खेलों में डोपिंग-रोधी व्यवस्था: वाडा, नाडा और कैस
खेलों में डोपिंग-रोधी व्यवस्था के परीक्षा नोट्स: वाडा और उसका कोड, प्रतिबंधित सूची, भारत में नाडा तथा एनडीटीएल, 2022 का अधिनियम और खेल पंचाट न्यायालय।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

डोपिंग का अर्थ है खेल प्रदर्शन सुधारने के लिए प्रतिबंधित पदार्थ या विधि का प्रयोग, और इसे रोकने के लिए बनी व्यवस्था की अपनी संस्थाएं, अपनी नियम पुस्तिका और अपना न्यायालय है। आधुनिक ढांचे की शुरुआत 1998 के टूर दे फ्रांस के फेस्टिना प्रकरण से मानी जाती है, जब प्रतिबंधित दवाओं से भरी एक टीम कार पकड़ी जाने पर सरकारों और ओलंपिक आंदोलन को मिलकर कदम उठाना पड़ा। उसके अगले वर्ष विश्व डोपिंग-रोधी एजेंसी बनी। परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय सरल है, क्योंकि इसमें स्थिर और स्पष्ट तथ्य हैं - स्थापना वर्ष, मुख्यालय नगर, नियम पुस्तिका, प्रयोगशाला और न्यायालय।
विश्व डोपिंग-रोधी एजेंसी
- वाडा की स्थापना 10 नवंबर 1999 को हुई और इसका मुख्यालय कनाडा के मॉन्ट्रियल में है; स्विट्जरलैंड के लुसाने में इसका यूरोपीय कार्यालय है।
- यह स्विस कानून के अंतर्गत एक संस्था है और इसका आधा धन ओलंपिक आंदोलन तथा आधा विश्व की सरकारों से आता है, जिससे इसके बोर्ड में दोनों पक्षों को बराबर स्थान मिलता है।
- इसका नारा प्ले ट्रू है, और यह शिक्षा, शोध, परीक्षण मानक तथा प्रयोगशालाओं की मान्यता का कार्य करती है।
- विश्व डोपिंग-रोधी कोड वह एक दस्तावेज है जो सभी खेलों और देशों के नियमों को एक रूप देता है। यह पहली बार 1 जनवरी 2004 को लागू हुआ और इसमें एक से अधिक बार संशोधन हुए हैं, जिनमें 2021 का संस्करण भी है।
- प्रतिबंधित सूची वाडा प्रत्येक वर्ष जारी करती है और वह 1 जनवरी से प्रभावी होती है।
प्रतिबंधित सूची और मुख्य विचार
| विचार | अर्थ |
|---|---|
| हर समय प्रतिबंधित पदार्थ | एनाबोलिक एजेंट, पेप्टाइड हार्मोन और वृद्धि कारक, बीटा-2 एगोनिस्ट, हार्मोन तथा उपापचयी परिवर्तक, मूत्रवर्धक और छिपाने वाले पदार्थ |
| केवल प्रतिस्पर्धा में प्रतिबंधित | उत्तेजक, स्वापक, कैनाबिनॉइड और ग्लूकोकॉर्टिकॉइड |
| कुछ खेलों में प्रतिबंधित | बीटा-ब्लॉकर, तीरंदाजी और निशानेबाजी जैसे खेलों में, जहां हाथ की स्थिरता निर्णायक होती है |
| प्रतिबंधित विधियां | रक्त और रक्त घटकों में छेड़छाड़, नमूने में रासायनिक या भौतिक छेड़छाड़, तथा जीन और कोशिका डोपिंग |
| कठोर उत्तरदायित्व | शरीर में जो मिला, उसका उत्तर खिलाड़ी को देना है, चाहे वह जानबूझकर लिया गया हो या नहीं |
| चिकित्सीय उपयोग छूट | वास्तविक बीमारी में प्रतिबंधित दवा के प्रयोग की पूर्व लिखित अनुमति |
| अवस्थिति नियम | पंजीकृत परीक्षण समूह के खिलाड़ी को बताना होता है कि वह कहां मिलेगा, जिससे बिना सूचना प्रतिस्पर्धा के बाहर परीक्षण हो सके |
| एथलीट बायोलॉजिकल पासपोर्ट | खिलाड़ी के अपने रक्त और स्टेरॉयड मानों का समय के साथ अभिलेख; अचानक परिवर्तन स्वयं प्रमाण माना जाता है |
