मुख्य सामग्री पर जाएं
GK24

UPSC पिछले वर्ष के GK प्रश्न

UPSC की परीक्षाओं, UPSC सिविल सेवा और UPSC CAPF, के आधिकारिक पेपरों में पूछे गए सामान्य ज्ञान के प्रश्न, एक जगह। हर प्रश्न के साथ सही उत्तर, व्याख्या और यह जानकारी है कि वह किस परीक्षा में, किस वर्ष और किस शिफ्ट में पूछा गया था।

साल के अनुसार प्रश्न देखने के लिए नीचे वर्ष चुनें, या किसी एक परीक्षा के प्रश्नों के लिए उसका पेज खोलें। एक परीक्षा के पुराने प्रश्न दूसरी परीक्षा में भी दोहराए जाते हैं, इसलिए पूरे UPSC परिवार के प्रश्न साथ में दोहराना तैयारी का तेज तरीका है।

पिछले वर्ष के प्रश्न

Q161.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 8 Aug 2021आसान

किसानों को प्रोत्साहन देने के लिए प्रत्येक वर्ष बुवाई के मौसम से पहले सरकार द्वारा घोषित की जाने वाली कीमत को क्या कहते हैं?

  1. A.बफर कीमत
  2. B.निर्गम कीमत
  3. C.न्यूनतम समर्थन कीमत
  4. D.उचित निर्वाह कीमत
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. न्यूनतम समर्थन कीमत

व्याख्या

सही उत्तर है C, न्यूनतम समर्थन कीमत। MSP बुवाई से पहले घोषित होता है, ताकि किसान जान सकें कि सरकार उनकी फसल कम से कम किस कीमत पर खरीदेगी। केंद्र सरकार इसे 1965 में बने कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिश पर तय करती है और अंतिम मंज़ूरी आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति देती है। यह खरीफ और रबी फसलों के लिए अलग-अलग घोषित होता है, जबकि गन्ने के लिए इसकी जगह उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) तय होता है। हरित क्रांति की शुरुआत में 1966-67 में गेहूँ पहली फसल थी जिसे MSP मिला। विकल्प A गलत है, क्योंकि बफर स्टॉक खाद्य सुरक्षा के लिए सरकार के पास रखा अनाज है और किसानों के लिए कोई "बफर कीमत" घोषित नहीं होती। विकल्प B गलत है, क्योंकि निर्गम कीमत वह दर है जिस पर भारतीय खाद्य निगम सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए राज्यों को अनाज देता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि "उचित निर्वाह कीमत" नाम की कोई सरकारी कीमत है ही नहीं। परीक्षा टिप: MSP की सिफारिश CACP करता है और मंज़ूरी CCEA देती है; गन्ने के लिए FRP।

Q162.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 8 Aug 2021मध्यम

उस मात्रा को क्या कहते हैं, जिससे वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद का संतुलन स्तर, सकल घरेलू उत्पाद के पूर्ण रोजगार स्तर से अधिक हो जाता है?

  1. A.मंदी अंतराल
  2. B.मुद्रास्फीति अंतराल
  3. C.आय गुणक
  4. D.आभ्यंतरिक स्थिरक
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मुद्रास्फीति अंतराल

व्याख्या

सही उत्तर है B, मुद्रास्फीति अंतराल। जब मांग अर्थव्यवस्था से पूर्ण रोज़गार की क्षमता से ज़्यादा उत्पादन करवाना चाहती है, तो अतिरिक्त मांग केवल कीमतें बढ़ाती है। पूर्ण रोज़गार GDP, जिसे संभावित GDP भी कहते हैं, वह उत्पादन है जो सभी संसाधनों के उपयोग से हो सकता है। अगर कुल मांग इतनी अधिक हो कि संतुलन वास्तविक GDP इस स्तर से ऊपर चला जाए, तो यह अंतर मुद्रास्फीति अंतराल है। क्षमता से आगे वास्तविक उत्पादन नहीं बढ़ सकता, इसलिए यह अधिकता बढ़ती कीमतों के रूप में दिखती है। यह विचार जे.एम. कीन्स का है, जिन्होंने 1940 की पुस्तिका "हाउ टू पे फॉर द वॉर" में इसका प्रयोग किया; इसका इलाज ऊँचे कर, कम सरकारी खर्च या सख्त मौद्रिक नीति से मांग घटाना है। विकल्प A गलत है, क्योंकि मंदी अंतराल उलटी स्थिति है, जब संतुलन GDP पूर्ण रोज़गार स्तर से नीचे रहता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि आय गुणक बताता है कि नए खर्च के हर रुपये से आय कितनी बढ़ती है। विकल्प D गलत है, क्योंकि स्वतः स्थिरक प्रगतिशील कर जैसे साधन हैं, जो इन अंतरालों को कम करते हैं। परीक्षा टिप: उत्पादन क्षमता से ऊपर हो तो मुद्रास्फीति अंतराल, नीचे हो तो मंदी अंतराल।

Q163.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 8 Aug 2021मध्यम

किसी अर्थव्यवस्था में राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा स्वतः स्थिरकारक (ऑटोमैटिक स्टेबिलाइजर) के रूप में कार्य करता है?

