कबड्डी और खो-खो: नियम, मैदान की माप और महासंघ
कबड्डी और खो-खो पर परीक्षोपयोगी नोट्स: खिलाड़ी संख्या, मैदान की माप, रेड और पारी का समय, कैंट, लोना तथा खो, महासंघ, एशियाई खेल और दोनों पेशेवर लीग।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

कबड्डी और खो-खो भारत के वे दो देशज सामूहिक खेल हैं जिन्हें हर सामान्य ज्ञान प्रश्नपत्र एक ही अध्याय मानता है, क्योंकि इनका इतिहास, संचालन ढांचा और प्रश्नों की शैली एक जैसी है। दोनों बिना गेंद और बिना किसी उपकरण के खेले जाते हैं, दोनों में गति, श्वास नियंत्रण और स्पर्श निर्णायक हैं, दोनों 1936 के बर्लिन ओलंपिक में प्रदर्शनी खेल के रूप में दिखाए गए, और दोनों पिछले दशक में गांव के मैदानों से निकलकर टेलीविजन की पेशेवर लीगों तक पहुंचे हैं। इस अध्याय के अंक निश्चित संख्याओं से मिलते हैं: मैदान पर कितने खिलाड़ी, मैदान कितना बड़ा, रेड या पारी कितनी लंबी, और कौन-सा संघ या लीग किस वर्ष बना।
कबड्डी: मैदान, टीम और नियम
कबड्डी की टीम मैदान पर सात खिलाड़ी उतारती है और पांच स्थानापन्न रखती है, अर्थात दल बारह का होता है। पुरुषों का मैदान 13 मीटर गुणा 10 मीटर और महिलाओं का 12 मीटर गुणा 8 मीटर होता है। मध्य रेखा इसे दो भागों में बांटती है, और हर भाग में एक बॉक लाइन तथा उससे आगे एक बोनस लाइन होती है; दोनों लंबी भुजाओं की पतली पट्टियां लॉबी कहलाती हैं। पुरुषों का मैच बीस-बीस मिनट के दो भागों में, पांच मिनट के मध्यांतर के साथ खेला जाता है और मध्यांतर पर दोनों टीमें पाला बदलती हैं।
खेल बारी-बारी चलता है। एक टीम अपना रेडर विपक्षी भाग में भेजती है, और रेडर को एक ही सांस में कबड्डी शब्द दोहराते रहना होता है, जिसे कैंट कहते हैं। कैंट टूटते ही रेड समाप्त। रेडर एक या अधिक रक्षकों, जिन्हें एंटी कहते हैं, को छूकर मध्य रेखा पार लौटने पर अंक पाता है; रक्षक रेडर को तब तक रोककर अंक पाते हैं जब तक उसकी सांस या समय समाप्त न हो जाए। एक रेड अधिकतम तीस सेकंड की होती है। पर्याप्त रक्षक मैट पर होने की स्थिति में बोनस लाइन छूने पर बोनस अंक मिलता है। जब कोई टीम सातों विपक्षियों को आउट कर देती है तो उसे दो अतिरिक्त अंक मिलते हैं, जिसे लोना कहते हैं। डू-ऑर-डाई रेड, तीन या अधिक अंकों की सुपर रेड और कम रक्षक बचने पर किया गया सुपर टैकल अन्य महत्वपूर्ण शब्द हैं।
भारतीय और अंतरराष्ट्रीय खेल में कबड्डी
कबड्डी बांग्लादेश का राष्ट्रीय खेल है, जहां इसे हा-डू-डू कहते हैं। भारत में इसके क्षेत्रीय नाम हैं: महाराष्ट्र में हु-तू-तू, आंध्र प्रदेश में चेडुगुडु और तमिलनाडु में सडुगुडु। भारतीय शौकिया कबड्डी महासंघ की स्थापना 1950 में हुई और देश में नियम यही बनाता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय कबड्डी महासंघ विश्व स्तर पर खेल का संचालन करता है। कबड्डी 1936 के बर्लिन ओलंपिक और 1982 के नई दिल्ली एशियाई खेलों में प्रदर्शनी खेल रही, और 1990 के बीजिंग एशियाई खेलों में पूर्ण पदक खेल बनी। पहला कबड्डी विश्व कप 2004 में हुआ और भारत ने जीता। खेल को राष्ट्रीय टेलीविजन दर्शकों तक पहुंचाने वाली प्रो कबड्डी लीग 2014 में शुरू हुई। पंजाब में खेली जाने वाली गोलाकार मैदान वाली सर्किल स्टाइल इस खेल का अलग रूप है।
