खेलों में भारत के प्रथम और दिग्गज: संपूर्ण जीके नोट्स
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भारत के खेल प्रथम और दिग्गज: पहले ओलंपिक पदक व स्वर्ण, क्रिकेट तथा हॉकी की उपलब्धियां, शतरंज, बैडमिंटन और प्रसिद्ध उपनाम।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

स्थायी खेल सामान्य ज्ञान दो प्रकार के प्रश्नों पर खड़ा है: भारत के लिए किसने कौन सा काम सबसे पहले किया, और भारतीय खेल के बड़े नाम कौन हैं। दोनों सूचियां बंद हैं, मौसम के साथ नहीं बदलतीं, और जो अभ्यर्थी इन्हें एक बार याद कर ले वह वर्षों तक इनके प्रश्न हल कर सकता है। ये नोट्स ओलंपिक खेलों, क्रिकेट, हॉकी, बैडमिंटन, शतरंज, निशानेबाजी तथा पैरालंपिक से भारत के प्रथम तथ्य एकत्र करते हैं और फिर उन दिग्गजों तथा उन नामों को, जिनसे वे याद किए जाते हैं।
ओलंपिक खेलों में भारत के प्रथम
भारत की ओलंपिक कथा 1900 के पेरिस खेलों से आरंभ होती है, जहां नॉर्मन प्रिचार्ड अकेले उतरे और 200 मीटर दौड़ तथा 200 मीटर बाधा दौड़ में दो रजत पदक लेकर लौटे। वे आज भी भारत के प्रथम ओलंपिक पदक हैं। भारत ने पहला पूरा दल 1920 के एंटवर्प खेलों में भेजा, और 1928 के एम्स्टर्डम खेलों में पुरुष हॉकी टीम ने देश का पहला ओलंपिक स्वर्ण जीता।
| प्रथम | खिलाड़ी या टीम | खेल |
|---|---|---|
| प्रथम ओलंपिक पदक | नॉर्मन प्रिचार्ड, दो रजत | पेरिस 1900 |
| प्रथम ओलंपिक स्वर्ण | पुरुष हॉकी टीम | एम्स्टर्डम 1928 |
| स्वतंत्रता के बाद प्रथम व्यक्तिगत पदक | के. डी. जाधव, कुश्ती कांस्य | हेलसिंकी 1952 |
| प्रथम व्यक्तिगत रजत | राज्यवर्धन सिंह राठौड़, डबल ट्रैप निशानेबाजी | एथेंस 2004 |
| प्रथम व्यक्तिगत स्वर्ण | अभिनव बिंद्रा, 10 मीटर एयर राइफल | बीजिंग 2008 |
| प्रथम महिला पदक विजेता | कर्णम मल्लेश्वरी, भारोत्तोलन कांस्य | सिडनी 2000 |
| एथलेटिक्स में प्रथम पदक, वह भी स्वर्ण | नीरज चोपड़ा, भाला फेंक | टोक्यो 2020 |
| बैडमिंटन में प्रथम पदक | साइना नेहवाल, कांस्य | लंदन 2012 |
| मुक्केबाजी में प्रथम पदक | विजेंदर सिंह, कांस्य | बीजिंग 2008 |
| प्रथम पैरालंपिक स्वर्ण | मुरलीकांत पेटकर, तैराकी | हाइडलबर्ग 1972 |
पुरुष हॉकी टीम ने 1928 के एम्स्टर्डम से 1956 के मेलबर्न तक लगातार छह ओलंपिक स्वर्ण जीते, और उसमें 1964 का टोक्यो तथा 1980 का मॉस्को जोड़कर कुल आठ स्वर्ण हुए। लिएंडर पेस ने 1996 के अटलांटा में टेनिस का कांस्य जीतकर व्यक्तिगत पदकों का चौवालीस वर्ष का अंतराल तोड़ा। सुशील कुमार 2008 के कांस्य और 2012 के रजत के साथ दो ओलंपिक खेलों में व्यक्तिगत पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने। मैरी कॉम ने मुक्केबाजी में और साइना नेहवाल ने बैडमिंटन में 2012 के लंदन खेलों में कांस्य जीता, तथा पी. वी. सिंधु ने 2016 के रियो में बैडमिंटन का रजत और टोक्यो में कांस्य लिया। रियो में साक्षी मलिक ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं।
क्रिकेट और हॉकी के प्रथम
- भारत ने अपना पहला टेस्ट मैच 1932 में लॉर्ड्स पर खेला, जिसमें कप्तान सी. के. नायडू थे।