  1. A.वैयक्तिक आयकर
  2. B.बैंक का प्रतिवर्ती रेपो दर (रिवर्स रेपो रेट)
  3. C.खुला बाजार परिचालन
  4. D.बॉन्ड कीमत
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. वैयक्तिक आयकर

व्याख्या

सही उत्तर है A, वैयक्तिक आयकर। प्रगतिशील आयकर आय बढ़ने पर ज़्यादा और आय घटने पर कम हिस्सा लेता है, इसके लिए सरकार को कोई नया फैसला नहीं करना पड़ता। ऐसे उपायों को स्वतः या अंतर्निहित स्थिरकारक कहते हैं, क्योंकि वे तेज़ी और मंदी दोनों को अपने-आप नरम करते हैं। तेज़ी में बढ़ती आय लोगों को ऊँचे कर स्लैब में ले जाती है, कर वसूली आय से तेज़ बढ़ती है और खर्च ठंडा पड़ता है। मंदी में वसूली आय से तेज़ घटती है और लोगों के हाथ में ज़्यादा पैसा बचता है। बेरोज़गारी भत्ता बजट के खर्च वाले पक्ष में यही काम करता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि रिवर्स रेपो दर भारतीय रिज़र्व बैंक सोच-समझकर लिए गए नीतिगत फैसले से बदलता है, इसलिए यह विवेकाधीन मौद्रिक नीति है। विकल्प C गलत है, क्योंकि खुला बाज़ार परिचालन, यानी RBI द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री, भी सोचा-समझा नीतिगत कदम है। विकल्प D गलत है, क्योंकि बॉन्ड की कीमत बाज़ार का परिणाम है, नीति का साधन नहीं। परीक्षा टिप: स्वतः स्थिरकारक को किसी फैसले की ज़रूरत नहीं; प्रगतिशील कर और बेरोज़गारी भत्ता इसके क्लासिक उदाहरण हैं।

Q164.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 18 Aug 2019आसान

मांग की कीमत लोच शून्य होने (जीरो प्राइस इलास्टिसिटी ऑफ डिमांड) का तात्पर्य है

  1. A.कीमत में जो कुछ भी परिवर्तन हो, मांग में बिलकुल परिवर्तन नहीं होता
  2. B.कीमत में एक छोटे परिवर्तन पर, मांग में एक छोटा परिवर्तन होता है
  3. C.कीमत में एक छोटे परिवर्तन पर, मांग में एक विशाल परिवर्तन होता है
  4. D.कीमत में एक बड़े परिवर्तन पर, मांग में एक छोटा परिवर्तन होता है
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. कीमत में जो कुछ भी परिवर्तन हो, मांग में बिलकुल परिवर्तन नहीं होता

व्याख्या

सही उत्तर है A, कीमत में जो कुछ भी परिवर्तन हो, मांग में बिलकुल परिवर्तन नहीं होता। लोच बताती है कि कीमत बदलने पर मांग की मात्रा कितनी बदलती है, और शून्य लोच का अर्थ है कोई प्रतिक्रिया नहीं। मांग की कीमत लोच, मांग की मात्रा में प्रतिशत परिवर्तन को कीमत में प्रतिशत परिवर्तन से भाग देकर निकलती है। जब यह शून्य हो, तो मांग पूर्णतः बेलोचदार होती है और मांग वक्र एक खड़ी सीधी रेखा होता है। इंसुलिन जैसी जीवनरक्षक दवाएँ इसके सबसे करीब हैं, क्योंकि मरीज़ कीमत कुछ भी हो, उतनी ही खुराक खरीदता है। दूसरे छोर पर पूर्णतः लोचदार मांग, जिसकी लोच अनंत होती है, क्षैतिज मांग वक्र देती है। विकल्प B गलत है, क्योंकि मांग में कितना भी छोटा परिवर्तन हो, लोच शून्य से अधिक हो जाती है। विकल्प C गलत है, क्योंकि छोटे कीमत परिवर्तन पर बड़ी प्रतिक्रिया लोचदार मांग है, जिसकी लोच एक से अधिक होती है। विकल्प D गलत है, क्योंकि बड़े कीमत परिवर्तन पर छोटी प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत बेलोचदार मांग है, जिसकी लोच शून्य और एक के बीच होती है। परीक्षा टिप: शून्य लोच का वक्र खड़ा, अनंत लोच का वक्र क्षैतिज।

Q165.भूगोलपूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 8 Aug 2021आसान

भारत में निम्नलिखित में से कौन-सा एकमात्र प्रमुख नदी पत्तन है?

  1. A.मुरगाँव (मोरमुगाँव)
  2. B.दीनदयाल
  3. C.कोलकाता
  4. D.पारादीप
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. कोलकाता

व्याख्या

सही उत्तर है C, कोलकाता। कोलकाता भारत का अकेला प्रमुख बंदरगाह है जो नदी पर बना है; यह हुगली नदी पर समुद्र से लगभग 200 किमी भीतर स्थित है। 1870 में यह पोर्ट ट्रस्ट बना और 2020 से इसका नाम श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट है। यह दोहरी व्यवस्था पर चलता है: कोलकाता डॉक सिस्टम छोटे जहाज़ संभालता है, जबकि समुद्र के पास स्थित हल्दिया डॉक कॉम्प्लेक्स बड़े जहाज़ों के लिए है। नदी की गाद चैनल को उथला रखती है, इसलिए लगातार ड्रेजिंग करनी पड़ती है, और फरक्का बैराज का एक उद्देश्य गंगा का अधिक पानी हुगली में भेजकर गाद बहाना भी था। विकल्प A गलत है, क्योंकि मुरगाँव गोवा में जुआरी नदी के मुहाने पर प्राकृतिक बंदरगाह है, जो लौह अयस्क निर्यात के लिए जाना जाता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि दीनदयाल (पहले कांडला) गुजरात में कच्छ की खाड़ी पर ज्वारीय बंदरगाह है। विकल्प D गलत है, क्योंकि पारादीप ओडिशा तट पर गहरे पानी वाला समुद्री बंदरगाह है। परीक्षा टिप: एकमात्र नदी पर बना प्रमुख बंदरगाह हुगली पर कोलकाता है और हल्दिया उसका गहरे पानी वाला डॉक है।