खो-खो: मैदान, टीम और नियम
खो-खो शुद्ध पीछा करने का खेल है। टीम में बारह खिलाड़ी होते हैं, जिनमें से नौ मैदान में उतरते हैं। खेल क्षेत्र 27 मीटर गुणा 16 मीटर का होता है और दोनों सिरों पर एक-एक लकड़ी का खंभा होता है। नौ में से आठ पीछा करने वाले बीच की लेन में बारी-बारी विपरीत दिशाओं में बैठते हैं, और नौवां सक्रिय चेजर होता है, जिसे केवल उसी दिशा में दौड़ना होता है जो उसने पहले ली; दिशा बदलने के लिए उसे खंभे का चक्कर लगाना पड़ता है। सक्रिय चेजर बैठे साथी को पीछे से छूकर और खो बोलकर जिम्मेदारी सौंपता है, जिसके बाद वह खिलाड़ी उठकर पीछा संभालता है। रक्षक, एक समय में तीन, मुक्त क्षेत्र में दौड़ते हुए बिना छुए रहने का प्रयास करते हैं। एक पारी नौ मिनट की होती है, और मैच ऐसी पारियों से बनता है जिनमें हर पक्ष पीछा भी करता है और बचाव भी। डाइव, पोल डाइव और स्काई डाइव इसके दर्शनीय कौशल हैं, जबकि लेट खो और अर्ली गेट-अप जैसी त्रुटियों पर दंड मिलता है।
खो-खो की संस्थाएं और प्रतियोगिताएं
यह खेल महाराष्ट्र से विकसित हुआ और इसके पहले लिखित नियम 1914 में पुणे के डेक्कन जिमखाना ने बनाए। भारतीय खो-खो महासंघ की स्थापना 1955 में हुई और उसी दशक के अंत में विजयवाड़ा में पहली राष्ट्रीय चैंपियनशिप हुई। खो-खो भी 1936 के बर्लिन ओलंपिक में प्रदर्शनी खेल रहा, 2016 में गुवाहाटी के दक्षिण एशियाई खेलों में शामिल हुआ, और 2022 में उसे अपनी पेशेवर प्रतियोगिता अल्टीमेट खो खो लीग मिली। पहला खो खो विश्व कप जनवरी 2025 में नई दिल्ली में हुआ और भारत ने पुरुष तथा महिला दोनों खिताब जीते। महासंघ के सर्वोच्च सम्मान सर्वश्रेष्ठ पुरुष खिलाड़ी के लिए एकलव्य पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ महिला खिलाड़ी के लिए रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार हैं।
एक दृष्टि में तुलना
| बिंदु | कबड्डी | खो-खो |
|---|---|---|
| मैदान पर खिलाड़ी | 7 | 9 |
| दल | 12 | 12 |
| मैदान | 13 मी x 10 मी (पुरुष), 12 मी x 8 मी (महिला) | 27 मी x 16 मी |
| प्रमुख शब्द | रेड, कैंट, लोना, बोनस लाइन | खो, चेजर, पोल डाइव, मुक्त क्षेत्र |
| राष्ट्रीय महासंघ | भारतीय शौकिया कबड्डी महासंघ, 1950 | भारतीय खो-खो महासंघ, 1955 |
| पेशेवर लीग | प्रो कबड्डी लीग, 2014 | अल्टीमेट खो खो, 2022 |
| ओलंपिक कड़ी | प्रदर्शनी खेल, बर्लिन 1936 | प्रदर्शनी खेल, बर्लिन 1936 |
परीक्षा की दृष्टि से
