हिंदुस्तानी संगीत के राग बिलावल के समान कर्नाटक संगीत का कौन-सा राग है?
- A.नट भैरवी
- B.कामवर्धिनी
- C.हनुमतोडी
- D.धीर शंकराभरणम्
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है D, धीर शंकराभरणम्। दोनों रागों में सातों स्वर शुद्ध रूप में लगते हैं, यानी इनका स्वर-ढाँचा एक ही है।
हिंदुस्तानी संगीत में पंडित वी. एन. भातखंडे की दस थाट वाली पद्धति में बिलावल को मूल थाट माना जाता है, जिसमें हर स्वर शुद्ध होता है। कर्नाटक संगीत की 72 मेलकर्ता पद्धति में धीर शंकराभरणम् 29वाँ मेलकर्ता राग है और इसमें ठीक यही स्वर लगते हैं। इसी कारण दोनों परंपराओं में इन्हें एक-दूसरे का समकक्ष माना जाता है। पाश्चात्य संगीत का मेजर स्केल भी इसी ढाँचे पर है।
A गलत है: नट भैरवी (20वाँ मेलकर्ता) में कोमल ग, ध और नि लगते हैं, जो आसावरी थाट से मेल खाता है।
B गलत है: कामवर्धिनी (51वाँ मेलकर्ता) में कोमल रे, ध और तीव्र म लगते हैं, जो पूर्वी थाट के निकट है।
C गलत है: हनुमतोडी (8वाँ मेलकर्ता) में कोमल रे, ग, ध, नि लगते हैं, जो भैरवी थाट जैसा है।
परीक्षा टिप: बिलावल = शंकराभरणम् (सभी शुद्ध स्वर); कल्याण = मेचकल्याणी; भैरवी थाट = हनुमतोडी।