Q166.भूगोलपूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 8 Aug 2021मध्यम

सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :

सूची-I (सहायक नदी)

A. सतलुज

B. कोसी

C. तीस्ता

D. चंबल

सूची-II (नदी)

1. यमुना

2. ब्रह्मपुत्र

3. गंगा

4. सिंधु

कूट :

  1. A.A-1, B-3, C-2, D-4
  2. B.A-1, B-2, C-3, D-4
  3. C.A-4, B-3, C-2, D-1
  4. D.A-4, B-2, C-3, D-1
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. A-4, B-3, C-2, D-1

व्याख्या

सही उत्तर है C, A-4, B-3, C-2, D-1। सतलुज सिंधु में, कोसी गंगा में, तीस्ता ब्रह्मपुत्र में और चंबल यमुना में मिलती है। सतलुज तिब्बत में मानसरोवर के पास राकस ताल के निकट से निकलती है, शिपकी ला से भारत में आती है और सिंधु तंत्र की पंजाब की पाँच नदियों में सबसे पूर्वी है; भाखड़ा बाँध इसी पर है। बाढ़ और बार-बार रास्ता बदलने के कारण "बिहार का शोक" कहलाने वाली कोसी बिहार में कुरसेला के पास गंगा में मिलती है। सिक्किम की जीवनरेखा तीस्ता उत्तर बंगाल से होकर बांग्लादेश जाती है और वहाँ ब्रह्मपुत्र से मिलती है। चंबल मध्य प्रदेश में महू के पास से निकलती है, प्रसिद्ध बीहड़ बनाती है और उत्तर प्रदेश के इटावा ज़िले में यमुना से मिलती है। विकल्प A गलत है, क्योंकि इसमें सतलुज को यमुना से और चंबल को सिंधु से जोड़ा गया है। विकल्प B गलत है, क्योंकि इसमें कोसी को ब्रह्मपुत्र और तीस्ता को गंगा से भी जोड़ा गया है। विकल्प D गलत है, क्योंकि इसमें कोसी और तीस्ता आपस में बदल दी गई हैं। परीक्षा टिप: सतलुज-सिंधु, कोसी-गंगा, तीस्ता-ब्रह्मपुत्र, चंबल-यमुना।

Q167.भूगोलपूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 8 Aug 2021आसान

नदी मार्ग में, अंततः, जब निक्षेपण से जीर्ण विसर्प (ओल्ड मिएंडर) अवरुद्ध हो जाता है, तो निम्नलिखित में से कौन-सी आकृति आकार लेती है?

  1. A.जलज गर्तिका
  2. B.तटबंध
  3. C.चापझील
  4. D.कछार
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. चापझील

व्याख्या

सही उत्तर है C, चापझील। जब नदी किसी मोड़ की पतली गर्दन काटकर सीधा रास्ता बना लेती है और गाद दोनों सिरे बंद कर देती है, तो पुराना मोड़ एक घुमावदार झील के रूप में छूट जाता है। विसर्प यानी मिएंडर नदी के मध्य और निचले मार्ग में बनते हैं, जहाँ नदी समतल भूमि पर धीरे बहती है, बाहरी किनारे को काटती है और भीतरी किनारे पर जमाव करती है। छूटा हुआ मोड़ बैल के जुए के U आकार जैसा होता है, इसलिए इसे अंग्रेज़ी में ऑक्सबो लेक कहते हैं; बिहार की कावर झील (काबर ताल) बूढ़ी गंडक के ऐसे ही मोड़ से बनी है। विकल्प A गलत है, क्योंकि जलज गर्तिका (पॉटहोल) ऊपरी मार्ग की तेज़ धारा में घूमते कंकड़ों से चट्टानी तल में बने गोल गड्ढे हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि तटबंध (लेवी) बाढ़ के समय किनारों पर जमी गाद से बने ऊँचे किनारे हैं। विकल्प D गलत है, क्योंकि कछार बार-बार की बाढ़ से बना चौड़ा समतल मैदान है, कटा हुआ मोड़ नहीं। परीक्षा टिप: विसर्प और उसका कटाव मिलकर चापझील बनाते हैं, जो नदी की वृद्धावस्था की पहचान है।

Q168.भूगोलपूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 18 Aug 2019मध्यम

उत्तर से दक्षिण की ओर हिमालयी पर्वत श्रेणियों (रेंज) का सही अनुक्रम निम्नलिखित में से कौन सा है?