- लाला अमरनाथ ने भारत का पहला टेस्ट शतक 1933 में बॉम्बे में इंग्लैंड के विरुद्ध बनाया।
- भारत को पहली टेस्ट जीत 1952 में मद्रास में, फिर इंग्लैंड के विरुद्ध ही मिली।
- भारत ने 1983 का क्रिकेट विश्व कप कपिल देव के नेतृत्व में, 2007 का पहला विश्व ट्वेंटी20 एम. एस. धोनी के नेतृत्व में और 2011 का विश्व कप धोनी के नेतृत्व में अपनी भूमि पर जीता।
- सुनील गावस्कर विश्व के पहले बल्लेबाज थे जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में दस हजार रन पूरे किए।
- सचिन तेंदुलकर एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच में दोहरा शतक बनाने वाले पहले बल्लेबाज थे, जो उन्होंने 2010 में बनाया, और भारत रत्न पाने वाले पहले क्रिकेटर भी, 2014 में।
- अनिल कुंबले ने 1999 में दिल्ली में पाकिस्तान के विरुद्ध एक टेस्ट पारी में सभी दस विकेट लिए।
- भारत ने 1975 में कुआलालंपुर में अजीत पाल सिंह के नेतृत्व में पुरुष हॉकी विश्व कप जीता।
बैडमिंटन, शतरंज, निशानेबाजी और बिलियर्ड्स
प्रकाश पादुकोण 1980 में ऑल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैंपियनशिप जीतने वाले पहले भारतीय बने, और पुलेला गोपीचंद ने 2001 में यही कर दिखाया। साइना नेहवाल बैडमिंटन में विश्व की नंबर एक बनने वाली पहली भारतीय महिला थीं, और पी. वी. सिंधु 2019 में बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय। विश्वनाथन आनंद 1988 में भारत के पहले शतरंज ग्रैंडमास्टर बने और 2000 में विश्व चैंपियन, तथा डी. गुकेश ने दिसंबर 2024 में विश्व शतरंज चैंपियनशिप जीतकर सबसे कम आयु के विजेता होने का गौरव पाया। विल्सन जोन्स किसी भी खेल में विश्व चैंपियन बनने वाले पहले भारतीय थे, जिन्होंने 1958 में विश्व एमेच्योर बिलियर्ड्स खिताब जीता, और इस परंपरा को आगे माइकल फरेरा, गीत सेठी तथा पंकज आडवाणी ने बढ़ाया। अभिनव बिंद्रा ने अपने ओलंपिक स्वर्ण से पहले 2006 में निशानेबाजी की विश्व चैंपियनशिप जीत ली थी।
दिग्गज और उनके नाम
| खिलाड़ी | खेल | इस नाम से प्रसिद्ध |
|---|---|---|
| ध्यानचंद | हॉकी | हॉकी का जादूगर |
| मिल्खा सिंह | एथलेटिक्स | फ्लाइंग सिख, उड़न सिख |
| पी. टी. उषा | एथलेटिक्स | पय्योली एक्सप्रेस, गोल्डन गर्ल |
| सचिन तेंदुलकर | क्रिकेट | मास्टर ब्लास्टर, लिटिल मास्टर |
| कपिल देव | क्रिकेट | हरियाणा हरिकेन |
| कर्णम मल्लेश्वरी | भारोत्तोलन | आयरन लेडी |
| एम. सी. मैरी कॉम | मुक्केबाजी | मैग्निफिसेंट मैरी |
| वीरेंद्र सहवाग | क्रिकेट | नजफगढ़ का नवाब |
ध्यानचंद उन हॉकी टीमों में खेले जिन्होंने 1928, 1932 और 1936 में स्वर्ण जीता, और उनका जन्मदिन 29 अगस्त राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिस दिन राष्ट्रीय खेल पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। बलबीर सिंह सीनियर ने भी 1948, 1952 और 1956 में तीन हॉकी स्वर्ण जीते तथा 1952 के फाइनल में पांच गोल किए। मिल्खा सिंह 1960 के रोम ओलंपिक में 400 मीटर में चौथे स्थान पर रहे और 1958 के कार्डिफ राष्ट्रमंडल खेलों में एथलेटिक्स का व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय बने। पी. टी. उषा 1984 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में 400 मीटर बाधा दौड़ का कांस्य सौवें हिस्से के अंतर से चूक गईं, जो भारतीय एथलेटिक्स की सबसे निकट चूक है। अंजू बॉबी जॉर्ज ने 2003 में पेरिस में लंबी कूद का कांस्य जीतकर विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत का पहला पदक दिलाया। बछेंद्री पाल 1984 में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। पैरालंपिक खिलाड़ियों में देवेंद्र झाझड़िया दो पैरालंपिक स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय हैं, जो उन्होंने 2004 तथा 2016 में भाला फेंक में जीते, दीपा मलिक पैरालंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं, और अवनि लेखरा टोक्यो में निशानेबाजी में पैरालंपिक स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला।
राष्ट्रीय खेल पुरस्कार
वर्ष 1961 में स्थापित अर्जुन पुरस्कार कई वर्षों तक लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन को सम्मानित करता है। वर्ष 1985 में स्थापित द्रोणाचार्य पुरस्कार प्रशिक्षकों को दिया जाता है। देश का सर्वोच्च खेल सम्मान 1991-92 में स्थापित हुआ और अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार कहलाता है, जो सबसे पहले विश्वनाथन आनंद को मिला। आजीवन उपलब्धि के लिए ध्यानचंद पुरस्कार 2002 में स्थापित हुआ, और राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार खेल को बढ़ाने वाले संस्थानों को दिया जाता है।
परीक्षा की दृष्टि से
यह प्रकरण एक अंक के मिलान प्रश्नों के रूप में पूछा जाता है: कोई प्रथम किस वर्ष, कोई खिलाड़ी किस खेल का, या कोई उपनाम किस नाम का। परीक्षक जिन वर्षों पर लौटते रहते हैं वे हैं 1900, 1928, 1952, 1980, 1983, 2000, 2008 और 2020-21, और पुरस्कारों के प्रश्न पूछते हैं कि कौन सा सम्मान प्रशिक्षक को, कौन सा खिलाड़ी को और कौन सा सबसे पहले स्थापित हुआ। सामान्य जाल हैं पहले हॉकी स्वर्ण के लिए 1928 के स्थान पर 1920, पहले व्यक्तिगत स्वर्ण के रूप में राठौड़ का 2004 का रजत, ऑल इंग्लैंड खिताब में पादुकोण के स्थान पर गोपीचंद, तथा ध्यानचंद पुरस्कार को उन्हीं के नाम वाले खेल रत्न से मिला देना। प्रथमों को तालिका रूप में और उपनामों को जोड़ी रूप में याद करें।
महत्वपूर्ण तथ्य
| प्रथम ओलंपिक पदक | नॉर्मन प्रिचार्ड, दो रजत, पेरिस 1900 |
|---|---|
| प्रथम ओलंपिक दल | एंटवर्प 1920 |
| प्रथम ओलंपिक स्वर्ण | पुरुष हॉकी, एम्स्टर्डम 1928 |
| लगातार हॉकी स्वर्ण | छह, 1928 से 1956; 1964 और 1980 सहित कुल आठ |
| स्वतंत्रता के बाद प्रथम व्यक्तिगत पदक | के. डी. जाधव, कुश्ती कांस्य, हेलसिंकी 1952 |
| प्रथम व्यक्तिगत रजत | राज्यवर्धन सिंह राठौड़, एथेंस 2004 |
| प्रथम व्यक्तिगत स्वर्ण | अभिनव बिंद्रा, 10 मीटर एयर राइफल, बीजिंग 2008 |
| प्रथम महिला ओलंपिक पदक विजेता | कर्णम मल्लेश्वरी, भारोत्तोलन, सिडनी 2000 |
| एथलेटिक्स में प्रथम ओलंपिक पदक | नीरज चोपड़ा, भाला फेंक स्वर्ण, टोक्यो 2020 |
| प्रथम टेस्ट मैच | 1932, लॉर्ड्स, कप्तान सी. के. नायडू |
