यदि किसी सरल लोलक के दोलन का आयाम बहुत छोटा हो, तो उसका दोलन-काल 1. लोलक की लंबाई L पर निर्भर करता है 2. गुरुत्वीय त्वरण g पर निर्भर करता है 3. लोलक के गोलक के द्रव्यमान m पर निर्भर करता है 4. लोलक के आयाम A पर निर्भर नहीं करता नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- A.1, 2 और 3
- B.1, 2 और 4
- C.2, 3 और 4
- D.केवल 1 और 4
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है B, 1, 2 और 4। छोटे दोलनों के लिए दोलन-काल T = 2π√(L/g) होता है, जिसमें लंबाई और गुरुत्व हैं, पर न द्रव्यमान है न आयाम।
कथन 1 सही है: T लंबाई के वर्गमूल के साथ बढ़ता है, इसलिए चार गुना लंबा लोलक एक दोलन में दोगुना समय लेता है। कथन 2 सही है: g बढ़ने पर T घटता है, इसलिए पहाड़ पर या चंद्रमा पर, जहाँ g कम है, लोलक घड़ी धीमी चलती है। कथन 3 गलत है: सूत्र में गोलक का द्रव्यमान कट जाता है, इसलिए बराबर धागों पर भारी और हल्का गोलक साथ-साथ झूलते हैं। कथन 4 सही है: छोटे आयाम पर दोलन चौड़ा हो या संकरा, समय वही रहता है; गैलीलियो ने यही देखा था और लोलक घड़ियाँ इसी पर चलती हैं।
A गलत है: इसमें गलत कथन 3 है और कथन 4 छूट गया है।
C गलत है: इसमें गलत कथन 3 है और कथन 1 छूट गया है।
D गलत है: इसमें कथन 2 छूट गया है, जबकि g सूत्र में है।
परीक्षा टिप: T = 2π√(L/g); द्रव्यमान और (छोटे) आयाम से स्वतंत्र; सेकंड लोलक ≈ 1 मीटर लंबा, T = 2 सेकंड।