  1. A.काराकोरम, लद्दाख, जास्कर, पीर पंजाल, शिवालिक
  2. B.लद्दाख, जास्कर, पीर पंजाल, काराकोरम, शिवालिक
  3. C.पीर पंजाल, जास्कर, काराकोरम, लद्दाख, शिवालिक
  4. D.शिवालिक, जास्कर, पीर पंजाल, लद्दाख, काराकोरम
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. काराकोरम, लद्दाख, जास्कर, पीर पंजाल, शिवालिक

व्याख्या

सही उत्तर है A, काराकोरम, लद्दाख, जास्कर, पीर पंजाल, शिवालिक। लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में पर्वत श्रेणियाँ उत्तर की ऊँचाइयों से दक्षिण की निचली तलहटी तक सीढ़ी की तरह उतरती हैं। काराकोरम सबसे उत्तरी श्रेणी है, जिसमें भारत की सबसे ऊँची चोटी K2 (8,611 मीटर) और सियाचिन हिमनद हैं। इसके दक्षिण में लद्दाख श्रेणी है और सिंधु नदी लद्दाख व जास्कर श्रेणियों के बीच की घाटी में बहती है। और दक्षिण में लघु हिमालय की पीर पंजाल श्रेणी है, जिसमें बनिहाल और रोहतांग दर्रे हैं और रोहतांग के नीचे अटल सुरंग बनी है। शिवालिक सबसे निचली और सबसे नई बाहरी श्रेणी है। विकल्प B गलत है, क्योंकि इसमें काराकोरम को चौथे स्थान पर रखा गया है, जबकि वह सबसे उत्तर में है। विकल्प C गलत है, क्योंकि यह दक्षिणी श्रेणी पीर पंजाल से शुरू होता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि इसमें पूरा क्रम उलटा, दक्षिण से उत्तर की ओर दिया गया है। परीक्षा टिप: उत्तर से "K-L-Z-P-S": काराकोरम, लद्दाख, जास्कर, पीर पंजाल, शिवालिक।

Q169.भूगोलपूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 18 Aug 2019मध्यम

बंगाल की खाड़ी में उत्तर से दक्षिण की ओर अवस्थितियों का सही अनुक्रम निम्नलिखित में से कौन सा है?

  1. A.मन्नार की खाड़ी – पाल्क जलडमरूमध्य – पाल्क खाड़ी
  2. B.पाल्क जलडमरूमध्य – मन्नार की खाड़ी – पाल्क खाड़ी
  3. C.पाल्क जलडमरूमध्य – पाल्क खाड़ी – मन्नार की खाड़ी
  4. D.पाल्क खाड़ी – पाल्क जलडमरूमध्य – मन्नार की खाड़ी
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. पाल्क जलडमरूमध्य – पाल्क खाड़ी – मन्नार की खाड़ी

व्याख्या

सही उत्तर है C, पाल्क जलडमरूमध्य – पाल्क खाड़ी – मन्नार की खाड़ी। तमिलनाडु और श्रीलंका के बीच दक्षिण की ओर बढ़ें तो पहले जलडमरूमध्य, फिर पाल्क खाड़ी और अंत में मन्नार की खाड़ी आती है। पाल्क जलडमरूमध्य उत्तर का वह संकरा जलमार्ग है जो तमिलनाडु के प्वाइंट कैलिमेर और श्रीलंका के जाफना प्रायद्वीप के बीच बंगाल की खाड़ी को पाल्क खाड़ी से जोड़ता है। पाल्क खाड़ी इसके ठीक दक्षिण में उथला जल क्षेत्र है। दक्षिण में इसे पंबन (रामेश्वरम) द्वीप, एडम्स ब्रिज (राम सेतु) और मन्नार द्वीप की कड़ी बंद करती है और इसके पार मन्नार की खाड़ी है, जो हिंद महासागर में खुलती है और प्रवाल भित्तियों व डुगोंग के लिए प्रसिद्ध समुद्री जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र है। विकल्प A गलत है, क्योंकि यह सबसे दक्षिणी मन्नार की खाड़ी से शुरू होता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि इसमें मन्नार की खाड़ी को पाल्क खाड़ी के ऊपर रखा गया है। विकल्प D गलत है, क्योंकि पाल्क खाड़ी पाल्क जलडमरूमध्य के दक्षिण में है, उत्तर में नहीं। परीक्षा टिप: उत्तर से दक्षिण, जलडमरूमध्य, खाड़ी, एडम्स ब्रिज और फिर मन्नार की खाड़ी।

Q170.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 8 Aug 2021मध्यम

दक्कन सल्तनत और उनके संबंधित क्षेत्र के निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही रूप से सुमेलित नहीं है?

  1. A.निजाम शाही : बीजापुर
  2. B.बरीद शाही : बीदर
  3. C.कुतुब शाही : गोलकुंडा
  4. D.इमाद शाही : बरार
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. निजाम शाही : बीजापुर

व्याख्या

सही उत्तर है A, निजाम शाही : बीजापुर। निजाम शाही वंश अहमदनगर से शासन करता था; बीजापुर आदिल शाही वंश का था। 1347 में अलाउद्दीन हसन बहमन शाह द्वारा स्थापित बहमनी सल्तनत 15वीं सदी के अंत और 16वीं सदी की शुरुआत में पाँच दक्कन सल्तनतों में टूट गई: अहमदनगर, बीजापुर, गोलकुंडा, बीदर और बरार। इनमें से चार ने मिलकर 1565 के तालीकोटा युद्ध में विजयनगर को हराया, जबकि बरार इसमें शामिल नहीं था। हर वंश का नाम उसके संस्थापक की उपाधि पर है, इसलिए जोड़ियाँ याद रखना आसान है। विकल्प B सही सुमेलित है, क्योंकि बरीद शाही वंश ने बहमनी की अंतिम राजधानी बीदर पर राज किया। विकल्प C सही सुमेलित है, क्योंकि कुतुब शाही वंश गोलकुंडा का था, जो अपने किले और हीरों के व्यापार के लिए प्रसिद्ध है। विकल्प D सही सुमेलित है, क्योंकि इमाद शाही वंश बरार का था, जिसे 1574 में अहमदनगर ने अपने में मिला लिया। परीक्षा टिप: निजाम शाही अहमदनगर, आदिल शाही बीजापुर, कुतुब शाही गोलकुंडा, बरीद शाही बीदर, इमाद शाही बरार।