मूत्र का नमूना दो भागों में बांटा जाता है, ए नमूना और बी नमूना। बी नमूना केवल तब खोला जाता है जब ए नमूना सकारात्मक आए और खिलाड़ी उसकी मांग करे, जिससे परिणाम की पुष्टि हो सके। एरिथ्रोपोइटिन, जिसे ईपीओ कहते हैं, लाल रक्त कणिकाओं की संख्या बढ़ाकर मांसपेशियों तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन बढ़ा देता है, जबकि एनाबोलिक स्टेरॉयड मांसपेशी बनाते और थकान से उबरने का समय घटाते हैं; अपने ही संचित रक्त का आधान रक्त डोपिंग कहलाता है।
भारत में डोपिंग-रोधी व्यवस्था
- राष्ट्रीय डोपिंग-रोधी एजेंसी, नाडा, की स्थापना 24 नवंबर 2005 को युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के अधीन एक पंजीकृत सोसायटी के रूप में हुई, और यह भारत में परीक्षण, परिणाम प्रबंधन तथा शिक्षा का कार्य करती है।
- नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला देश की परीक्षण प्रयोगशाला है और इसी मंत्रालय के अधीन कार्य करती है; इसकी मान्यता वाडा से मिलती है।
- भारत खेलों में डोपिंग के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय का पक्षकार है, जिसे 2005 में यूनेस्को के तत्वावधान में अपनाया गया और जिसके माध्यम से सरकारें कोड से बंधती हैं।
- राष्ट्रीय डोपिंग-रोधी अधिनियम, 2022 ने इस व्यवस्था को कानूनी आधार दिया: इसमें राष्ट्रीय डोपिंग-रोधी एजेंसी और राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला के लिए विधिक प्रावधान हैं तथा देखरेख के लिए खेलों में डोपिंग-रोधी राष्ट्रीय बोर्ड बनाया गया है।
- नाडा के भीतर डोपिंग-रोधी अनुशासन पैनल पहले मामला सुनता है और डोपिंग-रोधी अपील पैनल अपील सुनता है।
खेल पंचाट न्यायालय
- कैस की स्थापना 1984 में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति की पहल पर हुई और यह स्विट्जरलैंड के लुसाने में बैठता है, जिसकी शाखाएं सिडनी और न्यूयॉर्क में हैं।
- 1994 के पेरिस समझौते के बाद इसका संचालन खेल पंचाट की अंतर्राष्ट्रीय परिषद करती है, जिससे यह अपनी संस्थापक ओलंपिक समिति से स्वतंत्र बना रहता है।
- इसमें अनुबंध विवादों के लिए साधारण पंचाट मंडल, खेल संस्थाओं के निर्णयों के विरुद्ध अपील के लिए अपील पंचाट मंडल, तथा डोपिंग मामलों को प्रथम स्तर पर सुनने के लिए डोपिंग-रोधी मंडल है।
- 1996 के अटलांटा खेलों से ओलंपिक खेलों में तदर्थ मंडल बैठते आए हैं, जिससे खेलों के दौरान उठे विवाद कुछ दिनों में निपट जाते हैं।
- कैस के निर्णय को केवल स्विस संघीय न्यायाधिकरण में, और वहां भी सीमित आधारों पर ही चुनौती दी जा सकती है, इसलिए व्यवहार में कैस विश्व खेल का अंतिम निर्णायक है।
प्रश्नपत्रों में आने वाले प्रकरण
- कनाडा के बेन जॉनसन से 1988 के सियोल ओलंपिक की 100 मीटर दौड़ का स्वर्ण पदक एनाबोलिक स्टेरॉयड स्टैनोजोलोल की जांच में पकड़े जाने पर छीन लिया गया, और इसी प्रकरण ने डोपिंग को जनचर्चा का विषय बनाया।
- अमेरिका के लांस आर्मस्ट्रांग ने संयुक्त राज्य डोपिंग-रोधी एजेंसी की लंबी जांच के बाद 1999 से 2005 तक के अपने सात टूर दे फ्रांस खिताब खो दिए।