इस अध्याय के प्रश्न लगभग पूरी तरह संख्याओं और नामों पर होते हैं, और इस तरह बनाए जाते हैं कि दोनों खेल आपस में गड्डमड्ड हो जाएं। सबसे आम जोड़ी कबड्डी के सात खिलाड़ी बनाम खो-खो के नौ खिलाड़ी है, उसके बाद महासंघों के वर्ष 1950 और 1955 तथा लीगों के वर्ष 2014 और 2022। मैदान की माप सीधे पूछी जाती है, इसलिए 13 गुणा 10 मीटर, 12 गुणा 8 मीटर और 27 गुणा 16 मीटर ठीक-ठीक याद रखें। शब्दावली का अपना समूह है: कबड्डी में कैंट, रेड, एंटी, लोना, बोनस लाइन, डू-ऑर-डाई रेड और सुपर टैकल तथा खो-खो में खो, चेजर, रक्षक, पोल डाइव और मुक्त क्षेत्र। अंत में पड़ाव आते हैं, जहां बर्लिन 1936 की प्रदर्शनी, नई दिल्ली 1982 की एशियाई खेल प्रदर्शनी और बीजिंग 1990 की पहली पदक स्पर्धा एक ही विकल्प समूह में रखी जाती हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| कबड्डी में मैदान पर खिलाड़ी | 7, और 5 स्थानापन्न |
|---|---|
| कबड्डी मैदान | 13 मी x 10 मी (पुरुष), 12 मी x 8 मी (महिला) |
| रेड की अवधि | 30 सेकंड |
| ऑल आउट बोनस | लोना, 2 अंक |
| बांग्लादेश का राष्ट्रीय खेल | कबड्डी (हा-डू-डू) |
| एशियाई खेलों में कबड्डी | 1982 नई दिल्ली प्रदर्शनी; 1990 बीजिंग से पदक खेल |
| पहला कबड्डी विश्व कप | 2004, विजेता भारत |
| प्रो कबड्डी लीग | 2014 में आरंभ |
| भारतीय शौकिया कबड्डी महासंघ | स्थापना 1950 |
| खो-खो में मैदान पर खिलाड़ी | 12 के दल में से 9 |
| खो-खो खेल क्षेत्र | 27 मी x 16 मी, दोनों सिरों पर खंभा |
| खो-खो के पहले नियम | डेक्कन जिमखाना, पुणे, 1914 |
| भारतीय खो-खो महासंघ | स्थापना 1955 |
| अल्टीमेट खो खो लीग | 2022 में आरंभ |
| पहला खो खो विश्व कप | नई दिल्ली, जनवरी 2025; भारत ने दोनों खिताब जीते |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
कबड्डी की एक टीम के कितने खिलाड़ी एक समय में मैदान पर होते हैं?
- A.5
- B.6
- C.7
- D.9
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, 7 है। कबड्डी की टीम एक समय में सात खिलाड़ी उतारती है और पांच स्थानापन्न रखती है, इसलिए मैच के लिए घोषित दल बारह का होता है। मैट पर मौजूद सातों बारी-बारी रेडर बनते हैं और शेष एंटी के रूप में बचाव करते हैं, और जब किसी पक्ष के सातों खिलाड़ी आउट हो जाते हैं तो विपक्षी को दो अतिरिक्त अंक मिलते हैं, जिसे लोना कहते हैं। A गलत है क्योंकि पांच दल में स्थानापन्न खिलाड़ियों की संख्या है, मैदान पर खिलाड़ियों की नहीं, और पांच बास्केटबॉल की खेल संख्या भी है। B गलत है क्योंकि छह वॉलीबॉल की खेल संख्या है और कबड्डी से उसका कोई संबंध नहीं। D गलत है क्योंकि नौ खो-खो की टीम के मैदान पर उतरने वाले खिलाड़ियों की संख्या है, और दोनों खेल साथ पढ़ाए जाने के कारण परीक्षक प्रायः दोनों संख्याएं एक ही विकल्प समूह में रखता है।
कबड्डी किस देश का राष्ट्रीय खेल है?