Q171.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 18 Aug 2019मध्यम

निम्नलिखित घटनाओं पर विचार कीजिए :

1. रामकृष्ण मिशन की स्थापना

2. आर्य समाज की स्थापना

3. ब्रह्म समाज की स्थापना

4. परमहंस मंडली की स्थापना

उपर्युक्त का सही कालानुक्रमिक क्रम निम्नलिखित में से कौन सा है?

  1. A.1, 2, 3, 4
  2. B.2, 3, 4, 1
  3. C.3, 4, 1, 2
  4. D.3, 4, 2, 1
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 3, 4, 2, 1

व्याख्या

सही उत्तर है D, 3, 4, 2, 1। इन चारों की तिथियाँ क्रम से 1828, 1849, 1875 और 1897 हैं। राजा राममोहन राय ने 1828 में कलकत्ता में ब्रह्म सभा बनाई, जो आगे चलकर ब्रह्म समाज कहलाई। परमहंस मंडली 1849 में बंबई में बनी, जो जाति-बंधन और मूर्तिपूजा का विरोध करने वाली एक गुप्त संस्था थी। स्वामी दयानंद सरस्वती ने 1875 में बंबई में आर्य समाज की स्थापना की और "वेदों की ओर लौटो" का नारा दिया। स्वामी विवेकानंद ने 1893 की शिकागो धर्म संसद से लौटने के बाद 1897 में रामकृष्ण मिशन बनाया। विकल्प A गलत है, क्योंकि इसमें चारों में सबसे बाद वाला रामकृष्ण मिशन सबसे पहले रखा गया है। विकल्प B गलत है, क्योंकि इसमें 1875 का आर्य समाज 1828 के ब्रह्म समाज से पहले रखा गया है। विकल्प C गलत है, क्योंकि इसमें 1897 का रामकृष्ण मिशन 1875 के आर्य समाज से पहले आ गया है। परीक्षा टिप: ब्रह्म समाज 1828, परमहंस मंडली 1849, आर्य समाज 1875, रामकृष्ण मिशन 1897।

Q172.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 18 Aug 2019आसान

निम्नलिखित में से कौन, काकोरी षडयंत्र केस (मुकदमा) से संबंधित नहीं था?

  1. A.रामप्रसाद बिस्मिल
  2. B.राजेंद्र लाहिड़ी
  3. C.अशफाक उल्लाह खाँ
  4. D.सूर्य सेन
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. सूर्य सेन

व्याख्या

सही उत्तर है D, सूर्य सेन। सूर्य सेन ने 1930 में बंगाल में चटगाँव शस्त्रागार छापे का नेतृत्व किया था, काकोरी केस से उनका कोई संबंध नहीं था। काकोरी ट्रेन एक्शन 9 अगस्त 1925 को हुआ, जब हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) के सदस्यों ने लखनऊ के पास काकोरी में एक ट्रेन रोककर उसमें ले जाया जा रहा सरकारी खज़ाना संघर्ष के लिए ले लिया। इसके बाद चले मुकदमे में चार क्रांतिकारियों को फाँसी की सज़ा हुई और चारों को दिसंबर 1927 में फाँसी दी गई। विकल्प A गलत है, क्योंकि रामप्रसाद बिस्मिल ने यह योजना बनाई थी और उन्हें गोरखपुर में फाँसी दी गई। विकल्प B गलत है, क्योंकि राजेंद्र लाहिड़ी इसमें शामिल थे और उन्हें बाकी साथियों से दो दिन पहले गोंडा में फाँसी दी गई। विकल्प C गलत है, क्योंकि बिस्मिल के घनिष्ठ मित्र अशफाक उल्लाह खाँ को फ़ैज़ाबाद में फाँसी हुई; चौथे शहीद रोशन सिंह थे। चंद्रशेखर आज़ाद भी इसमें शामिल थे, पर पकड़े नहीं गए। परीक्षा टिप: काकोरी 1925 और HRA; चटगाँव 1930 और सूर्य सेन।

Q173.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 18 Aug 2019मध्यम

सूफ़ी कृति कश्फ़-अल-महजूब का लेखक कौन था?