| भारत के लिए प्रथम टेस्ट शतक | लाला अमरनाथ, 1933, बॉम्बे |
| प्रथम क्रिकेट विश्व कप विजय | 1983, कप्तान कपिल देव |
| हॉकी विश्व कप विजय | 1975, कुआलालंपुर, कप्तान अजीत पाल सिंह |
| प्रथम ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन खिताब | प्रकाश पादुकोण, 1980 |
| प्रथम शतरंज ग्रैंडमास्टर | विश्वनाथन आनंद, 1988 |
| किसी भी खेल में प्रथम विश्व चैंपियन | विल्सन जोन्स, बिलियर्ड्स, 1958 |
| राष्ट्रीय खेल दिवस | 29 अगस्त, ध्यानचंद का जन्मदिन |
| प्रथम खेल रत्न | विश्वनाथन आनंद, 1991-92 |
| प्रथम पैरालंपिक स्वर्ण | मुरलीकांत पेटकर, तैराकी, 1972 |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
1900 के पेरिस ओलंपिक में दो रजत पदक जीतकर भारत के पहले ओलंपिक पदक किसने दिलाए?
- A.नॉर्मन प्रिचार्ड
- B.के. डी. जाधव
- C.ध्यानचंद
- D.मिल्खा सिंह
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, नॉर्मन प्रिचार्ड है। प्रिचार्ड 1900 के पेरिस खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले एकमात्र प्रतिभागी थे और उन्होंने 200 मीटर दौड़ तथा 200 मीटर बाधा दौड़, दोनों में दूसरा स्थान पाया, इसलिए भारत के पहले दो ओलंपिक पदक रजत थे और एथलेटिक्स में आए। विकल्प B, के. डी. जाधव, ने 1952 के हेलसिंकी में कुश्ती का कांस्य जीता, जो स्वतंत्र भारत का पहला व्यक्तिगत ओलंपिक पदक था, परंतु भारत का पहला पदक नहीं। विकल्प C, ध्यानचंद, उन हॉकी टीमों में थे जिन्होंने 1928, 1932 तथा 1936 में स्वर्ण जीता, अर्थात उनका पहला पदक प्रिचार्ड से अट्ठाईस वर्ष बाद आया। विकल्प D, मिल्खा सिंह, ने कोई ओलंपिक पदक नहीं जीता; वे 1960 के रोम ओलंपिक में 400 मीटर में चौथे स्थान पर रहे। तीनों वर्ष अलग रखें: 1900 पहले पदक, 1928 पहला स्वर्ण और 1952 स्वतंत्रता के बाद पहला व्यक्तिगत पदक।
किस ओलंपिक संस्करण में भारत ने पुरुष हॉकी में अपना पहला स्वर्ण पदक जीता?
- A.एंटवर्प 1920
- B.एम्स्टर्डम 1928
- C.लॉस एंजिल्स 1932
- D.बर्लिन 1936
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, एम्स्टर्डम 1928 है। भारत ने 1928 में पहली बार ओलंपिक खेलों में हॉकी टीम भेजी और पूरी प्रतियोगिता में एक भी गोल खाए बिना स्वर्ण जीता, जिससे लगातार छह हॉकी स्वर्णों की वह श्रृंखला आरंभ हुई जो 1932, 1936, 1948, 1952 और 1956 तक चली। विकल्प A, एंटवर्प 1920, वह आयोजन है जिसमें भारत ने पहली बार खिलाड़ियों का दल भेजा, परंतु उसमें भारत की हॉकी भागीदारी नहीं थी और कोई पदक नहीं आया। विकल्प C, लॉस एंजिल्स 1932, तथा विकल्प D, बर्लिन 1936, दूसरे और तीसरे हॉकी स्वर्ण थे, और 1936 विशेष रूप से प्रसिद्ध है क्योंकि उसमें ध्यानचंद ने टीम की कप्तानी की थी। परीक्षक का जाल यही है कि वह पहले हॉकी स्वर्ण के लिए 1928 के स्थान पर 1920 रख देता है, जो केवल पहले दल का वर्ष है। यह भी स्मरण रखें कि 1948 का लंदन स्वर्ण स्वतंत्र भारत के नाम से जीता गया पहला ओलंपिक स्वर्ण था।
ओलंपिक खेलों में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय कौन बने?