- रूस की मारिया शारापोवा 2016 में मेल्डोनियम के कारण निलंबित हुईं, जो उसी वर्ष के आरंभ में प्रतिबंधित सूची में जोड़ा गया था; यह स्मरण कराता है कि सूची हर जनवरी में बदलती है।
परीक्षा की दृष्टि से
अधिकांश प्रश्न एक-एक तथ्य के होते हैं: वाडा की स्थापना का वर्ष, उसके मुख्यालय का नगर, उसका नारा, कोड के लागू होने का वर्ष, नाडा की स्थापना का वर्ष और उसका मंत्रालय, राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला का नगर, 2005 का अभिसमय किस संस्था के तत्वावधान में अपनाया गया, तथा खेल पंचाट न्यायालय का स्थान और स्थापना वर्ष। दूसरा समूह शब्दावली पूछता है - चिकित्सीय उपयोग छूट क्या है, कठोर उत्तरदायित्व का अर्थ क्या है, ए और बी नमूने क्यों होते हैं, अवस्थिति नियम क्या मांगता है और एथलीट बायोलॉजिकल पासपोर्ट में क्या दर्ज होता है। तीसरा समूह पूछता है कि कौन सा वर्ग केवल प्रतिस्पर्धा में प्रतिबंधित है, जिसका उत्तर उत्तेजक और स्वापक है, तथा कौन सा वर्ग केवल कुछ खेलों में प्रतिबंधित है, जिसका उत्तर निशानेबाजी और तीरंदाजी में बीटा-ब्लॉकर है। सामान्य भ्रम ये हैं - वाडा को मॉन्ट्रियल के स्थान पर लुसाने में मान लेना, वाडा और नाडा को मिला देना, कोड को 1999 का बता देना, तथा कैस के विरुद्ध अपील अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति में मान लेना, जबकि वह स्विस संघीय न्यायाधिकरण में होती है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| वाडा की स्थापना | 10 नवंबर 1999, 1998 के टूर दे फ्रांस के फेस्टिना प्रकरण के बाद |
|---|---|
| वाडा मुख्यालय | मॉन्ट्रियल, कनाडा |
| वाडा का नारा | प्ले ट्रू |
| वाडा का वित्त | आधा ओलंपिक आंदोलन से, आधा सरकारों से |
| विश्व डोपिंग-रोधी कोड | 1 जनवरी 2004 से लागू; एक से अधिक बार संशोधित, जिसमें 2021 का संस्करण |
| प्रतिबंधित सूची | वाडा हर वर्ष जारी करती है, 1 जनवरी से प्रभावी |
| नाडा, भारत | 24 नवंबर 2005, युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय |
| राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला | नई दिल्ली |
| भारतीय कानून | राष्ट्रीय डोपिंग-रोधी अधिनियम, 2022; खेलों में डोपिंग-रोधी राष्ट्रीय बोर्ड |
| यूनेस्को अभिसमय | खेलों में डोपिंग के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय, 2005 |
| कैस | स्थापना 1984, स्थान लुसाने, स्विट्जरलैंड; शाखाएं सिडनी और न्यूयॉर्क |
| कैस का संचालन | खेल पंचाट की अंतर्राष्ट्रीय परिषद, 1994 के पेरिस समझौते से |
| कैस के विरुद्ध अपील | केवल स्विस संघीय न्यायाधिकरण में, सीमित आधारों पर |
| बेन जॉनसन | 1988 सियोल ओलंपिक, 100 मीटर स्वर्ण छीना गया, स्टैनोजोलोल |
| रक्त वर्धक | एरिथ्रोपोइटिन या ईपीओ, जो लाल रक्त कणिकाएं बढ़ाता है |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
विश्व डोपिंग-रोधी एजेंसी (वाडा) का मुख्यालय कहां है?
- A.लुसाने, स्विट्जरलैंड
- B.मॉन्ट्रियल, कनाडा
- C.पेरिस, फ्रांस
- D.न्यूयॉर्क, संयुक्त राज्य अमेरिका
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, मॉन्ट्रियल, कनाडा है। वाडा ने 1999 में लुसाने से कार्य आरंभ किया और उसके बाद अपना मुख्यालय मॉन्ट्रियल ले गई, जहां वह अब भी है; लुसाने उसका यूरोपीय कार्यालय बना हुआ है। विकल्प A गलत है और इसी प्रश्न का जाल भी है, क्योंकि लुसाने में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति तथा खेल पंचाट न्यायालय दोनों बैठते हैं, इसलिए परीक्षार्थी हर खेल संस्था को वहीं मान लेते हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि पेरिस में यूनेस्को का मुख्यालय है, जिसने 2005 में खेलों में डोपिंग के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय अपनाया, परंतु वाडा का कार्यालय वहां नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र का मुख्यालय और खेल पंचाट न्यायालय की एक शाखा है, वाडा का ऐसा कोई कार्यालय नहीं। वाडा के लिए मॉन्ट्रियल और ओलंपिक संस्थाओं के लिए लुसाने, यह जोड़ा याद रखना अनेक प्रश्न हल कर देता है।
विश्व डोपिंग-रोधी एजेंसी की स्थापना किस वर्ष हुई?
- A.1984
- B.1994
- C.1999
- D.2004
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, 1999 है। वाडा की स्थापना 10 नवंबर 1999 को हुई, 1998 के टूर दे फ्रांस के फेस्टिना प्रकरण के एक वर्ष बाद, जिसमें प्रतिबंधित दवाओं से भरी टीम कार पकड़े जाने पर स्पष्ट हुआ कि डोपिंग कितनी संगठित हो चुकी थी और ओलंपिक आंदोलन तथा सरकारों को साथ मिलकर एजेंसी बनानी पड़ी। विकल्प A गलत है क्योंकि 1984 में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति की पहल पर खेल पंचाट न्यायालय की स्थापना हुई थी। विकल्प B गलत है क्योंकि 1994 पेरिस समझौते का वर्ष है, जिससे उस न्यायालय को स्वतंत्र रूप से चलाने के लिए खेल पंचाट की अंतर्राष्ट्रीय परिषद बनी। विकल्प D गलत है क्योंकि 2004 में, 1 जनवरी को, विश्व डोपिंग-रोधी कोड लागू हुआ, अर्थात एजेंसी बनने के पांच वर्ष बाद। 1984 न्यायालय, 1994 परिषद, 1999 वाडा और 2004 कोड, यह क्रम एक साथ चार प्रश्नों का उत्तर देता है।
भारत की राष्ट्रीय डोपिंग-रोधी एजेंसी (नाडा) किस मंत्रालय के अधीन कार्य करती है?
- A.स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
- B.युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय
- C.गृह मंत्रालय
- D.शिक्षा मंत्रालय
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व्याख्या
सही उत्तर B, युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय है। नाडा की स्थापना 24 नवंबर 2005 को इसी मंत्रालय के अधीन एक पंजीकृत सोसायटी के रूप में हुई, और वह नमूना संग्रह की योजना बनाकर उसे कराती है, परिणामों का प्रबंधन करती है तथा शिक्षा कार्यक्रम चलाती है, जिससे भारत में खेल डोपिंग के बिना हो। राष्ट्रीय डोपिंग-रोधी अधिनियम, 2022 ने बाद में एजेंसी को कानूनी आधार दिया और देखरेख के लिए खेलों में डोपिंग-रोधी राष्ट्रीय बोर्ड बनाया। विकल्प A गलत है क्योंकि स्वास्थ्य मंत्रालय औषधि नियमन और जनस्वास्थ्य देखता है, खेल परीक्षण नहीं, यद्यपि डोपिंग में दवाएं ही शामिल रहती हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि गृह मंत्रालय की इसमें कोई भूमिका नहीं; स्वापक नियंत्रण खेल डोपिंग से भिन्न विषय है। विकल्प D गलत है क्योंकि शिक्षा मंत्रालय विद्यालयी और उच्च शिक्षा देखता है, जबकि भारतीय खेल प्राधिकरण तथा खेलो इंडिया सहित खेल का विषय खेल मंत्रालय के पास है।
खेल पंचाट न्यायालय (कैस) का स्थान किस नगर में है?
- A.लुसाने
- B.जेनेवा
- C.हेग
- D.मोनाको
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व्याख्या
सही उत्तर A, लुसाने है, जो स्विट्जरलैंड में है। कैस की स्थापना 1984 में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति की पहल पर हुई, जिसका मुख्यालय भी इसी नगर में है, और वह सिडनी तथा न्यूयॉर्क में शाखाएं रखता है और ओलंपिक खेलों में तदर्थ मंडल के रूप में भी बैठता है। विकल्प B गलत है क्योंकि जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र का यूरोपीय मुख्यालय, विश्व स्वास्थ्य संगठन तथा विश्व व्यापार संगठन हैं, यह न्यायालय नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि हेग में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय, अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय और स्थायी पंचाट न्यायालय हैं, जो राज्यों के बीच के न्यायालय हैं, खिलाड़ी और महासंघ के बीच के नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि मोनाको में विश्व एथलेटिक्स का मुख्यालय है, जो एक महासंघ है, न्यायाधिकरण नहीं। कैस के निर्णय के विरुद्ध अपील केवल स्विस संघीय न्यायाधिकरण में होती है।
खेलों में डोपिंग के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय, जिसके द्वारा सरकारें विश्व डोपिंग-रोधी कोड से बंधती हैं, 2005 में किसके तत्वावधान में अपनाया गया?
- A.विश्व स्वास्थ्य संगठन
- B.अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति
- C.यूनेस्को
- D.राष्ट्रमंडल खेल महासंघ
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, यूनेस्को है। चूंकि वाडा एक निजी संस्था है, सरकारों को ऐसा अंतर्राष्ट्रीय विधिक साधन चाहिए था जिससे वे कोड के प्रति प्रतिबद्ध हो सकें, और संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन ने 2005 में खेलों में डोपिंग के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय अपनाकर वह साधन दिया। यही वह संधि है जिसका भारत सहित अधिकांश देशों ने अनुमोदन किया है। विकल्प A गलत है क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन स्वास्थ्य मानकों और औषधियों का कार्य देखता है, इस अभिसमय का जनक नहीं है। विकल्प B गलत है क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति निजी संस्था है और संधि नहीं कर सकती; वह खेलों में प्रवेश की शर्तों के माध्यम से कोड लागू कराती है। विकल्प D गलत है क्योंकि राष्ट्रमंडल खेल महासंघ केवल अपने खेल आयोजित करता है और अन्य महासंघों की तरह कोड का हस्ताक्षरकर्ता है, किसी अभिसमय का रचयिता नहीं।
निम्नलिखित में से कौन सा पदार्थ वर्ग केवल प्रतिस्पर्धा के समय प्रतिबंधित है?
- A.एनाबोलिक एजेंट
- B.पेप्टाइड हार्मोन और वृद्धि कारक
- C.उत्तेजक और स्वापक
- D.मूत्रवर्धक और छिपाने वाले पदार्थ
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, उत्तेजक और स्वापक है। प्रतिबंधित सूची पदार्थों को तीन वर्गों में बांटती है - हर समय प्रतिबंधित, केवल प्रतिस्पर्धा में प्रतिबंधित तथा केवल कुछ खेलों में प्रतिबंधित। उत्तेजक, स्वापक, कैनाबिनॉइड और ग्लूकोकॉर्टिकॉइड प्रतिस्पर्धा वाले वर्ग में आते हैं, क्योंकि उनका प्रभाव प्रशिक्षण के स्थान पर प्रतियोगिता के दिन पड़ता है। विकल्प A गलत है क्योंकि एनाबोलिक एजेंट, जो प्रशिक्षण के दौरान मांसपेशी बनाते हैं, हर समय प्रतिबंधित हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि पेप्टाइड हार्मोन और वृद्धि कारक, जिनमें एरिथ्रोपोइटिन और वृद्धि हार्मोन शामिल हैं, भी हर समय प्रतिबंधित हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि मूत्रवर्धक और छिपाने वाले पदार्थ हर समय प्रतिबंधित हैं, क्योंकि उनका उद्देश्य दूसरी दवाओं के निशान बहा देना या छिपा देना है। बीटा-ब्लॉकर वह वर्ग है जो केवल तीरंदाजी और निशानेबाजी जैसे खेलों में प्रतिबंधित है।
डोपिंग-रोधी नियमों में चिकित्सीय उपयोग छूट (टीयूई) क्या है?