  1. A.अबुल हसन अल हुजविरी
  2. B.मोइनुद्दीन चिश्ती
  3. C.शेख निज़ामुद्दीन औलिया
  4. D.अमीर खुसरो
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. अबुल हसन अल हुजविरी

व्याख्या

सही उत्तर है A, अबुल हसन अल हुजविरी। उन्होंने 11वीं सदी में लाहौर में कश्फ़-अल-महजूब लिखी, जो सूफ़ीवाद पर फ़ारसी का सबसे पुराना ग्रंथ है। अल हुजविरी अफ़गानिस्तान के गज़नी से आकर लाहौर में बस गए थे। पुस्तक के नाम का अर्थ है "पर्दे में छिपे का अनावरण", और इसमें सूफ़ी विचार, साधना और पहले के संतों का जीवन आम पाठकों के लिए समझाया गया है। लाहौर में उनकी दरगाह दाता दरबार आज भी दक्षिण एशिया की सबसे व्यस्त दरगाहों में है और लोग उन्हें दाता गंज बख्श यानी "खज़ाने बाँटने वाला" कहते हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि मोइनुद्दीन चिश्ती ने 12वीं सदी के अंत में अजमेर में भारत में चिश्ती सिलसिला स्थापित किया, यह ग्रंथ उनका नहीं है। विकल्प C गलत है, क्योंकि निज़ामुद्दीन औलिया की बातें अमीर हसन सिज़्ज़ी ने फ़वाइद-उल-फ़ुआद में दर्ज कीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि अमीर खुसरो कवि और संगीतज्ञ थे, जिनकी रचनाएँ ख़ज़ाइन-उल-फ़ुतूह और तुगलकनामा हैं। परीक्षा टिप: कश्फ़-अल-महजूब लाहौर के हुजविरी की; फ़वाइद-उल-फ़ुआद में निज़ामुद्दीन औलिया की बातें।

Q174.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 3 Aug 2025कठिन

सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :

सूची-I (ब्रिटिश संसद का अधिनियम)

A. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784

B. चार्टर एक्ट, 1813

C. चार्टर एक्ट, 1833

D. चार्टर एक्ट, 1853

सूची-II (प्रमुख प्रावधान)

1. गवर्नर-जनरल की विधान परिषद का विस्तार

2. रोज़गार और उच्च सेवाओं में भारतीयों के साथ भेदभाव की समाप्ति

3. भारत के मामलों पर नियंत्रण के लिए क्राउन द्वारा बोर्ड की स्थापना

4. भारतीय व्यापार पर ईस्ट इंडिया कंपनी के एकाधिकार की समाप्ति

कूट :

  1. A.A-1, B-4, C-2, D-3
  2. B.A-1, B-2, C-4, D-3
  3. C.A-3, B-4, C-2, D-1
  4. D.A-3, B-2, C-4, D-1
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. A-3, B-4, C-2, D-1

व्याख्या

सही उत्तर है C, A-3, B-4, C-2, D-1। अधिनियमों को क्रम से पढ़ें तो हर एक कंपनी पर क्राउन के नियंत्रण का नया कदम है। पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 ने कंपनी के नागरिक, सैन्य और राजस्व मामलों की निगरानी के लिए बोर्ड ऑफ कंट्रोल बनाया। चार्टर एक्ट, 1813 ने भारतीय व्यापार पर कंपनी का एकाधिकार खत्म किया, केवल चाय और चीन के साथ व्यापार उसके पास रहा। चार्टर एक्ट, 1833 ने बंगाल के गवर्नर-जनरल को भारत का गवर्नर-जनरल बनाया और कहा कि धर्म, जन्म या रंग के आधार पर किसी भारतीय को पद से वंचित नहीं किया जाएगा। चार्टर एक्ट, 1853 ने विधायी और कार्यकारी काम अलग किए और कानून बनाने के लिए गवर्नर-जनरल की परिषद का विस्तार किया। विकल्प A गलत है, क्योंकि 1784 का संबंध बोर्ड ऑफ कंट्रोल से है, परिषद के विस्तार से नहीं। विकल्प B गलत है, क्योंकि इसमें 1813 और 1833 के प्रावधान आपस में बदल दिए गए हैं। विकल्प D गलत है, क्योंकि इसमें भी 1813 और 1833 की वही अदला-बदली है। परीक्षा टिप: 1784 बोर्ड ऑफ कंट्रोल, 1813 एकाधिकार खत्म, 1833 भारतीयों पर रोक नहीं, 1853 बड़ी विधान परिषद।

Q175.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 3 Aug 2025कठिन

भारत सरकार अधिनियम, 1919 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

1. इसने प्रशासन के विषयों को दो श्रेणियों, केंद्रीय और प्रांतीय, में बाँटा।

2. केंद्रीय विषयों को 'आरक्षित' और 'हस्तांतरित' विषयों में बाँटा गया।

3. प्रांतीय सरकारों को अपना बजट बनाने और कर लगाने की शक्ति दी गई।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  1. A.केवल 1 और 2
  2. B.केवल 2 और 3
  3. C.केवल 1 और 3
  4. D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. केवल 1 और 3

व्याख्या

सही उत्तर है C, केवल 1 और 3। अधिनियम ने विषयों को केंद्र और प्रांतों में बाँटा, पर आरक्षित और हस्तांतरित का बँटवारा केवल प्रांतीय विषयों पर लागू था। भारत सरकार अधिनियम, 1919 ने मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों को कानून का रूप दिया। हस्तांतरण नियमों के ज़रिए इसने केंद्रीय और प्रांतीय विषय अलग किए और पहली बार प्रांतीय बजट को केंद्रीय बजट से अलग किया, जिससे प्रांतों को अपने राजस्व स्रोत और अपना बजट पारित करने का अधिकार मिला। प्रांतों में द्वैध शासन लागू हुआ: शिक्षा और स्थानीय स्वशासन जैसे हस्तांतरित विषय विधानमंडल के प्रति उत्तरदायी मंत्रियों को मिले, जबकि पुलिस और भू-राजस्व जैसे आरक्षित विषय गवर्नर और उसकी कार्यकारी परिषद के पास रहे। कथन 2 गलत है, क्योंकि केंद्रीय विषयों का ऐसा बँटवारा कभी नहीं हुआ; केंद्र में द्वैध शासन 1935 के अधिनियम में प्रस्तावित हुआ और वह भी लागू नहीं हो पाया। इसलिए विकल्प A, B और D गलत हैं, क्योंकि तीनों में कथन 2 है। परीक्षा टिप: 1919 अधिनियम, प्रांतों में द्वैध शासन; 1935 अधिनियम, केंद्र में द्वैध शासन का प्रस्ताव।