- A.राज्यवर्धन सिंह राठौड़
- B.सुशील कुमार
- C.अभिनव बिंद्रा
- D.नीरज चोपड़ा
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, अभिनव बिंद्रा है। बिंद्रा ने 2008 के बीजिंग ओलंपिक में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा जीती, और वह आज भी भारत का पहला व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण है; इसी स्पर्धा में वे 2006 में विश्व चैंपियन भी बन चुके थे। विकल्प A, राज्यवर्धन सिंह राठौड़, ने 2004 के एथेंस में डबल ट्रैप निशानेबाजी का रजत जीता, जो भारत का पहला व्यक्तिगत ओलंपिक रजत था, और वे सामान्य भ्रमजाल हैं क्योंकि उनका पदक भी निशानेबाजी में आया। विकल्प B, सुशील कुमार, ने 2008 में कुश्ती का कांस्य और 2012 में रजत जीता, जिससे वे दो ओलंपिक में व्यक्तिगत पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने, पर उनमें कोई स्वर्ण नहीं था। विकल्प D, नीरज चोपड़ा, ने टोक्यो 2020 में भाला फेंक का स्वर्ण जीता, जो एथलेटिक्स में भारत का पहला ओलंपिक पदक था, पर वह बिंद्रा के तेरह वर्ष बाद आया।
ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला कर्णम मल्लेश्वरी किस खेल से जुड़ी हैं?
- A.एथलेटिक्स
- B.भारोत्तोलन
- C.निशानेबाजी
- D.बैडमिंटन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, भारोत्तोलन है। मल्लेश्वरी ने 2000 के सिडनी ओलंपिक में 69 किलोग्राम भार वर्ग में कांस्य पदक जीता और इस प्रकार कोई भी ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं, इसी कारण उन्हें भारतीय खेल की आयरन लेडी कहा जाता है। विकल्प A, एथलेटिक्स, गलत है: भारतीय महिलाओं में एथलेटिक्स में सबसे निकट पी. टी. उषा पहुंचीं, जो 1984 के लॉस एंजिल्स में कांस्य से सौवें हिस्से के अंतर से चूक गईं। विकल्प C, निशानेबाजी, ने 2008 में अभिनव बिंद्रा के माध्यम से भारत को पहला व्यक्तिगत स्वर्ण दिया, जो पुरुष वर्ग था। विकल्प D, बैडमिंटन, में साइना नेहवाल का 2012 का कांस्य और पी. वी. सिंधु का 2016 का रजत आया, दोनों मल्लेश्वरी के बाद। वर्ष 2000, भारोत्तोलन और सिडनी को एक साथ याद रखें।
भारत में जिनका जन्मदिन राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है, वे ध्यानचंद किस खेल से जुड़े हैं?
- A.फुटबॉल
- B.हॉकी
- C.कुश्ती
- D.क्रिकेट
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, हॉकी है। ध्यानचंद उन भारतीय हॉकी टीमों में खेले जिन्होंने 1928, 1932 तथा 1936 में ओलंपिक स्वर्ण जीता, और बर्लिन में उन्होंने टीम की कप्तानी की; गेंद पर उनके नियंत्रण ने उन्हें हॉकी का जादूगर कहलवाया। उनका जन्मदिन 29 अगस्त हर वर्ष राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिस अवसर पर राष्ट्रीय खेल पुरस्कार दिए जाते हैं, और उनमें सर्वोच्च पुरस्कार अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार कहलाता है। विकल्प A, फुटबॉल, सैयद अब्दुल रहीम और चुन्नी गोस्वामी जैसे नामों का क्षेत्र है। विकल्प C, कुश्ती, के. डी. जाधव और सुशील कुमार का खेल है। विकल्प D, क्रिकेट, से उनका कोई संबंध नहीं। याद रखने की श्रृंखला है ध्यानचंद, हॉकी, 29 अगस्त और राष्ट्रीय खेल दिवस। यह भी जोड़ लें कि बलबीर सिंह सीनियर ने 1948, 1952 तथा 1956 में तीन हॉकी स्वर्ण जीते और 1952 के फाइनल में पांच गोल किए थे।
ऑल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैंपियनशिप जीतने वाले पहले भारतीय कौन थे?