- A.पहली बार के अपराध पर निलंबन की घटी हुई अवधि
- B.वास्तविक बीमारी के उपचार के लिए प्रतिबंधित पदार्थ के प्रयोग की पूर्व अनुमति
- C.यात्रा के दौरान प्रतिस्पर्धा के बाहर के परीक्षण से छूट
- D.बी नमूने की जांच का शुल्क माफ करने की अनुमति
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B है। जिस खिलाड़ी को वास्तव में ऐसी दवा की आवश्यकता हो जो प्रतिबंधित सूची में है, जैसे दमे में इनहेलर या मधुमेह में इंसुलिन, वह पहले ही चिकित्सकों के पैनल को आवेदन देता है, और पैनल उस पदार्थ, मात्रा तथा अवधि तक सीमित चिकित्सीय उपयोग छूट दे सकता है। इसके बिना वही दवा डोपिंग-रोधी नियम का उल्लंघन होगी, क्योंकि कठोर उत्तरदायित्व के सिद्धांत से खिलाड़ी शरीर में मिले पदार्थ के लिए उत्तरदायी है। विकल्प A गलत है क्योंकि दंड में कमी पदार्थ के विशिष्ट होने, तुरंत स्वीकार करने या पर्याप्त सहायता देने जैसी बातों पर निर्भर करती है, टीयूई पर नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि परीक्षण से चूकना अवस्थिति नियमों से तय होता है और एक वर्ष में तीन चूक स्वयं उल्लंघन है। विकल्प D गलत है क्योंकि बी नमूने की जांच प्रक्रियात्मक अधिकार है और छूट से उसका कोई संबंध नहीं।
भारत की राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला कहां स्थित है?
- A.पटियाला
- B.नई दिल्ली
- C.बेंगलुरु
- D.कोलकाता
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, नई दिल्ली है। नाडा द्वारा एकत्र नमूनों की जांच करने वाली राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला नई दिल्ली में युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के अधीन कार्य करती है, और परीक्षण प्रयोगशाला के रूप में उसकी हैसियत वाडा की मान्यता पर टिकी है। राष्ट्रीय डोपिंग-रोधी अधिनियम, 2022 उसे देश की प्रमुख डोप परीक्षण प्रयोगशाला के रूप में विधिक स्थान देता है। विकल्प A गलत है क्योंकि पटियाला में नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान है, जो मुख्य प्रशिक्षण संस्थान है और प्रशिक्षकों को तैयार करता है, नमूनों की जांच नहीं करता। विकल्प C गलत है क्योंकि बेंगलुरु में भारतीय खेल प्राधिकरण का केंद्र और अनेक खेल विज्ञान सुविधाएं हैं, परंतु यह प्रयोगशाला नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि कोलकाता के समृद्ध खेल इतिहास के बावजूद वहां कोई राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला नहीं है। प्रशिक्षण के लिए पटियाला और परीक्षण के लिए नई दिल्ली, यह भेद याद रखना उपयोगी है।
विश्व डोपिंग-रोधी एजेंसी का नारा क्या है?
- A.प्ले ट्रू
- B.तेज, ऊंचा, मजबूत
- C.सभी के लिए खेल
- D.स्वच्छ और निष्पक्ष
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, प्ले ट्रू है। यह वाक्यांश आरंभिक वर्षों से वाडा का नारा रहा है और उसके अभियानों, बड़े खेल आयोजनों के जनसंपर्क कार्यक्रमों तथा खिलाड़ियों के लिए बनी शिक्षण सामग्री पर दिखता है। विकल्प B गलत है क्योंकि तेज, ऊंचा, मजबूत ओलंपिक आदर्श वाक्य है, जो लैटिन में सिटियस, अल्टियस, फोर्टियस है और जिसमें 2021 में साथ शब्द जोड़ा गया; वह अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति का है, वाडा का नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि सभी के लिए खेल जन भागीदारी का सामान्य आंदोलन है, जिसे अनेक सरकारें और महासंघ बढ़ाते हैं, डोपिंग-रोधी नारा नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि वह प्रशंसनीय लगता है और स्वच्छ खेल जैसे शब्द वाडा भी प्रयोग करती है, परंतु प्रश्नपत्रों में अपेक्षित उत्तर प्ले ट्रू ही है। ऐसे प्रश्न अक्सर ओलंपिक आदर्श वाक्य के साथ आते हैं, इसलिए दोनों को अलग-अलग याद रखना चाहिए।
1988 के सियोल ओलंपिक में एनाबोलिक स्टेरॉयड स्टैनोजोलोल की जांच में पकड़े जाने पर किस धावक से 100 मीटर का स्वर्ण पदक छीन लिया गया?
- A.कार्ल लुईस
- B.बेन जॉनसन
- C.लिनफोर्ड क्रिस्टी
- D.मॉरिस ग्रीन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, बेन जॉनसन है, जो कनाडा के धावक थे। उन्होंने विश्व रिकॉर्ड समय के साथ फाइनल जीता और कुछ ही दिनों में पदक खो दिया, क्योंकि उनके नमूने में स्टैनोजोलोल मिला। इस प्रकरण को ही वह क्षण माना जाता है जब डोपिंग जनचर्चा का विषय बनी, और इस विषय के प्रश्नों में यही सामान्य उदाहरण है। विकल्प A गलत है क्योंकि अमेरिका के कार्ल लुईस उसी दौड़ में दूसरे स्थान पर रहे थे और अयोग्य घोषित होने के बाद स्वर्ण पदक उन्हें मिला, इसलिए वे इस कथा में लाभार्थी हैं, दोषी नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि ब्रिटेन के लिनफोर्ड क्रिस्टी उसी दौड़ में रजत पदक तक आ गए थे; उनके बाद के कैरियर में विवाद रहा, परंतु 1988 के सियोल में नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि मॉरिस ग्रीन धावकों की बाद की पीढ़ी के हैं और नब्बे के दशक के मध्य से खेले, इन खेलों के बहुत बाद।
एरिथ्रोपोइटिन, जिसे ईपीओ कहा जाता है, खेलों में प्रतिबंधित है क्योंकि वह
- A.लाल रक्त कणिकाएं बढ़ाकर मांसपेशियों तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन बढ़ाता है
- B.मूत्र में अन्य प्रतिबंधित पदार्थों की उपस्थिति छिपा देता है
- C.हृदय गति धीमी करके हाथ को स्थिर करता है
- D.तुलाई से पहले शरीर का भार तेजी से घटा देता है
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A है। एरिथ्रोपोइटिन वह हार्मोन है जो अस्थि मज्जा को लाल रक्त कणिकाएं बनाने का संकेत देता है; इसे इंजेक्शन से देने पर रक्त मांसपेशियों तक अधिक ऑक्सीजन ले जाता है और सहनशक्ति बढ़ जाती है, इसी कारण साइकिलिंग तथा लंबी दूरी की दौड़ों में यह सबसे प्रयुक्त दवा रही है और पेप्टाइड हार्मोन के रूप में हर समय प्रतिबंधित है। विकल्प B गलत है क्योंकि छिपाने का काम मूत्रवर्धक और अन्य छिपाने वाले पदार्थ करते हैं, जो दवा को पतला कर देते या उसकी पहचान रोकते हैं; ईपीओ अपने ही प्रभाव के लिए लिया जाता है। विकल्प C गलत है क्योंकि हृदय गति धीमी कर हाथ स्थिर करना बीटा-ब्लॉकर का काम है, और इसी कारण वे तीरंदाजी तथा निशानेबाजी में प्रतिबंधित हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि तुलाई से पहले भार घटाने के लिए मूत्रवर्धक लिए जाते हैं, जो फिर भिन्न वर्ग है। अपना ही रक्त सुरक्षित रखकर फिर चढ़ाने की विधि रक्त डोपिंग कहलाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विश्व डोपिंग-रोधी एजेंसी का मुख्यालय कहां है?