Q176.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 8 Aug 2021मध्यम

भारत के राष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए निर्वाचकगण (इलेक्टोरल कॉलेज) में निम्नलिखित में से कौन शामिल नहीं है?

1. राज्य सभा के सभी निर्वाचित सदस्य

2. राज्यों की विधान-सभाओं के सभी निर्वाचित सदस्य

3. राज्यों की विधान परिषद् के सभी सदस्य

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

  1. A.1 और 2
  2. B.2 और 3
  3. C.केवल 3
  4. D.केवल 2
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. केवल 3

व्याख्या

सही उत्तर है C, केवल 3। राज्यों की विधान परिषदों के सदस्य राष्ट्रपति चुनाव में मत नहीं देते। अनुच्छेद 54 के अनुसार राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचकगण करता है, जिसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य और राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य होते हैं। 70वें संशोधन अधिनियम, 1992 ने दिल्ली और पुडुचेरी की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों को भी इसमें जोड़ा। मतदान एकल संक्रमणीय मत द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति से होता है और मतपत्र गुप्त रहता है। किसी भी सदन के मनोनीत सदस्य और विधान परिषदों के सभी सदस्य इससे बाहर रहते हैं, हालाँकि मनोनीत सांसद उपराष्ट्रपति के चुनाव में मत देते हैं। विकल्प A और D गलत हैं, क्योंकि राज्य सभा और राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य दोनों ही निर्वाचकगण में शामिल हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि इसमें विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों को भी बाहर बताया गया है, जबकि कुल मत-मूल्य का लगभग आधा उन्हीं का होता है। परीक्षा टिप: राष्ट्रपति के लिए केवल संसद और विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य; विधान परिषद और मनोनीत सदस्य कभी नहीं।

Q177.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 18 Aug 2019मध्यम

भारत के महान्यायवादी के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?

  1. A.महान्यायवादी को संसद के सदनों में बोलने का अधिकार होगा
  2. B.महान्यायवादी को अपने कार्यालयीन कर्तव्यों के पालन में भारत के राज्यक्षेत्र में सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार होगा
  3. C.उस में वही अर्हताएं होनी चाहिएं जो उच्चतम न्यायालय का एक न्यायाधीश बनने के लिए आवश्यक होती हैं
  4. D.वह सरकार के लिए एक पूर्णकालिक परामर्शदाता (काउंसेल) है
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. वह सरकार के लिए एक पूर्णकालिक परामर्शदाता (काउंसेल) है

व्याख्या

सही उत्तर है D, वह सरकार के लिए एक पूर्णकालिक परामर्शदाता (काउंसेल) है। महान्यायवादी पूर्णकालिक सरकारी वकील नहीं होता और निजी वकालत भी कर सकता है। उसकी नियुक्ति राष्ट्रपति अनुच्छेद 76 के तहत करते हैं और वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर रहता है; संविधान में उसका कार्यकाल तय नहीं है। वह देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी है, पर केंद्रीय मंत्रिमंडल का सदस्य नहीं होता। पूर्णकालिक न होने के कारण उस पर केवल इतनी रोक है कि वह भारत सरकार के विरुद्ध सलाह या पैरवी न करे। कथन A सही है, क्योंकि अनुच्छेद 88 उसे संसद के दोनों सदनों में बोलने और कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार देता है, पर मत देने का नहीं। कथन B सही है, क्योंकि अनुच्छेद 76(3) उसे भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार देता है। कथन C सही है, क्योंकि अनुच्छेद 76(1) के अनुसार उसमें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जैसी योग्यता होनी चाहिए। परीक्षा टिप: अनुच्छेद 76 से पद, अनुच्छेद 88 से संसद में बोलने का अधिकार, पर वहाँ मताधिकार कभी नहीं।

Q178.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 18 Aug 2019आसान

"ऐसे उदात्त विचारों की कदर करना और अनुसरण करना जिन से स्वतंत्रता का हमारा राष्ट्रीय संघर्ष प्रेरित हुआ", भारत के संविधान के निम्नलिखित में से किस अंश का उपबंध है?