- A.पुलेला गोपीचंद
- B.प्रकाश पादुकोण
- C.नंदू नाटेकर
- D.सैयद मोदी
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, प्रकाश पादुकोण है। पादुकोण ने 1980 में ऑल इंग्लैंड ओपन जीता, जो विश्व की सबसे पुरानी और उस समय की सबसे प्रतिष्ठित बैडमिंटन प्रतियोगिता थी, और वे पुरुष वर्ग में विश्व की नंबर एक रैंकिंग पाने वाले पहले भारतीय भी थे। विकल्प A, पुलेला गोपीचंद, ने यही खिताब 2001 में जीता और इस प्रकार वे ऐसा करने वाले केवल दूसरे भारतीय बने, इसी कारण वे यहां सबसे आम गलत उत्तर हैं; उन्होंने बाद में साइना नेहवाल तथा पी. वी. सिंधु को प्रशिक्षित किया। विकल्प C, नंदू नाटेकर, उन्नीस सौ पचास के दशक के अग्रणी भारतीय खिलाड़ी थे और अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिताब जीतने वाले पहले भारतीय, पर ऑल इंग्लैंड नहीं। विकल्प D, सैयद मोदी, अस्सी के दशक के राष्ट्रीय चैंपियन थे। क्रम याद रखें: अग्रणी नाटेकर, 1980 में पादुकोण और 2001 में गोपीचंद।
भारत के पहले शतरंज ग्रैंडमास्टर कौन बने?
- A.प्रवीण ठिपसे
- B.दिव्येंदु बरुआ
- C.विश्वनाथन आनंद
- D.कोनेरू हंपी
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, विश्वनाथन आनंद है। आनंद ने 1988 में ग्रैंडमास्टर की उपाधि प्राप्त की और ऐसा करने वाले पहले भारतीय बने, आगे 2000 में विश्व चैंपियन बने तथा 2007 से 2013 तक निर्विवाद विश्व खिताब अपने पास रखा। वे देश के सर्वोच्च खेल सम्मान के भी पहले प्राप्तकर्ता थे, जो 1991-92 में स्थापित हुआ और अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार कहलाता है। विकल्प A, प्रवीण ठिपसे, तथा विकल्प B, दिव्येंदु बरुआ, उसी पीढ़ी के सशक्त भारतीय खिलाड़ी थे और आनंद के बाद ग्रैंडमास्टर बने, इसी कारण वे भ्रमजाल के रूप में रखे जाते हैं। विकल्प D, कोनेरू हंपी, भारत की श्रेष्ठ महिला खिलाड़ियों में हैं और ग्रैंडमास्टर भी, परंतु वे बाद की पीढ़ी की हैं। याद रखने योग्य पंक्ति है पहली ग्रैंडमास्टर उपाधि के लिए 1988 और विश्व खिताब के लिए 2000।
भारत ने 1983 में पहली बार क्रिकेट विश्व कप किसकी कप्तानी में जीता?