कनाडा के मॉन्ट्रियल में। वाडा 10 नवंबर 1999 को बनी और उसका पहला कार्यालय स्विट्जरलैंड के लुसाने में था, जहां अब भी यूरोपीय कार्यालय है, परंतु मुख्यालय मॉन्ट्रियल चला गया। वाडा को लुसाने में मान लेना सबसे आम भूल है, क्योंकि लुसाने में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति और खेल पंचाट न्यायालय दोनों हैं।
वाडा और नाडा में क्या अंतर है?
वाडा विश्व संस्था है, जो कोड और प्रतिबंधित सूची बनाती है तथा प्रयोगशालाओं को मान्यता देती है। नाडा भारत की राष्ट्रीय डोपिंग-रोधी एजेंसी है, जिसकी स्थापना 2005 में युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के अधीन हुई और जो देश के भीतर नमूने लेकर, परिणाम संभालकर तथा शिक्षा कार्यक्रम चलाकर उन्हीं नियमों को लागू करती है।
चिकित्सीय उपयोग छूट क्या है?
यह किसी खिलाड़ी को ऐसी दवा के प्रयोग की लिखित अनुमति है, जो प्रतिबंधित सूची में है, परंतु वास्तविक बीमारी के कारण आवश्यक है, जैसे दमे में इनहेलर या मधुमेह में इंसुलिन। आवेदन पर निर्णय चिकित्सकों का पैनल पहले ही करता है, और इसके बिना वही दवा कठोर उत्तरदायित्व के नियम से डोपिंग मानी जाएगी।
डोप नमूने को ए और बी भागों में क्यों बांटा जाता है?
पहले ए नमूने की जांच होती है। उसमें प्रतिबंधित पदार्थ मिलने पर खिलाड़ी बंद बी नमूने को खुलवाकर जांच करा सकता है, सामान्यतः अपनी या अपने प्रतिनिधि की उपस्थिति में, जिससे पहले परिणाम की स्वतंत्र पुष्टि हो जाए। आरोप सामान्यतः तभी आगे बढ़ता है जब बी नमूना भी ए नमूने से मेल खाए।
डोपिंग और अन्य खेल विवादों की अपील कौन सुनता है?
खेल पंचाट न्यायालय, जिसकी स्थापना 1984 में हुई और जो स्विट्जरलैंड के लुसाने में बैठता है। यह अंतर्राष्ट्रीय महासंघों तथा राष्ट्रीय संस्थाओं के निर्णयों के विरुद्ध अपील सुनता है, डोपिंग-रोधी मंडल चलाता है और ओलंपिक खेलों में तदर्थ मंडल के रूप में बैठता है। उसके निर्णय को केवल स्विस संघीय न्यायाधिकरण में चुनौती दी जा सकती है।
अवस्थिति नियम का खिलाड़ी के लिए क्या अर्थ है?
पंजीकृत परीक्षण समूह में रखे गए खिलाड़ियों को डोपिंग-रोधी प्राधिकरण को बताना होता है कि वे कहां मिलेंगे, जिसमें प्रतिदिन एक घंटे की अवधि और उसका पता भी शामिल है, जिससे प्रतिस्पर्धा के बाहर बिना सूचना नमूना लिया जा सके। बार-बार उपलब्ध न होना या सूचना न देना स्वयं डोपिंग-रोधी नियम का उल्लंघन है।
स्रोत
- विश्व डोपिंग-रोधी कोड और प्रतिबंधित सूची — विश्व डोपिंग-रोधी एजेंसी
- राष्ट्रीय डोपिंग-रोधी एजेंसी, भारत — युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय
- खेलों में डोपिंग के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय, 2005 — यूनेस्को
- खेल पंचाट न्यायालय: इतिहास और मंडल — खेल पंचाट न्यायालय