- A.नेपाल
- B.बांग्लादेश
- C.श्रीलंका
- D.भूटान
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, बांग्लादेश है। कबड्डी, जिसे वहां हा-डू-डू कहते हैं, देश की स्वतंत्रता के बाद बांग्लादेश का राष्ट्रीय खेल घोषित की गई, और प्रतियोगी परीक्षाओं में इस खेल के बारे में यही सबसे अधिक पूछा जाने वाला तथ्य है। भारत, खेल पर प्रभुत्व और प्रो कबड्डी लीग देने के बावजूद, आधिकारिक रूप से किसी खेल को राष्ट्रीय खेल घोषित नहीं करता, जिसे भी परीक्षक पूछना पसंद करते हैं। A गलत है क्योंकि नेपाल का राष्ट्रीय खेल वॉलीबॉल है, जिसने दंडी बियो का स्थान लिया। C गलत है क्योंकि श्रीलंका का राष्ट्रीय खेल भी वॉलीबॉल है, यद्यपि वहां क्रिकेट कहीं अधिक लोकप्रिय है। D गलत है क्योंकि भूटान का राष्ट्रीय खेल तीरंदाजी है, जो उसके गांव के उत्सवों और ओलंपिक प्रविष्टियों में दिखती है। इन चारों दक्षिण एशियाई देशों के राष्ट्रीय खेल एक साथ याद रखना एक अंक का भरोसेमंद उत्तर देता है, क्योंकि परीक्षक इन्हीं चार नामों को प्रायः एक ही विकल्प समूह में रखता है।
कबड्डी में सभी विपक्षियों को आउट कर देने पर मिलने वाले दो अतिरिक्त अंकों को क्या कहते हैं?
- A.लोना
- B.सुपर रेड
- C.बोनस अंक
- D.डू-ऑर-डाई रेड
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, लोना है। जब कोई टीम विपक्षी पक्ष के सातों खिलाड़ियों को आउट कर देती है तो पूरी विपक्षी टीम पुनर्जीवित हो जाती है और अंक पाने वाली टीम को दो अतिरिक्त अंक मिलते हैं; इसी उपलब्धि को लोना कहते हैं, जिसे पुराने नियम ग्रंथों में लोभ भी लिखा गया है। B गलत है क्योंकि सुपर रेड वह एकल रेड है जिसमें रेडर तीन या अधिक अंक बटोरता है, जो प्रभावशाली तो है पर ऑल आउट का बोनस नहीं। C गलत है क्योंकि बोनस अंक वह एक अंक है जो रेडर आवश्यक संख्या में रक्षकों के मैट पर होने की स्थिति में बोनस लाइन छूकर पाता है। D गलत है क्योंकि डू-ऑर-डाई रेड दो खाली रेड के बाद की तीसरी लगातार रेड है, जिसमें रेडर को अंक लेना ही होता है; यह एक स्थिति है, कोई स्कोरिंग बोनस नहीं।
कबड्डी में एक रेड की अधिकतम अवधि कितनी होती है?
- A.20 सेकंड
- B.30 सेकंड
- C.45 सेकंड
- D.60 सेकंड
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, 30 सेकंड है। रेडर को विपक्षी भाग में प्रवेश करते ही तीस सेकंड मिलते हैं, और इसी समय के भीतर मध्य रेखा पार कर लौटकर रेड समाप्त करनी होती है, अन्यथा उसे आउट घोषित कर दिया जाता है। यह सीमा खेल को तेज रखने और रेडर को समय काटने से रोकने के लिए लाई गई थी, और पेशेवर मैचों में यह घड़ी खिलाड़ियों तथा दर्शकों को दिखाई जाती है। A गलत है क्योंकि बीस सेकंड बहुत कम है और किसी नियम के अनुरूप नहीं, यद्यपि यह संख्या इसलिए आकर्षक लगती है कि पुरुषों का एक भाग बीस मिनट का होता है। C गलत है क्योंकि पैंतालीस सेकंड सीमा से अधिक है। D गलत है क्योंकि साठ सेकंड होने पर श्वास नियंत्रण का महत्व ही समाप्त हो जाता, जो इस खेल का केंद्रीय कौशल है।
कबड्डी एशियाई खेलों में पूर्ण पदक खेल किस वर्ष बनी?
- A.1982
- B.1986
- C.1990
- D.1998
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, 1990 है। कबड्डी को 1990 में बीजिंग में हुए ग्यारहवें एशियाई खेलों में नियमित पदक स्पर्धा के रूप में शामिल किया गया और इस खेल का पहला स्वर्ण पदक भारत ने जीता। A गलत है और यही इस प्रश्न का मुख्य जाल है, क्योंकि 1982 के नई दिल्ली एशियाई खेलों में कबड्डी केवल प्रदर्शनी खेल थी; किसी खेल आयोजन में दिखाया जाना पदक स्पर्धा होना नहीं है। B गलत है क्योंकि 1986 के सियोल एशियाई खेलों में कबड्डी पदक अनुशासन नहीं थी। D गलत है क्योंकि 1998 में बैंकॉक में खेलों तक कबड्डी दो संस्करणों से पदक खेल रह चुकी थी। याद रखने की शृंखला है: बर्लिन 1936 ओलंपिक प्रदर्शनी, नई दिल्ली 1982 एशियाई खेल प्रदर्शनी और बीजिंग 1990 पहली पदक स्पर्धा।
हु-तू-तू किस भारतीय राज्य में कबड्डी का क्षेत्रीय नाम है?