- A.सुनील गावस्कर
- B.कपिल देव
- C.अजीत वाडेकर
- D.मोहिंदर अमरनाथ
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, कपिल देव है। भारत ने 1983 में लॉर्ड्स के फाइनल में वेस्टइंडीज को हराया और उस समय टीम के कप्तान कपिल देव थे; वह प्रतियोगिता उनके टनब्रिज वेल्स में जिम्बाब्वे के विरुद्ध नाबाद 175 रन के लिए भी याद की जाती है। विकल्प A, सुनील गावस्कर, ने अन्य अवसरों पर भारत की कप्तानी की और वे टेस्ट क्रिकेट में दस हजार रन बनाने वाले विश्व के पहले बल्लेबाज थे, परंतु 1983 के फाइनल में कप्तान नहीं थे। विकल्प C, अजीत वाडेकर, ने 1971 में वेस्टइंडीज तथा इंग्लैंड में प्रसिद्ध श्रृंखला जीतों में टीम का नेतृत्व किया, जो एक भिन्न उपलब्धि है। विकल्प D, मोहिंदर अमरनाथ, 1983 के सेमीफाइनल और फाइनल दोनों में मैन ऑफ द मैच रहे पर उन्होंने कभी कप्तानी नहीं की। तीनों विश्व विजय क्रम में रखें: 1983 कपिल देव, 2007 का विश्व ट्वेंटी20 और 2011 का विश्व कप एम. एस. धोनी।
भारत में खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रशिक्षकों को कौन सा पुरस्कार दिया जाता है?
- A.अर्जुन पुरस्कार
- B.द्रोणाचार्य पुरस्कार
- C.ध्यानचंद पुरस्कार
- D.खेल रत्न पुरस्कार
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, द्रोणाचार्य पुरस्कार है। वर्ष 1985 में स्थापित और महाभारत के धनुर्विद्या के आचार्य के नाम पर रखा गया यह पुरस्कार उन प्रशिक्षकों को दिया जाता है जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक विजेता तैयार किए हों। विकल्प A, अर्जुन पुरस्कार, जो 1961 में स्थापित हुआ, कई वर्षों तक लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए खिलाड़ियों को मिलता है, प्रशिक्षकों को नहीं। विकल्प C, ध्यानचंद पुरस्कार, जो 2002 में स्थापित हुआ, उन सेवानिवृत्त खिलाड़ियों के लिए आजीवन उपलब्धि सम्मान है जो खेल में योगदान देते रहते हैं। विकल्प D, खेल रत्न पुरस्कार, जो 1991-92 में स्थापित हुआ और अब मेजर ध्यानचंद के नाम से जाना जाता है, देश का सर्वोच्च खेल सम्मान है और उसके पहले प्राप्तकर्ता विश्वनाथन आनंद थे। चारों की घोषणा 29 अगस्त को होती है, इसलिए इन्हें उद्देश्य से अलग करें।
भारतीय खेल में पय्योली एक्सप्रेस के नाम से किसे याद किया जाता है?
- A.अंजू बॉबी जॉर्ज
- B.पी. टी. उषा
- C.शाइनी विल्सन
- D.हिमा दास
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, पी. टी. उषा है। उषा केरल के कोझिकोड जिले के पय्योली से आती हैं, और जिस गति से वे फर्राटा दौड़ तथा 400 मीटर बाधा दौड़ दौड़ती थीं उसी ने उन्हें पय्योली एक्सप्रेस नाम दिलाया; एशियाई खेलों तथा एशियाई चैंपियनशिप के लंबे खिताबी सिलसिले के कारण उन्हें भारतीय एथलेटिक्स की गोल्डन गर्ल भी कहा जाता है। उनकी सबसे याद की जाने वाली दौड़ 1984 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक की 400 मीटर बाधा दौड़ का फाइनल है, जिसमें वे कांस्य से सौवें हिस्से के अंतर पर रहकर चौथे स्थान पर आईं। विकल्प A, अंजू बॉबी जॉर्ज, ने 2003 में पेरिस में लंबी कूद का कांस्य जीतकर विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत का पहला पदक दिलाया। विकल्प C, शाइनी विल्सन, उसी दौर की श्रेष्ठ मध्य दूरी धावक थीं। विकल्प D, हिमा दास, बाद की फर्राटा धावक हैं।
पैरालंपिक खेलों में दो स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी कौन थे?
