में एक से अधिक बार राष्ट्रपति शासन लगा है, जिसमें दिसंबर 1992 में आरंभ हुआ काल भी है, जिसके दौरान राज्य के लिए संसद ने विधि बनाई और प्रशासन राष्ट्रपति के नाम से राज्यपाल के माध्यम से चला।

परीक्षा की दृष्टि से

एमपीपीएससी, एमपी पुलिस, व्यापम और एसएससी के प्रश्नपत्र इस अध्याय को तीन तरह से पूछते हैं। पहला, अनुच्छेद और उसका विषय: 155 नियुक्ति, 156 कार्यकाल, 157 योग्यता, 159 शपथ, 161 क्षमादान, 163 सलाह, 164 मंत्री, 164(1ए) पंद्रह प्रतिशत की सीमा, 164(4) छह मास का नियम, 169 परिषद का गठन, 172 सदन का कार्यकाल, 200 अनुमति और 213 अध्यादेश। दूसरा, राज्य का गणित: आज 230 सीटें और विभाजन से पूर्व 320, छत्तीसगढ़ को नब्बे सीटें, अधिकतम चौंतीस मंत्री, अनुसूचित जातियों के पैंतीस और अनुसूचित जनजातियों के सैंतालीस आरक्षित स्थान, लोकसभा की उनतीस और राज्यसभा की ग्यारह सीटें। तीसरा, प्रथम व्यक्ति: प्रथम मुख्यमंत्री रविशंकर शुक्ल, प्रथम राज्यपाल पट्टाभि सीतारमैया, प्रथम महिला मुख्यमंत्री उमा भारती और विधान भवन के वास्तुकार चार्ल्स कोरिया। तीन भूलें आम हैं: 320 की जगह 324 लिख देना, जो पुराने बिहार की संख्या है; आंग्ल-भारतीय मनोनीत सदस्य को अब भी गिनना, जबकि एक सौ चौथे संशोधन ने उसे जनवरी 2020 में समाप्त कर दिया; और धन विधेयक के चौदह दिन का नियम उस राज्य पर लगाना जिसमें दूसरा सदन ही नहीं है।

महत्वपूर्ण तथ्य

गठन1 नवंबर 1956, राज्य पुनर्गठन अधिनियम; राजधानी भोपाल
विभाजन1 नवंबर 2000, मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम से छत्तीसगढ़ का गठन
विधानमंडल का स्वरूपएकसदनीय: केवल राज्यपाल और विधानसभा
विधानसभा की सदस्य संख्या230 निर्वाचित सदस्य
सन 2000 से पूर्व सीटें320; नब्बे निर्वाचन क्षेत्र छत्तीसगढ़ को गए
आरक्षित स्थानअनुसूचित जातियों के लिए पैंतीस और अनुसूचित जनजातियों के लिए सैंतालीस (अनुच्छेद 332)
आंग्ल-भारतीय सदस्यअनुच्छेद 333 के अंतर्गत मनोनयन, एक सौ चौथे संशोधन से 25 जनवरी 2020 को समाप्त
अधिकतम मंत्रीचौंतीस, अनुच्छेद 164(1ए) के अनुसार 230 का पंद्रह प्रतिशत
राज्यपाल की नियुक्तिअनुच्छेद 155 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा, हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र से
राज्यपाल की शपथमध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष (अनुच्छेद 159)
उच्च न्यायालयमुख्य पीठ जबलपुर; खंडपीठ इंदौर और ग्वालियर
विधानसभा का कार्यकालप्रथम बैठक से पाँच वर्ष (अनुच्छेद 172)
विधायक की न्यूनतम आयुपच्चीस वर्ष (अनुच्छेद 173)
प्रथम मुख्यमंत्रीपंडित रविशंकर शुक्ल, 1956
प्रथम राज्यपालपट्टाभि सीतारमैया
प्रथम महिला मुख्यमंत्रीउमा भारती, दिसंबर 2003
विधान भवन, भोपालवास्तुकार चार्ल्स कोरिया द्वारा डिजाइन
संसद में स्थानलोकसभा में उनतीस, राज्यसभा में ग्यारह

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.मध्य प्रदेशआसान

मध्य प्रदेश विधानसभा में कितने सदस्य निर्वाचित होते हैं?

  1. A.200
  2. B.224
  3. C.230
  4. D.320
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 230

मध्य प्रदेश विधानसभा में एक सदस्यीय प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों से 230 सदस्य चुने जाते हैं, जिनमें पैंतीस स्थान अनुसूचित जातियों और सैंतालीस स्थान अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित हैं।

Q2.मध्य प्रदेशमध्यम

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम कितने मंत्री हो सकते हैं?