- A.तमिलनाडु
- B.महाराष्ट्र
- C.आंध्र प्रदेश
- D.पंजाब
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, महाराष्ट्र है। उपमहाद्वीप के लगभग हर क्षेत्र में कबड्डी का अलग स्थानीय नाम है, और महाराष्ट्र में यह खेल लंबे समय से हु-तू-तू कहलाता रहा है, जो रेडर के उच्चार की ध्वनि पर आधारित है। A गलत है क्योंकि तमिलनाडु में इस खेल को सडुगुडु कहते हैं, और अनेक लोग खेल का प्राचीनतम रूप वहीं से मानते हैं। C गलत है क्योंकि आंध्र प्रदेश तथा तेलुगु भाषी क्षेत्र में इसे चेडुगुडु कहा जाता है। D गलत है क्योंकि पंजाब का संबंध अलग नाम से नहीं बल्कि अलग शैली से है, अर्थात गोल मैदान पर मानक शैली से भिन्न नियमों के साथ खेली जाने वाली सर्किल स्टाइल कबड्डी, जिसका अपना विश्व कप होता है। चौथा नाम हा-डू-डू है, जो बांग्लादेश और पूर्वी भारत में प्रचलित है।
प्रो कबड्डी लीग किस वर्ष शुरू हुई?
- A.2012
- B.2014
- C.2016
- D.2018
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, 2014 है। प्रो कबड्डी लीग, जो मैट पर टेलीविजन दर्शकों के सामने खेली जाने वाली शहर आधारित फ्रैंचाइजी प्रतियोगिता है, 2014 में शुरू हुई और इसी को कबड्डी को ग्रामीण खेल से पूर्णकालिक खिलाड़ियों तथा प्रायोजन वाले पेशेवर खेल में बदलने का श्रेय दिया जाता है। इसके आगमन से रेडरों और रक्षकों की पहचान इतनी बढ़ी कि वे सामान्य ज्ञान के प्रश्नपत्रों में भी पूछे जाने लगे। A गलत है क्योंकि 2012 लंदन ओलंपिक का वर्ष है और उसमें कबड्डी का कोई पड़ाव नहीं। C गलत है क्योंकि 2016 भारतीय खेल के लिए रियो ओलंपिक और गुवाहाटी दक्षिण एशियाई खेलों के कारण व्यस्त वर्ष रहा, पर वह लीग के आरंभ से दो वर्ष बाद है। D गलत है क्योंकि 2018 जकार्ता एशियाई खेलों का वर्ष है, तब तक लीग के कई सत्र हो चुके थे।
खो-खो की एक टीम के कितने खिलाड़ी एक समय में मैदान पर होते हैं?
- A.7
- B.8
- C.9
- D.11
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, 9 है। खो-खो की टीम में बारह खिलाड़ी होते हैं, जिनमें से नौ मैदान में उतरते हैं। इनमें से आठ बीच की लेन में बारी-बारी विपरीत दिशाओं की ओर मुंह करके बैठते हैं, और नौवां सक्रिय चेजर होता है जो रक्षकों का पीछा करता है; जिम्मेदारी तब बदलती है जब सक्रिय चेजर बैठे साथी को पीछे से छूकर खो बोलता है। A गलत है क्योंकि सात कबड्डी की टीम के मैदान पर खिलाड़ियों की संख्या है, और परीक्षक दोनों देशज खेलों को साथ इसीलिए रखता है कि संख्याएं आपस में बदल जाएं। B गलत है क्योंकि आठ केवल बीच की लेन में बैठे चेजरों की संख्या है, जो मैदान पर पूरे पक्ष से एक कम है। D गलत है क्योंकि ग्यारह क्रिकेट, फुटबॉल और हॉकी की खेल संख्या है और खो-खो से उसका कोई संबंध नहीं।
परंपरागत रूप से खो-खो की उत्पत्ति किस भारतीय राज्य में मानी जाती है?