  1. A.राज्य की नीति के निदेशक तत्व
  2. B.मूल कर्तव्य
  3. C.मूल अधिकार
  4. D.उद्देशिका
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मूल कर्तव्य

व्याख्या

सही उत्तर है B, मूल कर्तव्य। ये शब्द अनुच्छेद 51क के खंड (ख) के हैं, जिसमें हर नागरिक के कर्तव्य गिनाए गए हैं। मूल कर्तव्य 42वें संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर भाग 4क के रूप में जोड़े गए और यह विचार पूर्व सोवियत संघ के संविधान से लिया गया। शुरू में दस कर्तव्य थे; 86वें संशोधन अधिनियम, 2002 ने ग्यारहवाँ कर्तव्य जोड़ा, जिसमें माता-पिता को 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अवसर देना है। खंड (क) संविधान, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान के आदर की बात करता है और खंड (ख) इस प्रश्न वाली पंक्ति है। विकल्प A गलत है, क्योंकि भाग 4 के निदेशक तत्व राज्य के लिए निर्देश हैं, नागरिकों के कर्तव्य नहीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि भाग 3 के मूल अधिकार नागरिक अदालत में लागू करा सकता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि उद्देशिका न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता के आदर्श बताती है, कर्तव्य नहीं गिनाती। परीक्षा टिप: अनुच्छेद 51क, भाग 4क, 42वाँ संशोधन 1976, आज कुल ग्यारह कर्तव्य।

Q179.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 3 Aug 2025कठिन

भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की शक्तियों और कर्तव्यों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

1. वह भारत की संचित निधि से होने वाले सभी व्ययों की लेखापरीक्षा करता है और उन पर प्रतिवेदन देता है।

2. वह भारत की संचित निधि से धन के निर्गमन और प्राप्ति पर नियंत्रण रखता है।

3. वह संघ या राज्य के राजस्व से पर्याप्त रूप से वित्तपोषित सभी निकायों के व्यय की लेखापरीक्षा करता है और उन पर प्रतिवेदन देता है।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  1. A.केवल 1 और 2
  2. B.केवल 2 और 3
  3. C.केवल 1 और 3
  4. D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. केवल 1 और 3

व्याख्या

सही उत्तर है C, केवल 1 और 3। भारत का CAG लेखापरीक्षक है, जो खर्च हो जाने के बाद उसकी जाँच करता है; खज़ाने से पैसा निकलने पर उसका कोई नियंत्रण नहीं होता। उसकी नियुक्ति राष्ट्रपति अनुच्छेद 148 के तहत करते हैं और उसके कर्तव्य CAG (कर्तव्य, शक्तियाँ और सेवा शर्तें) अधिनियम, 1971 में तय हैं। वह भारत और हर राज्य की संचित निधि से होने वाले सभी खर्चों की जाँच करता है, साथ ही संघ या राज्य के राजस्व से पर्याप्त रूप से वित्तपोषित निकायों के खातों की भी। संघ के खातों पर उसकी रिपोर्ट अनुच्छेद 151 के तहत राष्ट्रपति को जाती है, जो उसे संसद के सामने रखवाते हैं और लोक लेखा समिति उसकी जाँच करती है। कथन 2 गलत है, क्योंकि संचित निधि से पैसा विनियोग अधिनियम के तहत कार्यपालिका निकालती है और ब्रिटेन के CAG के विपरीत भारत का CAG इसके निर्गमन को नियंत्रित नहीं करता। इसलिए विकल्प A, B और D गलत हैं, क्योंकि तीनों में कथन 2 शामिल है। परीक्षा टिप: भारत का CAG नियंत्रक कम और महालेखापरीक्षक ज़्यादा है; वह जाँच करता है, पैसा जारी नहीं करता।

Q180.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 3 Aug 2025मध्यम

निम्नलिखित में से उस सही विकल्प को पहचानिए जो 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा भारत के संविधान के अनुच्छेद 74(1) में किए गए परिवर्तन को दर्शाता है।

  1. A.संघ की कार्यपालिका शक्ति भारत के राष्ट्रपति में निहित होगी।
  2. B.मंत्रिपरिषद के निर्णयों की जानकारी राष्ट्रपति को देना प्रधानमंत्री का कर्तव्य है।
  3. C.राष्ट्रपति अपने कृत्यों का प्रयोग प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद की सलाह पर करेगा।
  4. D.राष्ट्रपति को संसद के सदनों को आहूत करने या उनका सत्रावसान करने का अधिकार होगा।
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. राष्ट्रपति अपने कृत्यों का प्रयोग प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद की सलाह पर करेगा।

व्याख्या

सही उत्तर है C, राष्ट्रपति अपने कृत्यों का प्रयोग प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद की सलाह पर करेगा। 42वें संशोधन ने यह सलाह राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी बना दी। 1976 से पहले अनुच्छेद 74(1) केवल इतना कहता था कि राष्ट्रपति की सहायता और सलाह के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक मंत्रिपरिषद होगी। 42वें संशोधन अधिनियम, 1976 ने जोड़ा कि राष्ट्रपति "ऐसी सलाह के अनुसार कार्य करेगा"। बाद में 44वें संशोधन अधिनियम, 1978 ने राष्ट्रपति को सलाह एक बार पुनर्विचार के लिए लौटाने का अधिकार दिया, पर पुनर्विचार के बाद मिली सलाह माननी ही होती है। विकल्प A गलत है, क्योंकि कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होने की बात अनुच्छेद 53 में है, जिसे 42वें संशोधन ने नहीं छुआ। विकल्प B गलत है, क्योंकि राष्ट्रपति को जानकारी देते रहने का प्रधानमंत्री का कर्तव्य अनुच्छेद 78 में है। विकल्प D गलत है, क्योंकि सदनों को आहूत करना और सत्रावसान अनुच्छेद 85 का विषय है। परीक्षा टिप: 42वें संशोधन से सलाह बाध्यकारी हुई और 44वें संशोधन से एक बार पुनर्विचार का अवसर मिला।