  1. A.30
  2. B.34
  3. C.36
  4. D.48
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 34

अनुच्छेद 164(1ए), जो 2003 के इक्यानबेवें संविधान संशोधन से जोड़ा गया, कहता है कि किसी राज्य में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या उसकी विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के पंद्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी और बारह से कम नहीं होगी।

Q3.मध्य प्रदेशमध्यम

नवंबर 2000 में छत्तीसगढ़ के गठन पर कितने विधानसभा क्षेत्र उसमें गए?

  1. A.81
  2. B.90
  3. C.95
  4. D.100
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 90

मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2000 ने 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ बनाया, और अविभाजित मध्य प्रदेश विधानसभा के 320 निर्वाचन क्षेत्रों में से नब्बे नए राज्य में पड़े और उसकी विधानसभा बने।

Q4.मध्य प्रदेशआसान

मध्य प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री कौन थे?

  1. A.कैलाश नाथ काटजू
  2. B.पंडित रविशंकर शुक्ल
  3. C.द्वारका प्रसाद मिश्र
  4. D.श्यामा चरण शुक्ल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पंडित रविशंकर शुक्ल

1 नवंबर 1956 को पुनर्गठित मध्य प्रदेश के अस्तित्व में आने पर वे मुख्यमंत्री बने; इससे पहले वे मध्य प्रांत और बरार की सरकार का नेतृत्व कर चुके थे, और दिसंबर 1956 में नए राज्य के कुछ ही सप्ताह बाद पद पर रहते हुए उनका निधन हो गया।

Q5.मध्य प्रदेशआसान

मध्य प्रदेश के राज्यपाल को पद की शपथ कौन दिलाता है?

  1. A.भारत के राष्ट्रपति
  2. B.मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
  3. C.भारत के मुख्य न्यायाधीश
  4. D.विधानसभा के अध्यक्ष
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश

अनुच्छेद 159 के अनुसार राज्यपाल अपना पद ग्रहण करने से पहले उस राज्य के संबंध में अधिकारिता रखने वाले उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष, या उनकी अनुपस्थिति में उस न्यायालय के उपलब्ध वरिष्ठतम न्यायाधीश के समक्ष शपथ लेता है।

Q6.मध्य प्रदेशमध्यम

मध्य प्रदेश के विधानमंडल में कितने सदन हैं?

  1. A.एक
  2. B.दो
  3. C.तीन
  4. D.कोई नहीं; शासन केवल राज्यपाल चलाता है
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. एक

मध्य प्रदेश का विधानमंडल एकसदनीय है: अनुच्छेद 168 के अनुसार राज्य के विधानमंडल में राज्यपाल और एक सदन, विधानसभा, आते हैं।

Q7.मध्य प्रदेशकठिन

राज्य विधानसभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय के एक सदस्य के मनोनयन का प्रावधान किस अनुच्छेद में था?

  1. A.अनुच्छेद 331
  2. B.अनुच्छेद 332
  3. C.अनुच्छेद 333
  4. D.अनुच्छेद 334
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. अनुच्छेद 333

यह राज्य के राज्यपाल को यह शक्ति देता था कि यदि उसकी राय में आंग्ल-भारतीय समुदाय को प्रतिनिधित्व की आवश्यकता है और विधानसभा में उसका पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है, तो वह उस समुदाय के एक सदस्य को विधानसभा में मनोनीत कर दे।

Q8.मध्य प्रदेशमध्यम

किस संविधान संशोधन से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में आंग्ल-भारतीय सदस्यों का मनोनयन समाप्त हुआ?

  1. A.101वाँ संशोधन
  2. B.102वाँ संशोधन
  3. C.103वाँ संशोधन
  4. D.104वाँ संशोधन
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 104वाँ संशोधन

सन 2019 के एक सौ चौथे संविधान संशोधन अधिनियम ने अनुच्छेद 334 में संशोधन किया, जिससे लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में आंग्ल-भारतीय सदस्यों का मनोनयन 25 जनवरी 2020 को समाप्त हो गया, जबकि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के स्थानों का आरक्षण दस वर्ष और बढ़ा दिया गया।

Q9.मध्य प्रदेशआसान

राज्य पुनर्गठन अधिनियम के अंतर्गत मध्य प्रदेश राज्य का गठन किस तिथि को हुआ?

  1. A.1 नवंबर 1956
  2. B.26 जनवरी 1950
  3. C.1 नवंबर 2000
  4. D.1 मई 1960
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. 1 नवंबर 1956

उस दिन राज्य पुनर्गठन अधिनियम लागू हुआ और पुराने मध्य प्रदेश, मध्य भारत, विंध्य प्रदेश तथा भोपाल को मिलाकर मध्य प्रदेश बना, जिसकी राजधानी भोपाल रखी गई।

Q10.मध्य प्रदेशआसान

मध्य प्रदेश की प्रथम महिला मुख्यमंत्री कौन थीं?

  1. A.उमा भारती
  2. B.विजया राजे सिंधिया
  3. C.सुषमा स्वराज
  4. D.राबड़ी देवी
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. उमा भारती

उस वर्ष के विधानसभा चुनाव के बाद दिसंबर 2003 में उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और वे राज्य में यह पद सँभालने वाली प्रथम महिला हैं।

Q11.मध्य प्रदेशकठिन

मध्य प्रदेश विधानसभा का भवन, भोपाल का विधान भवन, किस वास्तुकार ने डिजाइन किया था?

  1. A.ल कार्बूजिए
  2. B.चार्ल्स कोरिया
  3. C.एडविन लुटियंस
  4. D.लॉरी बेकर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. चार्ल्स कोरिया

भोपाल का विधान भवन, जिसमें मध्य प्रदेश विधानसभा बैठती है, बीसवीं सदी के प्रसिद्ध भारतीय वास्तुकार चार्ल्स कोरिया ने डिजाइन किया, जिनका काम आँगन, खुले आकाश वाले स्थान और पारंपरिक भारतीय नियोजन पर आधारित था।

Q12.मध्य प्रदेशमध्यम

मध्य प्रदेश को लोकसभा में कितने स्थान प्राप्त हैं?

  1. A.25
  2. B.29
  3. C.40
  4. D.48
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 29

मध्य प्रदेश लोकसभा के लिए उनतीस सदस्य चुनता है और राज्यसभा में उसके ग्यारह स्थान हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश विधानसभा में कितनी सीटें हैं?

230 निर्वाचित सीटें। 1 नवंबर 2000 से पहले सदन में 320 सीटें थीं, जब उनमें से नब्बे निर्वाचन क्षेत्र नए राज्य छत्तीसगढ़ को चले गए। इन 230 में पैंतीस अनुसूचित जातियों और सैंतालीस अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित हैं।

क्या मध्य प्रदेश में विधान परिषद है?

नहीं। मध्य प्रदेश का विधानमंडल एकसदनीय है और उसमें राज्यपाल तथा विधानसभा आते हैं। अनुच्छेद 169 के अनुसार राज्य की विधानसभा कुल सदस्य संख्या के बहुमत और उपस्थित तथा मत देने वाले सदस्यों के दो तिहाई बहुमत से संकल्प पारित करे तो संसद विधान परिषद बना सकती है, परंतु राज्य में ऐसी कोई परिषद कार्यरत नहीं है।

मध्य प्रदेश में अधिकतम कितने मंत्री हो सकते हैं?

मुख्यमंत्री सहित चौंतीस से अधिक नहीं। अनुच्छेद 164(1ए) मंत्रिपरिषद को विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के पंद्रह प्रतिशत तक सीमित करता है, और 230 का पंद्रह प्रतिशत 34.5 होता है, जिसे घटाकर चौंतीस पढ़ा जाता है। यही उपबंध प्रत्येक राज्य के लिए न्यूनतम बारह मंत्री भी रखता है।

मध्य प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री कौन थे?

पंडित रविशंकर शुक्ल, जिन्होंने 1 नवंबर 1956 को राज्य के गठन पर पद सँभाला और उसी वर्ष दिसंबर में पद पर रहते हुए उनका निधन हुआ। पट्टाभि सीतारमैया पुनर्गठित राज्य के प्रथम राज्यपाल थे और उमा भारती दिसंबर 2003 में प्रथम महिला मुख्यमंत्री बनीं।

कुछ पुस्तकें मध्य प्रदेश विधानसभा में 231 सदस्य क्यों बताती हैं?

क्योंकि अनुच्छेद 333 राज्यपाल को आंग्ल-भारतीय समुदाय के एक सदस्य को विधानसभा में मनोनीत करने की अनुमति देता था, जिससे कार्यकारी संख्या 231 हो जाती थी। सन 2019 के एक सौ चौथे संविधान संशोधन से वह प्रावधान 25 जनवरी 2020 को समाप्त हो गया, इसलिए अब सदन 230 निर्वाचित सदस्यों का है।

स्रोत

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