- A.पंजाब
- B.महाराष्ट्र
- C.गुजरात
- D.कर्नाटक
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, महाराष्ट्र है। खो-खो महाराष्ट्र में विकसित हुआ और इसके पहले लिखित नियम 1914 में पुणे के डेक्कन जिमखाना ने बनाए, इसीलिए हर मानक विवरण में इस राज्य को खेल का उद्गम माना जाता है। 1955 में स्थापित भारतीय खो-खो महासंघ ने उन्हीं नियमों को शेष देश तक पहुंचाया। A गलत है क्योंकि पंजाब का संबंध सर्किल स्टाइल कबड्डी और ग्रामीण खेल मेलों से है, खो-खो की उत्पत्ति से नहीं। C गलत है क्योंकि गुजरात इस खेल से बाद में भागीदार के रूप में जुड़ा और उसके विशिष्ट लोक खेल अलग हैं। D गलत है क्योंकि कर्नाटक राष्ट्रीय चैंपियनशिप में सशक्त होने पर भी खेल की उत्पत्ति या उसके पहले नियम संग्रह का श्रेय नहीं रखता। ध्यान रहे कि खेल की उत्पत्ति, उसके पहले लिखित नियम और उसके महासंघ की स्थापना तीन अलग तथ्य हैं, और परीक्षक इन्हें आपस में बदलकर पूछता है।
भारतीय खो-खो महासंघ की स्थापना किस वर्ष हुई?
- A.1950
- B.1955
- C.1960
- D.1965
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, 1955 है। भारतीय खो-खो महासंघ की स्थापना 1955 में इस खेल की राष्ट्रीय संचालन संस्था के रूप में हुई, और उसी दशक के अंत में उसने विजयवाड़ा में पहली राष्ट्रीय चैंपियनशिप आयोजित की; उसी ने सर्वश्रेष्ठ पुरुष खिलाड़ी के लिए एकलव्य पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ महिला खिलाड़ी के लिए रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार भी शुरू किए। A गलत है और यही यहां मुख्य जाल है, क्योंकि 1950 में भारतीय शौकिया कबड्डी महासंघ बना था; दोनों महासंघों में पांच वर्ष का अंतर है और परीक्षक इसी भ्रम पर निर्भर करता है। C गलत है क्योंकि 1960 तक महासंघ राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं चला रहा था। D गलत है क्योंकि 1965 और भी बाद का है और उससे कोई स्थापना पड़ाव नहीं जुड़ा। जोड़ी याद रखें: कबड्डी 1950 और खो-खो 1955।
खो-खो के खेल क्षेत्र की माप कितनी होती है?
- A.27 मी x 16 मी
- B.29 मी x 16 मी
- C.27 मी x 14 मी
- D.25 मी x 16 मी
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, 27 मी x 16 मी है। मानक खो-खो में आयताकार खेल क्षेत्र 27 मीटर लंबा और 16 मीटर चौड़ा होता है, जिसमें बीच की लेन के दोनों सिरों पर एक-एक लकड़ी का खंभा खड़ा रहता है और खंभों से आगे मुक्त क्षेत्र होते हैं जिनमें रक्षक दौड़ सकते हैं। आठ अनुप्रस्थ लेन बीच की लेन को उन वर्गों में बांटती हैं जिनमें चेजर बैठते हैं। B, C और D गलत हैं क्योंकि हर विकल्प दोनों मापों में से एक को बदल देता है, और ऐसे प्रश्न ठीक इसी तरह बनाए जाते हैं: जिस अभ्यर्थी को केवल एक संख्या याद है वह उसी विकल्प की ओर खिंच जाता है। इस माप को कबड्डी के मैदान के साथ जोड़कर याद रखना, जो पुरुषों के लिए 13 गुणा 10 मीटर और महिलाओं के लिए 12 गुणा 8 मीटर है, सबसे तेज उपाय है।
कबड्डी और खो-खो दोनों किन ओलंपिक खेलों में प्रदर्शनी खेल के रूप में खेले गए थे?
- A.लॉस एंजिल्स 1932
- B.बर्लिन 1936
- C.लंदन 1948
- D.हेलसिंकी 1952
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, बर्लिन 1936 है। दोनों भारतीय खेल 1936 के बर्लिन ओलंपिक में प्रदर्शित किए गए थे, और यह प्रदर्शन महाराष्ट्र के अमरावती स्थित हनुमान व्यायाम प्रसारक मंडल ने कराया था; आज तक इन दोनों खेलों की यही एकमात्र ओलंपिक उपस्थिति है। प्रदर्शनी खेल वह है जो खेलों के दौरान जनता को दिखाया जाता है पर उसमें पदक नहीं दिए जाते। A गलत है क्योंकि 1932 के लॉस एंजिल्स खेल भारतीय खेल में हॉकी के स्वर्ण के लिए याद किए जाते हैं। C गलत है क्योंकि 1948 के लंदन खेल स्वतंत्र भारत के दल के पहले ओलंपिक थे और वहां का हॉकी स्वर्ण ही प्रसिद्ध तथ्य है। D गलत है क्योंकि 1952 के हेलसिंकी खेल के. डी. जाधव के कुश्ती कांस्य के लिए याद किए जाते हैं, जो भारत का पहला व्यक्तिगत ओलंपिक पदक था।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कबड्डी और खो-खो की टीमों में कितने खिलाड़ी होते हैं?
कबड्डी की टीम एक समय में सात खिलाड़ी उतारती है और पांच स्थानापन्न रखती है, इसलिए दल बारह का होता है। खो-खो की टीम का दल भी बारह का होता है पर मैदान पर नौ उतरते हैं, जिनमें आठ बीच की लेन में बैठते हैं और एक सक्रिय चेजर होता है। सात और नौ वही दो संख्याएं हैं जिन्हें परीक्षक सबसे अधिक आपस में बदलता है।
कबड्डी में कैंट क्या होता है?
कैंट कबड्डी शब्द का वह निरंतर उच्चारण है जिसे रेडर को पूरी रेड के दौरान एक ही सांस में बोलते रहना होता है। उच्चारण टूटने या दूसरी सांस लेने पर रेड समाप्त हो जाती है और रेडर को लौटना पड़ता है। कैंट ही कबड्डी को गति के साथ-साथ श्वास नियंत्रण का खेल बनाता है।
लोना क्या है?
लोना तब बनता है जब कोई टीम विपक्षी पक्ष के सातों खिलाड़ियों को आउट कर देती है। अंक पाने वाली टीम को दो अतिरिक्त अंक मिलते हैं और विपक्षी टीम पूरी तरह पुनर्जीवित हो जाती है, जिससे खेल दोबारा दोनों पक्षों की पूरी शक्ति से शुरू होता है। पुराने नियम ग्रंथों में इसे लोभ भी लिखा गया है।
कबड्डी एशियाई खेलों की पदक स्पर्धा कब बनी?
1990 के बीजिंग एशियाई खेलों में, जहां भारत ने इस खेल का पहला स्वर्ण पदक जीता। उससे पहले कबड्डी 1936 के बर्लिन ओलंपिक और 1982 के नई दिल्ली एशियाई खेलों में प्रदर्शनी खेल के रूप में दिखाई गई थी, पर प्रदर्शनी उपस्थिति में पदक नहीं मिलते।
खो-खो की उत्पत्ति कहां हुई और उसके नियम किसने बनाए?
खो-खो महाराष्ट्र में विकसित हुआ, और इसके पहले लिखित नियम 1914 में पुणे के डेक्कन जिमखाना ने बनाए। 1955 में बना भारतीय खो-खो महासंघ राष्ट्रीय संचालन संस्था बना और उसने पूरे देश में खेल के नियम एक समान किए।
इन दोनों खेलों की पेशेवर लीग कौन-सी हैं?
शहर आधारित फ्रैंचाइजी प्रतियोगिता प्रो कबड्डी लीग 2014 में शुरू हुई और उसने कबड्डी को टेलीविजन का पेशेवर खेल बना दिया। खो-खो को अपनी फ्रैंचाइजी लीग अल्टीमेट खो खो 2022 में मिली, और पहला खो खो विश्व कप जनवरी 2025 में नई दिल्ली में हुआ, जहां भारत ने पुरुष तथा महिला दोनों खिताब जीते।
स्रोत
- खेलो इंडिया कार्यक्रम और देशज खेल — युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय, भारत सरकार
- स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा (कक्षा XI), खेलकूद अध्याय — एनसीईआरटी