- A.मुरलीकांत पेटकर
- B.देवेंद्र झाझड़िया
- C.दीपा मलिक
- D.अवनि लेखरा
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, देवेंद्र झाझड़िया है। झाझड़िया ने 2004 के एथेंस और फिर 2016 के रियो पैरालंपिक में भाला फेंक का स्वर्ण जीता और इस प्रकार दो स्वर्ण पदक वाले पहले भारतीय पैरालंपियन बने। विकल्प A, मुरलीकांत पेटकर, सशक्त भ्रमजाल हैं क्योंकि उन्होंने 1972 के हाइडलबर्ग में तैराकी में भारत का सर्वप्रथम पैरालंपिक स्वर्ण जीता था, परंतु वह एक ही खिताब था। विकल्प C, दीपा मलिक, 2016 के रियो में गोला फेंक का रजत जीतकर पैरालंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं, जो एक भिन्न प्रकार का प्रथम है। विकल्प D, अवनि लेखरा, टोक्यो खेलों में निशानेबाजी में पैरालंपिक स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। चारों प्रथम अलग-अलग याद रखें: पहला स्वर्ण पेटकर, दो स्वर्ण झाझड़िया, महिला का पहला पदक मलिक और महिला का पहला स्वर्ण लेखरा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत का पहला ओलंपिक स्वर्ण पदक किसने जीता?
भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने, 1928 के एम्स्टर्डम खेलों में। यह ओलंपिक हॉकी में भारत की पहली भागीदारी थी और टीम ने एक भी गोल खाए बिना जीत दर्ज की, जहां से लगातार छह स्वर्ण पदकों की श्रृंखला 1956 के मेलबर्न तक चली। भारत का पहला व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण बहुत बाद में आया, जब अभिनव बिंद्रा ने 2008 के बीजिंग में 10 मीटर एयर राइफल जीती।
भारत में 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस क्यों मनाया जाता है?
यह हॉकी खिलाड़ी ध्यानचंद का जन्मदिन है, जिन्होंने 1928, 1932 और 1936 में ओलंपिक स्वर्ण जीता और जिन्हें हॉकी का जादूगर कहा जाता है। इसी दिन राष्ट्रीय खेल पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं, जिनमें मेजर ध्यानचंद खेल रत्न, अर्जुन, द्रोणाचार्य तथा ध्यानचंद पुरस्कार सम्मिलित हैं।
ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला कौन थीं?
कर्णम मल्लेश्वरी, जिन्होंने 2000 के सिडनी ओलंपिक में भारोत्तोलन का कांस्य पदक जीता और जिन्हें आयरन लेडी कहा जाता है। आगे पी. वी. सिंधु 2016 के रियो में बैडमिंटन का रजत जीतकर ओलंपिक रजत पाने वाली पहली भारतीय महिला बनीं, और साइना नेहवाल ने 2012 के लंदन में बैडमिंटन का भारत का पहला ओलंपिक पदक, कांस्य, जीता था।
ध्यानचंद, मिल्खा सिंह और पी. टी. उषा के उपनाम क्या हैं?
ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर, मिल्खा सिंह को फ्लाइंग सिख अर्थात उड़न सिख, और पी. टी. उषा को पय्योली एक्सप्रेस तथा भारतीय एथलेटिक्स की गोल्डन गर्ल कहा जाता है। याद रखने योग्य अन्य जोड़ियां हैं कपिल देव हरियाणा हरिकेन, कर्णम मल्लेश्वरी आयरन लेडी और मैरी कॉम मैग्निफिसेंट मैरी।
शतरंज और बैडमिंटन में भारत के कौन से प्रथम याद रखने चाहिए?
शतरंज में विश्वनाथन आनंद 1988 में भारत के पहले ग्रैंडमास्टर बने, 2000 में विश्व चैंपियन और पहले खेल रत्न विजेता भी; डी. गुकेश ने दिसंबर 2024 में विश्व शतरंज चैंपियनशिप जीती। बैडमिंटन में प्रकाश पादुकोण ने 1980 में और पुलेला गोपीचंद ने 2001 में ऑल इंग्लैंड खिताब जीता, तथा पी. वी. सिंधु ने 2019 में बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण जीता।
स्रोत
- राष्ट्रीय खेल पुरस्कार: योजना एवं दिशानिर्देश — युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार
- ओलंपिक खेलों में भारत — भारतीय ओलंपिक संघ
- वार्षिक रिपोर्ट: खेल विभाग — युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार





